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  • मजबूत वैश्विक संकेतों से शेयर बाजार में तेजी, मेटल और डिफेंस शेयरों में खरीदारी

    मजबूत वैश्विक संकेतों से शेयर बाजार में तेजी, मेटल और डिफेंस शेयरों में खरीदारी


    नई दिल्ली। वैश्विक बाजार में अनिश्चितता के बीच सोना और चांदी एक बार फिर चमकने लगे हैं। फेडरल रिजर्व की अहम बैठक से पहले निवेशक सुरक्षित निवेश योग्य की ओर रुख कर रहे हैं, जिसका सीधा असर कीमती धातुओं की कीमतों पर दिख रहा है। मंगलवार को घरेलू वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया (MCX) पर सोने और चांदी दोनों में बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    सोने में सीमित दायरे में तेजी से

    MCX पर 2 अप्रैल 2026 के बैठकों में सोना 1,061 रुपये (0.68%) की बढ़त के साथ करीब 1,56,797 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखा। व्यापार के दौरान सोने ने 1,56,649 रुपये का निचला स्तर और 1,56,996 रुपये का सर्वोच्च स्तर जारी किया। इससे साफ है कि बाजार में तेजी से तो है, लेकिन यह अभी सीमित दायरे में बनी हुई है। विश्लेषक के अनुसार, निवेशक बचे हुए बड़े दांव लगाने से बच रहे हैं और फेड के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।

    चांदी में ज्यादा तेज उछाल

    सोने के मुकाबले चांदी में ज्यादा तेजी से देखने को मिली। 5 मई 2026 के बैठकों में चांदी 3,353 रुपये (1.31%) बढ़कर 2,59,885 रुपये पर पहुंच गई। चांदी ने कारोबार के दौरान 2,58,338 रुपये का निचला स्तर और 2,61,457 रुपये का उच्चतम स्तर जारी किया। यह खुलता है कि औद्योगिक मांग और निवेश दोनों के कारण चांदी में बढ़ोतरी बनी हुई है।

    कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?

    सोने और चांदी में यह तेजी से मुख्य रूप से फेडरल रिजर्व की दो दिवसीय बैठक (17-18 मार्च) से पहले देखने को मिल रही है। इस बैठक में ब्याज दरों को लेकर बड़ा फैसला लिया जा सकता है। आम तौर पर जब ब्याज अनुमानित कम होती हैं, तो सोने और चांदी जैसे सुरक्षित निवेश योग्य की मांग बढ़ जाती है। इसी उम्मीद में निवेशक पहले से ही इन कीमतों में पोजीशन ले रहे हैं।

    युद्ध और कच्चे तेल ने बढ़ाई चिंता

    वैश्विक तनाव, खासकर ईरान, संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल के बीच बढ़ते टकराव ने भी बाजार में स्थिरता बढ़ा दी है। पिछले एक महीने में कच्चे तेल की कीमतों में 50% से ज़्यादा की तेज़ी से दर्ज की गई है, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका है। यही वजह है कि फेड की यह बैठक भारतीयों के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।

    आगे क्या रहेगा असर?

    अगर फेड ब्याज दरों को स्थिर रखता है या महंगाई को लेकर सख्त रुख अपनाता है, तो सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव आ सकता है। वहीं, अगर दरों में कटौती के संकेत मिलते हैं, तो उनकी कीमतों में और तेज़ी से देखने को मिल सकती है। अगर निवेशक सतर्क हैं और बाजार की नजर पूरी तरह फेडरल रिजर्व के फैसले पर टिकी हुई है।

  • बुलियन मार्केट अपडेट: मुनाफावसूली के चलते Gold के दाम 1.60 लाख प्रति 10 ग्राम से नीचे

    बुलियन मार्केट अपडेट: मुनाफावसूली के चलते Gold के दाम 1.60 लाख प्रति 10 ग्राम से नीचे


    नई दिल्ली। अनमोल के बाजार में शुक्रवार को गिरावट का रुख देखने को मिला। सोने और चांदी की खदानों में वसुले के कारण दबाव बनाया जा रहा है, जिससे दोनों किशोरों के दाम नीचे आ गए। अंतर्राष्ट्रीय आंतरायिक से मिले फ़्लोरिडा फ़्लोरिडा और रेस्टॉरेंट द्वारा मान्यता प्राप्त क्रांति के कारण घरेलू बाज़ार में भी गिरावट का माहौल बना हुआ है। इसी के साथ सोने की कीमत एक बार फिर 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गयी है, जबकि चांदी की कीमत भी 2.60 लाख रुपये प्रति किलो से नीचे हो गयी है।

