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  • पीस बॉन्ड क्या है और नेहा बोरा ने इसे भरने से क्यों किया इनकार, जानिए नियम और जेल तक पहुंचने की वजह

    पीस बॉन्ड क्या है और नेहा बोरा ने इसे भरने से क्यों किया इनकार, जानिए नियम और जेल तक पहुंचने की वजह

    नई दिल्ली । ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा से जुड़े शांति बॉन्ड का मामला दिल्ली में चर्चा का विषय बना हुआ है। नेहा ने दिल्ली पुलिस की ओर से जारी 10 हजार रुपये का पीस बॉन्ड भरने संबंधी नोटिस को चुनौती दी है। उनका कहना है कि इस कार्रवाई के लिए ठोस आधार नहीं दिया गया और इसका इस्तेमाल शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए किया जा रहा है। दूसरी ओर, पुलिस का पक्ष है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए ऐसी निवारक कार्रवाई जरूरी हो सकती है। इस विवाद के बीच यह समझना महत्वपूर्ण है कि पीस बॉन्ड क्या होता है, इसे भरने का आदेश किन परिस्थितियों में दिया जा सकता है और इसका पालन नहीं करने पर क्या कानूनी परिणाम हो सकते हैं।

    पीस बॉन्ड को सामान्य तौर पर शांति बनाए रखने का कानूनी आश्वासन माना जाता है। यह अपने आप में किसी अपराध की सजा नहीं है, बल्कि भविष्य में शांति भंग होने की आशंका को रोकने के उद्देश्य से की जाने वाली निवारक कार्रवाई है। इसमें संबंधित व्यक्ति को निर्धारित अवधि तक शांति बनाए रखने का वचन देना पड़ सकता है। आदेश के अनुसार बॉन्ड की राशि तय की जाती है और कुछ मामलों में जमानतदार की आवश्यकता भी हो सकती है। इसका उद्देश्य किसी संभावित विवाद या कानून-व्यवस्था की समस्या को पहले ही रोकना है।

    इस प्रक्रिया का प्रावधान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) में है। पहले इसी तरह की कार्रवाई का प्रावधान दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 107 में था। अब BNSS की धारा 126 के तहत कार्यकारी मजिस्ट्रेट उस व्यक्ति से शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड भरने को कह सकता है, जिसके बारे में शांति भंग करने की आशंका से जुड़ी सूचना मिली हो। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाता है।

    BNSS की धारा 130 के तहत मजिस्ट्रेट को प्रारंभिक आदेश में सूचना का सार, बॉन्ड की राशि, उसकी अवधि और अन्य आवश्यक विवरण दर्ज करने होते हैं। इसके बाद धारा 135 के तहत जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। जांच के दौरान कुछ परिस्थितियों में अंतरिम बॉन्ड भरने का आदेश भी दिया जा सकता है। यदि संबंधित व्यक्ति आदेश का पालन नहीं करता, तो कानून के प्रावधानों के अनुसार उसकी हिरासत का प्रश्न उठ सकता है। जांच पूरी होने पर धारा 136 के तहत अंतिम आदेश जारी किया जा सकता है। हालांकि, किसी भी कार्रवाई की वैधता संबंधित तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करती है।

    नेहा बोरा को यह नोटिस अक्टूबर में विरोध प्रदर्शनों से जुड़े घटनाक्रम के बाद मिला था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 16 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया था। वह कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च में शामिल होने जा रही थीं और अगले दिन उन्हें रिहा कर दिया गया। इसके बाद उन्हें BNSS की धारा 126, 130 और 135(3) के तहत नोटिस जारी किया गया। इसमें उन्हें 19 अक्टूबर को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने के लिए कहा गया था।

    नेहा की याचिका में दावा किया गया है कि नोटिस में आरोपों को साबित करने वाली पर्याप्त सामग्री नहीं दी गई। उनके अनुसार, इसमें किसी विशेष घटना और उसकी अवधि का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। उन्होंने मंडी हाउस में शांतिपूर्ण सभा आयोजित करने, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और कनॉट प्लेस जाने के लिए उकसाने से जुड़े आरोपों पर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि ऐसी कार्रवाई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण सभा करने के अधिकार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकती है।

    पीस बॉन्ड नहीं भरने के कानूनी परिणाम भी परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं। यदि जांच के बाद मजिस्ट्रेट वैध अंतिम आदेश जारी करता है और संबंधित व्यक्ति निर्धारित बॉन्ड नहीं भरता, तो BNSS की धारा 141 के तहत उसे हिरासत में रखने या जेल भेजने की स्थिति बन सकती है। कानून के तहत साधारण कारावास की अवधि अधिकतम एक वर्ष तक हो सकती है। यह परिणाम केवल बॉन्ड भरने से शुरुआती इनकार के आधार पर स्वतः लागू नहीं होता, बल्कि संबंधित कानूनी प्रक्रिया और आदेश पर निर्भर करता है।

