Tag: Bollywood Song

  • तीन बार रिजेक्ट हुआ था बॉलीवुड का ये मशहूर गीत, आज भी बारिश में गूंजता है हर दिल में

    तीन बार रिजेक्ट हुआ था बॉलीवुड का ये मशहूर गीत, आज भी बारिश में गूंजता है हर दिल में

    नई दिल्ली ।  हिंदी फिल्मों में कई अमर गीत बने हैं। अमर गीतों की लिस्ट में एक ऐसा भी गाना है जिसे एक नहीं बल्कि तीन बार रिजेक्ट किया गया। सेंसर बोर्ड ने गाने के कुछ बोल पर आपत्ति जताई जिसके बाद उस गाने को फिल्म में लाना मुश्किल हो गया। लेकिन अंत में जब वही गाना सालों बाद किसी दूसरी फिल्म में सुनाई दिया तो वो गाना हमेशा के लिए अमर हो गया। आज भी बारिश के गानों में एक उस गाने की गिनती भी की जाती है।

    सेंसर बोर्ड ने रिजेक्ट किया गाना

    ये 50 का दशक था। उस दौर में मम्यूजिक कंपोजर कल्याण जी आनंदजी की नई जोड़ी थी जो फिल्म मदारी के लिए गाने बना रही थी। फिल्म रिलीज के लिए तैयार थी। जब इस फिल्म को सर्टिफिकेट के लिए सेंसर बोर्ड के पास भेजा गया तो गाने के कुछ बोल को लेकर उसे रिजेक्ट कर दिया गया। बोर्ड की तरफ से गाने के बोल में बदलाव करने की बात कही गई। लेकिन गाना तो पहले ही शूट हो चुका था। और रिलीज डेट भी करीब थी। ऐसे में मेकर्स ने रिस्क नहीं लिया और गाने को ही फिल्म से हटा दिया। लेकिन कल्याणजी आनंदजी जानते थे कि इस गाने में वो बात है जो ऑडियंस को खुश कर सकती है। उन्होंने वो गाना अपनी आने वाली फिल्मों में इस्तेमाल करने के बारे में सोचा।

    दूसरी फिल्म से रिजेक्ट हुआ गाना

    इसके बाद 1959 में कल्याणजी आनंदजी को फिल्म घर घर की बात में गाने देने का मौका मिला। लेकिन इस फिल्म में भी वो अपना रिजेक्ट हुआ गाना इस्तेमाल नहीं कर पाए, क्योंकि फिल्म की सिचुएशन वैसी नहीं थी। इसके बाद 1960 में दिल भी तेरा हम भी तेरे रिलीज हुई। फिल्म के हीरो थे धर्मेंद्र। फिल्म का गाना कल्यानजी आनंदजी बना रहे थे। उन्होंने अपना वही गीत डायरेक्टर अर्जुन हिंगोरानी को सुनाया। लेकिन उन्हें ये गाना पसंद नहीं आया। ऊपर गाना सेंसर बोर्ड ने रिजेक्ट किया था। तो डायरेक्टर रिस्क नहीं लेना चाहते थे। अब तक ये गाना दो फिल्मों से रिजेक्ट हो चुका था। लेकिन म्यूजिक कंपोजर की जोड़ी को अपने गाने पर यकीन था।

    राज कपूर की फिल्म में मिला मौका

    1960 में एक फिल्म आई छलिया। इस फिल्म में राज कपूर और नूतन लीड रोल में थे। फिल्म की कहानी भारत-पाकिस्तान के बीच हुए बंटवारे पर बेस्ड थी। इस फिल्म में कल्यानजी आनंदजी को म्यूजिक देने का मौका मिला। मनमोहन देसाई की ये पहली डायरेक्टोरियल फिल्म थी। इस फिल्म के लिए उन्हें एक बारिश सॉन्ग की जरूरत थी। उन्होंने ये बात जब म्यूजिक कंपोजर की जोड़ी कल्यानजी और आनंदजी को बताई तो उन्होंने फटाक से अपना रिजेक्टेड गाना उन्हें सुना दिया। मनमोहन देसाई को गाना बहुत पसंद आया। क्योंकि सेंसर बोर्ड को गाने के कुछ बोल से आपत्ति थी तो गीतकार कमाल जलालाबादी को फिर से उस गाने के बोल बदलने के लिए बुलाया गया। मुखड़ा वैसा ही रखा लेकिन अंतरे में बदलाव किया गया। इस गाने को आवाज देने वाले मुकेश को फिर से बुलाया गया और गाना अंतरा फिर से रिकॉर्ड किया गया।
    आज अमर है ये गीत
    गाने के नए वर्जन पर राज कपूर और नूतन ने खूब डांस करते हुए शूट किया। लेकिन जब फिल्म सेंसर बोर्ड के पास पहुंची तो गाना फिर से अटक गया। सेंसर बोर्ड ने फिर से अंतरे के बोल पर आपत्ति जताई। गीतकार कमाल जलालाबादी को फिर से बुलाया गया। गाने के बोल फिर से बदले गए। और जिस गाने को लेकर सभी को इतनी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था वो था ‘डम डम डिगा डिगा, मौसम भीगा भीगा’ । इस गाने के अंतरे के पहले बोल थे ‘देखो लुटारा आज लुट गया हाय अल्लाह’ की जगह ‘देखो रे आज कोई लुट गया’ और ‘भोला भाला छुप के डाका डाला जाने तू कैसा मेहमान है’ की जगह ‘सनम हम माना गरीब हैं नसीब खोटा ही सही सही बंदा छोटा सही दिल खजाना है प्यार का हाय अल्लाह’। ये गाना जब बनकर फिल्म में सुना गया तो अमर हो गया। आज भी ये गीत अमर है।
  • 7 साल तक रिजेक्ट रहा रफी साहब का गाना, शम्मी कपूर की फिल्म में बन गया ऑल-टाइम सुपरहिट

