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  • कलेक्ट्रेट में फर्जीवाड़ा सरकारी बाबुओं और दलाल की मिलीभगत से जमीन बेचने की साजिश

    कलेक्ट्रेट में फर्जीवाड़ा सरकारी बाबुओं और दलाल की मिलीभगत से जमीन बेचने की साजिश


    देवास । मध्यप्रदेश के देवास जिले में प्रशासनिक तंत्र को झकझोर देने वाला एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है जिसमें कलेक्टर के नाम से फर्जी हस्ताक्षर और आदेश जारी कर जमीन बेचने की साजिश रची गई। इस मामले ने न केवल सरकारी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं बल्कि आम जनता में भी आक्रोश पैदा कर दिया है।

    जानकारी के अनुसार कलेक्ट्रेट कार्यालय से जुड़े इस मामले में सरकारी कर्मचारियों और एक दलाल की मिलीभगत सामने आई है। कलेक्टर ऋतुराज सिंह को जब इस गड़बड़ी की जानकारी मिली तो उन्होंने तत्काल BNP थाना पुलिस को शिकायत दर्ज कराई। जांच के बाद पुलिस ने धोखाधड़ी और सरकारी दस्तावेजों में कूट रचना जैसी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया।

    पुलिस ने कार्रवाई करते हुए नजूल शाखा के बाबू रमेश लोबानिया अपर कलेक्टर कार्यालय के बाबू संजय जाटव विजयागंज मंडी तहसील के बाबू जितेंद्र भद्रे और एक दलाल को गिरफ्तार कर लिया है। शहर के CSP सुमित अग्रवाल ने बताया कि आरोपियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए फर्जी दस्तावेज तैयार किए और उन्हें वैध दिखाकर जमीन बेचने की कोशिश की।

    जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने सरकारी प्रक्रिया को दरकिनार कर कलेक्टर के नाम से फर्जी आदेश जारी किए। इन दस्तावेजों का इस्तेमाल कर छोटे और कमजोर वर्ग के लोगों की जमीन को बेचने का प्रयास किया गया। इतना ही नहीं एक किसान की जमीन की रजिस्ट्री भी करवा दी गई थी जिसे बाद में निरस्त कराया गया। इस पूरे मामले में दलाल की भूमिका भी बेहद अहम मानी जा रही है जिसने खरीदार और सरकारी कर्मचारियों के बीच कड़ी का काम किया। आरोप है कि पैसों के लालच में यह पूरा फर्जीवाड़ा अंजाम दिया गया।

    यह मामला केवल फर्जी दस्तावेज बनाने तक सीमित नहीं है बल्कि यह एक सुनियोजित साजिश प्रतीत हो रही है जिसमें अंदरूनी कर्मचारियों ने सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाया। अब यह जांच का विषय है कि क्या इस पूरे प्रकरण में वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी थी या उन्हें पूरी तरह अंधेरे में रखा गया।

    फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है और संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस घोटाले से जुड़े और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि यदि सरकारी दफ्तरों से ही फर्जी आदेश जारी होने लगें तो आम जनता का भरोसा व्यवस्था पर कैसे कायम रहेगा।

  • शहडोल हादसा ,क्रेटा कार में गांजा मिला खेत के कुएं, में मिली तीन लाशें

    शहडोल हादसा ,क्रेटा कार में गांजा मिला खेत के कुएं, में मिली तीन लाशें


    शहडोल । मध्यप्रदेश के शहडोल जिले से एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है जहां अवैध नशे के कारोबार से जुड़े तीन युवकों की मौत ने पूरे इलाके को दहला दिया। यह घटना जैतपुर थाना क्षेत्र में हुई जहां पुलिस से बचने की कोशिश में तीनों युवक भागते हुए एक कुएं में गिर गए और डूबने से उनकी मौत हो गई। जानकारी के अनुसार घटना की शुरुआत देर रात हुई जब डायल 112 की पुलिस टीम नियमित गश्त पर थी। इसी दौरान कामता कॉलेज तिराहे के पास एक दुर्घटनाग्रस्त सफेद क्रेटा कार खड़ी दिखाई दी। पुलिस जब मौके पर पहुंची तो कार में कोई मौजूद नहीं था लेकिन तलाशी लेने पर उसमें से करीब 5 किलो से अधिक गांजा बरामद हुआ। पुलिस ने मादक पदार्थ को जब्त किया और आगे की कार्रवाई के लिए लौट गई।

    हालांकि असली घटना का खुलासा अगले दिन सुबह हुआ जब पास के खेत में स्थित एक कुएं में तीन शव तैरते हुए मिले। यह खेत किसान कन्हैया लाल यादव का बताया जा रहा है। जैसे ही ग्रामीणों ने कुएं में लाशें देखीं इलाके में हड़कंप मच गया और तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। काफी मशक्कत के बाद एक एक कर तीनों शवों को कुएं से बाहर निकाला गया। मृतकों की पहचान रोहित शर्मा निवासी बुढार तनुज शुक्ला निवासी शहडोल और सचिन सिंह बघेल निवासी बुढार के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि रोहित शर्मा पहले से ही गांजा तस्करी के मामलों में कुख्यात रहा है।

