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  • 2 घंटा 41 मिनट की फिल्म जिसने बदली किस्मत प्रोड्यूसर की नींद बनी सुपरहिट का राज

    2 घंटा 41 मिनट की फिल्म जिसने बदली किस्मत प्रोड्यूसर की नींद बनी सुपरहिट का राज


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसी फिल्में बनी हैं जिनकी सफलता के पीछे दिलचस्प और हैरान करने वाली कहानियां छिपी हुई हैं लेकिन साल 1970 में रिलीज हुई जॉनी मेरा नाम का किस्सा उन सब में सबसे अलग माना जाता है यह फिल्म करीब 2 घंटा 41 मिनट लंबी थी और जब इसका ट्रायल शो रखा गया तो एक ऐसी घटना हुई जिसने आगे चलकर इसे ब्लॉकबस्टर बना दिया

    इस फिल्म में देव आनंद और हेमा मालिनी मुख्य भूमिका में नजर आए थे दोनों की जोड़ी ने पर्दे पर ऐसा जादू चलाया कि दर्शक दीवाने हो गए फिल्म का निर्देशन विजय आनंद ने किया था जबकि इसके निर्माता गुलशन राय थे

    अब इस फिल्म की सफलता का सबसे दिलचस्प पहलू सामने आता है बताया जाता है कि जब इस फिल्म का ट्रायल शो चल रहा था तब निर्माता गुलशन राय उसे देखते हुए सो गए थे आम तौर पर यह किसी भी निर्माता के लिए चिंता की बात हो सकती है क्योंकि इसका मतलब यह निकाला जाता है कि फिल्म दर्शकों को बांध नहीं पा रही है लेकिन यहां मामला बिल्कुल उल्टा निकला

    उस दौर में फिल्म इंडस्ट्री में यह धारणा बन चुकी थी कि अगर गुलशन राय किसी फिल्म के ट्रायल के दौरान सो जाते हैं तो वह फिल्म जरूर हिट होती है और अगर वह पूरी फिल्म जागकर देख लेते हैं तो उसके फ्लॉप होने की संभावना बढ़ जाती है दिलचस्प बात यह है कि यह मान्यता सिर्फ एक बार नहीं बल्कि कई बार सही साबित हुई

    ज्वेल थीफ और जॉनी मेरा नाम दोनों के ट्रायल में गुलशन राय सो गए थे और दोनों ही फिल्में सुपरहिट साबित हुईं वहीं जब वह जोशीला के ट्रायल में नहीं सोए तो वह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल रही इस वजह से यह किस्सा और भी ज्यादा चर्चित हो गया

    जॉनी मेरा नाम एक क्राइम एक्शन ड्रामा फिल्म थी जिसमें रोमांच सस्पेंस और म्यूजिक का शानदार मेल देखने को मिला फिल्म के गाने भी बेहद लोकप्रिय हुए खास तौर पर पल भर के लिए हमें कोई प्यार कर ले आज भी लोगों की जुबान पर रहता है इस फिल्म ने हेमा मालिनी को रातोंरात स्टार बना दिया और वह दर्शकों के दिलों में बस गईं

    बॉक्स ऑफिस पर इस फिल्म ने जबरदस्त कमाई की और यह साल 1970 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन गई यह देव आनंद और हेमा मालिनी की पहली फिल्म थी और उनकी केमिस्ट्री को दर्शकों ने खूब पसंद किया इसके बाद दोनों ने कई और फिल्मों में साथ काम किया और उनकी जोड़ी हिट मानी जाने लगी

    इस पूरी कहानी से यह साफ होता है कि कभी कभी फिल्म की सफलता सिर्फ उसकी कहानी या स्टारकास्ट पर ही निर्भर नहीं होती बल्कि उससे जुड़े किस्से और विश्वास भी उसे खास बना देते हैं जॉनी मेरा नाम सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि हिंदी सिनेमा के इतिहास का एक दिलचस्प अध्याय है जहां एक प्रोड्यूसर की नींद ने सफलता की नई परिभाषा लिख दी

