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  • सीएम डॉ. मोहन यादव आज हटा में महिला सम्मेलन में शामिल, करोड़ों के विकास कार्यों का करेंगे भूमिपूजन और लोकार्पण

    सीएम डॉ. मोहन यादव आज हटा में महिला सम्मेलन में शामिल, करोड़ों के विकास कार्यों का करेंगे भूमिपूजन और लोकार्पण


    दमोह । दमोह जिले की हटा विधानसभा क्षेत्र में बुधवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहुंच रहे हैं। वे अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित महिला सशक्तिकरण सम्मेलन में शामिल होंगे। सम्मेलन में स्व सहायता समूह और लाड़ली बहना योजना की हितग्राही महिलाएं बड़ी संख्या में मौजूद रहेंगी। मुख्यमंत्री सबसे पहले दूल्हा देव शिव मंदिर में दर्शन करेंगे और उसके बाद सभा स्थल पहुंचकर कार्यक्रम में भाग लेंगे।

    कलेक्टरसुधीर कुमार कोचरने बताया कि इस मौके पर हटा विधानसभा क्षेत्र में करोड़ों रुपये के विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण भी किया जाएगा। प्रमुख विकास कार्यों में मड़ियादो से रजपुरा मार्ग का निर्माण 48.89 करोड़ रुपए मड़ियादो से बर्धा किशनगढ़ मार्ग 74.44 करोड़ रुपए और एनडीबी योजना के तहत हटा से गैसाबाद सिमरिया मार्ग एसएच 55 के शोल्डर उन्नयन एवं चौड़ीकरण का कार्य 231.97 करोड़ रुपए शामिल हैं।

    इसके अतिरिक्त हटा से पटेरा कुम्हारी मार्ग के शहरी हिस्से में 4 लेन चौड़ीकरण 5.11 करोड़ रुपए हटा शहर में रेस्ट हाउस के पास दुधिया नाले पर पुल निर्माण 8.44 करोड़ रुपए हटा ब्लॉक अंतर्गत हिनौता मुराछ पाली मार्ग पर सुनार नदी पर पुल निर्माण 13.26 करोड़ रुपए और जिरौध सिमरी मार्ग में व्यारमा नदी पर पुल निर्माण 6.87 करोड़ रुपए का भूमिपूजन और लोकार्पण किया जाएगा।

    कलेक्टर कोचर ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को पत्र लिखकर कार्यक्रम की तैयारियों को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए हैं। इसमें संभागीय प्रबंधक एमपीआरडीसी सागर कार्यपालन यंत्री लोक निर्माण विभाग सेतु संभाग सागर अधीक्षण यंत्री मध्यप्रदेश विद्युत कंपनी दमोह कार्यपालन यंत्री लोक निर्माण विभाग दमोह और मुख्य नगर पालिका अधिकारी हटा शामिल हैं।

    मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन स्थानीय जनता और हितग्राही महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण अवसर होगा। इससे हटा विधानसभा क्षेत्र में सड़क पुल और शहरी बुनियादी ढांचे का कायाकल्प होगा और महिला सशक्तिकरण को भी नई ऊर्जा मिलेगी।

  • रिंग रोड निर्माण में दर्दनाक हादसा: पुल पिलर की सेंट्रिंग गिरने से मजदूर की मौत, दो घायल

    रिंग रोड निर्माण में दर्दनाक हादसा: पुल पिलर की सेंट्रिंग गिरने से मजदूर की मौत, दो घायल


    जबलपुर । मध्य प्रदेश के जबलपुर में रविवार देर रात रिंग रोड निर्माण के दौरान एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जिसने निर्माण कार्यों में मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। न्यू भेड़ाघाट क्षेत्र के ललपुर गांव के पास निर्माणाधीन पुल के पिलर की सेंट्रिंग अचानक गिर गई, जिससे वहां काम कर रहे मजदूर उसकी चपेट में आ गए। इस हादसे में पश्चिम बंगाल निवासी एक मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए।

