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  • नरेंदर बेरवाल ने पीएम मोदी को सुनाया पाकिस्तान बॉक्सर से जुड़ा मजेदार किस्सा, नाम को लेकर हुई टिप्पणी पर हंस पड़े प्रधानमंत्री

    नरेंदर बेरवाल ने पीएम मोदी को सुनाया पाकिस्तान बॉक्सर से जुड़ा मजेदार किस्सा, नाम को लेकर हुई टिप्पणी पर हंस पड़े प्रधानमंत्री

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 अगस्त को स्कॉटलैंड के ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पदक जीतने वाले भारतीय खिलाड़ियों से मुलाकात की। इस दौरान प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों को उनकी उपलब्धियों के लिए बधाई दी और प्रतियोगिता में उनके प्रदर्शन की सराहना की। बातचीत के दौरान खिलाड़ियों ने अपने खेल करियर से जुड़े कई अनुभव भी साझा किए।

    इसी मुलाकात के दौरान कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में सिल्वर मेडल जीतने वाले हैवीवेट बॉक्सर नरेंदर बेरवाल ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने पुराने मुकाबले से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा सुनाया। यह घटना वर्ष 2015 में आयोजित वर्ल्ड मिलिट्री गेम्स की है, जब नरेंदर का सामना पाकिस्तान के एक बॉक्सर से हुआ था।

    नरेंदर बेरवाल ने बताया कि यह पाकिस्तान के बॉक्सर के खिलाफ उनकी पहली फाइट थी। मुकाबले से पहले भारतीय सेना की ओर से उन्हें खास तौर पर कहा गया था कि पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबला हारना नहीं है। इसके बाद उन्होंने मुकाबले में पूरी ताकत के साथ प्रदर्शन किया और शुरुआती दोनों राउंड में बढ़त बना ली।

    नरेंदर के मुताबिक उन्होंने पहला राउंड 4-1 से जीता, जबकि दूसरे राउंड में भी 3-2 से बढ़त हासिल की। मुकाबला काफी कड़ा था और इसी दौरान दोनों खिलाड़ियों के सिर आपस में जोर से टकरा गए। फाइट खत्म होने के बाद दोनों खिलाड़ियों को इलाज के लिए अस्पताल जाना पड़ा और उन्हें टांके भी लगवाने पड़े।

    बेरवाल ने बताया कि मुकाबले के दौरान उनके साथ भारतीय सेना के कोच नरेंद्र राणा भी मौजूद थे। फाइट के बाद पाकिस्तानी बॉक्सर ने उनसे बातचीत की। कुछ देर सोचने के बाद उसने नरेंदर से कहा कि वह उनसे एक बात कहना चाहता है। नरेंदर ने उसे अपनी बात कहने के लिए कहा।

    इसके बाद पाकिस्तानी बॉक्सर ने मजाकिया अंदाज में कहा कि भारतीय बॉक्सर का नाम नरेंदर है, उनके कोच का नाम नरेंद्र राणा है और भारत के प्रधानमंत्री का नाम भी नरेंद्र है। उसने आगे कहा कि अब उसे नरेंद्र नाम से ही नफरत हो गई है। मुकाबले के तनाव के बीच कही गई इस बात ने माहौल को हल्का कर दिया था।

    नरेंदर बेरवाल ने जब प्रधानमंत्री मोदी के सामने यह पुराना किस्सा दोहराया तो प्रधानमंत्री भी हंस पड़े। खिलाड़ियों के साथ बातचीत के दौरान सामने आया यह प्रसंग मुलाकात के हल्के-फुल्के पलों में शामिल रहा। बेरवाल ने अपने अनुभव को सहज अंदाज में साझा किया, जिसे सुनकर वहां मौजूद माहौल भी खुशनुमा हो गया।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में सिल्वर मेडल जीतने के बाद नरेंदर बेरवाल की प्रधानमंत्री के साथ हुई यह बातचीत उनके खेल सफर से जुड़े एक पुराने अनुभव को फिर सामने ले आई। एक तरफ यह मुकाबला भारत और पाकिस्तान के खिलाड़ियों के बीच खेल प्रतिस्पर्धा से जुड़ा था, वहीं दूसरी ओर मुकाबले के बाद हुई बातचीत ने खेल के मैदान से बाहर का एक अलग मानवीय पहलू भी दिखाया।

    प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी उपलब्धियों और अनुभवों को साझा किया। नरेंदर बेरवाल का 2015 का यह किस्सा इसी बातचीत का खास हिस्सा बना, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने भी हंसी के साथ सुना।

  • आखिरी दिन बदली पदक तालिका, जानिए भारत ने कितने पदक जीतकर आखिर कौन-सा स्थान अपने नाम किया

    आखिरी दिन बदली पदक तालिका, जानिए भारत ने कितने पदक जीतकर आखिर कौन-सा स्थान अपने नाम किया

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय खेल पटल पर भारतीय एथलीटों ने एक बार फिर अपनी कार्यकुशलता और उत्कृष्ट खेल भावना का लोहा मनवाया है। ग्लास्गो में 11 दिनों तक चले वैश्विक खेल आयोजन के समापन के साथ ही पदक तालिका की अंतिम तस्वीर पूरी तरह साफ हो चुकी है। मुख्य प्रतियोगिताओं और पारंपरिक विषयों की अनुपस्थिति के बावजूद भारतीय दल ने 39 पदकों के साथ चौथा स्थान हासिल कर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।