  • राज कपूर के एक बयान से टूटा सपना लता ने छोड़ी फिल्म जो बाद में बनी ब्लॉकबस्टर

    राज कपूर के एक बयान से टूटा सपना लता ने छोड़ी फिल्म जो बाद में बनी ब्लॉकबस्टर


    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा और संगीत की दुनिया में कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जो समय के साथ और भी दिलचस्प हो जाती हैं। ऐसी ही एक कहानी जुड़ी है सुरों की मलिका लता मंगेशकर और शोमैन राज कपूर की महत्वाकांक्षी फिल्म सत्यम शिवम सुंदरम से। यह फिल्म साल 1978 में रिलीज हुई और अपने अनोखे विषय और प्रस्तुति के कारण सुपरहिट साबित हुई लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस फिल्म के लिए पहली पसंद जीनत अमान नहीं बल्कि खुद लता मंगेशकर थीं।

    फिल्म की कहानी रूपा नाम की एक ऐसी लड़की के इर्दगिर्द घूमती है जिसका चेहरा बचपन में जल जाता है लेकिन उसकी आवाज इतनी मधुर होती है कि हर कोई उसका दीवाना बन जाता है। राज कपूर ने इस किरदार की कल्पना एक साधारण चेहरे और दिव्य आवाज वाली महिला के रूप में की थी और उनके मन में इस छवि के लिए लता मंगेशकर बिल्कुल फिट बैठती थीं। यही वजह थी कि वह उन्हें इस फिल्म में कास्ट करना चाहते थे और यह किरदार उनके इर्दगिर्द ही गढ़ा गया था।

    लेकिन कहानी में मोड़ तब आया जब राज कपूर का एक बयान गलत तरीके से लिया गया। उन्होंने सुंदरता को लेकर एक दार्शनिक बात कही थी जिसमें उन्होंने यह समझाने की कोशिश की थी कि असली सुंदरता बाहरी रूप में नहीं बल्कि दृष्टिकोण में होती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कभी कभी बेहद खूबसूरत आवाज सुनने के बाद जब हम उस व्यक्ति को देखते हैं तो वह हमारी कल्पना से अलग हो सकता है। इस बात को लता मंगेशकर से जोड़कर देखा गया और यह उन्हें बेहद चुभ गया।

    इस टिप्पणी ने उन्हें इतना आहत किया कि उन्होंने फिल्म में काम करने से साफ इनकार कर दिया। बात यहीं नहीं रुकी उन्होंने फिल्म के लिए गाना गाने से भी मना कर दिया जो अपने आप में एक बड़ा झटका था क्योंकि उनकी आवाज इस कहानी की आत्मा मानी जा रही थी। राज कपूर और संगीतकार लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के लिए यह स्थिति बेहद मुश्किल थी क्योंकि फिल्म की परिकल्पना ही लता की आवाज के इर्दगिर्द बनी थी।

    हालांकि बाद में काफी मनाने और समझाने के बाद लता मंगेशकर इस बात के लिए राजी हुईं कि वह फिल्म का टाइटल ट्रैक गाएंगी। उनके गाए इस गीत ने फिल्म को एक अलग ही ऊंचाई दी और आज भी वह गाना लोगों के दिलों में खास जगह रखता है।

    दूसरी ओर फिल्म में रूपा का किरदार जीनत अमान को मिला और उन्होंने अपने अभिनय और स्क्रीन प्रेजेंस से इस भूमिका को यादगार बना दिया। उनके साथ शशि कपूर की जोड़ी ने भी दर्शकों का दिल जीत लिया और फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता बनकर उभरी।

    यह घटना न केवल फिल्म इतिहास का एक दिलचस्प अध्याय है बल्कि यह भी दिखाती है कि कभी कभी एक छोटी सी बात किस तरह बड़े फैसलों को प्रभावित कर देती है। अगर उस वक्त हालात अलग होते तो शायद यह फिल्म और इसकी पहचान कुछ और ही होती लेकिन यही अनिश्चितता सिनेमा को इतना खास बनाती है।

  • एक तस्वीर ने बदली जिंदगी परवीन बाबी से मिलने आया शख्स बना 80s का खतरनाक विलेन

    एक तस्वीर ने बदली जिंदगी परवीन बाबी से मिलने आया शख्स बना 80s का खतरनाक विलेन

    नई दिल्ली: हिंदी सिनेमा के 80 और 90 के दशक को याद किया जाए तो जहां एक तरफ दमदार हीरो का दौर था, वहीं दूसरी तरफ खतरनाक विलेन भी फिल्मों की जान हुआ करते थे. इसी दौर में एक ऐसा विदेशी चेहरा बार-बार बड़े पर्दे पर दिखाई देता था, जिसने अपनी मजबूत कद-काठी और डरावने अंदाज से दर्शकों के दिलों में खास जगह बना ली. यह अभिनेता थे बॉब क्रिस्टो, जिनकी कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है.

