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  • भारत मंडपम में चल रही ब्रिक्स समिट … प्रदर्शन करने पहुंच गए तिब्बती यूथ कांग्रेस के सदस्य…

    भारत मंडपम में चल रही ब्रिक्स समिट … प्रदर्शन करने पहुंच गए तिब्बती यूथ कांग्रेस के सदस्य…


    नई दिल्ली।
    भारत मंडपम (Bharat Mandapam) के पास विरोध-प्रदर्शन कर रहे तिब्बती यूथ कांग्रेस (Tibetan Youth Congress ) के 50 से अधिक सदस्यों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया है। यह जानकारी पुलिस ने दी। गौरतलब है कि इन दिनों प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में ब्रिक्स सम्मेलन (BRICS Summit) से जुड़ी गतिविधियां चल रही हैं। देश में तमाम विदेशी मेहमान आए हुए हैं। पुलिस का पहरा भी सख्त है।

    शनिवार रात, तिब्बती यूथ कांग्रेस और तिब्बत के अन्य समर्थक BRICS समिट के लिए दिल्ली आए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के दौरे का विरोध करने के लिए ITO के पास जमा हुए। जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने भारत मंडपम की ओर मार्च करने की कोशिश की, तो दिल्ली पुलिस ने कई दर्जन लोगों को हिरासत में ले लिया।

    पुलिस सूत्रों ने बताया कि कुछ प्रदर्शनकारी भारत मंडपम के करीब भी पहुंच गए थे और सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें तुरंत हिरासत में ले लिया। आरोप है कि प्रदर्शनकारी VVIP रूट के पास जमा होने की कोशिश कर रहे थे। बाद में उन्हें उस इलाके से दूर छोड़ दिया गया।

    लगातार कई दिनों से हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बाद मजनू का टीला में भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है। शुक्रवार को, ‘स्टूडेंट्स फॉर ए फ्री तिब्बत’ के पाँच कार्यकर्ताओं ने प्रगति मैदान टनल के अंदर खंभों पर चढ़कर तिब्बत का राष्ट्रीय झंडा फहराया और शी जिनपिंग के खिलाफ नारे लगाए।

  • ब्रिक्स समिट में भाग नहीं लेगा बांग्लादेश… PM तारिक रहमान को न्योता नहीं मिलने का दिया हवाला

    ब्रिक्स समिट में भाग नहीं लेगा बांग्लादेश… PM तारिक रहमान को न्योता नहीं मिलने का दिया हवाला


    ढाका।
    बांग्लादेश (Bangladesh) ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit) के आउटरीच सेशन में प्रधानमंत्री तारिक रहमान (Prime Minister Tariq Rahman) के शामिल होने का न्योता ठुकरा दिया है। बांग्लादेश सरकार का कहना है कि प्रधानमंत्री को व्यक्तिगत तौर पर इस बैठक में शामिल होने के लिए आमंत्रित नहीं किया गया था, बल्कि यह न्योता BIMSTEC के मौजूदा चेयर को दिया गया था।

    बांग्लादेश के विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायूं कबीर (Humayun Kabir) ने गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में साफ किया कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान के BRICS समिट में शामिल होने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री को आमंत्रित ही नहीं किया गया, तो सरकार की ओर से किसी प्रतिनिधि को भेजने की भी कोई वजह नहीं है।


    ‘हमारे PM को किसने बुलाया? BIMSTEC चेयर को न्योता मिला था’

    हुमायूं कबीर ने कहा, “हम कैसे जाएंगे? क्या बांग्लादेश सरकार से किसी को आमंत्रित किया गया है? हमारे प्रधानमंत्री को आमंत्रित नहीं किया गया था।” जब उनसे पूछा गया कि प्रधानमंत्री को न्योता दिए जाने की बात क्यों कही जा रही है, तो उन्होंने जवाब दिया, “आपको किसने बताया कि हमारे प्रधानमंत्री को आमंत्रित किया गया था? BIMSTEC चेयर को आमंत्रित किया गया था। फिर आप यह सवाल क्यों पूछ रहे हैं?”

    BRICS समिट का आउटरीच सेशन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होना है। इसमें सदस्य और साझेदार देशों के नेताओं के साथ आउटरीच के लिए आमंत्रित किए गए नेता भी शामिल होंगे।


    भारत ने क्या कहा था?

    भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने हाल ही में नई दिल्ली में एक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहा था कि भारत ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री को BIMSTEC के मौजूदा चेयर के तौर पर 18वें BRICS समिट के आउटरीच सेशन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। जायसवाल ने यह भी कहा था कि प्रधानमंत्री के लिए एक अलग द्विपक्षीय निमंत्रण फरवरी से ही मौजूद है।

    बांग्लादेश के विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा कि तारिक रहमान की भारत की पहली यात्रा बहुपक्षीय यात्रा नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश सरकार भारत के साथ प्रधानमंत्री की द्विपक्षीय यात्रा की व्यवस्था करने पर काम कर रही है और इसके लिए उचित समय का इंतजार किया जा रहा है।


