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  • यूपी चुनाव से पहले मायावती का मंथन, बोलीं- विरोधी अपना सकते हैं कई हथकंडे, बसपा कार्यकर्ता रहें सावधान

    यूपी चुनाव से पहले मायावती का मंथन, बोलीं- विरोधी अपना सकते हैं कई हथकंडे, बसपा कार्यकर्ता रहें सावधान

    लखनऊ। आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोमवार को लखनऊ में पार्टी की अहम बैठक की। इसमें प्रदेश के सभी राज्य स्तरीय पदाधिकारी और सभी 75 जिलों के जिलाध्यक्ष शामिल हुए। दिवंगत विधायक उमाशंकर सिंह के बेटे युकेश भी बैठक में मौजूद रहे। बैठक में चुनावी तैयारियों के साथ संगठन की प्रगति की समीक्षा की गई।

    मायावती ने पार्टी नेताओं से चुनाव की तैयारियों में तेजी लाने और बदलते राजनीतिक हालात के अनुसार संगठन को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विरोधी दल साम, दाम, दंड और भेद जैसे हथकंडे अपना सकते हैं, इसलिए बसपा कार्यकर्ताओं को मजबूती से उनका सामना करने के लिए तैयार रहना होगा।

    मायावती ने कहा कि बसपा उत्तर प्रदेश में पांचवीं बार ऐसी सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ काम करेगी, जिसमें कानून के जरिए बेहतर कानून का राज स्थापित हो और ‘सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय’ के उद्देश्य को पूरा किया जा सके।

    ‘चुनावी रेवड़ियों और लुभावने वादों से रहें सावधान’
    बसपा प्रमुख ने चुनाव के दौरान किए जाने वाले वादों और घोषणाओं को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं और जनता को आगाह किया। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले महिलाओं समेत विभिन्न वर्गों को निजी लाभ देने वाली योजनाओं, लुभावने वादों और घोषणाओं के जरिए मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की जाती है।

    उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद इन्हीं वादों को लेकर वादाखिलाफी की शिकायतें सामने आती हैं। इसलिए जनता को विरोधी दलों के छलावे और विश्वासघात से बचना चाहिए और अपने विवेक से स्वतंत्र एवं निष्पक्ष होकर मतदान करना चाहिए।

    9 अक्टूबर को कांशीराम की पुण्यतिथि पर बड़ा कार्यक्रम
    बैठक में बसपा संस्थापक मान्यवर कांशीराम की 9 अक्टूबर को होने वाली पुण्यतिथि के कार्यक्रम की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। मायावती ने बताया कि इस बार कार्यक्रम लखनऊ में वीआईपी रोड स्थित बौद्ध स्मृति उपवन के सामने विकसित किए गए ‘मान्यवर श्री कांशीराम जी स्मारक स्थल’ में आयोजित किया जाएगा।

    पार्टी के मुताबिक कार्यक्रम में पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित प्रदेशभर से लोग शामिल होंगे और कांशीराम को श्रद्धांजलि देंगे। बसपा ने कार्यक्रम को ‘कांशीराम का मिशन अधूरा, बीएसपी करेगी पूरा’ और ‘बहनजी करेंगी पूरा’ जैसे संकल्पों के साथ आयोजित करने की बात कही है।

    नेपाल की बाढ़ पर जताई चिंता
    मायावती ने पड़ोसी देश नेपाल में बाढ़ से हुए जान-माल के भारी नुकसान पर भी चिंता जताई। उन्होंने प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए केंद्र और राज्य सरकारों से बाढ़ प्रभावित लोगों तक हरसंभव मदद तत्काल पहुंचाने की अपील की। उन्होंने कहा कि आपदा योजनाओं का लाभ जरूरतमंद परिवारों तक समय पर पहुंचना चाहिए। मायावती ने कहा कि बाढ़ हर साल आने वाली त्रासदी है, इसलिए इसके स्थायी समाधान के लिए भी गंभीरता से प्रयास किए जाने चाहिए।

  • सपा के साथ आए तो चमकी सहयोगियों की किस्मत? कांग्रेस से बसपा और जयंत-राजभर तक, 4 चुनावों के आंकड़ों से समझिए समीकरण

    सपा के साथ आए तो चमकी सहयोगियों की किस्मत? कांग्रेस से बसपा और जयंत-राजभर तक, 4 चुनावों के आंकड़ों से समझिए समीकरण


    नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के चवन्नी को रुपया बनाने वाले बयान के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में गठबंधन की राजनीति को लेकर नई बहस छिड़ गई है। अखिलेश यादव ने 16 अगस्त को सहयोगी दलों पर तंज कसते हुए कहा था कि उनकी पार्टी ने कई ऐसे गठबंधन किए जिनमें छोटे दलों को साथ लेकर उन्हें राजनीतिक ताकत दी लेकिन बाद में वही सहयोगी उन्हें छोड़कर चले गए। उनके इस बयान पर राष्ट्रीय लोक दल प्रमुख जयंत चौधरी के समर्थकों और बसपा प्रमुख मायावती की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या चुनावी आंकड़े भी अखिलेश के दावे को मजबूती देते हैं और सपा के साथ गठबंधन करने वाले दलों को वास्तव में राजनीतिक फायदा मिला।

    अगर 2024 के लोकसभा चुनाव से शुरुआत करें तो तस्वीर काफी दिलचस्प नजर आती है। समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश की 62 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ा और 37 सीटों पर जीत दर्ज की। यह उसके लिए बड़ी वापसी थी क्योंकि इससे पहले लगातार दो लोकसभा चुनाव में पार्टी महज पांच पांच सीटों पर सिमट गई थी। इसी चुनाव में कांग्रेस सपा के साथ गठबंधन में 17 सीटों पर मैदान में उतरी और छह सीटें जीतने में सफल रही। 2019 में कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में सिर्फ एक सीट मिली थी। इस लिहाज से सपा के साथ गठबंधन के बाद उसके प्रदर्शन में बड़ा सुधार हुआ।

    2024 में जन अधिकार पार्टी को भी सपा के साथ गठबंधन का फायदा मिला। पार्टी के प्रमुख बाबू सिंह कुशवाहा को जौनपुर सीट से सपा के चुनाव चिह्न पर मैदान में उतारा गया और उन्होंने जीत दर्ज कर पहली बार लोकसभा का रास्ता तय किया। हालांकि तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी ललितेश पति त्रिपाठी भदोही से चुनाव हार गए और पार्टी का खाता नहीं खुल सका।

    अब 2019 के लोकसभा चुनाव पर नजर डालें तो सपा और बसपा ने लंबे अंतराल के बाद साथ चुनाव लड़ा था। बसपा ने 38 और सपा ने 37 सीटों पर चुनाव लड़ा। बसपा ने 10 सीटें जीतीं जबकि सपा के खाते में सिर्फ पांच सीटें आईं। खास बात यह थी कि 2014 में बसपा एक भी लोकसभा सीट नहीं जीत पाई थी। इस लिहाज से 2019 में उसका प्रदर्शन बड़ी वापसी माना गया। हालांकि चुनाव परिणाम आने के बाद दोनों दलों का गठबंधन ज्यादा समय तक नहीं चला और बसपा ने सपा से दूरी बना ली।

    2022 के विधानसभा चुनाव में भी सपा ने कई छोटे दलों को अपने साथ जोड़ा। जयंत चौधरी की राष्ट्रीय लोक दल ने 33 सीटों पर चुनाव लड़कर आठ सीटें जीतीं। 2017 में रालोद के खाते में सिर्फ एक सीट आई थी। इसी तरह ओम प्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने 19 सीटों पर चुनाव लड़कर छह सीटें जीतीं। हालांकि अपना दल कमेरावादी की पल्लवी पटेल को सिराथू से बड़ी जीत मिली लेकिन पार्टी का प्रदर्शन सीमित रहा। दूसरी ओर महान दल और जनवादी पार्टी समाजवादी गठबंधन के बावजूद कोई सीट नहीं जीत सके।

    2017 में सपा ने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया था लेकिन दोनों दलों को बड़ा फायदा नहीं मिला। सपा 298 सीटों पर चुनाव लड़कर सिर्फ 47 सीटें जीत सकी जबकि कांग्रेस 105 सीटों पर लड़कर सात सीटों पर सिमट गई। कांग्रेस को 2012 की तुलना में 21 सीटों का नुकसान हुआ था।

    इन आंकड़ों को देखें तो 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव तथा 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा के साथ गठबंधन करने वाले कई बड़े दलों के प्रदर्शन में सुधार जरूर दिखाई देता है। हालांकि हर सहयोगी को समान सफलता नहीं मिली। कुछ दलों को सीटें मिलीं तो कुछ गठबंधन के बावजूद चुनावी जमीन मजबूत नहीं कर सके। यही वजह है कि अखिलेश के बयान को लेकर राजनीतिक बहस आंकड़ों के साथ साथ गठबंधन की रणनीति और सीट बंटवारे तक पहुंच गई है। आने वाले चुनावों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सपा और उसके संभावित सहयोगियों के बीच यह सियासी रिश्ता किस दिशा में जाता है।

  • जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर कार्रवाई पर रोक, मायावती बोलीं- ध्वस्तीकरण नहीं, नियमों के तहत निकले समाधान

    जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर कार्रवाई पर रोक, मायावती बोलीं- ध्वस्तीकरण नहीं, नियमों के तहत निकले समाधान


    लखनऊ। रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों को गिराने की प्रस्तावित कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगने के बाद बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे मामलों में तोड़फोड़ की कार्रवाई के बजाय संस्थानों को नियमानुसार नियमित करने और व्यावहारिक समाधान तलाशने पर जोर देना चाहिए।

    मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी अपने संदेश में मायावती ने कहा कि रामपुर विकास प्राधिकरण द्वारा बिना स्वीकृत मानचित्र के निर्माण का हवाला देकर भवनों को गिराने की प्रक्रिया पर रोक लगाना उचित कदम है। उनका कहना था कि ऐसे मामलों में जनहित और शिक्षा दोनों को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाना चाहिए।

    छात्रों के भविष्य का भी रखें ध्यान
    बसपा सुप्रीमो ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी मोहम्मद अली जौहर के नाम पर स्थापित इस विश्वविद्यालय का मामला केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां अध्ययन कर रहे छात्रों के भविष्य से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए सरकार को पहले नियमों के अनुरूप समाधान निकालने का प्रयास करना चाहिए।

    उन्होंने यह भी कहा कि यदि प्रदेश के अन्य शिक्षण संस्थानों में भी निर्माण संबंधी नियमों का पालन नहीं हुआ है, तो उन्हें ध्वस्त करने के बजाय आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर नियमित करने की दिशा में कदम उठाए जाने चाहिए। मायावती ने उम्मीद जताई कि सरकार जनहित को प्राथमिकता देते हुए इस सुझाव पर सकारात्मक विचार करेगी।

    अंतरिम राहत के बाद अंतिम सुनवाई बाकी
    उल्लेखनीय है कि मुरादाबाद मंडलायुक्त की अदालत ने सोमवार को मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को अंतरिम राहत देते हुए 38 भवनों को गिराने की कार्रवाई पर अंतिम निर्णय तक रोक लगा दी थी। मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह के अनुसार, यूनिवर्सिटी की ओर से दायर याचिका पर यह अंतरिम आदेश दिया गया है। मामले में सभी पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड की जांच के बाद अंतिम फैसला सुनाया जाएगा।

  • पेपर लीक और भ्रष्टाचार पर मायावती का बड़ा हमला, आंदोलन के राजनीतिकरण से बचने और शांतिपूर्ण समाधान की अपील

    पेपर लीक और भ्रष्टाचार पर मायावती का बड़ा हमला, आंदोलन के राजनीतिकरण से बचने और शांतिपूर्ण समाधान की अपील

    नई दिल्ली । बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने देश में पेपर लीक की घटनाओं, नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन और अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की कथित अनियमितताओं को भ्रष्टाचार की व्यापक समस्या से जोड़ते हुए केंद्र और संबंधित संस्थाओं से समयबद्ध तथा शांतिपूर्ण समाधान निकालने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों का राजनीतिकरण होने से स्थिति और जटिल बनती है तथा इसका सीधा असर आम लोगों और विशेष रूप से युवाओं पर पड़ता है।

    मायावती ने कहा कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों छात्र-छात्राओं और उनके परिवारों की उम्मीदों को प्रभावित किया है। उनका कहना था कि लंबे समय से जारी विरोध प्रदर्शनों से स्पष्ट है कि युवाओं के मन में गंभीर चिंता और असंतोष है। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी है कि वह पारदर्शी और भरोसेमंद कार्रवाई के जरिए छात्रों का विश्वास बहाल करे।

    उन्होंने कहा कि छात्र आंदोलनों का दायरा अब केवल परीक्षा प्रणाली तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह व्यापक जनचर्चा का विषय बन गया है। उनके अनुसार, जब ऐसे मामलों पर राजनीतिक दल अपने-अपने दृष्टिकोण से सक्रिय होते हैं तो मूल मुद्दे से ध्यान भटकने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए सभी पक्षों को संयम रखते हुए समाधान की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

