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  • BRICS में ईरानी पत्रकार ने पाकिस्तान पर उठाए सवाल, बोले- पीएम मोदी की कूटनीति के आगे आसिम मुनीर की भूमिका कमजोर

    BRICS में ईरानी पत्रकार ने पाकिस्तान पर उठाए सवाल, बोले- पीएम मोदी की कूटनीति के आगे आसिम मुनीर की भूमिका कमजोर

    नई दिल्ली ।भारत की मेजबानी में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान पश्चिम एशिया के बदलते कूटनीतिक समीकरणों को लेकर भी चर्चा हुई। ईरान से आए पत्रकार बसीम लालेह ने पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि पश्चिम एशिया के संकट के बीच भारत संवाद और कूटनीति के स्तर पर अधिक प्रभावी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की कूटनीतिक सक्रियता की सराहना की और पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख आसिम मुनीर पर भी टिप्पणी की।

    लालेह के मुताबिक, ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के दौरान पाकिस्तान ने मध्यस्थता में अपनी भूमिका को प्रमुखता से पेश करने की कोशिश की, लेकिन वह इसमें सफल नहीं रहा। इसके विपरीत, भारत ने विभिन्न देशों के साथ सीधे संवाद के जरिए अपनी कूटनीतिक स्थिति मजबूत की है। उन्होंने कहा कि BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की ईरान और यूएई के नेताओं के साथ बातचीत इसका उदाहरण है।

    ईरानी पत्रकार ने बताया कि भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के बीच बातचीत हुई। इसके साथ ही अबू धाबी के क्राउन प्रिंस के साथ भी प्रधानमंत्री की चर्चा हुई। उनके अनुसार, इसके बाद यूएई और ईरान के बीच बातचीत का रास्ता बनना पश्चिम एशिया में भारत की कूटनीतिक भूमिका को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि होर्मुज और खाड़ी क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर भी संवाद के जरिए आगे बढ़ने की संभावना बन सकती है।

    आसिम मुनीर को लेकर लालेह ने तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मुनीर कई मोर्चों पर असफल रहे हैं और भारत की बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता के बाद पश्चिम एशिया में पाकिस्तान की भूमिका कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने आसिम मुनीर की छुट्टी कर दी है। हालांकि, यह टिप्पणी राजनीतिक और कूटनीतिक प्रभाव के संदर्भ में की गई थी।

    लालेह ने BRICS सम्मेलन की मेजबानी और प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारत ने मतभेदों को पीछे छोड़कर बातचीत और सहयोग पर जोर दिया है। उनके मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी संकट के समाधान के लिए संवाद महत्वपूर्ण है और भारत इस दिशा में उपयोगी भूमिका निभा सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले दो महीनों में क्षेत्र में चल रहे संघर्ष को लेकर सकारात्मक बदलाव दिखाई दे सकते हैं।

    पाकिस्तान की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए लालेह ने कहा कि पाकिस्तान खुद कई मामलों में दूसरे देशों पर निर्भर है। उनके अनुसार, इसी वजह से पाकिस्तान के लिए स्वतंत्र तरीके से विदेश नीति तय करना मुश्किल है। उन्होंने पाकिस्तान की कूटनीति को कमजोर बताते हुए कहा कि वह क्षेत्रीय शांति को लेकर कोई प्रभावी उदाहरण स्थापित नहीं कर पाया है।

    ईरानी पत्रकार ने पाकिस्तान पर आतंकवाद के मुद्दे को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो देश आतंकवाद से जुड़े आरोपों का सामना करता रहा है, उसके लिए शांति की पहल का नेतृत्व करना मुश्किल होता है। उन्होंने पश्चिम एशिया में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को लगातार अधिक महत्व मिल रहा है।

    लालेह ने सऊदी अरब की सुरक्षा से जुड़े घटनाक्रम का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, सऊदी अरब पर हमले करने वालों के खिलाफ पाकिस्तान अपेक्षित भूमिका नहीं निभा पाया है। उन्होंने सऊदी क्राउन प्रिंस के साथ पाकिस्तान और तुर्की से जुड़े मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट का भी उल्लेख किया और कहा कि इस मामले में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

    BRICS सम्मेलन के दौरान भारत की सक्रिय कूटनीति और पश्चिम एशिया में बदलते समीकरणों के बीच पाकिस्तान की भूमिका पर बहस तेज है। ईरानी पत्रकार बसीम लालेह की टिप्पणियों ने इस चर्चा को और बढ़ा दिया है। वहीं, भारत की ओर से विभिन्न देशों के साथ संवाद और सहयोग बढ़ाने की कोशिशों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर बनी हुई है।

  • BRICS: नई दिल्ली घोषणापत्र पर ईरान को राजी करने के लिए करनी पड़ी मशक्कत

    BRICS: नई दिल्ली घोषणापत्र पर ईरान को राजी करने के लिए करनी पड़ी मशक्कत


    नई दिल्ली।
    ब्रिक्स देशों (BRICS Nations) ने एकतरफा टैरिफ, व्यापार प्रतिबंधों और संयुक्त राष्ट्र की मंजूरी के बिना लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों पर कड़ा रुख अपनाया है। शनिवार को सर्वसम्मति से जारी ‘नई दिल्ली घोषणापत्र-2026’ (New Delhi Declaration-2026’) में इन्हें वैश्विक व्यापार और आपूर्ति शृंखलाओं के लिए नुकसानदेह बताते हुए ऐसी कार्रवाइयों से बचने का आह्वान किया गया। वहीं नई दिल्ली डिक्लेरेशन पर ईरान (Iran) को तैयार करना आसान नहीं था। इसके लिए शनिवार सुबह 4 बजे तक मान-मनौव्वल और मशक्कत चलती रही।

