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  • शिवपुरी में कोर्ट में गवाही देने नहीं पहुंचे आरक्षक पर कार्रवाई, 5 हजार रुपये का बंधपत्र जब्त, सात दिन में जमा करनी होगी राशि

    शिवपुरी में कोर्ट में गवाही देने नहीं पहुंचे आरक्षक पर कार्रवाई, 5 हजार रुपये का बंधपत्र जब्त, सात दिन में जमा करनी होगी राशि


    शिवपुरी: में निर्धारित तारीख पर न्यायालय में गवाही के लिए उपस्थित नहीं होना करैरा थाने में पदस्थ आरक्षक मनोज कतरोलिया को महंगा पड़ गया। एनडीपीएस एक्ट के विशेष सत्र प्रकरण में गवाही देने के लिए अदालत में उपस्थित नहीं होने पर न्यायालय ने उसके 5 हजार रुपये के बंधपत्र की राशि जब्त कर ली है। विशेष न्यायाधीश दिनेश कुमार शर्मा ने 30 अक्टूबर 2026 को आदेश जारी करते हुए आरक्षक को सात दिन के भीतर यह राशि जमा कराने के निर्देश दिए हैं।

    जानकारी के अनुसार, आरक्षक मनोज कतरोलिया करैरा थाने में पदस्थ है। वह विशेष सत्र प्रकरण क्रमांक 24/2025 में मध्य प्रदेश राज्य विरुद्ध कमल सिंह व अन्य मामले में साक्षी के रूप में नामित था। इस मामले में उसकी गवाही दर्ज की जानी थी। न्यायालय ने उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए 5 हजार रुपये का जमानती वारंट जारी किया था। संबंधित वारंट की तामील भी कराई जा चुकी थी।

    न्यायालय में निर्धारित तारीख पर उपस्थित रहने के लिए आरक्षक ने 11 सितंबर 2026 को 5 हजार रुपये का बंधपत्र निष्पादित किया था। इसके तहत उसे तय तारीख पर अदालत में उपस्थित होना था, लेकिन वह निर्धारित समय पर न्यायालय में पेश नहीं हुआ। उसकी अनुपस्थिति के संबंध में कोई उचित कारण भी प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बाद न्यायालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बंधपत्र की राशि जब्त करने का आदेश दिया।

    विशेष न्यायाधीश, एनडीपीएस एक्ट, शिवपुरी ने एमजेसी प्रकरण क्रमांक 409/2026 में 30 अक्टूबर को आदेश पारित किया। इसमें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 491 के तहत आरक्षक के 5 हजार रुपये के बंधपत्र को जब्त करने की कार्रवाई की गई। न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि संबंधित राशि सात दिन के भीतर जमा कराई जाए।

    आदेश के मुताबिक, आरक्षक मनोज कतरोलिया को 5 हजार रुपये की राशि अनुविभागीय अधिकारी करैरा के माध्यम से न्यायालय में जमा करनी होगी। निर्धारित अवधि के भीतर राशि जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं। यह कार्रवाई न्यायालय में उपस्थित रहने के लिए दिए गए बंधपत्र की शर्तों का पालन नहीं करने के मामले में की गई है।

    इस प्रकरण में न्यायालय की ओर से जारी आदेश के तहत आरक्षक को तय समयसीमा में राशि जमा करानी होगी। मामला एनडीपीएस एक्ट से जुड़े विशेष सत्र प्रकरण में गवाही के लिए उपस्थित नहीं होने से संबंधित है। अदालत ने पहले उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए जमानती वारंट जारी किया था और बंधपत्र भी निष्पादित कराया गया था। इसके बावजूद निर्धारित तारीख पर उपस्थित नहीं होने और अनुपस्थिति का उचित कारण नहीं बताए जाने के बाद बंधपत्र की राशि जब्त करने का आदेश दिया गया।

  • पीस बॉन्ड क्या है और नेहा बोरा ने इसे भरने से क्यों किया इनकार, जानिए नियम और जेल तक पहुंचने की वजह

    पीस बॉन्ड क्या है और नेहा बोरा ने इसे भरने से क्यों किया इनकार, जानिए नियम और जेल तक पहुंचने की वजह