    बसपा प्रमुख ने अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और गबन के आरोपों का उल्लेख करते हुए कहा कि चाहे धार्मिक संस्थानों से जुड़े विवाद हों या भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में गड़बड़ियां, इन सभी के पीछे भ्रष्टाचार की समस्या एक साझा कारण के रूप में दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासनिक और संस्थागत स्तर पर पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की जाएगी तो ऐसी घटनाएं बार-बार सामने आती रहेंगी।

    मायावती ने भ्रष्टाचार को देश की व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि यह समाज और प्रशासन को भीतर से कमजोर करता है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में नैतिकता और संवैधानिक मूल्यों का पालन ही सुशासन की सबसे बड़ी आधारशिला है। इसी संदर्भ में उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर के सुशासन और जवाबदेह प्रशासन संबंधी विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को उनकी भावना के अनुरूप कार्य करना चाहिए।

    उन्होंने सरकार, प्रशासन और संवैधानिक संस्थाओं से आग्रह किया कि वे अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करें और जनता से जुड़े गंभीर मामलों में त्वरित तथा निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करें। उनके अनुसार, केवल कानूनी कार्रवाई ही नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्थागत सुधारों की भी आवश्यकता है जिससे भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

    मायावती ने यह भी कहा कि किसी भी आंदोलन को राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का माध्यम बनाने के बजाय संवाद और सहमति से समाधान खोजने का प्रयास होना चाहिए। उनका मानना है कि सड़क से लेकर संसद तक टकराव का माहौल बनने से लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित होती है और आम नागरिकों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने सरकार और आंदोलनकारियों दोनों से संयम बरतने तथा शांतिपूर्ण संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की। उनका कहना है कि छात्रों के भविष्य, सार्वजनिक विश्वास और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को ध्यान में रखते हुए इस पूरे विषय पर संवेदनशील और जिम्मेदार दृष्टिकोण अपनाया जाना आवश्यक है।

  • मायावती का सख्त संदेश- मैं आयरन लेडी, लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त; 2027 फतह के लिए BSP को दिया जीत का मंत्र

    मायावती का सख्त संदेश- मैं आयरन लेडी, लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त; 2027 फतह के लिए BSP को दिया जीत का मंत्र



    लखनऊ। लखनऊ में रविवार को आयोजित बहुजन समाज पार्टी की अहम बैठक में बसपा सुप्रीमो मायावती ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर संगठन को सख्त संदेश दिया। तीन घंटे से ज्यादा चली इस बैठक में बूथ स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक के पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक में मायावती ने साफ कहा कि चुनाव की तैयारी में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और संगठन को पहले से ज्यादा सक्रिय, मजबूत और मुस्तैद रहना होगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि विरोधी दलों की हर चाल का मजबूती से जवाब देने के लिए अभी से मैदान में उतरना होगा।

    बैठक में मायावती ने खुद को “आयरन लेडी” बताते हुए कहा कि बसपा को 2007 की तरह फिर से सत्ता में लाने के लिए कार्यकर्ताओं को पूरी ताकत के साथ जुटना होगा। उन्होंने जनता से अपील करते हुए कहा कि बसपा ही सर्वसमाज को सम्मान और सुरक्षा देने वाली पार्टी है, इसलिए लोगों को फिर से पार्टी और उसके नेतृत्व पर भरोसा जताना चाहिए। उन्होंने कहा कि बसपा हमेशा ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की नीति पर काम करती रही है और यही पार्टी की सबसे बड़ी ताकत है।

    मायावती ने मौजूदा राजनीतिक और आर्थिक हालात पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि देश में ऐसी नीतियां बनाई जा रही हैं, जिनसे बड़े पूंजीपतियों और धन्नासेठों को फायदा मिल रहा है, जबकि आम जनता लगातार परेशान हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के समय राजनीतिक दल बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद जनहित के मुद्दों को भूल जाते हैं। इसी वजह से जनता खुद को ठगा हुआ महसूस करती है।

