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  • मायावती ने भतीजे ईशान आनंद को बनाया बसपा का राष्ट्रीय संयोजक, लखनऊ की बैठक में किया ऐलान

    मायावती ने भतीजे ईशान आनंद को बनाया बसपा का राष्ट्रीय संयोजक, लखनऊ की बैठक में किया ऐलान


    लखनऊ।
    बहुजन समाज पार्टी में संगठन स्तर पर एक और बड़ा बदलाव हुआ है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने बुधवार को लखनऊ में हुई पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में अपने छोटे भतीजे ईशान आनंद को राष्ट्रीय संयोजक बनाने का ऐलान किया। बैठक में ईशान आनंद ने मायावती के पैर छूकर उनका आशीर्वाद भी लिया।

    ईशान आनंद को यह जिम्मेदारी उनके बड़े भाई आकाश आनंद को पार्टी की सभी जिम्मेदारियों से हटाए जाने के बाद मिली है। मायावती ने कुछ दिन पहले ही ईशान आनंद को पार्टी में सम्मानजनक जिम्मेदारी देने की बात कही थी। इसके बाद से ही उनकी नई भूमिका को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं। बुधवार को बैठक में इन चर्चाओं पर विराम लगाते हुए मायावती ने उन्हें राष्ट्रीय संयोजक नियुक्त करने की घोषणा कर दी।

    संगठन और चुनावी तैयारियों पर हुआ मंथन

    लखनऊ में आयोजित इस बैठक में बसपा के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ सभी राज्यों के पार्टी अध्यक्ष भी शामिल हुए। बैठक में संगठन को मजबूत करने के साथ आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा हुई। मायावती ने चुनाव की जमीनी तैयारियों और प्रत्याशियों के चयन को लेकर भी पार्टी नेताओं से जानकारी ली।

    इसके अलावा विभिन्न राज्यों में संगठन से जुड़े कामकाज की प्रगति रिपोर्ट भी ली गई। राज्यों से मिली रिपोर्ट के आधार पर संगठन को लेकर आगे की रणनीति और आवश्यक दिशा-निर्देश तय किए जाएंगे। बैठक में मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर भी पार्टी पदाधिकारियों से चर्चा की गई और उन्हें संगठनात्मक स्तर पर काम करने के निर्देश दिए गए।

    ईशान को मिली अहम जिम्मेदारी

    ईशान आनंद, मायावती के छोटे भाई आनंद कुमार के बेटे हैं। उन्होंने एलएलएम और कानून की पढ़ाई की है। हाल के दिनों में बसपा के भीतर हुए संगठनात्मक बदलावों के बीच उनका नाम लगातार चर्चा में था। मायावती ने पहले ही संकेत दिया था कि वह ईशान को पार्टी में आगे बढ़ाएंगी। अब उन्हें राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी देकर संगठन में उनकी भूमिका औपचारिक रूप से तय कर दी गई है।

    पार्टी की बैठक के दौरान ईशान आनंद के नई जिम्मेदारी संभालने को लेकर कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह भी देखने को मिला। बसपा अब आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर तैयारियां तेज करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

  • BSP का सियासी आधार लगातार घटा अब संसद में भी नहीं रहेगा कोई सांसद राष्ट्रीय दर्जे पर भी सवाल BSP के सामने संसद से लेकर राष्ट्रीय दर्जे तक की चुनौती

    BSP का सियासी आधार लगातार घटा अब संसद में भी नहीं रहेगा कोई सांसद राष्ट्रीय दर्जे पर भी सवाल BSP के सामने संसद से लेकर राष्ट्रीय दर्जे तक की चुनौती


    नई दिल्ली । बहुजन समाज पार्टी यानी BSP के सामने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक के बाद एक बड़ी चुनौतियां सामने आ रही हैं। पार्टी का लोकसभा में पहले से कोई सांसद नहीं है और उत्तर प्रदेश विधानसभा में भी अब उसका कोई विधायक नहीं बचा है। अगस्त 2026 में रसड़ा सीट से BSP के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह के निधन के बाद 403 सदस्यीय विधानसभा में पार्टी का प्रतिनिधित्व खत्म हो गया।

    अब राज्यसभा में भी BSP का प्रतिनिधित्व खत्म होने की स्थिति बन रही है। पार्टी के मौजूदा इकलौते राज्यसभा सांसद रामजी गौतम का कार्यकाल नवंबर में पूरा होना है। इसके बाद BSP के पास संसद के दोनों सदनों में कोई निर्वाचित सांसद नहीं रहेगा। उत्तर प्रदेश विधानसभा में पार्टी के पास राज्यसभा चुनाव के लिए पर्याप्त संख्या नहीं होने के कारण तत्काल वापसी की संभावना भी सीमित है।