    ब्रिक्स ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) (World Trade Organization (WTO)) की विवाद निपटारा व्यवस्था बहाल करने और वैश्विक व्यापार व्यवस्था को अधिक न्यायसंगत बनाने पर जोर दिया। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक में विकासशील देशों की आवाज और हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग की।


    आतंकवाद किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं

    45 पन्नों और 140 बिंदुओं के नई दिल्ली घोषणापत्र का ईरान और यूएई ने भी समर्थन किया। इसमें ब्रिक्स देशों ने आतंकवाद के सभी रूपों की कड़ी निंदा की। कहा गया कि किसी भी वजह या मकसद से अंजाम दी गई आतंकवादी घटनाओं को उचित नहीं ठहराया जा सकता है। ब्रिक्स ने आतंकवाद, इसकी आर्थिक मदद, सीमा पार आतंकवाद और आतंकवादियों को सुरक्षित ठिकाना दिए जाने के खिलाफ मिलकर कार्रवाई करने की प्रतिबद्धता दोहराई। घोषणापत्र में कहा गया है कि आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। ब्रिक्स देशों ने ब्रिक्स काउंटर -टेररिज्म वर्किंग ग्रुप और उसके पांच उप-समूहों के काम की सराहना करते हुए आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई।


    पहलगाम हमले की निंदा

    साझा घोषणापत्र में 22 अप्रैल 2025 को जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे।


    स्थायी सदस्यता का समर्थन

    ब्रिक्स देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन भी दोहराया। घोषणापत्र में चीन और रूस ने भारत की बड़ी भूमिका के समर्थन की बात कही। यूएनएससी में सुधार को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा कि इसे अब और नहीं टाला जा सकता है।


    इजरायल को झटका

    यूएई फलस्तीन समस्या के द्वि राष्ट्र समाधान का समर्थक है। ईरान भी इस प्रस्ताव के पक्ष में रहा। हालांकि, ब्रिक्स का यह प्रस्ताव इजरायल के लिए कूटनीतिक झटका है।


    परमाणु हथियार मुक्त क्षेत्र घोषित हो मध्य एशिया

    नई दिल्ली घोषणा में समूचे मध्य एशिया को परमाणु हथियारों से मुक्त क्षेत्र घोषित करने का भी प्रस्ताव है। यदि संयुक्त राष्ट्र किसी क्षेत्र को परमाणु हथियारों से मुक्त क्षेत्र घोषित करता है तो वहां परमाणु हथियारों का निर्माण और वितरण निषेध होता है। ईरान पर अमेरिकी हमलों के मद्देनजर यह एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव है।


    कैसे राजी हुआ ईरान

    ब्रिक्स में संयुक्त बयान पर यूएई और ईरान आखिर कैसे राजी हुए, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर तो कुछ नहीं कहा गया लेकिन सूत्रों का दावा है कि ईरान संयुक्त बयान में फलस्तीन को लेकर महत्वपूर्ण प्रस्ताव जोड़ने की शर्त पर माना। इन शर्तों में फलस्तीन को संयुक्त राष्ट्र का पूर्ण सदस्य घोषित करने की मांग प्रमुख रूप से शामिल है। यूएई ने भी इनका समर्थन किया। इसके बाद ईरान और यूएई की केमिस्ट्री में बदलाव दिखा।

    सूत्रों के अनुसार, एकमत करने के लिए भारत ने सभी पक्षों से शनिवार सुबह चार बजे तक बात की। दिल्ली घोषणा पत्र के प्रस्ताव संख्या 31 में कहा गया है कि हम इस बात की पुष्टि करते हैं कि इजरायल-फलस्तीन संघर्ष का सही और स्थायी समाधान शांतिपूर्ण तरीकों से ही हासिल किया जा सकता है। ब्रिक्स सभी वैश्विक संगठनों में फलस्तीन के सही प्रतिनिधित्व की जरूरत को मानता है जिसमें विश्व बैंक, आईएमएफ जैसी वित्तीय संस्थाएं भी शामिल हैं।

  • भारत मंडपम के ब्रिक्स मीडिया सेंटर में देशी-विदेशी मेहमानों के लिए भारतीय स्वाद के साथ वैश्विक व्यंजनों की खास व्यवस्था

    भारत मंडपम के ब्रिक्स मीडिया सेंटर में देशी-विदेशी मेहमानों के लिए भारतीय स्वाद के साथ वैश्विक व्यंजनों की खास व्यवस्था

    नई दिल्ली ।दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में देश-विदेश से पहुंचे मेहमानों और पत्रकारों के लिए भोजन की विशेष व्यवस्था की गई है। मीडिया सेंटर में भारतीय व्यंजनों के साथ अलग-अलग देशों और क्षेत्रों के पसंदीदा वैश्विक व्यंजन भी परोसे जा रहे हैं। इस पूरी व्यवस्था की जिम्मेदारी आईटीसी होटल्स की ओर से संभाली जा रही है।

