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  • आंध्र प्रदेश में 100 शहरी निकायों के चुनाव पर रोक, NDA ने YSRCP पर लगाया साजिश का आरोप

    आंध्र प्रदेश में 100 शहरी निकायों के चुनाव पर रोक, NDA ने YSRCP पर लगाया साजिश का आरोप

    अमरावती। आंध्र प्रदेश में शहरी निकाय चुनावों को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद राज्य चुनाव आयोग ने 100 शहरी निकायों में जारी चुनाव प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने विपक्षी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) पर चुनाव प्रक्रिया में बाधा डालने का आरोप लगाया है। वहीं, आयोग अब गुरुवार को इस पर फैसला करेगा कि कानून-व्यवस्था की स्थिति के कारण नामांकन दाखिल नहीं कर पाने वाले उम्मीदवारों को अतिरिक्त समय दिया जाए या नहीं।

    मुख्यमंत्री और तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) प्रमुख एन. चंद्रबाबू नायडू, उपमुख्यमंत्री और जनसेना प्रमुख पवन कल्याण तथा प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पीवीएन माधव ने संयुक्त बयान जारी कर चुनाव आयोग के फैसले का सम्मान करने की बात कही। गठबंधन नेताओं ने कहा कि उनकी सरकार निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

    सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद आयोग ने रोकी प्रक्रिया

    शहरी निकाय चुनावों को लेकर विवाद वाईएसआरसीपी की याचिका के बाद बढ़ा। याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग को उम्मीदवारों की अंतिम सूची 25 अक्टूबर तक जारी करने की प्रक्रिया टालने का निर्देश दिया था। इसके बाद आयोग ने राज्य के सभी 100 शहरी निकायों में चल रही चुनाव प्रक्रिया रोक दी।

    अब आयोग को यह तय करना है कि जिन क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था की स्थिति के कारण उम्मीदवार नामांकन दाखिल नहीं कर सके, वहां नामांकन की अंतिम तारीख बढ़ाई जाए या नहीं। इस निर्णय पर राज्य की राजनीतिक गतिविधियों की नजर बनी हुई है।

    एनडीए का आरोप, चुनाव रोकने की कोशिश कर रही YSRCP

    चंद्रबाबू नायडू, पवन कल्याण और पीवीएन माधव ने अपने संयुक्त बयान में कहा कि गठबंधन सरकार लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत बनाने और स्थानीय निकायों में निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

    बयान में कहा गया, “हमने 2024 का चुनाव आंध्र प्रदेश के पुनर्निर्माण के वादे के साथ लड़ा था। लोगों ने हम पर भरोसा किया और गठबंधन को सरकार चलाने की जिम्मेदारी दी। पिछले दो वर्षों में हमने कल्याण, विकास और सुशासन पर ध्यान दिया है। हमने लोगों का विश्वास बहाल किया है।”

    एनडीए नेताओं ने आरोप लगाया कि वाईएसआरसीपी शुरुआत से ही स्थानीय निकाय चुनावों को बाधित करने का प्रयास कर रही है। हालांकि, चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाने का तत्काल कारण सुप्रीम कोर्ट का निर्देश है। विपक्ष पर लगाए गए साजिश के आरोप एनडीए नेताओं के राजनीतिक दावे हैं।

    स्थानीय निकायों के चुनाव को विकास के लिए बताया जरूरी

    एनडीए नेताओं ने कहा कि मजबूत स्थानीय निकाय राज्य के विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। उनके अनुसार, समय पर चुनाव होने से स्थानीय प्रशासन को मजबूती मिलती है और 16वें वित्त आयोग तथा केंद्र सरकार से मिलने वाली धनराशि से जुड़े प्रावधानों के लिहाज से भी चुनाव महत्वपूर्ण हैं।

    गठबंधन का कहना है कि स्थानीय निकायों में निर्वाचित प्रतिनिधियों की मौजूदगी विकास योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद करती है। इसलिए चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और शांतिपूर्ण तरीके से पूरा किया जाना चाहिए।

