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  • ईंधन खपत के नए आंकड़े जारी, पेट्रोल-डीजल और एटीएफ की बिक्री बढ़ी, एलपीजी की मांग घटी

    ईंधन खपत के नए आंकड़े जारी, पेट्रोल-डीजल और एटीएफ की बिक्री बढ़ी, एलपीजी की मांग घटी

    नई दिल्ली । जुलाई 2026 के दौरान देश में पेट्रोल और डीजल की मांग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख तेल विपणन कंपनियों के शुरुआती बिक्री आंकड़ों के अनुसार, पेट्रोल और डीजल दोनों की खपत पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में मजबूत रही। वहीं विमान ईंधन की मांग में भी वृद्धि दर्ज की गई, जबकि एलपीजी की बिक्री में गिरावट देखने को मिली। ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि कमजोर मानसून, कृषि गतिविधियों में बदलाव और ऊर्जा उपयोग के बदलते पैटर्न ने इन आंकड़ों को प्रभावित किया है।

    जुलाई के दौरान पेट्रोल की बिक्री में लगभग 9.7 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई। कुल बिक्री 34.5 लाख टन तक पहुंच गई, जो पिछले वर्ष इसी अवधि की तुलना में काफी अधिक रही। हालांकि जून के मुकाबले इसमें हल्की गिरावट दर्ज हुई, लेकिन वार्षिक आधार पर मांग में मजबूती बनी रही। विशेषज्ञों का कहना है कि निजी वाहनों की बढ़ती आवाजाही, यात्रा गतिविधियों में तेजी और शहरी क्षेत्रों में ईंधन की लगातार मांग ने पेट्रोल की बिक्री को सहारा दिया।

    डीजल की बिक्री में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। जुलाई के दौरान इसकी खपत करीब 10.7 प्रतिशत बढ़कर 71.2 लाख टन तक पहुंच गई। डीजल देश की अर्थव्यवस्था का प्रमुख ईंधन माना जाता है क्योंकि इसका उपयोग माल परिवहन, कृषि उपकरणों, सिंचाई पंपों और औद्योगिक गतिविधियों में बड़े पैमाने पर होता है। सामान्य से कम मानसूनी वर्षा के कारण कई क्षेत्रों में सिंचाई की आवश्यकता बढ़ी, जिससे डीजल की मांग में तेजी देखने को मिली।

    विमान ईंधन यानी एयर टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) की बिक्री में भी सकारात्मक रुझान सामने आया। जुलाई में इसकी बिक्री लगभग 2.9 प्रतिशत बढ़कर 6.59 लाख टन के स्तर पर पहुंच गई। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा में निरंतर बढ़ोतरी तथा विमान सेवाओं के संचालन में विस्तार को इसकी प्रमुख वजह माना जा रहा है। इससे विमानन क्षेत्र में गतिविधियों के मजबूत बने रहने के संकेत भी मिलते हैं।

    इसके विपरीत, एलपीजी की बिक्री में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। जुलाई के दौरान इसकी खपत लगभग 17.4 प्रतिशत घटकर 23.7 लाख टन रह गई। ऊर्जा क्षेत्र के अधिकारियों का मानना है कि कुछ उपभोक्ताओं ने पाइप्ड नेचुरल गैस यानी पीएनजी की ओर रुख किया है, जिससे एलपीजी की मांग प्रभावित हुई है। इसके अलावा ऊर्जा उपयोग के तरीकों में बदलाव और वैकल्पिक ईंधन के बढ़ते इस्तेमाल का असर भी एलपीजी की बिक्री पर दिखाई दिया।

    ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि ईंधन की मांग में आने वाले ऐसे बदलाव देश की आर्थिक गतिविधियों और उपभोक्ता व्यवहार का महत्वपूर्ण संकेत होते हैं। पेट्रोल और डीजल की बढ़ती बिक्री परिवहन, कृषि और औद्योगिक गतिविधियों में तेजी का संकेत देती है, जबकि एलपीजी की घटती मांग घरेलू ऊर्जा उपभोग में बदलते रुझानों की ओर इशारा करती है। आने वाले महीनों में मानसून की स्थिति, कृषि उत्पादन और औद्योगिक गतिविधियों के आधार पर ईंधन की मांग में और परिवर्तन देखने को मिल सकता है।

