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  • ब्रिक्स सम्मेलन में दिखेगा मध्य प्रदेश का सांस्कृतिक वैभव: 125 कलाकार देंगे ‘अमृतस्य मध्य प्रदेश’ की भव्य प्रस्तुति

    ब्रिक्स सम्मेलन में दिखेगा मध्य प्रदेश का सांस्कृतिक वैभव: 125 कलाकार देंगे ‘अमृतस्य मध्य प्रदेश’ की भव्य प्रस्तुति


    भोपाल भोपाल में चल रहा ब्रिक्स सांस्कृतिक सम्मेलन 2026 अब अपने तीसरे दिन में प्रवेश कर चुका है और शुक्रवार को राजधानी में संस्कृति और कला का अंतरराष्ट्रीय संगम देखने को मिलेगा। ब्रिक्स सदस्य और भागीदार देशों के संस्कृति मंत्री भोपाल पहुंच रहे हैं जहां उनका पारंपरिक अंदाज में स्वागत किया जा रहा है। सम्मेलन के तीसरे दिन का सबसे बड़ा आकर्षण शाम को आयोजित होने वाला ब्रिक्स सांस्कृतिक महोत्सव 2026 होगा। इस विशेष आयोजन में भारत के साथ ब्रिक्स सदस्य और भागीदार देशों के प्रख्यात संगीतकार और कलाकार एक मंच पर नजर आएंगे। कार्यक्रम की शुरुआत सर्वे भवन्तु सुखिनः के मंगल आह्वान से होगी जिसके बाद कलर्स ऑफ इंडियन म्यूजिक के जरिए हिंदुस्तानी और कर्नाटक शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा को प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद ब्रिक्स पीस सॉन्ग पीस इज द लैंग्वेज ऑफ द लैंड के जरिए अलग अलग देशों की संगीत परंपराओं को एक सूत्र में पिरोया जाएगा।

    इस सांस्कृतिक महोत्सव में बेलारूस ब्राजील चीन मिस्र इथियोपिया इंडोनेशिया ईरान रूस सऊदी अरब दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात की संगीत विरासत की झलक देखने को मिलेगी। आर्केस्ट्रा की प्रस्तुतियों में पीस टू ऑल हार्मनी टू ऑल और क्रेस्केंडो ऑफ यूनिटी जैसे कार्यक्रम विशेष आकर्षण होंगे। इन प्रस्तुतियों का उद्देश्य अलग अलग संस्कृतियों को संगीत के माध्यम से एक दूसरे से जोड़ना और शांति तथा आपसी सहयोग का संदेश देना है। कार्यक्रम कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर मिंटो हॉल में आयोजित किया जाएगा जहां अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के साथ कला प्रेमियों को भी भारतीय और वैश्विक सांस्कृतिक विविधता का अनुभव मिलेगा।

    शाम के कार्यक्रम का एक और बड़ा आकर्षण मध्य प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग की विशेष प्रस्तुति अमृतस्य मध्य प्रदेश एक अलौकिक सांस्कृतिक महायात्रा होगी। प्रसिद्ध कोरियोग्राफर मैत्रेयी पहाड़ी के निर्देशन में 125 से अधिक कलाकार मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक आध्यात्मिक और लोक परंपराओं को नृत्य और संगीत के माध्यम से मंच पर जीवंत करेंगे। प्रस्तुति की शुरुआत ॐ की अनादि ध्वनि से होगी और इसके जरिए भीमबेटका सांची और खजुराहो जैसे विश्व धरोहर स्थलों से लेकर चित्रकूट के राम पथ गमन और उज्जैन के संदीपनि आश्रम की कृष्ण लीला तक की सांस्कृतिक यात्रा कराई जाएगी। ग्वालियर ओरछा और मांडू के ऐतिहासिक किलों की गाथा के साथ महेश्वरी और चंदेरी के वस्त्र शिल्प तथा बैगा मटकी और बधाई जैसे लोक नृत्यों को भी प्रस्तुति में शामिल किया गया है।

