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  • रोहित शेट्टी के शो 'खतरों के खिलाड़ी 15' की रिलीज डेट टली, अब इस नई तारीख से शुरू होगा डर का सफर

    रोहित शेट्टी के शो 'खतरों के खिलाड़ी 15' की रिलीज डेट टली, अब इस नई तारीख से शुरू होगा डर का सफर


    नई दिल्ली ।
    टेलीविजन के सबसे चर्चित और रोमांचक स्टंट बेस्ड रियलिटी शो ‘खतरों के खिलाड़ी 15’ का बेसब्री से इंतजार कर रहे दर्शकों को बड़ा झटका लगा है। मशहूर फिल्म निर्देशक रोहित शेट्टी के इस शो की रिलीज डेट को ऐन वक्त पर आगे बढ़ा दिया गया है। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार यह रियलिटी शो इसी महीने 25 जुलाई से ऑन-एयर होने वाला था, लेकिन कुछ तकनीकी और प्रशासनिक कारणों के चलते मेकर्स ने इसे पोस्टपोन करने का फैसला लिया है। अब यह शो अगस्त के पहले हफ्ते से दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए टेलीविजन स्क्रीन पर दस्तक देगा। इस अचानक हुए बदलाव की वजह से फैंस को अपने पसंदीदा सितारों को हैरतअंगेज स्टंट करते देखने के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा।

    शो की रिलीज डेट टलने के पीछे मुख्य वजह देश में चल रहा ‘टीआरपी ब्लैकआउट’ बताया जा रहा है। दरअसल, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल को कड़े निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक जब तक टीवी चैनल्स और शोज को नया लाइसेंस प्राप्त नहीं हो जाता और वे नई टेलीविजन रेटिंग्स पॉलिसी 2026 के सभी नियमों का पूरी तरह पालन नहीं करने लगते, तब तक शोज की टीआरपी रेटिंग्स सार्वजनिक नहीं की जाएंगी। इस प्रशासनिक गतिरोध और तकनीकी बदलाव के कारण ही चैनल और मेकर्स ने शो की लॉन्चिंग को कुछ दिनों के लिए टालना ही बेहतर समझा।

    चैनल की ओर से जारी किए गए नए आधिकारिक प्रोमो के साथ अब शो की नई रिलीज डेट का भी ऐलान कर दिया गया है। ‘खतरों के खिलाड़ी 15’ अब 1 अगस्त से हर शनिवार और रविवार रात 9 बजे प्रसारित किया जाएगा। नए प्रोमो को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए मेकर्स ने कैप्शन में लिखा है कि ‘लगेगी जान की बाजी, क्योंकि शुरू हो रहा है डर का नया दौर।’ इस नए प्रोमो के सामने आने के बाद दर्शकों के बीच शो को लेकर उत्साह और ज्यादा बढ़ गया है। यह शो इस बार कलर्स टीवी के साथ-साथ ओटीटी प्लेटफॉर्म जियो हॉटस्टार पर भी स्ट्रीम किया जाएगा।

    मध्य प्रदेश। इस बीच शो से जुड़ी एक राहत भरी खबर यह है कि ‘खतरों के खिलाड़ी 15’ की पूरी शूटिंग सफलता के साथ पूरी हो चुकी है। इस बार रोमानिया की खूबसूरत और खतरनाक लोकेशंस पर कंटेस्टेंट्स ने रोहित शेट्टी के कड़े इम्तिहानों का सामना किया है। इस सीजन की सबसे खास बात यह है कि इसमें कुछ बिल्कुल नए चेहरों के साथ-साथ शो के इतिहास के कुछ बेहद मजबूत पुराने कंटेस्टेंट्स की भी वापसी कराई गई है। नए और पुराने खिलाड़ियों के बीच होने वाली यह सीधी टक्कर इस सीजन को बेहद दिलचस्प और चुनौतीपूर्ण बनाने वाली है।

    इस साल डर का सामना करने वाले कन्फर्म कंटेस्टेंट्स की बात करें तो शो में गौरव खन्ना, इंटरनेट सेंसेशन ओरी, स्टैंडअप कॉमेडियन हर्ष गुजराल, अविका गौर, विशाल आदित्य सिंह, शगुन शर्मा, पूर्व विनर रुबीना दिलैक, जैस्मिन भसीन, फरहाना भट्ट, रितविक धनजानी, अविनाश मिश्रा और करण वाही जैसे बड़े नाम शामिल हैं। सभी कंटेस्टेंट्स अपना-अपना सफर पूरा करके भारत वापस लौट चुके हैं। सोशल मीडिया पर इन खिलाड़ियों के अनुभव और स्टंट्स को लेकर अभी से कई तरह की चर्चाएं और कयास लगाए जाने शुरू हो गए हैं।