    इस बार प्रतियोगिता का दायरा कुछ सीमित रखा गया था, जिसके तहत वे खेल शामिल नहीं थे जिनमें भारत आमतौर पर सर्वाधिक पदक जीतता रहा है। इसके बावजूद भारतीय खिलाड़ियों ने उपलब्ध अवसरों का पूरा लाभ उठाया। भारत के 38 खिलाड़ियों ने सामूहिक प्रयासों के बल पर 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदक देश की झोली में डाले, जो विपरीत परिस्थितियों में भी खिलाड़ियों की मानसिक सुदृढ़ता को दर्शाता है।

    वैश्विक पदक तालिका में ऑस्ट्रेलिया ने एक बार फिर शीर्ष स्थान हासिल करते हुए अपनी सर्वोच्चता सिद्ध की। ऑस्ट्रेलियाई दल ने 70 स्वर्ण, 45 रजत और 56 कांस्य सहित कुल 171 पदकों पर अपना कब्जा जमाया। वहीं 29 स्वर्ण के साथ कुल 110 पदक जीतकर इंग्लैंड दूसरे स्थान पर रहा, जबकि कनाडा ने 19 स्वर्ण और कुल 62 पदकों के साथ तालिका में तीसरा स्थान हासिल किया।

    मेजबान देश और भारत के बीच अंतिम रैंकिंग को लेकर बेहद रोचक स्थिति देखने को मिली। भारत और स्कॉटलैंड दोनों ही देशों ने कुल 39-39 पदक अपने नाम किए और दोनों के पास 13-13 स्वर्ण पदक भी थे। हालांकि भारत द्वारा जीते गए 17 रजत पदकों की संख्या स्कॉटलैंड के 9 रजत पदकों से अधिक थी, जिसके आधार पर भारत को तालिका में चौथा और मेजबान स्कॉटलैंड को पांचवां स्थान प्रदान किया गया।

    भारतीय अभियान की सफलता में मुक्केबाजी प्रतियोगिता का योगदान सबसे महत्वपूर्ण रहा। मुक्केबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सात स्वर्ण और तीन रजत सहित कुल 10 पदक हासिल किए। इसके अतिरिक्त भारोत्तोलन, एथलेटिक्स, जूडो और पैरा खेल स्पर्धाओं में भी एथलीटों ने अपनी छाप छोड़ी। मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए युवा खिलाड़ियों के योगदान ने राष्ट्रीय स्तर पर खेल प्रतिभाओं के विस्तार को रेखांकित किया है।

    निशानेबाजी, बैडमिंटन, कुश्ती, हॉकी और टेबल टेनिस जैसे खेलों को इस बार आयोजन से बाहर रखा गया था। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये खेल प्रतियोगिता का हिस्सा होते, तो भारत की पदक तालिका और अधिक भव्य हो सकती थी। इसके बावजूद उपलब्ध स्पर्धाओं में खिलाड़ियों का प्रदर्शन यह दर्शाता है कि भारतीय खेल प्रणाली अब बहुआयामी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।

    प्रतियोगिता के दौरान कुछ प्रशासनिक और नियम संबंधी चुनौतियां भी सामने आईं, जब जूडो वर्ग में एक एथलीट को प्रक्रियात्मक चूक के कारण अंतिम समय में प्रतिस्पर्धा से बाहर होना पड़ा। इस प्रकार के घटनाक्रमों के बावजूद भारतीय दल ने अपने ध्यान को केंद्रित रखा और अंतिम दिन तक पदकों की दौड़ में बने रहकर देश का गौरव बढ़ाया।

    ग्लास्गो में मिली इस ऐतिहासिक सफलता के बाद अब पूरे खेल जगत की निगाहें 2030 में आयोजित होने वाले अगले राष्ट्रमंडल खेलों पर टिक गई हैं। भारत के अहमदाबाद शहर में इन खेलों का आयोजन प्रस्तावित है, जिसे लेकर अभी से रणनीतिक तैयारियां और ढांचागत विकास की योजनाएं तैयार की जाने लगी हैं।

  • कॉमनवेल्थ में रजत जीतकर दिखाई संवेदनशीलता, लवलीना ने असम के बाढ़ पीड़ितों को समर्पित किया पदक

    कॉमनवेल्थ में रजत जीतकर दिखाई संवेदनशीलता, लवलीना ने असम के बाढ़ पीड़ितों को समर्पित किया पदक


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय महिला मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने भले ही स्वर्ण पदक से मामूली दूरी पर रुककर रजत पदक जीता हो, लेकिन उन्होंने अपनी संवेदनशील सोच और मानवीय भावना से पूरे देश का दिल जीत लिया। ग्लासगो में शानदार प्रदर्शन के बाद लवलीना ने अपना पहला कॉमनवेल्थ पदक असम के बाढ़ पीड़ितों को समर्पित कर दिया। उनकी इस भावनात्मक पहल पर उनके पिता टिकेन बोरगोहेन ने गर्व जताते हुए कहा कि बेटी ने खेल के साथ-साथ इंसानियत का भी बेहतरीन उदाहरण पेश किया है।

    महिलाओं की 75 किलोग्राम बॉक्सिंग स्पर्धा के फाइनल में लवलीना का मुकाबला ऑस्ट्रेलिया की अमासो ग्रीनटी से हुआ, जिसमें उन्हें 1-4 से हार का सामना करना पड़ा। हालांकि हार के बावजूद उन्होंने अपने करियर का पहला कॉमनवेल्थ गेम्स पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया। मुकाबले के बाद उन्होंने इस उपलब्धि को असम में बाढ़ से प्रभावित लोगों को समर्पित करने का फैसला किया, जिसने उनकी जीत को और भी खास बना दिया।

