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  • फिल्म इंडस्ट्री के अनुभव साझा करतीं त्रिधा चौधरी: पहचान बनाने के लिए करना पड़ता है संघर्ष

    फिल्म इंडस्ट्री के अनुभव साझा करतीं त्रिधा चौधरी: पहचान बनाने के लिए करना पड़ता है संघर्ष


    नई दिल्ली । फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने वाले नए कलाकारों के लिए सफलता का रास्ता हमेशा आसान नहीं होता। पहचान बनाने की दौड़ में कई बार कठिन फैसले लेने पड़ते हैं और परिस्थितियों के अनुसार समझौते भी करने पड़ते हैं। इसी विषय पर अभिनेत्री त्रिधा चौधरी ने हाल ही में अपने अनुभव साझा करते हुए इंडस्ट्री की हकीकत पर खुलकर बात की है। उन्होंने कहा कि समय के साथ इंडस्ट्री जरूर बदली है, लेकिन शुरुआती दौर में संघर्ष और समझौते आज भी वास्तविकता का हिस्सा हैं।

    त्रिधा चौधरी ने बताया कि आज के समय में नए कलाकार पहले की तुलना में अधिक जागरूक हो गए हैं और किसी भी प्रोजेक्ट को साइन करने से पहले उसके हर पहलू को समझने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि अब कलाकार केवल उत्साह में आकर निर्णय नहीं लेते, बल्कि करियर के दीर्घकालिक प्रभावों को ध्यान में रखकर सोच-समझकर कदम उठाते हैं। इसके बावजूद शुरुआती दौर में कई बार ऐसे हालात बनते हैं जहां उन्हें परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालना पड़ता है।

    अपने निजी अनुभव साझा करते हुए त्रिधा ने कहा कि उन्होंने कई बड़े प्रोडक्शन हाउस के साथ काम किया है, जहां कई बार उन्हें अपनी फीस में भी समझौता करना पड़ा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह हमेशा मजबूरी नहीं होती, बल्कि कई बार अनुभव, अवसर और बड़े बैनर के साथ काम करने की सीख को देखते हुए ऐसा निर्णय लिया जाता है। उनके अनुसार बड़े प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बनना करियर को मजबूत करने में मदद करता है, भले ही शुरुआती चरण में कुछ समझौते करने पड़ें।

    उन्होंने यह भी बताया कि कई बार कलाकारों को तय समय से अधिक काम करना पड़ता है, लेकिन इसे इंडस्ट्री का हिस्सा माना जाता है। नए कलाकारों के लिए यह अनुभव सीखने का अवसर भी बन जाता है, क्योंकि बड़े प्रोडक्शन हाउस के साथ काम करने से उन्हें प्रोफेशनल माहौल को समझने का मौका मिलता है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि कुछ स्थितियां ऐसी होती हैं जो नए कलाकारों को शोषण जैसी लग सकती हैं, खासकर जब वे इंडस्ट्री में खुद को स्थापित करने की कोशिश कर रहे होते हैं।

    त्रिधा चौधरी ने यह भी कहा कि बड़े बैनर और प्रोडक्शन हाउस कलाकारों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे न केवल फिल्मों में काम का अवसर देते हैं, बल्कि प्रचार, पहचान और करियर को स्थिरता देने में भी मदद करते हैं। उनके अनुसार इंडस्ट्री का यह संतुलन समझना जरूरी है, जहां एक तरफ संघर्ष और समझौते हैं, वहीं दूसरी तरफ सीखने और आगे बढ़ने के अवसर भी मौजूद हैं।

    इन दिनों त्रिधा चौधरी अपनी नई फिल्म को लेकर भी चर्चा में हैं, जिसमें वह एक प्रमुख भूमिका निभा रही हैं। यह फिल्म केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें समाज और देश से जुड़े कई गंभीर विषयों को भी दर्शाया गया है। उन्होंने कहा कि इस तरह की कहानियां दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती हैं और फिल्म को एक अलग गहराई देती हैं।

    कुल मिलाकर, त्रिधा चौधरी के इस बयान ने एक बार फिर फिल्म इंडस्ट्री के उस पहलू को सामने रखा है जहां नए कलाकारों को अपने करियर की शुरुआत में संघर्ष, अवसर और समझौते—तीनों का सामना करना पड़ता है।

