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  • उतार-चढ़ाव के बाद सपाट बंद हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स में 114 अंकों की गिरावट..

    उतार-चढ़ाव के बाद सपाट बंद हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स में 114 अंकों की गिरावट..

    नई दिल्ली। गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में पूरे दिन उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती तेजी के बावजूद कारोबार के अंत तक बाजार लगभग सपाट बंद हुआ। निवेशकों की नजरें वैश्विक घटनाक्रम और अमेरिका-ईरान के बीच संभावित तनाव कम होने की खबरों पर बनी रहीं।

    कारोबार खत्म होने पर बीएसई सेंसेक्स 114 अंक गिरकर 77,844.52 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी मामूली कमजोरी के साथ 24,326.65 पर बंद हुआ। दिन की शुरुआत दोनों प्रमुख सूचकांकों ने बढ़त के साथ की थी, लेकिन बाद में बाजार में मुनाफावसूली देखने को मिली।

    दिनभर के कारोबार में सेंसेक्स ने 78,384.70 का उच्च स्तर और 77,713.21 का निचला स्तर छुआ। वहीं निफ्टी 24,482.10 तक पहुंचा, जबकि दिन का निचला स्तर 24,284 रहा।

    हालांकि बड़े सूचकांकों में दबाव देखने को मिला, लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 1 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी रही, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स भी बढ़त के साथ बंद हुआ।

    सेक्टर आधारित कारोबार में ऑटो, रियल्टी, मेटल, मीडिया और हेल्थकेयर शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। दूसरी ओर आईटी, एफएमसीजी और कंज्यूमर ड्यूरेबल सेक्टर दबाव में रहे।

    बाजार में बजाज ऑटो, महिंद्रा एंड महिंद्रा, हिंडाल्को, ओएनजीसी, कोटक बैंक और एनटीपीसी जैसे शेयरों में अच्छी तेजी दर्ज की गई। वहीं एचयूएल, टीसीएस, टेक महिंद्रा, आईटीसी और सन फार्मा जैसे शेयर कमजोर रहे।

    बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों की संपत्ति में इजाफा हुआ। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप बढ़कर करीब 475 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जिससे निवेशकों को लगभग 2 लाख करोड़ रुपये का फायदा हुआ।

    तकनीकी विश्लेषकों के मुताबिक, निफ्टी के लिए 24,400-24,500 का स्तर फिलहाल मजबूत रेजिस्टेंस बना हुआ है। अगर इंडेक्स इस दायरे के ऊपर टिकता है, तो बाजार में फिर तेजी लौट सकती है। वहीं 24,100-24,000 का स्तर मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक राजनीतिक घटनाएं और कच्चे तेल की कीमतें बाजार की दिशा तय करेंगी। खासतौर पर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को लेकर निवेशकों की नजर बनी हुई है।

    इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड करीब 2 प्रतिशत से ज्यादा टूटकर 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे कारोबार करता दिखा। वहीं डॉलर के मुकाबले रुपया भी मजबूत हुआ और हल्की बढ़त के साथ कारोबार करता नजर आया।

  • मिडिल ईस्ट तनाव में नरमी के संकेत, कच्चे तेल की कीमतों में 6% की बड़ी गिरावट

    मिडिल ईस्ट तनाव में नरमी के संकेत, कच्चे तेल की कीमतों में 6% की बड़ी गिरावट


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में Iran के साथ तनाव कम होने की उम्मीद के बीच मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली। बाजार में अचानक आई इस नरमी के कारण कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गया।

    अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क Brent Crude फ्यूचर्स की कीमत 6.51 डॉलर यानी लगभग 6.6 प्रतिशत गिरकर 92.45 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं अमेरिकी मानक West Texas Intermediate (WTI) कच्चे तेल की कीमत 6.12 डॉलर या 6.5 प्रतिशत गिरकर 88.65 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई।

    ट्रंप के बयान के बाद बाजार में आई नरमी
    तेल की कीमतों में यह गिरावट मुख्य रूप से अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump के उस बयान के बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी अभियान “बहुत जल्द” समाप्त हो सकता है।

    ट्रंप ने कहा कि इस अभियान की सफलता का मतलब यह होगा कि तेहरान के पास ऐसे हथियार विकसित करने की क्षमता नहीं रहेगी जो अमेरिका, Israel या उसके सहयोगी देशों के लिए खतरा बन सकें। उनके इस बयान से वैश्विक बाजारों को संकेत मिला कि क्षेत्र में तनाव कम हो सकता है, जिससे तेल आपूर्ति बाधित होने का जोखिम घट सकता है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दी चेतावनी
    ट्रंप ने ईरान को Strait of Hormuz के जरिए वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को बाधित करने की किसी भी कोशिश के खिलाफ चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि यह जलडमरूमध्य सुरक्षित रहेगा क्योंकि वहां अमेरिकी नौसेना के कई जहाज तैनात हैं।

    होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। दुनिया के बड़े तेल उत्पादक देशों से निर्यात होने वाला कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी तरह का खतरा वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बड़ी चिंता बन सकता है।

    इजरायल के साथ संयुक्त अभियान का असर
    इस महीने की शुरुआत में अमेरिका ने Iran की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को कमजोर करने के उद्देश्य से Israel के साथ संयुक्त सैन्य अभियान चलाया था। इस अभियान के तहत ईरान के कई ठिकानों पर हमले किए गए थे। इन घटनाओं के चलते वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई थी और तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला था। हालांकि अब तनाव कम होने की उम्मीद से बाजार में राहत का माहौल बना है।

    सोमवार को कई साल के उच्च स्तर पर पहुंचा था तेल
    गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले यानी सोमवार को तेल की कीमतें कई वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंच गई थीं। उस समय Brent Crude की कीमत 119.50 डॉलर प्रति बैरल और West Texas Intermediate की कीमत 119.48 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, जो 2022 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर था। इसके बाद मंगलवार को बाजार में मुनाफावसूली और भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीद से कीमतों में तेज गिरावट आ गई।

    भारत में महंगाई पर असर सीमित रहने की उम्मीद
    इस बीच भारत की वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने सोमवार को संसद में कहा कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में हालिया वृद्धि का भारत की मुद्रास्फीति दर पर फिलहाल बड़ा असर नहीं पड़ेगा।

    उन्होंने बताया कि देश में महंगाई दर अभी “निम्नतम सीमा” के करीब बनी हुई है। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में 28 फरवरी 2026 को भू-राजनीतिक तनाव शुरू होने से पहले तक भारत द्वारा आयात किए जाने वाले कच्चे तेल की कीमतें लगभग एक साल से लगातार गिर रही थीं।