    भारत-बांग्लादेश रिश्तों में तनाव के बीच आया फैसला

    बांग्लादेश का यह फैसला ऐसे समय आया है जब नई दिल्ली और ढाका के रिश्तों में तनाव बना हुआ है। इसकी वजहों में भारत में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की मौजूदगी, उनके प्रत्यर्पण की मांग और पानी के बंटवारे से जुड़े समझौतों समेत कुछ अन्य लंबित मुद्दे शामिल हैं। इसके अलावा बांग्लादेश की चीन और पाकिस्तान के साथ बढ़ती नजदीकी को भी दोनों देशों के रिश्तों में तनाव के संदर्भ में बताया गया है।

    फरवरी में भारत ने भेजे थे लोकसभा स्पीकर ओम बिरला
    भारत ने 17 फरवरी को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को बांग्लादेश भेजा था। वह 12 फरवरी के आम चुनाव के बाद तारिक रहमान की BNP सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए थे। ओम बिरला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से तारिक रहमान के लिए एक पत्र भी लेकर गए थे। इसमें प्रधानमंत्री मोदी ने अपने बांग्लादेशी समकक्ष को बधाई दी थी और उन्हें पत्नी तथा बेटी के साथ भारत आने का निमंत्रण दिया था।

  • दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन कल से, 15 हजार पुलिसकर्मी तैनात, मोदी ने कहा- सकारात्मक चर्चा की उम्मीद

    दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन कल से, 15 हजार पुलिसकर्मी तैनात, मोदी ने कहा- सकारात्मक चर्चा की उम्मीद


    नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए तैयार है। 12 और 13 सितंबर को भारत मंडपम में होने वाले सम्मेलन से पहले सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। करीब 15 हजार दिल्ली पुलिसकर्मी, पैरामिलिट्री की 200 कंपनियां और 500 से ज्यादा CCTV कैमरे सुरक्षा में लगाए गए हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार सुबह दिल्ली पहुंच चुके हैं, जबकि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी शनिवार को भारत पहुंचेंगे।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS नेताओं के भारत पहुंचने से पहले एक्स पर संदेश जारी कर सम्मेलन से सार्थक चर्चा की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में दुनिया के कई नेता BRICS Summit के लिए जुटेंगे और विश्व कल्याण की भावना के साथ वैश्विक मुद्दों पर सकारात्मक एवं सार्थक विचार-विमर्श होगा।

    35 से ज्यादा सड़कों पर ट्रैफिक प्रभावित
    BRICS सम्मेलन के चलते दिल्ली में आज से 13 सितंबर तक सुरक्षा और यातायात व्यवस्था में बदलाव रहेगा। पुलिस के मुताबिक शहर पूरी तरह बंद नहीं रहेगा, लेकिन VVIP काफिलों की आवाजाही के दौरान कुछ समय के लिए रास्ते रोके जा सकते हैं।

    मथुरा रोड, शांति पथ, जनपथ, अशोक रोड, बाराखंभा रोड और तीन मूर्ति मार्ग समेत 35 से ज्यादा प्रमुख सड़कों पर असर पड़ने की संभावना है। नोएडा से सेंट्रल दिल्ली और द्वारका से एयरपोर्ट जाने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। हर दिन करीब 70 से 80 हाई सिक्योरिटी मूवमेंट होने का अनुमान है। ट्रैफिक व्यवस्था संभालने के लिए करीब 4,800 ट्रैफिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।

    मेट्रो सामान्य, स्कूलों में छुट्टी
    दिल्ली मेट्रो सामान्य रूप से चलती रहेगी। बस, ऑटो और टैक्सी सेवाएं भी जारी रहेंगी, हालांकि कुछ रूट में बदलाव किया जा सकता है। UPSC और NDA परीक्षार्थियों के साथ अस्पताल जाने वाले लोगों को घर से पर्याप्त समय पहले निकलने की सलाह दी गई है। मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में ट्रैफिक पुलिस को तत्काल सूचना देने को कहा गया है।

    सम्मेलन के मद्देनजर आज स्कूलों में छुट्टी है। वहीं कनॉट प्लेस का बाजार खुला रहेगा, जबकि मेट्रो म्यूजियम और राष्ट्रपति भवन 13 सितंबर तक बंद रहेंगे।

    मोदी-पुतिन मुलाकात पर नजर
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात आज दोपहर प्रस्तावित है। बातचीत में रक्षा, ऊर्जा और परमाणु सहयोग जैसे अहम मुद्दे शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से भी मुलाकात करेंगे। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शनिवार शाम प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात करेंगे। इस बैठक में सीमा विवाद और व्यापार से जुड़े मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहने की संभावना है।

    कई देशों के नेता होंगे शामिल
    BRICS सम्मेलन में दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इंडोनेशिया, मलेशिया और इथियोपिया समेत कई देशों के नेता हिस्सा लेंगे। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी सम्मेलन में शामिल होंगे। सम्मेलन के अंत में ‘न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन’ जारी किया जाएगा। फिलीपींस की विदेश मामलों की सचिव मा. थेरेसा पी. लाजारो भी BRICS Summit 2026 में भाग लेने के लिए दिल्ली पहुंच चुकी हैं।

    पुरी में सैंड आर्ट से विदेशी मेहमानों का स्वागत
    BRICS नेताओं के भारत आगमन के मौके पर पुरी के कलाकार मानस कुमार साहू ने सैंड आर्ट तैयार कर उनका अभिनंदन किया। रेत से बनाई गई इस कलाकृति के जरिए भारत की ओर से BRICS देशों के नेताओं का स्वागत किया गया।

    संस्कृत श्लोक से दिया संवाद और मित्रता का संदेश
    प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में संस्कृत श्लोक के जरिए अच्छे लोगों की संगति, संवाद और मित्रता का महत्व भी बताया। श्लोक का भावार्थ है कि सज्जनों के साथ चलना, उनकी संगति करना और उनके साथ संवाद व मित्रता रखना चाहिए, जबकि बुरे लोगों से संबंध नहीं रखना चाहिए।

  • BRICS Summit: आपसी मतभेद भुलाकर क्या मजबूत साझा सुर तलाश पाएंगे ब्रिक्स देश?

