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  • Akasa Air की उड़ान को मिलेगी नई रफ्तार, हर साल 12 से ज्यादा विमान जुड़ेंगे, तीन साल में 500 से अधिक पायलटों की भर्ती

    Akasa Air की उड़ान को मिलेगी नई रफ्तार, हर साल 12 से ज्यादा विमान जुड़ेंगे, तीन साल में 500 से अधिक पायलटों की भर्ती

    नई दिल्ली । भारतीय विमानन क्षेत्र में तेजी से विस्तार कर रही Akasa Air ने आने वाले तीन वर्षों के लिए अपनी विस्तार योजना तैयार कर ली है। कंपनी की योजना हर साल 12 से ज्यादा नए विमान अपने बेड़े में शामिल करने की है। नए विमानों के साथ परिचालन का दायरा बढ़ाने के लिए एयरलाइन तीन साल में 500 से अधिक नए पायलटों की भर्ती भी करेगी। विमान डिलीवरी में सुधार के बाद कंपनी ने अपने विस्तार की गति बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके साथ ही घरेलू बाजार के साथ अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर भी एयरलाइन की मौजूदगी मजबूत करने की योजना है।

    Akasa Air के विस्तार की योजना ऐसे समय में सामने आई है, जब विमान निर्माता कंपनी Boeing की ओर से विमानों के उत्पादन और डिलीवरी में स्थिरता आने की उम्मीद बढ़ी है। विमानों की डिलीवरी में पहले आई बाधाओं के कारण एयरलाइन को पायलटों की भर्ती की गति सीमित करनी पड़ी थी। हालांकि, कंपनी ने अपने प्रशिक्षित पायलटों को बनाए रखा और अब नए विमानों की उपलब्धता बढ़ने के साथ भर्ती प्रक्रिया को फिर से तेज कर दिया है। एयरलाइन के पास फिलहाल 800 से अधिक पायलट हैं।

    कंपनी के अनुसार अगले दो से तीन वर्षों में 500 से ज्यादा पायलटों को जोड़ा जाएगा। इसके लिए कैडेट प्रोग्राम के साथ-साथ खुले बाजार से कमर्शियल पायलट लाइसेंस रखने वाले अनुभवी पायलटों की भर्ती भी की जाएगी। कैडेट प्रोग्राम के माध्यम से नए पायलट तैयार करने पर कंपनी का जोर रहेगा, जबकि परिचालन जरूरत के अनुसार अनुभवी पायलटों को भी सीधे भर्ती किया जाएगा। नए विमानों की संख्या बढ़ने के साथ प्रशिक्षित पायलटों की जरूरत भी बढ़ेगी, जिसे पूरा करने के लिए एयरलाइन ने पहले से तैयारी शुरू कर दी है।

    Akasa Air के बेड़े में Boeing 737 MAX विमान शामिल हैं। कंपनी की योजना आने वाले वर्षों में लगातार नए विमान जोड़ने की है। अगस्त के अंत तक भी बेड़े में कई नए विमान शामिल होने की उम्मीद जताई गई है। नए विमानों की उपलब्धता बढ़ने से एयरलाइन को अधिक उड़ानें संचालित करने, नए शहरों को जोड़ने और मौजूदा रूट्स पर क्षमता बढ़ाने का अवसर मिलेगा। इससे यात्रियों के लिए भी अधिक विकल्प उपलब्ध होने की संभावना है।

    कंपनी के विस्तार का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से जुड़ा है। Akasa Air आने वाले दो से तीन वर्षों में अपने विमानों की तैनाती में अंतरराष्ट्रीय रूट्स की हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत तक बढ़ाने की तैयारी कर रही है। फिलहाल एयरलाइन का बड़ा परिचालन घरेलू मार्गों पर केंद्रित है, लेकिन बेड़े में नए विमानों के शामिल होने के बाद विदेशों के लिए उड़ानों का नेटवर्क बढ़ाया जाएगा। कंपनी की रणनीति घरेलू और अंतरराष्ट्रीय परिचालन के बीच बेहतर संतुलन बनाने की है।

    एयरलाइन के मुताबिक आने वाले समय में उसके विमानों की तैनाती का अनुपात घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर करीब 60:40 तक पहुंच सकता है। नए विमान मिलने से सीट क्षमता में बढ़ोतरी होगी और कंपनी को अधिक यात्रियों तक पहुंचने का अवसर मिलेगा। अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के विस्तार से नए बाजारों में प्रवेश और राजस्व बढ़ाने की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।