    जुलाई के शुरुआती बिक्री आंकड़े यह दर्शाते हैं कि देश में पारंपरिक परिवहन ईंधनों की मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है। वहीं घरेलू ऊर्जा क्षेत्र में वैकल्पिक विकल्पों का उपयोग धीरे-धीरे बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा बाजार की यह बदलती तस्वीर भविष्य में ईंधन उपभोग के नए रुझानों को भी प्रभावित कर सकती है। सरकार और तेल विपणन कंपनियां भी मांग के इन पैटर्न पर लगातार नजर बनाए हुए हैं ताकि आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु रखा जा सके।

  • 15 अगस्त तक 100 नए शहरों में पहुंचेगा 10 किलो एलपीजी सिलेंडर, छोटे परिवारों और कम खपत वाले उपभोक्ताओं को बड़ी राहत

    15 अगस्त तक 100 नए शहरों में पहुंचेगा 10 किलो एलपीजी सिलेंडर, छोटे परिवारों और कम खपत वाले उपभोक्ताओं को बड़ी राहत

    नई दिल्ली । घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं को उनकी जरूरत के अनुसार अधिक सुविधाजनक विकल्प उपलब्ध कराने की दिशा में भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने बड़ा विस्तार कार्यक्रम शुरू किया है। कंपनी ने घोषणा की है कि 15 अगस्त तक देश के 24 राज्यों के 100 नए शहरों में 10 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर की सुविधा उपलब्ध करा दी जाएगी। इस पहल का उद्देश्य उन उपभोक्ताओं को राहत देना है, जिनकी गैस खपत अपेक्षाकृत कम होती है और जिन्हें 14.2 किलो के पारंपरिक घरेलू सिलेंडर की आवश्यकता नहीं पड़ती।

    कंपनी का मानना है कि छोटे आकार का सिलेंडर विशेष रूप से छोटे परिवारों, अकेले रहने वाले लोगों, किराए के मकानों में रहने वाले उपभोक्ताओं तथा सीमित गैस उपयोग करने वाले परिवारों के लिए अधिक उपयोगी साबित होगा। ऐसे उपभोक्ताओं को अब अपनी आवश्यकता के अनुसार सिलेंडर चुनने का विकल्प मिलेगा, जिससे घरेलू खर्च और उपयोग दोनों में बेहतर संतुलन बनाया जा सकेगा। साथ ही छोटे सिलेंडर का वजन कम होने से उसे उठाने और उपयोग करने में भी आसानी होगी।

    एलपीजी वितरण नेटवर्क के विस्तार के साथ कंपनी ऊर्जा सेवाओं को अधिक उपभोक्ता-केंद्रित बनाने की दिशा में काम कर रही है। 100 नए शहरों में सुविधा शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में ऐसे परिवारों को लाभ मिलने की संभावना है, जो अब तक केवल बड़े घरेलू सिलेंडर पर निर्भर थे। इससे उपभोक्ताओं के पास अपनी जरूरत और खपत के अनुरूप विकल्प उपलब्ध होंगे, जिससे सुविधा और उपयोगिता दोनों में वृद्धि होगी।

    कंपनी ने अपने परिचालन से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां भी साझा की हैं। जून तिमाही के दौरान कच्चे तेल की खरीद में विविधता लाने पर विशेष ध्यान दिया गया। रूस के अलावा वेनेजुएला और अंगोला जैसे देशों से भी कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई गई है। कंपनी के अनुसार, स्पॉट मार्केट से खरीद का हिस्सा भी बढ़ा है, जिससे वैश्विक बाजार की परिस्थितियों के अनुरूप खरीद रणनीति को अधिक लचीला बनाया जा सका है।