    प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि पुलिस की गाड़ी देखकर कार सवार युवकों ने भागने की कोशिश की। तेज रफ्तार के कारण उनकी कार अनियंत्रित होकर पलट गई। हादसे के बाद घायल अवस्था में तीनों युवक अंधेरे का फायदा उठाकर खेतों की ओर भागे। लेकिन घबराहट और रात के अंधेरे में उन्हें सामने मौजूद कुआं दिखाई नहीं दिया और वे सीधे उसमें गिर गए। घायल होने के कारण वे खुद को बचा नहीं सके और कुएं से बाहर निकलने में असफल रहे जिससे तीनों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शवों को बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

    इस मामले में एसडीओपी विकास पाण्डेय ने बताया कि देर रात एक दुर्घटनाग्रस्त कार से गांजा बरामद हुआ था और उसी कार में सवार तीन युवक भागने के दौरान कुएं में गिर गए जिससे उनकी मौत हो गई। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस तस्करी के नेटवर्क में और कौन कौन लोग शामिल थे। यह घटना एक बार फिर यह बताती है कि अवैध नशे के कारोबार का अंजाम कितना खतरनाक हो सकता है जहां कानून से बचने की कोशिश कभी कभी सीधे मौत तक ले जाती है।

  • ये कैसा न्याय है कुलदीप सेंगर को जमानत मिलने पर भड़के राहुल गांधी उन्नाव गैंगरेप पीड़िता से आज कर सकते हैं मुलाकात

    ये कैसा न्याय है कुलदीप सेंगर को जमानत मिलने पर भड़के राहुल गांधी उन्नाव गैंगरेप पीड़िता से आज कर सकते हैं मुलाकात


    नई दिल्‍ली । उन्नाव रेप केस मामले में ट्रायल कोर्ट से पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को 2019 में सुनाई गई उम्र कैद की सजा के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट की एक बेंच ने सजा को निलंबित कर दिया है. इस पर कांग्रेस सांसद और लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी भड़क गए हैं. उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर अपनी नाराजगी जताई है. खबर है कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी उन्नाव की पीड़िता से आज शाम 7 बजे मिल सकते हैं. मंगलवार को कोर्ट के फैसले के बाद पीड़िता उनकी मां और महिला अधिकार एक्टिविस्ट योगिता भयाना ने इंडिया गेट पर विरोध प्रदर्शन किया था. प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने पीड़िता उनकी मां और योगिता भायना को प्रदर्शन करने से रोकते हुए हटा दिया.

    राहुल ने बोले- लोकतंत्र में आवाज उठाना अधिकार है

    राहुल गांधी ने गैंगरेप पीड़िता को समर्थन देते हुए पूछा क्या एक गैंगरेप पीड़िता के साथ ऐसा व्यवहार उचित है? क्या उसकी गलती ये है कि वो न्याय के लिए अपनी आवाज उठाने की हिम्मत कर रही है? उसके अपराधी पूर्व BJP MLA को जमानत मिलना बेहद निराशाजनक और शर्मनाक है. खासकर तब जब पीड़िता को बार-बार प्रताड़ित किया जा रहा हो और वो डर के साए में जी रही हो. बलात्कारियों को जमानत और पीड़िताओं के साथ अपराधियों सा व्यवहार ये कैसा न्याय है? हम सिर्फ एक मृत अर्थव्यवस्था नहीं ऐसी अमानवीय घटनाओं के साथ हम एक मृत समाज भी बनते जा रहे हैं. लोकतंत्र में असहमति की आवाज उठाना अधिकार है और उसे दबाना अपराध. पीड़िता को सम्मान सुरक्षा और न्याय मिलना चाहिए न कि बेबसी भय और अन्याय.

    पीड़िता का आरोप- 2027 चुनाव से पहले दी जमानत

    इंडिया गेट पर 2017 के उन्नाव गैंगरेप केस पीड़िता ने आरोप लगाया कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को देखते हुए सेंगर को जमानत दी गई है. 2017 के इस मामले ने तब विवाद पकड़ा था जब बिना नंबर प्लेट वाले एक ट्रक उस कार से टकरा गया था जिसमें पीड़िता जा रही थी.
    इस घटना में पीड़िता और उसका वकील गंभीर रूप से घायल हो गए थे. जबकि उसकी दो मौसियों की मौत हो गई थी. इस मामले में सेंगर पर अलग से एक मामला दर्ज है. इस मामले में भी 2021 को दिल्ली की एक अदालत ने उन्हें आरोप मुक्त करते हुए दुर्घटना को सबूतों के आभाव में साजिश मानने से इनकार कर दिया था.