    Akasa Air की यह योजना विमान बेड़े, पायलटों और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क तीनों स्तरों पर विस्तार का संकेत देती है। लगातार नए विमानों को शामिल करने और बड़ी संख्या में पायलटों की भर्ती से कंपनी अपने परिचालन को तेज करने की तैयारी में है। आने वाले तीन वर्षों में बेड़े का विस्तार और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की बढ़ती हिस्सेदारी Akasa Air को भारतीय विमानन बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद कर सकती है। साथ ही नए रोजगार अवसर पैदा होने से एविएशन क्षेत्र में करियर बनाने वाले युवाओं के लिए भी यह विस्तार महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

  • भारत-अमेरिका आर्थिक रिश्तों को नई उड़ान देने की तैयारी, बोइंग समझौते पर तेजी, ट्रंप प्रशासन ने निवेश और तकनीकी सहयोग पर दिया बड़ा संकेत

    भारत-अमेरिका आर्थिक रिश्तों को नई उड़ान देने की तैयारी, बोइंग समझौते पर तेजी, ट्रंप प्रशासन ने निवेश और तकनीकी सहयोग पर दिया बड़ा संकेत

    नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक आर्थिक साझेदारी को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति के संकेत मिले हैं। अमेरिका के भारत स्थित राजदूत सर्जियो गोर ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप स्वयं भारत के साथ व्यावसायिक संबंधों को मजबूत करने के प्रयासों का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच एक नई बोइंग डील लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, जिससे विमानन क्षेत्र के साथ-साथ व्यापक आर्थिक सहयोग को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी फोरम के नेतृत्व सम्मेलन को संबोधित करते हुए सर्जियो गोर ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हालिया बातचीत में बोइंग समझौता प्रमुख विषयों में शामिल रहा। उन्होंने इसे दोनों देशों के बढ़ते आर्थिक रिश्तों का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि अमेरिका इस समझौते को जल्द अंतिम रूप तक पहुंचाने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास कर रहा है।

    गोर ने कहा कि अमेरिकी प्रशासन चाहता है कि दुनिया के विभिन्न देश अत्याधुनिक और उच्च गुणवत्ता वाले विमानों का उपयोग करें तथा बोइंग इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि भारत के साथ प्रस्तावित नया समझौता दोनों देशों के लिए दीर्घकालिक आर्थिक और औद्योगिक सहयोग का मजबूत आधार बनेगा। उनके अनुसार अमेरिका भारत को केवल एक व्यापारिक साझेदार नहीं बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक आर्थिक सहयोगी के रूप में देखता है।

    उन्होंने यह भी कहा कि भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में तेजी से उभरती हुई शक्ति बन चुका है और अमेरिका इस विकास यात्रा का सहभागी बनना चाहता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उन्नत तकनीक, विमानन, रक्षा और अन्य आधुनिक क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उनका कहना था कि दोनों देशों की क्षमताओं का समन्वय भविष्य में वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को नई दिशा दे सकता है।

    निवेश के मुद्दे पर बोलते हुए अमेरिकी राजदूत ने कहा कि नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास ने इस वर्ष अमेरिका में निवेश आकर्षित करने के मामले में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। उन्होंने बताया कि लगभग 20.5 अरब डॉलर के नए निवेश को बढ़ावा देने में दूतावास की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनके अनुसार यह उपलब्धि भारत में कार्यरत अमेरिकी कंपनियों के बढ़ते विश्वास और स्थिर कारोबारी वातावरण का परिणाम है।

    गोर ने कहा कि अमेरिकी कंपनियां भारत में निवेश से पहले बौद्धिक संपदा की सुरक्षा, नियामकीय स्थिरता और कारोबारी माहौल जैसे विषयों पर जानकारी प्राप्त करती हैं। उन्होंने कहा कि भारत के प्रति बढ़ते भरोसे ने निवेशकों का विश्वास मजबूत किया है और दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध लगातार गहरे हो रहे हैं। उन्होंने उद्योग जगत को भरोसा दिलाया कि यदि किसी व्यावसायिक परियोजना के दौरान प्रशासनिक या प्रक्रियागत कठिनाइयां आती हैं तो अमेरिकी दूतावास हर संभव सहयोग के लिए उपलब्ध रहेगा।

    उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप विदेशी बाजारों में अमेरिकी कंपनियों के हितों को बढ़ावा देने के लिए व्यक्तिगत स्तर पर भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं। उनके अनुसार यदि किसी व्यावसायिक समझौते से अमेरिका में रोजगार के अवसर पैदा होते हैं तो राष्ट्रपति स्वयं भी उस दिशा में पहल करने से पीछे नहीं हटते। इससे स्पष्ट होता है कि अमेरिकी प्रशासन अंतरराष्ट्रीय आर्थिक साझेदारियों को रोजगार और औद्योगिक विकास से जोड़कर देख रहा है।