    BRICS Summit: आपसी मतभेद भुलाकर क्या मजबूत साझा सुर तलाश पाएंगे ब्रिक्स देश?


    नई दिल्ली।
    आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit) से ठीक पहले कूटनीतिक हलकों में यह सवाल सबसे अहम है कि क्या ब्रिक्स देश (BRICS Country) अपने आपसी मतभेद भुलाकर एक मजबूत साझा सुर तलाश पाएंगे। इस चिंता की मुख्य वजह यह है कि भारत की अध्यक्षता में मई में हुई ब्रिक्स विदेश मंत्रियों (BRICS Foreign Ministers) की बैठक में तमाम कोशिशों के बावजूद किसी संयुक्त घोषणापत्र पर आम सहमति नहीं बन पाई थी। ब्रिक्स पारंपरिक रूप से सर्वसम्मति से काम करता है, लेकिन असहमति इस बात का संकेत है कि जैसे-जैसे इसका कुनबा बढ़ा है, वैसे-वैसे इसके भीतर अंतर्विरोध भी गहरे हुए हैं।


    क्यों फंसा था पेंच? :

    विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान मुख्य रूप से पश्चिम एशिया की स्थिति, फलस्तीन मुद्दे और लाल सागर में नौवहन सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषयों पर सदस्य देशों के बीच तीखा मतभेद देखने को मिला था। इस गतिरोध के केंद्र में ईरान और संयुक्त अरब अमीरात थे। ईरान ने पश्चिम एशिया संघर्ष पर कड़ी भाषा की मांग की, जबकि यूएई समेत कुछ सदस्यों ने आपत्ति जताई। ईरान ने फिलिस्तीन और लाल सागर से जुड़े कुछ प्रावधानों पर कड़ी आपत्ति जताई थी। नतीजतन संयुक्त बयान के स्थान पर भारत को अध्यक्षीय बयान से ही संतोष करना पड़ा।


    विस्तारित कुनबे की जटिलताएं

    ब्रिक्स में अब केवल पांच पारंपरिक देश- ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका- के साथ-साथ मिस्र, इथियोपिया, ईरान, यूएई और इंडोनेशिया भी जुड़ चुके हैं। दुनिया की बहुत बड़ी आबादी और अर्थव्यवस्था की नुमाइंदगी करने वाले इस विस्तारित मंच का आकार जितना बढ़ा है, कूटनीति के पेचीदा मामलों पर आमराय कायम करना उतना ही कठिन होता गया है। संगठन के भीतर अलग-अलग सामरिक गठबंधनों से जुड़े देशों के हित टकराते हैं, तो सहमति तलाशना कठिन साबित होता है।


    संतुलन साधने की परीक्षा

    ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाल रहे भारत के सामने कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने की दोहरी चुनौती है। भारत की अध्यक्षता का मुख्य फोकस लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के एजेंडे के तहत वैश्विक दक्षिण की आवाज मजबूत करना है। साथ ही आर्थिक-तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देना रहा है। हालांकि पश्चिम एशिया संघर्ष और बढ़ते ध्रुवीकरण के बीच भारत को यह सुनिश्चित करना पड़ रहा है कि ब्रिक्स किसी एकपक्षीय गुट के रूप में उभर कर न आए। इसकी बजाय विकासशील देशों के आर्थिक हितों का मंच बना रहे।

  • BRICS Summit: चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग पूरे लाव-लश्कर के साथ आएंगे दिल्ली….

    BRICS Summit: चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग पूरे लाव-लश्कर के साथ आएंगे दिल्ली….


    नई दिल्ली।
    भारत (India) की अध्यक्षता में 12-13 सितंबर को हो रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit) में हिस्सा लेने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Chinese President Xi Jinping) दिल्ली आएंगे। सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति जिनपिंग की यात्रा का आधिकारिक कार्यक्रम अभी नहीं आया है लेकिन उनके दौरे को अंतिम रूप दिया जा रहा है। वे एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत आ रहे हैं।

    जिनपिंग की भारत यात्रा करीब सात सालों के बाद हो रही है। इससे पहले वे अक्तूबर 2019 में द्विपक्षीय वार्ता के लिए भारत आए थे। सूत्रों ने कहा कि जिनपिंग की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों में द्विपक्षीय वार्ता भी होगी जिसमें सीमा से संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा होगी। ब्रिक्स में प्रमुख हस्तियों में जिनपिंग के अलावा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन होंगे। चुनाव के चलते ब्राजील के राष्ट्रपति लूला हिस्सा नहीं लेंगे। उसके भी विदेश मंत्री आएंगे। जबकि ईरान, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति के हिस्सा लेने की संभावना है।


