Tag: Bleeding

  • हर बीमारी में घरेलू नुस्खे आजमाना पड़ सकता है भारी, सांस की परेशानी, बेहोशी और खून आने पर तुरंत डॉक्टर से लें सलाह

    हर बीमारी में घरेलू नुस्खे आजमाना पड़ सकता है भारी, सांस की परेशानी, बेहोशी और खून आने पर तुरंत डॉक्टर से लें सलाह

    नई दिल्ली ।  घरेलू उपचार सर्दी-खांसी, पेट दर्द जैसी आम समस्याओं में हम सभी अक्सर खुद से ही घरेलू उपचार करना शुरू कर देते हैं। खांसी में शहद, अदरक, हल्दी या काढ़े की सलाह दी जाती है। पेट खराब हुआ तो अजवाइन और गले में दर्द हुआ तो नमक के पानी से गरारे जैसे उपाय भारतीय घरों में लंबे समय से इस्तेमाल होते रहे हैं। वैसे तो कुछ समस्याओं में ये आराम देने वाले भी हो सकते हैं, लेकिन सबसे बड़ी गलती तब होती है जब घरेलू नुस्खे को हर बीमारी का इलाज समझ लिया जाता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार इस बात को लेकर अलर्ट करते रहे हैं कि हर आम दिखने वाली बीमारी में खुद से ही दवा या घरेलू उपचार नहीं शुरू कर देना चाहिए। सांस लेने में परेशानी, बेहोशी, भ्रम, बहुत तेज दर्द या अचानक बिगड़ती हालत को केवल घरेलू उपचार से ठीक करने की कोशिश आपके लिए बड़ी मुश्किलों का कारण बन सकती है।

    आइए समझते हैं कि किन समस्याओं में हमें घरेलू उपायों में फंसने की जगह समय रहते डॉक्टर के पास जाना जरूरी है?

    सांस की समस्या

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वायरल बुखार, हल्के पेट दर्द या गैस जैसी कभी-कभार होने वाली समस्याओं में कुछ उपाय लाभ दे सकते हैं। पर अगर लक्षण लंबे समय तक बने रहें या बार-बार वही समस्या हो रही है तो इसके कारणों का पता लगाने के लिए जांच कराना और समय रहते डॉक्टर की मदद लेना जरूरी हो जाता है।

    सांस लेने में परेशानी या सीने में दिक्कत

    सांस लेने में अचानक या गंभीर परेशानी को केवल भाप, अदरक की चाय या काढ़े से ठीक करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। सांस फूलना कई अलग-अलग स्थितियों का संकेत हो सकता है और कई बार ये गंभीर समस्याओं की ओर इशारा भी कर सकता है।

    अगर सांस लेने में कठिनाई हो रही है तो इसमें आपातकालीन मदद की जरूरत होती है। इसी तरह सीने में तेज और असामान्य दर्द, बेहोशी या हालत तेजी से बिगड़ने में भी घरेलू इलाज की जगह विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है।

    बेहोशी या बहुत ज्यादा कमजोरी

    अगर आपके आसपास या घर में कोई अचानक बेहोश हो जाए या अत्यधिक कमजोर महसूस करे तो इसे सामान्य थकान मानकर इग्नोर करना या खुद से कोई उपाय शुरू कर देना ठीक नहीं है।

    सांस लेने में परेशानी, दौरे पड़ना या त्वचा-होंठों के रंग में बदलाव जैसे संकेत गंभीर हो सकते हैं। कई बार हार्ट अटैक या शरीर में ऑक्सीजन की कमी में भी ऐसी दिक्कतें देखी जाती हैं। इन स्थितियों में तुरंत डॉक्टरी मदद की जरूरत होती है।

    बहुत तेज बुखार या लगातार बिगड़ते लक्षण

    हर बुखार में डॉक्टर के पास जाना जरूरी नहीं होता, लेकिन बहुत तेज बुखार, लगातार बिगड़ते लक्षण या कई दिनों तक सुधार न होने जैसी स्थिति में घरेलू उपचार करते रहना नुकसानदायक हो सकता है।

    दिल्ली-एनसीआर में इन दिनों स्वाइन फ्लू का खतरा देखा जा रहा है जिसमें होने वाला बुखार भी सामान्य लग सकता है। पर इसमें समय रहते डॉक्टरी सलाह जरूरी है। घरेलू उपाय कुछ लक्षणों में अस्थायी आराम दे सकते हैं, लेकिन अगर समय के साथ हालत सुधरने के बजाय बिगड़ रही हो तो विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है।

    खून की उल्टी या मल में खून

    शरीर से किसी भी तरह की ब्लीडिंग में सिर्फ खानपान या घरेलू उपचार के भरोसे बैठे रहना ठीक नहीं है। खून वाली उल्टी और मल में खून जैसे लक्षणों में तुरंत डॉक्टर की सलाह और जांच जरूरी है।