    शिखर सम्मेलन के लिए तैयार किए गए मेन्यू में भारतीय स्वाद को प्रमुख स्थान दिया गया है। इसके साथ ही चाइनीज और वेस्टर्न कुजीन को भी शामिल किया गया है, ताकि अलग-अलग देशों से आने वाले प्रतिभागियों को अपनी पसंद के अनुसार भोजन मिल सके। मेन्यू तैयार करते समय अंतरराष्ट्रीय मेहमानों की विविध पसंद को ध्यान में रखा गया है।

    आईटीसी की कॉर्पोरेट शेफ मनीषा के अनुसार, सम्मेलन के दौरान आईटीसी के विभिन्न ब्रांड्स के व्यंजनों को भी प्रदर्शित किया जा रहा है। इनमें बुखारा, दम पुख्त, दक्षिण तथा कबाब एंड करीज जैसे ब्रांड्स के व्यंजन शामिल हैं। पिछले डेढ़ दिन से इन व्यंजनों को प्रतिभागियों के सामने पेश किया जा रहा है, ताकि वे भारतीय पाक परंपरा के अलग-अलग स्वाद का अनुभव कर सकें।

    मनीषा ने बताया कि इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन के लिए भोजन तैयार करना एक चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी है, लेकिन यह देश के व्यंजनों को सामने रखने का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि इससे पहले जी20 और एआई समिट जैसे बड़े आयोजनों में भी आईटीसी की ओर से भोजन परोसा गया था। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए चुना जाना उनके लिए गर्व की बात है।

    उन्होंने बताया कि आईटीसी के पूरे भारत में करीब 140 होटल हैं और बड़े आयोजनों के दौरान अलग-अलग स्थानों से विशेषज्ञ शेफ को एक साथ लाया जाता है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में 100 से अधिक शेफ मेन्यू तैयार करने और भोजन बनाने की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

    आईटीसी होटल के एरिया शेफ राजदीप कपूर ने भी मेहमानों का भारतीय भोजन का आनंद लेने के लिए स्वागत किया। वहीं, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में आईटीसी होटल्स के प्रतिनिधि रजनीश मल्लर ने बताया कि मीडिया सेंटर में अंतरराष्ट्रीय और घरेलू मीडिया से जुड़े लोग मौजूद हैं। उनके अनुसार, मेन्यू को इस तरह तैयार किया गया है कि भारतीय व्यंजनों की विशेषता के साथ वैश्विक स्वाद और पसंद को भी जगह मिल सके।

    मेन्यू में भारतीय भोजन और आरामदायक भोजन के विकल्पों के साथ विभिन्न क्षेत्रों के व्यंजनों को शामिल करने की कोशिश की गई है। इसका उद्देश्य अलग-अलग देशों से आए मेहमानों की भोजन संबंधी पसंद को ध्यान में रखते हुए विविध विकल्प उपलब्ध कराना है।

    आईटीसी की स्थापना 1910 में इंपीरियल टोबैको कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड के नाम से हुई थी। वर्ष 1970 में इसका नाम इंडिया टोबैको कंपनी लिमिटेड किया गया और 1974 में कंपनी का नाम बदलकर आईटीसी लिमिटेड कर दिया गया। कंपनी के होटल कारोबार की शुरुआत 1975 में चेन्नई में पहली प्रॉपर्टी के साथ हुई थी।

    वर्तमान में आईटीसी होटल्स और वेलकम होटल जैसे ब्रांड्स के तहत 150 से अधिक प्रॉपर्टीज संचालित की जाती हैं। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भी कंपनी की पाक कला से जुड़ी टीम भारतीय व्यंजनों और वैश्विक कुजीन के जरिए मेहमानों के लिए भोजन की व्यवस्था संभाल रही है।

  • BRICS शिखर सम्मेलन में साझा घोषणापत्र पर बनी सहमति, भारत ने ईरान-UAE तनाव के बीच कूटनीतिक प्रयास तेज किए

    BRICS शिखर सम्मेलन में साझा घोषणापत्र पर बनी सहमति, भारत ने ईरान-UAE तनाव के बीच कूटनीतिक प्रयास तेज किए


    नई दिल्ली ।
    भारत की मेजबानी में नई दिल्ली में BRICS Summit 2026 की शुरुआत हो गई है। दो दिवसीय शिखर सम्मेलन में भारत के साथ रूस, चीन, ब्राजील और BRICS के अन्य सदस्य देशों के शीर्ष नेता हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन के बीच साझा घोषणापत्र को लेकर सदस्य देशों के बीच सहमति बनने की खबर सामने आई है।

    साझा घोषणापत्र में किसी एक देश का सीधे तौर पर नाम लिए जाने की संभावना नहीं है। इसके बजाय किसी भी देश की ओर से किए जाने वाले एकतरफा युद्ध की निंदा किए जाने पर जोर दिया जा रहा है। सदस्य देशों के बीच इस विषय पर सहमति बनने के संकेत मिले हैं। घोषणापत्र को शनिवार को अंतिम मंजूरी दिए जाने की संभावना है और इसके शाम करीब चार बजे जारी होने की बात कही गई है।

    पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच BRICS सम्मेलन का कूटनीतिक महत्व भी बढ़ गया है। सदस्य देशों की ओर से ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच मतभेद कम करने तथा साझा सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है। दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय संघर्ष के कारण तनाव की स्थिति बनी हुई है।

    BRICS में भारत, रूस, चीन, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, ईरान, इंडोनेशिया, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में तनाव बना हुआ है, समूह के मंच पर सदस्य देशों के बीच सहमति बनाने की कोशिश महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    इसी बीच भारत दौरे पर पहुंचे ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अमेरिका और इजराइल को लेकर कड़ा रुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ईरान दबाव और धमकी के आगे आत्मसमर्पण नहीं करेगा। उनका कहना था कि तेहरान अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए मजबूती से खड़ा रहेगा।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मसूद पेजेश्कियान के बीच भी मुलाकात हुई। बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने सुरक्षित नौवहन और नाविकों की सुरक्षा पर जोर दिया। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से निकालने की आवश्यकता पर बल दिया।

    मुलाकात के दौरान भारत और ईरान के द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा हुई। पश्चिम एशिया में मौजूदा तनाव के बीच दोनों देशों के बीच बातचीत में सुरक्षित नौवहन और नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुख रहा।

    BRICS Summit 2026 भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत ने वर्ष 2026 में चौथी बार इस समूह की अध्यक्षता संभाली है। इसी वर्ष BRICS अपनी स्थापना के 20 वर्ष भी पूरे कर रहा है।

    शिखर सम्मेलन के दौरान साझा घोषणापत्र पर सहमति बनने की प्रक्रिया को सदस्य देशों के बीच सामूहिक रुख तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है। प्रस्तावित घोषणापत्र में किसी देश को सीधे निशाना बनाने के बजाय एकतरफा युद्ध की निंदा करने की बात सामने आई है।

    ईरान और UAE के बीच तनाव के बीच सदस्य देशों के बीच सहमति बनाने की कोशिश तथा प्रधानमंत्री मोदी और ईरानी राष्ट्रपति की बातचीत ने सम्मेलन के कूटनीतिक पक्ष को भी प्रमुखता दी है। अब साझा घोषणापत्र को अंतिम मंजूरी मिलने और उसके जारी होने का इंतजार है।

  • ब्रिक्स की 20वीं वर्षगांठ पर पीएम मोदी ने रखा अगले दो दशकों का रोडमैप, निरंतरता और कार्यान्वयन तंत्र का प्रस्ताव

    ब्रिक्स की 20वीं वर्षगांठ पर पीएम मोदी ने रखा अगले दो दशकों का रोडमैप, निरंतरता और कार्यान्वयन तंत्र का प्रस्ताव

    नई दिल्ली ।भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का औपचारिक आगाज हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदस्य देशों के प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए सम्मेलन का उद्घाटन किया। अपने संबोधन में उन्होंने ब्रिक्स की भूमिका को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह समूह किसी के विरुद्ध नहीं है, बल्कि सभी का सम्मान करने और साथ लेकर आगे बढ़ने की सोच के साथ काम करता है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता पीपल सेंट्रिक और ह्यूमैनिटी फर्स्ट अप्रोच पर आधारित रही है। इस दौरान लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने कहा कि भारत ने इन प्राथमिकताओं के जरिए ब्रिक्स सहयोग को सामान्य जन से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया है।

    उन्होंने बताया कि भारत की अध्यक्षता के दौरान 350 से अधिक बैठकों का आयोजन किया गया और करीब 30 शहरों में सदस्य देशों की टीमों का स्वागत किया गया। प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स अध्यक्षता को सफल बनाने में सक्रिय योगदान और समर्थन देने के लिए सभी सदस्य देशों का आभार भी जताया।

    ब्रिक्स के 20 वर्ष पूरे होने को प्रधानमंत्री मोदी ने संगठन के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि मानव जीवन में 20 वर्ष की उम्र परिपक्वता और जिम्मेदारी के नए चरण की शुरुआत का संकेत देती है। इसी तरह ब्रिक्स भी अपने विकास के ऐसे दौर में पहुंच चुका है, जहां सपनों के साथ जिम्मेदारियां जुड़ती हैं और सामर्थ्य को नई दिशा देने की जरूरत होती है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 20 वर्षों में ब्रिक्स ने वैश्विक मंच पर अपनी अलग पहचान बनाई है। सदस्य देश एक-दूसरे के दृष्टिकोण का सम्मान करते हुए आगे बढ़ते हैं। उन्होंने जोर दिया कि ब्रिक्स की सोच किसी के खिलाफ खड़े होने की नहीं, बल्कि सभी को साथ लेकर आगे बढ़ने की है।

    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने अगले 20 वर्षों के लिए नए और महत्वाकांक्षी एजेंडे पर काम करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि अब ब्रिक्स के भीतर बनी एकता और सहमति को वैश्विक मंच पर ठोस परिणामों में बदलने का समय है। इसके लिए संगठन को अपनी कार्यप्रणाली पर भी ध्यान देना होगा।

