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  • रणबीर कपूर की रामायण ने रिलीज से पहले जीता बड़ा मुकाबला 75 करोड़ की म्यूजिक डील से बनाया नया कीर्तिमान

    रणबीर कपूर की रामायण ने रिलीज से पहले जीता बड़ा मुकाबला 75 करोड़ की म्यूजिक डील से बनाया नया कीर्तिमान


    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा की सबसे महत्वाकांक्षी फिल्मों में शामिल रामायण अपनी रिलीज से पहले ही लगातार नए रिकॉर्ड बनाती नजर आ रही है। करीब 4000 करोड़ रुपये के संयुक्त बजट में तैयार हो रही इस मेगा प्रोजेक्ट ने अब म्यूजिक राइट्स के मामले में भी इतिहास रच दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार फिल्म के म्यूजिक राइट्स टी सीरीज ने 75 करोड़ रुपये में खरीद लिए हैं। हालांकि इस डील की आधिकारिक पुष्टि अभी फिल्म के निर्माताओं की ओर से नहीं की गई है लेकिन इंडस्ट्री में इसे हिंदी सिनेमा की सबसे बड़ी म्यूजिक डील में से एक माना जा रहा है।

    बताया जा रहा है कि इस डील के लिए टी सीरीज और सोनी म्यूजिक के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। रिपोर्ट्स के मुताबिक सोनी म्यूजिक ने 70 करोड़ रुपये की पेशकश की थी जबकि टी सीरीज ने 75 करोड़ रुपये का ऑफर देकर बाजी अपने नाम कर ली। चर्चा यह भी है कि निर्माता नमित मल्होत्रा फिल्म के म्यूजिक राइट्स के लिए 100 करोड़ रुपये तक की डील चाहते थे लेकिन 75 करोड़ रुपये का सौदा भी अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड माना जा रहा है।

    रामायण का निर्माण बड़े स्तर पर किया जा रहा है और इसे भारतीय सिनेमा की सबसे भव्य फिल्मों में गिना जा रहा है। फिल्म का निर्देशन नितेश तिवारी कर रहे हैं जबकि निर्माता नमित मल्होत्रा हैं। फिल्म दो भागों में रिलीज होगी। पहला भाग इस साल दिवाली पर सिनेमाघरों में आएगा जबकि दूसरा भाग अगले वर्ष दिवाली पर रिलीज किया जाएगा। मेकर्स का लक्ष्य भारतीय पौराणिक कथा को वैश्विक स्तर पर आधुनिक तकनीक और शानदार विजुअल इफेक्ट्स के साथ प्रस्तुत करना है।

    फिल्म की स्टारकास्ट भी इसकी सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही है। रणबीर कपूर भगवान श्रीराम की भूमिका निभा रहे हैं जबकि साई पल्लवी माता सीता के किरदार में दिखाई देंगी। कन्नड़ सुपरस्टार यश रावण की भूमिका निभा रहे हैं और वह इस फिल्म के सह निर्माता भी हैं। इसके अलावा रवि दुबे लक्ष्मण तथा सनी देओल भगवान हनुमान के किरदार में नजर आएंगे। इस दमदार स्टारकास्ट ने दर्शकों की उत्सुकता को और बढ़ा दिया है।

    फिल्म के संगीत पर भी खास ध्यान दिया गया है। ऑस्कर विजेता संगीतकार ए आर रहमान और हॉलीवुड के दिग्गज हांस जिमर पहली बार किसी भारतीय फिल्म के लिए साथ काम कर रहे हैं। हांस जिमर ने दुनिया की कई ब्लॉकबस्टर फिल्मों में यादगार संगीत दिया है जबकि ए आर रहमान भारतीय सिनेमा के सबसे सफल संगीतकारों में शामिल हैं। ऐसे में दर्शकों को इस फिल्म के संगीत से भी बड़ी उम्मीदें हैं।

    रामायण केवल भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर में बड़े स्तर पर रिलीज की जाएगी। इसके लिए मेकर्स ने अंतरराष्ट्रीय वितरण को मजबूत बनाने के उद्देश्य से सोनी पिक्चर्स के साथ साझेदारी की है। यही वजह है कि इस फिल्म को भारतीय सिनेमा का सबसे बड़ा ग्लोबल प्रोजेक्ट माना जा रहा है। ट्रेलर को लेकर भी जबरदस्त उत्साह बना हुआ है और माना जा रहा है कि इसकी रिलीज के बाद फिल्म को लेकर चर्चा और तेज हो जाएगी।

    अगर 75 करोड़ रुपये की म्यूजिक डील की रिपोर्ट आधिकारिक रूप से सही साबित होती है तो यह हिंदी फिल्म उद्योग के इतिहास की सबसे बड़ी ऑडियो डील में शामिल होगी। रिलीज से पहले ही रामायण ने जिस तरह कारोबार और लोकप्रियता के नए रिकॉर्ड बनाने शुरू कर दिए हैं उससे साफ है कि यह फिल्म भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक नया अध्याय लिखने की तैयारी में है।

  • पलक तिवारी की लव लाइफ पर बोले राजा चौधरी इब्राहिम संग रिश्ते की खबरों पर दिया बेबाक जवाब श्वेता तिवारी का भी किया जिक्र

    पलक तिवारी की लव लाइफ पर बोले राजा चौधरी इब्राहिम संग रिश्ते की खबरों पर दिया बेबाक जवाब श्वेता तिवारी का भी किया जिक्र