    पिछली सरकार के चुनावों को लेकर भी उठाए सवाल

    एनडीए नेताओं ने वाईएसआरसीपी की पिछली सरकार के दौरान हुए चुनावों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय राज्य में हिंसा और धमकियों के कारण भय का माहौल बना था तथा विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने में परेशानियों का सामना करना पड़ा था।

    बयान में गठबंधन नेताओं ने कहा कि वाईएसआरसीपी ने उस समय चुनावी जीत का जश्न मनाया, जबकि अब कानून के अनुसार चुनाव कराने की प्रक्रिया में बाधाएं खड़ी की जा रही हैं।

    एनडीए में शामिल टीडीपी, जनसेना और भाजपा ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपना भरोसा जताते हुए निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराने में सहयोग देने की बात कही है।

    आयोग के अगले फैसले पर टिकी निगाहें

    आंध्र प्रदेश में 100 शहरी निकायों की चुनाव प्रक्रिया पर लगी रोक के बाद अब राज्य चुनाव आयोग के अगले फैसले का इंतजार है। खास तौर पर उन क्षेत्रों में नामांकन की समयसीमा बढ़ाने का मुद्दा महत्वपूर्ण है, जहां कानून-व्यवस्था की स्थिति के कारण उम्मीदवार अपना नामांकन दाखिल नहीं कर पाए।

    आयोग का निर्णय आगे की चुनावी प्रक्रिया की दिशा तय करेगा। फिलहाल इस मुद्दे ने सत्तारूढ़ एनडीए और विपक्षी वाईएसआरसीपी के बीच राजनीतिक टकराव को और तेज कर दिया है।

  • कुवैत से 20 भारतीयों के शव लेकर केरल पहुंचा विमान, अलग-अलग घटनाओं में हुई इनकी मौत

    कुवैत से 20 भारतीयों के शव लेकर केरल पहुंचा विमान, अलग-अलग घटनाओं में हुई इनकी मौत


    कोचीन।
    कुवैत (Kuwait) में अलग-अलग घटनाओं में जान गंवाने वाले 20 भारतीय नागरिकों (20 Indian citizens) के पार्थिव शरीर बुधवार को केरल (Kerala) के कोचीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Cochin International Airport) पहुंचे.

    अधिकारियों के मुताबिक, खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव के कारण इन शवों की स्वदेश वापसी में देरी हुई थी. इन मृतकों में तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले के मुथुकुलाथुर निवासी 37 वर्षीय संतनसेल्वम कृष्णन भी शामिल हैं, जिनकी मौत कुवैत में एक पानी के डीसैलिनेशन प्लांट पर हुए ड्रोन हमले में हो गई थी. बाकी 19 भारतीय नागरिकों की मौत अलग-अलग हादसों और प्राकृतिक कारणों से हुई थी, लेकिन खाड़ी देशों पर ईरान के ताबड़तोड़ हमलों के चलते उनके पार्थिव शरीर भारत लाने में डेरी हुई.

    इस बीच, विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के दूसरे महीने में प्रवेश करने के साथ ही अब तक कुल 8 भारतीय नागरिकों की मौत हो चुकी है, जबकि एक व्यक्ति अभी भी लापता है. खाड़ी मामलों को देखने वाले विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव असीम महाजन ने बताया कि कुवैत स्थित भारतीय मिशन स्थानीय प्रशासन के साथ लगातार संपर्क में है, ताकि मृतकों के पार्थिव शरीर जल्द से जल्द उनके परिजनों तक पहुंचाए जा सकें.