    बैठक के दौरान संगठन की समीक्षा करते हुए मायावती ने सभी जिलाध्यक्षों और प्रभारियों से बूथ कमेटियों को जल्द से जल्द मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने के लिए जमीनी संगठन सबसे जरूरी होता है। साथ ही पार्टी के लिए आर्थिक सहयोग जुटाने और सभी वर्गों में जनाधार बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। उन्होंने संकेत दिए कि आगामी चुनाव में टिकट उन्हीं लोगों को मिलेगा, जिनकी छवि साफ होगी और जिनका क्षेत्र में मजबूत जनाधार होगा।

    बसपा प्रमुख ने कार्यकर्ताओं को विपक्षी दलों की “भ्रामक राजनीति” और “साजिशों” से सतर्क रहने की सलाह भी दी। उन्होंने कहा कि जनता को यह बताना जरूरी है कि कई दल चुनाव के समय खुद को जनहितैषी दिखाते हैं, लेकिन बाद में अपने वादों से मुकर जाते हैं। मायावती ने कहा कि देश और प्रदेश का भला बांटने वाली राजनीति से नहीं हो सकता।

    बैठक में शामिल नेताओं के मुताबिक, मायावती ने 2027 के चुनाव को मिशन मोड में लड़ने का आह्वान किया और कहा कि “हाथी पर बटन दबाना है, सत्ता में वापस आना है” का नारा हर गांव और बूथ तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने कांशीराम के सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति के मिशन को याद करते हुए कहा कि बसपा उसी विचारधारा पर लगातार काम कर रही है और आने वाले समय में पार्टी फिर से मजबूत होकर उभरेगी।

  • लखनऊ में बसपा बैठक: मायावती बोलीं-जनता का जीवन मुश्किल, संगठन मजबूत करने पर जोर

    लखनऊ में बसपा बैठक: मायावती बोलीं-जनता का जीवन मुश्किल, संगठन मजबूत करने पर जोर



    नई दिल्ली(New Delhi)।
    लखनऊ में मॉल एवेन्यू स्थित अपने आवास पर रविवार को बसपा सुप्रीमो मायावती ने राज्य स्तरीय बैठक की। इस बैठक में उन्होंने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों को लेकर कार्यकर्ताओं को अहम निर्देश दिए। बैठक में आकाश आनंद और आनंद कुमार समेत प्रदेश के सभी जिलाध्यक्ष और वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।

    बैठक के बाद जारी प्रेस विज्ञप्ति में मायावती ने कहा कि मौजूदा समय में जनता विरोधी नीतियों और छलावे की राजनीति के कारण आम लोगों का आत्मसम्मान के साथ जीना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को संदेश दिया कि संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत किया जाए और जनता तक पार्टी की नीतियों को प्रभावी तरीके से पहुंचाया जाए।

    मायावती ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में बसपा के पक्ष में जनरुझान बढ़ रहा है और पार्टी का लक्ष्य प्रदेश में पांचवीं बार सरकार बनाना है। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं को “हाथी पर बटन दबाना है” के संदेश के साथ पूरी ताकत से चुनावी तैयारियों में जुटना होगा।

    उन्होंने विपक्षी दलों पर बिना नाम लिए निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन बाद में जनता से किए गए वादों को भुला दिया जाता है। ऐसी राजनीति से लोगों का भला नहीं हो रहा है, इसलिए जनता को जागरूक करना जरूरी है।

    बसपा सुप्रीमो ने कहा कि बेरोजगारी, महंगाई, आर्थिक दबाव और कानून व्यवस्था की समस्याओं के कारण आम जनता का जीवन कठिन हो गया है। उन्होंने कहा कि सरकारों को रोजगार, रोटी, शांति और सामाजिक सौहार्द जैसे मूल मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।

    मायावती ने यह भी दावा किया कि बसपा शासनकाल में सर्वजन हिताय की नीति के तहत बेहतर कानून व्यवस्था और सामाजिक संतुलन कायम रहा था। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज समेत सभी वर्गों को उस समय सम्मान और भागीदारी मिली थी।

    बैठक में संगठनात्मक समीक्षा भी की गई और बूथ स्तर तक नेटवर्क मजबूत करने की रणनीति तय की गई। साथ ही आगामी चुनावों को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं को सक्रिय रहने का निर्देश दिया गया।

  • उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों का दलित वोट पर विशेष फोकस।

    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों का दलित वोट पर विशेष फोकस।


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों ने दलित वोट बैंक को साधने के लिए पूरी तैयारी शुरू कर दी है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस सभी अपने-अपने स्तर पर दलित वर्ग में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति बना रहे हैं। अंबेडकर जयंती के मौके पर यह प्रतिस्पर्धा और भी स्पष्ट रूप से देखने को मिल रही है।