    लवलीना के पिता टिकेन बोरगोहेन ने बताया कि बेटी प्रतियोगिता के दौरान भी लगातार असम के बाढ़ पीड़ितों की चिंता कर रही थी। उन्होंने कहा कि लवलीना ने उनसे फोन पर बातचीत के दौरान आग्रह किया था कि जितना संभव हो सके बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद की जाए। इसी सोच के साथ लवलीना अकादमी की ओर से लगातार राहत कार्यों में सहयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बेटी द्वारा अपना पदक बाढ़ पीड़ितों को समर्पित करना पूरे परिवार के लिए गर्व का विषय है।

    उन्होंने कहा कि फाइनल में हार का थोड़ा दुख जरूर है, लेकिन सिल्वर मेडल भी किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है। यह लवलीना का कॉमनवेल्थ गेम्स में पहला पदक है और पूरे परिवार के लिए बेहद खुशी का क्षण है। उनके अनुसार पदक जीतने से भी बड़ी बात यह है कि लवलीना ने अपनी सफलता को जरूरतमंद लोगों के नाम कर दिया।

    लवलीना की इस उपलब्धि पर देशभर से उन्हें बधाइयां मिलीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने उन्हें शानदार प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएं दीं। टिकेन बोरगोहेन ने इन सभी नेताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि खिलाड़ियों को मिलने वाला यह सम्मान उनके मनोबल को और मजबूत करता है। उन्होंने बताया कि मुकाबले के बाद लवलीना से उनकी संक्षिप्त बातचीत हुई थी और वह रजत पदक जीतने से संतुष्ट होने के साथ-साथ आगे और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए भी उत्साहित हैं।

    मुकाबले के बाद लवलीना ने भी स्वीकार किया कि स्वर्ण पदक नहीं जीत पाने का थोड़ा अफसोस जरूर है, लेकिन भारतीय टीम के शानदार प्रदर्शन ने उनकी खुशी बढ़ा दी। उन्होंने कहा कि यह उनका पहला कॉमनवेल्थ गेम्स पदक है, इसलिए इसकी अहमियत उनके लिए बेहद खास है। उनका मानना है कि यदि वह देश के लिए स्वर्ण जीत पातीं तो खुशी और अधिक होती, लेकिन अब उनका पूरा ध्यान आगामी एशियाई खेलों पर है, जहां वह स्वर्ण पदक जीतने के लक्ष्य के साथ उतरेंगी।

    लवलीना बोरगोहेन ने अपने प्रदर्शन से यह साबित किया कि एक सच्चा खिलाड़ी केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं रहता बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी निभाता है। खेल के मैदान में संघर्ष और मैदान के बाहर संवेदनशीलता का यह अनूठा उदाहरण उन्हें देश के करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा बनाता है। उनकी उपलब्धि और मानवीय सोच आने वाली पीढ़ियों के खिलाड़ियों को भी समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश देती है।

  • बॉक्सिंग में गोल्डन पंच, एथलेटिक्स में दमदार प्रदर्शन… भारत ने 16 मेडल जीतकर कॉमनवेल्थ में बदली तस्वीर

    बॉक्सिंग में गोल्डन पंच, एथलेटिक्स में दमदार प्रदर्शन… भारत ने 16 मेडल जीतकर कॉमनवेल्थ में बदली तस्वीर


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का 10वां दिन भारतीय खेल इतिहास के सबसे यादगार दिनों में शामिल हो गया। भारतीय खिलाड़ियों ने एक ही दिन में 16 पदक जीतकर न केवल देश का गौरव बढ़ाया बल्कि पदक तालिका में भी लंबी छलांग लगाते हुए चौथा स्थान हासिल कर लिया। मुक्केबाजी, एथलेटिक्स और पैरा स्पर्धाओं में मिले शानदार परिणामों ने यह साबित कर दिया कि भारत अब कॉमनवेल्थ खेलों में एक मजबूत खेल शक्ति बनकर उभर रहा है।

    भारत ने 10वें दिन के बाद कुल 39 पदक अपने नाम कर लिए हैं। इनमें 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदक शामिल हैं। इस शानदार प्रदर्शन की बदौलत भारतीय दल ने पदक तालिका में छह स्थान की छलांग लगाई और चौथे पायदान पर पहुंच गया। मेजबान स्कॉटलैंड को पीछे छोड़ते हुए भारत ने शीर्ष चार देशों में अपनी जगह मजबूत कर ली है।

    पदक तालिका में ऑस्ट्रेलिया का दबदबा लगातार कायम है। ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों ने अब तक 61 स्वर्ण, 38 रजत और 50 कांस्य सहित कुल 149 पदक जीतकर पहला स्थान बरकरार रखा है। इंग्लैंड 99 पदकों के साथ दूसरे स्थान पर बना हुआ है, जबकि कनाडा 57 पदकों के साथ तीसरे स्थान पर है। भारत के चौथे स्थान पर पहुंचने के बाद स्कॉटलैंड पांचवें स्थान पर खिसक गया है। नाइजीरिया, वेल्स और न्यूजीलैंड क्रमशः छठे, सातवें और आठवें स्थान पर बने हुए हैं।

