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  • नेतनयाहू बोले- परमाणु हथियारों वाला पहला इस्लामिक गणराज्य बन सकता है ब्रिटेन..

    नेतनयाहू बोले- परमाणु हथियारों वाला पहला इस्लामिक गणराज्य बन सकता है ब्रिटेन..


    तेल अवीव।
    इजरायल (Israel) के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Prime Minister Benjamin Netanyahu) ने ब्रिटेन (Britain) को लेकर बेहद तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने ब्रिटेन को ‘इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ब्रिटेन’ (‘Islamic Republic of Britain’) तक कह दिया और कहा कि वह ‘परमाणु हथियारों वाला पहला इस्लामिक गणराज्य’ बन सकता है। नेतन्याहू ने ये बातें इजरायल के आर्मी रेडियो के लिए दिए एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में कहीं।


    ब्रिटेन के रवैये पर जताई नाराजगी

    पॉडकास्ट में नेतन्याहू इजरायल के प्रति ब्रिटेन के रुख में आए बदलाव पर बात कर रहे थे। उन्होंने पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल के बेटे और पत्रकार रैंडोल्फ चर्चिल का जिक्र करते हुए कहा कि पांच दशक से भी ज्यादा समय पहले इजरायल को ब्रिटेन में सकारात्मक कवरेज मिली थी।

    इसके बाद उन्होंने आज के ब्रिटेन की स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा, “आज के ब्रिटेन में इसे ढूंढिए, जिसे इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ब्रिटेन कहा जाता है।” जब कार्यक्रम के होस्ट ने पूछा कि क्या नेतन्याहू ब्रिटेन को अलग से निशाना बनाकर उसके साथ अनुचित व्यवहार कर रहे हैं और क्या पूरा यूरोप ऐसा ही नहीं है, तो नेतन्याहू ने अपनी बात और स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि हां, लेकिन किसी ने कहा है कि ‘परमाणु हथियारों वाला पहला इस्लामिक गणराज्य इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ब्रिटेन होगा।’


    गाजा युद्ध को लेकर ब्रिटेन और इजरायल के रिश्तों में तनाव

    नेतन्याहू की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब गाजा युद्ध को लेकर ब्रिटेन और इजरायल के रिश्तों में तनाव बढ़ा हुआ है। लेबर पार्टी की ओर से गाजा में इजरायल के सैन्य अभियान को लेकर शुरुआती प्रतिक्रिया पर एंडी बर्नहैम ने प्रधानमंत्री बनने से कुछ समय पहले माफी मांगी थी। उन्होंने कहा था कि पार्टी का शुरुआती रुख सही नहीं था और उनके नेतृत्व में उसे बेहतर करना होगा।


    गाजा युद्ध खत्म करने की अमेरिकी योजना पर भी असहमति

    नेतन्याहू ने गाजा युद्ध खत्म करने के लिए अमेरिका के समर्थन वाली योजना का भी विरोध किया। इससे इस मुद्दे पर वॉशिंगटन और इजरायल के बीच मतभेद का संकेत मिला। उन्होंने कहा कि जब तक हमास को पूरी तरह निहत्था नहीं किया जाता, तब तक इजरायल गाजा में अपनी मौजूदा स्थिति से पीछे नहीं हटेगा।

    प्रस्तावित समझौते के तहत हमास को हथियार छोड़ने की प्रक्रिया शुरू करनी थी, जबकि इजरायल को हमले रोकने और उसके नियंत्रण वाले करीब 60 फीसदी इलाके से पीछे हटने की बात कही गई थी।

    नेतन्याहू ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में कहा कि ट्रंप प्रशासन ने इजरायल को एक मसौदा भेजा था। इजरायल इससे सहमत नहीं था और उसने अपनी टिप्पणियां भेज दी हैं। उन्होंने इसे इजरायल की स्थिति बताया। नेतन्याहू ने यह भी कहा कि इजरायली सेना अपनी, अपने क्षेत्र और अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए जो जरूरी होगा, वह करती रहेगी।


    गाजा में मारे गए 100 से ज्यादा लोगों के शव बरामद

    नेतन्याहू की इन टिप्पणियों के बीच गाजा सिटी के सबरा इलाके में एक बड़े सामूहिक अंतिम संस्कार का आयोजन हुआ। यहां नवंबर 2023 में इजरायली हमले में तबाह हुए एक आवासीय ब्लॉक के मलबे से 100 से ज्यादा लोगों के शव बरामद किए गए थे। नाजुक युद्धविराम के दौरान बचावकर्मियों ने मलबे से 112 लोगों के शव निकाले। इनमें 40 बच्चे भी शामिल थे। गाजा सिविल डिफेंस के मुताबिक, इस जगह से अभी भी 157 लोगों के शव लापता हैं।

  • ब्रिटेन के 21 पोर्ट पर अडानी की नजर! ABP में हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी, वैश्विक विस्तार को मिलेगी रफ्तार

