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  • कच्चे तेल और बॉन्ड यील्ड बढ़ने से शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 1,247 अंक टूटा

    कच्चे तेल और बॉन्ड यील्ड बढ़ने से शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 1,247 अंक टूटा

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 24 सितंबर को भारी बिकवाली देखने को मिली। कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती, वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ने के कारण प्रमुख सूचकांक बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए। सेंसेक्स 1,247.71 अंक यानी 1.67 प्रतिशत टूटकर 73,580.54 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 50 में 383.70 अंक यानी 1.64 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 23,063.10 के स्तर पर बंद हुआ।

    कारोबार की शुरुआत भी कमजोर रही। सेंसेक्स पिछले सत्र के 74,828.25 के बंद स्तर से 555.85 अंक यानी 0.74 प्रतिशत नीचे 74,272.40 पर खुला। दिन के कारोबार में गिरावट और बढ़ी तथा सूचकांक 1,264.33 अंक यानी 1.68 प्रतिशत फिसलकर 73,563.92 के निचले स्तर तक पहुंच गया।

    निफ्टी 50 भी पिछले बंद स्तर 23,446.80 से 225 अंक यानी 0.95 प्रतिशत नीचे 23,221.80 पर खुला। कारोबार के दौरान यह 400.65 अंक यानी 1.70 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,046.15 के निचले स्तर तक चला गया।

    व्यापक बाजार में भी दबाव देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप में 2.25 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप में 1.53 प्रतिशत की गिरावट रही। सेक्टरवार कारोबार में सभी प्रमुख सेक्टर लाल निशान में बंद हुए। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज और निफ्टी प्राइवेट बैंक में 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।

    इसके अलावा निफ्टी मेटल 1.96 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो 1.57 प्रतिशत, निफ्टी पीएसयू बैंक 1.13 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी 1.10 प्रतिशत और निफ्टी एफएमसीजी 1.08 प्रतिशत गिरकर बंद हुए। निफ्टी 50 में केवल सिप्ला, ओएनजीसी और एनटीपीसी के शेयरों में तेजी रही, जबकि बाकी अधिकतर शेयरों पर बिकवाली का दबाव रहा। एचडीएफसी लाइफ, बजाज फाइनेंस, एक्सिस बैंक और बजाज फिनसर्व में अपेक्षाकृत अधिक गिरावट दर्ज हुई।

    बाजार में व्यापक बिकवाली का असर निवेशकों की संपत्ति पर भी पड़ा। एक ही कारोबारी सत्र में करीब 5 लाख करोड़ रुपये की बाजार पूंजी घट गई। बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण पिछले सत्र के लगभग 485 लाख करोड़ रुपये से घटकर 480.95 लाख करोड़ रुपये रह गया।

    गुरुवार के कारोबार में कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी आई, लेकिन वे 102 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर बनी रहीं। इसके साथ वैश्विक बॉन्ड यील्ड में तेज बढ़ोतरी हुई। इससे इक्विटी निवेशकों के बीच जोखिम को लेकर चिंता बढ़ी और जोखिम वाली परिसंपत्तियों का आकर्षण प्रभावित हुआ।

    इसी दिन नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के शेयरों की लिस्टिंग भी हुई। शेयर 1.79 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,817 रुपये पर बंद हुए, जो इसके 1,785 रुपये के आईपीओ प्राइस बैंड से ऊपर था।

    बाजार में कमजोरी के बीच महंगाई और आर्थिक विकास को लेकर बनी अनिश्चितताओं ने ब्याज दरों की दिशा पर भी चिंता बढ़ाई। घरेलू स्तर पर इंश्योरेंस और बैंकिंग क्षेत्र में कमीशन स्ट्रक्चर की नियामकीय समीक्षा तथा मुनाफे पर संभावित असर को लेकर भी दबाव बना रहा।

    आने वाले समय में बाजार की दिशा पर निवेशकों की नजर वैश्विक परिस्थितियों, कच्चे तेल की कीमतों और कंपनियों की कमाई पर बनी रह सकती है।

  • कमजोर वैश्विक संकेतों और पश्चिम एशिया तनाव के बीच शेयर बाजार गिरा, सेंसेक्स 172 अंक टूटा और निफ्टी 24,220 पर बंद

