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  • शुगर के मरीज रोज कितनी चीनी खा सकते हैं ज्यादा मिठास बन सकती है गंभीर खतरा

    शुगर के मरीज रोज कितनी चीनी खा सकते हैं ज्यादा मिठास बन सकती है गंभीर खतरा


    नई दिल्ली :भारत में खुशी के हर मौके पर मुंह मीठा कराने की परंपरा रही है। त्योहार हो या कोई शुभ अवसर मिठाइयों के बिना जश्न अधूरा माना जाता है। लेकिन यही मिठास कई लोगों के लिए खतरे की घंटी बन सकती है खासकर उन लोगों के लिए जो डायबिटीज से जूझ रहे हैं। रिफाइंड शुगर यानी साधारण चीनी का ज्यादा सेवन ब्लड शुगर लेवल को तेजी से बढ़ा सकता है और लंबे समय में गंभीर जटिलताओं की वजह बन सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार डायबिटीज के मरीजों के लिए चीनी की कोई तय सुरक्षित न्यूनतम मात्रा नहीं है। दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ फिजीशियन डॉ अनिल बंसल के मुताबिक डायबिटीज के मरीजों का शरीर ग्लूकोज को प्रभावी तरीके से प्रोसेस नहीं कर पाता। ऐसे में थोड़ी सी अतिरिक्त चीनी भी ब्लड शुगर को असंतुलित कर सकती है। यही कारण है कि अधिकतर विशेषज्ञ शुगर के मरीजों को रिफाइंड शुगर से पूरी तरह दूरी बनाने की सलाह देते हैं।

    हालांकि जिन मरीजों का ब्लड शुगर पूरी तरह नियंत्रित है वे कभी कभी सीमित मात्रा में चीनी ले सकते हैं लेकिन यह भी डॉक्टर की सलाह के बाद ही होना चाहिए। आम तौर पर दिनभर में एक से दो छोटी चम्मच से अधिक चीनी लेने की सिफारिश नहीं की जाती और कई मामलों में इसे भी टालने की सलाह दी जाती है। क्योंकि शरीर को आवश्यक शुगर फलों दूध और अन्य प्राकृतिक स्रोतों से मिल जाती है इसलिए अलग से रिफाइंड शुगर लेने की जरूरत नहीं होती।

    अगर डायबिटीज का मरीज जरूरत से ज्यादा चीनी खाता है तो उसका ब्लड शुगर लेवल तेजी से बढ़ सकता है। लंबे समय तक हाई शुगर रहने से आंखों पर असर पड़ता है जिससे रेटिनोपैथी का खतरा होता है। किडनी प्रभावित हो सकती है जिससे नेफ्रोपैथी की समस्या पैदा होती है और नसों को नुकसान पहुंच सकता है जिसे न्यूरोपैथी कहा जाता है। इसके अलावा ज्यादा चीनी शरीर में सूजन बढ़ाती है जिससे घाव भरने में देरी होती है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

    सिर्फ डायबिटीज के मरीज ही नहीं बल्कि सामान्य लोगों को भी चीनी का सेवन सीमित रखना चाहिए। American Heart Association के अनुसार स्वस्थ पुरुषों को प्रतिदिन 36 ग्राम यानी लगभग 9 चम्मच से ज्यादा चीनी नहीं लेनी चाहिए जबकि महिलाओं के लिए यह सीमा 25 ग्राम यानी करीब 6 चम्मच है। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि इस सीमा में केवल चाय या मिठाई में डाली गई चीनी ही शामिल नहीं है बल्कि फलों दूध और प्रोसेस्ड फूड में मौजूद छिपी हुई शुगर भी गिनी जाती है।

    अधिक चीनी का सेवन इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ा सकता है जिससे भविष्य में डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। खासतौर पर प्रीडायबिटीज से जूझ रहे लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। जितनी कम रिफाइंड शुगर का सेवन होगा उतना ही बेहतर ब्लड शुगर कंट्रोल रहेगा और बीमारी का खतरा कम होगा।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि मीठा खाने की इच्छा होने पर प्राकृतिक विकल्प जैसे फल या सीमित मात्रा में ड्राई फ्रूट्स का सेवन किया जा सकता है। संतुलित आहार नियमित व्यायाम और डॉक्टर की सलाह के साथ ही डायबिटीज को नियंत्रित रखा जा सकता है। मिठास जीवन में जरूरी है लेकिन समझदारी से ली गई मिठास ही सेहत के लिए सुरक्षित होती है।

  • भारत में लॉन्च हुई डायबिटीज की दवा ओज़ेम्पिक: जानें कीमत और फायदे

    भारत में लॉन्च हुई डायबिटीज की दवा ओज़ेम्पिक: जानें कीमत और फायदे


    नई दिल्ली। डेनमार्क की प्रमुख दवा कंपनी नोवो नॉर्डिस्क ने भारत में अपनी बहुप्रतीक्षित दवा ओज़ेम्पिक (Ozempic) को आधिकारिक तौर पर लॉन्च कर दिया है। यह दवा टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों के लिए एक महत्वपूर्ण उपचार विकल्प बन सकती है। ओज़ेम्पिक को 2017 में अमेरिकी खाद्य और औषधि प्रशासन (FDA) द्वारा अनुमोदित किया गया था और तब से यह दुनिया भर में सबसे ज्यादा बिकने वाली दवाओं में से एक बन गई है। भारत में इसकी कीमत 0.25 मिलीग्राम की खुराक के लिए ₹2,200 प्रति सप्ताह रखी गई है। वहीं, 0.5 मिलीग्राम और 1 मिलीग्राम की खुराक के लिए कीमत ₹10,170 और ₹11,175 प्रति माह होगी।

    यह दवा सेमाग्लूटाइड (Semaglutide) नामक सक्रिय घटक से बनती है, जो शरीर में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले GLP-1 हार्मोन की तरह काम करता है। यह हार्मोन शरीर को यह संकेत भेजता है कि पेट भरा हुआ है, जिससे भूख कम लगती है और व्यक्ति कम कैलोरी का सेवन करता है। इसके अतिरिक्त, ओज़ेम्पिक का असर पेट की पाचन क्रिया को धीमा करने पर भी पड़ता है, जिससे व्यक्ति लंबे समय तक भरा हुआ महसूस करता है और बार-बार खाने से बचता है। इसके कारण यह दवा वजन घटाने में भी प्रभावी साबित हो रही है, जिससे यह डायबिटीज के मरीजों के अलावा अन्य लोगों के बीच भी लोकप्रिय हो रही है।

    भारत में सीडीएससीओ (केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन) ने अक्टूबर 2023 में ओज़ेम्पिक को टाइप 2 डायबिटीज के इलाज के लिए मंजूरी दी थी। यह दवा अब ग्लाइसेमिक नियंत्रण में सुधार करने के साथ-साथ उन मरीजों में हृदय संबंधी समस्याओं के जोखिम को भी कम करने में मदद करती है, जिन्हें पहले से हृदय रोग है। यह दवा खासतौर पर डाइट और एक्सरसाइज के साथ मिलकर काम करती है और मरीजों के रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में मदद करती है।

    हालांकि ओज़ेम्पिक की कीमतें कुछ उच्च हैं, लेकिन यह एक कारगर उपचार विकल्प हो सकती है। फिर भी, किसी भी नई दवा का उपयोग करने से पहले, मरीजों को अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह उनके लिए सही है और उन्हें इसके किसी साइड इफेक्ट का सामना नहीं करना पड़ेगा।