  • स्टारडम से गिरावट तक अरमान कोहली का संघर्ष अक्षय-सनी भी नहीं बचा सके डूबता करियर

    स्टारडम से गिरावट तक अरमान कोहली का संघर्ष अक्षय-सनी भी नहीं बचा सके डूबता करियर


    नई दिल्ली:
    बॉलीवुड में कई ऐसे सितारे रहे हैं जिनकी किस्मत ने बड़ा साथ नहीं दिया और अरमान कोहली का नाम भी उन्हीं में शामिल है एक समय था जब उनके पिता राजकुमार कोहली ने अपने बेटे के करियर को संवारने के लिए अपनी पूरी ताकत और पूंजी दांव पर लगा दी थी इसके बावजूद अरमान कोहली वह मुकाम हासिल नहीं कर सके जिसकी उनसे उम्मीद की जा रही थी

    वर्ष 2002 में रिलीज हुई फिल्म जानी दुश्मन: एक अनोखी कहानी में अक्षय कुमार सनी देओल सुनील शेट्टी और मनीषा कोइराला जैसे बड़े सितारों के बीच भी फिल्म का मुख्य केंद्र अरमान कोहली ही थे उनके पिता राजकुमार कोहली ने इस फिल्म के जरिए अपने बेटे के डूबते करियर को संवारने की पूरी कोशिश की लेकिन यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप साबित हुई हालांकि बाद में यह टीवी पर जरूर लोकप्रिय हो गई

    अरमान कोहली का जन्म एक फिल्मी परिवार में हुआ था जहां उनके पिता 70 और 80 के दशक के मशहूर निर्माता निर्देशक थे और उनकी मां निशि कोहली भी अपने समय की एक सफल अभिनेत्री रही हैं ऐसे माहौल में उनका बचपन फिल्मों और बड़े सितारों के बीच बीता जिससे उन्हें इंडस्ट्री में शुरुआत से ही कई मौके मिले

    लेकिन करियर की शुरुआत से ही उनके फैसलों ने उनके भविष्य पर गहरा असर डाला 1992 में उन्हें दीवाना फिल्म में दिव्या भारती के साथ काम करने का मौका मिला लेकिन सेट पर उनके व्यवहार के कारण उन्हें इस फिल्म से बाहर कर दिया गया बाद में यह फिल्म शाहरुख खान के लिए एक बड़ी सफलता साबित हुई और उन्होंने रातोंरात सुपरस्टार का दर्जा हासिल कर लिया

    इसके बाद बाजीगर और दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स भी उनके हाथ से निकल गए क्योंकि उन्होंने उन भूमिकाओं को स्वीकार करने से मना कर दिया जो उन्हें लीड रोल के बराबर नहीं लगती थीं इन फैसलों का सीधा फायदा अन्य कलाकारों को मिला और वे फिल्में इतिहास बन गईं

    इसी दौरान उनके पिता ने लगातार उन्हें लॉन्च करने की कोशिश की लेकिन विरोधी अनाम और जुआरी जैसी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर असफल रहीं हालांकि फिल्म कहर में सनी देओल और सुनील शेट्टी जैसे सितारों के साथ काम करने के बाद भी उन्हें बड़ा ब्रेक नहीं मिला

    2015 में सलमान खान की सिफारिश पर उन्हें प्रेम रतन धन पायो में एक नकारात्मक भूमिका मिली और फिल्म सफल भी रही लेकिन यह उनके करियर को नई ऊंचाई नहीं दे सकी

    2013 में रियलिटी शो बिग बॉस 7 ने उन्हें एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया लेकिन इस बार वजह नकारात्मक थी शो में उनके गुस्से और विवादों ने उनकी छवि को काफी नुकसान पहुंचाया एक घटना के दौरान सोफिया हयात के साथ विवाद इतना बढ़ गया कि पुलिस तक मामला पहुंच गया और उन्हें राष्ट्रीय टेलीविजन पर गिरफ्तार भी किया गया

    यह घटना उनके करियर के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हुई और उनकी छवि एक गुस्सैल और अस्थिर व्यक्ति के रूप में स्थापित हो गई आज अरमान कोहली भले ही एक्टिंग से दूर हैं लेकिन वह अपने नए प्रोजेक्ट्स और निर्देशन की योजना के साथ इंडस्ट्री में वापसी की कोशिश में जुटे हुए हैं

  • उतरन की तपस्या से बिग बॉस की स्ट्रॉन्ग कंटेस्टेंट तक, रश्मि देसाई का दमदार सफर..