    कमजोर वैश्विक संकेतों और पश्चिम एशिया तनाव के बीच शेयर बाजार गिरा, सेंसेक्स 172 अंक टूटा और निफ्टी 24,220 पर बंद


    नई दिल्ली ।पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के बीच सोमवार को भारतीय शेयर बाजार दबाव में रहा। सप्ताह के पहले कारोबारी सत्र में शुरुआती बढ़त के बावजूद प्रमुख सूचकांक कारोबार के अंत तक लाल निशान में पहुंच गए। निवेशकों के बीच बॉन्ड यील्ड बढ़ने और ईरान से जुड़े घटनाक्रम को लेकर सतर्कता दिखाई दी, जिसका असर बाजार की धारणा पर पड़ा।

    कारोबार समाप्त होने पर 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 171.72 अंक यानी 0.22 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,369.11 पर बंद हुआ। इसी तरह एनएसई का निफ्टी 50 इंडेक्स 32.95 अंक यानी 0.14 प्रतिशत फिसलकर 24,219.05 पर पहुंच गया। इस तरह दोनों प्रमुख सूचकांकों ने दिन का कारोबार गिरावट के साथ समाप्त किया।

    हालांकि, बाजार ने सोमवार की शुरुआत सकारात्मक रुख के साथ की थी। सेंसेक्स पिछले कारोबारी सत्र के 77,540.83 के स्तर के मुकाबले 88.72 अंक की बढ़त लेकर 77,629.56 पर खुला। कारोबार के दौरान यह 248.56 अंक चढ़कर 77,789.40 के दिन के उच्चतम स्तर तक पहुंचा। बाद में बिकवाली का दबाव बढ़ने से सेंसेक्स 339.17 अंक गिरकर 77,201.66 के निचले स्तर तक भी पहुंच गया।

    निफ्टी 50 भी 24,252 के पिछले बंद स्तर से मामूली बढ़त के साथ 24,285.05 पर खुला। कारोबार के दौरान सूचकांक ने 24,313 का इंट्रा-डे उच्चतम स्तर बनाया। इसके बाद इसमें गिरावट आई और निफ्टी 24,144.30 के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गया। हालांकि कारोबार के अंतिम चरण में इसमें कुछ सुधार देखने को मिला और यह 24,220 के करीब बंद हुआ।

    व्यापक बाजार में मिलाजुला रुख देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.13 प्रतिशत की बढ़त रही, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 0.26 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। इससे संकेत मिला कि बड़ी कंपनियों के साथ-साथ छोटे और मध्यम शेयरों में भी निवेशकों की धारणा पूरी तरह मजबूत नहीं रही।

    क्षेत्रीय सूचकांकों में आईटी, एनर्जी, मेटल और रियल एस्टेट को छोड़कर ज्यादातर सूचकांक गिरावट में बंद हुए। पीएसयू बैंक इंडेक्स में करीब एक प्रतिशत की गिरावट रही। निजी बैंक, मीडिया और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स क्षेत्र भी दबाव में रहे। वहीं धातु और ऊर्जा से जुड़े शेयरों में अपेक्षाकृत मजबूती दिखाई दी।

    निफ्टी 50 में एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस, बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और टीएमपीवी के शेयरों में प्रमुख गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर जेएसडब्ल्यू स्टील, हिंडाल्को, टाटा स्टील, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, डॉ. रेड्डीज और टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के शेयर बढ़त के साथ बंद हुए।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआती मजबूती के बाद ट्रेडर्स ने ईरान पर संभावित नए अमेरिकी प्रतिबंधों से पहले अपनी पोजीशन कम की। निफ्टी कारोबार के दौरान 24,200 के अहम सपोर्ट स्तर से नीचे गया, लेकिन बंद होने तक इस स्तर के आसपास वापस आ गया।

    आने वाले सत्र में बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। ईरान पर संभावित अमेरिकी प्रतिबंध और उसके जवाब में आने वाली प्रतिक्रिया बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा एनएसई की मासिक एफएंडओ एक्सपायरी भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण घटना होगी।

    तकनीकी स्तर पर 24,200 से 24,000 के बीच निफ्टी के लिए अहम सपोर्ट माना जा रहा है। वहीं 24,350 का स्तर महत्वपूर्ण प्रतिरोध के रूप में देखा जा रहा है। इस स्तर के ऊपर टिकने पर बाजार में तेजी मजबूत हो सकती है, जबकि सपोर्ट टूटने पर दबाव बढ़ने की संभावना रहेगी।