    ऊर्जा सुरक्षा के दृष्टिकोण से कंपनी ने पर्याप्त कच्चे तेल का भंडार भी बनाए रखा है। उपलब्ध भंडार लगभग 35 दिनों की आवश्यकता पूरी करने के लिए पर्याप्त बताया गया है। इससे वैश्विक बाजार में संभावित उतार-चढ़ाव या आपूर्ति संबंधी चुनौतियों की स्थिति में परिचालन को स्थिर बनाए रखने में मदद मिल सकती है। कंपनी का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव का असर भविष्य के वित्तीय प्रदर्शन पर पड़ सकता है, इसलिए खरीद और भंडारण रणनीति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि 10 किलो एलपीजी सिलेंडर का विस्तार उपभोक्ताओं की बदलती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया व्यावहारिक कदम है। इससे ऐसे परिवारों को आर्थिक और उपयोग संबंधी सुविधा मिलेगी, जिनकी मासिक गैस खपत कम रहती है। साथ ही यह पहल घरेलू एलपीजी वितरण व्यवस्था को अधिक लचीला और उपभोक्ता-अनुकूल बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

    15 अगस्त तक विस्तार योजना पूरी होने के बाद जिन शहरों में यह सुविधा शुरू होगी, वहां के उपभोक्ताओं को पारंपरिक बड़े सिलेंडर के साथ एक अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध होगा। इससे घरेलू एलपीजी सेवाओं का दायरा बढ़ने के साथ-साथ उपभोक्ताओं को अपनी जरूरत के अनुसार बेहतर और अधिक सुविधाजनक चयन करने का अवसर मिलेगा।

  • न्यायिक सेवा के दौरान कारोबार के आरोपों पर पूर्व चीफ जस्टिस की LPG डीलरशिप रद्द

    न्यायिक सेवा के दौरान कारोबार के आरोपों पर पूर्व चीफ जस्टिस की LPG डीलरशिप रद्द

    नई दिल्ली । मणिपुर हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश और दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश रहे सेवानिवृत्त जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल से जुड़ा एक मामला सामने आने के बाद न्यायिक आचार संहिता और संवैधानिक पदों की गरिमा को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। आरोप है कि न्यायिक सेवा में रहते हुए उनका नाम एक एलपीजी डिस्ट्रीब्यूशन एजेंसी से जुड़ा रहा। मामले की जांच के बाद भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) ने संबंधित एलपीजी डीलरशिप को रद्द कर दिया है।

    जानकारी के अनुसार, जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल का नाम ‘किचन फ्लेम’ नामक एलपीजी डिस्ट्रीब्यूशन एजेंसी से जुड़ा होने का आरोप लगाया गया है। कहा गया कि न्यायिक पद पर रहते हुए भी एजेंसी का संचालन उनके नाम से जारी रहा। न्यायिक सेवा के दौरान किसी भी प्रकार के व्यावसायिक या संविदात्मक संबंधों को लेकर लागू आचार संहिता के संदर्भ में इस मामले को गंभीर माना जा रहा है।

    मामले की जांच के दौरान बीपीसीएल ने संबंधित तथ्यों की समीक्षा की। कंपनी के अनुसार, संवैधानिक पद पर रहते हुए किसी व्यवसाय से जुड़े रहने के आरोपों को ध्यान में रखते हुए संबंधित पक्ष को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। निर्धारित अवधि के भीतर संतोषजनक जवाब प्राप्त नहीं होने पर कंपनी ने छह जुलाई को डीलरशिप रद्द करने का निर्णय लिया। इसके बाद संबंधित एजेंसी का अनुबंध समाप्त कर दिया गया।

    बताया गया है कि यह मामला सबसे पहले एजेंसी के पूर्व प्रबंधक की पत्नी द्वारा मालिकाना अधिकार को लेकर उठाए गए विवाद के बाद सामने आया। इसके बाद संबंधित दस्तावेजों और अभिलेखों की जांच के दौरान यह मुद्दा व्यापक रूप से चर्चा में आया। शिकायत मिलने के बाद कंपनी ने अपने स्तर पर जांच प्रक्रिया शुरू की और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की।

    न्यायिक आचार संहिता के अंतर्गत यह स्पष्ट माना जाता है कि किसी भी संवैधानिक अदालत के न्यायाधीश को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से किसी व्यापार, व्यवसाय या लाभकारी गतिविधि से नहीं जुड़ना चाहिए। इसका उद्देश्य न्यायपालिका की निष्पक्षता, स्वतंत्रता और सार्वजनिक विश्वास को बनाए रखना है। इसी सिद्धांत के आधार पर न्यायाधीशों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने कार्यकाल के दौरान किसी भी प्रकार के व्यावसायिक हितों से दूर रहें।