    ब्रिटेन के 21 पोर्ट पर अडानी की नजर! ABP में हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी, वैश्विक विस्तार को मिलेगी रफ्तार


    नई दिल्ली। अडानी समूह की प्रमुख कंपनी अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (APSEZ) ब्रिटेन के सबसे बड़े पोर्ट ऑपरेटर एसोसिएटेड ब्रिटिश पोर्ट्स (ABP) में हिस्सेदारी खरीदने की संभावनाएं तलाश रही है। यदि यह सौदा सफल होता है, तो अडानी समूह का बंदरगाह कारोबार भारत से आगे बढ़कर ब्रिटेन तक पहुंच जाएगा और वैश्विक स्तर पर उसकी मौजूदगी और मजबूत होगी।

    63.9% हिस्सेदारी बिक्री के लिए उपलब्ध
    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ABP की 63.9% नियंत्रक हिस्सेदारी बिक्री के लिए उपलब्ध है। यह हिस्सेदारी कनाडा के दो प्रमुख पेंशन फंड—कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड (CPPIB) और ओंटारियो म्युनिसिपल एम्प्लॉइज़ रिटायरमेंट सिस्टम (OMERS)—के पास है। दोनों निवेशकों ने अपनी हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया के लिए बैंकर नियुक्त किए हैं।

    21 बंदरगाहों का संचालन करती है ABP
    ABP इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स में फैले 21 प्रमुख बंदरगाहों का संचालन करती है। इनमें इमिंघम, जो ब्रिटेन का सबसे बड़ा बंदरगाह है, और साउथेम्प्टन, जो देश का प्रमुख आयात केंद्र माना जाता है, शामिल हैं। कंपनी के पोर्ट ब्रिटेन के कुल समुद्री व्यापार का लगभग 25 प्रतिशत संभालते हैं।

    वर्ष 2025 में ABP ने 42.5 मिलियन टन बल्क कार्गो और 3.1 मिलियन कंटेनर एवं रोल-ऑन/रोल-ऑफ यूनिट्स का संचालन किया। इस दौरान कंपनी का राजस्व 819.8 मिलियन पाउंड और परिचालन लाभ 586.5 मिलियन पाउंड रहा।

    अडानी के लिए क्यों अहम है यह सौदा?
    विशेषज्ञों के अनुसार, ABP की आय का बड़ा हिस्सा दीर्घकालिक ग्राहक अनुबंधों और पायलटेज सेवाओं से आता है, जिससे कंपनी को स्थिर राजस्व मिलता है। यही वजह है कि इसे अडानी पोर्ट्स के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण निवेश माना जा रहा है।

    पहले से कई देशों में मौजूद है अडानी पोर्ट्स
    अडानी पोर्ट्स फिलहाल भारत में 15 बंदरगाहों का संचालन करती है, जिनकी कुल क्षमता 653 मिलियन टन है। इसके अलावा कंपनी इज़रायल, तंजानिया, श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया में भी पोर्ट कारोबार से जुड़ी हुई है।

    वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी ने 501 मिलियन टन कार्गो का संचालन किया। अडानी पोर्ट्स का लक्ष्य 2030 तक अपनी कार्गो हैंडलिंग क्षमता 1 अरब टन तक पहुंचाने का है। इसके लिए अगले पांच वर्षों में ₹1 लाख करोड़ तक निवेश की योजना बनाई गई है, जिसमें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तरों पर विस्तार पर जोर रहेगा।

    कंपनी ने क्या कहा?
    अडानी पोर्ट्स के प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी अपनी दीर्घकालिक रणनीति के अनुरूप नए निवेश अवसरों का लगातार मूल्यांकन करती रहती है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बाजार में चल रही अटकलों या संभावित सौदों पर कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की जाएगी।

  • ब्रिटेन के 59वें प्रधानमंत्री बने एंडी बर्नहैम… किंग चार्ल्स III ने दिया सरकार बनाने का न्यौता

    ब्रिटेन के 59वें प्रधानमंत्री बने एंडी बर्नहैम… किंग चार्ल्स III ने दिया सरकार बनाने का न्यौता


    लंदन।
    लेबर पार्टी (Labour Party) के सांसद एंडी बर्नहैम (Andy Burnham) सोमवार को आधिकारिक तौर पर ब्रिटेन के 59वें प्रधानमंत्री (Britain’s 59th Prime Minister) बन गए हैं। बकिंघम पैलेस (Buckingham Palace) में किंग चार्ल्स तृतीय (King Charles III) के साथ एक निजी मुलाकात के दौरान उन्हें सरकार बनाने का न्यौता दिया गया। इससे पहले सर कीर स्टार्मर ने प्रधानमंत्री पद से अपना इस्तीफा सम्राट को सौंप दिया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।