    नई दिल्ली । ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा से जुड़े शांति बॉन्ड का मामला दिल्ली में चर्चा का विषय बना हुआ है। नेहा ने दिल्ली पुलिस की ओर से जारी 10 हजार रुपये का पीस बॉन्ड भरने संबंधी नोटिस को चुनौती दी है। उनका कहना है कि इस कार्रवाई के लिए ठोस आधार नहीं दिया गया और इसका इस्तेमाल शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए किया जा रहा है। दूसरी ओर, पुलिस का पक्ष है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए ऐसी निवारक कार्रवाई जरूरी हो सकती है। इस विवाद के बीच यह समझना महत्वपूर्ण है कि पीस बॉन्ड क्या होता है, इसे भरने का आदेश किन परिस्थितियों में दिया जा सकता है और इसका पालन नहीं करने पर क्या कानूनी परिणाम हो सकते हैं।

    पीस बॉन्ड को सामान्य तौर पर शांति बनाए रखने का कानूनी आश्वासन माना जाता है। यह अपने आप में किसी अपराध की सजा नहीं है, बल्कि भविष्य में शांति भंग होने की आशंका को रोकने के उद्देश्य से की जाने वाली निवारक कार्रवाई है। इसमें संबंधित व्यक्ति को निर्धारित अवधि तक शांति बनाए रखने का वचन देना पड़ सकता है। आदेश के अनुसार बॉन्ड की राशि तय की जाती है और कुछ मामलों में जमानतदार की आवश्यकता भी हो सकती है। इसका उद्देश्य किसी संभावित विवाद या कानून-व्यवस्था की समस्या को पहले ही रोकना है।

    इस प्रक्रिया का प्रावधान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) में है। पहले इसी तरह की कार्रवाई का प्रावधान दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 107 में था। अब BNSS की धारा 126 के तहत कार्यकारी मजिस्ट्रेट उस व्यक्ति से शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड भरने को कह सकता है, जिसके बारे में शांति भंग करने की आशंका से जुड़ी सूचना मिली हो। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाता है।

    BNSS की धारा 130 के तहत मजिस्ट्रेट को प्रारंभिक आदेश में सूचना का सार, बॉन्ड की राशि, उसकी अवधि और अन्य आवश्यक विवरण दर्ज करने होते हैं। इसके बाद धारा 135 के तहत जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। जांच के दौरान कुछ परिस्थितियों में अंतरिम बॉन्ड भरने का आदेश भी दिया जा सकता है। यदि संबंधित व्यक्ति आदेश का पालन नहीं करता, तो कानून के प्रावधानों के अनुसार उसकी हिरासत का प्रश्न उठ सकता है। जांच पूरी होने पर धारा 136 के तहत अंतिम आदेश जारी किया जा सकता है। हालांकि, किसी भी कार्रवाई की वैधता संबंधित तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करती है।

    नेहा बोरा को यह नोटिस अक्टूबर में विरोध प्रदर्शनों से जुड़े घटनाक्रम के बाद मिला था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 16 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया था। वह कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च में शामिल होने जा रही थीं और अगले दिन उन्हें रिहा कर दिया गया। इसके बाद उन्हें BNSS की धारा 126, 130 और 135(3) के तहत नोटिस जारी किया गया। इसमें उन्हें 19 अक्टूबर को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने के लिए कहा गया था।

    नेहा की याचिका में दावा किया गया है कि नोटिस में आरोपों को साबित करने वाली पर्याप्त सामग्री नहीं दी गई। उनके अनुसार, इसमें किसी विशेष घटना और उसकी अवधि का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। उन्होंने मंडी हाउस में शांतिपूर्ण सभा आयोजित करने, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और कनॉट प्लेस जाने के लिए उकसाने से जुड़े आरोपों पर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि ऐसी कार्रवाई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण सभा करने के अधिकार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकती है।

    पीस बॉन्ड नहीं भरने के कानूनी परिणाम भी परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं। यदि जांच के बाद मजिस्ट्रेट वैध अंतिम आदेश जारी करता है और संबंधित व्यक्ति निर्धारित बॉन्ड नहीं भरता, तो BNSS की धारा 141 के तहत उसे हिरासत में रखने या जेल भेजने की स्थिति बन सकती है। कानून के तहत साधारण कारावास की अवधि अधिकतम एक वर्ष तक हो सकती है। यह परिणाम केवल बॉन्ड भरने से शुरुआती इनकार के आधार पर स्वतः लागू नहीं होता, बल्कि संबंधित कानूनी प्रक्रिया और आदेश पर निर्भर करता है।

    वहीं, बॉन्ड भरने के बाद उसकी शर्तों का उल्लंघन साबित होने पर भी कार्रवाई हो सकती है। परिस्थितियों के अनुसार बॉन्ड की राशि जब्त की जा सकती है और कानून के तहत हिरासत या कारावास से जुड़े आदेश दिए जा सकते हैं। ऐसे मामलों में संबंधित आदेश और लागू कानूनी प्रावधान महत्वपूर्ण होते हैं।