    24 कैरेट सोने की कीमत में 1,700 रुपये से ज्यादा की गिरावट
    इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (सीएए) की ओर से दोपहर 12 बजे जारी ताजा गिरावट के अनुसार 24 कैरेट सोने की कीमत में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। सोना 1,748 रुपये सस्ता 1,58,555 रुपये प्रति 10 ग्राम। इससे पहले इसकी कीमत 1,60,303 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। सोने के समुद्र तट में यह विविधता के बीच सार्वभौम का संकेत जा रहा है। विशेषज्ञ का कहना है कि हाल के दिनों में सोने में तेज गति से देखने को मिला था, बाद में जिज्ञासा ने लाभ बुक करना शुरू कर दिया।

    22 और 18 कैरेट सोना भी हुआ सस्ता
    सोने के अन्य कैरेट में भी गिरावट दर्ज की गई। 22 कैरेट सोने का दाम 1,46,838 रुपये प्रति 10 ग्राम, प्रति 10 ग्राम कीमत 1,45,236 रुपये। वहीं 18 कैरेट सोने की कीमत भी 1,20,227 रुपये प्रति 10 ग्राम से कम कीमत 1,18,916 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई।कोल्डजे की ओर से सोने-अलावेरिया के शोरूम में दो बार रिलीज की जाती है-एक बार दोपहर 12 बजे और दूसरी बार शाम 5 बजे। इन कोटा के आधार पर देश के विभिन्न शहरों, बाजारों में दम तय हो जाता है।

    चांदी की कीमत में 8,000 रुपये से ज्यादा की गिरावट
    सोने के साथ-साथ चांदी में भी तेजी से गिरावट का आकलन किया गया। चांदी का दाम 8,350 रुपये प्रति यूनिट 2,59,951 रुपये प्रति किलो रह गया। इससे पहले इसकी कीमत 2,68,301 रुपये प्रति किलो थी। सिल्वर की इंडस्ट्रीज़ में यह औद्योगिक गिरावट की मांग है, औद्योगिक और वैश्विक उद्यमों में वित्तीय रुझान के कारण मनी जा रही है। विशेषज्ञ के अनुसार अगर अंतरराष्ट्रीय कंपनी दबाव बना रही है तो चांदी के बाजार में भी आगे बढ़ सकती है।

    बाज़ार में भी बेचारे
    घरेलू बाज़ार बाज़ार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ़ इंडिया (MCX) पर भी सोने और चाँदी की कमी देखने को मिली। दोपहर करीब 12:30 बजे सोने का 2 अप्रैल 2026 का बायोडाटा कॉन्ट्रैक्ट 0.40 प्रतिशत प्रतिशत 1,59,632 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार हो रहा था। वहीं चांदी का 5 मई 2026 को नरसंहार अनुबंध 1.81 प्रतिशत जनसंख्या 2,63,099 रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गया। इसका मतलब यह है कि इंटर्नशिप का रुख सख्त हो गया है।

    अंतरराष्ट्रीय में भी दबाव
    वैश्विक बाजार में भी अनमोल साॅस्टेट्स की मंदी का रुख बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत करीब 0.64 प्रतिशत शेयर बाजार 5,092 डॉलर प्रति शेयर की बढ़त पर पहुंच गई, जबकि चांदी करीब 3 प्रतिशत शेयर बाजार में 82 डॉलर प्रति शेयर की बढ़ोतरी पर कारोबार कर रही थी।
    विशेषज्ञ का कहना है कि वैश्विक आर्थिक पर्वतमाला और वैज्ञानिकों के रुख का सीधा असर सोने-असारिया की सीमा पर है।

    डॉलर और बांड उपज बढ़ने से दबाव
    मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के कमोडिटी स्टॉक मानव मोदी के अमेरिका-इजरायल और ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक स्थिति के कारण बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। साथ ही ऊर्जा क्षेत्र में उत्पादकता और उत्पादन को लेकर चिंता भी बढ़ रही है।