    बकिंघम पैलेस द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि सर कीर स्टार्मर ने आज सुबह सम्राट से मुलाकात की और प्रधानमंत्री के पद से अपना इस्तीफा सौंप दिया, जिसे महामहिम ने सहर्ष स्वीकार कर लिया। बर्नहैम पिछले एक दशक में ब्रिटेन के सातवें प्रधानमंत्री बने हैं। सबसे खास बात है एंडी बर्नहैम का अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ रिश्ता। बर्नहैम, ट्रंप के मुखर आलोचक रहे हैं। अब प्रधानमंत्री बनने के बाद वह ट्रंप के साथ कैसे निभाते हैं, यह देखने वाली बात होगी।


    चुनौती होंगे ट्रंप के साथ संबंध

    बर्नहैम के सामने शुरुआती विदेश नीति की चुनौतियों में से एक अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ संबंधों को संभालना होगा। बर्नहैम के पद संभालने से पहले ट्रंप ने उन्हें बेहद उदारवादी बताया था। बर्नहैम अमेरिकी राष्ट्रपति के मुखर आलोचक रहे हैं। उन्होंने अमेरिका की अत्यधिक ध्रुवीकृत राजनीति को ब्रिटेन में लाने के खिलाफ चेतावनी दी है। हालांकि उनकी इस आलोचना से अमेरिका के साथ ब्रिटेन के पुराने और मजबूत संबंधों पर असर पड़ने की संभावना कम है।


    हर तरफ से दबाव

    घरेलू मोर्चे पर, बर्नहैम को एक ऐसी सरकार विरासत में मिली है जिसे हर तरफ से राजनैतिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। उनका आगमन वर्षों की राजनैतिक अस्थिरता के बीच हुआ है, जिस दौरान बोरिस जॉनसन, लिज़ ट्रस, ऋषि सुनक और कीर स्टार्मर एक के बाद एक सत्ता में आए। ऐसे में श्री बर्नहैम के सामने न केवल अपने एजेंडे को पूरा करने की चुनौती है, बल्कि मतदाताओं को यह विश्वास दिलाने की भी ज़िम्मेदारी है कि उनकी सरकार वह स्थिरता प्रदान करेगी जो उनके कई पूर्ववर्तियों के समय नहीं दिख सकी।


    ब्रिटेन को बड़े बदलाव की जरूरत

    ग्रेटर मैनचेस्टर के पूर्व मेयर रहे बर्नहैम को ‘किंग ऑफ द नॉर्थ’ (उत्तर का राजा) के रूप में जाना जाता है। वह पहले भी लेबर पार्टी की सरकारों में काम कर चुके हैं। बर्नहैम लंबे समय से लंदन से बाहर के क्षेत्रों में अधिक निवेश और प्रशासनिक शक्तियां देने की वकालत करते रहे हैं। उम्मीद है कि बर्नहैम प्रधानमंत्री के रूप में अपने पहले संबोधन में इस बात पर जोर देंगे कि ब्रिटेन को एक बड़े बदलाव की जरूरत है, जिसमें आर्थिक विकास को पुनर्जीवित करने, संघर्ष कर रहे सार्वजनिक क्षेत्रों में सुधार करने और ‘ब्रिटेन को फिर से सुदृढ़ करने’ की योजनाएं शामिल हैं।

    यह भी एक रिकॉर्ड
    स्टार्मर के इस्तीफे के साथ ही ब्रिटेन में जीवित पूर्व प्रधानमंत्रियों की संख्या रिकॉर्ड नौ हो गई है। इनमें जॉन मेजर, टोनी ब्लेयर, गॉर्डन ब्राउन, डेविड कैमरन, थेरेसा मे, बोरिस जॉनसन, लिज़ ट्रस, ऋषि सुनक और कीर स्टार्मर शामिल हैं। उम्मीद है कि ये सभी नेता इस साल लंदन के सेनोटैफ में आयोजित होने वाली ‘रिमेंब्रेंस संडे’ सेवा में एक साथ नजर आएंगे।

  • ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री बनेंगे एंडी बर्नहैम…. किंग ऑफ नॉर्थ के नाम से हैं मशहूर

    ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री बनेंगे एंडी बर्नहैम…. किंग ऑफ नॉर्थ के नाम से हैं मशहूर


    लंदन।
    ब्रिटेन (Britain) को नया प्रधानमंत्री (New Prime Minister) मिल गया है। लेबर पार्टी ने एंडी बर्नहैम (Andy Burnham) के नाम का ऐलान कर दिया है। एंडी ग्रेटर मैनचेस्टर के पूर्व मेयर (Former Mayor Greater Manchester) और मेकरफील्ड से सांसद एंडी हैं। उन्हें मध्य लंदन में आयोजित विशेष सम्मेलन में निर्विरोध रूप से लेबर पार्टी का नया नेता चुन लिया गया है। बर्नहैम सोमवार को ब्रिटेन के नये प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभालेंगे।

