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  • कम उम्र में भी बढ़ रहा ब्लड क्लॉट का खतरा, पानी की कमी से लेकर मोटापा-धूम्रपान तक हो सकते हैं कारण; ऐसे रखें खून को स्वस्थ

    कम उम्र में भी बढ़ रहा ब्लड क्लॉट का खतरा, पानी की कमी से लेकर मोटापा-धूम्रपान तक हो सकते हैं कारण; ऐसे रखें खून को स्वस्थ


    नई दिल्ली । खून हमारे शरीर के हर हिस्से तक ऑक्सीजन और जरूरी पोषक तत्व पहुंचाने का काम करता है लेकिन जब रक्त का प्रवाह सामान्य से प्रभावित होने लगे या खून में थक्का बनने की प्रवृत्ति बढ़ जाए तो यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। आम बोलचाल में इसे खून गाढ़ा होना कहा जाता है। मेडिकल तौर पर कुछ स्थितियों में इसे हाइपरकोएगुलेबिलिटी या हाइपरविस्कॉसिटी से जोड़ा जाता है। हालांकि हर बार खून गाढ़ा होने का मतलब एक ही बीमारी नहीं होता और इसके पीछे अलग-अलग कारण हो सकते हैं।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक शरीर में पानी की कमी खून के तरल हिस्से को कम कर सकती है। इससे रक्त अधिक कंसंट्रेटेड दिखाई दे सकता है। इसके अलावा कुछ लोगों में लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या असामान्य रूप से बढ़ने पर भी रक्त अधिक गाढ़ा हो सकता है। एरिथ्रोसाइटोसिस जैसी स्थितियां इसके उदाहरण हैं। लंबे समय तक एक जगह बैठे रहना, शारीरिक गतिविधि की कमी, मोटापा और धूम्रपान भी ब्लड क्लॉट बनने के जोखिम को बढ़ाने वाले कारकों में शामिल हैं।

    कुछ परिस्थितियों में शरीर में खून के थक्के बनने की संभावना सामान्य से अधिक हो सकती है। सर्जरी के बाद लंबे समय तक आराम करना, गंभीर चोट, लंबी यात्रा या लगातार कई घंटे बैठे रहना ऐसे कारण हैं जिनमें विशेष सावधानी की जरूरत होती है। गर्भावस्था और प्रसव के आसपास का समय तथा कुछ हार्मोनल दवाएं भी कुछ लोगों में क्लॉटिंग के जोखिम को प्रभावित कर सकती हैं। इसके अलावा कुछ आनुवंशिक स्थितियों के कारण भी किसी व्यक्ति में ब्लड क्लॉट बनने की संभावना अधिक हो सकती है।

    खून में थक्का बनने की सबसे बड़ी चिंता यह है कि वह शरीर की नस या धमनी में रक्त के सामान्य प्रवाह को रोक सकता है। अगर पैर की किसी गहरी नस में थक्का बनता है तो इसे डीप वेन थ्रोम्बोसिस यानी डीवीटी कहा जाता है। इसमें आमतौर पर पैर में सूजन, दर्द या असहजता जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। स्थिति तब गंभीर हो सकती है जब यह थक्का टूटकर रक्त के साथ फेफड़ों तक पहुंच जाए। ऐसा होने पर पल्मोनरी एम्बोलिज्म जैसी जानलेवा स्थिति पैदा हो सकती है।

    इसी तरह यदि कोई थक्का मस्तिष्क तक जाने वाली रक्त वाहिका में रक्त प्रवाह को बाधित करता है तो स्ट्रोक का खतरा हो सकता है। इसलिए शरीर में अचानक दिखाई देने वाले कुछ लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पैर में अचानक सूजन या दर्द, सांस लेने में अचानक परेशानी, सीने में दर्द या स्ट्रोक जैसे लक्षण दिखने पर तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।