    वहीं, बॉन्ड भरने के बाद उसकी शर्तों का उल्लंघन साबित होने पर भी कार्रवाई हो सकती है। परिस्थितियों के अनुसार बॉन्ड की राशि जब्त की जा सकती है और कानून के तहत हिरासत या कारावास से जुड़े आदेश दिए जा सकते हैं। ऐसे मामलों में संबंधित आदेश और लागू कानूनी प्रावधान महत्वपूर्ण होते हैं।

    इस विवाद में एक अन्य घटनाक्रम कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्होंने विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश होकर पीस बॉन्ड भरा था। इसके विपरीत, नेहा बोरा के वकीलों ने बॉन्ड पर हस्ताक्षर नहीं करने का रुख रखा। अब मामले में मुख्य सवाल यह है कि क्या शांति भंग होने की आशंका के आधार पर जारी नोटिस पर्याप्त तथ्यों पर आधारित था और क्या संबंधित प्रक्रिया का सही तरीके से पालन किया गया। दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला इस विवाद में आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होगा।

  • 26/11 मुंबई आतंकी हमले के छह पाकिस्तानी आरोपियों पर गैरहाजिरी में मुकदमा शुरू, हाफिज सईद और लखवी भी आरोपी

    26/11 मुंबई आतंकी हमले के छह पाकिस्तानी आरोपियों पर गैरहाजिरी में मुकदमा शुरू, हाफिज सईद और लखवी भी आरोपी

    नई दिल्ली । 26/11 मुंबई आतंकी हमले के मामले में भारत ने फरार पाकिस्तानी आरोपियों के खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुंबई की विशेष अदालत में हाफिज सईद और जकी उर रहमान लखवी समेत छह आरोपियों के खिलाफ उनकी गैरमौजूदगी में मुकदमा चलाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। यह कार्रवाई भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS की धारा 356 के तहत की जा रही है। आरोपियों के भारत में मौजूद नहीं होने के बावजूद अब अदालत मामले की सुनवाई को आगे बढ़ा सकेगी।

    इस मामले में हाफिज सईद, जकी उर रहमान लखवी, साजिद मीर, अबू अलकामा, अबू कहफा और मेजर अब्दुर रहमान पाशा को आरोपी बनाया गया है। इन सभी पर 26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए भीषण आतंकी हमले की साजिश और उससे जुड़े षड्यंत्र में भूमिका होने के आरोप हैं। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर इन आरोपियों की कथित भूमिका अलग अलग स्तर पर बताई गई है।

    26/11 का हमला भारत के सबसे बड़े आतंकी हमलों में शामिल है। पाकिस्तान से समुद्री रास्ते के जरिए मुंबई पहुंचे आतंकवादियों ने शहर के कई महत्वपूर्ण स्थानों को निशाना बनाया था। छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, ताज होटल, ट्राइडेंट होटल, नरीमन हाउस और अन्य स्थानों पर कई घंटों तक आतंक का माहौल रहा था। इस हमले में 166 लोगों की जान चली गई थी और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे।

    हमले में शामिल दस आतंकवादियों में से नौ सुरक्षा बलों की कार्रवाई में मारे गए थे, जबकि अजमल कसाब को जिंदा गिरफ्तार किया गया था। कसाब के खिलाफ भारत में मुकदमा चला और अदालत ने उसे दोषी ठहराया था। बाद में उसे कानून के तहत फांसी दी गई। हालांकि हमले की साजिश और उसके संचालन से जुड़े कई आरोपी भारत की पहुंच से बाहर रहे हैं।

    भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 356 ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधान उपलब्ध कराती है, जहां कोई आरोपी फरार है और अदालत के समक्ष उपस्थित नहीं हो रहा है। निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद आरोपी की गैरमौजूदगी में मुकदमे को आगे बढ़ाया जा सकता है। इसका उद्देश्य यह है कि किसी आरोपी के लंबे समय तक फरार रहने के कारण न्यायिक प्रक्रिया अनिश्चितकाल तक रुकी न रहे।

    मामले में आरोपियों को अदालत के समक्ष उपस्थित होने का अवसर दिया गया है। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों और अन्य दस्तावेजों पर विचार करेगी। अभियोजन पक्ष का कहना है कि फरार आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं और नई कानूनी व्यवस्था के माध्यम से मुकदमे को आगे बढ़ाने का रास्ता खुला है।