    प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स की अध्यक्षता हर वर्ष बदलने की व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि अध्यक्षता बदलने से संस्थागत गति प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इसी उद्देश्य से उन्होंने ब्रिक्स में निरंतरता और कार्यान्वयन तंत्र विकसित करने का प्रस्ताव रखा।

    उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था के तहत ट्रोइका के माध्यम से ब्रिक्स की विभिन्न पहलों और उनके परिणामों का फॉलोअप किया जा सकेगा। इससे अलग-अलग अध्यक्षताओं के बीच निरंतरता बनाए रखने में मदद मिलेगी और पहले से तय पहलों के क्रियान्वयन पर भी ध्यान दिया जा सकेगा।

    18वें शिखर सम्मेलन के उद्घाटन संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने इस तरह ब्रिक्स के मौजूदा स्वरूप, भारत की अध्यक्षता की प्राथमिकताओं और संगठन के अगले 20 वर्षों की दिशा पर अपना दृष्टिकोण रखा। उनके संबोधन में सहयोग, निरंतरता, कार्यान्वयन और वैश्विक स्तर पर ठोस परिणाम हासिल करने पर विशेष जोर रहा।

  • भारत मंडपम में शुरू हुआ 18वां BRICS शिखर सम्मेलन, पीएम मोदी ने सदस्य देशों के योगदान और समर्थन के लिए जताया आभार

    भारत मंडपम में शुरू हुआ 18वां BRICS शिखर सम्मेलन, पीएम मोदी ने सदस्य देशों के योगदान और समर्थन के लिए जताया आभार

    नई दिल्ली ।भारत की मेजबानी में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन का शनिवार को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आधिकारिक आगाज हो गया। दो दिन तक चलने वाला यह सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को आयोजित किया जा रहा है। इसमें BRICS देशों के साथ पार्टनर देशों के नेता भी हिस्सा ले रहे हैं। इसके अलावा आउटरीच कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किए गए देशों के प्रतिनिधि भी सम्मेलन में पहुंचे हैं।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के साथ शिखर सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत हुई। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारत की BRICS अध्यक्षता को सफल बनाने में सभी देशों की ओर से मिले सक्रिय योगदान और समर्थन के लिए आभार जताया।

    पीएम मोदी ने कहा कि इस वर्ष का BRICS शिखर सम्मेलन एक ऐतिहासिक पड़ाव है। इसकी वजह यह है कि इस वर्ष BRICS अपनी स्थापना के 20 साल पूरे कर रहा है। उन्होंने संगठन की दो दशक लंबी यात्रा का उल्लेख करते हुए इसके अगले चरण को लेकर भी अपनी बात रखी।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि इंसानी जिंदगी में 20 साल की उम्र परिपक्वता और जिम्मेदारी के एक नए दौर की शुरुआत होती है। इसी संदर्भ में उन्होंने BRICS की 20 साल की यात्रा को भी महत्वपूर्ण बताया और आगे की दिशा तय करने की जरूरत पर जोर दिया।

    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान सहयोग और समर्थन देने वाले सभी प्रतिभागी देशों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि भारत की अध्यक्षता को सफल बनाने में सभी के सक्रिय योगदान की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

    18वां BRICS शिखर सम्मेलन ऐसे समय आयोजित हो रहा है जब संगठन अपनी स्थापना के दो दशक पूरे होने के पड़ाव पर है। सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों और साझेदार देशों के नेता एक साथ मौजूद हैं। इसके अलावा आउटरीच के लिए आमंत्रित देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी भी हो रही है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS की आगे की यात्रा के संदर्भ में अगले 20 वर्षों के लिए नए एजेंडे पर काम करने की जरूरत बताई। उनके संबोधन का प्रमुख संदेश संगठन की अब तक की यात्रा के बाद भविष्य की प्राथमिकताओं और दिशा को लेकर रहा।

    भारत मंडपम में आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन में BRICS देशों के साथ पार्टनर देशों की भागीदारी हो रही है। सम्मेलन के लिए आमंत्रित प्रतिनिधियों की मौजूदगी से भी इसका दायरा व्यापक हुआ है।

    BRICS के 20 वर्ष पूरे होने के मौके पर आयोजित यह शिखर सम्मेलन भारत की मेजबानी में हो रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में इस अवसर को संगठन की यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में रेखांकित किया।

    उन्होंने भारत की अध्यक्षता के दौरान मिले सहयोग के लिए सभी का आभार व्यक्त करते हुए संगठन के आगामी वर्षों की दिशा पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता बताई। उनके मुताबिक 20 साल की यात्रा के बाद BRICS के लिए आगे के दो दशकों को ध्यान में रखते हुए नए एजेंडे पर काम करना होगा।

    शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में जारी रहेगा। इसमें BRICS सदस्य देशों, पार्टनर देशों और आउटरीच के लिए आमंत्रित देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। सम्मेलन के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के साथ इसकी औपचारिक शुरुआत हुई।

  • ब्रिक्स सम्मेलन में अफ्रीकी कारोबारी बोले, पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत ‘विकसित भारत 2047’ लक्ष्य समय से पहले हासिल करेगा

    ब्रिक्स सम्मेलन में अफ्रीकी कारोबारी बोले, पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत ‘विकसित भारत 2047’ लक्ष्य समय से पहले हासिल करेगा

