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  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने छत्रपति संभाजी महाराज के बलिदान दिवस पर किया पुण्य स्मरण

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने छत्रपति संभाजी महाराज के बलिदान दिवस पर किया पुण्य स्मरण


    भोपाल । भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने छत्रपति संभाजी महाराज के बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर उनका पुण्य स्मरण किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्रपति संभाजी महाराज ने धर्म और देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी और उनका शौर्य एवं पराक्रम आज भी सभी देशवासियों के लिए प्रेरणा स्रोत है।

    डॉ. यादव ने जोर देते हुए कहा कि छत्रपति संभाजी महाराज की गौरव गाथा सदैव भारतीय इतिहास और मराठा गौरव का प्रतीक बनी रहेगी। उन्होंने युवा पीढ़ी से आह्वान किया कि वे महाराज के साहस, बलिदान और निस्वार्थ सेवा के आदर्शों को अपनाएं और देश के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करें।

    मुख्यमंत्री के इस स्मरण कार्यक्रम में अधिकारियों और स्थानीय नागरिकों ने भी भाग लिया और महाराज के सम्मान में पुष्प अर्पित किए। इस अवसर पर प्रदेश में शौर्य और वीरता की भावना को जागरूक रखने पर जोर दिया गया।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बालाकोट एयर स्ट्राइक की 7वीं वर्षगांठ पर वायुसेना के शौर्य को किया नमन

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बालाकोट एयर स्ट्राइक की 7वीं वर्षगांठ पर वायुसेना के शौर्य को किया नमन


    भोपाल । मोहन यादव ने बालाकोट एयर स्ट्राइक की 7वीं वर्षगांठ पर भारतीय वायुसेना के अद्वितीय साहस, शौर्य और पराक्रम को नमन किया। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा और स्वाभिमान की रक्षा के लिए हमारे वीर जवानों ने जिस बहादुरी और संकल्प का परिचय दिया, वह हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संदेश में कहा कि भारत के शूरवीर सैनिकों ने कठिन परिस्थितियों में भी अदम्य साहस का प्रदर्शन करते हुए मातृभूमि की गरिमा को अक्षुण्ण बनाए रखा। उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना का पराक्रम केवल सैन्य शक्ति का प्रतीक नहीं, बल्कि राष्ट्र की एकजुटता, दृढ़ इच्छाशक्ति और आत्मसम्मान का भी प्रतीक है।

    उन्होंने आगे कहा कि देश के जवानों का साहस आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत है। राष्ट्र की सुरक्षा में अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले सैनिकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे देश को अपने वीर सपूतों पर सदैव गर्व रहेगा।

    डॉ. यादव ने इस अवसर पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका बलिदान देशवासियों के लिए अमिट स्मृति है और राष्ट्र उनकी वीरता को सदैव याद रखेगा।

  • नेमावर मौत के मुंह से लौटी महिला; नर्मदा में छलांग लगाते ही देवदूत बनकर पहुंचा नाविक

    नेमावर मौत के मुंह से लौटी महिला; नर्मदा में छलांग लगाते ही देवदूत बनकर पहुंचा नाविक


    देवास । नर्मदा नदी के पुराने पुल पर उस समय हड़कंप मच गया जब एक महिला ने उफनती लहरों के बीच मौत की छलांग लगा दी। हालांकिइस घटना में ‘जाको राखे साइयांमार सके न कोय’ वाली कहावत चरितार्थ हुई। महिला जिस स्थान पर कूदीवहां पास ही एक नाविक मौजूद थाजिसने बिना समय गंवाए पानी में कूदकर महिला की जान बचा ली।

    बहादुर नाविक ने पेश की मानवता की मिसाल

    शनिवार को देवास और हरदा जिले को जोड़ने वाले पुराने पुल पर अचानक उस समय सनसनी फैल गईजब ग्राम सवासड़ा की रहने वाली आशाबाई कोरकू ने नदी में छलांग लगा दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसारमहिला जैसे ही पानी में गिरीपास ही मौजूद नाविक प्रेमलाल केवट ने तुरंत फुर्ती दिखाई। प्रेमलाल ने अपनी नाव से नदी में छलांग लगाई और डूब रही महिला को सुरक्षित पकड़ लिया। बाद में अन्य लोगों की मदद से महिला को नाव के जरिए किनारे लाया गया।

