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  • धुरंधर बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्डतोड़ रफ्तार, ‘जवान’ के बेहद करीब पहुंची रणवीर सिंह की फिल्म

    धुरंधर बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्डतोड़ रफ्तार, ‘जवान’ के बेहद करीब पहुंची रणवीर सिंह की फिल्म


    नई दिल्ली। रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर ने रिलीज के 26वें दिन भी बॉक्स ऑफिस पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी है। आदित्य धर के निर्देशन में बनी इस स्पाई थ्रिलर ने दुनियाभर में कमाई के नए कीर्तिमान स्थापित करते हुए 1100 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है। फिल्म अब शाहरुख खान की जवान के लाइफटाइम कलेक्शन को पीछे छोड़ने के बेहद करीब पहुंच चुकी है।

    चौथे हफ्ते में भी डबल डिजिट कमाई

    धुरंधर अपने चौथे हफ्ते में भी घरेलू बॉक्स ऑफिस पर डबल डिजिट में कमाई कर रही है। 26 दिनों में फिल्म ने भारत में 712.25 करोड़ रुपये नेट और 854.5 करोड़ रुपये ग्रॉस का कारोबार कर लिया है। इसके साथ ही यह भारत में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली बॉलीवुड फिल्म बन चुकी है जबकि हिंदी फिल्मों की ओवरऑल लिस्ट में यह दूसरे नंबर पर पहुंच गई है। इससे आगे सिर्फ पुष्पा 2 हिंदी वर्जन है जिसने 812 करोड़ रुपये नेट कमाए हैं।

    विदेशों में भी लहरा रहा परचम

    ओवरसीज मार्केट में धुरंधर का प्रदर्शन भी ऐतिहासिक रहा है। खासकर अमेरिका और कनाडा में फिल्म ने शानदार कमाई करते हुए 17 मिलियन डॉलर का आंकड़ा छू लिया है। इसके साथ ही यह नॉर्थ अमेरिका में चौथी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्म बन गई है जहां इसने जवान और आरआरआर जैसी फिल्मों को भी पीछे छोड़ दिया है। कुल मिलाकर फिल्म ने विदेशों में 27.5 मिलियन डॉलर की कमाई कर ली है।

    जवान को पछाड़ने की तैयारी

    धुरंधर अब तक दुनिया की सातवीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्म बन चुकी है। शाहरुख खान की जवान 1160 करोड़ रुपये को पीछे छोड़ने से यह बस कुछ कदम दूर है। अनुमान है कि शुक्रवार तक फिल्म यह रिकॉर्ड भी तोड़ सकती है। इसके बाद इसका अगला लक्ष्य केजीएफ चैप्टर 2 और आरआरआर के लाइफटाइम कलेक्शन होंगे।

    फिल्म की कहानी और स्टारकास्ट

    फिल्म में रणवीर सिंह ने हमजा नाम के भारतीय जासूस का किरदार निभाया है जो कराची में आतंक और अंडरवर्ल्ड नेटवर्क में घुसपैठ करता है। फिल्म में अक्षय खन्ना अर्जुन रामपाल संजय दत्त और आर. माधवन भी अहम भूमिकाओं में नजर आए हैं। मेकर्स ने इसके दूसरे पार्ट की घोषणा कर दी है जो मार्च 2026 में रिलीज होगा।