  • वैश्विक दबाव में सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, एमसीएक्स पर सिल्वर करीब दो प्रतिशत फिसली

    वैश्विक दबाव में सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, एमसीएक्स पर सिल्वर करीब दो प्रतिशत फिसली


    नई दिल्ली । 
    वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के बीच बुधवार को घरेलू सर्राफा और वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमती धातुओं पर बने दबाव का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर चांदी में करीब दो प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि सोना भी 1.54 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर से नीचे कारोबार करता नजर आया।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 4350 डॉलर प्रति औंस के नीचे कारोबार करता रहा। इसी तरह हाजिर चांदी करीब 62.8 डॉलर प्रति औंस के स्तर के आसपास कमजोर बनी रही। वैश्विक बाजार में कीमतों में नरमी के साथ घरेलू निवेशकों की बिकवाली ने भी कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ाया।

    एमसीएक्स पर सितंबर डिलीवरी वाली चांदी पिछले कारोबारी सत्र के 2,32,419 रुपये प्रति किलोग्राम के बंद भाव से गिरकर 2,27,931 रुपये प्रति किलोग्राम के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गई। इस स्तर पर चांदी में 4,488 रुपये यानी 1.93 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। बाद में इसमें कुछ सुधार हुआ और कारोबार के दौरान चांदी 3,734 रुपये यानी 1.61 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 2,28,685 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास रही।

    बाजार विश्लेषकों के मुताबिक व्यापक कमोडिटी बाजार में कमजोरी और मुनाफावसूली ने चांदी पर अतिरिक्त दबाव डाला। चांदी की कीमतों पर औद्योगिक मांग से जुड़े संकेतों और निवेश धारणा का भी असर पड़ता है, इसलिए बाजार में जोखिम बढ़ने पर इसमें सोने की तुलना में अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

    सोने के वायदा भाव में भी गिरावट दर्ज की गई। एमसीएक्स पर अक्टूबर डिलीवरी वाला गोल्ड फ्यूचर्स अपने पिछले बंद भाव 1,54,262 रुपये प्रति 10 ग्राम से 858 रुपये यानी 0.55 प्रतिशत गिरकर 1,53,404 रुपये प्रति 10 ग्राम के निचले स्तर पर पहुंचा। बाद में सोने में कुछ सुधार आया और यह 581 रुपये यानी 0.38 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,53,681 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार करता रहा।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की नरमी के साथ डॉलर इंडेक्स की मजबूती ने भी घरेलू कीमतों को प्रभावित किया। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में लगातार बढ़ोतरी को कीमती धातुओं के लिए महत्वपूर्ण दबाव वाले कारकों में शामिल किया जा रहा है। ऊंची बॉन्ड यील्ड निवेशकों को निश्चित रिटर्न वाले विकल्पों की ओर आकर्षित कर सकती है, जिससे ब्याज नहीं देने वाली संपत्तियों की मांग प्रभावित होती है।

    कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई है। डब्ल्यूटीआई क्रूड और ब्रेंट क्रूड की कीमतें क्रमशः करीब 85.5 डॉलर और 91.5 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। महंगे तेल से वैश्विक महंगाई बढ़ने की आशंका पैदा होती है, जिससे प्रमुख केंद्रीय बैंकों की ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रखने की संभावना मजबूत हो सकती है।

    मध्य पूर्व की स्थिति भी सोने और चांदी की आगे की दिशा के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तथा होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा संबंधी चिंताएं बाजार की धारणा को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति से जुड़े संकेतों पर नजर बनाए हुए हैं।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में अमेरिकी आर्थिक आंकड़े, ब्याज दरों को लेकर फेडरल रिजर्व का रुख, बॉन्ड यील्ड और भू-राजनीतिक घटनाक्रम कीमती धातुओं की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यदि बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती बनी रहती है तो सोने और चांदी पर दबाव जारी रह सकता है। दूसरी ओर वैश्विक तनाव बढ़ने या ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद मजबूत होने पर दोनों धातुओं को दोबारा सुरक्षित निवेश की मांग से समर्थन मिल सकता है।