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  • जम्मू-कश्मीर में हजारों किताबों पर कार्रवाई से सियासी बहस तेज, उमर और मीरवाइज ने उठाए सवाल

    जम्मू-कश्मीर में हजारों किताबों पर कार्रवाई से सियासी बहस तेज, उमर और मीरवाइज ने उठाए सवाल

    नई दिल्ली ।जम्मू-कश्मीर के कॉलेजों और पुस्तकालयों में मौजूद किताबों की व्यापक स्क्रीनिंग और हजारों पुस्तकों को हटाए जाने के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। सरकार के अनुसार 21,81,582 किताबों और प्रकाशनों की जांच की गई, जिनमें से 4,767 किताबों को प्रचलन से हटाया गया है। इनमें 518 ऐसी किताबें शामिल हैं, जिन पर पहले से प्रतिबंध लागू था। इसके अलावा 1,752 किताबों को विशेषज्ञ जांच के लिए भेजा गया है।

    इस कार्रवाई को लेकर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि किताबों पर प्रतिबंध लगाने का मुद्दा लोकतंत्र में व्यापक बहस का विषय है। उनके अनुसार मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था में निर्वाचित सरकार के पास ऐसे फैसले खुद लेने का अधिकार नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि परिस्थितियां बदलने पर इस पूरे मामले की दोबारा समीक्षा की जा सकती है।

    मामले पर मीरवाइज उमर फारूक ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने हजारों किताबों को हटाए जाने की कार्रवाई को चिंताजनक बताते हुए संबंधित किताबों के नाम और उन्हें हटाने के कारण सार्वजनिक करने की मांग की। उनका कहना है कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में अकादमिक स्वतंत्रता तथा अलग-अलग विचारों और दृष्टिकोणों तक छात्रों की पहुंच शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी संख्या में किताबों को हटाने के पीछे आखिर किस तरह की नीति और उद्देश्य काम कर रहा है।

    सरकार की ओर से कार्रवाई को नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया बताया गया है। मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने कहा कि किताबों की जांच करना और उनकी सामग्री का तथ्यात्मक परीक्षण करना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। उनका कहना है कि यदि कोई किताब आधिकारिक रूप से प्रतिबंधित है या उसमें आपत्तिजनक सामग्री पाई गई है, तो उसे सरकारी संस्थानों और पुस्तकालयों में नहीं रखा जाना चाहिए।

    भाजपा विधायक आरएस पठानिया ने भी कार्रवाई का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि स्कूलों और कॉलेजों में इतिहास तथ्यों के आधार पर पढ़ाया जाना चाहिए। उनके अनुसार काल्पनिक किस्सों, अफवाहों या किंवदंतियों को इतिहास के रूप में शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा नहीं बनाया जा सकता।

    भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता जोरवार सिंह जमवाल ने भी हटाई गई किताबों की सामग्री पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐतिहासिक विषयों पर आधारित पुस्तकों में तथ्यात्मकता और विश्वसनीयता जरूरी है। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों में ऐसी सामग्री नहीं होनी चाहिए जो युवाओं को भ्रमित करने वाली हो।

    किताबों की स्क्रीनिंग से जुड़े आंकड़े विधानसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में सामने आए। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार जम्मू क्षेत्र में 9,32,941 और कश्मीर क्षेत्र में 12,48,641 किताबों तथा प्रकाशनों की जांच की गई। कार्रवाई के तहत कश्मीर क्षेत्र से 4,474 और जम्मू क्षेत्र से 293 किताबें हटाई गईं। वहीं 1,752 किताबों को विशेषज्ञ परीक्षण के लिए भेजा गया है, जिनमें जम्मू क्षेत्र की 538 और कश्मीर क्षेत्र की 1,214 किताबें शामिल हैं।

