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  • राजेश कुमार का बड़ा बयान, फिल्म और टीवी इंडस्ट्री के स्टार सिस्टम पर उठाए गंभीर सवाल, सपोर्टिंग एक्टर्स के साथ व्यवहार को लेकर किया अहम खुलासा

    राजेश कुमार का बड़ा बयान, फिल्म और टीवी इंडस्ट्री के स्टार सिस्टम पर उठाए गंभीर सवाल, सपोर्टिंग एक्टर्स के साथ व्यवहार को लेकर किया अहम खुलासा

    नई दिल्ली: टेलीविजन और फिल्म जगत के जाने माने अभिनेता राजेश कुमार ने इंडस्ट्री की कार्य संस्कृति को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। अपने हालिया बयान में उन्होंने कहा कि कई बार बड़े स्टार्स शूटिंग सेट पर सपोर्टिंग एक्टर्स को वह सम्मान और महत्व नहीं देते जिसके वे हकदार होते हैं। उनके अनुसार इस तरह का रवैया न केवल कार्य वातावरण को प्रभावित करता है बल्कि पूरे प्रोजेक्ट की गुणवत्ता पर भी असर डाल सकता है।

    राजेश कुमार, जिन्हें लोकप्रिय टीवी शो साराभाई वर्सेस साराभाई से व्यापक पहचान मिली, ने कहा कि इंडस्ट्री में कई बार काम का केंद्र केवल मुख्य कलाकारों के इर्द गिर्द ही घूमता है। उनके अनुसार फिल्मों और शोज की योजना, चर्चा और निर्णय प्रक्रिया में सहायक कलाकारों की भागीदारी सीमित रहती है, जबकि उनकी भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है जितनी मुख्य कलाकारों की।

    उन्होंने यह भी बताया कि बड़े प्रोजेक्ट्स के दौरान अक्सर रचनात्मक चर्चा सीमित लोगों तक ही रहती है, जिसमें मुख्य अभिनेता, निर्देशक और तकनीकी टीम के चुनिंदा सदस्य शामिल होते हैं। ऐसे माहौल में कई बार अन्य कलाकार खुद को प्रक्रिया से अलग महसूस करते हैं, जिससे उनके प्रदर्शन और आत्मविश्वास पर असर पड़ता है।

    राजेश कुमार ने यह भी कहा कि कई बार सपोर्टिंग एक्टर्स को उनके संवाद या स्क्रिप्ट बहुत देर से उपलब्ध कराई जाती है, जिससे उन्हें तैयारी का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। उनके अनुसार यह स्थिति शूटिंग प्रक्रिया को असंतुलित कर देती है और टीमवर्क की भावना को कमजोर करती है।

    हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सभी कलाकार ऐसे व्यवहार नहीं करते। कुछ अनुभवी और वरिष्ठ कलाकार अपने सह कलाकारों के साथ सहयोग और सम्मान का रवैया अपनाते हैं, जिससे सेट पर एक सकारात्मक और संतुलित माहौल बनता है।

    अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि कई बार बड़े कलाकार बिना पर्याप्त रिहर्सल के सीधे शूट पर आकर काम करना पसंद करते हैं, जिससे अन्य कलाकारों के साथ तालमेल बैठाना मुश्किल हो जाता है। उनके अनुसार यह तरीका कभी कभी पूरी टीम की परफॉर्मेंस को प्रभावित करता है।

    उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कुछ कलाकारों में असुरक्षा की भावना के कारण सहायक कलाकारों से दूरी बनाए रखने की प्रवृत्ति देखी जाती है, जो इंडस्ट्री की कार्य संस्कृति के लिए सही नहीं है। उनका मानना है कि किसी भी प्रोजेक्ट की सफलता तभी संभव है जब पूरी टीम को समान महत्व और भागीदारी मिले।

    राजेश कुमार ने कुछ कलाकारों के साथ अपने सकारात्मक अनुभवों का भी उल्लेख किया और कहा कि जब सेट पर संवाद और सहयोग होता है तो काम अधिक सहज और प्रभावशाली बन जाता है। ऐसे माहौल में सभी कलाकार बेहतर प्रदर्शन कर पाते हैं और अंतिम परिणाम भी अधिक मजबूत होता है।

