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  • नवरात्रि गरबा प्रैक्टिस के लिए ये 8 बॉलीवुड गाने प्लेलिस्ट में करें शामिल, बेसिक स्टेप्स से तेज फुटवर्क तक होगी तैयारी

    नवरात्रि गरबा प्रैक्टिस के लिए ये 8 बॉलीवुड गाने प्लेलिस्ट में करें शामिल, बेसिक स्टेप्स से तेज फुटवर्क तक होगी तैयारी

    नई दिल्ली: नवरात्रि में गरबा और डांडिया की धूम के बीच अगर इस बार गरबा नाइट में बिना झिझक डांस करना है तो अभी से प्रैक्टिस शुरू की जा सकती है। इसके लिए ऐसी प्लेलिस्ट तैयार की जा सकती है, जिसमें धीमी बीट से लेकर तेज गरबा बीट तक के गाने हों। इससे अलग-अलग तरह के स्टेप्स की रिहर्सल करने में मदद मिल सकती है। खासकर पहली बार गरबा करने वालों के लिए सही गानों के साथ अभ्यास करना उपयोगी हो सकता है। गरबा आमतौर पर गोल घेरे में लयबद्ध कदमों और ताली के साथ किया जाता है, जबकि डांडिया में स्टिक का इस्तेमाल होता है। प्रैक्टिस की शुरुआत बेसिक स्टेप्स से करना बेहतर रहेगा और धीरे-धीरे तेज बीट वाले गानों की ओर बढ़ा जा सकता है।

    गरबा की शुरुआती प्रैक्टिस के लिए ‘Chogada’ को प्लेलिस्ट में रखा जा सकता है। इसकी लय पर बेसिक दो-स्टेप, ताली और घूमने वाले स्टेप्स की प्रैक्टिस की जा सकती है। बेसिक स्टेप्स समझ आने के बाद ‘Dholi Taaro Dhol Baaje’ पर अभ्यास किया जा सकता है। इसकी तेज बीट पर लगातार स्टेप बदलने और ताल के साथ चलने की आदत डालने की कोशिश की जा सकती है। ‘Odhani’ पर पैरों के साथ हाथों के मूवमेंट पर ध्यान दिया जा सकता है। इस गाने पर हाथों की दिशा, ताली और घूमने वाले स्टेप्स को एक साथ करने की रिहर्सल की जा सकती है। इसके बाद ‘Dholida’ पर तेज कदमों और ऊर्जा से भरे मूवमेंट का अभ्यास किया जा सकता है।

    अगर गरबा अकेले के बजाय पार्टनर या दोस्तों के साथ करना है तो ‘Udi Udi Jaye’ को भी प्रैक्टिस प्लेलिस्ट में शामिल किया जा सकता है। इसकी अपेक्षाकृत आसान गति पर पार्टनर के साथ तालमेल और घूमने वाले स्टेप्स की रिहर्सल की जा सकती है। वहीं, गरबा नाइट में बीट तेज होने पर कदमों का तालमेल बनाए रखने के लिए ‘Kamariya’ पर तेज फुटवर्क और लगातार मूवमेंट का अभ्यास किया जा सकता है। प्रैक्टिस शुरू करने से पहले शरीर को तैयार करने के लिए ‘Shubhaarambh’ जैसे गाने पर हल्के स्टेप्स से शुरुआत की जा सकती है। इससे धीरे-धीरे रिदम पकड़ने के बाद तेज गानों पर अभ्यास बढ़ाया जा सकता है।

