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  • बीपीसीएल का बड़ा रणनीतिक निवेश, 85 करोड़ रुपये में खरीदी 40% हिस्सेदारी, इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबार को मिलेगी नई रफ्तार

    बीपीसीएल का बड़ा रणनीतिक निवेश, 85 करोड़ रुपये में खरीदी 40% हिस्सेदारी, इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबार को मिलेगी नई रफ्तार

    नई दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख तेल एवं ऊर्जा कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) ने अपने कारोबार के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए टिकी टार एंड शेल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (टीटीएसआईपीएल) में 40 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने का फैसला किया है। इस रणनीतिक निवेश के तहत कंपनी करीब 85 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इस अधिग्रहण का उद्देश्य वैल्यू-एडेड बिटुमिन कारोबार में बीपीसीएल की हिस्सेदारी बढ़ाना और देश में तेजी से बढ़ रहे इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की संभावनाओं का लाभ उठाना है।

    कंपनी के अनुसार यह निवेश सामान्य नियामकीय और व्यावसायिक शर्तों के पूरा होने के बाद निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा होने की उम्मीद है। इस सौदे के जरिए बीपीसीएल को टीटीएसआईपीएल के उत्पाद पोर्टफोलियो, तकनीकी विशेषज्ञता और बाजार नेटवर्क का लाभ मिलेगा। इससे कंपनी विशेष प्रकार के बिटुमिन उत्पादों की बढ़ती मांग को बेहतर तरीके से पूरा कर सकेगी।

    देशभर में सड़क, एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और अन्य आधारभूत ढांचा परियोजनाओं में लगातार निवेश बढ़ रहा है। ऐसे में वैल्यू-एडेड बिटुमिन की मांग भी तेजी से बढ़ने की संभावना है। बीपीसीएल का मानना है कि यह निवेश उसे इस क्षेत्र में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत करने के साथ भविष्य के विकास अवसरों का लाभ उठाने में मदद करेगा।

    टीटीएसआईपीएल विशेष बिटुमिन उत्पादों के निर्माण और आपूर्ति से जुड़ी कंपनी है। कंपनी की अधिकृत शेयर पूंजी 37 करोड़ रुपये है, जबकि इसकी चुकता पूंजी लगभग 36 करोड़ रुपये बताई गई है। बीपीसीएल का मानना है कि इस साझेदारी से दोनों कंपनियों की विशेषज्ञता का बेहतर उपयोग होगा और नए उत्पादों तथा बाजार विस्तार के अवसर भी बढ़ेंगे।

    वित्तीय प्रदर्शन के मोर्चे पर भी बीपीसीएल ने हालिया तिमाही में मजबूत परिणाम दर्ज किए हैं। कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में 3,191 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया। इस अवधि में कंपनी की कुल आय लगभग 1.18 लाख करोड़ रुपये रही, जबकि ईबीआईटीडीए 10,061 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। यह प्रदर्शन कंपनी की मजबूत परिचालन क्षमता और स्थिर व्यावसायिक गतिविधियों को दर्शाता है।

    ईंधन बिक्री के आंकड़ों में भी सकारात्मक रुझान देखने को मिला है। मई 2026 के दौरान दिल्ली में पेट्रोल की बिक्री में पिछले वर्ष की तुलना में वृद्धि दर्ज की गई। इसी अवधि में डीजल की मांग भी बढ़ी, जिससे स्पष्ट होता है कि परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों में निरंतर सुधार हो रहा है। यह वृद्धि कंपनी के खुदरा कारोबार के लिए भी सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।

    शेयर बाजार में हालांकि कारोबारी सत्र के दौरान बीपीसीएल के शेयरों में हल्की गिरावट दर्ज की गई, लेकिन लंबे समय की बात करें तो कंपनी का प्रदर्शन निवेशकों के लिए सकारात्मक रहा है। पिछले पांच वर्षों में कंपनी के शेयरों ने उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की है। विशेषज्ञों का मानना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में बढ़ते निवेश और वैल्यू-एडेड उत्पादों पर फोकस से बीपीसीएल को भविष्य में नए कारोबारी अवसर मिल सकते हैं, जिससे कंपनी की दीर्घकालिक विकास रणनीति को मजबूती मिलेगी।

  • कच्चे तेल में गिरावट से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों में जोरदार उछाल, IOC–BPCL–HPCL में तेजी

    कच्चे तेल में गिरावट से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों में जोरदार उछाल, IOC–BPCL–HPCL में तेजी

    नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट का सीधा असर भारतीय ऊर्जा क्षेत्र की कंपनियों पर देखने को मिला है। बुधवार को सरकारी तेल विपणन कंपनियों के शेयरों में मजबूती दर्ज की गई, जिससे पूरे ऊर्जा सेक्टर में सकारात्मक माहौल बना रहा।

    बाजार में आई तेजी मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट और भू-राजनीतिक तनाव में कमी के संकेतों के कारण देखी गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंता कम होने से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है, जिसका लाभ घरेलू तेल कंपनियों को मिला।

    दिन के कारोबार में Hindustan Petroleum Corporation Limited के शेयरों में 2 प्रतिशत से अधिक की तेजी देखी गई और यह 410.50 रुपये के इंट्रा-डे हाई तक पहुंच गया। इसी तरह Bharat Petroleum Corporation Limited के शेयरों में भी 2.46 प्रतिशत की मजबूती दर्ज की गई और यह 319.50 रुपये के स्तर तक पहुंच गया।

    वहीं Indian Oil Corporation Limited के शेयर भी 1.61 प्रतिशत की बढ़त के साथ 147.47 रुपये के उच्चतम स्तर पर कारोबार करते नजर आए। इन तीनों प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में आई तेजी ने ऊर्जा सेक्टर को मजबूती प्रदान की।

    विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट इस तेजी का प्रमुख कारण है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई हैं और यह पिछले तीन महीनों के निचले स्तर के आसपास कारोबार कर रही हैं। वहीं वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी लगभग 1 प्रतिशत गिरकर 75 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है।

    पिछले कुछ दिनों में ब्रेंट क्रूड में लगभग 16 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता के संकेत मिले हैं। इस गिरावट के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की चर्चा भी एक महत्वपूर्ण कारण मानी जा रही है, जिससे ईरान के तेल निर्यात में वृद्धि की संभावना बन सकती है।

    इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह खोलने की संभावनाओं ने भी बाजार की धारणा को सकारात्मक बनाया है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और इसके सुचारू संचालन से आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होती है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारत के लिए राहत का संकेत है क्योंकि इससे आयात बिल में कमी आती है और भुगतान संतुलन पर दबाव घटता है। इससे महंगाई को नियंत्रित करने में भी मदद मिलती है और आर्थिक स्थिरता मजबूत होती है।

    इसके साथ ही विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली में कमी और रुपये की मजबूती भी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत के रूप में देखी जा रही है। इन दोनों कारकों से आने वाले समय में निवेश प्रवाह में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

    ऊर्जा क्षेत्र में आई यह तेजी ऐसे समय पर आई है जब घरेलू शेयर बाजार लगातार चौथे कारोबारी सत्र में मजबूती के साथ बंद हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं में कमी और ऊर्जा कीमतों में नरमी से बाजार का समग्र माहौल सकारात्मक बना हुआ है।