    20 मार्च 1938 को सिडनी में जन्मे बॉब क्रिस्टो का असली नाम रॉबर्ट जॉन क्रिस्टो था. वह पेशे से सिविल इंजीनियर थे और पढ़ाई के साथ-साथ थिएटर में भी रुचि रखते थे. उनकी जिंदगी सामान्य ढंग से चल रही थी, लेकिन एक दुखद घटना ने सबकुछ बदल दिया. उनकी पत्नी का एक सड़क हादसे में निधन हो गया, जिससे वह पूरी तरह टूट गए और उनकी जिंदगी एक नए मोड़ की ओर मुड़ गई.

    उनकी जिंदगी का सबसे दिलचस्प अध्याय तब शुरू हुआ जब उन्होंने एक मैगजीन के कवर पर मशहूर अभिनेत्री परवीन बाबी की तस्वीर देखी. इस एक तस्वीर ने उन पर ऐसा असर डाला कि वह उनसे मिलने भारत चले आए. मुंबई पहुंचकर उन्होंने परवीन बाबी को ढूंढ निकाला और उनसे मुलाकात की. यही मुलाकात उनकी किस्मत बदलने वाली साबित हुई.

    परवीन बाबी की मदद से उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में एंट्री मिली और फिल्म अब्दुल्ला के जरिए उन्हें पहला बड़ा मौका मिला. इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. 80 और 90 के दशक में वह बॉलीवुड के सबसे चर्चित विदेशी विलेन बन गए. उनकी दमदार पर्सनैलिटी और एक्शन सीन ने उन्हें बाकी कलाकारों से अलग पहचान दिलाई.

    उन्होंने कई बड़ी फिल्मों में काम किया, जिनमें कालिया, नमक हलाल, मर्द और मिस्टर इंडिया शामिल हैं. खास बात यह रही कि उनकी भिड़ंत अक्सर महानायक अमिताभ बच्चन और सुपरस्टार धर्मेंद्र जैसे सितारों के साथ होती थी. जब भी वह स्क्रीन पर इन बड़े सितारों के सामने आते, तो थिएटर में सीटियां और तालियां गूंज उठती थीं.

    बॉब क्रिस्टो की लंबी-चौड़ी काया और रौबदार व्यक्तित्व उन्हें परफेक्ट विलेन बनाता था. उन्होंने अपने करियर में करीब 200 फिल्मों में काम किया और हिंदी के साथ-साथ साउथ सिनेमा में भी अपनी पहचान बनाई. उनकी मौजूदगी ही किसी भी फिल्म में खतरे का एहसास पैदा कर देती थी.

    हालांकि समय के साथ उन्होंने फिल्मों से दूरी बना ली और बेंगलुरु में बस गए. वहां उन्होंने योगा इंस्ट्रक्टर के रूप में एक नई जिंदगी शुरू की. ग्लैमर की दुनिया से दूर वह एक साधारण जीवन जीने लगे.

    20 मार्च 2011 को 72 साल की उम्र में उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी यादें आज भी फिल्मों के जरिए जिंदा हैं. बॉब क्रिस्टो की कहानी यह साबित करती है कि कभी-कभी एक छोटा सा पल या एक तस्वीर भी किसी इंसान की पूरी जिंदगी बदल सकती है.

