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अजय देवगन के घर पर नहीं चला BMC का हथौड़ा, वायरल तस्वीरों के पीछे की कहानी आई सामने, एक्टर की टीम ने बताई पूरी सच्चाई
नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता अजय देवगन शनिवार को अपनी एक प्रॉपर्टी को लेकर चर्चा में आ गए जब मुंबई में उनके जुहू स्थित बंगले के एक हिस्से पर बृहन्मुंबई महानगरपालिका यानी बीएमसी की कार्रवाई की खबर सामने आई। सोशल मीडिया और मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि नगर निगम ने उनके घर के एक हिस्से को तोड़ दिया है। इसके साथ ही एक दीवार तोड़े जाने की तस्वीर भी सामने आई जिसके बाद यह मामला तेजी से चर्चा में आ गया। हालांकि अब अजय देवगन के ऑफिस की ओर से इस खबर पर सफाई दी गई है। अभिनेता की टीम ने स्पष्ट किया कि जिस प्रॉपर्टी को लेकर तोड़फोड़ की खबरें सामने आई हैं वह अजय देवगन का घर नहीं बल्कि उनकी एक अलग संपत्ति है जिसे किराए पर दिया गया है।अजय देवगन के ऑफिस की ओर से जारी बयान में कहा गया कि संबंधित संपत्ति को अभिनेता के निजी आवास के रूप में पेश करना सही नहीं है। यह एक अलग प्रॉपर्टी है जिसका इस्तेमाल किराए पर देने के लिए किया जाता है। टीम ने यह भी बताया कि इस संपत्ति से जुड़े जरूरी अनुमतियों के लिए बीएमसी में आवेदन जमा किया गया था। नगर निगम की ओर से निर्धारित आवश्यकताओं के अनुसार संबंधित बदलाव और संशोधन भी किए गए हैं। इस बयान के सामने आने के बाद अभिनेता के घर पर कार्रवाई होने को लेकर फैल रही चर्चाओं की स्थिति स्पष्ट हुई।दरअसल इस पूरे मामले में बीएमसी की ओर से निर्माण कार्य को लेकर आपत्ति जताई गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक नगर निगम ने 10 सितंबर 2026 को काम रोकने का नोटिस जारी किया था। इसमें निर्माण कार्य से जुड़े लोगों को तत्काल काम बंद करने और संबंधित अनुमति के दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। बताया गया कि संपत्ति में कुछ ऐसे बदलाव किए जा रहे थे जिनके लिए आवश्यक मंजूरी नहीं ली गई थी। इन बदलावों में आंतरिक फेरबदल पार्टिशन की दीवारें खिड़कियां और अन्य निर्माण संबंधी काम शामिल बताए गए।नगर निगम की कार्रवाई से जुड़े मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि खबरों में जिस संपत्ति का उल्लेख किया गया उसे अजय देवगन के निजी घर से जोड़ दिया गया था। हालांकि अभिनेता की टीम ने इस दावे को स्पष्ट रूप से खारिज किया है। इसलिए पूरे विवाद को समझने के लिए यह अंतर ध्यान में रखना जरूरी है कि मामला अभिनेता के निजी आवास का नहीं बल्कि उनकी दूसरी संपत्ति का बताया गया है। बीएमसी की ओर से निर्माण संबंधी नियमों और अनुमतियों को लेकर उठाए गए सवालों के बीच यह मामला चर्चा में आया।अजय देवगन की फिल्मों की बात करें तो अभिनेता हाल ही में दृश्यम द कन्क्लूजन को लेकर चर्चा में रहे हैं। दृश्यम फ्रेंचाइजी की इस फिल्म में उनके साथ तब्बू श्रेया सरन जयदीप अहलावत प्रकाश राज रजत कपूर और इशिता दत्ता जैसे कलाकार नजर आए। फिल्म का निर्देशन अभिषेक पाठक ने किया है। दर्शकों के बीच इस फ्रेंचाइजी की लोकप्रियता के कारण फिल्म को लेकर काफी उत्सुकता बनी रही। आने वाले समय में अजय देवगन गोलमाल 5 और रेंजर जैसी फिल्मों में भी नजर आ सकते हैं। गोलमाल 5 का निर्देशन रोहित शेट्टी करेंगे।इस फिल्म में अक्षय कुमार के साथ शरमन जोशी तुषार कपूर अरशद वारसी और कुणाल खेमू जैसे कलाकारों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है। वहीं रेंजर में अजय देवगन के साथ तमन्ना भाटिया और संजय दत्त नजर आ सकते हैं। फिलहाल बीएमसी की कार्रवाई से जुड़ी खबरों के बीच अभिनेता की टीम की सफाई ने इस मामले को लेकर फैली गलतफहमी दूर करने की कोशिश की है। -