    नई दिल्ली । अभिनेत्री पलक तिवारी और इब्राहिम अली खान के रिश्ते को लेकर लंबे समय से चर्चाएं चल रही हैं। दोनों को कई मौकों पर एक साथ देखा गया है जिसके बाद उनके डेटिंग की खबरें लगातार सुर्खियां बटोरती रही हैं। हालांकि दोनों कलाकारों ने अब तक अपने रिश्ते को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। अब इन चर्चाओं के बीच पलक के पिता और अभिनेता राजा चौधरी ने पहली बार इस पूरे मामले पर खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी है।

    एक इंटरव्यू के दौरान राजा चौधरी से पलक तिवारी की पेशेवर सफलता और सलमान खान के साथ काम करने को लेकर सवाल पूछा गया। इस पर उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी बेटी की मौजूदा जिंदगी के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि उन्हें यह भी नहीं मालूम कि पलक कहां रहती हैं किसके साथ काम कर रही हैं या अपनी निजी जिंदगी में क्या कर रही हैं। उन्होंने साफ कहा कि जब तक पलक खुद आकर उन्हें कुछ नहीं बताएंगी तब तक वह उसकी निजी जिंदगी में दखल देना उचित नहीं समझते। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगर कभी बेटी को उनकी जरूरत होगी तो वह हर समय उसके साथ खड़े मिलेंगे।

    जब बातचीत के दौरान पलक तिवारी और इब्राहिम अली खान की डेटिंग की खबरों का जिक्र हुआ तो राजा चौधरी ने बेहद शांत और स्पष्ट जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अगर दोनों साथ हैं या नहीं हैं तो इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। उनके मुताबिक सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उनकी बेटी सुरक्षित और खुश रहे। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीने का अधिकार है और वह अपनी बेटी के निजी फैसलों का सम्मान करते हैं।

    राजा चौधरी ने इस दौरान अपने और पलक के रिश्ते पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि उन्हें हमेशा यह महसूस कराया गया कि वह केवल जैविक पिता हैं और बेटी की परवरिश तथा उसके जीवन से जुड़े अधिकतर फैसले उसकी मां के साथ जुड़े रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी को पलक की निजी जिंदगी के बारे में ज्यादा जानकारी चाहिए तो उसकी मां से पूछना ज्यादा उचित होगा क्योंकि वही उसके सबसे करीब हैं।

    बातचीत के दौरान राजा चौधरी ने अपनी पूर्व पत्नी और अभिनेत्री श्वेता तिवारी के साथ पुराने रिश्ते का भी जिक्र किया। गौरतलब है कि दोनों की शादी वर्ष 1998 में हुई थी और साल 2000 में उनकी बेटी पलक का जन्म हुआ। बाद में दोनों के रिश्तों में तनाव बढ़ा और वर्ष 2007 में श्वेता तिवारी ने तलाक की अर्जी दाखिल की। इसके बाद वर्ष 2012 में दोनों का कानूनी रूप से तलाक हो गया। अतीत में श्वेता ने घरेलू हिंसा और शराब की लत जैसे गंभीर आरोप लगाए थे जबकि हाल के इंटरव्यू में राजा चौधरी ने इन आरोपों से इनकार किया है।

    इस बीच पलक तिवारी लगातार अपने फिल्मी करियर पर ध्यान दे रही हैं और मनोरंजन जगत में अपनी अलग पहचान बना रही हैं। वहीं इब्राहिम अली खान भी अपने अभिनय करियर को लेकर चर्चा में हैं। दोनों की डेटिंग की खबरें भले ही सोशल मीडिया पर लगातार वायरल होती रही हों लेकिन अब तक दोनों ने अपने रिश्ते को लेकर कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है।

    राजा चौधरी के ताजा बयान से इतना जरूर साफ हो गया है कि वह अपनी बेटी के निजी फैसलों में दखल देने के बजाय उसकी स्वतंत्रता और पसंद का सम्मान करना चाहते हैं। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ने पर एक पिता के रूप में वह हमेशा अपनी बेटी के साथ खड़े रहेंगे।

  • बॉलीवुड स्टार जॉन अब्राहम ने मुंबई में बढ़ाया प्रॉपर्टी पोर्टफोलियो 84 करोड़ का शानदार बंगला खरीदा

    बॉलीवुड स्टार जॉन अब्राहम ने मुंबई में बढ़ाया प्रॉपर्टी पोर्टफोलियो 84 करोड़ का शानदार बंगला खरीदा


    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता जॉन अब्राहम ने एक बार फिर अपने बड़े रियल एस्टेट निवेश से सुर्खियां बटोर ली हैं। फिल्मों के साथ कारोबार और निवेश में भी सक्रिय रहने वाले जॉन ने मुंबई के प्रतिष्ठित बांद्रा वेस्ट इलाके में लगभग 84 करोड़ रुपये की कीमत का एक शानदार बंगला खरीदा है। इस खरीद के साथ उनका रियल एस्टेट पोर्टफोलियो और भी मजबूत हो गया है। मुंबई के सबसे प्रीमियम रिहायशी क्षेत्रों में गिने जाने वाले इस इलाके में संपत्ति खरीदना लंबे समय के निवेश के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

    रियल एस्टेट से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार यह बंगला बांद्रा के सेंट मार्टिन रोड पर स्थित है। पूरी संपत्ति करीब 1017.60 वर्ग मीटर के बड़े प्लॉट पर बनी हुई है। इसमें लगभग 193.12 वर्ग मीटर का निर्मित बंगला मौजूद है जबकि परिसर में करीब 31.50 वर्ग मीटर का एक अलग आउटहाउस भी बनाया गया है। विशाल खुला परिसर और प्रीमियम लोकेशन इस प्रॉपर्टी को बेहद खास बनाते हैं।

