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  • ब्रिटिश PM किएर स्टार्मर ने दिया इस्तीफा…. भारत के साथ रिश्तों की दी मजबूती

    ब्रिटिश PM किएर स्टार्मर ने दिया इस्तीफा…. भारत के साथ रिश्तों की दी मजबूती


    नई दिल्ली।
    किएर स्टार्मर (Keir Starmer) ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री (British Prime Minister) पद से इस्तीफा दे दिया है. उनके इस्तीफे के बाद अब लेबर पार्टी के लिए अपना नया लीडर चुनने का समय और बढ़ गया है. वहीं, नए चुने गए पार्लियामेंट मेंबर एंडी बर्नहैम (Parliament Member Andy Burnham) आने वाले हफ्तों में 10 डाउनिंग स्ट्रीट में चार्ज संभालने वाले हैं।

    ब्रिटिश इंडियन एक्सपर्ट्स का कहना है कि ब्रिटिश प्राइम मिनिस्टर के तौर पर उनके स्टार्मर ने सिर्फ भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को पूरा किया. इसके साथ ही उन्होंने आगे के लिए भी आपसी रिश्तों को मजबूती दी, जिस पर देश के नए पीएम आगे काम कर सकते हैं।

    कोबरा बीयर के फाउंडर और इंडिया ऑल पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप के को-चेयर लॉर्ड करण बिलिमोरिया ने कहा, ‘जब भारत की बात आती है, तो उनके प्राइम मिनिस्टर रहते हुए UK-इंडिया फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर साइन हुए थे, जिस पर हमने जनवरी 2022 में ही बातचीत शुरू कर दी थी।


    भारत-ब्रिटेन के रिश्तों की मजबूती में स्टार्मर का रोल

    बिलिमोरिया ने आगे कहा, ‘भारत उनके लिए एक खास रिश्ते और एक खास देश के तौर पर बहुत, बहुत जरूरी है, जहां UK की बात है और हमेशा रहेगी. लेबर पार्टी का अगला लीडर कोई भी हो, भारत उनकी टॉप प्रायोरिटी होगी और वो दुनिया की पांचवीं और छठी सबसे बड़ी इकॉनोमी और दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी इकॉनोमी भारत के बीच UK-भारत के रिश्ते के भविष्य को सबसे जरूरी मानेंगे।

    बिलिमोरिया ने स्टार्मर को एक ‘अच्छा इंसान’ बताया, जो बाइलेटरल पार्टनरशिप की बात आने पर हमेशा सुनते थे. उन्होंने बताया, ‘नौ साल तक, मैं एक के बाद एक प्राइम मिनिस्टर से कहता रहा, चाहे वो बोरिस जॉनसन हों, चाहे ऋषि सुनक हों, एक बड़ा बिजनेस डेलीगेशन भारत ले जाएं क्योंकि इससे बहुत बड़ा असर पड़ेगा. और उनमें से किसी ने ऐसा नहीं किया, लेकिन किएर स्टार्मर ने सुना और पिछले साल अक्टूबर में हम एक बड़ा बिजनेस डेलीगेशन मुंबई ले गए।


    ‘बिजनेस सरकार से पहले आता है…’

    यूके इंडिया बिजनेस काउंसिल के ग्रुप CEO डॉ. किशोर जयरामन ने इन डेवलपमेंट्स को ‘बदलाव का प्रोसेस’ बताया. जयरामन ने कहा, ‘जब FTA पर बातचीत हो रही थी, तब सरकार बदल गई. ग्रेट ब्रिटेन ने जो महानता दिखाई है, वो ये है कि वो सरकार से आगे है. बिजनेस सरकार से पहले आता है.’

    उन्होंने आगे कहा, ‘ये एक ऐसी पार्टनरशिप है जो बहुत लंबे समय तक चलेगी क्योंकि ये सिद्धांतों पर आधारित है, ये एक विन-विन एग्रीमेंट पर आधारित है और ये आगे बढ़ती रहेगी और ये दोनों तरफ की इंडस्ट्री को फायदा पहुंचाती रहेगी. UKIBC एक ट्रेड काउंसिल है जो बिजनेस ग्रोथ को बढ़ावा देती है और हम UK और इंडिया में बिजनेस को सपोर्ट करते रहेंगे और कॉरिडोर को बढ़ाते रहेंगे।


