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  • 18 हजार से ज्यादा जगहों पर फिटनेस का संदेश: BRICS Friendship Sunday on Cycle में शामिल हुए खेल मंत्री मांडविया

    18 हजार से ज्यादा जगहों पर फिटनेस का संदेश: BRICS Friendship Sunday on Cycle में शामिल हुए खेल मंत्री मांडविया

    नई दिल्ली।  विशाखापत्तनम में रविवार को फिटनेस और भारत की वैश्विक खेल पहल का अनोखा संगम देखने को मिला। भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत आयोजित बैठकों के बीच केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने BRICS Friendship Sunday on Cycle कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस खास आयोजन के जरिए फिटनेस के साथ पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में साइकिल चलाकर लोगों को नियमित व्यायाम के लिए प्रेरित किया गया। मांडविया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फिट इंडिया अभियान को देशभर में लगातार मजबूती मिल रही है और रविवार को आयोजित होने वाला यह साइकिलिंग अभियान युवाओं के बीच फिटनेस को जन आंदोलन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

    कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में मांडविया ने कहा कि विशाखापत्तनम में ब्रिक्स सम्मेलन के अवसर पर आयोजित BRICS Friendship Sunday on Cycle का यह संस्करण विशेष महत्व रखता है। उन्होंने बताया कि देशभर में 18000 से अधिक स्थानों पर Sunday on Cycle कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन आयोजनों के जरिए युवाओं और आम लोगों को नियमित शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रेरित किया जा रहा है। उनका कहना था कि साइकिल चलाना स्वास्थ्य के लिए बेहद प्रभावी व्यायाम है और इसे रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाया जा सकता है।

    मांडविया ने साइकिलिंग को केवल फिटनेस से जोड़कर नहीं देखा बल्कि इसे पर्यावरण संरक्षण और ईंधन बचत से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि साइकिल चलाने से शरीर स्वस्थ रहता है और प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलती है। इससे ईंधन की बचत होती है और पर्यावरण को सुरक्षित रखने में योगदान मिलता है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए देश के नागरिकों का स्वस्थ और फिट रहना जरूरी है। स्वस्थ व्यक्ति से स्वस्थ समाज बनता है और स्वस्थ समाज ही मजबूत और फिट राष्ट्र की नींव तैयार करता है।

    दरअसल भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और इसी के तहत 22 और 23 अगस्त को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में ब्रिक्स युवा मंत्रियों और खेल मंत्रियों की बैठकों का आयोजन किया जा रहा है। इन बैठकों में ब्रिक्स के सभी 11 सदस्य देशों के मंत्री और प्रतिनिधिमंडल हिस्सा ले रहे हैं। बैठकों का मुख्य उद्देश्य युवा मामलों और खेल के क्षेत्र में सदस्य देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करना है।

    केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया इन बैठकों की अध्यक्षता कर रहे हैं। युवा मामले और खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे भी इन महत्वपूर्ण बैठकों में शामिल हैं। 23 अगस्त को होने वाली ब्रिक्स खेल मंत्रियों की बैठक में सदस्य देशों के खेल मंत्री और प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख हिस्सा ले रहे हैं। इस दौरान खेलों के माध्यम से सहयोग बढ़ाने और सदस्य देशों के बीच साझेदारी को मजबूत करने पर चर्चा की जा रही है।

    भारत की 2026 ब्रिक्स अध्यक्षता का विषय लचीलेपन नवाचार सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण रखा गया है। इस थीम में लोगों को केंद्र में रखते हुए मानवता को प्राथमिकता देने की सोच दिखाई देती है। ऐसे में BRICS Friendship Sunday on Cycle जैसे कार्यक्रम भारत की फिटनेस और स्वस्थ जीवनशैली की पहल को अंतरराष्ट्रीय मंच से जोड़ने का माध्यम भी बन रहे हैं। इससे फिट इंडिया अभियान को नई ऊर्जा मिलने के साथ युवाओं को खेल और शारीरिक गतिविधियों से जोड़ने की कोशिश को भी मजबूती मिलती है।

