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  • डिजिटल मूल्यांकन के साथ आया CBSE 12वीं का रिजल्ट, पिछले साल के मुकाबले कम रहा पास प्रशत

    डिजिटल मूल्यांकन के साथ आया CBSE 12वीं का रिजल्ट, पिछले साल के मुकाबले कम रहा पास प्रशत

    नई दिल्ली ।केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने कक्षा 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 के परिणाम घोषित कर दिए हैं। इस वर्ष देशभर में कुल पास प्रतिशत 85.20 दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में कम रहा। परिणामों में गिरावट के बावजूद इस बार परीक्षा मूल्यांकन प्रक्रिया की सबसे बड़ी खासियत पहली बार लागू की गई पूरी तरह डिजिटल ‘ऑन स्क्रीन मार्किंग’ प्रणाली रही, जिसने शिक्षा व्यवस्था में तकनीकी बदलाव की नई दिशा दिखाई है।

    इस वर्ष लाखों विद्यार्थियों ने परीक्षा में हिस्सा लिया और बड़ी संख्या में छात्र सफल घोषित किए गए। बोर्ड की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार लड़कियों ने एक बार फिर बेहतर प्रदर्शन करते हुए लड़कों को पीछे छोड़ दिया। छात्राओं का उत्तीर्ण प्रतिशत लड़कों की तुलना में अधिक दर्ज किया गया, जिससे यह साफ हुआ कि बोर्ड परीक्षाओं में लगातार उनका प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है।

    इस बार मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के उद्देश्य से उत्तर पुस्तिकाओं की जांच पूरी तरह डिजिटल माध्यम से की गई। ऑन स्क्रीन मार्किंग प्रणाली के तहत उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर परीक्षकों तक ऑनलाइन पहुंचाया गया। इससे कॉपियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजने की आवश्यकता समाप्त हो गई और मूल्यांकन प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज और व्यवस्थित बन सकी।

    नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह रहा कि अंक जोड़ने, डेटा अपलोड करने और परिणाम तैयार करने में होने वाली मानवीय गलतियों को काफी हद तक कम किया जा सका। डिजिटल प्रणाली के कारण परीक्षक केवल उत्तरों की गुणवत्ता और निर्धारित मूल्यांकन मानदंडों पर ध्यान केंद्रित कर पाए, जिससे निष्पक्षता और सटीकता दोनों में सुधार देखने को मिला।

    बोर्ड के अनुसार इस तकनीकी बदलाव से देश और विदेश में मौजूद संबद्ध स्कूलों के शिक्षक अपने स्थान से ही मूल्यांकन कार्य कर सके। इससे समय की बचत हुई और मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित ढंग से पूरी की जा सकी। शिक्षा क्षेत्र में इसे एक बड़े तकनीकी परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है।

    वहीं, क्षेत्रीय प्रदर्शन की बात करें तो कुछ क्षेत्रों में छात्रों ने राष्ट्रीय औसत से बेहतर परिणाम दर्ज किए। खासतौर पर महानगरों और बड़े शैक्षणिक केंद्रों में विद्यार्थियों का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा। बड़ी संख्या में छात्रों ने उत्कृष्ट अंक हासिल किए, जिससे प्रतिस्पर्धा और भी मजबूत होती दिखाई दी।

    हालांकि इस बार पास प्रतिशत में गिरावट ने छात्रों और अभिभावकों के बीच चर्चा को भी बढ़ा दिया है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा पैटर्न, मूल्यांकन प्रक्रिया और प्रतिस्पर्धा के बढ़ते स्तर का असर परिणामों पर दिखाई दे सकता है।

    इसके बावजूद बोर्ड का कहना है कि नई डिजिटल प्रणाली भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी, तेज और विश्वसनीय बनाने में मदद करेगी। आने वाले वर्षों में तकनीक आधारित मूल्यांकन को शिक्षा प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों को अधिक निष्पक्ष परिणाम मिल सकेंगे।

  • मप्र में 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम 15 अप्रैल को होगा जारी

    मप्र में 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम 15 अप्रैल को होगा जारी


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश में माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा इस वर्ष आयोजित कक्षा दसवीं और बारहवीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम 15 अप्रैल को सुबह 11 बजे जारी किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से दोनों कक्षाओं के परिणाम एक साथ घोषित करेंगे।

    स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने सोमवार को बताया कि परिणाम के साथ दोनों कक्षाओं की मेरिट लिस्ट (टॉपर्स सूची) भी जारी की जाएगी। राज्य स्तर पर टॉप करने वाले मेधावी छात्रों को सरकार द्वारा विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा। छात्रों को अपना परिणाम देखने के लिए केवल अपने रोल नंबर की आवश्यकता होगी। बोर्ड ने कॉपियों के मूल्यांकन और पोर्टल पर डेटा अपलोड करने का कार्य पहले ही पूर्ण कर लिया है।