    जब बेसिक स्टेप्स से लेकर तेज फुटवर्क तक की तैयारी हो जाए तो ‘Nagada Sang Dhol’ पर ग्रुप के साथ डांस की प्रैक्टिस की जा सकती है। इस गाने पर फुल एनर्जी के साथ ग्रुप डांस के लिए रिहर्सल की जा सकती है। हालांकि अभ्यास के दौरान शुरुआत में बहुत तेज स्टेप्स करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। पहले पैरों की चाल और बीट का तालमेल समझना चाहिए। इसके बाद हाथों और घूमने वाले स्टेप्स को इसमें जोड़ा जा सकता है। ग्रुप में डांस करना हो तो सामने वाले की स्पीड के साथ तालमेल बनाना जरूरी है। लंबे समय तक प्रैक्टिस करने से पहले हल्का वार्मअप करना चाहिए। डांस के दौरान अपनी सुविधा के अनुसार स्टेप्स की स्पीड रखनी चाहिए, ताकि अभ्यास के दौरान पैरों, हाथों और शरीर की गतिविधियों में तालमेल बना रहे।

  • जब रिकॉर्डिंग स्टूडियो में लेट गए थे किशोर कुमार, और बन गया सदाबहार सुपरहिट गाना

    जब रिकॉर्डिंग स्टूडियो में लेट गए थे किशोर कुमार, और बन गया सदाबहार सुपरहिट गाना


    नई दिल्ली । हिंदी फिल्म संगीत के इतिहास में कई ऐसे किस्से दर्ज हैं, जो कलाकारों की प्रतिभा और उनके जुनून को नई पहचान देते हैं। ऐसा ही एक दिलचस्प किस्सा महान गायक किशोर कुमार और फिल्म ‘शराबी’ के मशहूर गीत ‘इंतहा हो गई इंतजार की’ से जुड़ा हुआ है। यह गीत आज भी संगीत प्रेमियों की पसंदीदा सूची में शामिल है, लेकिन इसके पीछे की कहानी बहुत कम लोग जानते हैं।

    साल 1984 में निर्देशक प्रकाश मेहरा अपनी महत्वाकांक्षी फिल्म ‘शराबी’ का निर्माण कर रहे थे। फिल्म में अमिताभ बच्चन मुख्य भूमिका में थे और उनके किरदार की भावनाओं को दर्शाने के लिए गीतकार अंजान ने एक बेहतरीन गीत लिखा था। संगीतकार बप्पी लहरी ने इस गीत को मधुर धुन से सजाया। अब जरूरत थी ऐसी आवाज की, जो इस गीत की आत्मा को जीवंत कर सके, और इसके लिए चुना गया नाम था किशोर कुमार।

    जब किशोर कुमार के सामने यह गीत रिकॉर्डिंग के लिए रखा गया, तो उन्होंने शुरुआत में इसे गाने से इनकार कर दिया। रिकॉर्डिंग स्टूडियो में मौजूद लोग हैरान रह गए। कुछ देर बाद उन्होंने गीत की स्थिति और उसके भाव को गहराई से समझा। उन्हें बताया गया कि पर्दे पर अमिताभ बच्चन एक ऐसे व्यक्ति की भूमिका निभा रहे हैं, जो शराब के नशे में है और अपनी भावनाओं को व्यक्त कर रहा है।

    यहीं से किशोर कुमार की रचनात्मकता सामने आई। उन्होंने कहा कि यदि इस गीत में एक शराबी का वास्तविक एहसास पैदा करना है, तो वह इसे सामान्य तरीके से खड़े होकर नहीं गाएंगे। उनकी शर्त थी कि रिकॉर्डिंग के दौरान उन्हें लेटने दिया जाए ताकि वे उस मानसिक और शारीरिक स्थिति को महसूस कर सकें, जिसमें फिल्म का पात्र दिखाई देगा।

    स्टूडियो में मौजूद सभी लोग उनकी यह बात सुनकर चौंक गए। हालांकि, किशोर कुमार अपनी बात पर अड़े रहे। आखिरकार उनकी इच्छा पूरी करने के लिए रिकॉर्डिंग रूम में एक बड़ी टेबल मंगवाई गई। किशोर कुमार उस पर लेट गए, माइक को उसी हिसाब से सेट किया गया और फिर रिकॉर्डिंग शुरू हुई।

