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  • IIT बॉम्बे ने प्रोफेसर डूला को छुट्टी पर भेजा, साहिल केस की जांच के लिए 10 सदस्यीय समिति गठित

    IIT बॉम्बे ने प्रोफेसर डूला को छुट्टी पर भेजा, साहिल केस की जांच के लिए 10 सदस्यीय समिति गठित

    नई दिल्ली ।आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वोकाडे की मौत का मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए संस्थान ने 10 सदस्यों वाली एक समिति गठित की है। समिति को मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करने और एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया है।

    इसी के साथ संस्थान ने मामले में नामजद प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला को जांच पूरी होने तक छुट्टी पर भेज दिया है। यह कदम जांच प्रक्रिया के दौरान निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।

    साहिल वोकाडे की मौत को लेकर उनके परिवार की ओर से लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। साहिल के पिता रवींद्र वोकाडे और उनकी मां सोनाली वोकाडे मंगलवार को मुंबई क्राइम ब्रांच पहुंचे। परिवार ने मामले में नामजद फैकल्टी सदस्यों प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला और शिरीष केदारे की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की।

    साहिल के पिता का कहना है कि मामले में सिर्फ आंतरिक समिति बनाना पर्याप्त नहीं है। परिवार ने आरोपों में नामजद लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। परिवार की ओर से यह भी कहा गया है कि उन्हें निष्पक्ष जांच और अपने बेटे के मामले में न्याय चाहिए।

    परिवार ने आगे शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की बात भी कही है। इससे मामले को लेकर संस्थान और परिवार के बीच विवाद का एक और पहलू सामने आया है।

    जानकारी के मुताबिक साहिल वोकाडे 18 सितंबर की शाम हॉस्टल के अपने कमरे में फंदे से लटके मिले थे। घटना के बाद मामले की जांच मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंपी गई। पुलिस की जांच के साथ-साथ संस्थान ने भी अपने स्तर पर घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों की पड़ताल शुरू की है।

    इस मामले में संस्थान की ओर से 19 सितंबर को कहा गया था कि मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान साहिल को मोबाइल फोन के जरिए नकल करते हुए पकड़ा गया था। इसके बाद से ही साहिल की मौत से जुड़े घटनाक्रम और संस्थान में उसके साथ हुई घटनाओं को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

    साहिल के पिता ने इससे पहले दोनों नामजद प्रोफेसरों के इस्तीफे की मांग भी की थी। अब परिवार की ओर से उनकी गिरफ्तारी की मांग किए जाने के बाद मामला और संवेदनशील हो गया है।

    दूसरी ओर, 10 सदस्यीय समिति को पूरे घटनाक्रम की आंतरिक जांच की जिम्मेदारी दी गई है। समिति मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा करेगी और अपनी रिपोर्ट निर्धारित समय सीमा के भीतर संस्थान को सौंपेगी।

    प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला को जांच पूरी होने तक छुट्टी पर भेजे जाने का फैसला भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। अब मामले में पुलिस जांच और संस्थान की आंतरिक जांच दोनों के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।

    फिलहाल साहिल वोकाडे की मौत के मामले में परिवार की ओर से गिरफ्तारी की मांग की जा रही है, जबकि संस्थान ने जांच के लिए समिति गठित कर दी है। मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ ही आरोपों और घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • साहिल की मौत के बाद IIT बॉम्बे ने बदली हॉस्टल की व्यवस्था, सीलिंग फैन हटाकर वॉल फैन लगाने की तैयारी तेज

    साहिल की मौत के बाद IIT बॉम्बे ने बदली हॉस्टल की व्यवस्था, सीलिंग फैन हटाकर वॉल फैन लगाने की तैयारी तेज

     
    नई दिल्ली । IIT बॉम्बे में BTech छात्र साहिल रविंद्र वाकोडे की मौत के बाद हॉस्टल और कैंपस में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा बदलाव किया जा रहा है। संस्थान ने हॉस्टल में लगे सीलिंग फैन हटाकर उनकी जगह वॉल फैन लगाने का फैसला किया है। कैंपस में वॉल फैन पहुंचने की तस्वीरें भी सामने आई हैं।

    हॉस्टल में पंखों की व्यवस्था बदलने को लेकर चर्चा जुलाई में ही शुरू हो गई थी। एक छात्र की मौत के बाद सीलिंग फैन हटाने और वॉल फैन लगाने के विकल्प पर विचार किया गया था। हालांकि, 18 सितंबर को साहिल की मौत के बाद इस प्रक्रिया को तेज कर दिया गया।

    साहिल एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में बीटेक के दूसरे वर्ष का छात्र था। वह महाराष्ट्र के यवतमाल जिले का रहने वाला था। 18 सितंबर को परीक्षा से जुड़े घटनाक्रम के बाद वह अपने हॉस्टल के कमरे में पहुंचा था। बाद में उसी दिन उसे कमरे में मृत पाया गया।