    बताया गया है कि इस सौदे की रजिस्ट्री 14 जुलाई 2026 को पूरी की गई। इस खरीद के लिए जॉन अब्राहम ने करीब 5.04 करोड़ रुपये की स्टाम्प ड्यूटी भी अदा की है। यह सौदा मुंबई के इस वर्ष के चर्चित हाई वैल्यू रियल एस्टेट लेनदेन में शामिल माना जा रहा है।

    यह पहली बार नहीं है जब जॉन अब्राहम ने मुंबई में करोड़ों रुपये की प्रॉपर्टी खरीदी हो। इससे पहले वर्ष 2023 में उन्होंने खार इलाके में करीब 70.83 करोड़ रुपये का एक शानदार बंगला खरीदा था। उस संपत्ति में बड़ा प्लॉट और विशाल निर्मित क्षेत्र शामिल था। लगातार हो रहे इन निवेशों से साफ है कि जॉन केवल फिल्मों तक सीमित नहीं हैं बल्कि रियल एस्टेट को भी भविष्य के मजबूत निवेश के रूप में देख रहे हैं।

    फिल्मों के अलावा जॉन अब्राहम खेल जगत में भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुके हैं। हाल ही में वह यूरोपियन टी20 प्रीमियर लीग की फ्रेंचाइजी रॉटरडैम डॉकर्स के सह मालिक बने हैं। इस टीम के प्रबंधन में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के कई बड़े नाम भी शामिल हैं। इससे साफ है कि अभिनेता मनोरंजन उद्योग के साथ खेल और व्यवसाय में भी अपनी पहचान लगातार मजबूत कर रहे हैं।

    वर्क फ्रंट की बात करें तो जॉन अब्राहम जल्द ही निर्देशक रोहित शेट्टी की नई बायोपिक फिल्म में मुंबई पुलिस के पूर्व आयुक्त राकेश मारिया की भूमिका निभाते नजर आएंगे। इसके अलावा उनकी लोकप्रिय एक्शन फ्रेंचाइजी फोर्स का अगला भाग भी दर्शकों के बीच आने की तैयारी में है जिसमें वह एक बार फिर एसीपी यशवर्धन सिंह के दमदार किरदार में दिखाई देंगे।

    लगातार बड़े निवेश और नए प्रोजेक्ट यह साबित करते हैं कि जॉन अब्राहम अभिनय के साथ कारोबार और संपत्ति निर्माण के क्षेत्र में भी लंबी रणनीति के साथ आगे बढ़ रहे हैं। मुंबई के सबसे महंगे इलाकों में की गई यह नई खरीद उनके बढ़ते निवेश साम्राज्य का एक और मजबूत अध्याय मानी जा रही है।

  • नसीरुद्दीन शाह का सरकार पर तीखा हमला बोले छात्रों के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं सब याद रखा जाएगा

    नसीरुद्दीन शाह का सरकार पर तीखा हमला बोले छात्रों के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं सब याद रखा जाएगा


    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के वरिष्ठ अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने छात्रों के प्रदर्शन और उनके साथ हुई कार्रवाई को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो संदेश में उन्होंने छात्रों के प्रति समर्थन जताते हुए कहा कि देश की युवा पीढ़ी से उन्हें हमेशा उम्मीद रही है और आज भी वही उम्मीद उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

    नसीरुद्दीन शाह ने कहा कि शिक्षण और सीखने की प्रक्रिया ने उन्हें जीवन में बहुत कुछ सिखाया है। उन्होंने कहा कि अभिनय की दुनिया में जो अनुभव उन्होंने हासिल किया उसका बड़ा हिस्सा विद्यार्थियों के साथ काम करते हुए मिला। इसी कारण वह छात्रों के संघर्ष और उनकी भावनाओं को गंभीरता से समझते हैं।

    उन्होंने अपने संदेश में कहा कि छात्रों के साथ जिस तरह का व्यवहार देखने को मिला उससे उनका मन बेहद व्यथित है। उन्होंने कहा कि वह इस पूरी घटना से भावुक भी हैं और भीतर से आक्रोश भी महसूस कर रहे हैं। उनके अनुसार किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में युवाओं की आवाज को सम्मान मिलना चाहिए और उनकी बात सुनी जानी चाहिए।

    नसीरुद्दीन शाह ने छात्रों से अपील करते हुए कहा कि वे हिम्मत न हारें और अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष जारी रखें। उन्होंने कहा कि देश में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो छात्रों की भावनाओं को समझते हैं और उनके साथ खड़े हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि युवा पीढ़ी देश के भविष्य को बेहतर बनाने की क्षमता रखती है और यही उम्मीद उन्हें सकारात्मक सोच बनाए रखने की प्रेरणा देती है।

    अपने संबोधन में अभिनेता ने सरकार की भी आलोचना की और कहा कि समय हर घटना का साक्षी बनता है। उन्होंने कहा कि जो कुछ आज हो रहा है उसे लोग भूलेंगे नहीं और इतिहास हर बात को याद रखता है। उनका मानना है कि सत्ता में बैठे लोगों को भी यह समझना चाहिए कि जनता की भावनाओं और युवाओं की उम्मीदों का सम्मान करना लोकतंत्र की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