    ब्लड क्लॉट का खतरा केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं माना जाता। लंबे समय तक बैठे रहने वाले लोगों, बहुत कम शारीरिक गतिविधि करने वालों, मोटापे से जूझ रहे लोगों और धूम्रपान करने वालों में इसका जोखिम बढ़ सकता है। लंबी यात्रा करने वाले लोगों को भी लगातार कई घंटे एक ही स्थिति में बैठे रहने से बचना चाहिए। जिन लोगों में पहले ब्लड क्लॉट की समस्या हो चुकी है या परिवार में ऐसी समस्या का इतिहास रहा है उन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।

    बचाव के लिए सबसे जरूरी बात लंबे समय तक लगातार निष्क्रिय रहने से बचना है। यदि आपका काम कई घंटे बैठकर करने वाला है तो बीच-बीच में उठकर कुछ देर चलना और पैरों को सक्रिय रखना फायदेमंद हो सकता है। लंबी यात्रा के दौरान भी समय-समय पर चलने-फिरने की कोशिश करनी चाहिए। नियमित शारीरिक गतिविधि स्वस्थ वजन बनाए रखने और शरीर में रक्त संचार को बेहतर रखने में मदद कर सकती है।

    इसके साथ ही पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, धूम्रपान से दूरी बनाना और वजन को नियंत्रित रखना भी महत्वपूर्ण है। हालांकि केवल लक्षणों के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि किसी व्यक्ति का खून गाढ़ा है या नहीं। ऐसी स्थिति का कारण जानने के लिए डॉक्टर जांच की सलाह दे सकते हैं। इसलिए बिना चिकित्सकीय सलाह के ब्लड थिनर या कोई अन्य दवा लेना उचित नहीं है। अगर आपको ब्लड क्लॉट के लक्षण दिखाई दें या किसी कारण से इसका जोखिम अधिक हो तो समय पर डॉक्टर से संपर्क करना ही सबसे सुरक्षित कदम है।

  • हाथ-पैर का ठंडा रहना सिर्फ सामान्य नहीं, कई बीमारियों का संकेत हो सकता है

    हाथ-पैर का ठंडा रहना सिर्फ सामान्य नहीं, कई बीमारियों का संकेत हो सकता है


    नई दिल्ली| कई लोग अक्सर हाथ और पैरों के ठंडे या सुन्न रहने की समस्या को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह केवल मौसम या सामान्य बदलाव नहीं, बल्कि शरीर के अंदर चल रही कुछ समस्याओं का संकेत हो सकता है।
    डॉक्टरों के मुताबिक जब शरीर में रक्त संचार सही तरीके से नहीं होता है, तो हाथ और पैरों तक पर्याप्त मात्रा में रक्त नहीं पहुंच पाता। इस वजह से ये हिस्से ठंडे महसूस होने लगते हैं। रक्त का सही प्रवाह शरीर के तापमान को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाता है।
    इसके अलावा खराब पाचन भी इस समस्या का एक बड़ा कारण हो सकता है। जब शरीर को पूरी ऊर्जा और पोषण नहीं मिल पाता, तो इसका असर सबसे पहले हाथ-पैरों पर दिखाई देता है।
    तनाव और कमजोरी भी इस स्थिति को और बढ़ा सकते हैं। लगातार तनाव रहने से शरीर का संतुलन बिगड़ता है, जिससे नसों में रक्त प्रवाह प्रभावित होता है। लंबे समय तक यह समस्या बनी रहे तो यह गंभीर बीमारियों का रूप भी ले सकती है।
    विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार हाथ-पैर ठंडे रहने की स्थिति में रेनॉड्स डिजीज का खतरा हो सकता है, जिसमें रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं और रक्त प्रवाह बाधित हो जाता है। इससे हाथ-पैरों में दर्द, सुन्नपन और अन्य जटिल समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं।
    इसके साथ ही वैरिकोज वेन्स जैसी समस्याएं भी इस स्थिति से जुड़ी हो सकती हैं।
    स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इस समस्या से बचने के लिए नियमित रूप से हल्की एक्सरसाइज और पैदल चलना चाहिए, ताकि रक्त संचार बेहतर बना रहे। हाथ-पैरों की हल्की मालिश और गर्म रखने के उपाय भी राहत दे सकते हैं।
    इसके अलावा शरीर में आयरन और विटामिन की कमी भी एक प्रमुख कारण हो सकती है, इसलिए संतुलित और पौष्टिक आहार लेना बेहद जरूरी है।