    बताया गया कि वर्ष 2025 में कंपनी को इस संबंध में शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसके बाद नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया। कंपनी का कहना है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने के कारण नियमानुसार डीलरशिप समाप्त करने की कार्रवाई की गई। हालांकि, इस पूरे मामले में न्यायिक या अन्य सक्षम प्राधिकरण की ओर से आगे की किसी कार्रवाई को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायपालिका से जुड़े मामलों में आचार संहिता का पालन संस्थागत विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे मामलों में तथ्यों की निष्पक्ष जांच और नियमों के अनुरूप कार्रवाई को न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास से जोड़कर देखा जाता है। फिलहाल यह मामला न्यायिक नैतिकता और संवैधानिक पदों से जुड़े आचरण को लेकर व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है।

  • बीपीसीएल का बड़ा रणनीतिक निवेश, 85 करोड़ रुपये में खरीदी 40% हिस्सेदारी, इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबार को मिलेगी नई रफ्तार

    बीपीसीएल का बड़ा रणनीतिक निवेश, 85 करोड़ रुपये में खरीदी 40% हिस्सेदारी, इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबार को मिलेगी नई रफ्तार

    नई दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख तेल एवं ऊर्जा कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) ने अपने कारोबार के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए टिकी टार एंड शेल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (टीटीएसआईपीएल) में 40 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने का फैसला किया है। इस रणनीतिक निवेश के तहत कंपनी करीब 85 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इस अधिग्रहण का उद्देश्य वैल्यू-एडेड बिटुमिन कारोबार में बीपीसीएल की हिस्सेदारी बढ़ाना और देश में तेजी से बढ़ रहे इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की संभावनाओं का लाभ उठाना है।

    कंपनी के अनुसार यह निवेश सामान्य नियामकीय और व्यावसायिक शर्तों के पूरा होने के बाद निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा होने की उम्मीद है। इस सौदे के जरिए बीपीसीएल को टीटीएसआईपीएल के उत्पाद पोर्टफोलियो, तकनीकी विशेषज्ञता और बाजार नेटवर्क का लाभ मिलेगा। इससे कंपनी विशेष प्रकार के बिटुमिन उत्पादों की बढ़ती मांग को बेहतर तरीके से पूरा कर सकेगी।

    देशभर में सड़क, एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और अन्य आधारभूत ढांचा परियोजनाओं में लगातार निवेश बढ़ रहा है। ऐसे में वैल्यू-एडेड बिटुमिन की मांग भी तेजी से बढ़ने की संभावना है। बीपीसीएल का मानना है कि यह निवेश उसे इस क्षेत्र में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत करने के साथ भविष्य के विकास अवसरों का लाभ उठाने में मदद करेगा।

    टीटीएसआईपीएल विशेष बिटुमिन उत्पादों के निर्माण और आपूर्ति से जुड़ी कंपनी है। कंपनी की अधिकृत शेयर पूंजी 37 करोड़ रुपये है, जबकि इसकी चुकता पूंजी लगभग 36 करोड़ रुपये बताई गई है। बीपीसीएल का मानना है कि इस साझेदारी से दोनों कंपनियों की विशेषज्ञता का बेहतर उपयोग होगा और नए उत्पादों तथा बाजार विस्तार के अवसर भी बढ़ेंगे।

    वित्तीय प्रदर्शन के मोर्चे पर भी बीपीसीएल ने हालिया तिमाही में मजबूत परिणाम दर्ज किए हैं। कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में 3,191 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया। इस अवधि में कंपनी की कुल आय लगभग 1.18 लाख करोड़ रुपये रही, जबकि ईबीआईटीडीए 10,061 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। यह प्रदर्शन कंपनी की मजबूत परिचालन क्षमता और स्थिर व्यावसायिक गतिविधियों को दर्शाता है।