    बांग्लादेशी पीएम के आने की संभावना नहीं

    बिम्स्टेक के अध्यक्ष के रूप में ब्रिक्स में आमंत्रित बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के सम्मेलन में आने के आसार नही हैं। संभावना है कि विदेश मंत्री बांग्लादेश का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। आपको बता दें कि बांग्लादेश शेख हसीना को वापस भेजने की मांग कर रहा है। इस वजह से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक स्तर पर तनाव बढ़ा है।

    तारिक रहमान की यात्रा को लेकर राष्ट्रपति भवन ने एक बार बयान भी जारी कर दिया था जिसे बाद में वापस लेना पड़ा। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि तारिक रहमान की यात्रा के लिए अनुकूल माहौल बनाने की जरूरत है। इस दौरे के रद्द होने के बाद कहा जा रहा था कि रहमान ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान भारत आ सकते हैं।हालांकि वह ब्रिक्स शिखऱ सम्मेलन में हिस्सा लेने भी नहीं आ रहे हैं।


    ब्रिक्स प्रधान न्यायाधीशों की बैठक शुरू

    ब्रिक्स प्रधान न्यायाधीश मंच की बैठक को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने वाणिज्यिक विवादों को सुलझाने के लिए मध्यस्थता एवं सुलह के लिए एक साझा मंच बनाने का प्रस्ताव भी रखा। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को यहां ब्रिक्स प्रधान न्यायाधीश मंच की बैठक का आयोजन किया। इसमें ब्रिक्स के सदस्य देशों और सहयोगी देशों के प्रधान न्यायाधीश, शीर्ष अदालतों के प्रमुख और वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी शामिल हुए।

    ब्रिक्स प्रधान न्यायाधीश मंच की बैठक के उद्घाटन के दिन प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने न्यायिक प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों के साथ कई द्विपक्षीय बैठकें कीं।सीजेआई ने तीन दिवसीय सम्मेलन के पहले दिन रूस, चीन, मिस्र, इंडोनेशिया, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), बेलारूस, कजाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका, ईरान और उज्बेकिस्तान के न्यायिक प्रमुखों से मुलाकात की।

  • ब्रिक्स सम्मेलन में दिखेगा मध्य प्रदेश का सांस्कृतिक वैभव: 125 कलाकार देंगे ‘अमृतस्य मध्य प्रदेश’ की भव्य प्रस्तुति

    ब्रिक्स सम्मेलन में दिखेगा मध्य प्रदेश का सांस्कृतिक वैभव: 125 कलाकार देंगे ‘अमृतस्य मध्य प्रदेश’ की भव्य प्रस्तुति


    भोपाल । भोपाल में चल रहा ब्रिक्स सांस्कृतिक सम्मेलन 2026 अब अपने तीसरे दिन में प्रवेश कर चुका है और शुक्रवार को राजधानी में संस्कृति और कला का अंतरराष्ट्रीय संगम देखने को मिलेगा। ब्रिक्स सदस्य और भागीदार देशों के संस्कृति मंत्री भोपाल पहुंच रहे हैं जहां उनका पारंपरिक अंदाज में स्वागत किया जा रहा है। सम्मेलन के तीसरे दिन का सबसे बड़ा आकर्षण शाम को आयोजित होने वाला ब्रिक्स सांस्कृतिक महोत्सव 2026 होगा। इस विशेष आयोजन में भारत के साथ ब्रिक्स सदस्य और भागीदार देशों के प्रख्यात संगीतकार और कलाकार एक मंच पर नजर आएंगे। कार्यक्रम की शुरुआत सर्वे भवन्तु सुखिनः के मंगल आह्वान से होगी जिसके बाद कलर्स ऑफ इंडियन म्यूजिक के जरिए हिंदुस्तानी और कर्नाटक शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा को प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद ब्रिक्स पीस सॉन्ग पीस इज द लैंग्वेज ऑफ द लैंड के जरिए अलग अलग देशों की संगीत परंपराओं को एक सूत्र में पिरोया जाएगा।

    इस सांस्कृतिक महोत्सव में बेलारूस ब्राजील चीन मिस्र इथियोपिया इंडोनेशिया ईरान रूस सऊदी अरब दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात की संगीत विरासत की झलक देखने को मिलेगी। आर्केस्ट्रा की प्रस्तुतियों में पीस टू ऑल हार्मनी टू ऑल और क्रेस्केंडो ऑफ यूनिटी जैसे कार्यक्रम विशेष आकर्षण होंगे। इन प्रस्तुतियों का उद्देश्य अलग अलग संस्कृतियों को संगीत के माध्यम से एक दूसरे से जोड़ना और शांति तथा आपसी सहयोग का संदेश देना है। कार्यक्रम कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर मिंटो हॉल में आयोजित किया जाएगा जहां अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के साथ कला प्रेमियों को भी भारतीय और वैश्विक सांस्कृतिक विविधता का अनुभव मिलेगा।