    नई दिल्ली ।भारत में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बीच अफ्रीकी कारोबारियों ने देश की आर्थिक प्रगति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की है। नाइजीरिया के डिप्लोमैटिक कॉरेस्पोंडेंट्स एसोसिएशन के चेयरमैन इदेहाई फ्रेडरिक ने कहा कि भारत जिस तेजी से आगे बढ़ रहा है, उसे देखते हुए देश ‘विकसित भारत 2047’ का लक्ष्य निर्धारित समय से पहले हासिल कर सकता है।

    इदेहाई फ्रेडरिक के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक शानदार नेता हैं और उनके पास देश के विकास को लेकर बड़ा विजन है। उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था में हो रही तेज प्रगति प्रधानमंत्री के नेतृत्व में उठाए जा रहे कदमों, नीतियों और साझेदारी में दिखाई देती है। उनके मुताबिक ब्रिक्स की अध्यक्षता के दौरान भी भारत के नेतृत्व और दृष्टिकोण का प्रभाव स्पष्ट नजर आ रहा है।

    फ्रेडरिक ने भारत और नाइजीरिया के संबंधों को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देश दशकों से मित्र रहे हैं और दोनों के बीच कारोबार का भी बड़ा आधार है। उन्होंने भारत को नाइजीरिया के लिए एक महत्वपूर्ण साझेदार बताते हुए दोनों देशों के बीच व्यापार में आगे और बढ़ोतरी की उम्मीद जताई।

    उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। इसी आर्थिक प्रगति के आधार पर उनका मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को भारत लक्ष्य से पहले प्राप्त कर सकता है।

    ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान भारत और अफ्रीकी देशों के बीच संबंधों को लेकर भी चर्चा सामने आई। अबिसीनिया बिजनेस नेटवर्क के प्रबंध निदेशक डैनियल तिरुनेह ने भारत और इथियोपिया के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देश व्यापार, निवेश, नवाचार और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं।

    डैनियल तिरुनेह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इथियोपिया यात्रा का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार कुछ महीने पहले हुई इस यात्रा से भारत और इथियोपिया के संबंधों को नई ऊर्जा मिली। उन्होंने कहा कि इसका प्रभाव ब्रिक्स के मंच पर भी दिखाई दे रहा है और इथियोपिया के लिए यह एक महत्वपूर्ण मंच है।

    भारत इस वर्ष 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। ब्रिक्स में वर्तमान में 11 सदस्य देश और 10 साझेदार देश हैं। सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष और प्रतिनिधि नई दिल्ली पहुंच रहे हैं। सम्मेलन के दौरान विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी के बीच भारत की भूमिका और उसकी साझेदारियों पर भी ध्यान केंद्रित है।

    ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को देखते हुए राजधानी नई दिल्ली में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था के लिए 15,000 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। इसके अलावा पैरामिलिट्री फोर्स की 200 कंपनियां भी सुरक्षा व्यवस्था में लगाई गई हैं।

    अफ्रीकी कारोबारियों की टिप्पणियों में भारत की आर्थिक प्रगति, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और ब्रिक्स के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को प्रमुखता दी गई। नाइजीरिया और इथियोपिया से जुड़े प्रतिनिधियों ने भारत के साथ व्यापार, निवेश, नवाचार और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को महत्वपूर्ण बताया।

    इस बीच नई दिल्ली में हो रहा ब्रिक्स शिखर सम्मेलन भारत की मेजबानी में आयोजित हो रहा है। सदस्य और साझेदार देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी के कारण राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है।

  • भारत-बांग्लादेश संबंधों पर बढ़ी समीक्षा, बंदरगाह नीतियों और ब्रिक्स सम्मेलन में निमंत्रण नहीं मिलने पर BNP नाराज

    भारत-बांग्लादेश संबंधों पर बढ़ी समीक्षा, बंदरगाह नीतियों और ब्रिक्स सम्मेलन में निमंत्रण नहीं मिलने पर BNP नाराज

    नई दिल्ली ।बांग्लादेश ने भारत के साथ हुए 101 समझौतों की समीक्षा शुरू कर दी है। सत्ताधारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी BNP के मुख्य व्हिप नूरुल इस्लाम मोनी ने बताया कि सरकार इन सभी समझौतों की जांच कर रही है। उन्होंने संकेत दिया कि समीक्षा के बाद कुछ फैसलों का असर जल्द सामने आ सकता है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किन समझौतों में बदलाव किया जाएगा और किन्हें समाप्त करने पर विचार होगा।

    नूरुल इस्लाम मोनी ने संसद सत्र समाप्त होने के बाद पत्रकारों से बातचीत में भारत के साथ हुए समझौतों को लेकर सरकार की स्थिति बताई। उन्होंने कहा कि भारत के साथ किए गए सभी 101 समझौतों की समीक्षा की जा रही है। जब उनसे पूछा गया कि क्या इनमें से कुछ समझौते खत्म किए जा सकते हैं, तो उन्होंने कहा कि इसका जवाब जल्द सामने आएगा। हालांकि, उन्होंने किसी विशेष समझौते का नाम नहीं बताया।