    इस बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ जिसमें दावा किया गया कि नसीरुद्दीन शाह अपने बेटों के साथ दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन में शामिल हुए थे। हालांकि बाद में स्पष्ट हुआ कि यह वीडियो किसी विरोध प्रदर्शन का नहीं बल्कि मुंबई में आयोजित एक फिल्म स्क्रीनिंग का था और इसे गलत संदर्भ में साझा किया गया।

    नसीरुद्दीन शाह का यह बयान ऐसे समय आया है जब छात्र आंदोलनों और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर देशभर में राजनीतिक और सामाजिक बहस जारी है। अभिनेता का संदेश युवाओं के समर्थन और लोकतांत्रिक संवाद की आवश्यकता पर केंद्रित रहा।

  • अनुपम खेर ने सुनाया करियर का सबसे बड़ा अफसोस बोले अमरीश पुरी से टैलेंट की वजह से होती थी जलन

    अनुपम खेर ने सुनाया करियर का सबसे बड़ा अफसोस बोले अमरीश पुरी से टैलेंट की वजह से होती थी जलन


    नई दिल्ली । बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अनुपम खेर ने अपने लंबे फिल्मी करियर में सैकड़ों यादगार भूमिकाएं निभाई हैं लेकिन एक ऐसा किरदार भी था जो उनके हाथ में आने के बाद उनसे छिन गया। यह किरदार था फिल्म मिस्टर इंडिया के मशहूर खलनायक मोगैंबो का जिसे बाद में अमरीश पुरी ने निभाकर भारतीय सिनेमा के सबसे यादगार विलेन में शामिल कर दिया।

    अनुपम खेर ने एक पॉडकास्ट में इस घटना को याद करते हुए बताया कि शुरुआत में मोगैंबो की भूमिका के लिए उनका चयन किया गया था। फिल्म के निर्देशक शेखर कपूर इस किरदार पर काम कर रहे थे और शुरुआती तैयारी भी हो चुकी थी। लेकिन कुछ समय बाद निर्माता बोनी कपूर और अभिनेता अनिल कपूर को लगा कि जिस तरह के दमदार और प्रभावशाली खलनायक की कल्पना की गई थी उसमें अनुपम खेर पूरी तरह फिट नहीं बैठ रहे हैं।

    इसके बाद फिल्म निर्माताओं ने अमरीश पुरी को इस भूमिका के लिए चुना। जब अनुपम खेर को यह पता चला तो उन्हें बेहद दुख हुआ। उन्होंने स्वीकार किया कि इस घटना के बाद उनके मन में अमरीश पुरी के प्रति जलन पैदा हो गई थी। हालांकि उन्होंने साफ कहा कि यह जलन किसी व्यक्तिगत दुश्मनी की नहीं बल्कि अभिनय प्रतिभा की वजह से थी।

    अनुपम खेर के अनुसार उन्हें यह महसूस होता था कि अमरीश पुरी उसी किरदार को उनसे कहीं बेहतर तरीके से निभा रहे थे। यही बात उन्हें सबसे अधिक परेशान करती थी। उन्होंने कहा कि कलाकारों के बीच ऐसी सकारात्मक प्रतिस्पर्धा स्वाभाविक होती है और कई बार यही भावना व्यक्ति को बेहतर काम करने की प्रेरणा भी देती है।

    बाद में अनुपम खेर ने निर्देशक शेखर कपूर के फैसले को पूरी तरह सही माना। उनका कहना था कि वह मोगैंबो के किरदार को एक चतुर धूर्त और राजनीतिक दांवपेंच समझने वाले खलनायक के रूप में निभाना चाहते थे जबकि निर्देशक की कल्पना इससे बिल्कुल अलग थी। शेखर कपूर एक ऐसे भव्य कॉमिक बुक शैली के विलेन की तलाश में थे जिसकी स्क्रीन मौजूदगी बेहद प्रभावशाली हो और जिसे बच्चे भी याद रखें।

    अमरीश पुरी ने मोगैंबो के रूप में जिस अंदाज से अभिनय किया वह भारतीय सिनेमा के इतिहास में अमर हो गया। उनका संवाद मोगैंबो खुश हुआ आज भी लोगों की जुबान पर है और यह किरदार हिंदी फिल्मों के सबसे प्रतिष्ठित खलनायकों में गिना जाता है।

    अनुपम खेर का यह अनुभव इस बात का उदाहरण है कि फिल्मी दुनिया में कई बार बड़े अवसर आखिरी समय पर हाथ से निकल जाते हैं लेकिन एक सच्चा कलाकार अपनी भावनाओं को स्वीकार करते हुए उनसे सीख भी लेता है। यही कारण है कि अनुपम खेर आज भी भारतीय सिनेमा के सबसे सम्मानित अभिनेताओं में गिने जाते हैं।

  • महाभारत से जुड़ी थी टाइम मशीन की कहानी करण जौहर की एक पेशकश के बाद ठंडे बस्ते में चली गई फिल्म

    महाभारत से जुड़ी थी टाइम मशीन की कहानी करण जौहर की एक पेशकश के बाद ठंडे बस्ते में चली गई फिल्म


    नई दिल्ली । फिल्म निर्माता और लेखक करण राजदान ने बॉलीवुड की सबसे चर्चित लेकिन अधूरी रह गई फिल्मों में शामिल टाइम मशीन को लेकर बड़ा खुलासा किया है। यह फिल्म निर्देशक शेखर कपूर के निर्देशन में बननी थी जिसमें आमिर खान और जूही चावला मुख्य भूमिकाओं में नजर आने वाले थे। विज्ञान कल्पना और भारतीय पौराणिक इतिहास को जोड़ने वाली इस फिल्म को उस दौर का सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट माना जा रहा था लेकिन कई कारणों से यह फिल्म कभी पर्दे तक नहीं पहुंच सकी।