    लिवर या फेफड़ों की गंभीर बीमारियों में उल्टी के साथ खून आने की दिक्कत देखी जाती है। इसी तरह से डेंगू के गंभीर मामले में मल से खून आ सकता है। इन बीमारियों में समय रहते डॉक्टरी मदद जरूरी है। बिना कारण समझे घरेलू उपाय करते रहना स्थिति को और बिगाड़ सकता है।

  • डेंगू के बढ़ते खतरे के बीच बरतें सावधानी, तेज बुखार के साथ पेट दर्द, रक्तस्राव या सांस फूलने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें

    डेंगू के बढ़ते खतरे के बीच बरतें सावधानी, तेज बुखार के साथ पेट दर्द, रक्तस्राव या सांस फूलने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें

    नई दिल्ली । बारिश के मौसम में मच्छरों से होने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। जुलाई से अक्तूबर के बीच डेंगू और मलेरिया जैसे संक्रमण के मामले बढ़ने की आशंका रहती है। डेंगू की शुरुआत कई बार सामान्य वायरल बुखार जैसी ही दिखाई देती है, इसलिए मरीज और परिवार के लोग शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर में दर्द, कमजोरी, जी मिचलाना और उल्टी जैसी शिकायतें डेंगू में देखी जा सकती हैं। हालांकि केवल लक्षणों के आधार पर डेंगू की पुष्टि नहीं की जा सकती और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी होता है।

    डेंगू संक्रमित एडीज मच्छर के काटने से फैलता है। बारिश के बाद घरों और आसपास जमा साफ पानी मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर सकता है। ऐसे में पानी जमा होने वाली जगहों की नियमित सफाई और मच्छरों से बचाव के उपाय बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं। दिन के समय भी मच्छरों से बचने के लिए शरीर को ढककर रखना और आवश्यकता के अनुसार मच्छररोधी उपाय अपनाना उपयोगी हो सकता है।

    डेंगू के मरीज में कमजोरी और शरीर में दर्द होना आम लक्षण हो सकते हैं, लेकिन अगर कमजोरी अचानक बहुत ज्यादा बढ़ जाए और मरीज को उठने-बैठने में परेशानी होने लगे तो इसे सामान्य मानकर घर पर इंतजार नहीं करना चाहिए। अत्यधिक सुस्ती, बेचैनी या तेजी से बिगड़ती तबीयत भी चिकित्सकीय मदद लेने का संकेत हो सकती है।

    तेज बुखार के साथ पेट में गंभीर दर्द या पेट दबाने पर अधिक दर्द होना भी चिंता का कारण है। डेंगू के गंभीर मामलों में शरीर में तरल संतुलन और रक्तसंचार से जुड़ी जटिलताएं हो सकती हैं। इसलिए लगातार पेट दर्द या असामान्य बेचैनी होने पर डॉक्टर से तत्काल संपर्क करना जरूरी है।

    सांस सामान्य से बहुत तेज चलना या सांस लेने में परेशानी होना भी गंभीर संकेत माना जाता है। ऐसी स्थिति में मरीज को घर पर केवल सामान्य बुखार समझकर इलाज करते रहना उचित नहीं है। चिकित्सकीय जांच के बाद ही स्थिति की गंभीरता और आवश्यक उपचार तय किया जा सकता है।

    नाक या मसूड़ों से खून आना, उल्टी में खून दिखाई देना अथवा मल में रक्त आना भी डेंगू के गंभीर चेतावनी संकेतों में शामिल हो सकते हैं। बुखार के साथ इनमें से कोई लक्षण दिखाई दे तो तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। अत्यधिक रक्तस्राव गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है।

    डेंगू के इलाज में आमतौर पर लक्षणों को नियंत्रित करने, शरीर में पर्याप्त तरल बनाए रखने और जटिलताओं की निगरानी पर ध्यान दिया जाता है। बुखार या दर्द के लिए दवा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लेनी चाहिए। एस्पिरिन और आइबुप्रोफेन जैसी दवाओं का इस्तेमाल चिकित्सकीय सलाह के बिना नहीं करना चाहिए, क्योंकि कुछ परिस्थितियों में रक्तस्राव का खतरा बढ़ सकता है। तेज बुखार होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय डॉक्टर से परामर्श करना अधिक सुरक्षित है।

    बरसात में डेंगू से बचाव के लिए घर और आसपास पानी जमा न होने दें, कूलर, गमले, टंकियों और अन्य पात्रों की नियमित सफाई करें तथा मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाएं। बुखार आने पर पर्याप्त आराम और तरल पदार्थ लेना महत्वपूर्ण है, लेकिन गंभीर चेतावनी संकेत दिखाई देने पर घरेलू देखभाल तक सीमित रहना उचित नहीं है। समय पर चिकित्सकीय सलाह और आवश्यक जांच से स्थिति को गंभीर होने से रोकने में मदद मिल सकती है।