    भोपाल की झीलों उज्जैन के बाबा महाकाल ओंकारेश्वर के अध्यात्म और मां नर्मदा की महाआरती के जरिए मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को विदेशी मेहमानों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। इसी प्रस्तुति के माध्यम से अतिथियों को सिंहस्थ कुंभ 2028 का आध्यात्मिक निमंत्रण भी दिया जाएगा। कार्यक्रम के बाद मध्य प्रदेश सरकार की ओर से रात्रिभोज का आयोजन होगा जिसमें मेहमानों को प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद भी चखाया जाएगा। लंच और डिनर के मेन्यू में दाल बाफले निमोना रिकमच गुइया की सब्जी चंबल का थोपा चंदिया बड़ा तथा कोदो और कुटकी जैसे मिलेट आधारित व्यंजन शामिल किए गए हैं। अंतरराष्ट्रीय मेहमानों की पसंद को ध्यान में रखते हुए पश्चिमी और ओरिएंटल व्यंजन भी परोसे जाएंगे।

    8 अगस्त को भारत की अध्यक्षता में तीसरी ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक होगी जिसमें सांस्कृतिक विरासत संग्रहालय रचनात्मक अर्थव्यवस्था सांस्कृतिक आदान प्रदान क्षमता निर्माण और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। बैठक के अंत में ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की घोषणा को अपनाया जाएगा जो भविष्य में सांस्कृतिक सहयोग के लिए साझा रोडमैप तैयार करेगी। इसके बाद विदेशी प्रतिनिधिमंडल सांची जाएगा जहां वे सांची स्तूप और बौद्ध विरासत का अवलोकन करेंगे। चेतियागिरी मंदिर में दर्शन के साथ योग और ध्यान सत्र भी होगा तथा शाम को 3D प्रोजेक्शन मैपिंग और लाइट एंड साउंड शो के जरिए बौद्ध इतिहास और कला को प्रदर्शित किया जाएगा। 9 अगस्त को इच्छुक विदेशी प्रतिनिधियों के लिए भीमबेटका शैलाश्रय के भ्रमण की व्यवस्था की गई है। इस तरह भोपाल में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन केवल कूटनीतिक संवाद का मंच नहीं बल्कि भारत और विशेष रूप से मध्य प्रदेश की समृद्ध संस्कृति को दुनिया के सामने रखने का बड़ा अवसर बन गया है।

  • BRICS सम्मेलन में दिखेगी मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, 125 कलाकार देंगे गौरवगाथा की शानदार प्रस्तुति

    BRICS सम्मेलन में दिखेगी मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, 125 कलाकार देंगे गौरवगाथा की शानदार प्रस्तुति


    भोपाल भोपाल में आयोजित हो रहा BRICS सांस्कृतिक सम्मेलन 2026 अब अपने महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच गया है। सम्मेलन के तीसरे दिन शुक्रवार को BRICS सदस्य और भागीदार देशों के संस्कृति मंत्रियों का भोपाल आगमन होगा। इस दौरान राजधानी में संस्कृति और कला का ऐसा संगम देखने को मिलेगा जिसमें भारत के साथ विभिन्न BRICS देशों की संगीत परंपराएं एक ही मंच पर नजर आएंगी। शाम को कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर मिंटो हॉल में BRICS सांस्कृतिक महोत्सव 2026 का भव्य आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम विभिन्न देशों के कलाकारों और संगीतकारों को एक साझा मंच पर लाकर सांस्कृतिक सहयोग और आपसी जुड़ाव का संदेश देगा।

    कार्यक्रम की शुरुआत सर्वे भवन्तु सुखिनः के मंगल आह्वान से होगी। इसके बाद कलर्स ऑफ इंडियन म्यूजिक के माध्यम से हिंदुस्तानी और कर्नाटक शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा प्रस्तुत की जाएगी। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण BRICS पीस सॉन्ग पीस इज द लैंग्वेज ऑफ द लैंड रहेगा। इसके जरिए विभिन्न BRICS देशों की संगीत विरासत और शांति के साझा संदेश को सुरों के माध्यम से सामने रखा जाएगा। बेलारूस ब्राजील चीन मिस्र इथियोपिया इंडोनेशिया ईरान रूस सऊदी अरब दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात की संगीत परंपराओं को भी इस आयोजन में स्थान मिलेगा। पीस टू ऑल हार्मनी टू ऑल और क्रेस्केंडो ऑफ यूनिटी जैसी आर्केस्ट्रा प्रस्तुतियां कार्यक्रम को और खास बनाएंगी।