    उनके इस बयान के बाद इंडस्ट्री में काम करने के तरीके और स्टार सिस्टम को लेकर चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है, जो पेशेवर समानता और कार्य संस्कृति पर एक महत्वपूर्ण बहस को जन्म दे रही है।

  • कियारा आडवाणी की राय नई मां कियारा ने दीपिका की 8 घंटे की शिफ्ट डिमांड पर कही बड़ी बात बर्नआउट किसी के लिए अच्छा नहीं

    कियारा आडवाणी की राय नई मां कियारा ने दीपिका की 8 घंटे की शिफ्ट डिमांड पर कही बड़ी बात बर्नआउट किसी के लिए अच्छा नहीं

    नई दिल्ली । नई मां और बॉलीवुड अभिनेत्री कियारा आडवाणी ने हाल ही में वोग इंडिया को इंटरव्यू देते हुए फिल्म इंडस्ट्री में 8-घंटे की शिफ्ट पर चल रहे विवाद पर अपनी राय साझा की। कियारा ने कहा किसी भी इंडस्ट्री में बर्नआउट किसी के लिए फायदेमंद नहीं होता। उन्होंने तीन शब्दों को दोहराया जिन्हें वह सेट पर और घर पर बनाए रखना चाहती हैं गरिमा संतुलन सम्मान ।

    मातृत्व और शरीर का सम्मान

    कियारा ने अपनी मातृत्व यात्रा के अनुभव साझा करते हुए कहा कि बच्चे के जन्म के बाद उन्होंने महसूस किया कि यह सिर्फ शरीर के आकार या आकार के बारे में नहीं है। उन्होंने कहा जब मैं अपने शरीर को देखती हूँ तो सोचती हूँ ‘वाह आपने एक इंसान को जन्म दिया।’ इसके साथ कोई तुलना नहीं की जा सकती। अब मैं अपने शरीर को हमेशा सम्मान दूंगी और समझूंगी कि मेरा शरीर मेरे लिए क्या कर सकता है।

    दीपिका पादुकोण के 8-घंटे शिफ्ट फैसले का समर्थन

    इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब खबरें आईं कि दीपिका पादुकोण ने संदीप रेड्डी वांगा की आत्मा फिल्म और नाग अश्विन की कल्कि 2898 ई. सीक्वल से इस शर्त के कारण हट गईं कि वह एक दिन में 8 घंटे से ज्यादा शूट नहीं करेंगी। दीपिका ने खुद इस फैसले का बचाव करते हुए कहा यदि यह महिला होने के नातेधक्का देने वाला लग रहा है तो जो भी हो।  इसी मामले पर बॉलीवुड इंडस्ट्री से कई कलाकारों ने दीपिका का समर्थन किया। अभिनेता अजय देवगन ने कहा कि ईमानदार फिल्ममेकर इस शर्त को स्वीकार करने में कोई समस्या नहीं दिखाएंगे। वहीं निर्देशक मणिरत्नम ने कहा मैं इसे उचित मांग मानता हूँ। यह एक अनिवार्य आवश्यकता है और फिल्ममेकर को इसे ध्यान में रखते हुए कास्टिंग करनी चाहिए।

    इंडस्ट्री में बदलाव की जरूरत

    कियारा और दीपिका के बयान दर्शाते हैं कि बॉलीवुड में लंबे और थकाऊ शेड्यूल के चलते कलाकारों में बर्नआउट बढ़ रहा है। 8-घंटे की शिफ्ट जैसी शर्त कलाकारों को मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य बनाए रखने में मदद करती है। कियारा ने इस बात पर जोर दिया कि संतुलन और सम्मान हर पेशे में जरूरी हैं और इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।फिल्म इंडस्ट्री में 8-घंटे की शिफ्ट पर चल रहे बहस ने कलाकारों और निर्माता दोनों के लिए चर्चा को जन्म दिया है। कियारा आडवाणी ने इस विषय पर अपनी राय साझा करके स्पष्ट किया कि बर्नआउट किसी के लिए लाभकारी नहीं है और संतुलन सम्मान और गौरव बनाए रखना जरूरी है। दीपिका पादुकोण के निर्णय और उनके समर्थन से यह साबित होता है कि कलाकार अब अपने स्वास्थ्य और व्यक्तिगत सीमाओं को महत्व दे रहे हैं। भविष्य में फिल्म इंडस्ट्री में इस तरह के बदलाव और नियम लागू होने की संभावना है।