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  • खून फैक्ट्री में नहीं बनता, इंसान ही बचाता है इंसान की जिंदगी: थैलेसीमिया पीड़ित वैभव बने रक्तदान जागरूकता की मिसाल

    खून फैक्ट्री में नहीं बनता, इंसान ही बचाता है इंसान की जिंदगी: थैलेसीमिया पीड़ित वैभव बने रक्तदान जागरूकता की मिसाल


    मध्यप्रदेश । विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर इंदौर के 29 वर्षीय वैभव सोनी की कहानी मानवता, संघर्ष और सेवा का ऐसा उदाहरण पेश करती है, जो हर किसी को प्रेरित कर सकती है। महज दो वर्ष की उम्र में उन्हें पता चला कि वे Thalassemia से पीड़ित हैं। डॉक्टरों ने परिवार को बताया कि उनकी जिंदगी नियमित रूप से खून चढ़ाने पर निर्भर रहेगी। तब से लेकर आज तक वैभव का जीवन रक्तदाताओं की संवेदनशीलता और समाज के सहयोग से आगे बढ़ रहा है।

    वर्तमान में वैभव को हर आठ से दस दिन में ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत पड़ती है। बचपन में यह अंतराल लगभग एक महीने का था, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ खून की आवश्यकता भी बढ़ती गई। अब तक उन्हें 400 से अधिक यूनिट रक्त चढ़ाया जा चुका है। लगातार रक्त चढ़ने के कारण शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे हृदय, लिवर और अन्य अंगों पर दुष्प्रभाव पड़ सकता है। इसे नियंत्रित करने के लिए उन्हें नियमित दवाइयों और इंजेक्शनों का सहारा लेना पड़ता है। उनके उपचार पर हर महीने लगभग 20 से 25 हजार रुपए खर्च होते हैं।

    हालांकि इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद वैभव ने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने बायोटेक्नोलॉजी में एमएससी की पढ़ाई पूरी की और अपनी बीमारी को समाजसेवा का माध्यम बना लिया। बचपन में अपने माता-पिता को रक्त की व्यवस्था के लिए संघर्ष करते देखकर उनके मन में यह संकल्प पैदा हुआ कि वे अन्य मरीजों को इस परेशानी से बचाने के लिए काम करेंगे।

    यही सोच उन्हें रक्तदान जागरूकता अभियान से जोड़कर ले गई। पिछले कई वर्षों से वे विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर रक्तदान शिविरों का आयोजन कर रहे हैं और लोगों को नियमित रक्तदान के लिए प्रेरित कर रहे हैं। वे ‘मानवता की पहचान’ संस्था के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। हाल ही में इंदौर के प्रसिद्ध Khajrana Ganesh Temple परिसर में आयोजित दो दिवसीय महारक्तदान शिविर में उनकी टीम ने 821 यूनिट रक्त संग्रहित कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की।

    संस्था द्वारा अब तक हजारों यूनिट रक्त संग्रह किया जा चुका है। वर्ष 2022 में एक ही स्थान पर 12 घंटे के भीतर 951 यूनिट रक्त एकत्र कर विश्व रिकॉर्ड भी बनाया गया था। इस उपलब्धि को ‘वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड’ में दर्ज किया गया। इसके अलावा संस्था को ‘इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड’ में भी स्थान मिल चुका है। वैभव इन अभियानों का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। समाजसेवा और थैलेसीमिया मरीजों की मदद के लिए उन्हें ‘रियल लाइफ हीरो’ सहित कई सम्मान भी प्राप्त हो चुके हैं।

    वैभव कहते हैं कि विज्ञान ने भले ही बड़ी प्रगति कर ली हो, लेकिन आज भी खून किसी फैक्ट्री में नहीं बनता। एक इंसान ही दूसरे इंसान की जिंदगी बचा सकता है। वे बताते हैं कि एक यूनिट रक्त से तीन लोगों की जान बचाई जा सकती है, क्योंकि ब्लड बैंक में इसे विभिन्न घटकों में विभाजित कर जरूरतमंद मरीजों को दिया जाता है।

    वे युवाओं से नियमित स्वैच्छिक रक्तदान करने की अपील करते हैं। साथ ही थैलेसीमिया जैसी बीमारी को रोकने के लिए विवाह से पहले जांच कराने पर भी जोर देते हैं। उनका मानना है कि जागरूकता और समय पर जांच के माध्यम से इस बीमारी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

    विश्व रक्तदाता दिवस पर वैभव की कहानी यह संदेश देती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि संकल्प मजबूत हो तो व्यक्ति न केवल अपनी जिंदगी संवार सकता है, बल्कि हजारों लोगों के जीवन में भी उम्मीद की रोशनी जगा सकता है।

  • मजदूर के बेटे की गुहार पर दौड़े TI, आरक्षक ने किया रक्तदान-उज्जैन पुलिस ने बचाई महिला की जान

    मजदूर के बेटे की गुहार पर दौड़े TI, आरक्षक ने किया रक्तदान-उज्जैन पुलिस ने बचाई महिला की जान