    जांच में सामने आए सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, परीक्षा के दौरान साहिल दोपहर करीब 12:30 से 12:45 बजे के बीच अपनी जेब में रखी किसी वस्तु को देखने के लिए झुका था। इसके बाद एक प्रोफेसर ने उससे सवाल किया और उसे अलग ले जाया गया। करीब 1:25 बजे वह हॉस्टल के कमरे में पहुंचा और उसके बाद बाहर नहीं निकला।

    मामले की जांच में परीक्षा हॉल, कैंपस और हॉस्टल की सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल की जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन फुटेज को सार्वजनिक नहीं किया गया है। जांच का उद्देश्य घटना से पहले के पूरे घटनाक्रम और उससे जुड़े तथ्यों को समझना है।

    साहिल के परिवार ने उसके साथ जाति आधारित भेदभाव और उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। परिवार ने मामले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी से कराने की मांग की है। माता-पिता की शिकायत के आधार पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है। प्राथमिकी में एक प्रोफेसर का नाम भी शामिल किया गया है।

    घटना के बाद संस्थान की ओर से साहिल की परीक्षा से जुड़ी स्थिति को लेकर एक बयान दिया गया था। इसमें दावा किया गया था कि उसने परीक्षा का प्रश्नपत्र ChatGPT पर अपलोड किया था और कथित तौर पर नकल करते पकड़े जाने के बाद उसकी मौत हुई। बाद में संस्थान ने इस बयान को वापस लेते हुए माफी मांगी और कहा कि पूरी जांच पूरी होने से पहले ऐसा निष्कर्ष देना उचित नहीं था।

    साहिल की मौत के बाद संस्थान में छात्रों का विरोध-प्रदर्शन भी जारी रहा। छात्र जवाबदेही, पारदर्शिता, छात्र कल्याण और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की मांग कर रहे हैं। हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था और संस्थागत प्रक्रियाओं को लेकर भी छात्रों के बीच सवाल उठे हैं।

    उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस साल IIT बॉम्बे में यह तीसरी छात्र आत्महत्या बताई जा रही है। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के बीच छात्र मानसिक स्वास्थ्य, सुरक्षा और संस्थागत जवाबदेही को लेकर चर्चा फिर तेज हुई है।

    सीलिंग फैन की जगह वॉल फैन लगाने का फैसला इसी व्यापक सुरक्षा व्यवस्था में किए जा रहे बदलावों का हिस्सा है। हालांकि, साहिल की मौत के कारणों और उससे जुड़े आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

  • वास्तविक जीवन में मदिरा को हाथ न लगाने वाले हास्य अभिनेता की अनसुनी दास्तान, मंदिर जाते समय हुए सड़क हादसे में थम गई थीं सांसें

    वास्तविक जीवन में मदिरा को हाथ न लगाने वाले हास्य अभिनेता की अनसुनी दास्तान, मंदिर जाते समय हुए सड़क हादसे में थम गई थीं सांसें

    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे विलक्षण कलाकार हुए हैं, जिनकी ऑन-स्क्रीन छवि और वास्तविक जीवन के आचरण में जमीन-आसमान का अंतर था। इस फेहरिस्त में सबसे लोकप्रिय नामों में से एक नाम दिवंगत अभिनेता केष्टो मुखर्जी का है। केष्टो मुखर्जी ने रुपहले पर्दे पर हमेशा एक ऐसे शराबी के किरदारों को जीवंत किया, जिसे देखकर दर्शक अपनी हंसी नहीं रोक पाते थे। आम जनता उन्हें असल जिंदगी में भी शराबी समझने की भूल कर बैठती थी, जबकि हकीकत यह थी कि उन्होंने अपने पूरे जीवन में कभी शराब को हाथ तक नहीं लगाया था। उनका पूरा सफरनामा कला के प्रति अटूट निष्ठा, कड़े संघर्षों और अप्रत्याशित मोड़ों की एक अनूठी दास्तान है।

    पश्चिम बंगाल के कोलकाता में जन्मे केष्टो मुखर्जी को बचपन से ही अभिनय का गहरा शौक था, जिसके कारण उन्होंने बेहद कम उम्र में ही नुक्कड़ नाटकों और स्थानीय रंगमंच से अपने अभिनय सफर की शुरुआत कर दी थी। रंगमंच पर उनकी शानदार प्रतिभा को देखकर उस दौर के महान बंगाली फिल्मकार ऋत्विक घटक बेहद प्रभावित हुए और उन्होंने केष्टो को अपनी प्रतिष्ठित बांग्ला फिल्म ‘नागरिक’ में एक महत्वपूर्ण भूमिका की पेशकश की। नियति का खेल देखिए कि यह फिल्म साल 1952 में ही बनकर पूरी तरह तैयार हो चुकी थी, लेकिन किन्हीं कारणों से इसे रिलीज होने में पूरे 25 साल का लंबा समय लग गया। जब यह फिल्म 1977 में सिनेमाघरों में पहुंची, तब तक ऋत्विक घटक इस दुनिया को अलविदा कह चुके थे। अपने गुरु के जाने के गम में केष्टो मुखर्जी इतने भावुक हो गए थे कि उन्होंने इस फिल्म को जीवनभर कभी नहीं देखा।