    करण राजदान ने बताया कि टाइम मशीन की कहानी आमिर खान के किरदार पर आधारित थी जो गलती से एक ऐसी मशीन के जरिए अतीत में पहुंच जाता है जहां महाभारत का युद्ध चल रहा होता है। वहां उसकी मुलाकात भगवान कृष्ण से होती है और वह इतिहास के सबसे बड़े युद्ध का प्रत्यक्षदर्शी बन जाता है। इस अनोखे विचार ने शुरुआत में पूरी टीम को बेहद उत्साहित कर दिया था।

    उन्होंने बताया कि इस कहानी की प्रेरणा उन्हें और शेखर कपूर को अपने निजी जीवन की एक भावुक घटना से मिली थी। दोनों ने कम समय के अंतराल में अपने माता पिता को खो दिया था और अक्सर यह सोचते थे कि काश समय में पीछे जाकर उनसे एक बार फिर मिल पाते। इसी भावना ने टाइम मशीन की कहानी को जन्म दिया। केवल तीन महीने में पूरी कहानी पटकथा और संवाद तैयार कर लिए गए थे।

    शेखर कपूर इस प्रोजेक्ट को लेकर इतने उत्साहित थे कि उन्होंने संगीतकार लक्ष्मीकांत प्यारेलाल और गीतकार आनंद बख्शी को भी इससे जोड़ लिया था। आमिर खान परेश रावल और अन्य कलाकारों को भी कहानी सुनाई गई और सभी ने इसकी कल्पना और विषय की सराहना की। उस समय यह फिल्म भारतीय सिनेमा में तकनीकी और कहानी के स्तर पर बड़ा बदलाव ला सकती थी।

    करण राजदान ने यह भी खुलासा किया कि कई बड़े निर्माता इस फिल्म को बनाना चाहते थे। उन्होंने धर्मा प्रोडक्शंस के प्रमुख करण जौहर को भी स्क्रिप्ट भेजी थी लेकिन उन्हें स्क्रिप्ट के बदले केवल पच्चीस लाख रुपये की पेशकश की गई। राजदान के मुताबिक उन्हें लगा कि इतनी बड़ी और अनोखी कहानी की यह कीमत बेहद कम थी इसलिए बात आगे नहीं बढ़ सकी। बाद में निर्माता फिरोज नाडियाडवाला ने भी इस प्रोजेक्ट को दोबारा शुरू करने की कोशिश की लेकिन निर्देशन को लेकर सहमति नहीं बन पाई। राजकुमार संतोषी का नाम भी सामने आया लेकिन राजदान का मानना था कि यह उनकी शैली की फिल्म नहीं थी।

    आज जब भारतीय सिनेमा में विज्ञान कल्पना और पौराणिक कथाओं पर आधारित बड़े बजट की फिल्में बन रही हैं तब टाइम मशीन का अधूरा रह जाना एक बड़ी चूक माना जाता है। यदि यह फिल्म अपने समय में बन जाती तो संभव है कि भारतीय सिनेमा की सबसे यादगार फिल्मों में इसका नाम शामिल होता। वर्षों बाद सामने आए इन खुलासों ने एक बार फिर इस अधूरे ड्रीम प्रोजेक्ट को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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  • नसीरुद्दीन शाह की अधूरी प्रेम कहानी पहली शादी से लेकर बेटी की अनदेखी तक आत्मकथा में किए भावुक खुलासे

    नसीरुद्दीन शाह की अधूरी प्रेम कहानी पहली शादी से लेकर बेटी की अनदेखी तक आत्मकथा में किए भावुक खुलासे


    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह अपनी दमदार अदाकारी के लिए जाने जाते हैं लेकिन उनकी निजी जिंदगी भी उतार चढ़ाव और भावनात्मक संघर्षों से भरी रही है। अपनी आत्मकथा एंड देन वन डे में अभिनेता ने पहली शादी पहली पत्नी परवीन मुराद बेटी हीबा और अपने जीवन की सबसे बड़ी भूल को लेकर खुलकर बात की है। नसीरुद्दीन शाह ने स्वीकार किया कि कम उम्र में लिए गए फैसलों और अपरिपक्व सोच की वजह से वह न तो अच्छे पति बन पाए और न ही अच्छे पिता।

    नसीरुद्दीन शाह की पहली मुलाकात परवीन मुराद से उस समय हुई थी जब वह महज 19 साल के थे और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रहे थे। परवीन उनसे लगभग 15 वर्ष बड़ी थीं। वह तलाकशुदा थीं और पहले से दो बच्चों की मां भी थीं। उम्र और सामाजिक परिस्थितियों का अंतर होने के बावजूद दोनों एक दूसरे के करीब आए। नसीरुद्दीन शाह के अनुसार परवीन पहली ऐसी शख्स थीं जिन्होंने उनके भीतर छिपे अभिनेता पर भरोसा जताया और उनके सपनों को पहचान दी। यही विश्वास धीरे धीरे प्यार में बदल गया।