    भारतीय सफलता की सबसे बड़ी कहानी मुक्केबाजी से निकली, जहां खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 10 पदक जीते। इनमें सात स्वर्ण पदक शामिल रहे। पुरुष वर्ग में अंकुश पंघाल और सचिन सिवाच ने स्वर्ण जीतकर देश का मान बढ़ाया। महिला वर्ग में जैस्मिन लैम्बोरिया, साक्षी चौधरी, प्रिया घनघस, अरुंधति चौधरी और प्रीति ने भी स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय मुक्केबाजी का दबदबा साबित किया। वहीं जदुमणि सिंह, लवलीना बोरगोहेन और नरेंद्र बेरवाल ने रजत पदक जीतकर भारत के पदकों की संख्या बढ़ाई।

    एथलेटिक्स में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। ट्रिपल जंप में प्रवीण चित्रावेल ने रजत पदक हासिल किया, जबकि सेल्वा प्रभु थिरुमारन ने कांस्य पदक जीतकर भारत को दोहरी खुशी दी। पैरा एथलेटिक्स की शॉट पुट एफ57 स्पर्धा में सोमन राणा ने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा। भारतीय सेना के इस पैरा खिलाड़ी ने अपने संघर्ष और मेहनत से देश को गौरवान्वित किया। इसी स्पर्धा में शुभम जुयाल ने रजत पदक जीतकर भारत की सफलता में अहम योगदान दिया।

    भारत के खिलाड़ियों का यह प्रदर्शन केवल पदकों तक सीमित नहीं रहा बल्कि इसने आने वाले बड़े टूर्नामेंटों के लिए भी सकारात्मक संदेश दिया है। मुक्केबाजी में लगातार स्वर्ण पदकों की बरसात, एथलेटिक्स में नए रिकॉर्ड और पैरा खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन यह संकेत देता है कि भारतीय खेलों का भविष्य पहले से कहीं अधिक मजबूत नजर आ रहा है।

    अब भारतीय दल की नजर बाकी प्रतियोगिताओं पर है, जहां पदकों की संख्या और बढ़ाने की उम्मीद की जा रही है। यदि खिलाड़ियों ने यही लय बरकरार रखी तो भारत पदक तालिका में और ऊपर पहुंच सकता है। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का यह ऐतिहासिक दिन भारतीय खेलों के स्वर्णिम अध्याय के रूप में लंबे समय तक याद किया जाएगा।

  • गुलवीर की ऐतिहासिक दौड़ पर प्रधानमंत्री का सलाम, बॉक्सिंग और जूडो के पदक विजेताओं को भी दी बधाई

    गुलवीर की ऐतिहासिक दौड़ पर प्रधानमंत्री का सलाम, बॉक्सिंग और जूडो के पदक विजेताओं को भी दी बधाई


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का 10वां दिन भारतीय खेल इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया। भारत ने एक ही दिन में सात स्वर्ण सहित कुल 16 पदक जीतकर अपनी खेल प्रतिभा का दमदार प्रदर्शन किया। इस शानदार सफलता के बीच सबसे अधिक चर्चा लंबी दूरी के धावक गुलवीर सिंह की रही, जिन्होंने पुरुषों की 10000 मीटर स्पर्धा में रजत और 5000 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीतकर नया इतिहास रच दिया। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विशेष रूप से बधाई देते हुए इसे भारतीय एथलेटिक्स के लिए बड़ी उपलब्धि बताया।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर गुलवीर सिंह की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में पुरुषों की 5000 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। उन्होंने कहा कि गुलवीर एक ही कॉमनवेल्थ गेम्स में एथलेटिक्स की दो स्पर्धाओं में पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। साथ ही वह पुरुषों की 5000 मीटर दौड़ में भारत के लिए कॉमनवेल्थ पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट भी बने हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं बल्कि पूरे भारतीय एथलेटिक्स के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है।

    गुलवीर सिंह के शानदार प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया कि भारतीय एथलीट अब विश्व स्तर की लंबी दूरी की प्रतियोगिताओं में भी मजबूती से अपनी पहचान बना रहे हैं। लगातार दो अलग-अलग स्पर्धाओं में पदक जीतना उनकी फिटनेस, धैर्य, रणनीति और मानसिक मजबूती का प्रमाण है। खेल विशेषज्ञ भी इसे भारतीय ट्रैक एंड फील्ड के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि मान रहे हैं।

    प्रधानमंत्री ने केवल एथलेटिक्स ही नहीं बल्कि भारतीय मुक्केबाजों के शानदार प्रदर्शन की भी सराहना की। पुरुषों की 90 प्लस किलोग्राम बॉक्सिंग स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाले नरेंद्र बेरवाल को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि पूरे टूर्नामेंट में उनके साहस, संघर्ष और दृढ़ संकल्प ने सभी को प्रभावित किया। उन्होंने विश्वास जताया कि नरेंद्र भविष्य में भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन करते रहेंगे।

    पुरुषों की 80 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतने वाले अंकुश पंघाल की तारीफ करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रतियोगिता के दौरान उनकी ताकत, तकनीक और आत्मविश्वास शानदार रहा। उन्होंने कहा कि अंकुश की सफलता आने वाले समय में देश के हजारों युवा मुक्केबाजों को प्रेरित करेगी और भारतीय बॉक्सिंग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में मदद करेगी।