    पार्टी नेता घोषित होने के बाद अपने पहले ऐतिहासिक भाषण में बर्नहैम ने ‘मैं तैयार हूं’ का नारा दिया। साथ ही देश में नई राजनीति की शुरुआत करने, कामकाजी वर्ग को उनका पुराना गौरव और उम्मीद वापस लौटाने आर्र कीर स्टारमर की बनाई मजबूत नींव पर आगे बढ़ने का दृढ़ संकल्प व्यक्त किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश के हर हिस्से- चाहे वह उत्तर हो, दक्षिण, स्कॉटलैंड हो या वेल्स, सभी को समान और मजबूत आवाज दी जाएगी।


    पहले भी पार्टी नेतृत्व के लिए लड़ा चुनाव

    ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री बनने जा रहे एंडी बर्नहैम का जन्म 7 जनवरी 1970 को हुआ। फिलहाल एंडी, ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर हैं और हाल ही में मेकरफील्ड से सांसद चुने गए हैं। लेबर पार्टी में उन्हें पारंपरिक वामपंथी और उत्तरी इंग्लैंड का सबसे मजबूत चेहरा माना जाता है। बर्नहैम ने 1990 के दशक में राजनीति में कदम रखा। गॉर्डन ब्राउन सरकार में स्वास्थ्य और संस्कृति मंत्री रहे। बर्नहैम इससे पहले पार्टी नेतृत्व के लिए दो बार चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन दोनों बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। 2010 और 2015 में पार्टी नेतृत्व की दौड़ में शामिल हुए, लेकिन एड मिलिबैंड और जेरेमी कॉर्बिन से हार गए।

    बनाई है अपनी अलग पहचान
    एंडी बर्नहैम को ‘किंग ऑफ नॉर्थ’ कहा जाता है। इसके पीछे एंडी का तौर-तरीका है। असल में उन्होंने एक अंदाज के राजनेता के तौर पर अपनी पहचान बनाई। एंडी ने कीमती सूट और परंपरागत टाई को छोड़कर टी-शर्ट और बॉम्बर जैकेट पहनना शुरू कर दिया। साल 2001 में वह पहली बार संसद पहुंचे। तब उन्होंने टोनी ब्लेयर और गॉर्डन ब्राउन की सरकारों में संस्कृति और स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे बड़े पद संभाले। लेकिन 2010 और 2015 में लेबर पार्टी के नेतृत्व की रेस में पिछड़ने के बाद उन्होंने सभी को चौंकाते हुए लंदन का एलीट कूटनीतिक गलियारा छोड़ दिया। यहीं से उनकी पहनावे में बदलाव आया।


    ऐसी रही है लव लाइफ

    एंडी बर्नहैम की पत्नी का नाम है फ्रैंकी। हालांकि उनका पूरा नाम, मैरी-फ्रांस वैन हील है। इन दोनों की पहली मुलाकात साल 1989 में हुई थी। उस वक्त दोनों, कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के फिट्जविलियम कॉलेज में पढ़ते थे। फ्रैंकी, नीदरलैंड्स से यहां पढ़ने आई थीं। दोनों के बीच पहले दोस्ती हुई फिर प्यार हो गया, आखिर साल 2000 में दोनों ने शादी कर ली। दोनों अपने बच्चों को बहुत ही सादगी से पालते हैं। उनके बच्चों के नाम जिमी, रोजी और एनी है।

    नेता चुने जाने के बाद क्या बोले
    लेबर पार्टी का चुने जाने के बाद बर्नहैम ने कहा कि ब्रिटिश जनता मौजूदा राजनीति से तंग आ चुकी है। उन्होंने 1980 के दशक की नीतियों की आलोचना करते हुए कहाकि तब राजनीतिक शक्ति का केंद्रीकरण और आर्थिक शक्ति का निजीकरण कर दिया गया था, जिससे जनता आवास, पानी, ऊर्जा और परिवहन जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए ऊंचे दामों के जाल में फंस गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे केवल नंबर हासिल करने की राजनीति के बजाय सोशल केयर जैसे बड़े और उपेक्षित मुद्दों को हल करेंगे। इसके साथ ही पूरी पार्टी में एकजुटता का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि वे एक लेबर टीम की संस्कृति का निर्माण करेंगे और उनकी कैबिनेट में पार्टी के हर धड़े और विचारों के नेताओं को जगह दी जाएगी।


    सियासी यात्रा का जिक्र

    अपनी राजनीतिक यात्रा का जिक्र करते हुए बर्नहैम ने कहाकि 2009 में एनफील्ड (लिवरपूल) से उन्होंने महसूस किया था कि यह देश कामकाजी वर्ग के लिए ठीक से काम नहीं कर रहा है। उन्होंने शेफील्ड, स्कैंथॉर्प, साउथ वेल्स और क्लाइड जैसे औद्योगिक व खनन क्षेत्रों का नाम लेते हुए कहा कि इन जगहों के लोगों ने लेबर पार्टी को बनाया, लेकिन राजनीति ने उनकी उपेक्षा की। अब लेबर पार्टी उनके भरोसे को वापस जीतेगी। उन्होंने अपने पूर्ववर्ती नेता कीर स्टारमर को देश और पार्टी की शानदार सेवा के लिए धन्यवाद दिया, जिनके नेतृत्व में पार्टी अपनी सबसे बड़ी हार से उबरकर सबसे बड़ी जीत तक पहुंची और वैश्विक मंच पर ब्रिटेन की साख मजबूत हुई।