    हालांकि दोनों के रिश्ते को परिवारों की मंजूरी नहीं मिली। नसीरुद्दीन शाह के परिवार को परवीन के तलाकशुदा होने और दो बच्चों की मां होने पर आपत्ति थी जबकि परवीन के परिवार को दोनों की उम्र के बड़े अंतर और नसीरुद्दीन की कम उम्र को लेकर चिंता थी। विरोध के बावजूद दोनों ने शादी कर ली और अपने नए जीवन की शुरुआत की।

    शादी के करीब एक वर्ष बाद बेटी हीबा का जन्म हुआ लेकिन इस खुशी के साथ ही दोनों के रिश्ते में दूरियां बढ़ने लगीं। नसीरुद्दीन शाह ने अपनी आत्मकथा में स्वीकार किया कि उस समय वह पत्नी की भावनाओं को समझने में पूरी तरह असफल रहे। उन्होंने लिखा कि वह अपने अभिनय करियर और भविष्य को लेकर इतने व्यस्त थे कि परिवार और पत्नी की जरूरतों पर ध्यान ही नहीं दे सके। उन्होंने यह भी माना कि गर्भावस्था के दौरान वह पत्नी का साथ नहीं दे पाए और पिता बनने की जिम्मेदारी निभाने के लिए मानसिक रूप से तैयार भी नहीं थे।

    अभिनेता ने अपनी बेटी हीबा को लेकर भी बेहद भावुक स्वीकारोक्ति की है। उन्होंने लिखा कि कई वर्षों तक वह अपनी बेटी से भावनात्मक रूप से जुड़ ही नहीं पाए। उन्हें इस बात का आज भी गहरा पछतावा है कि उन्होंने पिता होने की जिम्मेदारी को गंभीरता से नहीं लिया। नसीरुद्दीन शाह के अनुसार यह उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी गलतियों में से एक रही जिसका अफसोस उन्हें हमेशा रहेगा।

    पहली शादी टूटने के दौर में ही थिएटर के दौरान उनकी मुलाकात अभिनेत्री रत्ना पाठक से हुई। दोनों के बीच दोस्ती धीरे धीरे गहरे रिश्ते में बदल गई। परवीन मुराद से कानूनी रूप से अलग होने के बाद वर्ष 1982 में नसीरुद्दीन शाह और रत्ना पाठक ने विवाह किया। अभिनेता ने अपनी आत्मकथा में रत्ना पाठक को अपने जीवन का सबसे सच्चा प्रेम बताया है और स्वीकार किया कि उनके साथ उन्होंने रिश्तों की अहमियत को सही मायनों में समझा।

    नसीरुद्दीन शाह की यह कहानी केवल एक अभिनेता की निजी जिंदगी का किस्सा नहीं बल्कि इस बात की सीख भी देती है कि सफलता के पीछे भागते समय रिश्तों और परिवार की जिम्मेदारियों को नजरअंदाज करना जीवनभर का पछतावा बन सकता है। उनकी आत्मस्वीकृति यह साबित करती है कि गलतियों को स्वीकार करना भी साहस का सबसे बड़ा रूप होता है।

  • दिल्ली के पहले घर पर फिर शाहरुख का नाम शादी के बाद जहां शुरू हुई थी नई जिंदगी अब पूरी इमारत के बने मालिक

    दिल्ली के पहले घर पर फिर शाहरुख का नाम शादी के बाद जहां शुरू हुई थी नई जिंदगी अब पूरी इमारत के बने मालिक


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख खान ने एक बार फिर अपनी निजी जिंदगी से जुड़ा ऐसा फैसला लिया है जिसने उनके प्रशंसकों का दिल जीत लिया है। दिल्ली के पंचशील पार्क स्थित वह घर जहां शादी के बाद उन्होंने पत्नी गौरी खान के साथ अपनी नई जिंदगी की शुरुआत की थी अब पूरी तरह उनके नाम हो गया है। लंबे समय से इस इमारत के बेसमेंट और पहली मंजिल के मालिक रहे शाहरुख खान ने अब दूसरी और तीसरी मंजिल भी खरीद ली है। इसके साथ ही पूरी बिल्डिंग के एकमात्र मालिक बनने का गौरव उन्हें मिल गया है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक इस डील की कीमत करीब 37 करोड़ रुपये बताई जा रही है। यह प्रॉपर्टी दक्षिण दिल्ली के सबसे प्रतिष्ठित और महंगे इलाकों में शामिल पंचशील पार्क में स्थित है और लगभग 1200 वर्ग गज क्षेत्र में फैली हुई है। आर्थिक दृष्टि से यह सौदा भले ही बड़ा हो लेकिन शाहरुख और गौरी के लिए इसकी सबसे बड़ी अहमियत इससे जुड़ी भावनात्मक यादें हैं।

    साल 1991 में विवाह के बाद शाहरुख और गौरी ने अपने वैवाहिक जीवन की शुरुआत इसी घर से की थी। उस समय शाहरुख अपने अभिनय करियर की शुरुआती राह पर थे और बाद में फिल्मों में किस्मत आजमाने के लिए मुंबई चले गए। सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचने के बाद भी इस घर से जुड़ी यादें उनके दिल में हमेशा जीवित रहीं। यही वजह है कि उन्होंने अब पूरी इमारत अपने नाम कर ली।

    गौरी खान भी कई बार इस घर के प्रति अपना भावनात्मक लगाव जाहिर कर चुकी हैं। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि दिल्ली उनका मायका है और इस घर से उनकी अनगिनत यादें जुड़ी हैं। उन्होंने कहा था कि परिवार के साथ बिताए गए खूबसूरत पल बच्चों की यादें शाहरुख की दी हुई कलाकृतियां पोस्टकार्ड और एंटीक उपहार इस घर को बेहद खास बनाते हैं। घर की एक दीवार पर परिवार से जुड़ी इन यादों को फ्रेम कर सजाया गया है जो उनका सबसे पसंदीदा कोना है।