  • रक्त संचार बेहतर कर भरपूर एनर्जी देता है वृश्चिकासन अभ्यास से मिलते हैं कई लाभ

    रक्त संचार बेहतर कर भरपूर एनर्जी देता है वृश्चिकासन अभ्यास से मिलते हैं कई लाभ


    नई दिल्ली । व्यस्त दिनचर्या और कार्य का बढ़ता तनाव शरीर के साथ-साथ मन को भी शीघ्र बीमारियों की चपेट में ले लेता है। इन समस्याओं से छुटकारा पाने का सबसे प्रभावी तरीका है योगासनों को दिनचर्या में शामिल करना। ऐसा ही एक बेहतरीन आसन है वृश्चिकासनजिसे स्कॉर्पियन पोज भी कहा जाता है। इस आसन के अभ्यास के दौरान शरीर बिच्छू की आकृति जैसा बन जाता है। इसके अभ्यास से शारीरिक मजबूतीलचीलापन और मानसिक शांति मिलती है।
    मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा के अनुसारवृश्चिकासन के रोजाना अभ्यास से शरीर को एक-दो नहींकई लाभ मिलते हैं। वृश्चिकासन या स्कॉर्पियन पोज एक इनवर्टेड बैकबेंड आसन हैजिसमें कोहनियों पर संतुलन बनाते हुए पैरों को सिर की ओर झुकाया जाता है। यह आसन कंधोंबाजुओंपीठ और कोर मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। योग एक्सपर्ट बताते हैं कि इससे रीढ़ की हड्डी का लचीलापन बढ़ता हैजिससे कमर दर्द और पीठ की समस्याओं में राहत मिलती है। साथ हीयह पेट की मांसपेशियों को खींचता हैपाचन तंत्र को बेहतर बनाता है और शरीर में ऊर्जा का संचार करता है। वृश्चिकासन एकाग्रता और संतुलन भी बढ़ाता है।

    यह मस्तिष्क में रक्त संचार सुधारता हैजिससे स्मरण शक्ति और फोकस बेहतर होता है। नियमित अभ्यास से तनाव कम होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है। यह आसन हृदय के लिए भी लाभकारी हैक्योंकि इनवर्टेड पोजिशन में रक्त प्रवाह संतुलित होता है। एक्सपर्ट बताते हैं कि इस आसन को करने के लिए सबसे पहले मयूरासन की स्थिति में आएं। कोहनियों को कंधों के नीचे रखें और हथेलियों से जमीन को पकड़ें। शरीर को ऊपर उठाते हुए पैरों को सीधा रखें। अब धीरे-धीरे रीढ़ को झुकाते हुए पैरों को सिर की ओर लाएंताकि पैरों की उंगलियां सिर को छूने की कोशिश करें।

    संतुलन बनाए रखें और गहरी सांस लें। शुरुआत में 10-20 सेकंड तक रुकेंफिर धीरे-धीरे समय बढ़ाएं। अभ्यास के बाद शवासन या बालासन में विश्राम करें। वृश्चिकासन उन्नत आसन हैइसलिए शुरुआती लोग योग प्रशिक्षक की देखरेख में ही करें। एक्सपर्ट बताते हैं कि कुछ सावधानियां जरूर बरतनी चाहिए। जैसे हाई ब्लड प्रेशरहृदय रोगचक्कर आने की समस्यागर्भावस्था या पीठ-कमर में चोट वाले लोग इसे न करें। वार्म-अप जरूर करेंजैसे डॉल्फिन पोज या प्लैंक। अगर गर्दन या कंधों में दर्द हो तो न करें। गलत तरीके से करने पर चोट लग सकती है।