    इंटरनेट पर लीक हुई कुछ शुरुआती रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि इस सीजन में अविनाश मिश्रा, फरहाना भट्ट और रितविक धनजानी ने अपने बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर टॉप 3 में जगह बना ली है, जबकि टीवी के मशहूर अभिनेता करण वाही चौथे नंबर पर रहे हैं। वहीं, कुछ दूसरी मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो फिनाले का मुख्य मुकाबला करण वाही और फरहाना भट्ट के बीच देखने को मिलेगा और यही दोनों इस सीजन के टॉप 2 कंटेस्टेंट्स बनकर उभरे हैं। हालांकि, इन दावों पर अभी तक मेकर्स या चैनल की तरफ से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

    पिछले सीजन की याद दिलाते हुए बताते चलें कि ‘खतरों के खिलाड़ी 14’ की ट्रॉफी अभिनेता करणवीर मेहरा ने अपने नाम की थी, जिन्होंने बाद में बिग बॉस के घर में भी अपनी जीत का परचम लहराया था। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि नई रेटिंग्स पॉलिसी के दौर में शुरू हो रहा यह नया सीजन दर्शकों की उम्मीदों पर कितना खरा उतरता है और इस बार रोहित शेट्टी के खतरनाक स्टंट्स को मात देकर कौन सा खिलाड़ी सीजन 15 का अल्टीमेट विनर बनता है।

  • नेशनल ग्रिड फेल होते ही ठहर गया पूरा देश, क्यूबा के ब्लैकआउट ने बताया बिजली संकट कैसे संचार, पानी, अस्पताल और अर्थव्यवस्था पर डालता है असर

    नेशनल ग्रिड फेल होते ही ठहर गया पूरा देश, क्यूबा के ब्लैकआउट ने बताया बिजली संकट कैसे संचार, पानी, अस्पताल और अर्थव्यवस्था पर डालता है असर

    नई दिल्ली । क्यूबा में एक बार फिर देशव्यापी बिजली संकट ने सामान्य जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। राष्ट्रीय बिजली ग्रिड ठप होने के बाद देश के अधिकांश हिस्सों में बिजली आपूर्ति रुक गई, जिससे संचार, परिवहन, जलापूर्ति, स्वास्थ्य सेवाओं और आर्थिक गतिविधियों पर व्यापक असर पड़ा। लगभग 96 लाख की आबादी वाले इस द्वीपीय देश में यह वर्ष के भीतर तीसरी बड़ी बिजली आपूर्ति बाधित होने की घटना मानी जा रही है। इस घटनाक्रम ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि किसी देश की ऊर्जा व्यवस्था बाधित होने पर आधुनिक जीवन का लगभग हर क्षेत्र प्रभावित हो सकता है।

    बिजली बंद होते ही सबसे पहले संचार सेवाओं पर असर दिखाई देता है। मोबाइल टावर और इंटरनेट नेटवर्क सीमित समय तक बैटरी या जनरेटर के सहारे चलते हैं, लेकिन लंबे समय तक बिजली नहीं रहने पर उनकी क्षमता समाप्त हो जाती है। इसके बाद मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाएं बाधित होने लगती हैं, जिससे लोगों के बीच संपर्क टूट जाता है। डिजिटल संचार पर निर्भर सरकारी और निजी सेवाओं के संचालन में भी कठिनाइयां बढ़ जाती हैं।

    बिजली संकट का दूसरा बड़ा प्रभाव परिवहन व्यवस्था पर पड़ता है। ट्रैफिक सिग्नल बंद होने से प्रमुख शहरों में यातायात अव्यवस्थित हो जाता है। बिजली आधारित रेल सेवाएं, मेट्रो और अन्य सार्वजनिक परिवहन प्रभावित होते हैं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। जिन क्षेत्रों में ईंधन की उपलब्धता पहले से सीमित हो, वहां परिवहन व्यवस्था और अधिक प्रभावित हो सकती है तथा आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी बाधित होने लगती है।

    राष्ट्रीय स्तर पर बिजली आपूर्ति रुकने का सीधा असर वित्तीय लेनदेन पर भी पड़ता है। एटीएम, डिजिटल भुगतान प्रणाली, कार्ड स्वाइप मशीनें और ऑनलाइन बैंकिंग सेवाएं प्रभावित होने से बाजार की गतिविधियां धीमी पड़ जाती हैं। जिन लोगों के पास नकद राशि उपलब्ध नहीं होती, उन्हें दैनिक जरूरत की वस्तुएं खरीदने में भी कठिनाई होती है। इससे स्थानीय व्यापार और खुदरा बाजारों पर भी व्यापक प्रभाव पड़ता है।

    जलापूर्ति व्यवस्था भी बिजली पर निर्भर होने के कारण गंभीर रूप से प्रभावित होती है। नगरों और महानगरों में पानी की आपूर्ति करने वाले पंप बंद हो जाते हैं, जिससे ऊंची इमारतों और आवासीय परिसरों में पानी का दबाव समाप्त हो जाता है। कुछ ही समय में पीने और घरेलू उपयोग के पानी की कमी महसूस होने लगती है। लंबे समय तक संकट बने रहने पर स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता भी चुनौती बन सकती है।