    शाम के कार्यक्रम का एक और बड़ा आकर्षण मध्य प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग की विशेष प्रस्तुति अमृतस्य मध्य प्रदेश एक अलौकिक सांस्कृतिक महायात्रा होगी। प्रसिद्ध कोरियोग्राफर मैत्रेयी पहाड़ी के निर्देशन में 125 से अधिक कलाकार मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक आध्यात्मिक और लोक परंपराओं को नृत्य और संगीत के माध्यम से मंच पर जीवंत करेंगे। प्रस्तुति की शुरुआत ॐ की अनादि ध्वनि से होगी और इसके जरिए भीमबेटका सांची और खजुराहो जैसे विश्व धरोहर स्थलों से लेकर चित्रकूट के राम पथ गमन और उज्जैन के संदीपनि आश्रम की कृष्ण लीला तक की सांस्कृतिक यात्रा कराई जाएगी। ग्वालियर ओरछा और मांडू के ऐतिहासिक किलों की गाथा के साथ महेश्वरी और चंदेरी के वस्त्र शिल्प तथा बैगा मटकी और बधाई जैसे लोक नृत्यों को भी प्रस्तुति में शामिल किया गया है।

    भोपाल की झीलों उज्जैन के बाबा महाकाल ओंकारेश्वर के अध्यात्म और मां नर्मदा की महाआरती के जरिए मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को विदेशी मेहमानों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। इसी प्रस्तुति के माध्यम से अतिथियों को सिंहस्थ कुंभ 2028 का आध्यात्मिक निमंत्रण भी दिया जाएगा। कार्यक्रम के बाद मध्य प्रदेश सरकार की ओर से रात्रिभोज का आयोजन होगा जिसमें मेहमानों को प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद भी चखाया जाएगा। लंच और डिनर के मेन्यू में दाल बाफले निमोना रिकमच गुइया की सब्जी चंबल का थोपा चंदिया बड़ा तथा कोदो और कुटकी जैसे मिलेट आधारित व्यंजन शामिल किए गए हैं। अंतरराष्ट्रीय मेहमानों की पसंद को ध्यान में रखते हुए पश्चिमी और ओरिएंटल व्यंजन भी परोसे जाएंगे।

    8 अगस्त को भारत की अध्यक्षता में तीसरी ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक होगी जिसमें सांस्कृतिक विरासत संग्रहालय रचनात्मक अर्थव्यवस्था सांस्कृतिक आदान प्रदान क्षमता निर्माण और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। बैठक के अंत में ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की घोषणा को अपनाया जाएगा जो भविष्य में सांस्कृतिक सहयोग के लिए साझा रोडमैप तैयार करेगी। इसके बाद विदेशी प्रतिनिधिमंडल सांची जाएगा जहां वे सांची स्तूप और बौद्ध विरासत का अवलोकन करेंगे। चेतियागिरी मंदिर में दर्शन के साथ योग और ध्यान सत्र भी होगा तथा शाम को 3D प्रोजेक्शन मैपिंग और लाइट एंड साउंड शो के जरिए बौद्ध इतिहास और कला को प्रदर्शित किया जाएगा। 9 अगस्त को इच्छुक विदेशी प्रतिनिधियों के लिए भीमबेटका शैलाश्रय के भ्रमण की व्यवस्था की गई है। इस तरह भोपाल में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन केवल कूटनीतिक संवाद का मंच नहीं बल्कि भारत और विशेष रूप से मध्य प्रदेश की समृद्ध संस्कृति को दुनिया के सामने रखने का बड़ा अवसर बन गया है।

  • BRICS सम्मेलन में दिखेगी मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, 125 कलाकार देंगे गौरवगाथा की शानदार प्रस्तुति

    BRICS सम्मेलन में दिखेगी मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, 125 कलाकार देंगे गौरवगाथा की शानदार प्रस्तुति


    भोपाल । भोपाल में आयोजित हो रहा BRICS सांस्कृतिक सम्मेलन 2026 अब अपने महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच गया है। सम्मेलन के तीसरे दिन शुक्रवार को BRICS सदस्य और भागीदार देशों के संस्कृति मंत्रियों का भोपाल आगमन होगा। इस दौरान राजधानी में संस्कृति और कला का ऐसा संगम देखने को मिलेगा जिसमें भारत के साथ विभिन्न BRICS देशों की संगीत परंपराएं एक ही मंच पर नजर आएंगी। शाम को कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर मिंटो हॉल में BRICS सांस्कृतिक महोत्सव 2026 का भव्य आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम विभिन्न देशों के कलाकारों और संगीतकारों को एक साझा मंच पर लाकर सांस्कृतिक सहयोग और आपसी जुड़ाव का संदेश देगा।

    कार्यक्रम की शुरुआत सर्वे भवन्तु सुखिनः के मंगल आह्वान से होगी। इसके बाद कलर्स ऑफ इंडियन म्यूजिक के माध्यम से हिंदुस्तानी और कर्नाटक शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा प्रस्तुत की जाएगी। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण BRICS पीस सॉन्ग पीस इज द लैंग्वेज ऑफ द लैंड रहेगा। इसके जरिए विभिन्न BRICS देशों की संगीत विरासत और शांति के साझा संदेश को सुरों के माध्यम से सामने रखा जाएगा। बेलारूस ब्राजील चीन मिस्र इथियोपिया इंडोनेशिया ईरान रूस सऊदी अरब दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात की संगीत परंपराओं को भी इस आयोजन में स्थान मिलेगा। पीस टू ऑल हार्मनी टू ऑल और क्रेस्केंडो ऑफ यूनिटी जैसी आर्केस्ट्रा प्रस्तुतियां कार्यक्रम को और खास बनाएंगी।