    सरकार के मुताबिक यह स्क्रीनिंग जुलाई में दो किताबों की खरीद को लेकर उठे विवाद के बाद शुरू हुई। इसके बाद उच्च शिक्षा विभाग ने कॉलेजों और संबंधित पुस्तकालयों में उपलब्ध पुरानी और नई किताबों की सामग्री की जांच के निर्देश दिए। सरकार ने कहा है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में संवैधानिक मूल्यों, अकादमिक स्वतंत्रता, आलोचनात्मक सोच, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और जिम्मेदार नागरिकता को बढ़ावा देने वाला वातावरण बनाए रखना जरूरी है। मामले में राजनीतिक दलों और विभिन्न पक्षों के अलग-अलग रुख के बीच अब किताबों की जांच और उन्हें हटाने के कारणों को लेकर बहस जारी है।

  • लखनऊ पुस्तक महोत्सव में CM योगी की युवाओं से अपील, पाठ्यक्रम के साथ अच्छी किताबें खरीदें

    लखनऊ पुस्तक महोत्सव में CM योगी की युवाओं से अपील, पाठ्यक्रम के साथ अच्छी किताबें खरीदें

    लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवाओं से पाठ्यक्रम की किताबों के साथ साहित्य, महापुरुषों की आत्मकथाएं, धार्मिक ग्रंथ और वैज्ञानिक शोध से जुड़ी पुस्तकें पढ़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपना ‘बुक बैंक’ बनाना चाहिए। किताबें व्यक्ति को नई दिशा देने के साथ जीवन की मुश्किल परिस्थितियों में मार्गदर्शन भी कर सकती हैं।

    मुख्यमंत्री शनिवार को लखनऊ विश्वविद्यालय में आयोजित 5वें गोमती पुस्तक महोत्सव-2026 के उद्घाटन समारोह में युवाओं को संबोधित कर रहे थे। इससे पहले उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में लगी पुस्तक प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने बच्चों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पुस्तक ‘एग्जाम वॉरियर्स’ वितरित की और इसे हर बच्चे के लिए पढ़ने योग्य बताया।

    योगी ने कहा कि ‘एग्जाम वॉरियर्स’ केवल स्कूली विद्यार्थियों के लिए उपयोगी नहीं है, बल्कि हर युवा और नागरिक के लिए मार्गदर्शक बन सकती है। जीवन में हर व्यक्ति को किसी न किसी परीक्षा से गुजरना पड़ता है। कभी डिग्री और सर्टिफिकेट के लिए तो कभी जीवन की अलग-अलग परिस्थितियों में। मुश्किल समय में जब हिम्मत जवाब देने लगती है, तब ऐसी किताबें संबल दे सकती हैं।

    ‘युवा किताब नहीं पढ़ता, यह कहना अन्याय’

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कहना सही नहीं है कि आज का युवा किताबों से दूर हो गया है या सोशल मीडिया पर अपना समय बर्बाद कर रहा है। उनके मुताबिक जरूरत युवाओं तक किताबें पहुंचाने की व्यवस्था करने की है।

    उन्होंने बताया कि लखनऊ में पुस्तक महोत्सव शुरू करने का प्रस्ताव आने पर उन्होंने तत्कालीन अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी से चर्चा कर इसे प्रोत्साहित करने को कहा था। लखनऊ में आयोजन का अच्छा परिणाम मिलने के बाद उन्होंने गोरखपुर में भी पुस्तक महोत्सव कराने का सुझाव दिया। वहां लखनऊ से भी ज्यादा लोगों की भागीदारी हुई और अधिक पुस्तकों की बिक्री हुई। इससे यह धारणा गलत साबित हुई कि आज का युवा किताबें नहीं पढ़ता।

    ज्ञान को संकुचित दायरे में न बांधें

    योगी ने कहा कि समाज और राष्ट्र भी तब कमजोर होते हैं, जब वे अपनी क्षमता खोने लगते हैं और अपनी विरासत से दूर हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को पहले सीमित दायरे में बांधने का प्रयास किया गया, जिसके दुष्परिणाम समाज और देश को भुगतने पड़े।

    उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश भारतीय ज्ञान परंपरा की महत्वपूर्ण भूमि रहा है। लखनऊ से करीब 70 किलोमीटर दूर नैमिषारण्य में ऋषियों ने चिंतन और ज्ञान की परंपरा को आगे बढ़ाया। काशी ज्ञान और संवाद की भूमि रही है। वहीं मुजफ्फरनगर स्थित शुक्रतीर्थ को करीब 5 हजार वर्ष पहले श्रीमद्भागवत महापुराण की पहली कथा के वाचन की परंपरा से जोड़ा जाता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि ज्ञान के रास्ते खुले रखने चाहिए। केवल स्कूल, कॉलेज या विश्वविद्यालय में पाठ्यक्रम पढ़ लेना ही व्यक्ति को पूर्ण रूप से ज्ञानवान नहीं बनाता। समाज, देश और दुनिया को समझने के लिए अलग-अलग विषयों और विचारों से परिचित होना जरूरी है।

    9 दिन तक चलेगा पुस्तक महोत्सव

    योगी ने कहा कि पुस्तक महोत्सव युवाओं, छात्रों, लेखकों और प्रकाशकों को एक मंच देता है। यहां ज्ञानवर्धक, मनोरंजक और रोचक पुस्तकों से परिचित होने का अवसर मिलता है। गोमती पुस्तक महोत्सव-2026 अगले 9 दिनों तक चलेगा। इस दौरान पुस्तकों के विमोचन के साथ लेखकों से संवाद और उनकी रचनात्मक यात्रा को समझने का अवसर भी मिलेगा।

    उन्होंने कहा कि आत्मकथाओं के जरिए महापुरुषों के संघर्ष को जाना जा सकता है और वैज्ञानिकों के शोध व उनकी यात्राओं को पुस्तकों के माध्यम से समझा जा सकता है। किताबें रचनात्मकता को आगे बढ़ाने और जीवन को नई दिशा देने का माध्यम बन सकती हैं।

    57,600 ग्राम पंचायतों में पुस्तकालय की व्यवस्था

    मुख्यमंत्री ने डिजिटल युग का जिक्र करते हुए कहा कि तकनीक ने गांव और शहर के बीच की दूरी कम की है। ग्राम सचिवालयों में केवल प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी के बैठने की व्यवस्था नहीं की गई, बल्कि ग्रामीणों के लिए कॉन्फ्रेंस रूम और डिजिटल लाइब्रेरी भी बनाई गई हैं।

    उन्होंने बताया कि प्रदेश की 57,600 ग्राम पंचायतों में पुस्तकालय की व्यवस्था की गई है और इनमें नेशनल बुक ट्रस्ट की पुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं। उनके मुताबिक सुविधा मिलने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों के युवा अपनी प्रतिभा का बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।

    स्कूलों की तस्वीर बदली, स्मार्ट क्लास की सुविधा

    योगी ने बेसिक और माध्यमिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों की पुरानी स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले कई स्कूलों के भवन और व्यवस्थाएं जर्जर थीं। ऑपरेशन कायाकल्प के जरिए स्कूलों की स्थिति में बदलाव किया गया। भवनों का निर्माण हुआ और स्मार्ट क्लास जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।

    चित्रकूट का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि एक साल के अंतराल में स्कूल की स्थिति में ऐसा बदलाव आया कि तीसरी कक्षा की एक छात्रा ने डिजिटल लाइब्रेरी संचालित करके दिखाई और पाठ्यक्रम से जुड़ी सामग्री भी प्रदर्शित की। उनके मुताबिक पहले सुविधाओं के अभाव में बच्चों को अपनी क्षमता दिखाने का अवसर नहीं मिलता था।

