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  • भारत-भूटान की दोस्ती को मिला आध्यात्मिक प्रतीक, पीएम मोदी के नाम समर्पित हुआ विशेष बौद्ध स्तूप

    भारत-भूटान की दोस्ती को मिला आध्यात्मिक प्रतीक, पीएम मोदी के नाम समर्पित हुआ विशेष बौद्ध स्तूप


    नई दिल्ली। भारत और भूटान के बीच गहरे दोस्ताना रिश्तों की एक खास झलक सामने आई है। भूटान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विशेष सम्मान देते हुए 108 बौद्ध स्तूपों में से 76वां स्तूप उनके नाम समर्पित किया है। यह सम्मान दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाता है। भूटान में महज नौ घंटे के भीतर 108 बौद्ध स्तूपों यानी जांगचुब चोर्टेन का निर्माण किया गया। इस उपलब्धि को धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर समर्पित स्तूप भारत और भूटान की दोस्ती के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।

    विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया के जरिए इस विशेष सम्मान की जानकारी साझा की। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि 1 नवंबर 2026 को भूटान में नौ घंटे के भीतर 108 बौद्ध स्तूपों का निर्माण पूरा किया गया था। इस अवसर पर भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समर्पित 76वें स्तूप की पट्टिका का अनावरण किया। इस मौके को भारत और भूटान के बीच गहरे आध्यात्मिक तथा सभ्यतागत संबंधों का प्रतीक बताया गया। विदेश मंत्रालय के अनुसार यह स्तूप दोनों देशों की साझा विरासत और मित्रता की याद दिलाता रहेगा।

    यह विशेष स्तूप भूटान के गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी में बनाया गया है। यह क्षेत्र भूटान के दक्षिणी हिस्से में भारत की सीमा के पास स्थित है। गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी को भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक की महत्वाकांक्षी विकास परियोजना के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य आधुनिक विकास के साथ आध्यात्मिकता और प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित करना है। ऐसे महत्वपूर्ण स्थान पर प्रधानमंत्री मोदी के नाम से स्तूप का समर्पण दोनों देशों के रिश्तों को एक नया प्रतीकात्मक महत्व देता है।

    बौद्ध धर्म में स्तूपों का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। जांगचुब चोर्टेन को ज्ञान और आध्यात्मिक जागृति का प्रतीक समझा जाता है। बौद्ध परंपरा में 108 की संख्या भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसी धार्मिक मान्यता के साथ 108 स्तूपों का निर्माण किया गया। इस आयोजन को भूटान की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ी बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर 76वें स्तूप का समर्पण इस आयोजन को भारत के साथ भी जोड़ता है।

    भारत और भूटान के संबंध केवल कूटनीतिक और आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच बौद्ध धर्म और सांस्कृतिक परंपराओं की साझा विरासत भी मजबूत आधार प्रदान करती है। भूटान के श्रद्धालु और बौद्ध गुरु भारत के बोधगया सारनाथ और नालंदा जैसे पवित्र स्थलों की यात्रा करते हैं। ये स्थान बौद्ध धर्म के इतिहास और शिक्षाओं से गहराई से जुड़े हुए हैं। दोनों देशों के बीच धार्मिक यात्राओं और सांस्कृतिक आदान-प्रदान से आपसी संबंध लगातार मजबूत होते रहे हैं।

    प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर समर्पित यह स्तूप भारत और भूटान की इसी ऐतिहासिक मित्रता का विशेष प्रतीक बन गया है। नौ घंटे में 108 स्तूपों का निर्माण और उनमें से एक का भारत के प्रधानमंत्री को समर्पित किया जाना इस आयोजन को खास बनाता है। यह सम्मान दोनों देशों के बीच विश्वास और साझा आध्यात्मिक विरासत को दर्शाता है।