    प्रधानमंत्री ने महिलाओं की 63 किलोग्राम जूडो स्पर्धा में कांस्य पदक जीतने वाली उन्नति शर्मा को भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता के दौरान उन्नति का समर्पण, अनुशासन और संघर्ष साफ दिखाई दिया। उन्होंने उम्मीद जताई कि वह भविष्य में भी इसी तरह लगातार बेहतर प्रदर्शन कर भारत को गौरवान्वित करती रहेंगी।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का प्रदर्शन यह संकेत देता है कि देश अब केवल पारंपरिक खेलों तक सीमित नहीं है बल्कि एथलेटिक्स, बॉक्सिंग, जूडो और अन्य स्पर्धाओं में भी लगातार अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रहा है। खिलाड़ियों की मेहनत, बेहतर प्रशिक्षण व्यवस्था और सरकार व खेल संस्थाओं के सहयोग का असर अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर साफ दिखाई देने लगा है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से खिलाड़ियों को मिली बधाई उनके मनोबल को और मजबूत करेगी। अब भारतीय खिलाड़ियों की नजरें आगामी एशियाई खेलों और अन्य वैश्विक प्रतियोगिताओं पर हैं, जहां वे इसी शानदार प्रदर्शन को दोहराकर देश के लिए और अधिक पदक जीतने का लक्ष्य लेकर उतरेंगे।

  • भारतीय मुक्केबाजों का गोल्डन पंच, अंकुश पंघाल बोले- विश्वास नहीं खोया, इसलिए मिली जीत

    भारतीय मुक्केबाजों का गोल्डन पंच, अंकुश पंघाल बोले- विश्वास नहीं खोया, इसलिए मिली जीत


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का 10वां दिन भारतीय मुक्केबाजी के लिए यादगार साबित हुआ। भारतीय बॉक्सरों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 10 पदक अपने नाम किए, जिनमें सात स्वर्ण पदक शामिल रहे। इस दमदार प्रदर्शन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारतीय मुक्केबाजी विश्व स्तर पर लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है। स्वर्ण पदक जीतने वाले मुक्केबाज अंकुश पंघाल ने अपनी सफलता का सबसे बड़ा राज आत्मविश्वास को बताया और कहा कि कठिन समय में खुद पर भरोसा बनाए रखना ही उनकी जीत की सबसे बड़ी वजह बना।

    फाइनल मुकाबले के बाद अंकुश पंघाल ने कहा कि शुरुआत उनके लिए बिल्कुल आसान नहीं रही। पहले बाउट में वह 0-5 से पीछे हो गए थे, जिससे उन पर काफी दबाव बन गया था। हालांकि उन्होंने घबराने के बजाय अपने खेल और खुद की क्षमता पर भरोसा बनाए रखा। यही आत्मविश्वास अंत तक उनके साथ रहा और आखिरकार उन्होंने मुकाबला पलटते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। अंकुश ने कहा कि परिवार और कोच का विश्वास हमेशा उनके साथ रहा और यही वजह है कि वह दबाव के बावजूद अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सके। उन्होंने अपना स्वर्ण पदक अपने परिवार और कोच को समर्पित किया तथा कहा कि अब उनका अगला लक्ष्य एशियाई खेलों में भी स्वर्ण पदक जीतना है।

    महिला मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन को फाइनल में हार का सामना करना पड़ा और उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा। मुकाबले के बाद उन्होंने स्वीकार किया कि स्वर्ण पदक नहीं जीत पाने का थोड़ा अफसोस जरूर है लेकिन टीम इंडिया के शानदार प्रदर्शन ने उनकी खुशी बढ़ा दी। उन्होंने कहा कि यह उनका पहला कॉमनवेल्थ गेम्स पदक है और इसलिए इसकी अहमियत उनके लिए बेहद खास है। लवलीना ने कहा कि अब वह एशियाई खेलों की तैयारी में पूरी ताकत झोंकेंगी और वहां स्वर्ण पदक जीतने की कोशिश करेंगी। उन्होंने अपना यह पदक असम में बाढ़ से प्रभावित लोगों को समर्पित करते हुए उनके जल्द सामान्य जीवन में लौटने की कामना भी की।

    पुरुषों की 90 प्लस किलोग्राम स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाले नरेंद्र ने भी अपने प्रदर्शन का ईमानदारी से आकलन किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने मुकाबले में अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की लेकिन विरोधी मुक्केबाज की रणनीति उनके अनुमान से अलग थी। उनके अनुसार प्रतिद्वंद्वी लगातार मूवमेंट करता रहा जिससे उसे प्रभावी ढंग से पकड़ पाना मुश्किल साबित हुआ। नरेंद्र ने कहा कि वह अपनी कमियों पर काम करेंगे और एशियाई खेलों में इस हार की भरपाई करने का प्रयास करेंगे।

    स्वर्ण पदक विजेता सचिन सिवाच ने भी अपने फाइनल मुकाबले की कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि शुरुआती दो राउंड में वह 2-3 से पीछे थे और उनके पास आखिरी राउंड में सब कुछ दांव पर लगाने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। इसी सोच के साथ उन्होंने लगातार आक्रामक अंदाज अपनाया और विरोधी पर दबाव बनाया। सचिन ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास था कि वह मुकाबला पलट सकते हैं और आखिरकार उनका विश्वास सही साबित हुआ। उनके अनुसार खेल में तकनीक जितनी जरूरी है उतना ही जरूरी मानसिक मजबूती और जीत का विश्वास भी होता है।