    किताब खरीदें और अपना ‘बुक बैंक’ तैयार करें

    मुख्यमंत्री ने युवाओं से कहा कि जब भी किताब खरीदने का अवसर मिले तो पाठ्यक्रम की पुस्तकों के साथ ऐसी किताबों को भी प्राथमिकता दें, जो रचनात्मकता और सकारात्मक सोच विकसित करें। अच्छी साहित्यिक कृति, धार्मिक ग्रंथ, महापुरुष की आत्मकथा या वैज्ञानिक शोध पर आधारित पुस्तक जीवनभर प्रेरणा दे सकती है।

    उन्होंने युवाओं से खाली समय में किताब पढ़ने की आदत विकसित करने और अपना ‘बुक बैंक’ तैयार करने की अपील की। साथ ही कहा कि युवाओं को अपनी राह खुद तैयार करनी है और पुस्तक मेले इसमें महत्वपूर्ण मंच साबित हो सकते हैं।

    ‘नेशनल बुक ट्रस्ट की किताबों का सबसे बड़ा खरीदार यूपी’

    योगी ने गोमती पुस्तक महोत्सव के आयोजकों, नेशनल बुक ट्रस्ट और सहयोगी संस्थाओं का आभार जताते हुए कहा कि इसे केवल लखनऊ तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। पुस्तक मेले को प्रदेश के दूसरे हिस्सों तक ले जाने की जरूरत है और उत्तर प्रदेश सरकार इसमें पूरा सहयोग करेगी।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार नेशनल बुक ट्रस्ट की पुस्तकों की सबसे बड़ी खरीदार है। गांवों, स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पुस्तकालय उपलब्ध कराने का काम किया जा रहा है। यह समय की जरूरत है और ज्ञान की इस परंपरा को और व्यापक बनाने की आवश्यकता है।

  • MP: ग्वालियर में लगेगा पुस्तक मेला, स्कूली बच्चों को सस्ते दर पर मिलेंगी किताबें, स्टेशनरी व यूनीफॉर्म

    MP: ग्वालियर में लगेगा पुस्तक मेला, स्कूली बच्चों को सस्ते दर पर मिलेंगी किताबें, स्टेशनरी व यूनीफॉर्म

    ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में स्कूली बच्चों को सस्ती दर पर किताबें, यू

    Gwalior

    नीफॉर्म व स्टेशनरी उपलब्ध कराने के लिए सात दिवसीय पुस्तक मेला (बुक फेयर) लगने जा रहा है। सरकार की मंशा के अनुरूप यह बुक फेयर मौजूदा मार्च माह के दौरान ग्वालियर मेला में सूर्य नमस्कार तिराहा के समीप स्थित शिल्प बाजार परिसर में लगेगा।

    कलेक्टर रुचिका चौहान ने रविवार की शाम संबंधित अधिकारियों एवं पुस्तक विक्रेताओं के साथ शिल्प बाजार परिसर पहुँचकर पुस्तक मेले की तैयारियों का जायजा लिया। कलेक्टर ने इस अवसर पर स्पष्ट किया कि पुस्तक मेला अवधि के दौरान बाजार में किसी भी पुस्तक की दुकान से स्कूली पुस्तकें व स्टेशनरी नहीं बेची जा सकेंगीं।

    इस पर पुस्तक विक्रेताओं एवं एसोसिएशन के अधिकारियों ने सहमति जताई। साथ ही कहा कि पुस्तक विक्रेताओं ने कहा कि पुस्तक मेला को लेकर हम उत्साहित हैं। पुस्तक मेले में प्रत्येक दुकानदार द्वारा किताबों, स्टेशनरी व यूनीफॉर्म की बिक्री पर आकर्षक छूट भी प्रदान की जायेगी। पुस्तक मेला परिसर के निरीक्षण के दौरान अपर कलेक्टर कुमार सत्यम, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सोजान सिंह रावत, जिला शिक्षा अधिकारी हरिओम चतुर्वेदी, डीपीसी रविन्द्र तोमर एवं मेला सचिव सुनील बाबू त्रिपाठी सहित अन्य संबंधित अधिकारी, पुस्तक विक्रेता एसोसिएशन के पदाधिकारी व पुस्तक विक्रेता मौजूद थे।