    इसके बाद जो हुआ, वह इतिहास बन गया। आशा भोसले के साथ किशोर कुमार ने ‘इंतहा हो गई इंतजार की’ को अपनी आवाज दी और गीत में ऐसा जादू भर दिया कि वह रिलीज होते ही लोगों की जुबान पर चढ़ गया। कहा जाता है कि रिकॉर्डिंग के दौरान आशा भोसले भी किशोर कुमार के इस अनोखे अंदाज को देखकर हैरान रह गई थीं।

    यह गीत न केवल फिल्म ‘शराबी’ की पहचान बना, बल्कि हिंदी सिनेमा के सबसे लोकप्रिय युगल गीतों में भी शामिल हो गया। दशकों बाद भी जब यह गाना बजता है, तो श्रोता उसी उत्साह और भावनाओं के साथ इसे सुनते हैं। किशोर कुमार की यही विशेषता थी कि वह केवल गीत नहीं गाते थे, बल्कि उसे जीते थे। शायद यही कारण है कि उनकी आवाज और उनके गाए गीत आज भी करोड़ों दिलों में जीवित हैं।

  • धर्मेंद्र को रोमांटिक हीरो बनाने वाले गायक: मोहम्मद रफी ने गाए थे 119 अमर गाने

    धर्मेंद्र को रोमांटिक हीरो बनाने वाले गायक: मोहम्मद रफी ने गाए थे 119 अमर गाने


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के Dharmendra को जब भी याद किया जाता है, तो एक मजबूत, गबरू और एक्शन हीरो की छवि सामने आती है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि उनकी यही छवि बदलकर उन्हें रोमांटिक स्टार बनाने में सबसे बड़ा योगदान दिवंगत गायक Mohammed Rafi का रहा है।

    मोहम्मद रफी ने धर्मेंद्र के लिए एक-दो नहीं, बल्कि करीब 119 गाने गाए थे। यह सिलसिला 1961 की फिल्म शोला और शबनम से शुरू हुआ और 1980 के दशक तक लगातार चलता रहा। इन गीतों में लगभग 60 सोलो और 59 डुएट गाने शामिल थे। रफी की आवाज ने धर्मेंद्र के किरदारों को वह भावनात्मक गहराई दी, जिसने दर्शकों के दिलों में उनके लिए खास जगह बना दी।

    फिल्मी दुनिया में अक्सर कहा जाता है कि धर्मेंद्र को रोमांटिक हीरो का दर्जा दिलाने में संगीतकारों की अहम भूमिका रही, लेकिन असली जादू रचा संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल और मोहम्मद रफी ने मिलकर। इस जोड़ी ने धर्मेंद्र के लिए 50 से ज्यादा गाने तैयार किए, जिनमें प्रतिज्ञा का मशहूर गाना “मैं जट यमला पगला दीवाना” आज भी बेहद लोकप्रिय है।

    इसके अलावा मदन मोहन के संगीत में जब रफी ने “आप के हसीन रुख पे” जैसे गीत गाए, तो धर्मेंद्र की रोमांटिक छवि और भी निखर गई। यह वही दौर था जब एक्शन फिल्मों के साथ-साथ धर्मेंद्र को एक सॉफ्ट रोमांटिक हीरो के रूप में भी देखा जाने लगा।

    धर्मेंद्र ने खुद एक इंटरव्यू में कहा था कि जब रफी उनके लिए गाते थे, तो उन्हें लगता था जैसे वह खुद गा रहे हों। यह भावना ही उनकी ऑन-स्क्रीन परफॉर्मेंस को और अधिक वास्तविक बना देती थी।

    रफी और धर्मेंद्र की जोड़ी ने हिंदी सिनेमा को कई यादगार गीत दिए। हकीकत का “होके मजबूर मुझे उसने पुकारा होगा”, लोफर का “आज मौसम बड़ा बेईमान है” और दो रास्ते का “सुख के सब साथी” जैसे गाने आज भी लोगों की प्लेलिस्ट में शामिल हैं।