    स्वास्थ्य सेवाओं पर भी ऐसे संकट का गहरा प्रभाव पड़ता है। अस्पतालों में सीमित अवधि तक जनरेटर की सुविधा उपलब्ध रहती है, लेकिन लंबे समय तक बिजली नहीं रहने पर दवाओं और टीकों के कोल्ड स्टोरेज, चिकित्सा उपकरणों तथा नियमित उपचार सेवाओं पर असर पड़ सकता है। कई स्थानों पर गैर-आपातकालीन चिकित्सा प्रक्रियाओं को टालना पड़ सकता है, जिससे मरीजों की परेशानियां बढ़ जाती हैं।

    क्यूबा में बिजली संकट के पीछे पुराने बिजली संयंत्रों, ईंधन आपूर्ति की चुनौतियों और ऊर्जा अवसंरचना पर बढ़ते दबाव को प्रमुख कारणों में माना जा रहा है। लंबे समय से चल रही ऊर्जा संबंधी समस्याओं ने देश की बिजली व्यवस्था को कमजोर किया है। ताजा घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी देश के लिए मजबूत ऊर्जा अवसंरचना केवल विकास का आधार ही नहीं, बल्कि सामान्य जनजीवन, आर्थिक गतिविधियों और आवश्यक सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता भी है।

  • पाकिस्तान में तय समय पर ‘ब्लैकआउट’: रोज 2–2.5 घंटे कटेगी बिजली, जानें वजह और असर

    पाकिस्तान में तय समय पर ‘ब्लैकआउट’: रोज 2–2.5 घंटे कटेगी बिजली, जानें वजह और असर

    इस्लामाबाद। गंभीर ऊर्जा संकट से जूझ रहे पाकिस्तान ने अब देशभर
    में रोजाना 2 से 2.5 घंटे के “निर्धारित ब्लैकआउट” का फैसला किया है। सरकार का कहना है कि यह कदम पारंपरिक लोडशेडिंग नहीं, बल्कि बढ़ती बिजली लागत और पीक डिमांड को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया है।

    कब होगी बिजली कटौती?
    सरकार के मुताबिक, शाम 5 बजे से रात 1 बजे के बीच—यानी पीक आवर्स में—बिजली की मांग अचानक बढ़ जाती है। इसी दौरान अलग-अलग इलाकों में तय समय के हिसाब से 2–2.5 घंटे की कटौती की जाएगी। वितरण कंपनियों को पहले से सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं ताकि उपभोक्ताओं को अचानक परेशानी न हो।

    क्यों आया यह फैसला?
    ऊर्जा संकट के पीछे कई बड़े कारण बताए जा रहे हैं:

    जलविद्युत उत्पादन में कमी
    महंगे जीवाश्म ईंधन का दबाव
    ईरान-अमेरिका तनाव से बढ़ी वैश्विक ऊर्जा कीमतें
    गैस आपूर्ति में भारी कमी

    गैस संकट इतना गहरा है कि बिजली संयंत्रों को पर्याप्त ईंधन नहीं मिल पा रहा। कतर से LNG आयात पर अस्थायी रोक ने स्थिति और बिगाड़ दी है।

    सबसे ज्यादा असर पंजाब में
    पंजाब प्रांत में हालात सबसे खराब बताए जा रहे हैं।

    मुल्तान इलेक्ट्रिक पावर कंपनी (MEPCO) के इलाकों में 16 घंटे तक कटौती की शिकायत
    मुजफ्फरगढ़, खानेवाल जैसे जिलों में लंबी और अनियमित बिजली गुल
    लाहौर और फैसलाबाद जैसे शहरों में भी 3–4 घंटे कटौती

    ग्रामीण इलाकों में स्थिति और ज्यादा खराब बनी हुई है।

    उद्योग और कृषि पर असर
    रिपोर्ट्स के अनुसार, उर्वरक उद्योग को गैस आपूर्ति बंद कर दी गई है, जिससे कृषि क्षेत्र भी प्रभावित हो सकता है। सरकार का कहना है कि मई में गैस आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद है, जिससे कुछ राहत मिल सकती है।

    आर्थिक संकट से जुड़ा मामला
    पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक दबाव में है, और बढ़ती ईंधन कीमतों ने बिजली उत्पादन को और महंगा बना दिया है। ऐसे में यह “टारगेटेड ब्लैकआउट” सरकार के लिए लागत नियंत्रित करने का एक अस्थायी उपाय माना जा रहा है।

    बिजली संकट से निपटने के लिए उठाया गया यह कदम आम लोगों और उद्योगों दोनों के लिए चुनौती लेकर आया है। अब नजर इस बात पर है कि गैस आपूर्ति सुधरने और अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य होने के बाद हालात कितनी जल्दी बेहतर होते हैं।