    भाजपा ने पिछले लोकसभा चुनाव में अपेक्षित सफलता न मिलने के बाद से ही दलित वोटों को सहेजने की कवायद शुरू कर दी थी। संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने दलित पेशेवरों के बीच जाकर उनकी समस्याओं और अपेक्षाओं को समझने का प्रयास किया, कई संगोष्ठियों का आयोजन किया और 45 जिलों में सरकारी योजनाओं की जानकारी साझा की।

    इसी प्रक्रिया के तहत सरकार ने अंबेडकर मूर्ति विकास योजना की शुरुआत की है, जिसके अंतर्गत बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के साथ-साथ संत रविदास, कबीर, ज्योतिबा फुले और महर्षि वाल्मीकि जैसी महान विभूतियों की मूर्तियों का सौंदर्यीकरण और संरक्षण किया जाएगा। आगामी 14 अप्रैल को हर विधानसभा क्षेत्र में इस योजना को लेकर विशेष कार्यक्रम आयोजित होंगे, जिसमें स्थानीय जनप्रतिनिधि जनता को जानकारी देंगे। भाजपा का कहना है कि उसकी सरकार ने दलित उत्थान के लिए लगातार काम किया है, जबकि सपा सरकारों में दलितों का उत्पीड़न हुआ।

    समाजवादी पार्टी ने लोकसभा चुनाव में मिले उत्साह को आधार बनाकर दलित वर्ग पर विशेष ध्यान देना शुरू किया है। पार्टी ने बसपा से आए नेताओं की मदद से दलित समाज में पैठ बनाने का काम तेज कर दिया है। कांशीराम जयंती और अंबेडकर जयंती मनाने की परंपरा को सपा ने फिर से शुरू किया है। पार्टी का कहना है कि भाजपा की दलित नीति केवल चुनावी प्रतीकात्मक राजनीति है और वास्तविक लाभ नहीं पहुंचाती।

    कांग्रेस भी उत्तर प्रदेश में दलित वोटों को साधने के लिए प्रयासरत है। पार्टी ने पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार को बुलाया और कई कार्यक्रम आयोजित किए। कांग्रेस का दावा है कि उसने सरकारों के दौरान दलितों के लिए प्रभावी योजनाएं और कानून बनाए हैं, जबकि भाजपा केवल चुनावी हथकंडे अपनाती है।

    बहुजन समाज पार्टी अपने पारंपरिक जाटव वोट बैंक को मजबूत बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। पार्टी लगातार प्रमोशन, आरक्षण और गेस्ट हाउस कांड जैसे मुद्दों को उठाकर सपा को आगाह कर रही है। मायावती दलित राजनीति में प्रमुख चेहरा मानी जाती हैं और ब्राह्मण-दलित समीकरण को साधने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन बदलते राजनीतिक परिदृश्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश, अवध और पूर्वांचल क्षेत्रों में दलित वोट कई सीटों पर जीत और हार तय करने वाला है। इसी कारण सभी दल इस वर्ग पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। 2027 का विधानसभा चुनाव उत्तर प्रदेश में दलित वोट बैंक के इर्द-गिर्द घूमता दिखाई दे रहा है, और यह चुनावी रणनीतियों के केंद्र में है।

  • तेजस्वी यादव की मुश्किलें बढ़ीं, कांग्रेस ने राजद का गणित बिगाड़ा

    तेजस्वी यादव की मुश्किलें बढ़ीं, कांग्रेस ने राजद का गणित बिगाड़ा



    नई दिल्ली।  बिहार में राज्यसभा चुनाव के दौरान महागठबंधन के लिए बड़ा झटका आया है। RJD के उम्मीदवार एडी सिंह के लिए वोट देने के लिए कांग्रेस के तीन और RJD के एक विधायक मतदान में शामिल नहीं हुए। यह स्थिति RJD अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और उनके बेटे तेजस्वी यादव के लिए चिंता का विषय बन गई है।

    तेजस्वी ने असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM और मायावती की BSP से समर्थन जुटाकर छह अतिरिक्त वोट जोड़ने की कोशिश की थी। लेकिन महागठबंधन के अपने चार विधायकों के अनुपस्थित रहने से यह रणनीति कमजोर पड़ गई।