    शाम का दूसरा बड़ा आकर्षण मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को समर्पित अमृतस्य मध्य प्रदेश एक अलौकिक सांस्कृतिक महायात्रा होगी। प्रसिद्ध कोरियोग्राफर मैत्रेयी पहाड़ी के निर्देशन में 125 से अधिक कलाकार इस भव्य प्रस्तुति के जरिए प्रदेश की ऐतिहासिक आध्यात्मिक और लोक परंपराओं को मंच पर जीवंत करेंगे। प्रस्तुति की शुरुआत ॐ की अनादि ध्वनि से होगी और इसके बाद भीमबेटका सांची और खजुराहो की विश्व धरोहर से लेकर चित्रकूट के राम पथ गमन और उज्जैन की कृष्ण लीला तक मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक यात्रा दिखाई जाएगी।

    ग्वालियर ओरछा और मांडू के ऐतिहासिक किलों की गाथा के साथ महेश्वरी और चंदेरी के प्रसिद्ध वस्त्र शिल्प तथा बैगा मटकी और बधाई जैसे लोक नृत्यों की झलक भी देखने को मिलेगी। भोपाल की झीलों उज्जैन के बाबा महाकाल ओंकारेश्वर और मां नर्मदा की महाआरती के जरिए प्रदेश की आध्यात्मिक विरासत को भी प्रस्तुत किया जाएगा। इसी दौरान अतिथियों को सिंहस्थ कुंभ 2028 के लिए सांस्कृतिक और आध्यात्मिक निमंत्रण भी दिया जाएगा। कार्यक्रम के बाद मध्य प्रदेश सरकार की ओर से रात्रिभोज का आयोजन होगा जिसमें मेहमानों को प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद भी मिलेगा।

    8 अगस्त को भारत की अध्यक्षता में तीसरी BRICS संस्कृति मंत्रियों की बैठक आयोजित होगी। इसमें सांस्कृतिक विरासत संग्रहालय रचनात्मक अर्थव्यवस्था सांस्कृतिक आदान प्रदान क्षमता निर्माण और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे विषयों पर चर्चा होगी। बैठक के अंत में BRICS संस्कृति मंत्रियों की घोषणा अपनाई जाएगी जिसमें भविष्य के सांस्कृतिक सहयोग का रोडमैप तय होगा।

    इसके बाद विदेशी प्रतिनिधिमंडल सांची पहुंचेगा जहां विश्व प्रसिद्ध सांची स्तूप और बौद्ध विरासत का अवलोकन किया जाएगा। प्रतिनिधियों के लिए चेतियागिरी मंदिर दर्शन योग और ध्यान सत्र के साथ 3D प्रोजेक्शन मैपिंग और लाइट एंड साउंड शो भी आयोजित किया जाएगा। 9 अगस्त को इच्छुक विदेशी प्रतिनिधियों के लिए भीमबेटका शैलाश्रय का वैकल्पिक भ्रमण रखा गया है। इस तरह भोपाल का BRICS सम्मेलन केवल बैठकों तक सीमित न रहकर भारत और मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का बड़ा अवसर बन रहा है।

  • भोपाल में गूंजेगी BRICS देशों की सांस्कृतिक एकता, आज घोषणा पत्र से लेकर भव्य महोत्सव तक कई अहम आयोजन

    भोपाल में गूंजेगी BRICS देशों की सांस्कृतिक एकता, आज घोषणा पत्र से लेकर भव्य महोत्सव तक कई अहम आयोजन


    भोपाल । भोपाल में आयोजित BRICS सांस्कृतिक सम्मेलन 2026 के दूसरे दिन गुरुवार को सांस्कृतिक सहयोग को नई दिशा देने वाले कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। 8 अगस्त तक चलने वाले इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में BRICS सदस्य और भागीदार देशों के प्रतिनिधि सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संग्रहालयों के विकास, रचनात्मक उद्योगों, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण और लोगों के बीच आपसी जुड़ाव को मजबूत बनाने जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा करेंगे। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग को नई मजबूती देना और साझा विरासत के संरक्षण के लिए दीर्घकालिक रणनीति तैयार करना है।

    दूसरे दिन कार्य समूहों की ओर से तैयार की गई सिफारिशों पर विचार किया जाएगा, जो आगामी मंत्रिस्तरीय बैठक में संस्कृति मंत्रियों के लिए आधार तैयार करेंगी। इन चर्चाओं के जरिए BRICS देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में साझा सहमति विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।

    सम्मेलन के दौरान कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर परिसर में तीन विशेष प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। इनमें ज्ञान भारतम, प्रोजेक्ट मौसम और प्रोजेक्ट बृहत्तर भारत शामिल हैं। इन प्रदर्शनों के माध्यम से भारत की समृद्ध पांडुलिपि परंपरा, समुद्री सांस्कृतिक संपर्क, प्राचीन सभ्यताओं के बीच संबंध और सांस्कृतिक कूटनीति की विभिन्न पहलुओं को दर्शाया गया है। इन प्रदर्शनियों को आम लोगों के लिए भी खोला गया है ताकि नागरिक भी भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को करीब से देख सकें।