    ट्रेड एग्रीमेंट के जरिए मजबूत किए UK-इंडिया के रिश्ते

    टेक एंटरप्रेन्योर और AI पॉलिसी लैब्स के फाउंडर उदय नागराजू हाल ही में हाउस ऑफ लॉर्ड्स में सबसे नए ब्रिटिश इंडियन लेबर पीयर्स में से एक बने हैं. उनका भी मानना है कि स्टार्मर ने कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट के साथ UK-इंडिया रिश्तों में एक बड़ा कदम आगे बढ़ाने में मदद की है।

    नागराजू ने कहा, ‘मुझे लगता है कि हमारे प्राइम मिनिस्टर, किएर स्टार्मर, इज्जत और एक सीरियस रिकॉर्ड के साथ ऑफिस छोड़ रहे हैं. उन्होंने लेबर पार्टी को सरकार में वापस लाया, स्थिरता और आर्थिक भरोसे को ब्रिटिश राजनीति के केंद्र में वापस लाया. उन्होंने 2024 के आम चुनाव से पहले वादा किया था कि उनके प्रधानमंत्री रहते लेबर सरकार भारत के साथ रिश्ते फिर से ठीक करेगी, जो उन्होंने पूरा किया. उन्होंने कहा, ‘CETA का क्रेडिट किएर और बेशक, भारत सरकार को भी जाता है।

    उन्होंने आगे कहा, ‘मुझे लगता है कि अगले लेबर प्राइम मिनिस्टर ग्रोथ, सिक्योरिटी, क्लीन एनर्जी स्किल्स, टेक, AI और भारत के साथ गहरी स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप के उस प्लेटफॉर्म पर काम करेंगे और उन्हें ऐसा करना चाहिए।


    ‘GDP में बड़े योगदान के लिए याद…’

    लेबर लीडर के तौर पर स्टार्मर के साथ मिलकर काम करने वाले कृष रावल ने स्टार्मर को ऐसा प्राइम मिनिस्टर बताया जिन्होंने भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर साइन किया. उनके मुताबिक स्टार्मर को ब्रिटेन की GDP में उनके बड़े योगदान के लिए याद किया जाएगा।

  • UP: लखनऊ अग्निकांड के बाद कानपुर में चला विशेष अभियान, फिजिक्स वाला समेत 22 कोचिंग संस्थान सील

    UP: लखनऊ अग्निकांड के बाद कानपुर में चला विशेष अभियान, फिजिक्स वाला समेत 22 कोचिंग संस्थान सील


    कानपुर।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की राजधानी लखनऊ (Lucknow) में कोचिंग संस्थान (Coaching Institute) से जुड़े हादसे के बाद कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) ने शहर के प्रमुख कोचिंग हब काकादेव में बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू कर दी है. सोमवार को चलाए गए विशेष अभियान (Special Campaign) के दौरान फिजिक्स वाला समेत 22 कोचिंग संस्थानों को सील कर दिया गया. जांच में इन संस्थानों में भवन और सुरक्षा संबंधी मानकों के उल्लंघन की बात सामने आने पर यह कार्रवाई की गई।

    केडीए अधिकारियों की टीम ने अलग-अलग क्षेत्रों में निरीक्षण कर उन संस्थानों को चिह्नित किया, जहां आवश्यक नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था. कार्रवाई के दौरान संस्थानों को खाली कराया गया और बाद में उन्हें सील कर दिया गया।

    प्राधिकरण के अनुसार, अभियान के तहत विभिन्न जोनों में एक साथ कार्रवाई की गई. पहले चरण में 22 संस्थानों को चिह्नित किया गया है, जबकि अन्य कोचिंग संस्थानों की भी जांच की जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि मानकों की अनदेखी पाए जाने पर आगे भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी।

    सील किए गए संस्थानों में फिजिक्स वाला, वर्कस्पेस, महेंद्राज और केमिस्ट्री वाले संजीव राठौर जैसे चर्चित नाम शामिल हैं. कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी मौके पर मौजूद रहे। वहीं, इस कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल भी उठाए हैं. उनका कहना है कि शहर में लंबे समय से अनेक कोचिंग संस्थान बिना पर्याप्त सुरक्षा इंतजामों और निर्धारित मानकों के संचालित हो रहे हैं, लेकिन नियमित जांच नहीं की जाती।