    यह स्थिति BSP के राजनीतिक सफर में महत्वपूर्ण बदलाव को दिखाती है। पार्टी की स्थापना 1984 में कांशीराम ने की थी और बाद में मायावती ने इसे उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़े राजनीतिक संगठन के रूप में स्थापित किया। 2007 के विधानसभा चुनाव में BSP ने उत्तर प्रदेश की 403 सीटों में से 206 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल किया था। इसके बाद पार्टी का विधानसभा में प्रदर्शन लगातार कमजोर होता गया। 2012 में उसकी सीटें घटकर 80 रह गईं। 2017 में BSP 19 सीटों पर सिमट गई और 2022 में केवल एक सीट जीत सकी। वह एकमात्र सीट रसड़ा थी जहां से उमाशंकर सिंह निर्वाचित हुए थे। उनके निधन के बाद विधानसभा में BSP का खाता खाली हो गया।

    लोकसभा चुनावों में भी पार्टी को लगातार चुनौती मिली है। 2009 के लोकसभा चुनाव में BSP ने 21 सीटें जीती थीं। लेकिन 2014 में पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी। 2019 में समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल के साथ गठबंधन में BSP ने 10 सीटें जीतीं। 2024 में पार्टी फिर कोई लोकसभा सीट नहीं जीत सकी। इस तरह राष्ट्रीय स्तर पर BSP का संसदीय प्रतिनिधित्व लगातार कमजोर हुआ है।

    अब चर्चा पार्टी के राष्ट्रीय दर्जे को लेकर भी हो रही है। चुनाव आयोग के उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार BSP अभी राष्ट्रीय पार्टी के रूप में मान्यता प्राप्त दलों में शामिल है। आयोग की मौजूदा सूची में BSP को राष्ट्रीय पार्टी के तौर पर दर्ज किया गया है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि उसका राष्ट्रीय दर्जा अभी खत्म हो गया है। हालांकि भविष्य में चुनावी प्रदर्शन के आधार पर मान्यता की समीक्षा महत्वपूर्ण हो सकती है।

    चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक राष्ट्रीय पार्टी की मान्यता के लिए अलग अलग रास्ते तय हैं। इनमें किसी पार्टी का कम से कम चार राज्यों में लोकसभा या विधानसभा चुनाव में छह प्रतिशत वैध वोट हासिल करना और कम से कम चार लोकसभा सदस्य चुनकर लाना शामिल है। दूसरा रास्ता लोकसभा की कुल सीटों के कम से कम दो प्रतिशत पर जीत हासिल करना है और ये सांसद कम से कम तीन राज्यों से होने चाहिए। इसके अलावा किसी दल का कम से कम चार राज्यों में राज्य पार्टी के रूप में मान्यता प्राप्त होना भी राष्ट्रीय पार्टी की मान्यता का एक आधार है।

    BSP के लिए आने वाला समय इसलिए अहम है क्योंकि उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव सामने है। पार्टी को जहां अपने संगठन और चुनावी आधार को मजबूत करने की चुनौती है वहीं राष्ट्रीय स्तर पर अपनी राजनीतिक पहचान बनाए रखना भी उसके लिए महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल राष्ट्रीय दर्जा खत्म होना कोई घोषित फैसला नहीं है लेकिन संसद और विधानसभा में प्रतिनिधित्व खत्म होने की स्थिति ने BSP की राजनीतिक स्थिति को लेकर चर्चा जरूर बढ़ा दी है।

  • मायावती का नया फैसला, आकाश और दीपिका को जिम्मेदारी नहीं; ईशान आनंद को फिर मिलेगा पार्टी में मौका

    मायावती का नया फैसला, आकाश और दीपिका को जिम्मेदारी नहीं; ईशान आनंद को फिर मिलेगा पार्टी में मौका


    नई दिल्ली ।
    बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने अपने परिवार के सदस्यों की पार्टी में भूमिका को लेकर एक बार फिर बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि आकाश आनंद और उनकी बहन दीपिका आनंद को अब पार्टी में कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने अपने भाई आनंद कुमार के परिवार से ईशान आनंद को सम्मानजनक जिम्मेदारी देकर आगे बढ़ाने की बात कही है।

    मायावती ने कहा कि उन्होंने यह निर्णय अपने अनुभवों और पार्टी के हित को ध्यान में रखते हुए लिया है। उनके मुताबिक राजनीति में सफलता और समाज के लिए काम करने के लिए व्यक्ति को अपने भाई-बहनों और नजदीकी रिश्तेदारों के मोह से ऊपर उठकर पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ काम करना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि बहुजन समाज ही उनका असली परिवार है। उनके अनुसार शोषित वर्ग को सत्ता में भागीदारी दिलाकर उसके हित और कल्याण को सुनिश्चित करना उनका प्रमुख राजनीतिक लक्ष्य है। इसी उद्देश्य के तहत वह जरूरत पड़ने पर अपने परिवार के सदस्यों के खिलाफ भी निर्णय लेने के लिए तैयार हैं।