    उतरन की तपस्या से बिग बॉस की स्ट्रॉन्ग कंटेस्टेंट तक, रश्मि देसाई का दमदार सफर..


    नई दिल्ली। फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में कुछ कलाकार ऐसे होते हैं जो धीरे धीरे अपनी जगह बनाते हैं और फिर एक दिन दर्शकों के दिलों पर छा जाते हैं। रश्मि देसाई उन्हीं चेहरों में से एक हैं। 13 फरवरी को अपना 40वां जन्मदिन मना रहीं रश्मि का करियर इस बात का सबूत है कि मेहनत और धैर्य के दम पर कोई भी कलाकार अपनी पहचान गढ़ सकता है।

    रश्मि ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत भोजपुरी सिनेमा से की थी। शुरुआती दौर आसान नहीं था। उन्होंने कई कम बजट और बी ग्रेड फिल्मों में भी काम किया। साल 2002 में आई फिल्म कन्यादान से उन्होंने इंडस्ट्री में कदम रखा। उस समय शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यही अभिनेत्री आगे चलकर छोटे पर्दे की बड़ी स्टार बनेगी। लेकिन रश्मि ने हर मौके को सीखने और आगे बढ़ने का जरिया बनाया।

    उनके करियर का असली मोड़ साल 2008 में आया जब टीवी शो उतरन शुरू हुआ। इस सीरियल में उन्होंने तपस्या का किरदार निभाया जो ग्रे शेड लिए हुए था। इस भूमिका में निगेटिव और इमोशनल दोनों रंग थे। रश्मि ने इस किरदार को इतनी गहराई से निभाया कि वह घर घर में पहचानी जाने लगीं। उतरन उस समय का बेहद लोकप्रिय शो बना और तपस्या का नाम रश्मि की पहचान बन गया।

    इसके बाद उन्होंने कई टीवी शोज में काम किया। दिल से दिल तक में सिद्धार्थ शुक्ला के साथ उनकी जोड़ी दर्शकों को पसंद आई। शो ने अच्छी टीआरपी हासिल की और रश्मि की लोकप्रियता और बढ़ी। टीवी के साथ साथ उन्होंने बॉलीवुड में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। दबंग 2 में उनका छोटा सा रोल नजर आया। इसके अलावा ये लम्हे जुदाई के सबनम मौसी और सुपरस्टार जैसी फिल्मों में भी उन्होंने काम किया। भले ही फिल्मों में उनकी भूमिकाएं सीमित रहीं लेकिन उन्होंने हर मंच पर खुद को साबित करने की कोशिश जारी रखी।

    रश्मि की पर्सनैलिटी का एक अलग पहलू तब सामने आया जब उन्होंने बिग बॉस 13 में हिस्सा लिया। इस रियलिटी शो ने उनकी छवि को नया आयाम दिया। दर्शकों ने उन्हें सिर्फ एक अभिनेत्री के रूप में नहीं बल्कि एक संवेदनशील और मजबूत महिला के रूप में देखा। शो में सिद्धार्थ शुक्ला के साथ उनकी नोकझोंक और बहसें काफी चर्चा में रहीं। दोनों पहले एक साथ काम कर चुके थे और बिग बॉस में उनकी टकराहट ने शो को और दिलचस्प बना दिया।

    बिग बॉस के बाद रश्मि की फैन फॉलोइंग में जबरदस्त इजाफा हुआ। उन्होंने यह साबित किया कि वे केवल एक किरदार तक सीमित नहीं हैं बल्कि असल जिंदगी में भी चुनौतियों का सामना करने का हौसला रखती हैं। 40 की उम्र में भी वे इंडस्ट्री में सक्रिय हैं और नए प्रोजेक्ट्स के जरिए दर्शकों से जुड़ी हुई हैं। उनका सफर संघर्ष से सफलता तक की ऐसी कहानी है जो यह सिखाती है कि शुरुआत चाहे जहां से हो मंजिल मेहनत से ही तय होती है।