    शाम का दूसरा बड़ा आकर्षण मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को समर्पित अमृतस्य मध्य प्रदेश एक अलौकिक सांस्कृतिक महायात्रा होगी। प्रसिद्ध कोरियोग्राफर मैत्रेयी पहाड़ी के निर्देशन में 125 से अधिक कलाकार इस भव्य प्रस्तुति के जरिए प्रदेश की ऐतिहासिक आध्यात्मिक और लोक परंपराओं को मंच पर जीवंत करेंगे। प्रस्तुति की शुरुआत ॐ की अनादि ध्वनि से होगी और इसके बाद भीमबेटका सांची और खजुराहो की विश्व धरोहर से लेकर चित्रकूट के राम पथ गमन और उज्जैन की कृष्ण लीला तक मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक यात्रा दिखाई जाएगी।

    ग्वालियर ओरछा और मांडू के ऐतिहासिक किलों की गाथा के साथ महेश्वरी और चंदेरी के प्रसिद्ध वस्त्र शिल्प तथा बैगा मटकी और बधाई जैसे लोक नृत्यों की झलक भी देखने को मिलेगी। भोपाल की झीलों उज्जैन के बाबा महाकाल ओंकारेश्वर और मां नर्मदा की महाआरती के जरिए प्रदेश की आध्यात्मिक विरासत को भी प्रस्तुत किया जाएगा। इसी दौरान अतिथियों को सिंहस्थ कुंभ 2028 के लिए सांस्कृतिक और आध्यात्मिक निमंत्रण भी दिया जाएगा। कार्यक्रम के बाद मध्य प्रदेश सरकार की ओर से रात्रिभोज का आयोजन होगा जिसमें मेहमानों को प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद भी मिलेगा।

    8 अगस्त को भारत की अध्यक्षता में तीसरी BRICS संस्कृति मंत्रियों की बैठक आयोजित होगी। इसमें सांस्कृतिक विरासत संग्रहालय रचनात्मक अर्थव्यवस्था सांस्कृतिक आदान प्रदान क्षमता निर्माण और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे विषयों पर चर्चा होगी। बैठक के अंत में BRICS संस्कृति मंत्रियों की घोषणा अपनाई जाएगी जिसमें भविष्य के सांस्कृतिक सहयोग का रोडमैप तय होगा।

    इसके बाद विदेशी प्रतिनिधिमंडल सांची पहुंचेगा जहां विश्व प्रसिद्ध सांची स्तूप और बौद्ध विरासत का अवलोकन किया जाएगा। प्रतिनिधियों के लिए चेतियागिरी मंदिर दर्शन योग और ध्यान सत्र के साथ 3D प्रोजेक्शन मैपिंग और लाइट एंड साउंड शो भी आयोजित किया जाएगा। 9 अगस्त को इच्छुक विदेशी प्रतिनिधियों के लिए भीमबेटका शैलाश्रय का वैकल्पिक भ्रमण रखा गया है। इस तरह भोपाल का BRICS सम्मेलन केवल बैठकों तक सीमित न रहकर भारत और मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का बड़ा अवसर बन रहा है।

  • भोपाल में गूंजेगी BRICS देशों की सांस्कृतिक एकता, आज घोषणा पत्र से लेकर भव्य महोत्सव तक कई अहम आयोजन

    भोपाल में गूंजेगी BRICS देशों की सांस्कृतिक एकता, आज घोषणा पत्र से लेकर भव्य महोत्सव तक कई अहम आयोजन


    भोपाल भोपाल में आयोजित BRICS सांस्कृतिक सम्मेलन 2026 के दूसरे दिन गुरुवार को सांस्कृतिक सहयोग को नई दिशा देने वाले कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। 8 अगस्त तक चलने वाले इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में BRICS सदस्य और भागीदार देशों के प्रतिनिधि सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संग्रहालयों के विकास, रचनात्मक उद्योगों, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण और लोगों के बीच आपसी जुड़ाव को मजबूत बनाने जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा करेंगे। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग को नई मजबूती देना और साझा विरासत के संरक्षण के लिए दीर्घकालिक रणनीति तैयार करना है।

    दूसरे दिन कार्य समूहों की ओर से तैयार की गई सिफारिशों पर विचार किया जाएगा, जो आगामी मंत्रिस्तरीय बैठक में संस्कृति मंत्रियों के लिए आधार तैयार करेंगी। इन चर्चाओं के जरिए BRICS देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में साझा सहमति विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।