    कांग्रेस के वाल्मीकि नगर विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा, फारबिसगंज के मनोज विश्वास, मनिहारी के मनोहर प्रसाद सिंह और RJD के ढाका के फैसल रहमान वोटिंग में शामिल नहीं हुए। कुल 243 में से 239 विधायकों ने वोट डाला।

    महागठबंधन की योजना थी कि ओवैसी और मायावती के समर्थन से संख्या 35 से बढ़ाकर 41 हो जाएगी। लेकिन चार विधायकों की अनुपस्थिति से यह घटकर 37 रह गई। इससे एनडीए के पांचवें उम्मीदवार शिवेश राम की जीत की संभावना मजबूत हो गई है।

    तेजस्वी यादव ने विधानसभा में मौजूद रहकर भी इस पर कोई टिप्पणी नहीं दी। उन्होंने कहा कि मतदान शाम 4 बजे तक है और परिणाम आने के बाद ही वह इस पर कुछ कहेंगे।

    विश्लेषकों का कहना है कि यह घटना महागठबंधन के भीतर तालमेल की कमी और कांग्रेस के अंदर मतभेदों को उजागर करती है। विधानसभा चुनाव के दौरान भी महागठबंधन के सीट बंटवारे में देरी और किचकिच को पराजय के कारणों में गिना गया था, और यही माहौल अब राज्यसभा चुनाव में भी देखने को मिला।

    एनडीए के अन्य चार उम्मीदवार हैं: नीतीश कुमार (JDU अध्यक्ष और CM), नितिन नवीन (BJP अध्यक्ष), रामनाथ ठाकुर (JDU केंद्रीय मंत्री) और उपेंद्र कुशवाहा (RLM अध्यक्ष)। चार विधायकों के वोट न डालने से एनडीए की स्थिति मजबूत हुई है और उनके सभी उम्मीदवार दिल्ली पहुंच सकते हैं।

    राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह घटना महागठबंधन के लिए गंभीर चेतावनी है। कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक कमजोरी और मतभेद गठबंधन की सफलता पर असर डाल सकते हैं। तेजस्वी यादव और RJD को अब संगठन मजबूत करने, सहयोग सुनिश्चित करने और वोटिंग रणनीति पर नजर रखने की जरूरत है।

  • UP Politics: यूपी की सियासत से बड़ी खबर, AIMIM से बसपा अलायंस करेगी या नहीं? मायावती ने साफ कर दी तस्वीर

    UP Politics: यूपी की सियासत से बड़ी खबर, AIMIM से बसपा अलायंस करेगी या नहीं? मायावती ने साफ कर दी तस्वीर


    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में आगामी वर्ष 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से पहले दावा किया जा रहा था कि बहुजन समाज पार्टी किसी दल के साथ गठबंधन कर सकती है. इस रेस में सबसे पहले नाम हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी की अध्यक्षता वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन का चल रहा था. अब इस पर राज्य की पूर्व सीएम और बसपा सुप्रीमो मायावती ने तस्वीर साफ कर दी है.

    बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और यूपी की पूर्व सीएम मायावती ने कहा है कि जैसे-जैसे UP में चुनाव पास आएंगे, जो लोग हमारे खिलाफ हैं, वे हमें सत्ता से दूर रखने की और भी कोशिश करेंगे और हमारे खिलाफ साजिश करेंगे. सिर्फ UP में ही नहीं बल्कि पूरे देश में सभी अंबेडकरवादियों को डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के आत्म-सम्मान पाने के आंदोलन को मजबूत करने के लिए काम करते रहना चाहिए.पूर्व सीएम ने कहा कि आप सबको पता है कि इन दिनों AI को सफलता की पूंजी बताने की स्वार्थी बताने के बीच मीडिया में एक और चर्चा है कि विधानसभा 2027 चुनाव बसपा गठबंधन में लड़ेगी जो कि बिल्कुल झूठ है. ये फेक न्यूज है. मीडिया को ऐसी खबरों से बचना चाहिए.

    एक प्रेस वार्ता में मायावती ने कहा कि हम पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि हम विधानसभा चुनाव अकेले लडेंगे, लेकिन कुछ लोग और मीडिया घिनौनी साजिश में पड़कर अपनी इमेज खराब करते हैं. ये बसपा विरोधी एजेंडा है. लोगों को ऐसी खबरों पर ध्यान नहीं देना. कांग्रेस, सपा और बीजेपी की सोच संकीर्ण और बाबा साहेब की विरोधी है.

    मायावती ने क्यों किया अलायंस से इनकार?