    इस विवाद में एक अन्य घटनाक्रम कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्होंने विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश होकर पीस बॉन्ड भरा था। इसके विपरीत, नेहा बोरा के वकीलों ने बॉन्ड पर हस्ताक्षर नहीं करने का रुख रखा। अब मामले में मुख्य सवाल यह है कि क्या शांति भंग होने की आशंका के आधार पर जारी नोटिस पर्याप्त तथ्यों पर आधारित था और क्या संबंधित प्रक्रिया का सही तरीके से पालन किया गया। दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला इस विवाद में आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होगा।

  • ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और वैश्विक तनाव से सोने-चांदी पर दबाव, दोनों कीमती धातुओं में एक प्रतिशत से ज्यादा गिरावट

    ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और वैश्विक तनाव से सोने-चांदी पर दबाव, दोनों कीमती धातुओं में एक प्रतिशत से ज्यादा गिरावट

    नई दिल्ली ।ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण मंगलवार को घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव देखने को मिला। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर दोनों कीमती धातुओं में गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के दौरान चांदी में गिरावट सोने के मुकाबले अधिक रही।

    दिसंबर डिलीवरी वाला सोना वायदा 487 रुपये यानी 0.33 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,48,410 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। कारोबार के दौरान सोना 747 रुपये यानी 0.50 प्रतिशत गिरकर 1,48,150 रुपये प्रति 10 ग्राम के इंट्राडे निचले स्तर तक पहुंच गया। इसका दिन का उच्चतम स्तर 1,49,034 रुपये रहा।

    चांदी वायदा में भी दबाव ज्यादा दिखाई दिया। दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी कारोबार के दौरान 2,942 रुपये यानी 1.29 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,24,500 रुपये प्रति किलोग्राम के इंट्राडे निचले स्तर तक पहुंच गई। बाद में इसमें गिरावट कुछ कम हुई और यह 2,104 रुपये यानी 0.93 प्रतिशत नीचे 2,25,338 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती रही।

    कीमती धातुओं में कमजोरी के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ता तनाव प्रमुख कारणों में शामिल रहा। इस तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों पर दबाव बना हुआ है। वहीं अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी से सोने और चांदी जैसे गैर-ब्याज देने वाले निवेश विकल्पों की आकर्षण क्षमता प्रभावित हुई है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने पर दबाव बना रहा। पिछले कारोबारी सत्र में स्पॉट गोल्ड में करीब 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। इसके बाद कीमत सात सप्ताह के निचले स्तर तक पहुंच गई थी।

    ईरान की ओर से नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले वॉशिंगटन के साथ किसी समझौते की संभावना को लेकर निराशा जताए जाने से स्थिति और जटिल हुई। इसके बाद अमेरिका की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य को सात दिनों के भीतर फिर से खोलने संबंधी ईरान के प्रस्ताव को खारिज किए जाने से ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी रही।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, सोने के लिए निकट अवधि में 1,50,000 से 1,50,700 रुपये का स्तर पहला प्रतिरोध क्षेत्र है। इसके ऊपर 1,52,000 से 1,52,600 रुपये का स्तर महत्वपूर्ण रहेगा। नीचे की ओर 1,48,000 से 1,47,300 रुपये का दायरा प्रमुख समर्थन क्षेत्र माना जा रहा है। 1,48,000 रुपये से नीचे मजबूती से फिसलने पर सोने में और गिरावट का दबाव बन सकता है।

    चांदी के लिए 2,27,000 से 2,28,000 रुपये प्रति किलोग्राम का स्तर निकटतम प्रतिरोध है। इसके ऊपर 2,32,000 से 2,33,000 रुपये का क्षेत्र अगला प्रतिरोध माना जा रहा है। नीचे की ओर 2,24,000 से 2,23,000 रुपये और फिर 2,20,000 से 2,19,000 रुपये प्रमुख समर्थन स्तर हैं।

    विशेषज्ञों के मुताबिक फिलहाल सोने और चांदी दोनों का रुख सतर्क से नकारात्मक बना हुआ है। सोने में मजबूती के संकेत के लिए 1.50 लाख रुपये के ऊपर टिकना जरूरी होगा, जबकि चांदी के लिए 2.28 लाख रुपये का स्तर पार करना महत्वपूर्ण रहेगा। समर्थन स्तर टूटने की स्थिति में दोनों धातुओं पर अतिरिक्त दबाव बना रह सकता है।