  • धुरंधर’ में दिखा लियारी का सच: जानें रहमान डकैत और एसपी असलम की असली कहानी

    धुरंधर’ में दिखा लियारी का सच: जानें रहमान डकैत और एसपी असलम की असली कहानी


    नई दिल्‍ली । भारत (India) से लेकर पाकिस्तान (Pakistan) तक, हाल ही में रिलीज हुई फिल्म धुरंधर (film Dhurandhar) ने एक बार फिर कराची के ल्यारी इलाके (Lyari area) को सुर्खियों में ला दिया है। आदित्य धर की इस स्पाई थ्रिलर में रणवीर सिंह, संजय दत्त और अक्षय खन्ना जैसे सितारे हैं। फिल्म में पाकिस्तान के इस कुख्यात ल्यारी इलाके की गैंगवार की कहानी को पर्दे पर उतारा गया है। फिल्म में अक्षय खन्ना ने रहमान डकैत का किरदार निभाया है, जबकि संजय दत्त एसपी चौधरी असलम की भूमिका में हैं। लेकिन क्या यह सिर्फ एक काल्पनिक कहानी है? नहीं, धुरंधर असल घटनाओं से प्रेरित है। 2000 के दशक में यह इलाका एक खूनी जंग का मैदान बन गया था। यहां गैंगवार की आग ने सैकड़ों जिंदगियां जला दीं। यहां ड्रग्स, एक्सटॉर्शन और हथियारों का कारोबार राज करता था। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के राजनीतिक संरक्षण से पनपे अपराधी सिंडिकेट ने ल्यारी को ‘नो-गो जोन’ बना दिया था।

    ल्यारी का उदय: फुटबॉल से फायरफाइट तक
    ल्यारी कराची का सबसे पुराना और घनी आबादी वाला इलाका है, जहां बालोच, कच्छी, सिंधी और अन्य समुदाय सदियों से बसे हैं। 19वीं सदी में यह इलाका एक मजदूर कॉलोनी था, जहां डॉक वर्कर्स और ट्रक ड्राइवर रहते थे। 1960-70 के दशक तक यहां हशीश का छोटा-मोटा व्यापार फल-फूल रहा था। लेकिन अफगानिस्तान के सोवियत युद्ध (1979-89) के बाद हथियारों और ड्रग्स की बाढ़ आ गई। बेरोजगारी और गरीबी ने युवाओं को गैंग्स की ओर धकेल दिया।

    ल्यारी को ‘मिनी ब्राजील’ कहा जाता था यानी फुटबॉल क्लबों की भरमार और ओलंपिक बॉक्सर हुसैन शाह जैसे सितारे यहीं के थे। लेकिन 1980 के दशक से जातीय राजनीति ने रंग बदल दिया। पीपीपी यहां मजबूत थी, लेकिन वोट बैंक को कंट्रोल करने के लिए पार्टियों ने गैंग्स से हाथ मिला लिए। म्युत्ताहिदा कौमी मूवमेंट (एमक्यूएम) और पीपीपी के बीच टकराव ने हिंसा को हवा दी। 1990 के दशक तक ल्यारी में छोटे-मोटे अपराधी समूह उभर आए, जो किडनैपिंग, एक्सटॉर्शन और ड्रग ट्रैफिकिंग से कमाते थे।

    गैंगवार की जड़ें: हाजी लालू बनाम दादल और फिर रहमान डकैत का उदय
    ल्यारी की आधुनिक गैंगवार की शुरुआत 1960 के दशक के हशीश (चरस) व्यापार से हुई। दादल, शेरू, और ‘काला नाग’ जैसे नाम उस दौर के अपराध जगत में प्रभावी थे। 1990 के दशक में पढ़े-लिखे अपराधियों की नई पीढ़ी सामने आई- जैसे इकबाल उर्फ बाबू डकैत, जिसने ड्रग नेटवर्क को और अधिक संगठित रूप दिया। इसी काल में उभरकर आया सबसे प्रभावशाली नाम था सरदार अब्दुल रहमान बलोच, जिसे ल्यारी और बाकी कराची में रहमान डकैत के नाम से जाना गया।

    रहमान डकैत: डाकू से ‘पीसकीपर’ तक का सफर
    सरदार अब्दुल रहमान बालोच, उर्फ रहमान डकैत (1975-2009), ल्यारी गैंगवार का चेहरा था। एक छोटे अपराधी परिवार में जन्मे रहमान ने किशोरावस्था में ही अपराध की दुनिया में कदम रखा। स्थानीय लोगों के मुताबिक, उसने 13 साल की उम्र में पहली हत्या की और घरेलू झगड़े में अपनी मां को भी मार डाला – हालांकि यह पुष्ट नहीं है, लेकिन उनकी क्रूरता की मिसाल बन गया।