    शाहरुख और गौरी की प्रेम कहानी भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रही। दोनों ने वर्ष 1991 में विवाह किया था और उनकी शादी कोर्ट मैरिज पारंपरिक हिंदू रीति रिवाज और निकाह तीनों तरीकों से संपन्न हुई थी। वर्षों बाद भी दोनों की जोड़ी बॉलीवुड की सबसे मजबूत और प्रेरणादायक जोड़ियों में गिनी जाती है।

    दिल्ली के इस घर के अलावा मुंबई स्थित शाहरुख खान का प्रतिष्ठित बंगला मन्नत भी हमेशा चर्चा में रहता है। लगभग 27000 वर्ग फुट में फैले इस आलीशान बंगले को देश के सबसे चर्चित सेलिब्रिटी घरों में गिना जाता है और इसे देखने के लिए हर दिन हजारों प्रशंसक पहुंचते हैं। हालांकि दिल्ली का यह घर उनके लिए सिर्फ एक संपत्ति नहीं बल्कि संघर्ष प्रेम और सफलता की शुरुआती यादों का प्रतीक है।

    वर्क फ्रंट की बात करें तो शाहरुख खान जल्द ही अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्म किंग में नजर आने वाले हैं। इस फिल्म में उनके साथ दीपिका पादुकोण और बेटी सुहाना खान भी अहम भूमिका निभा रही हैं। प्रशंसकों को इस फिल्म का बेसब्री से इंतजार है और उम्मीद की जा रही है कि यह भी शाहरुख के करियर की एक बड़ी फिल्म साबित होगी।

  • ओमकारा की शूटिंग का अनसुना किस्सा सैफ अली खान ने बताया क्यों ठुकराया विशाल भारद्वाज का बोल्ड सीन

    ओमकारा की शूटिंग का अनसुना किस्सा सैफ अली खान ने बताया क्यों ठुकराया विशाल भारद्वाज का बोल्ड सीन


    नई दिल्ली । विशाल भारद्वाज की फिल्म ओमकारा को हिंदी सिनेमा की बेहतरीन फिल्मों में गिना जाता है। इस फिल्म में सैफ अली खान ने लंगड़ा त्यागी का किरदार निभाकर दर्शकों और समीक्षकों दोनों का दिल जीत लिया था। फिल्म को रिलीज हुए अब 20 साल पूरे हो चुके हैं और इसी मौके पर सैफ ने शूटिंग के दौरान का एक ऐसा किस्सा साझा किया है जिसने सभी का ध्यान खींच लिया।

    सैफ अली खान ने एक इंटरव्यू में बताया कि फिल्म के एक महत्वपूर्ण दृश्य को लेकर निर्देशक विशाल भारद्वाज की सोच बेहद अलग थी। उस सीन में एक लंबा संवाद था जिसे आईने के सामने फिल्माया जाना था। विशाल चाहते थे कि यह पूरा दृश्य बिना कपड़ों के शूट किया जाए ताकि किरदार की मानसिक स्थिति और असुरक्षा को अधिक प्रभावी ढंग से दिखाया जा सके।

    सैफ ने बताया कि निर्देशक का यह सुझाव उन्हें दिलचस्प तो लगा लेकिन सेट पर मौजूद बड़ी संख्या में लोगों की वजह से वह सहज महसूस नहीं कर पा रहे थे। ऐसे में उन्होंने विशाल भारद्वाज के सामने एक मजेदार शर्त रख दी। सैफ ने कहा कि अगर निर्देशक भी उसी तरह बिना कपड़ों के उन्हें डायरेक्ट करेंगे तो वह यह सीन करने के लिए तैयार हैं। इस पर विशाल भारद्वाज ने मुस्कुराते हुए मना कर दिया और बात वहीं खत्म हो गई।

    हालांकि अब जब सैफ उस पल को याद करते हैं तो उन्हें लगता है कि शायद उन्हें वह दृश्य कर लेना चाहिए था। उनके मुताबिक उस सीन को पीछे की ओर से फिल्माया जा सकता था और इससे किरदार की गंभीरता और प्रभाव दोनों बढ़ जाते। उन्होंने कहा कि आज के समय में फिल्मों में नए तरह के प्रयोग हो रहे हैं और अगर आज ऐसा प्रस्ताव मिलता तो शायद वह इसे स्वीकार कर लेते।

    सैफ ने यह भी बताया कि शूटिंग शुरू होने से ठीक पहले विशाल भारद्वाज ने उस पूरे दृश्य में बड़ा बदलाव कर दिया। पहले जहां लंबा संवाद रखा गया था वहीं बाद में निर्देशक ने तय किया कि इस दृश्य में कोई संवाद नहीं होगा। इसके बजाय सैफ को आईने के सामने खड़े होकर एक भारी धातु की वस्तु से शीशा तोड़ना था। इस दौरान उनके हाथ से खून बहता दिखाया जाना था ताकि किरदार के भीतर का गुस्सा और टूटन बिना शब्दों के दर्शकों तक पहुंच सके।

