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  • मंदाकिनी का बड़ा खुलासा फिल्मों में काम के बाद भी नहीं मिली फीस बताया कैसा था उस दौर का माहौल

    मंदाकिनी का बड़ा खुलासा फिल्मों में काम के बाद भी नहीं मिली फीस बताया कैसा था उस दौर का माहौल


    नई दिल्ली। 1985 में रिलीज हुई फिल्म राम तेरी गंगा मैली ने मंदाकिनी को रातोंरात पहचान दिला दी थी। राज कपूर के निर्देशन में बनी इस फिल्म में मंदाकिनी ने राजीव कपूर के साथ मुख्य भूमिका निभाई थी। फिल्म की कहानी के साथ इसके कई दृश्य और गाने भी उस समय काफी चर्चा में रहे थे। फिल्म की सफलता ने मंदाकिनी को हिंदी सिनेमा की चर्चित अभिनेत्रियों में शामिल कर दिया था। अब फिल्म के रिलीज होने के कई साल बाद मंदाकिनी ने अपने फिल्मी करियर के शुरुआती दौर से जुड़ी कुछ ऐसी बातें साझा की हैं जो काफी चर्चा में हैं।

    मंदाकिनी ने न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए एक इंटरव्यू में अपने करियर के दिनों को याद किया। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि उस समय फिल्म इंडस्ट्री का काम करने का तरीका आज के मुकाबले काफी अलग था। मंदाकिनी के मुताबिक उन्होंने अपने करियर में करीब 16 से 17 फिल्मों में काम किया लेकिन उन्हें उन फिल्मों की पूरी फीस नहीं मिली। उन्होंने उस दौर को याद करते हुए फिल्म सेट के माहौल को बेहद अनौपचारिक और घर जैसा बताया।

    अभिनेत्री ने बताया कि फिल्मों में काम करने का अनुभव उनके लिए काफी अच्छा रहा। उनके अनुसार कलाकारों के बीच आपसी मेलजोल ज्यादा था और सेट पर सभी लोग साथ मिलकर समय बिताते थे। कलाकार एक साथ खाना खाते थे और किसी दूसरे कलाकार से मिलने के लिए पहले से अनुमति लेने जैसी औपचारिकता नहीं होती थी। लोग एक दूसरे के कमरे में भी आसानी से जा सकते थे। मंदाकिनी ने कहा कि उस समय का माहौल उन्हें काफी सहज और परिवार जैसा महसूस होता था।

    मंदाकिनी ने उस दौर के फिल्मी कॉन्ट्रैक्ट को लेकर भी अपनी यादें साझा कीं। उन्होंने बताया कि उस समय फिल्मों को साइन करने की प्रक्रिया काफी अनौपचारिक हुआ करती थी। कई बार कलाकारों से पहले फिल्म साइन करने के लिए कहा जाता था और भुगतान की बात बाद में होती थी। इस वजह से कई मौकों पर कलाकारों को अपनी फीस को लेकर इंतजार करना पड़ता था। मंदाकिनी ने इसी संदर्भ में बताया कि उनके साथ भी कई फिल्मों में ऐसा हुआ।

    उन्होंने यह भी बताया कि कभी कभी वह बिना फीस लिए भी फिल्मों में काम करने के लिए तैयार हो जाती थीं। खासकर जब फिल्म से जुड़े लोग या उनके साथी कलाकार कुछ दिनों के काम के लिए मदद मांगते थे तो वह सहयोग कर देती थीं। उनके अनुसार उस समय इंडस्ट्री में काम करने का तरीका काफी अलग था और कई चीजें औपचारिक समझौते के बजाय आपसी भरोसे और बातचीत के आधार पर तय हो जाती थीं।

    मंदाकिनी के करियर की सबसे चर्चित फिल्मों में राम तेरी गंगा मैली का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। राज कपूर के निर्देशन में बनी यह फिल्म 1985 में रिलीज हुई थी। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया था और मंदाकिनी को इसके बाद बड़ी पहचान मिली। फिल्म में उनके कई दृश्य उस समय चर्चा का विषय बने थे। खासतौर पर झरने के नीचे फिल्माया गया दृश्य और ब्रेस्ट फीडिंग सीन लंबे समय तक लोगों के बीच चर्चा में रहे।