    उन्होंने कहा कि इनसे गठबन्धन करके बसपा को नुकसान होता है. बसपा के लोग अकेले चुनाव लड़ने के लिए जी जान से लगे हुए हैं. बसपा, 2007 की तरह अकेले चुनाव लड़ेगी और चुनाव जीतेगी. बसपा सुप्रीमो को सिक्युरिटी दृष्टिगत टाइप 8 का बंगला मिलने के सवाल पर मायावती ने कहा कि जब यह मिला तो उसमें भी षडयंत्र के तहत ग़लत खबरें चलाई गई हैं एजेंडा के तहत. अब सुरक्षा के दृष्टिगत टाइप 8 का बंगला मिला जिसे मैने स्वीकार किया
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    उत्तर प्रदेश में 2027 के प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से पहले यह चर्चा जोर पकड़ रही थी कि बहुजन समाज पार्टी किसी दल के साथ गठबंधन कर सकती है। सियासी गलियारों में सबसे ज्यादा जिस नाम की चर्चा थी, वह हैदराबाद के सांसदअसदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन का था।
    उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार और उनके सुप्रीमो के कहने पर 2 जून 1995 गेस्ट हाउस में मुझपर हमला हुआ था जिसके अगले दिन भारत सरकार द्वारा मुझे सुरक्षा दी गई थी और सुरक्षित आवास भी लेकिन अब इतने समय के बाद भी सुरक्षा ख़तरा बड़ा है. पहले भी मुझे टाइप 8 का बंगला ही मिला था. चुनाव के नजदीक आते ही बसपा को सत्ता से दूर रखने के लिए विपक्षियों के हथकंडे बढ़ते जाएंगे.

  • मायावती के जन्मदिन पर यूपी में मनाया जाएगा 'जनकल्याणकारी दिवस'  BSP ने बनाया बड़ा प्लान

    मायावती के जन्मदिन पर यूपी में मनाया जाएगा 'जनकल्याणकारी दिवस' BSP ने बनाया बड़ा प्लान


    नई दिल्ली । बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने 19 दिसंबर 2025 को लखनऊ में पार्टी के पदाधिकारियों के साथ बैठक की। इस बैठक में मायावती ने महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं और आगामी चुनावी रणनीतियों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि इस बार भी उनकी पार्टी 15 जनवरी को अपने जन्मदिन को जनकल्याणकारी दिवस’के रूप में मनाएगी।

    ‘जनकल्याणकारी दिवस’ के कार्यक्रम का आयोजन

    मायावती ने बैठक में यह साफ किया कि यूपी में यह कार्यक्रम मंडल स्तर पर मनाया जाएगा जबकि देश के अन्य राज्यों में यह जोन-स्तर पर आयोजित किया जाएगा। इन कार्यक्रमों में राज्य से जुड़े केंद्रीय कोऑर्डिनेटर और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी विभिन्न जोनों में शामिल होंगे और पार्टी के कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए जन जागरूकता अभियान चलाएंगे।

    चुनावों के लिए तैयारी पर जोर

    बैठक में मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं को आगामी चुनावों के लिए पूरी तरह से तैयार रहने की हिदायत दी। उन्होंने खासतौर पर बिहार विधानसभा चुनाव के अनुभवों से सीख लेने का निर्देश दिया। मायावती ने कहा कि बिहार चुनाव में सरकारी धन के गलत तरीके से वितरण के कारण चुनाव परिणामों पर असर पड़ा जो लोकतंत्र के लिए गंभीर मामला है। उन्होंने पार्टी को ऐसे नए चुनावी हालात के लिए पूरी तरह से तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

    वोटर लिस्ट और मतगणना पर ध्यान

    मायावती ने चुनाव आयोग द्वारा संचालित वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण एसआईआर की प्रक्रिया को पूरी गंभीरता से करने का निर्देश दिया। इसके अलावा उन्होंने पार्टी के कार्यकर्ताओं को मतगणना के लिए सही ट्रेनिंग देने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि चुनाव परिणामों में कोई गड़बड़ी न हो।

    पदाधिकारियों का आभार

    बैठक के अंत में मायावती ने पार्टी के सभी छोटे और बड़े पदाधिकारियों का तहे दिल से धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि पार्टी के कार्यकर्ताओं ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के सिद्धांतों को आगे बढ़ाने के लिए पूरे तन मन और धन से संघर्ष किया है और उनके नेतृत्व में काम करने का संकल्प लिया है।