    असीम महाजन ने कहा, ‘हाल ही में एक भारतीय नागरिक की हमले में मौत हो गई, जो बेहद दुखद है. हम शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हैं. भारतीय दूतावास परिवार के संपर्क में है और हर संभव मदद सुनिश्चित कर रहा है।

    कुवैत में भारतीय दूतावास ने भी इस घटना पर गहरा दुख जताया है. दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा कि डीसैलिनेशन सुविधा पर हुए हमले में भारतीय नागरिक की मौत पर गहरी संवेदना व्यक्त की जाती है और स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर हर संभव सहायता दी जा रही है.

    उधर, कुवैत के बिजली, पानी और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने बताया कि रविवार शाम हुए हमले में एक प्रमुख पावर और वाटर डीसैलिनेशन प्लांट को भारी नुकसान पहुंचा, जिसमें एक भारतीय कर्मचारी की जान चली गई. अधिकारियों ने इस हमले के पीछे ईरान की कार्रवाई होने की आशंका जताई है.

    गौरतलब है कि खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर आम नागरिकों पर भी पड़ रहा है. भारतीय नागरिकों की मौत और लापता होने की घटनाओं ने भारत सरकार की चिंता बढ़ा दी है. ऐसे में विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं और प्रभावित परिवारों को हर संभव मदद देने की कोशिश कर रहे हैं.

  • ईरान ने भारत से बुलाए 180 नौसैनिक, कोच्चि से उड़ान भरेंगे; अमेरिकी हमले में मृतकों के शव भी लौटाए जा रहे

    ईरान ने भारत से बुलाए 180 नौसैनिक, कोच्चि से उड़ान भरेंगे; अमेरिकी हमले में मृतकों के शव भी लौटाए जा रहे



    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच भारत ने एक संवेदनशील कूटनीतिक मिशन अंजाम दिया है। ईरान ने अपने युद्धपोत IRIS Lavan के लगभग 180 गैर-जरूरी नौसैनिकों को भारत के कोच्चि से स्वदेश लौटाने की विशेष व्यवस्था की है। साथ ही, श्रीलंका के तट के पास अमेरिकी हमले में मारे गए नौसैनिकों के शव भी भारत के माध्यम से ईरान भेजे जा रहे हैं।

    सूत्रों के अनुसार, जहाज को 1 मार्च को तकनीकी खराबी के चलते आपातकालीन डॉकिंग की अनुमति मिली थी और यह 4 मार्च से कोच्चि में खड़ा है। जहाज पर कुल 183 चालक दल मौजूद थे, जिन्हें भारतीय नौसेना की सुविधाओं में रखा गया था। अब 180 गैर-जरूरी नाविकों को तुर्की एयरलाइन की उड़ान से पहले आर्मेनिया ले जाया जाएगा, और वहां से सड़क मार्ग के जरिए ईरान भेजा जाएगा। जबकि कुछ तकनीकी और आवश्यक कर्मचारी जहाज पर ही रहेंगे।

    यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब श्रीलंका के तट के पास अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी युद्धपोत IRIS Dena पर हमला किया था। इस हमले में कुल 130 नाविक सवार थे, जिनमें से 32 को बचा लिया गया, जबकि दर्जनों अभी भी लापता हैं।

    भारत इस समय गंभीर ऊर्जा संकट से जूझ रहा है। देश में रसोई गैस की कमी और जनजीवन पर असर पड़ रहा है। ऐसे में भारत ने अपने बंदरगाहों पर जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए ईरान के साथ लगातार कूटनीतिक संपर्क बनाए रखा। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरानी समकक्ष अब्बास अरागची से चार बार फोन पर बातचीत कर सुरक्षा और ऊर्जा जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की।

    भारतीय नौसेना ने ईरान की विशेष परिवहन मांग को पूरा किया। कोच्चि से उड़ान भरने वाले नौसैनिक और शवों की सुरक्षित हवाई व सड़क मार्ग से वापसी क्षेत्रीय सुरक्षा और भारत-ईरान कूटनीति के लिहाज से अहम मानी जा रही है। यह मिशन मध्य पूर्व युद्ध और दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव के बीच बेहद संवेदनशील और रणनीतिक कदम माना जा रहा है।