    भारतीय मुक्केबाजों का यह प्रदर्शन केवल पदकों तक सीमित नहीं रहा बल्कि उसने यह भी दिखाया कि मेहनत, आत्मविश्वास और मजबूत मानसिकता के दम पर किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है। अब सभी खिलाड़ियों की नजरें एशियाई खेलों और आने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं पर हैं, जहां वे इसी शानदार लय को बरकरार रखते हुए भारत के लिए और अधिक पदक जीतने का लक्ष्य लेकर उतरेंगे।

  • CWG 2026: भारत ने 10वें दिन रचा इतिहास, पदक विजेताओं को पीएम मोदी ने दी शुभकामनाएं

    CWG 2026: भारत ने 10वें दिन रचा इतिहास, पदक विजेताओं को पीएम मोदी ने दी शुभकामनाएं


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का दसवां दिन भारतीय खेल इतिहास के सबसे यादगार दिनों में शामिल हो गया। ग्लासगो में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक ही दिन में 16 पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। इनमें 7 स्वर्ण पदक शामिल रहे जिसने भारत की पदक तालिका को और मजबूत कर दिया। मुक्केबाजी से लेकर पैरा एथलेटिक्स तक भारतीय खिलाड़ियों ने हर मंच पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। खिलाड़ियों की इस शानदार उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी पदक विजेताओं को बधाई देते हुए उनके प्रदर्शन की खुलकर सराहना की और इसे देश के युवाओं के लिए प्रेरणादायक बताया।

    दसवें दिन भारतीय मुक्केबाजों का दबदबा सबसे ज्यादा देखने को मिला। भारत ने बॉक्सिंग में कुल 10 पदक अपने नाम किए और कई खिलाड़ियों ने स्वर्ण जीतकर तिरंगा ऊंचा लहराया। पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में सचिन सिवाच ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि उनकी यह सफलता आने वाली पीढ़ी के मुक्केबाजों को प्रेरित करेगी और वे भविष्य में भी देश का नाम रोशन करते रहेंगे।

    महिला मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने 75 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतकर एक बार फिर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। प्रधानमंत्री ने उनके संघर्ष और निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि उनका समर्पण देशभर के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

    महिलाओं के 70 किलोग्राम वर्ग में अरुंधति चौधरी ने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। उनकी तकनीक आत्मविश्वास और आक्रामक खेल की प्रधानमंत्री ने खुलकर तारीफ की। वहीं 60 किलोग्राम वर्ग में प्रिया घांगस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सफलता उनके कौशल और मानसिक मजबूती का प्रमाण है।

    भारत की एक और महिला मुक्केबाज साक्षी ने 51 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया। प्रधानमंत्री ने उन्हें निर्णायक जीत के लिए बधाई देते हुए भविष्य में और बड़ी सफलताओं की शुभकामनाएं दीं। पुरुषों के 55 किलोग्राम वर्ग में जदुमणि सिंह मंडेंगबाम ने रजत पदक जीतकर भारत की झोली में एक और महत्वपूर्ण पदक जोड़ा। प्रधानमंत्री ने उनकी दृढ़ता अनुशासन और संघर्ष की सराहना की।

    पैरा एथलेटिक्स में भी भारत ने शानदार प्रदर्शन किया। पुरुषों के शॉट पुट एफ57 वर्ग में सोमन राणा ने स्वर्ण पदक जीतकर नया इतिहास रच दिया। यह इस स्पर्धा में भारत का पहला कॉमनवेल्थ स्वर्ण पदक है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पूरी प्रतियोगिता के दौरान उनका फोकस और अटूट संकल्प साफ दिखाई दिया। इसी स्पर्धा में शुभम जुयाल ने रजत पदक जीतकर भारत की सफलता में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ा। प्रधानमंत्री ने उनकी तकनीक और समर्पण की प्रशंसा करते हुए भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

    भारतीय खिलाड़ियों के इस शानदार प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया कि देश अब हर खेल में वैश्विक स्तर पर मजबूती से अपनी पहचान बना रहा है। एक ही दिन में 16 पदकों का ऐतिहासिक प्रदर्शन भारतीय खेलों के बढ़ते स्तर और खिलाड़ियों की कड़ी मेहनत का परिणाम है। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहा है और खिलाड़ियों की यह सफलता देशवासियों के लिए गर्व का विषय बन गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बधाई ने खिलाड़ियों का उत्साह और बढ़ाया है तथा पूरे देश में इस ऐतिहासिक उपलब्धि का जश्न मनाया जा रहा है।

  • सीडब्ल्यूजी 2026 में भारत का दमदार पंच, लवलीना सहित 10 मुक्केबाज पहुंचे फाइनल

    सीडब्ल्यूजी 2026 में भारत का दमदार पंच, लवलीना सहित 10 मुक्केबाज पहुंचे फाइनल


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय मुक्केबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक बार फिर दुनिया को अपनी ताकत का अहसास करा दिया है। ग्लासगो में खेले गए सेमीफाइनल मुकाबलों में भारत के दस मुक्केबाजों ने अपने प्रतिद्वंद्वियों को हराकर फाइनल में जगह बनाई है। अब पूरा देश इन खिलाड़ियों से स्वर्ण पदकों की उम्मीद लगाए बैठा है। जिस आत्मविश्वास और आक्रामक अंदाज के साथ भारतीय खिलाड़ियों ने अपने मुकाबले जीते हैं उससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि टीम इस बार केवल पदक जीतने नहीं बल्कि बॉक्सिंग में अपना दबदबा स्थापित करने उतरी है।