    7 साल तक रिजेक्ट रहा रफी साहब का गाना, शम्मी कपूर की फिल्म में बन गया ऑल-टाइम सुपरहिट



    नई दिल्ली। मोहम्मद रफी, जिनकी आवाज को भारतीय संगीत की सबसे महान आवाजों में गिना जाता है, उन्होंने अपने करियर में एक से बढ़कर एक अमर गीत दिए। लेकिन उनके करियर में एक ऐसा भी गाना रहा, जिसे बार-बार रिजेक्ट किया गया और करीब 7 साल तक वह रिलीज नहीं हो सका। बाद में वही गाना संगीत इतिहास का सुपरहिट गाना बन गया।

    “आज कल तेरे मेरे प्यार के चर्चे” की शुरुआत
    इस गाने की कहानी शुरू होती है 1961 में आई फिल्म “जब प्यार किसी से होता है” से। इस फिल्म का निर्देशन नासिर हुसैन ने किया था। फिल्म में देव आनंद, आशा पारेख और प्राण जैसे बड़े कलाकार थे। संगीत शंकर-जयकिशन ने दिया था और गीत हसरत जयपुरी और शैलेंद्र ने लिखे थे।

    इसी फिल्म के लिए एक गाना रिकॉर्ड किया गया था
    “आज कल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हैं जुबान पर”
    जिसे मोहम्मद रफी और सुमन कल्याणपुर ने गाया था।

    देव आनंद ने किया सबसे पहला रिजेक्शन
    फिल्म के लिए जब यह गाना तैयार हुआ तो संगीतकारों को इससे काफी उम्मीद थी, लेकिन जब देव आनंद ने इसे सुना तो उन्होंने इसे रिजेक्ट कर दिया।
    उनका मानना था कि यह गाना उनके किरदार की गंभीरता से मेल नहीं खाता और यह स्क्रीन पर जरूरत से ज्यादा “लाउड” लगेगा।

    इस वजह से गाना फिल्म से बाहर कर दिया गया।
    5 साल बाद भी नहीं मिली जगह
    करीब 5 साल बाद, 1966 में जब शंकर-जयकिशन फिल्म “सूरज” का संगीत बना रहे थे, तो उन्होंने इस पुरानी धुन को फिर से इस्तेमाल करने की कोशिश की।
    इस बार फिल्म के हीरो राजेंद्र कुमार थे।लेकिन एक बार फिर गाने को रिजेक्ट कर दिया गया। राजेंद्र कुमार को भी लगा कि यह गाना उनके स्क्रीन इमेज से मेल नहीं खाता।

    शम्मी कपूर ने बदली किस्मत
    संगीतकार शंकर-जयकिशन इस गाने को लेकर निराश हो चुके थे, लेकिन 1968 में जब फिल्म “ब्रह्मचारी” बनी, तो कहानी बदल गई।जब शम्मी कपूर को यह धुन सुनाई गई तो उन्हें यह बेहद पसंद आई। उन्होंने तुरंत कहा कि यह गाना उनकी फिल्म में शामिल किया जाएगा।

    रिलीज होते ही बना ब्लॉकबस्टर
    फिल्म “ब्रह्मचारी” रिलीज हुई और यह गाना—
    “आज कल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हैं जुबान पर”
    सीधा सुपरहिट बन गया।शम्मी कपूर और मुमताज की जोड़ी पर फिल्माया गया यह गाना इतना लोकप्रिय हुआ कि आज भी यह सदाबहार हिट माना जाता है। लोग इसे आज भी रीमिक्स और स्टेज परफॉर्मेंस में उतने ही उत्साह से सुनते हैं।

    रफी साहब की अमर आवाज
    मोहम्मद रफी की खासियत यह थी कि हर बड़ा अभिनेता उनकी आवाज चाहता था। शम्मी कपूर के साथ उनकी जोड़ी ने कई हिट गाने दिए। उनकी आवाज ने इस गाने को अमर बना दिया।

    करियर की शुरुआत और उपलब्धियां
    मोहम्मद रफी ने अपने करियर की शुरुआत पंजाबी फिल्म “गुल बलोच” से की थी। उनका पहला हिंदी गाना 1945 की फिल्म “गांव की गोरी” में आया था।अपने शानदार करियर में उन्हें6 फिल्मफेयर अवॉर्ड्स1965 में पद्म श्री1977 में नेशनल अवॉर्डसे सम्मानित किया गया।
    7 साल तक रिजेक्ट होने के बाद भी यह गाना भारतीय संगीत का इतिहास बन गया। यह कहानी बताती है कि असली कला समय के साथ पहचान बनाती है और सही मौका मिलने पर अमर हो जाती है।