    आकाश आनंद को लेकर मायावती ने कहा कि उनके भाई आनंद कुमार के विशेष आग्रह पर उन्हें राजनीति में आगे बढ़ाया गया था। हालांकि, शादी के बाद आकाश के रवैये और गतिविधियों को लेकर उन्होंने असहमति जताई। मायावती ने कहा कि इन्हीं परिस्थितियों के कारण आकाश को कुछ समय पहले पार्टी से अलग करना पड़ा।

    मायावती ने आकाश आनंद की पार्टी में वापसी की संभावना से भी इनकार किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में उन्हें दोबारा पार्टी में जिम्मेदारी देना संगठन के हित में उचित नहीं होगा। उनके मुताबिक आकाश और उनकी बहन दीपिका को अब पार्टी की किसी भी जिम्मेदारी से पूरी तरह दूर रखा जाएगा और इस फैसले में बदलाव नहीं किया जाएगा।

    दीपिका को लेकर मायावती ने कहा कि पहले उनके परिवार के किसी सदस्य को आगे बढ़ाने को लेकर उनके मन में दुविधा थी। लेकिन भविष्य में पारिवारिक परिस्थितियों के कारण संगठन के सामने किसी तरह की परेशानी पैदा न हो, इसे ध्यान में रखते हुए उन्होंने दीपिका को भी पार्टी की जिम्मेदारी से दूर रखने का फैसला किया है।

    इसके स्थान पर ईशान आनंद को आगे बढ़ाने की घोषणा की गई है। मायावती ने कहा कि आनंद कुमार के परिवार में से अब केवल ईशान आनंद को पार्टी में सम्मानजनक जिम्मेदारी दी जाएगी। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि ईशान ने भविष्य में कोई गंभीर पार्टी विरोधी गतिविधि की, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

    मायावती ने कहा कि ऐसी स्थिति में आनंद कुमार के परिवार के किसी अन्य सदस्य को भी पार्टी में छोटी या बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। इसके बजाय संगठन में काम कर रहे दलित वर्ग के किसी समर्पित और वफादार कार्यकर्ता को आगे बढ़ाया जाएगा।

    अपने फैसले को स्पष्ट करते हुए मायावती ने बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम और डॉ. भीमराव आंबेडकर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कांशीराम ने अपने नजदीकी रिश्तेदारों को राजनीतिक लाभ देने से दूरी बनाए रखी थी और अपना जीवन बहुजन समाज के हित के लिए समर्पित किया।

    मायावती ने डॉ. आंबेडकर के 23 फरवरी 1956 के एक पत्र का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस पत्र में सार्वजनिक संपत्ति और संगठनात्मक जिम्मेदारियों के मामले में व्यक्तिगत रिश्तों से ऊपर नियम और सार्वजनिक हित को प्राथमिकता देने का संदेश मिलता है।

    मायावती ने बताया कि देश, जनहित और संगठन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए 23 सितंबर को BSP की ऑल इंडिया बैठक बुलाई गई है। उन्होंने कहा कि इस बैठक के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं को संगठन के काम में पूरी मजबूती और निष्ठा के साथ जुटने की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा।

  • चंद्रशेखर आजाद ने आकाश आनंद को बताया छोटा भाई, बोले- साथ आए तो मिलकर बाबा साहब का अधूरा मिशन पूरा करेंगे

    चंद्रशेखर आजाद ने आकाश आनंद को बताया छोटा भाई, बोले- साथ आए तो मिलकर बाबा साहब का अधूरा मिशन पूरा करेंगे


    नई दिल्ली । 
    उत्तर प्रदेश की राजनीति में दलित समाज से जुड़े मुद्दों के बीच नगीना से सांसद और आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने बहुजन समाज पार्टी के नेता आकाश आनंद को लेकर बड़ा बयान दिया है। चंद्रशेखर आजाद ने आकाश आनंद को अपना छोटा भाई बताते हुए कहा कि यदि वह उनके साथ आना चाहें तो उनकी पार्टी में उनका स्वागत है। उन्होंने राजनीतिक मतभेदों के बावजूद आकाश आनंद के प्रति किसी तरह का बुरा भाव नहीं होने की बात कही।

    चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि आकाश आनंद ने कई बार उनकी आलोचना की है, लेकिन वह उन्हें अब भी अपना छोटा भाई मानते हैं। उनके मुताबिक, दोनों के बीच राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर उनके मन में आकाश आनंद के लिए कोई दुर्भावना नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर आकाश आनंद साथ काम करने के लिए तैयार होते हैं तो दोनों मिलकर बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों को आगे बढ़ाने और उनके अधूरे काम को पूरा करने की दिशा में काम कर सकते हैं।

    चंद्रशेखर आजाद ने आकाश आनंद के लिए अपनी पार्टी के दरवाजे खुले होने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति बाबा साहब के विचारों और उनके मिशन को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से उनके साथ जुड़ना चाहता है, उसका स्वागत किया जाएगा। उनके अनुसार, महापुरुषों के अधूरे कामों को पूरा करने के लिए मिलकर प्रयास किया जा सकता है।