    महिलाओं की 75 किलोग्राम स्पर्धा में ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन ने एक बार फिर अपने अनुभव और तकनीक का शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने तुवालू की प्रतिद्वंद्वी को एकतरफा मुकाबले में 5-0 से हराते हुए फाइनल में प्रवेश किया। मुकाबले के पहले राउंड से ही लवलीना ने अपने लंबे रीच बेहतरीन फुटवर्क और सटीक पंचों के दम पर विरोधी पर पूरी तरह नियंत्रण बनाए रखा। उनकी जीत ने भारत की स्वर्ण पदक की उम्मीदों को और मजबूत कर दिया।

    विश्व चैंपियन जैस्मिन लेंबोरिया ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं की 57 किलोग्राम स्पर्धा में अपनी प्रतिद्वंद्वी को लगातार दबाव में रखा। मुकाबले के दौरान विरोधी खिलाड़ी को कई बार स्टैंडिंग काउंट मिला जिसके बाद रेफरी ने मुकाबला रोकते हुए जैस्मिन को विजेता घोषित कर दिया। उनकी दमदार जीत ने भारतीय टीम का मनोबल और ऊंचा कर दिया।

    महिलाओं की 70 किलोग्राम स्पर्धा में अरुंधति चौधरी ने दिन का सबसे बड़ा उलटफेर करते हुए गत चैंपियन को हराकर फाइनल में जगह बनाई। उन्होंने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया और अपने शानदार पंचों से विरोधी को संभलने का मौका नहीं दिया। इस जीत ने साबित कर दिया कि भारतीय महिला मुक्केबाज अब दुनिया की किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

    प्रीति पवार साक्षी और प्रिया घणघस ने भी अपने मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल का टिकट पक्का किया। इन तीनों खिलाड़ियों ने एकतरफा जीत दर्ज कर यह दिखाया कि भारतीय महिला बॉक्सिंग लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है और भविष्य में भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन करती रहेगी।

    पुरुष वर्ग में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। जादुमणि सिंह सचिन सिवाच अंकुश पंघाल और नरेंद्र बरवाल ने अपने अपने मुकाबले जीतकर फाइनल में जगह बनाई। इन सभी खिलाड़ियों ने तकनीक आत्मविश्वास और आक्रामक खेल का बेहतरीन प्रदर्शन किया। खासकर सुपर हैवीवेट वर्ग में नरेंद्र बरवाल की जीत ने दर्शकों को बेहद प्रभावित किया और भारत के लिए एक और संभावित स्वर्ण पदक की उम्मीद जगा दी।

    भारतीय मुक्केबाजों का यह प्रदर्शन केवल पदकों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है बल्कि यह देश में बॉक्सिंग के लगातार मजबूत होते स्तर का भी प्रमाण है। पिछले कुछ वर्षों में खिलाड़ियों ने विश्व स्तर पर लगातार शानदार प्रदर्शन किया है और अब कॉमनवेल्थ गेम्स में भी उनका दबदबा साफ दिखाई दे रहा है। यदि फाइनल में भी यही लय बरकरार रही तो भारत के खाते में कई स्वर्ण पदक आ सकते हैं और यह अभियान भारतीय खेल इतिहास के सबसे यादगार अभियानों में शामिल हो सकता है।

  • ग्लासगो में भारत का तिरंगा बुलंद गोल्ड सिल्वर की बरसात दिलीप गावित और श्रीशंकर चमके बॉक्सिंग में भी बढ़ीं पदकों की उम्मीदें

    ग्लासगो में भारत का तिरंगा बुलंद गोल्ड सिल्वर की बरसात दिलीप गावित और श्रीशंकर चमके बॉक्सिंग में भी बढ़ीं पदकों की उम्मीदें

    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। ग्लासगो में आयोजित खेलों के सातवें दिन भारत ने एथलेटिक्स और पैरा एथलेटिक्स में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए देश का गौरव बढ़ाया। पैरा एथलीट दिलीप महादु गावित ने पुरुषों की 100 मीटर टी47 स्पर्धा में शानदार दौड़ लगाते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। उन्होंने 10.71 सेकंड का समय निकालते हुए नया गेम्स रिकॉर्ड भी बनाया। इस ऐतिहासिक जीत के साथ वह कॉमनवेल्थ गेम्स की पैरा ट्रैक स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष एथलीट बन गए। वहीं उनके साथी मोहम्मद बासिल ने 10.83 सेकंड के साथ सिल्वर जीतकर भारत को शानदार वन टू फिनिश दिलाई।

    भारत की सफलता का सिलसिला यहीं नहीं रुका। स्टार लॉन्ग जंपर मुरली श्रीशंकर ने पुरुषों की लंबी कूद स्पर्धा में 8.09 मीटर की सर्वश्रेष्ठ छलांग लगाकर सिल्वर मेडल अपने नाम किया। यह कॉमनवेल्थ गेम्स में उनका लगातार दूसरा सिल्वर मेडल है। इससे पहले उन्होंने बर्मिंघम 2022 में भी रजत पदक जीता था। फाइनल मुकाबले में जमैका के ताजे गेल ने 8.15 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड हासिल किया जबकि स्कॉटलैंड के स्टीफन मैकेंजी ने ब्रॉन्ज जीता। श्रीशंकर ने पूरे मुकाबले में शानदार निरंतरता दिखाई और अंतिम प्रयास तक पदक की दौड़ में मजबूती से बने रहे।

