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  • नीला ड्रम कांड: दोषी ठहराए जाने के बाद फूट-फूट कर रोए मुस्कान-साहिल, रात का खाना भी नहीं खाया

    नीला ड्रम कांड: दोषी ठहराए जाने के बाद फूट-फूट कर रोए मुस्कान-साहिल, रात का खाना भी नहीं खाया


    मेरठ। सौरभ राजपूत हत्याकांड में दोषी ठहराए जाने के बाद मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला भावुक हो गए। बुधवार को दोनों जिला जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत की कार्यवाही में शामिल हुए थे। सुनवाई के दौरान मुस्कान की गोद में उसकी नन्हीं बेटी भी मौजूद थी। अदालत से दोषी करार दिए जाने के बाद दोनों रोते हुए वीसी रूम से बाहर निकले। वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा के मुताबिक, दोनों ने रात का खाना भी नहीं खाया।

    दोषी ठहराए जाने के बाद एक-दूसरे से भी दूरी

    बुधवार को जिला जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मुस्कान और साहिल की पेशी कराई गई। सुनवाई के दौरान मुस्कान अपनी नन्हीं बेटी को गोद में लिए हुए थी। वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने बताया कि अदालत की कार्यवाही पूरी होने के बाद दोनों काफी उदास नजर आए। इसके बाद दोनों रोते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम से बाहर निकले। कार्यवाही खत्म होने के बाद भी मुस्कान और साहिल ने एक-दूसरे से दूरी बनाए रखी। दोनों ने एक-दूसरे की ओर देखा तक नहीं और अपने-अपने बैरक की ओर चले गए।

    फैसले के दिन सुबह से बेचैन थे दोनों

    जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा के अनुसार, बुधवार को फैसला आने की वजह से मुस्कान और साहिल सुबह से ही बेचैन दिखाई दे रहे थे। मुस्कान दिनभर पूजा-पाठ में लगी रही। दोनों ने दिन में भी सामान्य से कम खाना खाया। अदालत की ओर से दोषी करार दिए जाने के बाद दोनों की उदासी और बढ़ गई। जेल प्रशासन के मुताबिक, दोनों ने रात का खाना खाने से इनकार कर दिया और बाद में अपने-अपने बैरक में चले गए।

    अदालत ने दोनों को हत्या का दोषी माना

    मेरठ के जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा द्वितीय की अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और पत्रावलियों के आधार पर मुख्य आरोपी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को सौरभ राजपूत की हत्या का दोषी करार दिया। अदालत ने कहा कि पत्रावलियों में मौजूद साक्ष्य इस बात को साबित करते हैं कि दोनों ने मिलकर वारदात को अंजाम दिया। इसके साथ ही अदालत ने सजा सुनाने के लिए 14 अक्टूबर की तारीख तय की है।

    सजा पर पक्ष रखने के लिए 15 दिन का समय

    वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई कार्यवाही के दौरान जिला जज ने मुस्कान और साहिल से सजा के बिंदु पर उनका पक्ष रखने को कहा। अदालत ने दोनों दोषियों को यह बताने के लिए 15 दिन का समय दिया है कि उनकी सजा क्यों कम की जानी चाहिए।

    इस अवधि में दोनों दोषी अपनी सफाई या दलील अदालत के सामने रख सकेंगे। इसके बाद 14 अक्टूबर को अदालत सजा का ऐलान करेगी। फिलहाल दोनों को दोषी ठहराया जा चुका है, लेकिन सजा की अवधि अभी तय नहीं हुई है। अगली सुनवाई इसी बिंदु पर होगी।

  • ब्लू ड्रम हत्याकांड में आज फैसले की घड़ी, मेरठ कोर्ट पहले तय करेगी मुस्कान-साहिल दोषी हैं या नहीं

    ब्लू ड्रम हत्याकांड में आज फैसले की घड़ी, मेरठ कोर्ट पहले तय करेगी मुस्कान-साहिल दोषी हैं या नहीं


    मेरठ। ब्रह्मपुरी के चर्चित ब्लू ड्रम हत्याकांड में बुधवार, 30 सितंबर को मेरठ जिला जज की अदालत फैसला सुनाएगी। मर्चेंट नेवी अधिकारी सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में आरोपी मुस्कान और साहिल के खिलाफ पहले अदालत यह तय करेगी कि दोनों दोषी हैं या नहीं। दोष सिद्ध होने पर सजा के बिंदु पर सुनवाई होगी।