    सम्मेलन के दौरान कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर परिसर में तीन विशेष प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। इनमें ज्ञान भारतम, प्रोजेक्ट मौसम और प्रोजेक्ट बृहत्तर भारत शामिल हैं। इन प्रदर्शनों के माध्यम से भारत की समृद्ध पांडुलिपि परंपरा, समुद्री सांस्कृतिक संपर्क, प्राचीन सभ्यताओं के बीच संबंध और सांस्कृतिक कूटनीति की विभिन्न पहलुओं को दर्शाया गया है। इन प्रदर्शनियों को आम लोगों के लिए भी खोला गया है ताकि नागरिक भी भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को करीब से देख सकें।

    सम्मेलन में शामिल विदेशी प्रतिनिधियों के लिए मध्य प्रदेश की पारंपरिक मेहमाननवाजी भी विशेष आकर्षण बनी हुई है। दोपहर और रात्रिभोज में दाल-बाफले, निमोना, रिकमच, गुइया की सब्जी, चंबल का थोपा, चंदिया, बड़ा तथा कोदो-कुटकी जैसे मिलेट आधारित पारंपरिक व्यंजन परोसे जा रहे हैं। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय मेहमानों की पसंद को ध्यान में रखते हुए पश्चिमी और ओरिएंटल व्यंजनों की भी विशेष व्यवस्था की गई है।

    शाम को रविंद्र भवन में आयोजित होने वाला BRICS सांस्कृतिक महोत्सव सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण रहेगा। इसमें सदस्य और भागीदार देशों के कलाकार अपनी पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे। भारतीय शास्त्रीय संगीत, लोककलाओं और विभिन्न देशों की सांस्कृतिक झलकियों से सजा यह कार्यक्रम सांस्कृतिक एकता और वैश्विक सद्भाव का संदेश देगा।

    7 अगस्त को BRICS देशों के संस्कृति मंत्री औपचारिक रूप से सम्मेलन में शामिल होंगे। इस अवसर पर आयोजित विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम में सर्वे भवन्तु सुखिनः की मंगल कामना के साथ भारतीय संगीत की विविध परंपराओं का प्रदर्शन होगा। साथ ही BRICS पीस सॉन्ग के जरिए सदस्य देशों की सांस्कृतिक विविधता और एकता को संगीत के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। इसके अलावा मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग की भव्य प्रस्तुति अमृतस्य मध्य प्रदेश में भीमबेटका, सांची, खजुराहो, उज्जैन, ओंकारेश्वर, नर्मदा और प्रदेश की समृद्ध लोक संस्कृति को नृत्य और संगीत के जरिए जीवंत किया जाएगा।

    8 अगस्त को भारत की अध्यक्षता में तीसरी BRICS संस्कृति मंत्रियों की बैठक आयोजित होगी, जिसमें सांस्कृतिक सहयोग को लेकर साझा घोषणा पत्र को अंतिम रूप दिया जाएगा। बैठक के बाद विदेशी प्रतिनिधिमंडल यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल सांची का भ्रमण करेगा, जहां उन्हें बौद्ध विरासत, योग, ध्यान और विशेष लाइट एंड साउंड शो का अनुभव कराया जाएगा। सम्मेलन के समापन के बाद 9 अगस्त को इच्छुक प्रतिनिधियों के लिए भीमबेटका शैलाश्रयों के भ्रमण की भी व्यवस्था की गई है, जिससे वे भारत की प्रागैतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर से परिचित हो सकें।

  • इंदौर में BRICS कृषि मंत्रियों का महामंथन आज, खाद्य सुरक्षा और जलवायु अनुकूल खेती पर बनेगी साझा रणनीति

    इंदौर में BRICS कृषि मंत्रियों का महामंथन आज, खाद्य सुरक्षा और जलवायु अनुकूल खेती पर बनेगी साझा रणनीति


    मध्‍य प्रदेश । मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर इन दिनों अंतरराष्ट्रीय कृषि कूटनीति का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है। 9 से 13 जून तक आयोजित BRICS कृषि सम्मेलन के अंतिम दिन शनिवार को सदस्य देशों के कृषि मंत्रियों की अहम बैठक आयोजित की जा रही है। इस बैठक में कृषि क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और टिकाऊ कृषि प्रणाली विकसित करने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर व्यापक विचार-विमर्श होगा।