    कैसे बना रास्ता

    बता दें कि लेबर पार्टी को मई में हुए स्थानीय चुनावों में करारी हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री सर कीर स्टार्मर पर पद छोड़ने का भारी दबाव बन गया था। इसी बीच बर्नहैम ने जून में मेकरफील्ड उपचुनाव में शानदार जीत दर्ज कर संसद में वापसी की। उनके सांसद बनते ही राजनीतिक समीकरण बदल गए और स्टार्मर ने अपने पद से इस्तीफे की घोषणा कर दी। सोमवार को प्रधानमंत्री ऑफिस ‘10 डाउनिंग स्ट्रीट’ में स्टॉर्मर के भावुक संबोधन के तुरंत बाद बर्नहैम ने ‘हाउस ऑफ कॉमन्स’ में सांसद के रूप में औपचारिक रूप से शपथ ली।

  • भारत-ब्रिटेन के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट हुआ लागू, स्कॉच व्हिस्की से लग्जरी कारों तक सस्ता होगा सामान

    भारत-ब्रिटेन के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट हुआ लागू, स्कॉच व्हिस्की से लग्जरी कारों तक सस्ता होगा सामान


    नई दिल्ली। भारत और ब्रिटेन के बीच हुआ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) बुधवार, 15 जुलाई 2026 से लागू हो गया है। इस समझौते के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार पर लगने वाले कई आयात-निर्यात शुल्क में बड़ी कटौती होगी। इसका सीधा असर भारत में आने वाले ब्रिटिश उत्पादों की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे स्कॉच व्हिस्की, लग्जरी कारों और ब्यूटी प्रोडक्ट्स समेत कई सामान सस्ते हो सकते हैं।

    भारत और ब्रिटेन के बीच इस ऐतिहासिक व्यापार समझौते की घोषणा जून 2026 में की गई थी। अब इसके लागू होने के बाद दोनों देशों के कारोबार को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    स्कॉच व्हिस्की की कीमतों में बड़ी गिरावट की उम्मीद
    भारत में अभी स्कॉच व्हिस्की पर करीब 150 फीसदी तक आयात शुल्क लगाया जाता है। लेकिन FTA लागू होने के बाद इस ड्यूटी को चरणबद्ध तरीके से घटाकर 40 फीसदी तक लाया जाएगा। इसका मतलब है कि आने वाले समय में ब्रिटेन से आने वाली स्कॉच व्हिस्की की कीमतों में करीब 110 फीसदी तक की कमी देखने को मिल सकती है। इससे भारतीय बाजार में ब्रिटिश शराब ब्रांड्स की पहुंच बढ़ सकती है।

    लैंड रोवर, जगुआर और रोल्स रॉयस जैसी कारें होंगी सस्ती
    फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के तहत ब्रिटेन से आयात होने वाली लग्जरी कारों पर भी शुल्क में बड़ी कटौती की जाएगी। ऑटोमोबाइल सेक्टर में कोटा व्यवस्था के तहत आयात शुल्क को 100 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी तक करने का प्रावधान है।

    इससे ब्रिटेन की कंपनियों की कारें जैसे लैंड रोवर, जगुआर, रोल्स रॉयस, एस्टन मार्टिन और डिफेंडर भारतीय ग्राहकों के लिए पहले के मुकाबले सस्ती हो सकती हैं।

    नोटिफिकेशन के अनुसार, पहले साल 20,000 कारों को कम ड्यूटी पर आयात किया जा सकेगा। इनमें 3000cc से ज्यादा पेट्रोल इंजन और 2500cc से ज्यादा डीजल इंजन वाली 10,000 कारें शामिल होंगी। इन पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी 110 फीसदी से घटकर 30 फीसदी हो जाएगी।

    वहीं, 1500cc से 3000cc तक की 5,000 कारों के आयात पर ड्यूटी 66 फीसदी से घटाकर 50 फीसदी की जाएगी। इसके बाद इसे धीरे-धीरे कम किया जाएगा और 15 साल बाद कस्टम ड्यूटी को 10 फीसदी तक लाने का लक्ष्य रखा गया है।

    ब्यूटी प्रोडक्ट्स समेत कई सामानों पर कम होगा टैरिफ
    FTA के तहत ब्यूटी और कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स समेत कई अन्य ब्रिटिश उत्पादों पर लगने वाला 22 फीसदी तक का टैरिफ या तो तुरंत खत्म किया जाएगा या फिर अगले 10 वर्षों में चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा। इससे ब्रिटेन से आयात होने वाले कई उत्पाद भारतीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्ध हो सकते हैं।