    भारत आज दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते विमानन बाजारों में शामिल है और आने वाले वर्षों में हजारों नए विमानों की आवश्यकता का अनुमान लगाया जा रहा है। ऐसे में प्रस्तावित बोइंग समझौता केवल विमान खरीद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह भारत-अमेरिका संबंधों में निवेश, तकनीक, रक्षा, ऊर्जा, एयरोस्पेस और औद्योगिक सहयोग के नए अवसर भी पैदा कर सकता है। दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है, जिसके लिए व्यापक आर्थिक सहयोग को लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है।

  • MP कैबिनेट: उज्जैन में 590 करोड़ से होगा हवाई पट्टी का विस्तार, बोइंग और एयरबस का होगा संचालन…

    MP कैबिनेट: उज्जैन में 590 करोड़ से होगा हवाई पट्टी का विस्तार, बोइंग और एयरबस का होगा संचालन…


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) ने उज्जैन हवाई पट्टी (Ujjain airstrip) के विस्तार के लिए 590 करोड़ रुपये की लागत से 437 एकड़ भूमि के अधिग्रहण को मंजूरी दे दी है। उड़ान योजना के तहत यहां बोइंग और एयरबस (Boeing and Airbus.) जैसे बड़े विमानों के संचालन के लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के साथ समझौता किया गया है। उज्जैन एक प्रमुख धार्मिक और पर्यटन केंद्र है जहां प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर (Mahakaleshwar Temple) स्थित है। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 2,923 करोड़ रुपये के 22 विकास कार्यों को मंजूरी दी है जिन्हें दिवाली 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।

    उज्जैन हवाई पट्टी का होगा विकास
    एक अधिकारी के अनुसार, केंद्र सरकार की उड़ान योजना के तहत उज्जैन हवाई पट्टी के विकास के लिए राज्य सरकार और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के बीच समझौता हुआ है ताकि यहां बोइंग और एयरबस 320 जैसे बड़े विमानों का संचालन हो सके। सरकारी हवाई पट्टी के विकास और विस्तार के लिए आवश्यक समझौते और समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हो चुके हैं।


    437.5 एकड़ जमीन के अधिग्रहण को मंजूरी

    अधिकारी ने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार की कैबिनेट ने इस परियोजना के लिए 437.5 एकड़ जमीन के अधिग्रहण को मंजूरी दी है। इसके लिए 590 करोड़ रुपये की रकम मंजूर की गई है।उज्जैन एक धार्मिक नगरी है। महाकालेश्वर मंदिर की वजह से यह पर्यटन के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण है। महाकालेश्वर मंदिर देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। उज्जैन में सांदीपनी आश्रम भी है।


    महाकुंभ के कामों को पूरा करने के लिए तय की डेडलाइन

    अधिकारी ने बताया कि उज्जैन में सिंहस्थ महाकुंभ का आयोजन होता है जहां दूर-दूर से बहुत से श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। उज्जैन सेवा क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ता हुआ शहर है इसलिए यहां की हवाई पट्टी को सुधारना बहुत जरूरी है। सिंहस्थ मेले के लिए बनी कैबिनेट कमेटी ने तय किया है कि साल 2028 के महाकुंभ से जुड़े सभी कामों को दिवाली 2027 तक पूरा कर लिया जाए।


    9 अप्रैल से गेहूं की खरीद

    कैबिनेट ने शिक्षा, खेती, सिंचाई, प्रशासन और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने वाली योजनाओं के लिए 16,720 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। साथ ही कैबिनेट ने किसानों के हित में एक बड़ा फैसला लेते हुए गेहूं की खरीद 10 अप्रैल के बजाय 9 अप्रैल से ही शुरू करने की मंजूरी दे दी है।


    विकास कार्यों का होगा थर्ड पार्टी ऑडिट

    वहीं मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कैबिनेट समिति की 5वीं बैठक में कहा कि बुनियादी ढांचे के सभी काम अच्छी क्वालिटी के साथ तय समय पर पूरे होने चाहिए। समिति ने 2,923.84 करोड़ रुपये के 22 कामों को मंजूरी दी। सीएम मोहन यादव ने निर्देश दिया कि सिंहस्थ 2028 के कामों का थर्ड पार्टी ऑडिट कराया जाए ताकि काम की गुणवत्ता पक्की हो सके।


    100 किलोमीटर के दायरे में होगे काम

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सिंहस्थ 2028 के लिए उज्जैन में बन रहे भवनों का निर्माण ऐसा हो कि वे बाद में भी वार्षिक कार्यक्रमों के काम आ सकें। उन्होंने निर्देश दिया कि महाकाल मंदिर और अन्य तीर्थों तक पहुंचने के लिए बेहतर सड़कें बनाई जाएं। मुख्यमंत्री ने दूर से आने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए उज्जैन के 100 किलोमीटर के दायरे में होमस्टे, पार्किंग और जन-सुविधाओं को बढ़ाने पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने क्षिप्रा नदी पर पैदल चलने वालों के लिए एक अलग पुल बनाने का भी आदेश दिया।