    पुस्तक विक्रेताओं को जिले के विभिन्न स्कूलों के पाठ्यक्रम उपलब्ध करा दिए गए हैं। कलेक्टर ने इस मौके पर पुस्तक विक्रेताओं से कहा कि वे निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार पुस्तकों के सेट बच्चों एवं उनके अभिभावकों को उपलब्ध कराएं। वेंडर्स यानी पुस्तक विक्रेताओं द्वारा पुस्तक मेला मे किताबें, स्टेशनरी व ड्रेस खरीदने वाले अभिभावकों को विशष छूट दी जायेगी। पुस्तक मेला लगने से अनाधिकृत प्रिंटिग कर पुस्तक बेचने की प्रवृत्ति पर भी प्रभावी रोक लगेगी।

    मार्च माह के द्वितीय पखवाड़े में लगने जा रहे पुस्तक मेले में सीबीएसई, आईएसई एवं एमपी बोर्ड से संबंध सभी निजी स्कूलों के पाठ्यक्रम के अनुसार पुस्तकें व यूनीफॉर्म उपलब्ध रहेंगी। जिला प्रशासन द्वारा बच्चों व उनके अभिभावकों के हित को ध्यान में रखकर लिए गए पुस्तक मेला लगाने के निर्णय का पुस्तक प्रकाशकों (पब्लिशर्स) व डीलर्स ने स्वागत किया है।

    कलेक्टर ने निरीक्षण के दौरान पुस्तक मेले की रूपरेखा के संबंध में विस्तार से चर्चा की। पुस्तक विक्रेताओं ने पिछले साल जिन दुकानदारों को जो दुकानें आवंटित की गई थीं, उन्हीं दुकानों का इस बार भी आवंटन करने का आग्रह किया। कलेक्टर ने कहा कि पुस्तक विक्रेताओं की सहमति से ही आवंटन की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जायेगा। उन्होंने शिल्प बाजार परिसर की साफ-सफाई, विद्युत व्यवस्था, शौचालय व पेयजल की पुख्ता व्यवस्था करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। साथ ही कहा कि पुस्तक मेला परिसर में फूड स्टॉल भी लगवाए जाएं।

    आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के जरूरतमंद बच्चों को नि:शुल्क पुस्तकें उपलब्ध कराने के लिये पुस्तक मेला परिसर में बुक बैंक भी स्थापित किया जायेगा। ऐसे स्कूली विद्यार्थी जो अपनी पिछली कक्षा की किताबें दान करना चाहते हैं वे बुक बैंक में अपनी किताबें जमा कर सकेंगे। ज्ञात हो पिछली साल बनाए गए बुक बैंक से 700 जरूरतमंद बच्चों ने नि:शुल्क पुस्तकें प्राप्त की थीं।

    पुस्तक विक्रेताओं एवं स्कूली बच्चों व उनके अभिभावकों की मदद के लिए जिला प्रशासन द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी के माध्यम से हैल्पलाईन नंबर भी जारी कराया गया है। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के कॉर्डिनेटर आईटी सेल अरविंद तोमर (मोबा. 98935-87573) से संपर्क कर पुस्तक मेला के संबंध मे जानकारी प्राप्त की जा सकेगी। साथ ही पुस्तक मेला के संबंधित समस्याएं भी दर्ज कराई जा सकेंगी।

    स्कूलों द्वारा निर्धारित पुस्तकों के सेट की कीमत का परीक्षण कराया जा रहा है। कलेक्टर रुचिका चौहान ने जिला शिक्षा अधिकारी व जिला परियोजना समन्वयक को जल्द से जल्द यह परीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने पिछली साल के पुस्तक मेले में अभिभावकों व विद्यार्थियों द्वारा दर्ज किए गए फीड बैक का अध्ययन कर इस बार के मेले को और बेहतर बनाने के निर्देश भी दिए हैं।