    ईंधन बिक्री के आंकड़ों में भी सकारात्मक रुझान देखने को मिला है। मई 2026 के दौरान दिल्ली में पेट्रोल की बिक्री में पिछले वर्ष की तुलना में वृद्धि दर्ज की गई। इसी अवधि में डीजल की मांग भी बढ़ी, जिससे स्पष्ट होता है कि परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों में निरंतर सुधार हो रहा है। यह वृद्धि कंपनी के खुदरा कारोबार के लिए भी सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।

    शेयर बाजार में हालांकि कारोबारी सत्र के दौरान बीपीसीएल के शेयरों में हल्की गिरावट दर्ज की गई, लेकिन लंबे समय की बात करें तो कंपनी का प्रदर्शन निवेशकों के लिए सकारात्मक रहा है। पिछले पांच वर्षों में कंपनी के शेयरों ने उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की है। विशेषज्ञों का मानना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में बढ़ते निवेश और वैल्यू-एडेड उत्पादों पर फोकस से बीपीसीएल को भविष्य में नए कारोबारी अवसर मिल सकते हैं, जिससे कंपनी की दीर्घकालिक विकास रणनीति को मजबूती मिलेगी।

  • कच्चे तेल में गिरावट से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों में जोरदार उछाल, IOC–BPCL–HPCL में तेजी

    कच्चे तेल में गिरावट से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों में जोरदार उछाल, IOC–BPCL–HPCL में तेजी

    नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट का सीधा असर भारतीय ऊर्जा क्षेत्र की कंपनियों पर देखने को मिला है। बुधवार को सरकारी तेल विपणन कंपनियों के शेयरों में मजबूती दर्ज की गई, जिससे पूरे ऊर्जा सेक्टर में सकारात्मक माहौल बना रहा।

    बाजार में आई तेजी मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट और भू-राजनीतिक तनाव में कमी के संकेतों के कारण देखी गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंता कम होने से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है, जिसका लाभ घरेलू तेल कंपनियों को मिला।

    दिन के कारोबार में Hindustan Petroleum Corporation Limited के शेयरों में 2 प्रतिशत से अधिक की तेजी देखी गई और यह 410.50 रुपये के इंट्रा-डे हाई तक पहुंच गया। इसी तरह Bharat Petroleum Corporation Limited के शेयरों में भी 2.46 प्रतिशत की मजबूती दर्ज की गई और यह 319.50 रुपये के स्तर तक पहुंच गया।

    वहीं Indian Oil Corporation Limited के शेयर भी 1.61 प्रतिशत की बढ़त के साथ 147.47 रुपये के उच्चतम स्तर पर कारोबार करते नजर आए। इन तीनों प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में आई तेजी ने ऊर्जा सेक्टर को मजबूती प्रदान की।

    विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट इस तेजी का प्रमुख कारण है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई हैं और यह पिछले तीन महीनों के निचले स्तर के आसपास कारोबार कर रही हैं। वहीं वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी लगभग 1 प्रतिशत गिरकर 75 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है।

    पिछले कुछ दिनों में ब्रेंट क्रूड में लगभग 16 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता के संकेत मिले हैं। इस गिरावट के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की चर्चा भी एक महत्वपूर्ण कारण मानी जा रही है, जिससे ईरान के तेल निर्यात में वृद्धि की संभावना बन सकती है।

    इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह खोलने की संभावनाओं ने भी बाजार की धारणा को सकारात्मक बनाया है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और इसके सुचारू संचालन से आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होती है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारत के लिए राहत का संकेत है क्योंकि इससे आयात बिल में कमी आती है और भुगतान संतुलन पर दबाव घटता है। इससे महंगाई को नियंत्रित करने में भी मदद मिलती है और आर्थिक स्थिरता मजबूत होती है।

    इसके साथ ही विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली में कमी और रुपये की मजबूती भी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत के रूप में देखी जा रही है। इन दोनों कारकों से आने वाले समय में निवेश प्रवाह में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

    ऊर्जा क्षेत्र में आई यह तेजी ऐसे समय पर आई है जब घरेलू शेयर बाजार लगातार चौथे कारोबारी सत्र में मजबूती के साथ बंद हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं में कमी और ऊर्जा कीमतों में नरमी से बाजार का समग्र माहौल सकारात्मक बना हुआ है।