    UK में भारतीय सामानों को मिलेगा बड़ा फायदा
    भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते का फायदा सिर्फ ब्रिटिश उत्पादों तक सीमित नहीं रहेगा। इस डील के तहत भारत से ब्रिटेन जाने वाले कई सामानों पर भी शुल्क खत्म किया जाएगा।

    कपड़े, जूते और कुछ खाद्य उत्पादों समेत कई भारतीय वस्तुओं को ब्रिटेन में ड्यूटी फ्री या कम शुल्क के दायरे में लाया जाएगा। अभी ब्रिटेन में टेक्सटाइल गारमेंट पर 12 फीसदी, केमिकल्स पर 8 फीसदी और बेस मेटल्स पर 10 फीसदी तक ड्यूटी लगती है। FTA के बाद करीब 99 फीसदी भारतीय उत्पादों को शून्य शुल्क की सुविधा मिलने की बात कही गई है।

    दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
    ब्रिटिश सरकार के अनुमान के मुताबिक, भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था में करीब 4.8 अरब पाउंड का इजाफा हो सकता है। इसके अलावा वास्तविक वेतन में भी करीब 2.2 अरब पाउंड की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है।

    ब्रिटेन इस समझौते को भारत के साथ अब तक का सबसे बड़ा व्यापक व्यापार समझौता बता रहा है। दोनों देशों को उम्मीद है कि यह डील निवेश, कारोबार और रोजगार के नए अवसरों को बढ़ावा देगी।

  • भीषण गर्मी के बीच ब्रिटेन में एसी पर सख्ती, नेट जीरो नीति के तहत घरों से हटाने के निर्देश

    भीषण गर्मी के बीच ब्रिटेन में एसी पर सख्ती, नेट जीरो नीति के तहत घरों से हटाने के निर्देश


    नई दिल्ली। यूरोप इन दिनों भीषण गर्मी और लू की चपेट में है। ब्रिटेन में तापमान कई इलाकों में 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। हीटवेव के कारण जनजीवन प्रभावित है, लेकिन इसी बीच पर्यावरणीय नीतियों के तहत कुछ स्थानीय प्रशासनिक निकाय घरों में लगाए गए एयर कंडीशनर (एसी) को लेकर सख्ती बरत रहे हैं।

    रिपोर्टों के अनुसार, लंदन के कुछ काउंसिल क्षेत्रों में निवासियों को एसी हटाने या उनके उपयोग को सीमित करने संबंधी नोटिस जारी किए गए हैं। अधिकारियों का तर्क है कि एयर कंडीशनर अधिक ऊर्जा की खपत करते हैं और कार्बन उत्सर्जन बढ़ाते हैं, इसलिए इनका इस्तेमाल अंतिम विकल्प के रूप में ही किया जाना चाहिए।

    हीटवेव से जनजीवन प्रभावित

    ब्रिटेन में भीषण गर्मी के चलते कई क्षेत्रों में स्कूल बंद किए गए हैं और कुछ रेल सेवाओं पर भी असर पड़ा है। मौसम विभाग ने अत्यधिक गर्मी को देखते हुए लोगों की सुरक्षा के लिए उच्च स्तर की चेतावनी जारी की है।

    रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि कई अस्पतालों में तापमान अधिक होने और पर्याप्त शीतलन व्यवस्था नहीं होने के कारण हजारों गैर-आपातकालीन सर्जरी स्थगित करनी पड़ी हैं।

    क्या है नेट जीरो नीति?

    ब्रिटेन में लागू नेट जीरो नीति का उद्देश्य कार्बन उत्सर्जन को न्यूनतम स्तर तक लाना है। भवन निर्माण और ऊर्जा उपयोग से जुड़े दिशानिर्देशों के तहत पहले प्राकृतिक या पैसिव कूलिंग उपाय अपनाने पर जोर दिया जाता है।

    इन उपायों में भवनों का बेहतर वेंटिलेशन, खिड़कियां खोलकर रखना, छायादार व्यवस्था और सीलिंग फैन का उपयोग शामिल है। एसी के इस्तेमाल की अनुमति तभी दी जाती है, जब ये विकल्प पर्याप्त न हों।

    पर्यावरण संरक्षण पर जोर

    रिपोर्टों के मुताबिक, लंदन के कुछ स्थानीय निकायों ने नेट जीरो नीति के तहत भवनों में लगाए गए एसी हटाने या उनके उपयोग पर आपत्ति जताई है। प्रशासन लोगों को अधिक से अधिक प्राकृतिक वेंटिलेशन और सीलिंग फैन जैसे वैकल्पिक उपाय अपनाने की सलाह दे रहा है।