    सैफ के अनुसार विशाल भारद्वाज की यही खासियत है कि वह अंतिम समय तक अपने दृश्यों पर काम करते रहते हैं और यदि उन्हें कोई बेहतर विचार आता है तो वह पूरी पटकथा में बदलाव करने से भी नहीं हिचकते। यही कारण है कि ओमकारा आज भी अपने दमदार निर्देशन बेहतरीन अभिनय और प्रभावशाली दृश्यों के लिए याद की जाती है।

    ओमकारा ने न केवल सैफ अली खान के अभिनय करियर को नई पहचान दी बल्कि यह भी साबित किया कि चुनौतीपूर्ण किरदार निभाने से कलाकार की प्रतिभा और निखरकर सामने आती है। फिल्म के 20 साल बाद सामने आया यह किस्सा दर्शाता है कि पर्दे पर दिखने वाले हर यादगार दृश्य के पीछे कई रोचक कहानियां छिपी होती हैं।

  • रील नहीं रियल लाइफ के भी हीरो थे धर्मेंद्र अंडरवर्ल्ड की धमकी पर दिया ऐसा जवाब कि सब रह गए हैरान

    रील नहीं रियल लाइफ के भी हीरो थे धर्मेंद्र अंडरवर्ल्ड की धमकी पर दिया ऐसा जवाब कि सब रह गए हैरान


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र को दर्शक आज भी उनकी शानदार अदाकारी दमदार संवाद और बेहतरीन एक्शन के लिए याद करते हैं। उन्होंने अपने लंबे फिल्मी सफर में रोमांस कॉमेडी और एक्शन हर शैली की फिल्मों में यादगार भूमिकाएं निभाईं। हालांकि उनकी पहचान केवल बड़े पर्दे तक सीमित नहीं थी। उन्हें करीब से जानने वाले लोग बताते हैं कि वास्तविक जीवन में भी धर्मेंद्र बेहद साहसी और निडर इंसान थे। उनके व्यक्तित्व से जुड़ा ऐसा ही एक किस्सा अभिनेता और निर्देशक सत्यजीत पुरी ने साझा किया जिसने यह साबित किया कि धर्मेंद्र केवल फिल्मों के ही नहीं बल्कि असल जिंदगी के भी सच्चे हीरो थे।

    सत्यजीत पुरी ने एक इंटरव्यू में बताया कि 1990 के दशक में जब फिल्म इंडस्ट्री पर अंडरवर्ल्ड का दबदबा बढ़ रहा था तब कई कलाकारों को धमकी भरे फोन और दबाव का सामना करना पड़ता था। उस दौर में कई लोग खामोश रहना ही बेहतर समझते थे लेकिन धर्मेंद्र का स्वभाव अलग था। उन्होंने कभी भी डर के आगे झुकना स्वीकार नहीं किया।

    सत्यजीत पुरी के अनुसार एक समय ऐसा भी आया जब अंडरवर्ल्ड से जुड़े लोगों ने धर्मेंद्र पर दबाव बनाने की कोशिश की। लेकिन धर्मेंद्र ने घबराने के बजाय बेहद सख्त और आत्मविश्वास से भरा जवाब दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि कोई उनसे टकराने की कोशिश करेगा तो उनके गांव सनेहवाल के लोग उनके साथ खड़े होंगे। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि उनके पास लड़ने के लिए पूरी फौज जैसी ताकत है और उनसे उलझना किसी के लिए आसान नहीं होगा।

    बताया जाता है कि धर्मेंद्र के इस बेबाक और निडर जवाब के बाद अंडरवर्ल्ड ने दोबारा उन्हें परेशान करने की कोशिश नहीं की। यह घटना आज भी बॉलीवुड के चर्चित किस्सों में गिनी जाती है और धर्मेंद्र के साहस की मिसाल के रूप में सुनाई जाती है।

    धर्मेंद्र का व्यक्तित्व हमेशा सादगी और आत्मसम्मान से जुड़ा रहा। उन्होंने अपने करियर में कभी विवादों के सहारे लोकप्रियता हासिल करने की कोशिश नहीं की बल्कि अपने काम और व्यवहार से लोगों का दिल जीता। यही वजह रही कि फिल्म इंडस्ट्री में उन्हें बेहद सम्मान की नजर से देखा जाता था।

    धर्मेंद्र ने अपने फिल्मी करियर में सैकड़ों फिल्मों में अभिनय किया और कई सुपरहिट फिल्मों का हिस्सा रहे। उनकी जोड़ी कई बड़े सितारों के साथ पसंद की गई लेकिन अमिताभ बच्चन के साथ उनकी फिल्मों को आज भी दर्शक बड़े चाव से देखते हैं। उनकी दमदार स्क्रीन प्रेजेंस और बेहतरीन अभिनय ने उन्हें हिंदी सिनेमा का ही मैन बना दिया।

    24 नवंबर 2025 को धर्मेंद्र के निधन की खबर ने फिल्म जगत और उनके करोड़ों प्रशंसकों को गहरा दुख पहुंचाया। उनके जाने के बाद भी उनकी फिल्में उनके संवाद और उनके साहस से जुड़े किस्से लोगों के दिलों में जिंदा हैं। मरणोपरांत उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया जो भारतीय सिनेमा में उनके असाधारण योगदान का सम्मान था।

    धर्मेंद्र का जीवन इस बात का उदाहरण है कि सच्चा नायक केवल पर्दे पर नहीं बल्कि अपने सिद्धांतों साहस और आत्मसम्मान से वास्तविक जीवन में भी पहचाना जाता है। यही कारण है कि उन्हें आज भी भारतीय सिनेमा के सबसे सम्मानित और प्रेरणादायक कलाकारों में गिना जाता है।