    चंद्रशेखर आजाद का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब बहुजन समाज पार्टी में आकाश आनंद को लेकर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम हुआ है। बसपा प्रमुख मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाने के बाद एक बार फिर उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया है। मायावती ने यह भी स्पष्ट किया है कि अब उनके परिवार का कोई सदस्य पार्टी में शामिल नहीं होगा।

    आकाश आनंद को लेकर चंद्रशेखर आजाद का रुख इससे अलग नजर आया है। उन्होंने राजनीतिक मतभेदों के बावजूद उनके साथ आने की संभावना को खुला रखा है। अपने बयान में उन्होंने आकाश आनंद को परिवार के छोटे सदस्य की तरह बताते हुए साथ मिलकर काम करने की इच्छा जाहिर की है।

    चंद्रशेखर आजाद ने अपने राजनीतिक उद्देश्य को डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों को आगे बढ़ाने से जोड़ा। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य बाबा साहब के विचारों और उनके अधूरे काम को आगे ले जाना है। इसी उद्देश्य से उन्होंने उन लोगों के लिए भी पार्टी के दरवाजे खुले होने की बात कही, जो इस मिशन में उनके साथ जुड़ना चाहते हैं।

    उत्तर प्रदेश की राजनीति में दलित समाज से जुड़े नेताओं की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। ऐसे में चंद्रशेखर आजाद का आकाश आनंद को लेकर दिया गया बयान राजनीतिक रूप से चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, आकाश आनंद की ओर से इस प्रस्ताव पर कोई प्रतिक्रिया सामने आने की जानकारी इस खबर में नहीं दी गई है।

    फिलहाल चंद्रशेखर आजाद ने आकाश आनंद को लेकर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि व्यक्तिगत मतभेदों के बावजूद वह उन्हें छोटा भाई मानते हैं और यदि दोनों साथ आते हैं तो बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों तथा उनके अधूरे मिशन को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम किया जा सकता है।

  • मायावती का सपा-कांग्रेस पर तीखा हमला, बोलीं- नीला रंग पहनने से नहीं बदलेगी जातिवादी सोच

    मायावती का सपा-कांग्रेस पर तीखा हमला, बोलीं- नीला रंग पहनने से नहीं बदलेगी जातिवादी सोच

    लखनऊ। बसपा सुप्रीमो मायावती ने सपा और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि बीएसपी के नीले रंग को अपनाने और मंचों व कपड़ों में इसका इस्तेमाल करने से विपक्षी दलों की सोच नहीं बदल जाएगी। बहुजन समाज के हित की बात करने से पहले इन दलों को अपना दिल और दिमाग साफ करना चाहिए। मायावती ने सपा के पीडीए और कांग्रेस की राजनीति पर भी सवाल उठाए।

    मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि सपा, कांग्रेस और अन्य विरोधी दल बीएसपी के नीले रंग को अपनाकर उसे कपड़ों और मंचों पर इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन इससे गरीबों, दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों और अन्य उपेक्षित वर्गों के प्रति उनकी वर्षों पुरानी सोच नहीं बदल सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि इन दलों की सोच जातिवादी, संकीर्ण, सामंती और पूंजीवादी रही है।

    उन्होंने कहा कि केवल नीला रंग अपनाने से कोई दिल से अंबेडकरवादी नहीं बन सकता। बहुजन समाज के वास्तविक हित और कल्याण के लिए पहले इन दलों को अपनी सोच में बदलाव लाना होगा। मायावती ने आरोप लगाया कि ये दल इन वर्गों के मुद्दों पर “गिरगिट की तरह रंग बदलते हैं” और कहते कुछ हैं, जबकि करते उसके विपरीत हैं।

    पीडीए को लेकर सपा पर निशाना
    मायावती ने सपा के पीडीए को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों के मुद्दे पर सपा की सोच, चाल, चरित्र और चेहरा अलग-अलग रहा है। उन्होंने दावा किया कि बहुजन समाज के हितों की वास्तविक लड़ाई केवल बीएसपी ही लड़ती रही है।

    उन्होंने बीएसपी से निष्कासित नेताओं को लेकर भी विरोधी दलों पर हमला बोला। मायावती ने कहा कि अनुशासनहीनता समेत विभिन्न कारणों से पार्टी से निकाले गए कई लोग बाद में दूसरी पार्टियों में चले गए और कुछ ने छोटे संगठन या राजनीतिक दल भी बना लिए। उनके मुताबिक, ऐसे लोग व्यक्तिगत स्वार्थ और अवसरवाद की राजनीति करते हैं और बहुजन समाज के सामूहिक हित के लिए काम नहीं कर सकते।

    कांग्रेस को बताया ‘डूबता जहाज’
    मायावती ने कांग्रेस पर भी तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जिन लोगों को बीएसपी से निकाले जाने के बाद अपने साथ लेने की बात कर रही है, वह खुद “डूबते जहाज” जैसी स्थिति में है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी पार्टी में शामिल होकर कोई अपना राजनीतिक भविष्य अंधकार में क्यों डालेगा।