    राम तेरी गंगा मैली को फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में भी सफलता मिली थी। फिल्म को विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार मिले थे। इसके संगीत और निर्देशन की भी काफी सराहना हुई थी। फिल्म की सफलता ने मंदाकिनी के करियर को नई ऊंचाई दी और वह दर्शकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो गईं।

    अब इतने वर्षों बाद जब मंदाकिनी ने अपने शुरुआती फिल्मी सफर को याद किया है तो उनकी बातों से उस दौर के हिंदी फिल्म उद्योग के कामकाज की एक अलग तस्वीर सामने आती है। एक तरफ उन्होंने सेट के दोस्ताना माहौल और सहयोग को याद किया तो दूसरी तरफ यह भी बताया कि उस समय काम और भुगतान से जुड़े समझौते आज की तरह व्यवस्थित नहीं थे। इसी वजह से उनके मुताबिक कई फिल्मों में काम करने के बावजूद उन्हें पूरी फीस नहीं मिल सकी।

  • कद छोटा लेकिन हौसला आसमान से ऊंचा राजपाल यादव ने संघर्ष और सम्मान पर कही बड़ी बात

    कद छोटा लेकिन हौसला आसमान से ऊंचा राजपाल यादव ने संघर्ष और सम्मान पर कही बड़ी बात


    नई दिल्ली । फिल्म इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाने वाले मशहूर अभिनेता राजपाल यादव इन दिनों एक बार फिर सुर्खियों में हैं उनकी हालिया रिलीज फिल्म भूत बंगला में उनकी दमदार कॉमिक टाइमिंग को दर्शकों का खूब प्यार मिल रहा है लंबे समय बाद उन्हें बड़े पर्दे पर देखकर उनके फैंस भी खासे उत्साहित नजर आ रहे हैं

    फिल्म में अक्षय कुमार के साथ उनकी जोड़ी एक बार फिर दर्शकों को हंसाने में कामयाब रही है और यही वजह है कि राजपाल यादव की वापसी को काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है लेकिन इस बीच उन्होंने अपने निजी जीवन और करियर से जुड़े कुछ ऐसे पहलुओं पर खुलकर बात की है जो उनके संघर्ष और सोच को गहराई से उजागर करते हैं

    हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में राजपाल यादव ने अपनी हाइट को लेकर खुलकर बात की उन्होंने बताया कि वह बचपन से ही पांच फीट दो इंच के हैं और उन्होंने कभी इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया उनके अनुसार उनकी मां का आशीर्वाद ही उनकी सबसे बड़ी ताकत रहा है उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि उनकी मां हमेशा उन्हें आसमान जितना ऊंचा बनने का आशीर्वाद देती थीं और वही सोच उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती रही

    राजपाल यादव ने यह भी बताया कि समाज में लोगों का नजरिया अक्सर व्यक्तित्व के आधार पर बदल जाता है उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति लोगों को हंसाता है सहज रहता है और विनम्र होता है उसे कई बार हल्के में लिया जाता है जबकि गंभीर और एटीट्यूड वाले लोगों को ज्यादा सम्मान दिया जाता है यह सोच कहीं न कहीं उन्हें अंदर तक प्रभावित करती है लेकिन इसके बावजूद उन्होंने कभी खुद को कमतर नहीं समझा

    उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उन्हें कभी अपनी हाइट या अपनी पहचान को लेकर कोई कॉम्प्लेक्स नहीं हुआ लोग उन्हें कॉमेडियन कहते हैं या अच्छा इंसान बताते हैं तो वह इसे प्रसाद की तरह स्वीकार करते हैं उनके लिए यह सम्मान की बात है कि वह लोगों के चेहरे पर मुस्कान ला पाते हैं

    उनकी यह सोच न केवल उनके व्यक्तित्व को दर्शाती है बल्कि यह भी बताती है कि सफलता केवल बाहरी रूप या कद से नहीं बल्कि आत्मविश्वास और मेहनत से हासिल होती है राजपाल यादव का यह बयान उन लोगों के लिए भी प्रेरणा है जो किसी न किसी वजह से खुद को कम आंकते हैं

    विवादों और मुश्किल दौर के बाद एक बार फिर से दर्शकों के दिलों में जगह बनाना आसान नहीं होता लेकिन राजपाल यादव ने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर यह साबित कर दिया है कि सच्ची लगन और सकारात्मक सोच के साथ किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है उनका सफर यह बताता है कि असली ऊंचाई इंसान के कद में नहीं बल्कि उसके हौसले और सोच में होती है