    इन दोनों की जोड़ी ने हर भावना प्यार, दर्द, खुशी और संघर्ष—को आवाज दी। यही कारण है कि आज भी जब ये गीत बजते हैं, तो धर्मेंद्र की मुस्कान और रफी की आवाज एक साथ अमर हो उठती है।

  • अमिताभ की एक्टिंग और रफी की आवाज का जादू, चार लाइन वाले गाने ने थिएटर में कर दिया माहौल इमोशनल

    अमिताभ की एक्टिंग और रफी की आवाज का जादू, चार लाइन वाले गाने ने थिएटर में कर दिया माहौल इमोशनल


    नई दिल्ली:सदी के महानायक Amitabh Bachchan ने हिंदी सिनेमा में अपनी दमदार एक्टिंग और बेहतरीन फिल्मों से हमेशा दर्शकों का दिल जीता है। उनके करियर के शुरुआती सालों में उनकी कई फिल्में हिट रहीं और 70 के दशक में उनका नाम हर जगह था। इस दौर में उनकी आई फिल्मों में शामिल हैं Sholay, Don, Amar Akbar Anthony, Deewar, Kabhie Kabhie और Maqaddar Ka Sikandar।

    1978 में आई फिल्म Maqaddar Ka Sikandar ने दर्शकों के बीच खास जगह बनाई। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन के साथ रेखा, राखी और विनोद खन्ना जैसे सितारे भी नजर आए। लेकिन इस फिल्म से जुड़ा एक ऐसा किस्सा है जिसने आज भी दर्शकों के दिलों में जगह बनाई है। दरअसल, फिल्म के एक बेहद इमोशनल सीन के लिए सिर्फ चार लाइन का गाना चाहिए था और इसके लिए विशेष रूप से मोहम्मद रफी को बुलाया गया।

    फिल्म के म्यूजिक डायरेक्टर Kalyanji-Anandji ने तय किया कि इस सीन में ऐसा दर्द सामने आए जो सीधे ऑडियंस की आत्मा को छू ले। हालांकि सभी गाने किशोर कुमार से रिकॉर्ड किए जा रहे थे, लेकिन रफी की आवाज में वह भावनात्मक गहराई थी जो सिर्फ चार लाइन में पूरा सीन जीवंत कर दे।

    शुरुआत में कल्याणजी-आनंदजी थोड़ा हिचक रहे थे कि क्या रफी साहब सिर्फ चार लाइन के लिए आएंगे। लेकिन जैसे ही उन्होंने रफी को अपनी बात बताई, रफी ने खुशी-खुशी इस रिक्वेस्ट को स्वीकार कर लिया। उन्होंने स्टूडियो में आकर उन चार लाइन को रिकॉर्ड किया और बिना कोई फीस लिए चले गए।

    फिल्म के अंत में जब अमिताभ के किरदार की मौत दिखाई जाती है और यह चार लाइन वाला गाना बजता है -जिंदगी तो बेवफा है, एक दिन ठुकराएगी, मौत महबूबा है अपने साथ लेकर जाएगी, मरके जीने की अदा जो दुनिया को सिखलाएगा वो मुकद्दर का सिकंदर कहलाएगा-तो थिएटर में हर दर्शक की आंखों में आंसू थे। रफी की दर्दभरी आवाज और अमिताभ की बेहतरीन एक्टिंग ने इस सीन को आज भी यादगार बना दिया।

    यह गाना और सीन बॉलीवुड के इतिहास में भावनाओं का सबसे प्रभावशाली उदाहरण माना जाता है। सिर्फ चार लाइन में रफी साहब ने जो दर्द और भावनाएं पेश कीं, उन्होंने दर्शकों के दिलों को छू लिया। आज भी जब कोई यह सीन देखता है, तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं और उस दौर के संगीत और अभिनय की ताकत याद दिला देता है।