    मायावती ने अपने बयान में बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवनकाल में बहुजन समाज के लोगों को कांग्रेस से सावधान रहने की चेतावनी दी थी।

    अशोक सिद्धार्थ के इस्तीफे पर भी बोला हमला
    मायावती ने बीएसपी से जुड़े रहे और आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि पार्टी की ओर से राजनीति से संन्यास लेने की सलाह दिए जाने के बाद अशोक सिद्धार्थ ने तत्काल घोषणा नहीं की। मायावती के मुताबिक, उन्होंने पूरी रात इसे रोकने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए और अगले दिन सुबह करीब 6:30 बजे मजबूरी में अपने राजनीतिक संन्यास की घोषणा की।

    मायावती ने कहा कि सही समय आने पर पार्टी के लोगों को इस मामले में और भी जानकारी दी जाएगी। उन्होंने बीएसपी कार्यकर्ताओं से मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को समझने और पार्टी व आंदोलन के हित में सतर्क रहने की अपील की।

  • BSP में आकाश आनंद किए गए किनारे, छोटे भाई ईशान को 15 राज्यों की मिली जिम्मेदारी

    BSP में आकाश आनंद किए गए किनारे, छोटे भाई ईशान को 15 राज्यों की मिली जिम्मेदारी


    लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने के बीच बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने संगठन में एक अहम बदलाव किया है। पार्टी प्रमुख मायावती ने आकाश आनंद के छोटे भाई ईशान आनंद (ईशू) को करीब 15 राज्यों में संगठन के कामकाज की समीक्षा की जिम्मेदारी दी है। दूसरी ओर, आकाश आनंद के सोशल मीडिया प्रोफाइल में एक और बदलाव सामने आया है। उन्होंने अपने बायो में अब खुद को ‘BSP समर्थक’ बताया है।

    पार्टी के नए संगठनात्मक फेरबदल में आकाश आनंद को फिलहाल कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई है। वहीं ईशान आनंद को मुख्य सेक्टर प्रभारी बनाया गया है। उन्हें करीब 15 राज्यों में BSP की संगठनात्मक गतिविधियों और पार्टी के कामकाज की समीक्षा करनी होगी।

    आनंद कुमार को सौंपेंगे रिपोर्ट
    ईशान आनंद इन राज्यों में संगठन की स्थिति और पार्टी की गतिविधियों की समीक्षा करेंगे। इसके बाद वे अपनी रिपोर्ट अपने पिता और BSP के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आनंद कुमार को देंगे।

    ईशान को इतने बड़े स्तर पर जिम्मेदारी दिए जाने को पार्टी संगठन में उनकी बढ़ती भूमिका से जोड़कर देखा जा रहा है। ईशान, आनंद कुमार के बेटे और मायावती के भतीजे हैं।

    आकाश ने फिर बदला सोशल मीडिया बायो
    BSP के संगठनात्मक बदलाव के बीच आकाश आनंद के सोशल मीडिया बायो में लगातार हो रहे परिवर्तन ने भी राजनीतिक चर्चा को हवा दी है। कुछ दिन पहले उन्होंने अपने प्रोफाइल से ‘नेशनल कन्वीनर’ का उल्लेख हटाकर खुद को ‘BSP कार्यकर्ता’ बताया था। अब उन्होंने यह पहचान भी बदल दी है और बायो में सिर्फ ‘BSP समर्थक’ लिखा है।

    आकाश के बायो में हुए इस बदलाव को पार्टी में उनकी भूमिका में आए बदलाव से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, उन्होंने BSP छोड़ने को लेकर अभी तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है।

    सिर्फ बायो से पार्टी छोड़ने की पुष्टि नहीं
    आकाश आनंद के सोशल मीडिया प्रोफाइल में ‘BSP समर्थक’ लिखे जाने से उनकी पार्टी से पूरी तरह अलग होने की पुष्टि नहीं की जा सकती। इसके लिए उनकी ओर से किसी औपचारिक घोषणा या पार्टी की आधिकारिक जानकारी का इंतजार रहेगा। दूसरी ओर, ईशान आनंद को करीब 15 राज्यों की जिम्मेदारी मिलने से पार्टी संगठन में उनकी सक्रियता और भूमिका बढ़ने के संकेत जरूर मिलते हैं।

  • मायावती ने आकाश आनंद से छीनी राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी, बताया राजनीतिक रूप से अपरिपक्व

    मायावती ने आकाश आनंद से छीनी राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी, बताया राजनीतिक रूप से अपरिपक्व

    लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी की बड़ी जिम्मेदारियों से दूर रखने का फैसला किया है। मायावती ने कहा कि आकाश आनंद को अभी राजनीतिक रूप से और परिपक्व होने की जरूरत है। इसी के साथ आकाश आनंद से राष्ट्रीय संयोजक का पद भी हटा दिया गया है। उन्होंने अपने एक्स प्रोफाइल में भी बदलाव करते हुए ‘राष्ट्रीय संयोजक’ की जगह खुद को बसपा कार्यकर्ता बताया है। इस फैसले से आकाश के समर्थकों में निराशा है।