    मामले में 17 सितंबर को अंतिम बहस पूरी हो चुकी है। अभियोजन पक्ष ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और मामले से जुड़े तथ्यों के आधार पर दोनों आरोपियों के लिए मृत्युदंड की मांग की है। अभियोजन की ओर से हत्या से पहले और बाद में की गई कथित तैयारियों को भी अदालत के सामने रखा गया।

    22 गवाहों की गवाही, दुकानदार भी शामिल

    सौरभ के परिवार की ओर से मुकदमा लड़ रहे अधिवक्ता विजय बहादुर के मुताबिक, वादी पक्ष ने अदालत में 22 गवाह पेश किए हैं। इनमें सौरभ का भाई बबलू, उसकी मां और सौरभ का दोस्त शामिल हैं।

    इसके अलावा नशीली दवाओं, चाकू, नीले ड्रम, सीमेंट और रेत की खरीद से जुड़े दुकानदारों की भी गवाही कराई गई। हत्या के बाद आरोपी जिन स्थानों पर घूमने गए थे, उनसे जुड़े साक्ष्य भी अदालत के सामने रखे गए हैं।

    अभियोजन पक्ष का तर्क है कि हत्या से पहले नशीली दवा और चाकू की व्यवस्था की गई, जबकि हत्या के बाद शव को छिपाने के लिए ड्रम, सीमेंट और रेत खरीदी गई। अभियोजन के मुताबिक, शव को ड्रम में भरकर सीमेंट से सील करने और उसे दूसरी जगह ले जाकर ठिकाने लगाने की योजना थी, लेकिन इससे पहले ही मामला सामने आ गया।

    बचाव पक्ष ने हत्या से ही इनकार किया

    मुस्कान की ओर से अधिवक्ता रेखा जैन ने बचाव पक्ष रखा। विजय बहादुर के अनुसार, बचाव पक्ष ने आरोपियों द्वारा हत्या किए जाने के आरोप से ही इनकार किया है। वादी पक्ष ने अपने साक्ष्य और गवाह अदालत के सामने पेश किए हैं।

    अभियोजन पक्ष ने ऐसे मामलों से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए अधिकतम सजा की मांग की है। अधिवक्ता के मुताबिक, इस मामले में न्यूनतम सजा आजीवन कारावास और अधिकतम सजा मृत्युदंड है और अभियोजन ने अधिकतम सजा की मांग की है।

    बच्ची की DNA जांच पर भी हुई चर्चा

    मुस्कान की बेटी के संबंध में DNA जांच की मांग को लेकर अधिवक्ता विजय बहादुर ने कहा कि फिलहाल हत्या का ट्रायल चल रहा है। उनके मुताबिक, इस दौरान ऐसी मांग का मुकदमे पर प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि सौरभ के परिवार से इस संबंध में उनकी कोई बातचीत नहीं हुई है।

    अधिवक्ता के अनुसार, बच्ची के मामले में सहानुभूति का कोई आधार बनता है या नहीं, इसका फैसला अदालत ही करेगी।

    जेल में पूजा-पाठ कर रही मुस्कान

    मेरठ जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने बताया कि अदालत में चल रही कार्यवाही के संबंध में उन्हें जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि मुस्कान पहले की तुलना में अब धार्मिक गतिविधियों में अधिक समय दे रही है।

    उनके मुताबिक, मुस्कान नियमित रूप से संध्या और सुंदरकांड करती है। इसके अलावा वह शिव पूजा भी कर रही है। बच्ची के अलावा जो समय उसे मिलता है, उसमें वह पूजा-पाठ करती है। वहीं, साहिल अन्य बंदियों से ज्यादा बातचीत नहीं करता और अपने काम में लगा रहता है।

    पहले दोष पर फैसला, फिर सजा पर सुनवाई

    अब बुधवार को अदालत के फैसले पर सभी की निगाहें हैं। अदालत पहले यह तय करेगी कि मुस्कान और साहिल के खिलाफ लगाए गए आरोप साबित हुए हैं या नहीं। यदि दोष सिद्ध होता है, तो इसके बाद सजा के बिंदु पर सुनवाई होगी।

    अभियोजन पक्ष की ओर से मृत्युदंड की मांग की गई है, लेकिन अंतिम फैसला अदालत के समक्ष पेश साक्ष्यों, गवाहियों और कानूनी दलीलों के आधार पर होगा।