    2001 में हाजी लालू गैंग के पतन के बाद रहमान ने कंट्रोल ले लिया। उसने ड्रग्स, जुआ और एक्सटॉर्शन से लाखों कमाए, लेकिन साथ ही क्लिनिक, मदरसे और फुटबॉल टूर्नामेंट फंड किए। 2008 में पीपीपी ने उसे ‘पीपुल्स अमन कमिटी’ (पीएसी) का प्रमुख बनाया। यह ‘शांति समिति’ वोट बैंक संरक्षण का बहाना थी, लेकिन वास्तव में गैंग का कवर। रहमान को पीपीपी नेता जुल्फिकार मिर्जा और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी का संरक्षण था।

    उनकी दुश्मनी अरशद पप्पू से थी, जो एमक्यूएम समर्थित था। 2003 में अर्शद ने उजैर बालोच (रहमान के चचेरे भाई) के पिता की हत्या कर दी, जिससे खूनी जंग छिड़ गई। सैकड़ों मौतें हुईं। ‘धुरंधर’ में अक्षय खन्ना का किरदार रहमान को एक करिश्माई लेकिन खतरनाक डाकू के रूप में दिखाता है – जो हकीकत से मेल खाता है।

    एसपी चौधरी असलम: ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ की आग उगलती बंदूक
    चौधरी असलम खान (1963-2014) पाकिस्तान का सबसे विवादास्पद पुलिस अधिकारी था। 1980 के दशक में सिंध पुलिस में एएसआई के रूप में शामिल हुए असलम को ‘पाकिस्तान का डर्टी हैरी’ कहा जाता था। वह क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (सीआईडी) का हेड था और ल्यारी टास्क फोर्स के लीडर।

    असलम ने तालिबान और गैंग्स के खिलाफ बेरहम कार्रवाई की। 2006 में वह मशूक ब्रोही एनकाउंटर के लिए जेल गया, लेकिन 2007 में रिहा होकर लौटा। 2009 में उसने रहमान डकैत को ‘एनकाउंटर’ में मार गिराया – रहमान की पत्नी ने इसे फर्जी बताया और सिंध हाईकोर्ट ने असलम पर एफआईआर का आदेश दिया। 2012 के ऑपरेशन ल्यारी में असलम ने उजैर बालोच के गैंग पर हमला बोला, लेकिन 12 पुलिसकर्मी मारे गए।

    असलम को तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) से धमकियां मिलती रहीं। 9 जनवरी 2014 को ल्यारी एक्सप्रेसवे पर सुसाइड बॉम्बिंग में उसकी मौत हो गई। टीटीपी ने जिम्मेदारी ली। ‘धुरंधर’ में संजय दत्त का किरदार असलम को सिगरेट पीते, बंदूक चलाते ‘जिन्न’ के रूप में चित्रित करता है- जो उसकी वास्तविक छवि से प्रेरित है। असलम की पत्नी ने फिल्म पर आपत्ति जताई, इसे प्रोपगैंडा बताया।

    गैंगवार का चरम: खून की होली और राजनीतिक खेल
    रहमान की मौत के बाद उजैर बालोच ने कमान संभाली। 2013 में अरशद पप्पू का अपहरण कर सिर काट दिया गया- प्रतिद्वंद्वी गैंग ने उसके सिर से फुटबॉल खेली। बाबा लाडला जैसे गुटों ने विद्रोह किया। 2004-13 के बीच 800 से ज्यादा मौतें हुईं। पीपीपी और एमक्यूएम की राजनीति ने आग में घी डाला – गैंग्स वोटर मोबिलाइजेशन के लिए इस्तेमाल होते थे।

    कहते हैं कि आज ल्यारी शांत है- फुटबॉल क्लब फिर सक्रिय हैं, और 2024 में एक स्थानीय टीम ने नेशनल यूथ चैंपियनशिप जीती। लेकिन घाव बाकी हैं। उजैर के बारे में कहा जाता है कि वह आज भी जेल में सजा काट रहा है।