    कांशीराम के सिद्धांतों का दिया हवाला
    मायावती ने मान्यवर कांशीराम के सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अपने परिवार को पार्टी के काम में सहयोग करने की अनुमति दी थी, लेकिन परिवार के सदस्यों को चुनाव लड़ाने या पार्टी में महत्वपूर्ण पद देने के पक्ष में नहीं थे।

    मायावती ने कहा कि वह भी इसी संकल्प पर आगे बढ़ रही हैं। आकाश आनंद को पार्टी में काम करने की अनुमति रहेगी, लेकिन फिलहाल उन्हें कोई बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।

    ‘अभी और परिपक्वता की जरूरत’
    मायावती के मुताबिक आकाश आनंद को राजनीतिक तौर पर अभी और परिपक्व होने की जरूरत है। उनका मानना है कि विरोधी दल चुनाव के दौरान साम, दाम, दंड और भेद जैसे हथकंडों का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे में राजनीतिक अनुभव और परिपक्वता की कमी के कारण पार्टी को संभावित चुनावी नुकसान से बचाना जरूरी है।

    आकाश आनंद के एक्स प्रोफाइल में बदलाव भी इसी फैसले के बाद सामने आया है। अब उनकी पहचान राष्ट्रीय संयोजक के बजाय बसपा कार्यकर्ता के रूप में दिखाई जा रही है।

    लखनऊ में हुई बसपा की अहम बैठक
    मायावती ने लखनऊ में पार्टी की ऑल इंडिया स्तर की महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में संगठन को मजबूत करने और विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर पार्टी का रुख स्पष्ट करने को लेकर निर्देश दिए गए। इस दौरान पिछले कार्यों की समीक्षा भी की गई।

    मायावती ने पार्टी के छोटे-बड़े सभी पदाधिकारियों को संगठन की कमियों को दूर करने और पूरी ईमानदारी व निष्ठा के साथ पार्टी के दिशा-निर्देशों का पालन करने की सख्त हिदायत दी।

    कांशीराम के संघर्षों का किया जिक्र
    मायावती ने कांशीराम के संघर्षों को याद करते हुए कहा कि शोषित वर्ग को शासक वर्ग बनाना ही बहुजन आंदोलन का मुख्य उद्देश्य है। इसके लिए सत्ता हासिल करना जरूरी है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से संगठन को मजबूत करने और इस लक्ष्य की दिशा में लगातार काम करने का आह्वान किया।

    RSS और मोहन भागवत के बयानों पर भी निशाना
    बैठक में मायावती ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे के दौरान दिए गए बयानों का भी संज्ञान लिया। उन्होंने संघ की कथनी और करनी में भारी अंतर होने का आरोप लगाया।

    मायावती ने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने समानता के लिए जीवनभर संघर्ष किया। वहीं आरक्षण, मुस्लिम और अन्य अल्पसंख्यक वर्गों की सुरक्षा तथा महिला अधिकारों जैसे मुद्दों पर आरएसएस के दावों में उन्हें सच्चाई की कमी नजर आती है। उन्होंने आरएसएस को सलाह दी कि वह बाबा साहेब के मानवतावादी और समतामूलक संविधान का ईमानदारी से पालन करे और अपने लोगों से भी उसका पालन करवाए।

  • यूपी चुनाव से पहले मायावती का मंथन, बोलीं- विरोधी अपना सकते हैं कई हथकंडे, बसपा कार्यकर्ता रहें सावधान

    यूपी चुनाव से पहले मायावती का मंथन, बोलीं- विरोधी अपना सकते हैं कई हथकंडे, बसपा कार्यकर्ता रहें सावधान

    लखनऊ। आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोमवार को लखनऊ में पार्टी की अहम बैठक की। इसमें प्रदेश के सभी राज्य स्तरीय पदाधिकारी और सभी 75 जिलों के जिलाध्यक्ष शामिल हुए। दिवंगत विधायक उमाशंकर सिंह के बेटे युकेश भी बैठक में मौजूद रहे। बैठक में चुनावी तैयारियों के साथ संगठन की प्रगति की समीक्षा की गई।

    मायावती ने पार्टी नेताओं से चुनाव की तैयारियों में तेजी लाने और बदलते राजनीतिक हालात के अनुसार संगठन को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विरोधी दल साम, दाम, दंड और भेद जैसे हथकंडे अपना सकते हैं, इसलिए बसपा कार्यकर्ताओं को मजबूती से उनका सामना करने के लिए तैयार रहना होगा।

    मायावती ने कहा कि बसपा उत्तर प्रदेश में पांचवीं बार ऐसी सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ काम करेगी, जिसमें कानून के जरिए बेहतर कानून का राज स्थापित हो और ‘सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय’ के उद्देश्य को पूरा किया जा सके।