    सम्मेलन के समापन दिवस से पहले शहर के मेघदूत उपवन में विकसित विशेष “ब्रिक्स वाटिका” में विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधियों और अतिथियों ने फलदार पौधों का रोपण किया। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan, केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री Bhagirath Choudhary, मध्य प्रदेश के जल संसाधन मंत्री Tulsi Silawat, इंदौर के महापौर Pushyamitra Bhargav तथा विधायक Ramesh Mendola सहित कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।

    ब्रिक्स वाटिका को अंतरराष्ट्रीय सहयोग, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रतीक के रूप में विकसित किया गया है। यहां कुल 51 फलदार पौधे लगाए जाने की योजना बनाई गई है। उद्यान विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह वाटिका आने वाले वर्षों में BRICS देशों की साझेदारी और हरित विकास के संकल्प का प्रतीक बनेगी। इससे पहले इंदौर में आयोजित प्रवासी भारतीय सम्मेलन के दौरान ग्लोबल गार्डन और यूरेशियन सम्मेलन के दौरान यूरेशिया गार्डन भी विकसित किए गए थे।

    मेघदूत उपवन को BRICS सम्मेलन के अनुरूप विशेष रूप से सजाया गया है। परिसर में “BRICS INDIA” थीम आधारित आकर्षक आइलैंड, गुलाब उद्यान, संगीतमय फाउंटेन, कमल थीम आधारित सजावट और आधुनिक लैंडस्केपिंग तैयार की गई है। साथ ही BRICS सदस्य देशों के राष्ट्रीय ध्वज भी लगाए गए हैं, जो अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सांस्कृतिक विविधता की झलक प्रस्तुत कर रहे हैं।

    सम्मेलन के अंतिम दिन होने वाली कृषि मंत्रियों की बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसमें सदस्य देशों के प्रतिनिधि कृषि क्षेत्र में भविष्य की चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा करेंगे। विशेष रूप से खाद्य सुरक्षा, पोषण और किसानों की आजीविका को मजबूत बनाने के उपायों पर विचार किया जाएगा। इसके अलावा कृषि व्यापार को बढ़ावा देने, सदस्य देशों के बीच तकनीकी सहयोग बढ़ाने और कृषि उत्पादकता सुधारने पर भी चर्चा होगी।

    बैठक का एक महत्वपूर्ण विषय जलवायु परिवर्तन के अनुरूप कृषि व्यवस्था को अधिक टिकाऊ और लचीला बनाना रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते तापमान, अनियमित वर्षा और प्राकृतिक आपदाओं के बीच कृषि क्षेत्र को नई तकनीकों और वैज्ञानिक नवाचारों की आवश्यकता है। इसी दिशा में BRICS देश साझा अनुसंधान, तकनीकी साझेदारी और नवाचार आधारित कृषि मॉडल पर विचार करेंगे।

    शनिवार को सुबह 10 बजे से कृषि मंत्रियों की बैठक शुरू होगी। इसके बाद विभिन्न द्विपक्षीय बैठकों का दौर चलेगा। सम्मेलन के समापन पर सदस्य देशों की सहमति से एक साझा दस्तावेज तैयार किया जाएगा, जिसमें कृषि विकास, खाद्य सुरक्षा, जलवायु अनुकूल खेती और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े प्रमुख बिंदुओं को शामिल किया जाएगा।

    विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक खाद्य संकट, जलवायु परिवर्तन और कृषि क्षेत्र की नई चुनौतियों के बीच इंदौर में आयोजित यह BRICS सम्मेलन भविष्य की कृषि नीतियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण मंच साबित हो सकता है।

  • इंदौर में कल से शुरू होगा BRICS देशों का सम्मेलन, 20 देशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल

    इंदौर में कल से शुरू होगा BRICS देशों का सम्मेलन, 20 देशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश का इंदौर शहर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय आयोजन का केंद्र बनने जा रहा है। कल यानी 9 जून से यहां ब्रिक्स (BRICS) देशों के कृषि मंत्रियों का अहम सम्मेलन शुरू होगा, जिसमें भारत सहित लगभग 20 देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे।

    केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और इसी क्रम में यह महत्वपूर्ण बैठक इंदौर में आयोजित की जा रही है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स की शुरुआत 2006 में हुई थी और आज यह समूह 11 सदस्य देशों व 10 साझेदार देशों के साथ वैश्विक स्तर पर बेहद प्रभावशाली बन चुका है।

    शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि दुनिया की लगभग 42 प्रतिशत कृषि भूमि, 68 प्रतिशत कृषि जोतें और करीब 42 प्रतिशत खाद्य उत्पादन ब्रिक्स देशों से जुड़ा है, जिससे यह मंच वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है।

    भारत इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में भी ब्रिक्स की अध्यक्षता कर चुका है। 2016 में भारत ने ब्रिक्स कृषि अनुसंधान मंच जैसी बड़ी पहल शुरू की थी, जिसका उद्देश्य कृषि क्षेत्र में सहयोग और नवाचार को बढ़ावा देना था।

    इस बार इंदौर सम्मेलन को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पहली बार ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की बैठक मंत्री स्तर पर आयोजित की जा रही है। इसमें सदस्य और साझेदार देशों सहित करीब 20 देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

    सम्मेलन में मुख्य रूप से चार प्रमुख विषयों पर फोकस किया जाएगा-खाद्य सुरक्षा एवं पोषण, कृषि व्यापार और सहयोग, जलवायु अनुकूलन एवं सतत कृषि, तथा कृषि और खाद्य प्रणालियों में नवाचार व साझेदारी।

    मंत्री ने कहा कि सरकार की नीति का केंद्र हमेशा छोटे और सीमांत किसान रहे हैं। उनके अनुसार, किसानों की आय बढ़ाना, कृषि ऋण तक आसान पहुंच सुनिश्चित करना और कृषि अनुसंधान का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचाना प्राथमिक लक्ष्य है।

    कार्यक्रम के दौरान 9 से 11 जून तक कृषि कार्य समूह की बैठकें होंगी, जबकि 12 से 13 जून को कृषि मंत्रियों की मुख्य बैठक आयोजित की जाएगी। इसी दौरान “लघु किसानों, महिलाओं एवं युवाओं के माध्यम से भविष्य की खाद्य सुरक्षा” विषय पर विशेष चर्चा भी होगी।

    पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इस सम्मेलन में “ब्रिक्स वाटिका” का निर्माण और सामूहिक वृक्षारोपण भी किया जाएगा। साथ ही विदेशी प्रतिनिधियों को इंदौर के प्रसिद्ध स्थलों जैसे राजवाड़ा, छप्पन दुकान और मांडू का भ्रमण भी कराया जाएगा, ताकि वे भारत की सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकें।

    सरकार का मानना है कि इंदौर में होने वाला यह सम्मेलन वैश्विक कृषि सहयोग को नई दिशा देगा और छोटे किसानों के हितों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से स्थापित करेगा।

  • दिल्ली BRICS समिट में ईरान पर फूटा मतभेद, बिना संयुक्त बयान खत्म हुई विदेश मंत्रियों की बैठक

    दिल्ली BRICS समिट में ईरान पर फूटा मतभेद, बिना संयुक्त बयान खत्म हुई विदेश मंत्रियों की बैठक

    नई दिल्ली। BRICS देशों के विदेश मंत्रियों की दिल्ली में हुई अहम बैठक ईरान मुद्दे पर गहरे मतभेदों के बीच बिना संयुक्त बयान के खत्म हो गई। समिट में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव, पश्चिम एशिया की स्थिति और होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही जैसे मुद्दों पर तीखी चर्चा हुई, लेकिन सदस्य देशों के बीच आम सहमति नहीं बन सकी।

    सूत्रों के मुताबिक, ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने BRICS देशों से मांग की कि संयुक्त बयान में ईरान पर हुए हमलों की स्पष्ट निंदा की जाए। उन्होंने अमेरिका और इजरायल पर अंतरराष्ट्रीय कानून तोड़ने का आरोप लगाया और BRICS से खुला समर्थन मांगा। हालांकि भारत समेत कई सदस्य देशों ने इस मुद्दे पर संतुलित रुख अपनाने की जरूरत बताई।