    मानसिक रूप से अस्वस्थ है महिला
    घटना की सूचना मिलते ही नेमावर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पूछताछ में पता चला कि महिला की मानसिक स्थिति ठीक नहीं हैजिसके चलते उसने यह आत्मघाती कदम उठाया। नेमावर थाने के एसआई विजय सिंह बैस ने बताया कि महिला पूरी तरह सुरक्षित है और उसे किसी प्रकार की गंभीर चोट नहीं आई है। पुलिस ने तत्काल महिला के परिजनों को सूचना दी और उन्हें थाने बुलवाकर समझाइश के साथ महिला को उनके सुपुर्द कर दिया। परिजनों को हिदायत दी गई है कि महिला को अकेला न छोड़ें।

    खतरे का केंद्र बनता पुराना पुल

    गौरतलब है कि नेमावर का यह पुराना पुल बीते दो दिनों से दुखद खबरों का केंद्र बना हुआ है। बीते शुक्रवार को ही हरदा जिले के छोटी हरदा निवासी गणेश नामक युवक ने इसी पुल से छलांग लगा दी थीजिसकी डूबने से मौत हो गई थी। लगातार हो रही इन घटनाओं ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस के लिए चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि पुल पर सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता की जाए ताकि ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके। नायक नाविक प्रेमलाल केवटजिनकी तत्परता से बची जान।पीड़िता आशाबाई कोरकूनिवासी ग्राम सवासड़ा।वजह प्रारंभिक जांच में मानसिक अस्वस्थता सामने आई।चेतावनी एक दिन पूर्व इसी स्थान पर एक युवक की डूबने से हुई थी मौत।

  • दिल्ली के वजीराबाद फ्लाईओवर पर चलती कार में लगी आग पुलिस ने शीशा तोड़कर बचाई चालक की जान

    दिल्ली के वजीराबाद फ्लाईओवर पर चलती कार में लगी आग पुलिस ने शीशा तोड़कर बचाई चालक की जान


    नई दिल्ली । दिल्ली के वजीराबाद फ्लाईओवर पर रविवार शाम एक चलती कार में अचानक आग लग गई जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। आग लगने के कारण कार का सेंट्रल लॉक जाम हो गया और चालक अंदर फंस गया। हालांकि दिल्ली पुलिस के ट्रैफिक पुलिसकर्मियों ने अपनी बहादुरी से ड्राइवर की जान बचा ली। घटना रविवार शाम की है जब बुराड़ी से मजनू का टीला की तरफ जा रही कार में वजीराबाद फ्लाईओवर पर आग लग गई। आग लगते ही कार का सेंट्रल लॉक काम नहीं करने लगा और चालक अंदर फंस गया। इस स्थिति में ट्रैफिक पुलिस की बहादुरी की वजह से एक बड़ा हादसा टल गया।

    पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया ने बचाई जान
    टीम इंस्पेक्टर टीआई संतोष गुप्ता और उनके साथी पुलिसकर्मी वजीराबाद फ्लाईओवर के पास ड्यूटी पर तैनात थे जब उन्होंने देखा कि एक कार धू-धू कर जल रही है और उसके अंदर चालक फंसा हुआ है। तुरंत ही उन्होंने अपनी कार्रवाई शुरू की। संतोष गुप्ता ने बताया “कार में आग लगने के बाद ड्राइवर सेंट्रल लॉक की वजह से अंदर फंसा हुआ था। हम पहले तो दरवाजे को खोलने की कोशिश करते रहे लेकिन सफल नहीं हो सके। तब हमने शीशा तोड़कर चालक को बाहर निकाला।

    पानी से आग पर काबू पाया गया
    इसी दौरान पास ही खड़ा एमसीडी का पानी का टैंकर भी मौके पर पहुंच गया। ट्रैफिक पुलिस ने इसका इस्तेमाल कर कार की आग पर काबू पाया। पुलिसकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से आग को बढ़ने से रोका गया और चालक को किसी भी बड़ी चोट से बचा लिया गया।इस पूरी घटना के दौरान वजीराबाद फ्लाईओवर पर ट्रैफिक भी प्रभावित हुआ। कार के जलने और पुलिस की कार्रवाई के कारण सड़क पर जाम लग गया था। हालांकि पुलिस ने तुरंत रास्ता खाली करने और ट्रैफिक की समस्या को हल करने के लिए काम किया।