    ‘चुनावी रेवड़ियों और लुभावने वादों से रहें सावधान’
    बसपा प्रमुख ने चुनाव के दौरान किए जाने वाले वादों और घोषणाओं को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं और जनता को आगाह किया। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले महिलाओं समेत विभिन्न वर्गों को निजी लाभ देने वाली योजनाओं, लुभावने वादों और घोषणाओं के जरिए मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की जाती है।

    उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद इन्हीं वादों को लेकर वादाखिलाफी की शिकायतें सामने आती हैं। इसलिए जनता को विरोधी दलों के छलावे और विश्वासघात से बचना चाहिए और अपने विवेक से स्वतंत्र एवं निष्पक्ष होकर मतदान करना चाहिए।

    9 अक्टूबर को कांशीराम की पुण्यतिथि पर बड़ा कार्यक्रम
    बैठक में बसपा संस्थापक मान्यवर कांशीराम की 9 अक्टूबर को होने वाली पुण्यतिथि के कार्यक्रम की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। मायावती ने बताया कि इस बार कार्यक्रम लखनऊ में वीआईपी रोड स्थित बौद्ध स्मृति उपवन के सामने विकसित किए गए ‘मान्यवर श्री कांशीराम जी स्मारक स्थल’ में आयोजित किया जाएगा।

    पार्टी के मुताबिक कार्यक्रम में पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित प्रदेशभर से लोग शामिल होंगे और कांशीराम को श्रद्धांजलि देंगे। बसपा ने कार्यक्रम को ‘कांशीराम का मिशन अधूरा, बीएसपी करेगी पूरा’ और ‘बहनजी करेंगी पूरा’ जैसे संकल्पों के साथ आयोजित करने की बात कही है।

    नेपाल की बाढ़ पर जताई चिंता
    मायावती ने पड़ोसी देश नेपाल में बाढ़ से हुए जान-माल के भारी नुकसान पर भी चिंता जताई। उन्होंने प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए केंद्र और राज्य सरकारों से बाढ़ प्रभावित लोगों तक हरसंभव मदद तत्काल पहुंचाने की अपील की। उन्होंने कहा कि आपदा योजनाओं का लाभ जरूरतमंद परिवारों तक समय पर पहुंचना चाहिए। मायावती ने कहा कि बाढ़ हर साल आने वाली त्रासदी है, इसलिए इसके स्थायी समाधान के लिए भी गंभीरता से प्रयास किए जाने चाहिए।

  • सपा के साथ आए तो चमकी सहयोगियों की किस्मत? कांग्रेस से बसपा और जयंत-राजभर तक, 4 चुनावों के आंकड़ों से समझिए समीकरण

    सपा के साथ आए तो चमकी सहयोगियों की किस्मत? कांग्रेस से बसपा और जयंत-राजभर तक, 4 चुनावों के आंकड़ों से समझिए समीकरण


    नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के चवन्नी को रुपया बनाने वाले बयान के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में गठबंधन की राजनीति को लेकर नई बहस छिड़ गई है। अखिलेश यादव ने 16 अगस्त को सहयोगी दलों पर तंज कसते हुए कहा था कि उनकी पार्टी ने कई ऐसे गठबंधन किए जिनमें छोटे दलों को साथ लेकर उन्हें राजनीतिक ताकत दी लेकिन बाद में वही सहयोगी उन्हें छोड़कर चले गए। उनके इस बयान पर राष्ट्रीय लोक दल प्रमुख जयंत चौधरी के समर्थकों और बसपा प्रमुख मायावती की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या चुनावी आंकड़े भी अखिलेश के दावे को मजबूती देते हैं और सपा के साथ गठबंधन करने वाले दलों को वास्तव में राजनीतिक फायदा मिला।

    अगर 2024 के लोकसभा चुनाव से शुरुआत करें तो तस्वीर काफी दिलचस्प नजर आती है। समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश की 62 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ा और 37 सीटों पर जीत दर्ज की। यह उसके लिए बड़ी वापसी थी क्योंकि इससे पहले लगातार दो लोकसभा चुनाव में पार्टी महज पांच पांच सीटों पर सिमट गई थी। इसी चुनाव में कांग्रेस सपा के साथ गठबंधन में 17 सीटों पर मैदान में उतरी और छह सीटें जीतने में सफल रही। 2019 में कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में सिर्फ एक सीट मिली थी। इस लिहाज से सपा के साथ गठबंधन के बाद उसके प्रदर्शन में बड़ा सुधार हुआ।

    2024 में जन अधिकार पार्टी को भी सपा के साथ गठबंधन का फायदा मिला। पार्टी के प्रमुख बाबू सिंह कुशवाहा को जौनपुर सीट से सपा के चुनाव चिह्न पर मैदान में उतारा गया और उन्होंने जीत दर्ज कर पहली बार लोकसभा का रास्ता तय किया। हालांकि तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी ललितेश पति त्रिपाठी भदोही से चुनाव हार गए और पार्टी का खाता नहीं खुल सका।