  • ऊर्जा सुरक्षा पर भारत का बड़ा विजन BRICS 2026 की अध्यक्षता में ग्लोबल साउथ को नई दिशा देगा भारत पीएम मोदी का ऐलान

    ऊर्जा सुरक्षा पर भारत का बड़ा विजन BRICS 2026 की अध्यक्षता में ग्लोबल साउथ को नई दिशा देगा भारत पीएम मोदी का ऐलान


    नई दिल्ली । नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता संभालने के दौरान भारत की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाना और ग्लोबल साउथ के देशों को वैश्विक ऊर्जा व्यवस्था के केंद्र में स्थापित करना शामिल होगा। उनका कहना है कि तेजी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों में केवल घरेलू नीतियां ही पर्याप्त नहीं हैं बल्कि मजबूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग और साझा प्रयासों के माध्यम से ही सुरक्षित विश्वसनीय और टिकाऊ ऊर्जा व्यवस्था का निर्माण किया जा सकता है। भारत इसी सोच के साथ आगे बढ़ रहा है और आने वाले समय में ब्रिक्स मंच के जरिए विकासशील देशों की आवाज को और अधिक मजबूती देने का प्रयास करेगा।

    प्रधानमंत्री ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर के विचारों का समर्थन करते हुए कहा कि भारत का लक्ष्य ऐसी वैश्विक ऊर्जा व्यवस्था तैयार करना है जो सभी देशों के लिए समान अवसर उपलब्ध कराए और ऊर्जा सुरक्षा के साथ आर्थिक विकास तथा पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करे। उनका मानना है कि ग्लोबल साउथ के देशों के सामने ऊर्जा उपलब्धता स्वच्छ तकनीक और वित्तीय संसाधनों जैसी कई चुनौतियां हैं जिनका समाधान सामूहिक सहयोग से ही संभव है।

    मनोहर लाल खट्टर ने भी अपने विचारों में कहा कि दुनिया का ऊर्जा क्षेत्र तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रहा है। ऐसे समय में विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को नई तकनीकों नवाचार और मजबूत साझेदारी की सबसे अधिक आवश्यकता है। भारत ब्रिक्स की अध्यक्षता के दौरान इसी दिशा में ठोस पहल करेगा ताकि स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को गति मिले और सदस्य देशों के बीच तकनीकी सहयोग तथा निवेश को बढ़ावा मिल सके।

    उन्होंने बताया कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। देश ने गैर जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन क्षमता में तेजी से वृद्धि की है और राष्ट्रीय लक्ष्य से पहले ही कुल स्थापित बिजली क्षमता का आधे से अधिक हिस्सा स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों से प्राप्त करने में सफलता हासिल की है। यह उपलब्धि भारत की ऊर्जा नीति और हरित विकास के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

    भारत ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए ग्रीन हाइड्रोजन कोयला गैसीकरण इलेक्ट्रिक मोबिलिटी आधुनिक ट्रांसमिशन नेटवर्क और डिजिटल तकनीकों पर लगातार निवेश कर रहा है। स्मार्ट मीटर और इंडिया एनर्जी स्टैक जैसी पहल बिजली क्षेत्र को अधिक पारदर्शी सक्षम और आधुनिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। सरकार का मानना है कि भविष्य की ऊर्जा व्यवस्था डिजिटल तकनीक और स्वच्छ संसाधनों के बेहतर समन्वय पर आधारित होगी।

    प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर भी जोर दिया कि ब्रिक्स देशों की अलग अलग क्षमताएं एक दूसरे की ताकत बन सकती हैं। यदि सदस्य देश मिलकर अनुसंधान तकनीक निवेश और ऊर्जा अवसंरचना के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाते हैं तो न केवल ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी बल्कि जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों का भी प्रभावी समाधान निकाला जा सकेगा। भारत इसी साझा सोच को आगे बढ़ाते हुए ब्रिक्स 2026 के दौरान ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएगा।

  • कारोबारों को मजबूत बनाने पर जोर, वैश्विक व्यापार में बढ़ेगा भारत का असर..

