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  • BRICS कृषि एजेंडे में ब्राजील सबसे आगे, 88% वादों पर अमल; भारत 85% के साथ दूसरे स्थान पर

    BRICS कृषि एजेंडे में ब्राजील सबसे आगे, 88% वादों पर अमल; भारत 85% के साथ दूसरे स्थान पर


    मध्यप्रदेश । इंदौर में संपन्न हुई BRICS कृषि मंत्रियों की बैठक के बाद जारी इंदौर घोषणा-पत्र और विभिन्न सार्वजनिक रिपोर्टों के विश्लेषण से यह स्पष्ट हुआ है कि कृषि क्षेत्र में किए गए वादों और संकल्पों को लागू करने की गति सभी सदस्य देशों में समान नहीं रही। खाद्य सुरक्षा, डिजिटल कृषि, महिला सशक्तिकरण, भूमि पुनरुद्धार और कृषि व्यापार जैसे प्रमुख मुद्दों पर बीते पांच वर्षों में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए, लेकिन उनके क्रियान्वयन में देशों के बीच उल्लेखनीय अंतर देखने को मिला।

    विश्लेषण के अनुसार कृषि प्रतिबद्धताओं को लागू करने के मामले में Brazil सबसे आगे रहा। रिपोर्ट में ब्राजील का अमल स्तर 88 प्रतिशत बताया गया है। ब्राजील ने भूमि पुनरुद्धार साझेदारी, पारिवारिक खेती को बढ़ावा देने और नए कृषि एक्शन प्लान को आगे बढ़ाने में अग्रणी भूमिका निभाई। कृषि सुधारों और सतत विकास आधारित योजनाओं को लागू करने में उसकी सक्रियता अन्य सदस्य देशों की तुलना में अधिक रही।

    दूसरे स्थान पर India रहा, जहां कृषि क्षेत्र में 85 प्रतिशत प्रतिबद्धताओं पर अमल का दावा किया गया है। भारत में डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन, ड्रोन तकनीक का उपयोग, जलवायु अनुकूल गांवों का विकास, कृषि डिजिटलीकरण और महिला आर्थिक सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं को BRICS एजेंडे के अनुरूप माना गया। “लखपति दीदी” जैसी पहल और तकनीक आधारित खेती के प्रयासों ने भारत की स्थिति को मजबूत किया, हालांकि कुछ क्षेत्रों में प्रगति अपेक्षाकृत धीमी बताई गई है।

    तीसरे स्थान पर China रहा, जिसने खाद्य सुरक्षा, कृषि अनुसंधान और डिजिटल कृषि के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। खाद्य सुरक्षा सहयोग रणनीति और तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा देने में चीन की भूमिका प्रमुख रही। वहीं Russia 80 प्रतिशत अमल के साथ चौथे स्थान पर रहा। रूस ने BRICS ग्रेन एक्सचेंज और राष्ट्रीय मुद्राओं में कृषि व्यापार को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की, हालांकि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण कुछ सहयोगी कार्यक्रम प्रभावित हुए।

    रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि South Africa और BRICS के नए सदस्य देशों की प्रगति अपेक्षाकृत धीमी रही। दक्षिण अफ्रीका का अमल स्तर 65 प्रतिशत आंका गया, जबकि नए सदस्य देशों का औसत प्रदर्शन 45 प्रतिशत के आसपास रहा। नए सदस्य देशों में United Arab Emirates, Egypt, Iran, Ethiopia, Saudi Arabia और Indonesia शामिल हैं। इनके लिए वर्ष 2024 और 2025 की कृषि प्रतिबद्धताओं को आधार बनाकर आकलन किया गया।

    पिछले पांच वर्षों के दौरान BRICS देशों ने कई महत्वपूर्ण कृषि निर्णय लिए। वर्ष 2021 में भारत की अध्यक्षता के दौरान खाद्य सुरक्षा, कृषि उत्पादकता और छोटे किसानों को सशक्त बनाने पर केंद्रित एक्शन प्लान को मंजूरी दी गई। 2022 में चीन की मेजबानी में खाद्य सुरक्षा सहयोग रणनीति और “डेक्कन प्रिंसिपल्स ऑन फूड सिक्योरिटी” को अपनाया गया। 2023 में दक्षिण अफ्रीका ने ग्रामीण विकास और जलवायु अनुकूल कृषि को प्राथमिकता दी। 2024 में रूस ने ग्रेन एक्सचेंज और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार का प्रस्ताव रखा, जबकि 2025 में ब्राजील ने भूमि पुनरुद्धार साझेदारी और डिजिटल प्रमाणन जैसे नए प्रस्तावों को आगे बढ़ाया।