  • भारत का मजबूत बॉन्ड बाजार बना भरोसे का आधार, आर्थिक मजबूती से शेयरों में लौट सकती है तेजी

    भारत का मजबूत बॉन्ड बाजार बना भरोसे का आधार, आर्थिक मजबूती से शेयरों में लौट सकती है तेजी


    नई दिल्ली ।
    भारतीय बॉन्ड बाजार ने हाल के वर्षों में घरेलू परिस्थितियों के साथ-साथ वैश्विक वित्तीय दबावों के बीच भी मजबूत प्रदर्शन किया है। भारतीय रिजर्व बैंक की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता के अनुसार, देश के बॉन्ड बाजार की मजबूती केवल पिछले प्रदर्शन की तुलना में ही बेहतर नहीं रही है, बल्कि दुनिया के कई प्रमुख बाजारों की तुलना में भी इसका प्रदर्शन मजबूत रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी मजबूती का असर आगे चलकर शेयर बाजार में भी दिखाई दे सकता है।

    उन्होंने बताया कि अमेरिका में बॉन्ड यील्ड लंबे समय के ऊंचे स्तर पर पहुंचने के बावजूद भारतीय बॉन्ड बाजार ने अपेक्षाकृत मजबूती बनाए रखी। इसके पीछे केंद्र सरकार की राजकोषीय अनुशासन के प्रति प्रतिबद्धता और आने वाले वर्षों में आर्थिक विकास की बेहतर संभावनाओं को महत्वपूर्ण आधार माना गया है। वित्तीय स्थिति में सुधार और भविष्य में राजकोषीय परिणामों के बेहतर रहने की उम्मीद ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है।

    मौद्रिक नीति की विश्वसनीयता और महंगाई से जुड़े संरचनात्मक दबावों में कमी को भी बॉन्ड बाजार के लिए सकारात्मक माना गया है। इन परिस्थितियों ने भारतीय ऋण बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मदद की है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत के बॉन्ड बाजार की मजबूती और सार्वजनिक वित्त को संतुलित रखने की नीति को महत्वपूर्ण माना गया है।

    हालांकि, शेयर बाजार में बॉन्ड बाजार जैसी मजबूती अभी पूरी तरह दिखाई नहीं दी है। इसके पीछे वैश्विक स्तर पर निवेशकों की बदलती प्राथमिकताओं को एक वजह माना जा रहा है। खासतौर पर कुछ विकसित अर्थव्यवस्थाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कंपनियों और तकनीकी क्षेत्र से जुड़ी विकास संभावनाएं निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।

    पूनम गुप्ता के मुताबिक, भारतीय शेयर बाजार ने जून 2022 से सितंबर 2024 के बीच उल्लेखनीय प्रदर्शन किया था। इसके बाद कुछ दूसरे देशों के बाजारों में तेजी का दौर देखने को मिला। इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की वास्तविक मजबूती लंबे समय में शेयर बाजार के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है और भारतीय इक्विटी दोबारा निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बन सकती है।

    उन्होंने भारत के भुगतान संतुलन और रुपये की स्थिति पर भी चर्चा की। उनके अनुसार, भारत लंबे समय से सीमित चालू खाता घाटे और अपेक्षाकृत मजबूत पूंजी प्रवाह की स्थिति में रहा है। समय के साथ सकल घरेलू उत्पाद के मुकाबले चालू खाता घाटे में कमी आई है, जिससे देश के बाहरी क्षेत्र की मजबूती बढ़ी है।

    उन्होंने कहा कि भारत का चालू खाता घाटा उन स्तरों से काफी नीचे है, जिन्हें आमतौर पर उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए सुरक्षित माना जाता है। देश के लिए शुद्ध सेवा निर्यात और विदेशों में रहने वाले भारतीयों से मिलने वाला रेमिटेंस महत्वपूर्ण संरचनात्मक ताकत बने हुए हैं।

    सेवा क्षेत्र से होने वाली आय और रेमिटेंस लगातार मजबूत रहने के कारण वस्तुओं के व्यापार में होने वाले घाटे की भरपाई करने में मदद मिलती है। इसी वजह से भारत का चालू खाता घाटा सकल घरेलू उत्पाद के 1 प्रतिशत से नीचे नियंत्रित रहने में सफल रहा है। यह स्थिति देश की बाहरी आर्थिक स्थिरता और भविष्य की विकास संभावनाओं के लिए महत्वपूर्ण आधार मानी जा रही है।