    मध्‍य प्रदेश। उज्जैन में पुलिस की संवेदनशीलता और तत्परता ने एक बार फिर इंसानियत की मिसाल पेश की है। चिमनगंज मंडी थाना क्षेत्र में एक गंभीर रूप से बीमार महिला की जान समय रहते रक्त उपलब्ध होने से बच गई। पूरी घटना एक छात्र की भावुक गुहार से शुरू हुई, जिसने पुलिस को तुरंत हरकत में ला दिया।

    इस्कॉन मंदिर के पीछे रहने वाले कक्षा 7वीं के छात्र सूरज भाटी ने अपनी मां सुनीता भाटी के लिए रक्त की मदद मांगते हुए सीधे चिमनगंज मंडी थाना प्रभारी विवेक कनोड़िया को फोन किया। सूरज ने बताया कि उसकी मां बिरला अस्पताल में भर्ती हैं और पिछले दो दिनों से परिवार रक्त की व्यवस्था नहीं कर पा रहा है।

    परिवार की स्थिति बेहद कमजोर थी, क्योंकि सूरज के पिता का दो साल पहले निधन हो चुका है और उसकी मां घरेलू काम कर तीन बच्चों का पालन-पोषण कर रही हैं। बच्चे की भावुक अपील सुनते ही थाना प्रभारी विवेक कनोड़िया तुरंत अस्पताल पहुंचे।

    हालांकि, उन्होंने स्वयं रक्तदान करने का प्रयास किया, लेकिन स्वास्थ्य कारणों और ब्लड ग्रुप मेल न खाने के कारण वे रक्तदान नहीं कर सके। इसके बाद उन्होंने तत्काल अपने थाना स्टाफ के व्हाट्सएप ग्रुप में बी-पॉजिटिव रक्तदाता की आवश्यकता का संदेश साझा किया।

    कुछ ही समय में आरक्षक जगदीश गेहलोत ने आगे बढ़कर रक्तदान के लिए सहमति दी और बिना देर किए पुष्पा मिशन अस्पताल पहुंचकर रक्तदान किया। समय पर रक्त मिलने से सुनीता भाटी की हालत में सुधार हुआ और उनकी जान बच गई।

    यह घटना न केवल पुलिस की त्वरित कार्रवाई को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि संकट के समय मानवता सबसे बड़ी ताकत होती है। उज्जैन पुलिस की इस पहल की हर ओर सराहना हो रही है।

  • ओंकारेश्वर में ब्लड डोनेशन यूनिट शुरू रक्तदाताओं को वीआईपी दर्शन पास मिलेगा..

    ओंकारेश्वर में ब्लड डोनेशन यूनिट शुरू रक्तदाताओं को वीआईपी दर्शन पास मिलेगा..


    खंडवा जिले में ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट और रेड क्रॉस सोसाइटी के सहयोग से एक ब्लड डोनेशन यूनिट शुरू की जा रही है इस यूनिट के माध्यम से जो भी श्रद्धालु रक्तदान करेगा उसे ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में वीआईपी एंट्री पास दिया जाएगा कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने निर्देश दिए हैं कि एक महीने के भीतर यह व्यवस्था शुरू की जाए काशी विश्वनाथ तिरुपति बालाजी और शिर्डी में पहले से इस तरह की व्यवस्था चल रही है

    कलेक्टर ने कहा कि रक्तदान करने वाले लोगों को प्रशस्ति पत्र दिए जाएं जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ अनिरुद्ध कौशल को निर्देश दिए गए कि ब्लड बैंक में आने वाले रक्तदाताओं को फल ताजा रस स्मृति चिन्ह और कैरी बैग चाबी का छल्ला जैसे प्रोत्साहन दिए जाएं इसके साथ ही रक्तदान शिविरों का प्रचार-प्रसार किया जाए और रक्तदाताओं को चार माह बाद रिमाइंडर भेजने की सुविधा भी लागू की जाए

    वहीं इंदौर के विजयनगर क्षेत्र में 2 फरवरी को 20 वर्षीय नवविवाहिता मोनिका पटेल ने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली पुलिस ने मामले की जांच पूरी होने के बाद पति रितेश पटेल और सास राधा पटेल को आरोपी बनाया है पुलिस ने मृतका के परिजनों के आरोप और एसीपी पराग सैनी की जांच रिपोर्ट के आधार पर दहेज प्रताड़ना धारा 498 ए और आत्महत्या के लिए उकसाने धारा 306 के तहत प्रकरण दर्ज किया है

    जांच में सामने आया कि विवाह के बाद मोनिका को लगातार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा था पिता हीरालाल चौहान ने आरोप लगाया कि शादी के बाद से ही मोनिका को ससुराल में परेशान किया जा रहा था बड़ी बेटी ने बताया कि मोनिका मानसिक तनाव में थी और लगातार परेशान की जा रही थी रितेश पटेल ने प्रारंभिक बयान में कहा कि घटना के समय वह घर पर नहीं था और आत्महत्या से पहले सिलाई के कपड़े को लेकर कहासुनी हुई थी

    पुलिस अधिकारियों ने कहा कि सभी तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जा रही है जल्द ही आरोपियों से पूछताछ की जाएगी यह प्रकरण दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दों को उजागर करता है जबकि ओंकारेश्वर में रक्तदान पहल समाज में लोगों को स्वेच्छा से रक्तदान करने के लिए प्रेरित करेगी और श्रद्धालुओं को उनकी सेवा के लिए सम्मान प्रदान करेगी