    दमकल को देरी से सूचना
    घटना की जानकारी दमकल विभाग को दी गई थी लेकिन जाम के कारण उन्हें घटनास्थल पर पहुंचने में कुछ समय लग गया। इस बीच पुलिस ने अपनी तत्परता से चालक की जान बचाई और आग पर काबू पा लिया।

    टीआई संतोष गुप्ता ने दी प्रतिक्रिया
    टीआई संतोष गुप्ता ने कहा हमारा सबसे पहला उद्देश्य था कि चालक को सुरक्षित निकाला जाए। इसके बाद हमने पास ही खड़े पानी के टैंकर से आग को बुझाया। टीम की त्वरित कार्रवाई से बड़ा हादसा टल गया।इस घटना से यह साबित होता है कि आपातकालीन स्थिति में पुलिस और अन्य एजेंसियों की तत्परता और बहादुरी से जान बचाने में मदद मिल सकती है। दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई को कई लोग सराह रहे हैं क्योंकि एक सामान्य घटना में यदि समय रहते सही कदम नहीं उठाए जाते तो परिणाम गंभीर हो सकते थे।

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संसद भवन पर आतंकी हमले में शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संसद भवन पर आतंकी हमले में शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी


    मध्य प्रदेश/3 दिसंबर 2001 को संसद भवन पर हुआ आतंकी हमला भारतीय लोकतंत्र पर एक बड़ा हमला था, जिसमें आतंकियों ने संसद भवन में घुसने का प्रयास किया और भारी गोलाबारी शुरू कर दी। इस हमले में सुरक्षा बलों के जवानों ने अदम्य साहस और वीरता का परिचय दिया। कई जवानों ने अपनी जान की आहुति देकर संसद भवन और देश की सुरक्षा को सुनिश्चित किया।
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि यह घटना भारतीय इतिहास में एक काले दिन के रूप में याद की जाती है। डॉ. यादव ने यह भी कहा कि आतंकवाद का सामना करते हुए हमारे वीर जवानों ने न केवल अपने प्राणों की आहुति दी, बल्कि देश के स्वाभिमान की रक्षा भी की। यह बलिदान देशवासियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहेगा।
    मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारे पराक्रमी जवानों ने उस समय आतंकवादियों को कड़ी टक्कर दी और आतंकियों को मौके पर ही ढेर कर दिया। आज पूरा देश उन जवानों की वीरता को याद कर रहा है। यह घटना हम सभी को यह याद दिलाती है कि देश की रक्षा करने वाले सुरक्षा बलों के जवान अपने प्राणों की आहुति देने से भी पीछे नहीं हटते।
    शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मुख्यमंत्री ने उनके साहस और बलिदान को नमन किया और कहा कि उनका योगदान देश के लिए अविस्मरणीय है। “हम सभी शहीदों की वीरता को सलाम करते हैं, और उनकी बलिदान की भावना को अपने दिलों में हमेशा जिंदा रखते हैं।”
    यह हमला उस समय हुआ था जब संसद में एक सत्र चल रहा था और इसमें कई महत्वपूर्ण नेता उपस्थित थे। आतंकवादियों का मकसद संसद में घुसकर बड़े पैमाने पर आतंक फैलाना था, लेकिन सुरक्षा बलों की तत्परता और साहस ने उन्हें नाकाम कर दिया। इस हमले में 9 सुरक्षा कर्मी और 5 आतंकवादी मारे गए थे, जिनमें से कई जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह शहीद जवानों के परिवारों के लिए सबसे कठिन समय था, और उनके परिवारों का संघर्ष और बलिदान भी कभी भुलाया नहीं जाएगा। उन्होंने शहीदों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त की और कहा कि राज्य सरकार हर संभव मदद देने के लिए तत्पर है।
    आज पूरा देश उन जवानों की वीरता को याद कर रहा है जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर हमें सुरक्षा प्रदान की। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने का संकल्प लिया और कहा कि हम सभी को इस प्रकार के हमलों को नाकाम करने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए।

  • MP: सतना में बुजुर्ग की दिलेरी… सीने में गोली लगने बाद भी हमलावर का कृत्रिम पैर और कट्टा छीना