    उन्होंने बताया कि परिणाम जारी करने से पहले क्रॉस चेकिंग और वैरिफिकेशन तेजी से पूरा किया गया। हर स्तर पर जांच की गई, ताकि कोई गलती न रहे। रिजल्ट “फुलप्रूफ” रखा गया है, जिससे छात्रों को परेशानी न हो।


    10वीं में 9 लाख से ज्यादा छात्र शामिल

    प्रदेश में 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में 16 लाख से अधिक छात्र शामिल हुए। इनमें करीब 9 लाख 7 हजार छात्र 10वीं और लगभग 7 लाख छात्र 12वीं में बैठे। परीक्षा के लिए 3856 केंद्र बनाए गए थे। नकल रोकने के लिए फ्लाइंग स्क्वॉड, सीसीटीवी और प्रश्नपत्र वितरण की वीडियोग्राफी की व्यवस्था की गई थी। इसके बावजूद प्रदेश में करीब 100 नकल प्रकरण सामने आए। मुरैना में सबसे ज्यादा 41 और भोपाल में 20 मामले दर्ज हुए।

    डॉक्टरों और काउंसलर्स ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों पर दबाव न डालें और मानसिक सहयोग दें। गांधी मेडिकल कॉलेज की डॉ. रुचि सोनी ने कहा कि हर बच्चा अच्छा रिजल्ट चाहता है, लेकिन ऐसा हमेशा संभव नहीं होता। एक परीक्षा जीवन तय नहीं करती। बच्चों के तनाव में होने पर उनसे बात करें और उनका साथ दें।

    शिक्षा विभाग का उद्देश्य समय पर रिजल्ट जारी करना है, ताकि छात्र बिना देरी अगली कक्षा या कोर्स में प्रवेश ले सकें। तय समय पर परिणाम आने से छात्रों और अभिभावकों को राहत मिलेगी।

  • एमपी बोर्ड का बड़ा फैसला, अब फेल ही नहीं पास छात्र भी सुधार सकेंगे अंक, ‘द्वितीय परीक्षा’ से मिलेगा दूसरा मौका

    एमपी बोर्ड का बड़ा फैसला, अब फेल ही नहीं पास छात्र भी सुधार सकेंगे अंक, ‘द्वितीय परीक्षा’ से मिलेगा दूसरा मौका


    नई दिल्ली/भोपाल। माध्यमिक शिक्षा मंडल म.प्र. भोपाल ने इस वर्ष से परीक्षा प्रणाली में अहम बदलाव करते हुए पारंपरिक पूरक परीक्षा व्यवस्था को समाप्त कर दिया है। इसके स्थान पर अब द्वितीय परीक्षा शुरू की जा रही है जिसमें फेल और पास दोनों ही प्रकार के छात्र शामिल हो सकेंगे। यह परीक्षा 7 मई 2026 से आयोजित होगी।

    नई व्यवस्था के तहत छात्र केवल अनुत्तीर्ण विषयों के लिए ही नहीं बल्कि अपने अंक सुधारने के उद्देश्य से भी किसी विषय में दोबारा परीक्षा दे सकेंगे। बोर्ड का मानना है कि इस पहल से विद्यार्थियों को अपने परिणाम बेहतर करने का अधिक अवसर मिलेगा।

    पहले की व्यवस्था में हाईस्कूल 10वीं में अधिकतम दो विषय और हायर सेकेंडरी 12वीं में एक विषय में फेल छात्र ही पूरक परीक्षा दे सकते थे। लेकिन अब इस नई द्वितीय परीक्षा प्रणाली में सभी छात्रों को समान अवसर प्रदान किया गया है।

    नियमों के अनुसार जो छात्र किसी विषय में फेल हैं उनके लिए उस विषय की परीक्षा देना अनिवार्य होगा। वहीं पास छात्र अपनी इच्छा से किसी भी विषय में शामिल होकर अपने अंक सुधार सकते हैं। इसे छात्रों के लिए राहतभरा कदम माना जा रहा है।

    जारी टाइमटेबल के मुताबिक 12वीं की द्वितीय परीक्षा 7 मई से 25 मई 2026 तक आयोजित होगी जबकि 10वीं की परीक्षा 7 मई से 19 मई 2026 के बीच होगी। सभी परीक्षाएं निर्धारित केंद्रों पर कराई जाएंगी।

    बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि द्वितीय परीक्षा के बाद जारी अंकसूची मुख्य परीक्षा के समान ही होगी। छात्र के दोनों परिणामों में से जो बेहतर होगा वही अंतिम रूप से मान्य किया जाएगा जिससे उन्हें सीधे तौर पर फायदा मिलेगा।

    द्वितीय परीक्षा में शामिल होने के लिए छात्रों को मुख्य परीक्षा का परिणाम घोषित होने के सात दिनों के भीतर आवेदन करना होगा। आवेदन प्रक्रिया एमपी ऑनलाइन कियोस्क के माध्यम से पूरी की जाएगी। इसके लिए छात्र बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट www.mpbse.nic.in पर जाकर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।