    लोगों का आरोप है कि किसी बड़े हादसे के बाद ही विभाग सक्रिय होता है और फिर कुछ समय तक अभियान चलाकर कार्रवाई की जाती है। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि समय-समय पर निरीक्षण और नियमों के अनुपालन की समीक्षा होती रहे, तो ऐसी स्थिति पैदा होने से पहले ही कमियों को दूर किया जा सकता है और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

  • ब्रिटिश PM कीर स्टार्मर पर लटकी जांच की तलवार… एपस्टीन के चक्कर में जा सकती है कुर्सी

    ब्रिटिश PM कीर स्टार्मर पर लटकी जांच की तलवार… एपस्टीन के चक्कर में जा सकती है कुर्सी


    लंदन।
    अमेरिका (America) का बदनाम यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन (Jeffrey Epstein) के चक्कर में अब ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर (British Prime Minister Keir Starmer) पर जांच की तलवार लटकी हुई है। जल्दी ही ब्रिटिश संसद इस बात पर वोटिं करने वाली है कि क्या एपस्टीन के सहयोगी की नियुक्ति करने के लिए स्टार्मर के खिलाफ जांच की जाए या फिर नहीं। दरअसल, स्टार्मर पर आरोप हैं कि उन्होंने एपस्टीन के पूर्व सहयोगी और ब्रिटिश सिविस सेवक पीटर मेंडेलसन के संबंध में संसद को गुमराह किया है।

    ब्रिटिश संसद के स्पीकर होयल ने इस वोटिंग के बारे में ज्यादा जानकारी देते हुए बताया कि तमाम सांसदों ने इसकी मांग की थी। इसमें विपक्षी कंजरवेटिव पार्टी के वरिष्ठ नेता केमी बेडेनॉक भी शामिल थे। विपक्षी पार्टी का आरोप है कि कीर स्टार्मर 2024 में मेंडलसन को अमेरिका में ब्रिटिश राजदूत नियुक्त किया था। इस दौरान स्टार्मर ने संसद को भरोसा दिलाया था कि मेंडेलसन के खिलाफ सभी जांच की जा चुकी हैं। लेकिन अब उसका नाम एपस्टीन फाइल्स में आया है। ऐसे में विपक्षी पार्टियों का आरोप है कि या तो स्टार्मर ने जानबूझकर इस तथ्य को नजरअंदाज किया है। या फिर उन्होंने जांच के नाम पर संसद को गुमराह किया है।

    गौरतलब है कि 2025 में जेफ्री एपस्टीन फाइल्स में पीटर मेंडलसन का नाम सामने आने के बाद स्टार्मर ने ब्रिटिश विदेश विभाग के तमाम अधिकारियों पर ऐक्शन लिया था। स्टार्मर ने आरोप लगाया कि इन अधिकारियों ने इस तथ्य को छिपाया था कि मेंडलसेन जांच रिपोर्ट में पास नहीं हुआ है। मेंडेलसन के ऊपर आरोप हैं कि उसने दस साल तक मंत्री पद पर रहते हुए अमेरिकी यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन को गोपनीय जानकारी लीक की थी।

    बता दें, ट्रंप के साथ बयानबाजी वाले संघर्ष में उलझे स्टार्मर के लिए यह मुद्दा भी संगीन होता जा रहा है। विपक्षी पार्टियां इस मुद्दे पर लगातार इस्तीफे की मांग कर रहा है। अगर मतदान स्टार्मर के खिलाफ जाता है, तो उन्हें इस जांच का सामना करना पड़ सकता है। यह कमेटी दोषी पाए जाने पर स्टार्मर को पद छोड़ने के लिए भी कह सकती है। हालांकि, ब्रिटिश संसद में इस वक्त स्टार्मर के पास बहुमत है। ऐसे में वोटिंग में हारने के आशंका कम है।

    गौरतलब है कि जिस प्रिविलेजेस कमेटी के पास स्टार्मर को भेजे जाने का प्रस्ताव भेजा गया है। उसकी वजह से पूर्व ब्रिटिश पीएम बोरिस जॉनसन को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी थी। 2023 कोविड काल के दौरान पार्टी गेट मामले में संसद ने उन पर गुमराह करने के आरोपों की जांच की थी। बाद में जब इस रिपोर्ट में उनके निलंबन की सिफारिश की जाने वाली थी, लेकिन उसके पहले ही जॉनसन ने इस्तीफा दे दिया था।