सुभालय विहार में गरजा बुलडोजर, अवैध निर्माण पर निगम का एक्शन; नियम तोड़कर बनी दो मंजिला बिल्डिंग ध्वस्त
भोपाल । भोपाल में अवैध निर्माण और अनधिकृत प्लॉटिंग के खिलाफ नगर निगम ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। शुक्रवार को बावड़ियाकलां स्थित सुभालय विहार में अवैध रूप से निर्मित दो मंजिला भवन पर जेसीबी चलाकर उसे ध्वस्त कर दिया गया। नगर निगम की इस कार्रवाई के दौरान अधिकारियों की मौजूदगी में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति पैदा न हो।नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई गौरव गृह निर्माण सहकारी समिति के अंतर्गत आने वाले सुभालय परिसर में स्थित मकान क्रमांक बी 93 पर की गई। जांच में सामने आया कि जिस भूखंड पर निर्माण किया गया उसका मूल क्षेत्रफल 1312 वर्गमीटर था जबकि लगभग 900 वर्गमीटर क्षेत्र में जी प्लस वन भवन का निर्माण कर लिया गया था। सबसे अहम बात यह रही कि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग द्वारा स्वीकृत लेआउट में इस भूखंड को एकल प्लॉट के रूप में स्वीकृति मिली थी लेकिन इसके बावजूद नियमों की अनदेखी करते हुए इसका अवैध विभाजन कर दिया गया।
नगर निगम की जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित भूखंड को अनधिकृत तरीके से छोटे हिस्सों में बांटकर बेचा गया और बाद में स्वीकृत मानकों के विपरीत भवन निर्माण कर लिया गया। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह का निर्माण पूरी तरह नियमों के खिलाफ था इसलिए नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। निगम का कहना है कि शहर में अवैध प्लॉटिंग और बिना अनुमति किए जा रहे निर्माण पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और जहां भी नियमों का उल्लंघन मिलेगा वहां इसी तरह सख्त कार्रवाई की जाएगी।
कार्रवाई के दौरान नगर निगम के इंजीनियर राजस्व विभाग के अधिकारी और पुलिस बल भी मौके पर मौजूद रहे। प्रशासन ने पूरे अभियान को शांतिपूर्ण ढंग से पूरा कराया ताकि किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भविष्य में भी ऐसे मामलों में किसी प्रकार की ढील नहीं दी जाएगी।
नगर निगम ने शहरवासियों से भी अपील की है कि किसी भी संपत्ति की खरीद या निर्माण कार्य शुरू करने से पहले संबंधित विभागों से उसकी वैधता और स्वीकृत लेआउट की पूरी जानकारी अवश्य प्राप्त करें। बिना अनुमति के निर्माण या अवैध प्लॉटिंग में निवेश करने से लोगों को आर्थिक नुकसान के साथ कानूनी कार्रवाई का भी सामना करना पड़ सकता है।