    हाफिज सईद पर 26/11 हमले की साजिश में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आरोप है, जबकि जकी उर रहमान लखवी पर आतंकवादियों की तैयारी और हमले के संचालन से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। जांच में कराची स्थित कथित नियंत्रण कक्ष से हमले की निगरानी और निर्देश दिए जाने की बात भी सामने आई थी। अब अदालत इन आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की न्यायिक जांच करेगी।

    गैरहाजिरी में शुरू हुआ यह मुकदमा 26/11 मामले में महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम माना जा रहा है। हालांकि आरोपियों के खिलाफ अंतिम फैसला तभी होगा जब अदालत सभी साक्ष्यों और कानूनी दलीलों पर विचार करने के बाद अपना निर्णय देगी। BNSS की धारा 356 के तहत शुरू हुई यह प्रक्रिया भारत की न्याय व्यवस्था में उन गंभीर मामलों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है, जिनमें आरोपी देश से बाहर रहकर लंबे समय तक न्यायिक कार्रवाई से बचते रहे हैं।

  • कैंट रेलवे स्टेशन क्षेत्र में पुरुषों की शिकायत पर कार्रवाई, दो युवतियां न्यायिक हिरासत में भेजी गईं

    कैंट रेलवे स्टेशन क्षेत्र में पुरुषों की शिकायत पर कार्रवाई, दो युवतियां न्यायिक हिरासत में भेजी गईं


    नई दिल्ली । 
    उत्तर प्रदेश के वाराणसी में एंटी रोमियो स्क्वॉड की कार्रवाई से जुड़ा एक अलग तरह का मामला सामने आया है। आमतौर पर महिलाओं और छात्राओं के साथ छेड़छाड़ या उत्पीड़न की शिकायतों पर कार्रवाई करने वाली एंटी रोमियो टीम ने इस बार दो युवतियों को पुरुषों से कथित छेड़छाड़, अभद्र टिप्पणियां और अश्लील इशारे करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। पुलिस ने दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया, जहां से न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

    यह घटना वाराणसी के कैंट रेलवे स्टेशन क्षेत्र की बताई गई है। पुलिस के अनुसार, शुक्रवार शाम करीब पांच बजे चौकाघाट-लहरतारा फ्लाईओवर के नीचे दो युवतियों के राह चलते पुरुषों के साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार करने की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम को मिली। शिकायत में आरोप लगाया गया कि दोनों राहगीरों की ओर अश्लील टिप्पणियां कर रही थीं और आपत्तिजनक इशारे कर रही थीं। सूचना मिलते ही एंटी रोमियो स्क्वॉड और स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों महिलाओं को हिरासत में ले लिया।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मौके पर पहुंचने पर दोनों युवतियों ने अपना चेहरा ढका हुआ था। प्रारंभिक पूछताछ और मौके पर मौजूद लोगों से जानकारी लेने के बाद उन्हें थाने लाया गया, जहां आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई। पुलिस का कहना है कि सार्वजनिक स्थान पर कथित अश्लील हरकतों और अभद्र व्यवहार से जुड़े आरोपों के आधार पर उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 296 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया।

    जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि गिरफ्तार की गई दोनों महिलाएं बिहार की रहने वाली हैं। हालांकि उनकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद दोनों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया गया। मामले की आगे की जांच जारी है और पुलिस अन्य तथ्यों की भी पड़ताल कर रही है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि एंटी रोमियो स्क्वॉड का उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी प्रकार की छेड़छाड़, अभद्रता या उत्पीड़न की घटनाओं को रोकना है। कानून सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होता है और शिकायत मिलने पर आरोपी के महिला या पुरुष होने के आधार पर कार्रवाई में कोई भेदभाव नहीं किया जाता। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थानों पर अनुचित व्यवहार या किसी व्यक्ति को असहज करने वाली गतिविधियों के मामलों में निर्धारित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई जारी रहेगी।

    वाराणसी की यह घटना इसलिए चर्चा में है क्योंकि एंटी रोमियो स्क्वॉड की कार्रवाई इस बार महिलाओं के खिलाफ हुई है। हालांकि पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि मामले में लगाए गए आरोपों की जांच विधिक प्रक्रिया के तहत की जा रही है और अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। प्रशासन ने लोगों से सार्वजनिक स्थानों पर मर्यादित व्यवहार बनाए रखने और किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को देने की अपील की है, ताकि सभी नागरिकों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित किया जा सके।