    बैठक में मौजूद देशों का मानना था कि पश्चिम एशिया के हालात बेहद संवेदनशील हैं और किसी एक पक्ष का खुलकर समर्थन करने से कूटनीतिक संतुलन बिगड़ सकता है। इसी कारण साझा बयान पर सहमति नहीं बन पाई और अंत में केवल एक “Outcome Statement” जारी किया गया।

    हालांकि ईरान के मुद्दे पर मतभेद सामने आए, लेकिन करीब 60 अहम एजेंडों पर सभी देशों ने एक जैसी राय रखी। इनमें ऊर्जा सहयोग, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, व्यापार, क्लाइमेट एक्शन, वित्तीय कनेक्टिविटी और वैश्विक आर्थिक सहयोग जैसे विषय शामिल रहे।

    समिट के दौरान S. Jaishankar ने अपने संबोधन में समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों को हर हाल में खुला रखा जाना चाहिए, क्योंकि इन मार्गों पर रुकावट का असर पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

    समिट से इतर जयशंकर और अराघची के बीच अलग से द्विपक्षीय बैठक भी हुई। दोनों नेताओं ने ईरान-इजरायल तनाव, क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा की। भारत ने साफ किया कि वह बातचीत और कूटनीति के जरिए तनाव कम करने के पक्ष में है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि BRICS मंच पर ईरान मुद्दे पर खुलकर मतभेद सामने आना इस बात का संकेत है कि संगठन के भीतर भी भू-राजनीतिक चुनौतियां बढ़ रही हैं। इसके बावजूद आर्थिक और रणनीतिक सहयोग के कई मुद्दों पर सदस्य देशों की एकजुटता कायम दिखाई दी।

  • ब्रिक्स सम्मेलन में जयशंकर का सख्त संदेश, सुधार अब पसंद नहीं बल्कि जरूरत : विदेश मंत्री

    ब्रिक्स सम्मेलन में जयशंकर का सख्त संदेश, सुधार अब पसंद नहीं बल्कि जरूरत : विदेश मंत्री

    नई दिल्ली । वैश्विक मंच पर बदलते शक्ति संतुलन और बढ़ती जटिलताओं के बीच ब्रिक्स सम्मेलन 2026 का दूसरा दिन एक महत्वपूर्ण संदेश के साथ सामने आया, जहां भारत ने अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता को स्पष्ट और मजबूत तरीके से रखा। सम्मेलन में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा कि दुनिया जिस दौर से गुजर रही है, उसमें बदलाव अब किसी विकल्प या पसंद का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह एक अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है।

    उन्होंने कहा कि आज की वैश्विक परिस्थितियां उस समय से काफी अलग हैं, जब मौजूदा अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की नींव रखी गई थी। समय के साथ दुनिया अधिक आपस में जुड़ी हुई, जटिल और बहु-ध्रुवीय हो गई है, लेकिन वैश्विक शासन की मौजूदा संरचना इस परिवर्तन के साथ कदम नहीं मिला पाई है। यही कारण है कि वैश्विक स्तर पर निर्णय प्रक्रिया और उसकी प्रभावशीलता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

    जयशंकर ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा प्रणाली में सुधार केवल एक तकनीकी मुद्दा नहीं है, बल्कि यह वैश्विक संतुलन और न्याय से जुड़ा हुआ विषय है। उन्होंने कहा कि जब दुनिया के बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व ही पर्याप्त रूप से नहीं हो पाता, तो निर्णयों की वैधता और स्वीकार्यता पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है। इसी कारण वैश्विक संस्थाओं को अधिक समावेशी और प्रतिनिधिक बनाने की आवश्यकता है।

    उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने के लिए बहुपक्षीय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना जरूरी है। आज कई देशों को विकास, सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन मौजूदा ढांचे इन चुनौतियों का समाधान करने में पूरी तरह सक्षम नहीं हैं। इसलिए सुधार की प्रक्रिया को तेज करना समय की मांग है।

    विदेश मंत्री ने विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक सदस्यता बढ़ने के बावजूद कई निर्णय लेने वाली संरचनाएं अब भी पुरानी दुनिया की तस्वीर दिखाती हैं, जिससे उभरते देशों और विकासशील क्षेत्रों को उचित स्थान नहीं मिल पाता। एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे क्षेत्रों की भागीदारी को बढ़ाना आवश्यक है ताकि वैश्विक व्यवस्था अधिक संतुलित हो सके।