    हालांकि, भीषण गर्मी के बीच एसी के उपयोग को लेकर यह नीति बहस का विषय बनी हुई है। एक ओर सरकार और स्थानीय निकाय पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बढ़ते तापमान के बीच लोगों की सुविधा और स्वास्थ्य को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

  • ब्रिटेन में बड़ी राजनीतिक उथल-पुथल, पद छोड़ने को हुए तैयार PM कीर… जल्द दे सकते हैं इस्तीफा

    ब्रिटेन में बड़ी राजनीतिक उथल-पुथल, पद छोड़ने को हुए तैयार PM कीर… जल्द दे सकते हैं इस्तीफा


    लंदन।
    ब्रिटेन (Britain) में बड़ी राजनीतिक उथल-पुथल की वजह से प्रधानमंत्री कीर स्टारमर (Prime Minister Keir Starmer) अपना पद छोड़ने को तैयार हो गए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने अपने करीबियों से कहा है कि वह इस्तीफा देने को तैयार हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री कीर स्टारमर अपने हिसाब से आगे का कदम उठाएंगे। उन्हें इस्तीफा कब देना है, इसका विचार भी वह खुद ही करेंगे।


    क्यों खतरे में है कीर स्टारमर की सरकार

    जानकारी के मुताबिक यूके की लेबर सरकार संकटों से जूझ रही है। लोगों की इस सरकार में विश्वास कम हो गया है। लेबर पार्टी के पीटर मैंडलसन (Peter Mandelson.) का नाम एपस्टीन फाइल्स ( Epstein Files) में आने के बाद लोगों ने लेबर पार्टी पर अविश्वास जताया और स्थानीय चुनावों में इसे बड़ी हार का सामना करना पड़ा। इसी वजह से कीर स्टारमर पर भी इस्तीफा देने का दबाव बढ़ गया है।

    गुरुवार को ब्रिटेन में क्षेत्रीय चुनाव हुए। यह चुनाव 136 क्षेत्रों में आयोजित किए गए। अंतिम नतीजों के अनुसार लेबर पार्टी ने परिषद की उन 2,200 से ज़्यादा सीटों में से लगभग 1,200 सीटें गंवा दीं, जिन पर पहले उसका कब्ज़ा था। दक्षिणपंथी ‘रिफॉर्म यूके ‘ पार्टी स्पष्ट विजेता के तौर पर उभरी और उसने लगभग 1,400 सीटें जीतीं।

    बता दें कि लेबर पार्टी के ही 80 से ज्यादा सांसदों ने उनसे पद छोड़ने की अपील की है। बीते दिनों सरकार के तीन सदस्यों के इस्तीफा देने की बात भी सामने आई थी।

    निगेल फराज के नेतृत्व वाली रिफॉर्म यूके को चुनावों का सबसे बड़ा विजेता माना जा रहा है। स्काई न्यूज के अनुसार, इसने अब तक 1,422 सीटें जीती हैं। लेबर पार्टी 980 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि लिबरल डेमोक्रेट्स और कंजरवेटिव पार्टी क्रमशः 834 और 754 सीटों के साथ तीसरे और चौथे स्थान पर हैं।प्लाइड सिमरु, जो वेल्स की स्वतंत्रता के लिए प्रतिबद्ध एक मध्य-वामपंथी पार्टी है, 43 सीटों के साथ वेल्स सेनेड में सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। रिफॉर्म यूके 34 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर है जबकि लेबर पार्टी नौ सीटों के साथ बहुत पीछे तीसरे स्थान पर है। वेल्स में 27 साल सत्ता में रहने के बाद लेबर पार्टी ने पहले ही हार स्वीकार कर ली थी।


    स्टारमर ने इस्तीफा देने से कर दिया था इनकार

    वहीं स्कॉटलैंड में, स्कॉटिश नेशनल पार्टी ने सबसे अधिक 58 सीटें जीतीं लेकिन बहुमत के लिए आवश्यक 65 सीटों से पीछे रह गई। लेबर और रिफॉर्म यूके 17-17 सीटों पर बराबरी पर हैं जबकि कंजर्वेटिव पार्टी की सीटें घटकर 12 रह गईं। अपनी पार्टी के लिए निराशाजनक नतीजों के बावजूद, स्टारमर ने इस्तीफा देने से मना करते हुए कहा था कि वह पीछे नहीं हटेंगे और देश को अराजकता में नहीं धकेलेंगे।

  • होर्मुज खुलवाने पर अलग-थलग पड़े अमेरिकी राष्ट्रपति…. फ्रांस-ब्रिटेन के रूख पर जताया असंतोष

    होर्मुज खुलवाने पर अलग-थलग पड़े अमेरिकी राष्ट्रपति…. फ्रांस-ब्रिटेन के रूख पर जताया असंतोष