    हालांकि रिपोर्ट में BRICS की एक प्रमुख कमजोरी भी उजागर हुई है। संगठन का ढांचा पूरी तरह स्वैच्छिक है और सदस्य देशों के लिए किसी भी निर्णय को लागू करना कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। इसके अलावा प्रगति की निगरानी के लिए कोई स्वतंत्र तंत्र भी मौजूद नहीं है। अधिकांश मूल्यांकन सदस्य देशों की स्वयं प्रस्तुत रिपोर्टों, संयुक्त घोषणाओं और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर किए जाते हैं। यही कारण है कि कई बार घोषित लक्ष्यों और वास्तविक क्रियान्वयन के बीच अंतर देखने को मिलता है।

  • इंदौर में BRICS कृषि मंत्रियों का महामंथन आज, खाद्य सुरक्षा और जलवायु अनुकूल खेती पर बनेगी साझा रणनीति

    इंदौर में BRICS कृषि मंत्रियों का महामंथन आज, खाद्य सुरक्षा और जलवायु अनुकूल खेती पर बनेगी साझा रणनीति


    मध्‍य प्रदेश । मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर इन दिनों अंतरराष्ट्रीय कृषि कूटनीति का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है। 9 से 13 जून तक आयोजित BRICS कृषि सम्मेलन के अंतिम दिन शनिवार को सदस्य देशों के कृषि मंत्रियों की अहम बैठक आयोजित की जा रही है। इस बैठक में कृषि क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और टिकाऊ कृषि प्रणाली विकसित करने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर व्यापक विचार-विमर्श होगा।

    सम्मेलन के समापन दिवस से पहले शहर के मेघदूत उपवन में विकसित विशेष “ब्रिक्स वाटिका” में विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधियों और अतिथियों ने फलदार पौधों का रोपण किया। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan, केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री Bhagirath Choudhary, मध्य प्रदेश के जल संसाधन मंत्री Tulsi Silawat, इंदौर के महापौर Pushyamitra Bhargav तथा विधायक Ramesh Mendola सहित कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।

    ब्रिक्स वाटिका को अंतरराष्ट्रीय सहयोग, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रतीक के रूप में विकसित किया गया है। यहां कुल 51 फलदार पौधे लगाए जाने की योजना बनाई गई है। उद्यान विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह वाटिका आने वाले वर्षों में BRICS देशों की साझेदारी और हरित विकास के संकल्प का प्रतीक बनेगी। इससे पहले इंदौर में आयोजित प्रवासी भारतीय सम्मेलन के दौरान ग्लोबल गार्डन और यूरेशियन सम्मेलन के दौरान यूरेशिया गार्डन भी विकसित किए गए थे।

    मेघदूत उपवन को BRICS सम्मेलन के अनुरूप विशेष रूप से सजाया गया है। परिसर में “BRICS INDIA” थीम आधारित आकर्षक आइलैंड, गुलाब उद्यान, संगीतमय फाउंटेन, कमल थीम आधारित सजावट और आधुनिक लैंडस्केपिंग तैयार की गई है। साथ ही BRICS सदस्य देशों के राष्ट्रीय ध्वज भी लगाए गए हैं, जो अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सांस्कृतिक विविधता की झलक प्रस्तुत कर रहे हैं।

    सम्मेलन के अंतिम दिन होने वाली कृषि मंत्रियों की बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसमें सदस्य देशों के प्रतिनिधि कृषि क्षेत्र में भविष्य की चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा करेंगे। विशेष रूप से खाद्य सुरक्षा, पोषण और किसानों की आजीविका को मजबूत बनाने के उपायों पर विचार किया जाएगा। इसके अलावा कृषि व्यापार को बढ़ावा देने, सदस्य देशों के बीच तकनीकी सहयोग बढ़ाने और कृषि उत्पादकता सुधारने पर भी चर्चा होगी।

    बैठक का एक महत्वपूर्ण विषय जलवायु परिवर्तन के अनुरूप कृषि व्यवस्था को अधिक टिकाऊ और लचीला बनाना रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते तापमान, अनियमित वर्षा और प्राकृतिक आपदाओं के बीच कृषि क्षेत्र को नई तकनीकों और वैज्ञानिक नवाचारों की आवश्यकता है। इसी दिशा में BRICS देश साझा अनुसंधान, तकनीकी साझेदारी और नवाचार आधारित कृषि मॉडल पर विचार करेंगे।

    शनिवार को सुबह 10 बजे से कृषि मंत्रियों की बैठक शुरू होगी। इसके बाद विभिन्न द्विपक्षीय बैठकों का दौर चलेगा। सम्मेलन के समापन पर सदस्य देशों की सहमति से एक साझा दस्तावेज तैयार किया जाएगा, जिसमें कृषि विकास, खाद्य सुरक्षा, जलवायु अनुकूल खेती और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े प्रमुख बिंदुओं को शामिल किया जाएगा।

    विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक खाद्य संकट, जलवायु परिवर्तन और कृषि क्षेत्र की नई चुनौतियों के बीच इंदौर में आयोजित यह BRICS सम्मेलन भविष्य की कृषि नीतियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण मंच साबित हो सकता है।