    अब 2019 के लोकसभा चुनाव पर नजर डालें तो सपा और बसपा ने लंबे अंतराल के बाद साथ चुनाव लड़ा था। बसपा ने 38 और सपा ने 37 सीटों पर चुनाव लड़ा। बसपा ने 10 सीटें जीतीं जबकि सपा के खाते में सिर्फ पांच सीटें आईं। खास बात यह थी कि 2014 में बसपा एक भी लोकसभा सीट नहीं जीत पाई थी। इस लिहाज से 2019 में उसका प्रदर्शन बड़ी वापसी माना गया। हालांकि चुनाव परिणाम आने के बाद दोनों दलों का गठबंधन ज्यादा समय तक नहीं चला और बसपा ने सपा से दूरी बना ली।

    2022 के विधानसभा चुनाव में भी सपा ने कई छोटे दलों को अपने साथ जोड़ा। जयंत चौधरी की राष्ट्रीय लोक दल ने 33 सीटों पर चुनाव लड़कर आठ सीटें जीतीं। 2017 में रालोद के खाते में सिर्फ एक सीट आई थी। इसी तरह ओम प्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने 19 सीटों पर चुनाव लड़कर छह सीटें जीतीं। हालांकि अपना दल कमेरावादी की पल्लवी पटेल को सिराथू से बड़ी जीत मिली लेकिन पार्टी का प्रदर्शन सीमित रहा। दूसरी ओर महान दल और जनवादी पार्टी समाजवादी गठबंधन के बावजूद कोई सीट नहीं जीत सके।

    2017 में सपा ने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया था लेकिन दोनों दलों को बड़ा फायदा नहीं मिला। सपा 298 सीटों पर चुनाव लड़कर सिर्फ 47 सीटें जीत सकी जबकि कांग्रेस 105 सीटों पर लड़कर सात सीटों पर सिमट गई। कांग्रेस को 2012 की तुलना में 21 सीटों का नुकसान हुआ था।

    इन आंकड़ों को देखें तो 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव तथा 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा के साथ गठबंधन करने वाले कई बड़े दलों के प्रदर्शन में सुधार जरूर दिखाई देता है। हालांकि हर सहयोगी को समान सफलता नहीं मिली। कुछ दलों को सीटें मिलीं तो कुछ गठबंधन के बावजूद चुनावी जमीन मजबूत नहीं कर सके। यही वजह है कि अखिलेश के बयान को लेकर राजनीतिक बहस आंकड़ों के साथ साथ गठबंधन की रणनीति और सीट बंटवारे तक पहुंच गई है। आने वाले चुनावों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सपा और उसके संभावित सहयोगियों के बीच यह सियासी रिश्ता किस दिशा में जाता है।

  • जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर कार्रवाई पर रोक, मायावती बोलीं- ध्वस्तीकरण नहीं, नियमों के तहत निकले समाधान

    जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर कार्रवाई पर रोक, मायावती बोलीं- ध्वस्तीकरण नहीं, नियमों के तहत निकले समाधान


    लखनऊ। रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों को गिराने की प्रस्तावित कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगने के बाद बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे मामलों में तोड़फोड़ की कार्रवाई के बजाय संस्थानों को नियमानुसार नियमित करने और व्यावहारिक समाधान तलाशने पर जोर देना चाहिए।

    मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी अपने संदेश में मायावती ने कहा कि रामपुर विकास प्राधिकरण द्वारा बिना स्वीकृत मानचित्र के निर्माण का हवाला देकर भवनों को गिराने की प्रक्रिया पर रोक लगाना उचित कदम है। उनका कहना था कि ऐसे मामलों में जनहित और शिक्षा दोनों को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाना चाहिए।

    छात्रों के भविष्य का भी रखें ध्यान
    बसपा सुप्रीमो ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी मोहम्मद अली जौहर के नाम पर स्थापित इस विश्वविद्यालय का मामला केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां अध्ययन कर रहे छात्रों के भविष्य से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए सरकार को पहले नियमों के अनुरूप समाधान निकालने का प्रयास करना चाहिए।

    उन्होंने यह भी कहा कि यदि प्रदेश के अन्य शिक्षण संस्थानों में भी निर्माण संबंधी नियमों का पालन नहीं हुआ है, तो उन्हें ध्वस्त करने के बजाय आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर नियमित करने की दिशा में कदम उठाए जाने चाहिए। मायावती ने उम्मीद जताई कि सरकार जनहित को प्राथमिकता देते हुए इस सुझाव पर सकारात्मक विचार करेगी।

    अंतरिम राहत के बाद अंतिम सुनवाई बाकी
    उल्लेखनीय है कि मुरादाबाद मंडलायुक्त की अदालत ने सोमवार को मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को अंतरिम राहत देते हुए 38 भवनों को गिराने की कार्रवाई पर अंतिम निर्णय तक रोक लगा दी थी। मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह के अनुसार, यूनिवर्सिटी की ओर से दायर याचिका पर यह अंतरिम आदेश दिया गया है। मामले में सभी पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड की जांच के बाद अंतिम फैसला सुनाया जाएगा।