    कारोबारों को मजबूत बनाने पर जोर, वैश्विक व्यापार में बढ़ेगा भारत का असर..

    नई दिल्ली । 2026 में ब्रिक्स समूह की अध्यक्षता संभालने की तैयारी के साथ भारत एक ऐसी रणनीति पर काम कर रहा है, जिसका सीधा असर छोटे और मध्यम उद्योगों पर देखने को मिलेगा। इस पूरी पहल का केंद्र MSME sector है, जिसे देश की आर्थिक रीढ़ माना जाता है। भारत का लक्ष्य है कि इस सेक्टर को सिर्फ घरेलू स्तर पर नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर भी मजबूत पहचान दिलाई जाए।

    इस योजना के तहत भारत ब्रिक्स के ढांचे में एमएसएमई सहयोग को एक नए स्तर पर ले जाने की तैयारी कर रहा है। इसमें खासतौर पर वित्तीय पहुंच को आसान बनाना, तकनीकी सहयोग बढ़ाना और छोटे कारोबारों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने जैसे कदम शामिल हैं। माना जा रहा है कि इससे छोटे उद्योगों को नई संभावनाएं मिलेंगी और वे वैश्विक सप्लाई चेन का हिस्सा बन सकेंगे।

    भारत की अध्यक्षता के दौरान कई महत्वपूर्ण बैठकों और एक बड़े एमएसएमई फोरम का आयोजन किया जाएगा। इन बैठकों का मुख्य फोकस छोटे उद्योगों की सबसे बड़ी समस्या यानी वित्तीय संसाधनों की कमी को दूर करना होगा। इसमें यह समझने की कोशिश की गई है कि कैसे आसान ऋण व्यवस्था, डिजिटल बैंकिंग और फिनटेक समाधान के जरिए छोटे व्यवसायों को मजबूती दी जा सकती है।

    चर्चाओं में यह बात भी सामने आई है कि छोटे और मध्यम उद्योग न केवल रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, बल्कि नवाचार और आर्थिक विकास को भी गति देते हैं। इसके बावजूद इन उद्योगों को अक्सर पर्याप्त वित्त और तकनीकी सहायता नहीं मिल पाती, जिससे उनकी ग्रोथ प्रभावित होती है। इसी अंतर को कम करने के लिए बहु-स्तरीय रणनीति तैयार की जा रही है।

    भारत इस दिशा में ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने पर भी जोर दे रहा है। इसका उद्देश्य है कि सभी सदस्य देश अपने अनुभव और नीतिगत मॉडल साझा करें, जिससे एक ऐसा इकोसिस्टम बन सके जो छोटे व्यवसायों के लिए अनुकूल हो और उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिले।

    इसके अलावा, डिजिटल भुगतान प्रणाली, वित्तीय साक्षरता और क्रेडिट क्षमता बढ़ाने जैसे पहलुओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि इन प्रयासों से छोटे कारोबारों को न केवल घरेलू बाजार में मजबूती मिलेगी, बल्कि वे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भी बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।

    भारत पहले ही कुछ देशों के साथ साझेदारी कर चुका है, जिसका उद्देश्य एमएसएमई क्षेत्र में निवेश और व्यापार को बढ़ावा देना है। यह रणनीति भारत को वैश्विक आर्थिक मंच पर और मजबूत स्थिति में लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

    कुल मिलाकर यह पूरी योजना छोटे उद्योगों को नई पहचान देने और उन्हें वैश्विक विकास की मुख्य धारा से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है, जिससे आने वाले वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है।