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  • जमीन सीमांकन के नाम पर 80 हजार की डील, लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई

    जमीन सीमांकन के नाम पर 80 हजार की डील, लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई


    मध्य प्रदेश । जबलपुर में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए लोकायुक्त पुलिस ने राजस्व विभाग के एक अधिकारी को रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया। मामला Jabalpur का है, जहां राजस्व निरीक्षक करण सिंह लोधी को 80 हजार रुपये लेते हुए गिरफ्तार किया गया।

    जानकारी के अनुसार, व्यापारी रोहित जैन ने अपने साथियों के साथ शहपुरा तहसील के ग्राम क्लोन में मटर प्लांट लगाने के लिए जमीन खरीदी थी। जमीन का नामांतरण पूरा हो चुका था, लेकिन सीमांकन की प्रक्रिया लंबित थी। इसी काम के लिए उन्होंने राजस्व निरीक्षक से संपर्क किया था।

    शिकायतकर्ता का आरोप है कि सभी दस्तावेज पूरे होने के बावजूद आरोपी ने सीमांकन के बदले पहले एक लाख रुपये की मांग की। पिछले करीब दो महीने से वह लगातार कार्यालय के चक्कर लगा रहा था, लेकिन हर बार किसी न किसी बहाने से काम टाल दिया जाता था।

    परेशान होकर व्यापारी ने लोकायुक्त एसपी से लिखित शिकायत की। शिकायत की जांच में रिश्वत मांगने की पुष्टि होने के बाद टीम ने ट्रैप की योजना बनाई। तय कार्यक्रम के अनुसार मंगलवार को आरोपी ने रतन कॉलोनी स्थित अपने घर के पास शिकायतकर्ता को पैसे लेकर बुलाया।

    जैसे ही व्यापारी ने उसे 80 हजार रुपये दिए और आरोपी ने रकम स्वीकार की, पहले से मौजूद लोकायुक्त टीम ने उसे मौके पर ही रंगे हाथ पकड़ लिया। कार्रवाई के बाद आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।

    लोकायुक्त अधिकारियों ने बताया कि आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है और मामले की विस्तृत जांच जारी है।

  • सागर में भ्रष्टाचार पर कार्रवाई: अनाज रिकॉर्ड दर्ज करने के बदले ली थी रिश्वत

    सागर में भ्रष्टाचार पर कार्रवाई: अनाज रिकॉर्ड दर्ज करने के बदले ली थी रिश्वत


    नई दिल्ली। उज्जैन की जीवनरेखा मानी जाने वाली शिप्रा नदी एक बार फिर अवैध निर्माणों और अतिक्रमणों को लेकर चर्चा में है। करोड़ों रुपए खर्च कर नदी के शुद्धिकरण और सौंदर्यीकरण के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन दूसरी ओर शिप्रा के दोनों किनारों पर ग्रीन बेल्ट और सिंहस्थ की संरक्षित जमीन पर तेजी से अवैध निर्माण खड़े हो रहे हैं। होटल, रिसॉर्ट, मठ, आश्रम, स्कूल और कॉलोनियों के रूप में फैल रहे इन निर्माणों पर अब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपना लिया है।

    मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उज्जैन नगर निगम को तलब किया है और स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शिप्रा नदी के 200 मीटर दायरे में हुए सभी अवैध निर्माणों की जानकारी प्रस्तुत की जाए। साथ ही यह भी बताया जाए कि इन्हें हटाने के लिए अब तक क्या कार्रवाई की गई है। कोर्ट ने नगर निगम को 15 जून तक विस्तृत जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।

    यह मामला वर्ष 2023 में उज्जैन निवासी सत्यनारायण सोमानी द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि शिप्रा नदी के किनारे बड़े पैमाने पर अवैध व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। नदी तट के आसपास बनाए गए होटल, रिसॉर्ट और अन्य निर्माणों से निकलने वाला सीवरेज सीधे शिप्रा में मिल रहा है, जिससे नदी का पानी लगातार प्रदूषित हो रहा है।

    सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि जिन क्षेत्रों को पर्यावरणीय और धार्मिक दृष्टि से संरक्षित माना गया है, वहां निर्माण गतिविधियां लगातार जारी हैं। हाईकोर्ट ने साफ कहा कि नदी तट के समीप किसी भी प्रकार के व्यावसायिक रिसॉर्ट या निर्माण को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    याचिकाकर्ता पक्ष के अधिवक्ता बलदीप सिंह गांधी ने कोर्ट को बताया कि नदी किनारे 100 से 200 मीटर की सीमा के भीतर 200 से अधिक अवैध निर्माण मौजूद हैं। इनमें कई ऐसे निर्माण भी हैं, जो बिना वैध अनुमति के संचालित हो रहे हैं और पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।

    कोर्ट ने नगर निगम को निर्देशित किया है कि 15 जून तक सभी अतिक्रमणों की सूची तैयार कर कार्रवाई शुरू की जाए। साथ ही तब तक इन अवैध निर्माणों में किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि संचालित नहीं होने देने के निर्देश भी दिए गए हैं। कोर्ट ने नदी निधि विकास योजना से संबंधित रिपोर्ट भी पेश करने को कहा है।

    अब इस मामले की अगली सुनवाई 15 जून को होगी। माना जा रहा है कि यदि नगर निगम संतोषजनक जवाब पेश नहीं कर पाया तो हाईकोर्ट और सख्त कदम उठा सकता है। शिप्रा नदी को बचाने और सिंहस्थ क्षेत्र की पवित्रता बनाए रखने को लेकर यह मामला अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है।

  • आजीविका मिशन में भ्रष्टाचार का खुलासा, मैनेजर ने मांगी 75% मानदेय की रकम

    आजीविका मिशन में भ्रष्टाचार का खुलासा, मैनेजर ने मांगी 75% मानदेय की रकम


    नर्मदापुरम  मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) से जुड़ा बड़ा घोटाला सामने आया है। यहां ब्लॉक मैनेजर पर महिला सखी से मानदेय के बदले 75% तक रिश्वत मांगने के गंभीर आरोप लगे हैं। प्रारंभिक जांच में शिकायत सही पाई गई है, जिससे विभाग में हड़कंप मच गया है।

    75% तक कमीशन मांगने का आरोप

    बनखेड़ी की एक महिला बैंक सखी ने आरोप लगाया कि ब्लॉक मैनेजर दुर्गेश अहिरवार ने उसके मानदेय भुगतान के बदले 75 फीसदी रकम मांगी। इतना ही नहीं, पैसे नहीं देने पर उसे काम से हटाने की धमकी भी दी गई।

     जांच में मिले सबूत

    शिकायत के बाद मामले की जांच के लिए जिला पंचायत सीईओ हिमांशु जैन ने दो सदस्यीय टीम गठित की। जांच में प्राथमिक तौर पर रिश्वत मांगने के साक्ष्य मिले हैं। रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी गई है और जल्द कार्रवाई की बात कही जा रही है।

    एक हफ्ते में दूसरा मामला

    यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले केसला में लोकायुक्त पुलिस ने 20 हजार रुपए की रिश्वत लेते तीन लोगों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।

    इस कार्रवाई में:

    सहायक विकासखंड प्रबंधक धर्मेंद्र गुप्ता
    क्लस्टर मैनेजर
    चपरासी
    को गिरफ्तार किया गया था।

    ऐसे बिछाया गया जाल

    ग्राम पाण्डुखेड़ी की महिला सुनैया बरकड़े से 25 हजार रुपए की मांग की गई थी, जो बाद में 20 हजार में तय हुई। महिला ने लोकायुक्त में शिकायत की, जिसके बाद टीम ने ट्रैप लगाकर तीनों को रिश्वत लेते पकड़ लिया।

    पूरे सिस्टम पर उठे सवाल

    लगातार सामने आ रहे मामलों से यह साफ है कि जिले में आजीविका मिशन के तहत मानदेय भुगतान प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं। शक जताया जा रहा है कि कहीं फर्जी बिल बनाकर भी भुगतान तो नहीं किया जा रहा।

    प्रशासन सख्त

    सीईओ हिमांशु जैन ने साफ कहा है कि अगर और अधिकारियों की संलिप्तता सामने आती है, तो नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।