    हादसे में जान गंवाने वाले मजदूर की पहचान शेख नैरुद्दीन के रूप में हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक रात के समय पुल के पिलर पर सेंट्रिंग का काम चल रहा था, तभी अचानक संतुलन बिगड़ने से भारी ढांचा गिर पड़ा। सेंट्रिंग के नीचे काम कर रहे मजदूर संभल भी नहीं पाए और मलबे में दब गए। घटना के तुरंत बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और अन्य मजदूरों ने शोर मचाकर मदद की गुहार लगाई।

    हादसे में घायल हुए मजदूरों के नाम राहिल और राजेश्वर बताए जा रहे हैं। दोनों को हाथ और पैरों में गंभीर चोटें आई हैं। घायलों को तत्काल मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत खतरे से बाहर बताई है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार दोनों मजदूर फिलहाल निगरानी में हैं और उनका इलाज जारी है।

    घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। क्षेत्र को घेराबंदी कर सुरक्षित किया गया और एहतियातन रिंग रोड पर चल रहा निर्माण कार्य तुरंत रोक दिया गया। प्रारंभिक जांच में सेंट्रिंग के गिरने की वजह तकनीकी खामी या लापरवाही मानी जा रही है, हालांकि वास्तविक कारणों का पता विस्तृत जांच के बाद ही चल सकेगा।

    बताया जा रहा है कि रिंग रोड पर यह पुल भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की ओर से बनवाया जा रहा है। हादसे के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने निर्माण एजेंसी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पुल निर्माण कार्य में नाबालिगों से भी काम कराया जा रहा था और मजदूरों को बिना किसी सुरक्षा उपकरण के जोखिम भरे कार्य में लगाया गया था। हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट और अन्य आवश्यक सुरक्षा साधनों की कमी के आरोप भी सामने आए हैं।

    इस हादसे ने एक बार फिर निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी को उजागर कर दिया है। मजदूरों की जान की कीमत पर तेजी से काम पूरा करने की प्रवृत्ति पर सवाल उठने लगे हैं। प्रशासन ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। वहीं मृतक मजदूर के परिजनों को सूचना दे दी गई है और मुआवजे की प्रक्रिया पर भी विचार किया जा रहा है। कुल मिलाकर यह हादसा न सिर्फ एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि व्यवस्था के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है।

  • बांध से अचानक छोड़ा गया पानी, खेड़ी घाट में नदी के बीच फंसे 10 से ज्यादा मजदूर, टली बड़ी त्रासदी

    बांध से अचानक छोड़ा गया पानी, खेड़ी घाट में नदी के बीच फंसे 10 से ज्यादा मजदूर, टली बड़ी त्रासदी


    खंडवा जिले के खेड़ी घाट क्षेत्र में उस समय हड़कंप मच गयाजब ओंकारेश्वर बांध से अचानक बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण नर्मदा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया। इस दौरान रेलवे स्टेशन ओंकारेश्वर रोड से बड़वाह के बीच मोरटक्का-खेड़ी घाट पर चल रहे पुल निर्माण कार्य में लगे 10 से अधिक मजदूर और इंजीनियर नदी के बीच फंस गए। हालात कुछ ही पलों में गंभीर हो गएलेकिन स्थानीय नाविकों और गोताखोरों की सूझबूझ और तत्परता से सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। यदि पानी का बहाव कुछ और बढ़ जातातो यह घटना एक बड़ी जनहानि में बदल सकती थी।

    पुल निर्माण स्थल पर मची अफरातफरी


    खेड़ी घाट पर नर्मदा नदी पर पुराने पुल को तोड़कर मंगलम कंपनी द्वारा नए पुल का निर्माण किया जा रहा है। इसके लिए नदी के दोनों किनारों को जोड़ने वाली एप्रोच रोड बनाई गई हैपिलर खड़े किए जा रहे हैं और भारी मशीनें नदी के अंदर काम कर रही हैं। शनिवार को भी मजदूर रोज़ की तरह निर्माण कार्य में जुटे थे। इसी दौरान ओंकारेश्वर बांध से अचानक पानी छोड़े जाने से नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा और देखते ही देखते मजदूरों का रास्ता कट गया।पानी बढ़ते ही मौके पर अफरातफरी मच गई। कुछ मजदूर ऊंचे पिलरों और चट्टानों पर चढ़ गएजबकि कुछ लोग बहाव के बीच फंस गए। गनीमत यह रही कि आसपास मौजूद नाविकों को स्थिति की जानकारी मिल गई और उन्होंने तुरंत राहत कार्य शुरू किया।