    कोलकाता के सिनेमाई हलकों में कई बंगाली फिल्मों का हिस्सा रहने के बावजूद केष्टो मुखर्जी को वह पहचान और आर्थिक संबल नहीं मिल पा रहा था, जिसके वह हकदार थे। न तो उनके परिवार का गुजारा ठीक से हो पा रहा था और न ही उनके भीतर के कलाकार की भूख शांत हो रही थी। आखिरकार, अपनी आंखों में एक बड़ा मुकाम हासिल करने का सपना संजोकर उन्होंने देश की आर्थिक राजधानी और मायानगरी बॉम्बे का रुख किया। मुंबई आने के बाद शुरुआती दिन बेहद तंगहाली और संघर्ष में बीते। उन्होंने हार न मानते हुए लगातार प्रयास किए और किसी तरह मशहूर निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी से संपर्क स्थापित किया। ऋषिकेश मुखर्जी ने उनकी प्रतिभा का सम्मान करते हुए अपनी फिल्म ‘मुसाफिर’ में उन्हें एक स्ट्रीट डांसर का बहुत छोटा सा रोल दिया, जिससे उनके हिंदी सिनेमा के सफर का आधिकारिक तौर पर आगाज हुआ।

    बॉम्बे में खुद को स्थापित करने की इसी जद्दोजहद के दौरान केष्टो मुखर्जी से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प और ऐतिहासिक वाकया सामने आया, जब वह काम की तलाश में महान फिल्ममेकर बिमल रॉय के सेट पर पहुंचे थे। बिमल रॉय उस समय अपनी फिल्म की शूटिंग में बेहद व्यस्त थे और केष्टो बिना थके घंटों एक कोने में खड़े होकर उनकी फुर्सत का इंतजार करते रहे। काफी देर बाद जब बिमल रॉय की नजर उन पर पड़ी, तो उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि फिलहाल उनके पास देने के लिए कोई काम नहीं है और वह बाद में आएं। इसके बावजूद केष्टो वहां से नहीं गए। कुछ समय बाद बिमल रॉय ने जब दोबारा उन्हें वहीं खड़ा देखा, तो वह थोड़े असहज और चिढ़ गए। उन्होंने केष्टो से पूछा कि क्या तुम भौंक सकते हो, मुझे अपनी फिल्म के एक दृश्य के लिए कुत्ते की प्रामाणिक आवाज की जरूरत है, क्या तुम यह कर पाओगे।

    यह एक ऐसा सवाल था जो किसी भी स्वाभिमानी अभिनेता को निराश और आहत कर सकता था, लेकिन केष्टो मुखर्जी ने इसे एक बड़ी चुनौती और अवसर के रूप में स्वीकार किया। वह कुछ पल के लिए बिल्कुल शांत हुए और फिर पूरे समर्पण के साथ सेट पर ही जोर-जोर से कुत्ते की आवाज निकालने लगे। उनकी इस अप्रत्याशित और सजीव प्रस्तुति ने बिमल रॉय समेत पूरे सेट पर मौजूद लोगों को हैरान कर दिया। बिमल रॉय के पास कहने के लिए कोई शब्द नहीं बचे थे और उन्होंने केष्टो की प्रतिभा का लोहा मानते हुए तुरंत उन्हें अपनी फिल्म के लिए अनुबंधित कर लिया। इस घटना के बाद केष्टो मुखर्जी के लिए बॉलीवुड के दरवाजे पूरी तरह खुल गए और उन्होंने अपने पूरे करियर में 90 से अधिक फिल्मों में अपनी विशिष्ट अदाकारी का लोहा मनवाया।

    सफलता के शिखर पर पहुंचने और दर्शकों को दशकों तक हंसाने वाले इस महान कलाकार का अंत बेहद दुखद रहा। मात्र 56 वर्ष की आयु में नियति ने उन्हें हमसे छीन लिया। एक दिन जब वह मुंबई के पास स्थित एक प्रसिद्ध गणपति मंदिर में दर्शन करने के लिए अपनी कार से जा रहे थे, तभी पीछे से आ रहे एक अनियंत्रित तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी कार को जोरदार टक्कर मार दी। इस भीषण सड़क हादसे में केष्टो मुखर्जी गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद दुर्घटना के अगले ही दिन दिल का दौरा पड़ने के कारण इस महान हास्य अभिनेता का असमय निधन हो गया।