    इसके साथ ही उन्होंने वैश्विक वित्तीय प्रणाली की चुनौतियों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान आर्थिक परिदृश्य में सप्लाई चेन की अस्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा पर दबाव और संसाधनों तक असमान पहुंच जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। ऐसे में बहुपक्षीय वित्तीय संस्थानों को और अधिक सक्षम और लचीला बनाना जरूरी है ताकि विकासशील देशों को समय पर और पर्याप्त सहायता मिल सके।

    व्यापार व्यवस्था पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार को निष्पक्ष और नियम-आधारित बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने संकेत दिया कि कुछ गैर-न्यायसंगत प्रथाएं और आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भरता वैश्विक अर्थव्यवस्था को जोखिम में डाल रही हैं। इसलिए एक मजबूत और संतुलित व्यापार प्रणाली की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।

    अपने संबोधन के अंत में विदेश मंत्री ने यह स्पष्ट किया कि वर्तमान समय का सबसे बड़ा संदेश सहयोग और सुधार है। उन्होंने कहा कि दुनिया को एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय ढांचे की आवश्यकता है जो अधिक लोकतांत्रिक, प्रतिनिधिक और न्यायपूर्ण हो, ताकि सभी देशों को समान अवसर मिल सके और वैश्विक चुनौतियों का समाधान सामूहिक रूप से किया जा सके।

  • वैश्विक राजनीति का केंद्र बना भारत: ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में सहयोग और सुधार पर गहन चर्चा की तैयारी

    वैश्विक राजनीति का केंद्र बना भारत: ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में सहयोग और सुधार पर गहन चर्चा की तैयारी

    नई दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का एक महत्वपूर्ण दृश्य उस समय देखने को मिला जब ब्रिक्स सदस्य देशों और साझेदार देशों के विदेश मंत्री तथा वरिष्ठ राजनयिक उच्चस्तरीय बैठक के लिए भारत मंडपम पहुंचे। इस अवसर पर भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक ने वैश्विक सहयोग और कूटनीतिक संवाद को एक नई दिशा देने की शुरुआत की है।

    विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बैठक स्थल पर पहुंचने वाले सभी प्रतिनिधियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। विभिन्न देशों के शीर्ष कूटनीतिज्ञों की उपस्थिति ने इस आयोजन को वैश्विक स्तर पर विशेष महत्व प्रदान किया है। बैठक में ईरान, रूस, इंडोनेशिया सहित कई देशों के विदेश मंत्री और वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल हुए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि ब्रिक्स मंच आज वैश्विक राजनीति में एक मजबूत संवाद का केंद्र बन चुका है।

    इस उच्चस्तरीय बैठक के दौरान सभी प्रतिनिधियों का एक आधिकारिक समूह फोटो भी लिया गया, जो इस आयोजन की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक माना गया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर इस बैठक की अध्यक्षता कर रहे हैं और भारत की भूमिका इस वर्ष ब्रिक्स के एजेंडा को दिशा देने में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    बैठक का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आपसी सहयोग को मजबूत करना और वैश्विक तथा क्षेत्रीय मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण विकसित करना है। बदलती अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बीच यह मंच आर्थिक सहयोग, सुरक्षा चुनौतियों और वैश्विक शासन प्रणाली में आवश्यक सुधारों पर चर्चा का अवसर प्रदान कर रहा है।

    कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में उभरती हुई भू-राजनीतिक वास्तविकताओं पर भी विस्तृत विचार-विमर्श होने की संभावना है। सदस्य देशों के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी सहयोग जैसे मुद्दों पर भी संवाद को आगे बढ़ाने की तैयारी है। इस तरह की चर्चाएं न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करती हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर संतुलित विकास की दिशा में भी योगदान देती हैं।

    बैठक के दौरान यह भी अपेक्षा की जा रही है कि सभी प्रतिनिधि आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के एजेंडा को अंतिम रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यह शिखर सम्मेलन आने वाले समय में वैश्विक नीतियों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकता है।

    भारत के लिए यह आयोजन कूटनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे देश की वैश्विक मंच पर भूमिका और अधिक सशक्त होती दिखाई दे रही है। नई दिल्ली में हो रही यह बैठक न केवल ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को मजबूत कर रही है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में भारत की बढ़ती भागीदारी को भी दर्शा रही है।