    नाविकों ने दिखाया साहस


    स्थानीय नाविकों और गोताखोरों ने बिना देर किए अपनी जान जोखिम में डालकर सभी मजदूरों और इंजीनियरों को सुरक्षित बाहर निकाला। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसारअगर कुछ मिनट की भी देरी हो जातीतो पानी का बहाव इतना तेज हो सकता था कि किसी को बचाना मुश्किल हो जाता। इस त्वरित कार्रवाई से एक बड़ा हादसा टल गया।

    कंपनी प्रबंधन ने जताई नाराजगी


    मंगलम कंपनी के मैनेजर पंकज पटेल ने ओंकारेश्वर बांध प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बांध प्रबंधन जितना पानी छोड़े जाने की सूचना देता हैअसल में उससे कहीं ज्यादा पानी छोड़ा जाता है। इससे पहले भी कंपनी को इस कारण करोड़ों रुपये का नुकसान हो चुका है और इस बार तो मजदूरों की जान पर बन आई थी।उन्होंने बताया कि कंपनी की ओर से कई बार शासन-प्रशासन और बांध प्रबंधन को लिखित और मौखिक रूप से सूचित किया गया है कि यदि अधिक मात्रा में पानी छोड़ा जाना होतो कम से कम दो दिन पहले स्पष्ट और सही जानकारी दी जाए। लेकिन अब तक कोई प्रभावी सूचना प्रणाली लागू नहीं की गई है।

    स्थानीय लोगों और व्यापारियों को भी नुकसान


    अचानक जलस्तर बढ़ने का असर सिर्फ निर्माण स्थल तक सीमित नहीं रहा। खेड़ी घाट क्षेत्र में नर्मदा तट पर स्थित कई छोटी दुकानें पानी में डूब गईंजिससे स्थानीय व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। स्थानीय निवासी दशरथ केवटमुकेश शुक्ला और सत्यदेव जोशी ने बताया कि कई बार दिन या रात किसी भी समय अचानक पानी छोड़ दिया जाता हैजिसकी कोई पूर्व जानकारी नहीं मिलती। उनका कहना है कि श्रद्धालुमजदूर और पर्यटक अक्सर नदी किनारे या चट्टानों पर फंस जाते हैं। समय पर नाविक न पहुंचेंतो बड़ी दुर्घटना हो सकती है।

    सूचना व्यवस्था पर सवाल


    स्थानीय लोगों का आरोप है कि बांध प्रबंधन केवल यह कहकर जिम्मेदारी से बच जाता है कि प्रशासन को सूचना दे दी गई है। लेकिन कितना पानी छोड़ा जाएगाजलस्तर कितनी तेजी से बढ़ेगा और निचले इलाकों पर इसका क्या असर पड़ेगाइसकी स्पष्ट जानकारी न तो निर्माण कंपनियों को मिलती है और न ही आम जनता को।इस मामले में ओंकारेश्वर बांध परियोजना के प्रमुख एवं महाप्रबंधक धीरेंद्र दीक्षित से संपर्क करने की कोशिश की गईलेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ। इससे बांध प्रबंधन की जवाबदेही पर और सवाल खड़े हो गए हैं। यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी ओंकारेश्वर क्षेत्र में श्रद्धालु और स्थानीय लोग चट्टानों पर फंस चुके हैंजिन्हें नाविकों ने बचाया था। बावजूद इसकेव्यवस्था में कोई ठोस सुधार नजर नहीं आ रहा है। यदि समय रहते प्रभावी सूचना प्रणाली लागू नहीं की गईतो भविष्य में किसी बड़ी त्रासदी से इनकार नहीं किया जा सकता।