    MP: सतना में बुजुर्ग की दिलेरी… सीने में गोली लगने बाद भी हमलावर का कृत्रिम पैर और कट्टा छीना


    सतना।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के सतना जिले (Satna district) में गुरुवार की रात एक ऐसी सनसनीखेज वारदात हुई, जिसकी कहानी किसी फिल्म की पटकथा (Film script) जैसी लगती है। यहां एक 60 वर्षीय बुजुर्ग ने गोली लगने के बावजूद वो दिलेरी दिखाई, जिसे सुनकर पुलिस भी दंग रह गई है। बिजली विभाग के कर्मचारी (Electricity department employees) को एक दिव्यांग बदमाश ने सीने में गोली मार दी। खून से लथपथ होने के बाद भी बुजुर्ग ने हार नहीं मानी और हमलावर से भिड़ गए। छीना-झपटी में उन्होंने हमलावर का कृत्रिम पैर और कट्टा छीन लिया, जिसके बाद बदमाश लंगड़ाते हुए भाग निकला।


    ड्यूटी से घर लौटते वक्त किया हमला

    बिजली विभाग के घायल कर्मचारी की पहचान रामनरेश बर्मन (60 वर्ष) के रूप में हुई है, जो मूल रूप से अमदरा थाना क्षेत्र के नौगांव के निवासी हैं और सतना के प्रेम नगर स्थित विद्युत विभाग कार्यालय में चपरासी हैं। उन्होंने बताया कि गुरुवार शाम जब वह ड्यूटी खत्म करके ट्रेन पकड़ने के लिए पैदल स्टेशन की ओर जा रहे थे, और जैसे ही वह पटरी किनारे चलते हुए प्रेम नगर अंडरब्रिज के पास पहुंचे, तभी अंधेरे में छिपे एक दिव्यांग व्यक्ति ने उन्हें रोका और कट्टे से फायर कर दिया। गोली सीधे उनके बाएं सीने में लगी।


    मौत सामने थी, पर नहीं टूटा हौसला

    गोली लगते ही रामनरेश के शरीर से खून बहने लगा, लेकिन इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और गजब की जीवटता दिखाई। वे गिरने के बजाय हमलावर पर टूट पड़े। इसके बाद दोनों के बीच जमकर गुत्थम-गुत्था हुई और इस दौरान दिव्यांग हमलावर जमीन पर गिर गया। रामनरेश ने मौका देखते ही उसका नकली पैर खींच लिया और हाथ से कट्टा भी छीन लिया। अपना पैर और हथियार छिनता देख हमलावर घबरा गया और एक पैर से लंगड़ाते हुए मौके से फरार हो गया।


    झोले में नकली पैर और कट्टा लेकर थाने पहुंचे

    इस खौफनाक घटना और सीने में गोली लगी होने के बावजूद रामनरेश बर्मन झोले में हमलावर का नकली पैर और कट्टा भरकर सीधे सिटी कोतवाली पहुंचे। उनके एक हाथ में हमलावर का कृत्रिम पैर था और दूसरे हाथ में कट्टा था। यह दृश्य देखकर पुलिसकर्मी भी सन्न रह गए है। पुलिस ने तत्काल उन्हें वाहन से जिला अस्पताल भेज दिया। घटना की गंभीरता को देखते हुए सीएसपी देवेंद्र प्रताप सिंह तुरंत जिला अस्पताल पहुंचे और घायल के बयान लिए।


    आरोपी की तलाश में जुटी पुलिस

    उधर सतना सीएसपी देवेंद्र प्रताप सिंह ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि रामनरेश बर्मन जो कि विद्युत विभाग में चपरासी के पद पदस्थ हैं। वह रोज की तरह ड्यूटी खत्म करके ट्रेन से घर जाने के लिए निकले थे तभी रास्ते पर अंधेरे में एक अज्ञात व्यक्ति आया और आकर रामनरेश पर कट्टे से फायर कर दिया। पुलिस ने कहा कि फायर करने वाला व्यक्ति विकलांग था उसका नकली पैर भी वहीं छूट गया है। आगे उन्होंने कहा कि हो सकता है अंधेरे का फायदा उठाकर बदमाश ने लूट के इरादे से गोली मारी होगी। पुलिस ने हत्या के प्रयास का मामला पंजीबद्ध कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है।