    एथलेटिक्स के अलावा भारतीय मुक्केबाजों ने भी शानदार प्रदर्शन किया। भारतीय बॉक्सिंग दल के सभी 10 खिलाड़ियों ने अपने अपने मुकाबले जीतकर सेमीफाइनल में जगह बना ली है। कॉमनवेल्थ गेम्स के नियमों के अनुसार सेमीफाइनल में पहुंचने वाला प्रत्येक खिलाड़ी कम से कम कांस्य पदक का दावेदार बन जाता है। इस तरह भारत ने मुक्केबाजी में कम से कम 10 पदक पहले ही सुनिश्चित कर लिए हैं जो बर्मिंघम 2022 के प्रदर्शन से भी बेहतर उपलब्धि मानी जा रही है।

    इन शानदार प्रदर्शनों के बाद भारत की पदक तालिका भी मजबूत हुई है। देश के खाते में अब 15 पदक हो चुके हैं जिनमें 3 स्वर्ण 9 रजत और 3 कांस्य पदक शामिल हैं। एथलेटिक्स और पैरा एथलेटिक्स में खिलाड़ियों की निरंतर सफलता ने भारतीय दल का मनोबल और बढ़ा दिया है।

    दिलीप गावित की ऐतिहासिक जीत और श्रीशंकर की शानदार छलांग ने यह साबित कर दिया कि भारतीय एथलेटिक्स लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। वहीं मुक्केबाजों का दमदार प्रदर्शन आने वाले दिनों में भारत के पदकों की संख्या और बढ़ाने की उम्मीद जगा रहा है। ग्लासगो से लगातार मिल रही इन सफलताओं ने भारतीय खेल प्रेमियों का उत्साह चरम पर पहुंचा दिया है और अब सभी की नजर आगामी फाइनल मुकाबलों पर टिकी हुई है जहां भारत के पास कई और पदक जीतने का सुनहरा अवसर होगा।

  • भोपाल की माही लामा का भारतीय बॉक्सिंग टीम में चयन, वर्ल्ड कप 2026 में करेंगी देश का प्रतिनिधित्व

    भोपाल की माही लामा का भारतीय बॉक्सिंग टीम में चयन, वर्ल्ड कप 2026 में करेंगी देश का प्रतिनिधित्व


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल की युवा मुक्केबाज Mahi Lama ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए बॉक्सिंग वर्ल्ड कप 2026 के लिए भारतीय टीम में अपनी जगह पक्की कर ली है। माही अब चीन में आयोजित होने वाली इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। उनके चयन से न केवल भोपाल बल्कि पूरे मध्यप्रदेश में खुशी का माहौल है।

    15 से 20 जून तक चीन में आयोजित होने वाले बॉक्सिंग वर्ल्ड कप में माही 60 किलोग्राम भार वर्ग में रिंग में उतरेंगी। भारतीय टीम शनिवार रात प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए चीन रवाना हो गई। माही का चयन उनके लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन और राष्ट्रीय स्तर पर हासिल उपलब्धियों के आधार पर हुआ है।

    माही वर्तमान में भोपाल स्थित राज्य बॉक्सिंग अकादमी में प्रशिक्षण ले रही हैं। उन्होंने कम समय में अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर बॉक्सिंग जगत में विशेष पहचान बनाई है। राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन के साथ-साथ उन्होंने कई महत्वपूर्ण मुकाबलों में अपनी क्षमता का परिचय दिया है। इसी निरंतर प्रदर्शन का परिणाम है कि उन्हें भारतीय टीम में शामिल होने का मौका मिला है।

    चीन रवाना होने से पहले माही ने कहा कि उनका पूरा ध्यान वर्ल्ड कप में बेहतरीन प्रदर्शन करने पर है। उन्होंने बताया कि भारतीय टीम का हिस्सा बनना उनके लिए गर्व की बात है और वह इस अवसर का पूरा लाभ उठाते हुए देश के लिए पदक जीतने का प्रयास करेंगी। माही ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत और मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए सम्मान की बात है और वह अपनी तैयारी को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं।

    खेल विशेषज्ञों का मानना है कि माही का चयन प्रदेश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायक है। उनका मानना है कि प्रतिभा, अनुशासन और लगातार मेहनत किसी भी खिलाड़ी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा सकती है। माही लामा की सफलता इस बात का उदाहरण है कि उचित प्रशिक्षण और समर्पण के साथ बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।

    माही की इस उपलब्धि पर प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण मंत्री Vishvas Kailash Sarang ने भी उन्हें बधाई दी है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के खिलाड़ी लगातार विभिन्न खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर राज्य और देश का नाम रोशन कर रहे हैं। मंत्री ने विश्वास जताया कि माही वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन करेंगी और भारत के लिए नई उपलब्धियां हासिल करेंगी।

    मध्यप्रदेश में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य की विभिन्न खेल अकादमियों से निकलने वाले खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। माही लामा का भारतीय टीम में चयन इसी दिशा में प्रदेश की एक और बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

    अब सभी की निगाहें चीन में होने वाले बॉक्सिंग वर्ल्ड कप पर टिकी हैं, जहां माही लामा अपने दमदार मुक्कों से भारत को गौरवान्वित करने की कोशिश करेंगी।