  • गोविंदा का जन्मदिन स्पेशल बॉलीवुड से राजनीति तक गोविंदा का रंगीन सफर

    गोविंदा का जन्मदिन स्पेशल बॉलीवुड से राजनीति तक गोविंदा का रंगीन सफर

    नई दिल्ली ।मुंबई बॉलीवुड के सुपरस्टार गोविंदा आज भी फिल्मों और डांस के मामले में अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं।उनका नाम आते ही दिमाग में एक ही बात आती है कॉमेडी डांस और शानदार अभिनय। गोविंदा का असली नाम गोविंदा आहूजा है और उनका जन्म 21 दिसंबर 1963 को मुंबई महाराष्ट्र में हुआ।वह बॉलीवुड के सबसे सफल और चर्चित अभिनेताओं में से एक हैं जिनका करियर अब तक कई दशकों तक चला है। 
    गोविंदा ने अपने करियर की शुरुआत 1986 में फिल्म इल्जाम से की थी जिसमें उनके साथ नीलम शशि कपूर और शत्रुघ्न सिन्हा जैसे सितारे थे। लेकिन उन्होंने अपनी पहचान कॉमेडी हीरो के रूप में बनाई और उनकी फिल्में दर्शकों के दिलों में हमेशा के लिए बसी रही। उनके फनी अंदाज बेहतरीन टाइमिंग और कॉमिक सीन ने उन्हें हर वर्ग के दर्शकों के बीच लोकप्रिय बना दिया।

    सुपरहिट फिल्में और डांस आइकन
    गोविंदा की फिल्मों का जादू आज भी लोगों के दिलों में बसा हुआ है। उनकी फिल्मों जैसे राजा बाबू आंखें कुली नंबर वन आंदोलन बड़े मियां छोटे मियां दीवाना मस्ताना दुल्हे राजा अनाड़ी नंबर 1 शोला और शबनम राजा भैया जोरू का गुलाम हीरो नंबर 1 बेटी नंबर 1 और घर घर की कहानी ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाया।इन फिल्मों में उनका अभिनय हास्य और शानदार डांस स्टाइल ने उन्हें दर्शकों का सबसे पसंदीदा स्टार बना दिया।

    गोविंदा का डांस भी कमाल का था।उनके डांस नंबर जैसे किसी डिस्को में जाएं सोना कितना सोना है तुझको ही दुल्हन बनाऊंगा और जोरू का गुलाम आज भी पार्टी और डांस के इवेंट्स में गाए जाते हैं।उनकी एनर्जी और स्टाइल ने उन्हें 90 और 2000 के दशक में डांस आइकन बना दिया। उनके डांस स्टेप्स और चुलबुले अंदाज को आज भी हर डांसर फॉलो करता है।

    राजनीतिक सफर

    गोविंदा का फिल्मी करियर ही नहीं उनकी राजनीतिक यात्रा भी उतनी ही दिलचस्प रही है। 2004 में गोविंदा ने राजनीति में कदम रखा और मुंबई उत्तर निर्वाचन क्षेत्र से भारतीय संसद के सदस्य के रूप में सेवा दी। वह कांग्रेस पार्टी से जुड़े और इस पार्टी के तहत उन्होंने 2004 से 2009 तक लोकसभा में अपनी भूमिका निभाई। फिल्मों और राजनीति के बीच अपने करियर को संतुलित करते हुए गोविंदा ने यह साबित किया कि वह सिर्फ एक अभिनेता नहीं बल्कि एक नेता भी हैं जो जनता की सेवा करना चाहते हैं। बाद में उन्होंने शिवसेना से जुड़ने का फैसला किया और पार्टी के साथ सक्रिय भूमिका निभाई। गोविंदा को उनके समर्थक उनकी ईमानदारी और मेहनत के लिए सराहते हैं।

    गोविंदा का व्यक्तित्व और विरासत

    गोविंदा का करियर आज भी दर्शकों के दिलों में जिंदा है। उनका व्यक्तित्व और फिल्मों में किया गया काम उन्हें हमेशा याद दिलाता रहेगा। चाहे वह उनकी अनोखी कॉमिक टाइमिंग हो या फिर उनका अद्भुत डांस स्टाइल गोविंदा ने बॉलीवुड को ऐसी विरासत दी है जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। आज भी वह एक प्रेरणा बने हुए हैं खासकर युवा पीढ़ी के लिए। उनकी कड़ी मेहनत ईमानदारी और कड़ी मेहनत ने उन्हें केवल एक अभिनेता ही नहीं बल्कि एक आदर्श भी बना दिया है।

    गोविंदा का बॉलीवुड से राजनीति तक का सफर रंगीन शानदार और प्रेरणादायक रहा है। उनका करियर हर किसी के लिए एक मिसाल है कि अगर आप मेहनत करें और दिल से अपने काम को प्यार करें तो सफलता मिलनी तय है। गोविंदा को उनके जन्मदिन पर ढेर सारी शुभकामनाएं और आगे आने वाले दिनों में और अधिक सफलता की कामना।