    सम्मेलन में शामिल विदेशी प्रतिनिधियों के लिए मध्य प्रदेश की पारंपरिक मेहमाननवाजी भी विशेष आकर्षण बनी हुई है। दोपहर और रात्रिभोज में दाल-बाफले, निमोना, रिकमच, गुइया की सब्जी, चंबल का थोपा, चंदिया, बड़ा तथा कोदो-कुटकी जैसे मिलेट आधारित पारंपरिक व्यंजन परोसे जा रहे हैं। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय मेहमानों की पसंद को ध्यान में रखते हुए पश्चिमी और ओरिएंटल व्यंजनों की भी विशेष व्यवस्था की गई है।

    शाम को रविंद्र भवन में आयोजित होने वाला BRICS सांस्कृतिक महोत्सव सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण रहेगा। इसमें सदस्य और भागीदार देशों के कलाकार अपनी पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे। भारतीय शास्त्रीय संगीत, लोककलाओं और विभिन्न देशों की सांस्कृतिक झलकियों से सजा यह कार्यक्रम सांस्कृतिक एकता और वैश्विक सद्भाव का संदेश देगा।

    7 अगस्त को BRICS देशों के संस्कृति मंत्री औपचारिक रूप से सम्मेलन में शामिल होंगे। इस अवसर पर आयोजित विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम में सर्वे भवन्तु सुखिनः की मंगल कामना के साथ भारतीय संगीत की विविध परंपराओं का प्रदर्शन होगा। साथ ही BRICS पीस सॉन्ग के जरिए सदस्य देशों की सांस्कृतिक विविधता और एकता को संगीत के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। इसके अलावा मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग की भव्य प्रस्तुति अमृतस्य मध्य प्रदेश में भीमबेटका, सांची, खजुराहो, उज्जैन, ओंकारेश्वर, नर्मदा और प्रदेश की समृद्ध लोक संस्कृति को नृत्य और संगीत के जरिए जीवंत किया जाएगा।

    8 अगस्त को भारत की अध्यक्षता में तीसरी BRICS संस्कृति मंत्रियों की बैठक आयोजित होगी, जिसमें सांस्कृतिक सहयोग को लेकर साझा घोषणा पत्र को अंतिम रूप दिया जाएगा। बैठक के बाद विदेशी प्रतिनिधिमंडल यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल सांची का भ्रमण करेगा, जहां उन्हें बौद्ध विरासत, योग, ध्यान और विशेष लाइट एंड साउंड शो का अनुभव कराया जाएगा। सम्मेलन के समापन के बाद 9 अगस्त को इच्छुक प्रतिनिधियों के लिए भीमबेटका शैलाश्रयों के भ्रमण की भी व्यवस्था की गई है, जिससे वे भारत की प्रागैतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर से परिचित हो सकें।

  • इंदौर में BRICS कृषि मंत्रियों का महामंथन आज, खाद्य सुरक्षा और जलवायु अनुकूल खेती पर बनेगी साझा रणनीति

    इंदौर में BRICS कृषि मंत्रियों का महामंथन आज, खाद्य सुरक्षा और जलवायु अनुकूल खेती पर बनेगी साझा रणनीति


    मध्‍य प्रदेश । मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर इन दिनों अंतरराष्ट्रीय कृषि कूटनीति का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है। 9 से 13 जून तक आयोजित BRICS कृषि सम्मेलन के अंतिम दिन शनिवार को सदस्य देशों के कृषि मंत्रियों की अहम बैठक आयोजित की जा रही है। इस बैठक में कृषि क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और टिकाऊ कृषि प्रणाली विकसित करने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर व्यापक विचार-विमर्श होगा।

    सम्मेलन के समापन दिवस से पहले शहर के मेघदूत उपवन में विकसित विशेष “ब्रिक्स वाटिका” में विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधियों और अतिथियों ने फलदार पौधों का रोपण किया। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan, केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री Bhagirath Choudhary, मध्य प्रदेश के जल संसाधन मंत्री Tulsi Silawat, इंदौर के महापौर Pushyamitra Bhargav तथा विधायक Ramesh Mendola सहित कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।

    ब्रिक्स वाटिका को अंतरराष्ट्रीय सहयोग, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रतीक के रूप में विकसित किया गया है। यहां कुल 51 फलदार पौधे लगाए जाने की योजना बनाई गई है। उद्यान विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह वाटिका आने वाले वर्षों में BRICS देशों की साझेदारी और हरित विकास के संकल्प का प्रतीक बनेगी। इससे पहले इंदौर में आयोजित प्रवासी भारतीय सम्मेलन के दौरान ग्लोबल गार्डन और यूरेशियन सम्मेलन के दौरान यूरेशिया गार्डन भी विकसित किए गए थे।

    मेघदूत उपवन को BRICS सम्मेलन के अनुरूप विशेष रूप से सजाया गया है। परिसर में “BRICS INDIA” थीम आधारित आकर्षक आइलैंड, गुलाब उद्यान, संगीतमय फाउंटेन, कमल थीम आधारित सजावट और आधुनिक लैंडस्केपिंग तैयार की गई है। साथ ही BRICS सदस्य देशों के राष्ट्रीय ध्वज भी लगाए गए हैं, जो अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सांस्कृतिक विविधता की झलक प्रस्तुत कर रहे हैं।