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (French President Emmanuel Macron) के होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने के लिए प्रस्तावित गठबंधन में शामिल न होने के रुख पर असंतोष जताया है। ट्रंप ने कहा कि वे इस मुद्दे पर मैक्रों से बात कर चुके हैं और उन्हें 0 से 10 के पैमाने पर 8 अंक देते हैं। उन्होंने कहा कि फ्रांस पूरी तरह सही नहीं है, लेकिन मुझे लगता है कि वे मदद करेंगे। ट्रंप ने ट्रंप कैनेडी सेंटर बोर्ड सदस्यों के साथ दोपहर के भोजन के दौरान अमेरिकी सेना को दुनिया की सबसे मजबूत सेना करार देते हुए कहा कि अमेरिका को किसी की जरूरत नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हम दुनिया का सबसे शक्तिशाली राष्ट्र हैं और हमारी सेना सबसे मजबूत है।

    इस दौरान ट्रंप ने ब्रिटेन पर भी नाराजगी जाहिर की और कहा कि वे ब्रिटेन से खुश नहीं हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि ब्रिटेन पूरे उत्साह से गठबंधन में शामिल होगा। ट्रंप ने कहा कि हम वर्षों से नाटो के जरिए इन देशों की रक्षा कर रहे हैं। पुतिन हमसे डरते हैं, यूरोप से नहीं। ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के संदर्भ में ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित स्थिति में रखा है। उन्होंने कहा कि ईरान ने हमेशा इस जलडमरूमध्य को आर्थिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया है, लेकिन अब यह लंबे समय तक नहीं चलेगा।

    ट्रंप ने खार्ग द्वीप पर अमेरिकी हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि सैन्य ठिकानों को नष्ट किया गया है, लेकिन तेल ढांचे को बरकरार रखा गया है। उन्होंने ईरान के रक्षा आधार, मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं को लगभग समाप्त करने का दावा किया। ट्रंप के अनुसार, 30 से अधिक बारूदी सुरंग बिछाने वाले जहाजों को नष्ट कर दिया गया है और ईरान भर में 7000 से अधिक ठिकानों पर हमले किए गए हैं, जिससे बैलिस्टिक मिसाइल प्रक्षेपणों में 90 प्रतिशत और ड्रोन हमलों में 95 प्रतिशत की कमी आई है।

    उन्होंने कहा कि युद्ध शुरू होने से अभी तक 00 से अधिक ईरानी नौसैनिक पोत डुबोए या नष्ट किए गए हैं। ट्रंप ने ईरानी वायुसेना, नौसेना और नेतृत्व को लगभग पूरी तरह नष्ट होने का दावा किया। वहीं, वाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने पत्रकारों से कहा कि ट्रंप इस महीने के अंत में चीनी नेता शी जिनपिंग से मुलाकात के लिए उत्सुक हैं, लेकिन तारीखों में बदलाव संभव है। उनकी प्राथमिकता ऑपरेशन एपिक फ्यूरी की सफलता है। लीविट ने ब्रिटेन से होर्मुज में मदद के लिए पहले और तेज कदम उठाने की अपेक्षा जताई और कहा कि ट्रंप यूरोपीय सहयोगियों से समर्थन मांगना जारी रखेंगे।

  • ईरान से तनाव कम करने जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन ने बातचीत बहाल करने पर दिया जोर

    ईरान से तनाव कम करने जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन ने बातचीत बहाल करने पर दिया जोर

    बर्लिन। जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन ने मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को लेकर ईरान से हमले रोकने और कूटनीतिक बातचीत फिर से शुरू करने की अपील की है। तीनों देशों ने क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि हालिया घटनाएं हालात को और गंभीर बना सकती हैं।
    संयुक्त बयान में हमलों की निंदा
    तीनों देशों के नेताओं—फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर—ने संयुक्त बयान जारी कर क्षेत्र के अन्य देशों पर ईरानी हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की। बयान में कहा गया कि हालात को बिगाड़ने वाले कदमों से बचना जरूरी है और संवाद ही समाधान का रास्ता है।
    परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम पर भी चिंता
    नेताओं ने ईरान से उसके परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करने, बैलिस्टिक मिसाइल गतिविधियों पर रोक लगाने और अपने नागरिकों के खिलाफ कथित दमन व हिंसा बंद करने की अपील की।
    उनका कहना है कि क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए विश्वास बहाली के कदम आवश्यक हैं।
    सैन्य भागीदारी से किया इनकार
    तीनों देशों ने स्पष्ट किया कि वे हालिया हमलों में किसी भी तरह शामिल नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वे अमेरिका, इजरायल और क्षेत्र के अन्य साझेदारों के साथ लगातार संपर्क में हैं, ताकि स्थिति को नियंत्रण में रखा जा सके।

    क्षेत्रीय स्थिरता पर जोर
    बयान में कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्राथमिकता मध्य पूर्व में स्थिरता बनाए रखना और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। साथ ही इस बात पर बल दिया गया कि अंततः ईरान की जनता को अपना भविष्य स्वयं तय करने का अवसर मिलना चाहिए।