नगर निगम का कहना है कि अवैध निर्माण केवल शहर की नियोजित विकास व्यवस्था को प्रभावित नहीं करता बल्कि भविष्य में सड़क जल निकासी पार्किंग और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर भी गंभीर असर डालता है। इसी कारण प्रशासन ऐसे मामलों में लगातार अभियान चलाकर नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि शहर में वैध और नियमानुसार विकास सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है। इसलिए जो लोग बिना स्वीकृति के निर्माण कर रहे हैं या अवैध प्लॉटिंग में शामिल हैं उनके खिलाफ आने वाले समय में भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी।
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मुंबई मेयर की गाड़ी से हटाईं लाल-नीली फ्लैश लाइट, वीआईपी कल्चर विवाद पर BMC ने दी कार्रवाई
नई दिल्ली। मुंबई में हाल ही में हुए विवाद के बाद मेयर ऋतु तावड़े की आधिकारिक गाड़ी और उनके साथ चलने वाली एस्कॉर्ट वाहन से लाल-नीली फ्लैश लाइटें हटा दी गई हैं। यह मामला सबसे पहले सोशल मीडिया पर तब सुर्खियों में आया जब एक पोस्ट में सवाल उठाया गया कि क्या मेयर की गाड़ी को पुलिस जैसी फ्लैश लाइट लगाने की अनुमति है। इस विवाद के बाद आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने मेयर को पत्र लिखकर इस विषय पर आपत्ति जताई और केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार ऐसी लाइटों का उपयोग केवल आपातकालीन सेवाओं के लिए ही किया जा सकता है, इसलिए इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए, यह स्पष्ट किया।विवाद का केंद्र मेयर की गाड़ी के बोनट पर लगी लाल-नीली फ्लैशिंग लाइट थी, जबकि उनके साथ चल रही एस्कॉर्ट स्कॉर्पियो वाहन में भी ऐसी लाइटें थीं। इस वाहन में मेयर के निजी सहायक और प्रोटोकॉल अधिकारी मौजूद थे। लाइटें देखकर लोगों ने यह सवाल उठाया कि क्या मेयर की गाड़ी को विशेष अधिकार दिया गया है।
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मेयर ऋतु तावड़े ने कहा कि उन्हें अपनी गाड़ी पर बीकन या फ्लैश लाइट लगाने में कोई रुचि नहीं है और यह प्रशासन की गलती थी। उन्होंने बताया कि जब उन्हें आधिकारिक वाहन दिया गया, तब प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए था कि किन लाइटों का प्रयोग किया जा सकता है और किनका नहीं।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी इस विवाद पर कहा कि जांच में पता चला कि लाल-नीली फ्लैश लाइट गाड़ी की छत पर नहीं बल्कि बोनट पर लगी थी। उन्होंने मेयर को दोषी नहीं ठहराया और कहा कि बिना वजह उन्हें निशाना बनाना उचित नहीं है।
नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि इसी तरह की फ्लैशिंग लाइटें मेयर, डिप्टी मेयर और हाउस लीडर की गाड़ियों पर भी लगी थीं, जिन्हें शनिवार को हटा दिया गया। इस विवाद के बाद विपक्ष की नेता और पूर्व मेयर किशोरी पेडणेकर ने सवाल उठाया कि यह कदम वीआईपी कल्चर के खिलाफ है और केंद्र सरकार ने 2017 में ही सरकारी वाहनों पर लाल बत्ती और विशेष प्रतीकों का उपयोग रोक दिया था।
2017 में केंद्र सरकार ने सरकारी वाहनों पर लाल बत्ती और वीआईपी कल्चर के प्रतीकों के उपयोग पर रोक लगाई थी। तब से मुंबई की मेयर की गाड़ी से लाल बत्ती हटा दी गई थी। इस विवाद ने शहर में फिर से चर्चा छेड़ दी है कि क्या नए नियमों का सही पालन किया जा रहा है और क्या मेयर अपने पद का अनुचित लाभ उठा रही हैं।
कुल मिलाकर, मुंबई मेयर की गाड़ी पर लगी लाल-नीली फ्लैश लाइट हटाने के बाद विवाद समाप्त हुआ, लेकिन यह मुद्दा वीआईपी कल्चर, प्रशासनिक नियमों और पारदर्शिता पर एक बार फिर ध्यान खींचता है।