    सम्मेलन के अंतिम दिन होने वाली कृषि मंत्रियों की बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसमें सदस्य देशों के प्रतिनिधि कृषि क्षेत्र में भविष्य की चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा करेंगे। विशेष रूप से खाद्य सुरक्षा, पोषण और किसानों की आजीविका को मजबूत बनाने के उपायों पर विचार किया जाएगा। इसके अलावा कृषि व्यापार को बढ़ावा देने, सदस्य देशों के बीच तकनीकी सहयोग बढ़ाने और कृषि उत्पादकता सुधारने पर भी चर्चा होगी।

    बैठक का एक महत्वपूर्ण विषय जलवायु परिवर्तन के अनुरूप कृषि व्यवस्था को अधिक टिकाऊ और लचीला बनाना रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते तापमान, अनियमित वर्षा और प्राकृतिक आपदाओं के बीच कृषि क्षेत्र को नई तकनीकों और वैज्ञानिक नवाचारों की आवश्यकता है। इसी दिशा में BRICS देश साझा अनुसंधान, तकनीकी साझेदारी और नवाचार आधारित कृषि मॉडल पर विचार करेंगे।

    शनिवार को सुबह 10 बजे से कृषि मंत्रियों की बैठक शुरू होगी। इसके बाद विभिन्न द्विपक्षीय बैठकों का दौर चलेगा। सम्मेलन के समापन पर सदस्य देशों की सहमति से एक साझा दस्तावेज तैयार किया जाएगा, जिसमें कृषि विकास, खाद्य सुरक्षा, जलवायु अनुकूल खेती और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े प्रमुख बिंदुओं को शामिल किया जाएगा।

    विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक खाद्य संकट, जलवायु परिवर्तन और कृषि क्षेत्र की नई चुनौतियों के बीच इंदौर में आयोजित यह BRICS सम्मेलन भविष्य की कृषि नीतियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण मंच साबित हो सकता है।

  • इंदौर में कल से शुरू होगा BRICS देशों का सम्मेलन, 20 देशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल

    इंदौर में कल से शुरू होगा BRICS देशों का सम्मेलन, 20 देशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश का इंदौर शहर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय आयोजन का केंद्र बनने जा रहा है। कल यानी 9 जून से यहां ब्रिक्स (BRICS) देशों के कृषि मंत्रियों का अहम सम्मेलन शुरू होगा, जिसमें भारत सहित लगभग 20 देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे।

    केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और इसी क्रम में यह महत्वपूर्ण बैठक इंदौर में आयोजित की जा रही है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स की शुरुआत 2006 में हुई थी और आज यह समूह 11 सदस्य देशों व 10 साझेदार देशों के साथ वैश्विक स्तर पर बेहद प्रभावशाली बन चुका है।

    शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि दुनिया की लगभग 42 प्रतिशत कृषि भूमि, 68 प्रतिशत कृषि जोतें और करीब 42 प्रतिशत खाद्य उत्पादन ब्रिक्स देशों से जुड़ा है, जिससे यह मंच वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है।

    भारत इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में भी ब्रिक्स की अध्यक्षता कर चुका है। 2016 में भारत ने ब्रिक्स कृषि अनुसंधान मंच जैसी बड़ी पहल शुरू की थी, जिसका उद्देश्य कृषि क्षेत्र में सहयोग और नवाचार को बढ़ावा देना था।

    इस बार इंदौर सम्मेलन को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पहली बार ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की बैठक मंत्री स्तर पर आयोजित की जा रही है। इसमें सदस्य और साझेदार देशों सहित करीब 20 देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

    सम्मेलन में मुख्य रूप से चार प्रमुख विषयों पर फोकस किया जाएगा-खाद्य सुरक्षा एवं पोषण, कृषि व्यापार और सहयोग, जलवायु अनुकूलन एवं सतत कृषि, तथा कृषि और खाद्य प्रणालियों में नवाचार व साझेदारी।

    मंत्री ने कहा कि सरकार की नीति का केंद्र हमेशा छोटे और सीमांत किसान रहे हैं। उनके अनुसार, किसानों की आय बढ़ाना, कृषि ऋण तक आसान पहुंच सुनिश्चित करना और कृषि अनुसंधान का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचाना प्राथमिक लक्ष्य है।

    कार्यक्रम के दौरान 9 से 11 जून तक कृषि कार्य समूह की बैठकें होंगी, जबकि 12 से 13 जून को कृषि मंत्रियों की मुख्य बैठक आयोजित की जाएगी। इसी दौरान “लघु किसानों, महिलाओं एवं युवाओं के माध्यम से भविष्य की खाद्य सुरक्षा” विषय पर विशेष चर्चा भी होगी।

    पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इस सम्मेलन में “ब्रिक्स वाटिका” का निर्माण और सामूहिक वृक्षारोपण भी किया जाएगा। साथ ही विदेशी प्रतिनिधियों को इंदौर के प्रसिद्ध स्थलों जैसे राजवाड़ा, छप्पन दुकान और मांडू का भ्रमण भी कराया जाएगा, ताकि वे भारत की सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकें।

    सरकार का मानना है कि इंदौर में होने वाला यह सम्मेलन वैश्विक कृषि सहयोग को नई दिशा देगा और छोटे किसानों के हितों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से स्थापित करेगा।