    BNP नेता के मुताबिक, सरकार पिछली सरकार के कार्यकाल में लिए गए उन फैसलों की भी दोबारा समीक्षा कर रही है, जिन्हें देश के हित में सही नहीं माना गया था। उनका कहना है कि सरकार देश के हित को सबसे ऊपर रखकर पुराने फैसलों पर विचार कर रही है। ऐसे समझौतों में बदलाव की संभावना जताई गई है, जिनसे बांग्लादेश को नुकसान होने का आकलन किया जा रहा है।

    भारत के साथ हुए समझौतों की समीक्षा के बीच बंदरगाहों से जुड़े पुराने फैसले भी चर्चा में हैं। नूरुल इस्लाम मोनी ने चट्टोग्राम और मोंगला बंदरगाहों के इस्तेमाल से संबंधित नीतियों पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि पहले कुछ ऐसे नियम बनाए गए थे, जिनसे विदेशी जहाजों को अधिक फायदा मिला। उन्होंने कहा कि आगे होने वाले फैसलों में बांग्लादेश की जरूरतों और देश की संप्रभुता को सबसे अधिक महत्व दिया जाएगा।

    हालांकि, अभी तक सरकार की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि 101 समझौतों में से किन पर सबसे पहले कार्रवाई की जाएगी। इसी तरह यह भी सामने नहीं आया है कि किन समझौतों को बदला या समाप्त किया जा सकता है। BNP नेता ने केवल इतना संकेत दिया है कि समीक्षा के बाद कुछ फैसले जल्द सामने आ सकते हैं।

    इस बीच ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर भी BNP ने नाराजगी जताई है। नूरुल इस्लाम मोनी ने दिल्ली में हो रही बैठक में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान को आमंत्रित नहीं किए जाने पर असंतोष जाहिर किया। उन्होंने इसे बांग्लादेश जैसे स्वतंत्र देश के लिए निराशाजनक बताया।

    ब्रिक्स सम्मेलन में निमंत्रण नहीं मिलने के मुद्दे पर भी मोनी ने भारत की ओर इशारा करते हुए अपनी नाराजगी व्यक्त की। इस तरह भारत के साथ 101 समझौतों की समीक्षा और ब्रिक्स सम्मेलन में निमंत्रण नहीं मिलने का मुद्दा बांग्लादेश की मौजूदा राजनीतिक चर्चा में प्रमुखता से सामने आया है।

    फिलहाल समीक्षा की प्रक्रिया जारी है और किसी विशेष समझौते को बदलने या खत्म करने का आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है। BNP नेता के अनुसार, आने वाले समय में सरकार के फैसलों से यह स्पष्ट हो सकता है कि भारत के साथ हुए समझौतों को लेकर बांग्लादेश की आगे की नीति किस दिशा में जाती है।

  • BRICS Summit 2026 केदिल्ली पहुंचे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, प्रधानमंत्री मोदी से शाम को द्विपक्षीय बैठक में कई मुद्दों पर होगी चर्चा

    BRICS Summit 2026 केदिल्ली पहुंचे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, प्रधानमंत्री मोदी से शाम को द्विपक्षीय बैठक में कई मुद्दों पर होगी चर्चा

    नई दिल्ली ।18वें BRICS शिखर सम्मेलन 2026 में शामिल होने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शनिवार को दिल्ली पहुंच गए। उनके भारत आगमन पर केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने दिल्ली के पालम हवाई अड्डे पर उनका स्वागत किया। शी जिनपिंग के दिल्ली पहुंचने के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी प्रस्तावित द्विपक्षीय बैठक को लेकर भी गतिविधियां तेज हो गई हैं।

    जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच आज शाम करीब पौने छह बजे द्विपक्षीय बैठक होने वाली है। BRICS शिखर सम्मेलन से इतर होने वाली इस मुलाकात में दोनों देशों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

    शी जिनपिंग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत पहुंचे हैं। उनके साथ चीन का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी दिल्ली आया है। इस प्रतिनिधिमंडल में चीन कम्युनिस्ट पार्टी के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य काई ची और चीन के विदेश मंत्री वांग यी शामिल हैं।

    काई ची चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के जनरल ऑफिस के निदेशक भी हैं। शी जिनपिंग के साथ उनकी मौजूदगी को दोनों देशों के बीच होने वाली महत्वपूर्ण बातचीत के संदर्भ में देखा जा रहा है।

    प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की द्विपक्षीय बैठक में सीमा विवाद और दोनों देशों के संबंधों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना है। इसके अलावा व्यापार, कृषि क्षेत्र और बाजार में आपूर्ति श्रृंखला से संबंधित विषय भी चर्चा में शामिल हो सकते हैं।

    बैठक के दौरान आर्थिक और तकनीकी सहयोग से जुड़े मुद्दों पर भी बातचीत होने की उम्मीद है। इसके साथ ही वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC पर मजबूत सैन्य सुरक्षा व्यवस्था और आयात से जुड़े विषयों पर भी दोनों नेताओं के बीच चर्चा हो सकती है।

    BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए कई देशों के प्रमुख नेता पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 11 सितंबर को दिल्ली पहुंचे थे। भारत पहुंचने पर केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने उनका स्वागत किया था।

    ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान भी BRICS शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए दिल्ली पहुंचे हैं। उनका स्वागत केंद्रीय राज्य मंत्री शंतनु ठाकुर ने किया था। इस तरह शिखर सम्मेलन के लिए कई प्रमुख देशों के नेताओं की दिल्ली में मौजूदगी हो चुकी है।

    शी जिनपिंग के भारत दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के साथ होने वाली बैठक पर विशेष ध्यान रहेगा। दोनों नेताओं के बीच बातचीत में द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े विभिन्न मुद्दों के साथ व्यापार, आर्थिक और तकनीकी विषयों पर चर्चा की संभावना है।

    सीमा से जुड़े विषय और LAC पर सुरक्षा व्यवस्था भी प्रस्तावित बातचीत के महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा कृषि, आपूर्ति श्रृंखला और आयात से संबंधित विषयों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।

    फिलहाल शी जिनपिंग के दिल्ली पहुंचने के बाद BRICS शिखर सम्मेलन की गतिविधियों के बीच प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठक अहम कार्यक्रमों में शामिल है। दोनों नेताओं की मुलाकात आज शाम करीब पौने छह बजे प्रस्तावित है, जिसके दौरान दोनों देशों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत होने की उम्मीद है।

  • BRICS सम्मेलन के बीच अमेरिका का चीन पर गंभीर आरोप, जॉर्डन में सैन्य अड्डे पर हमले से सैटेलाइट तस्वीरों का जोड़ा संबंध

    BRICS सम्मेलन के बीच अमेरिका का चीन पर गंभीर आरोप, जॉर्डन में सैन्य अड्डे पर हमले से सैटेलाइट तस्वीरों का जोड़ा संबंध

    नई दिल्ली ।अमेरिका और चीन के बीच तनाव के बीच जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हुए मिसाइल हमले को लेकर एक नया आरोप सामने आया है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान को चीन से जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे की हाई-क्वालिटी सैटेलाइट तस्वीरें मिली थीं। अधिकारियों के अनुसार, इन तस्वीरों से ईरान को सैन्य अड्डे और वहां मौजूद अमेरिकी सैनिकों की स्थिति को समझने में मदद मिल सकती थी।

    अमेरिकी अधिकारियों ने जॉर्डन में मौजूद मुवफ्फक सलती एयर बेस पर हुए हमले और चीन से मिली तस्वीरों के बीच संबंध होने की बात कही है। उनके अनुसार, ईरान ने इस सैन्य अड्डे की साफ और विस्तृत सैटेलाइट तस्वीरें हासिल की थीं। माना जा रहा है कि ऐसी तस्वीरों से बेस की स्थिति और वहां की गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटाना आसान हो सकता था।

    यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाकर किए गए हमले में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई थी, जबकि चार अन्य सैनिक घायल हुए थे। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, सैनिकों के रहने वाली जगह पर ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया गया था। हमले के समय कई अमेरिकी सैनिक सो रहे थे।

    यह हमला 24 घंटे के भीतर सैन्य अड्डे पर हुए तीन मिसाइल हमलों में से एक था। अप्रैल में हुए सीजफायर के बाद यह पहली ऐसी घटना थी, जिसमें अमेरिकी सैनिकों की जान गई। इसी वजह से हमले से जुड़ी जानकारी के स्रोत और उससे संबंधित संभावित सहायता को लेकर अमेरिकी स्तर पर जांच और सवालों का सिलसिला जारी है।

    हालांकि, अमेरिका ने यह दावा नहीं किया है कि चीन की सरकार ने सीधे तौर पर ईरान को अमेरिकी सैनिकों पर हमला करने में मदद की थी। अमेरिकी अधिकारियों ने चीन के सामने सैटेलाइट तस्वीरों से संबंधित सवाल उठाए थे। इसके जवाब में चीन ने इन आरोपों को खारिज कर दिया।

    चीन ने अमेरिका से अपने आरोपों के समर्थन में सबूत भी मांगे हैं। अमेरिका की ओर से अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि चीन की कौन-सी कंपनी या संस्था ने कथित तौर पर ये सैटेलाइट तस्वीरें ईरान को उपलब्ध कराई थीं। इसलिए तस्वीरों की आपूर्ति से जुड़े संस्थानों की पहचान को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

    अमेरिका इससे पहले भी ईरान को सैटेलाइट तस्वीरें उपलब्ध कराने के आरोप में चीन की तीन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई कर चुका है। ऐसे में जॉर्डन के सैन्य अड्डे से जुड़ा नया आरोप दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव के बीच सामने आया है।

    पूरे मामले में मुख्य सवाल यह है कि जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे की उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें ईरान तक किस माध्यम से पहुंचीं और उनका इस्तेमाल किस तरह किया गया। अमेरिकी अधिकारियों ने तस्वीरों और हमले के बीच संबंध की संभावना जताई है, जबकि चीन ने सीधे तौर पर लगाए गए आरोपों से इनकार किया है।

    जॉर्डन में हुए हमले में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत और चार सैनिकों के घायल होने के बाद यह मामला अमेरिका के लिए सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बन गया है। वहीं, चीन पर लगे आरोपों से अमेरिका और चीन के बीच तनाव बढ़ने की स्थिति भी बनी हुई है।