    इंडोनेशिया में अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में तेजी से देखने को मिल रही है, जिससे सोने की कीमत पर दबाव पड़ रहा है। निवेशकों का मानना ​​है कि आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक विकास और डॉलर की चाल के आधार पर सोने-रेसा के बांध में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
  • बुलियन मार्केट में नरमी, गोल्ड-सिल्वर के दाम घटे; ग्लोबल डेटा पर टिकी नजर

    बुलियन मार्केट में नरमी, गोल्ड-सिल्वर के दाम घटे; ग्लोबल डेटा पर टिकी नजर


    नई दिल्ली। वैश्विक बाजार में जारी अस्थिरता के बीच बुधवार को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों के सतर्क रुख और प्रमुख आर्थिक आंकड़ों से पहले बाजार में मुनाफावसूली के कारण दोनों कीमती धातुओं के दाम कमजोर पड़े। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों की प्रतीक्षा के चलते निवेशक फिलहाल सावधानी बरत रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक संकेत और केंद्रीय बैंकों की नीति दिशा ही इन धातुओं की आगे की चाल तय करेंगे।

    एमसीएक्स पर सोना-चांदी के दाम फिसले
    घरेलू वायदा बाजार में भी कमजोरी का असर साफ दिखाई दिया। Multi Commodity Exchange of India (एमसीएक्स) पर सुबह करीब 10:30 बजे सोने के 2 अप्रैल 2026 के कॉन्ट्रैक्ट का भाव 0.31 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,62,795 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखा। वहीं चांदी के 5 मई 2026 के कॉन्ट्रैक्ट का भाव 0.78 प्रतिशत गिरकर 2,75,690 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार हाल के दिनों में सोने और चांदी में आई तेजी के बाद निवेशकों ने कुछ मुनाफावसूली की, जिससे कीमतों पर दबाव देखा गया।

    अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कमजोरी
    अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कीमती धातुओं के दाम दबाव में रहे। अमेरिकी वायदा बाजार COMEX पर सोना लगभग 0.56 प्रतिशत की गिरावट के साथ 5,212.64 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। वहीं चांदी करीब 1.22 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 88.493 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। वैश्विक निवेशकों का ध्यान फिलहाल अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर टिका हुआ है, जिसके चलते बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है।

    युद्ध के संकेतों से बाजार में अनिश्चितता
    कमोडिटी बाजार में अस्थिरता का एक बड़ा कारण मध्य-पूर्व में जारी तनाव भी है। हाल के दिनों में Donald Trump के बयान और युद्ध से जुड़े मिले-जुले संकेतों ने निवेशकों को असमंजस में डाल दिया है। पहले संकेत मिले थे कि संघर्ष जल्द समाप्त हो सकता है, लेकिन ताजा घटनाक्रमों से तत्काल तनाव कम होने के स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी टकराव ने बाजार में चिंता बढ़ा दी है और युद्ध लगातार बारहवें दिन तक जारी रहने की खबरों ने निवेशकों की सतर्कता बढ़ा दी है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ा तनाव
    स्थिति तब और संवेदनशील हो गई जब ईरान ने दावा किया कि उसने जहाजों की आवाजाही को प्रभावित करने के लिए Strait of Hormuz में बारूदी सुरंगें बिछा दी हैं। यह क्षेत्र वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। वहीं दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इजरायल से ईरान पर हमले रोकने का आग्रह किया है। इन घटनाओं के कारण ऊर्जा बाजार में भी हलचल बढ़ गई है, जिसका असर सोने और चांदी जैसी सुरक्षित निवेश मानी जाने वाली धातुओं पर पड़ता है।

    अमेरिकी आंकड़ों पर टिकी बाजार की नजर
    विशेषज्ञों के अनुसार अब कमोडिटी बाजार की नजर अमेरिका से आने वाले अहम आर्थिक आंकड़ों पर टिकी हुई है। निवेशक विशेष रूप से अमेरिकी उपभोक्ता मुद्रास्फीति यानी महंगाई के आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि इससे अमेरिकी केंद्रीय बैंक की आगे की मौद्रिक नीति का संकेत मिल सकता है। यदि महंगाई ज्यादा रहती है तो ब्याज दरों में बदलाव की संभावनाएं बन सकती हैं, जिसका सीधा असर सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ता है।

    जीडीपी और मुद्रास्फीति से तय होगी आगे की दिशा
    विश्लेषकों का कहना है कि इस सप्ताह जारी होने वाले अमेरिकी जीडीपी और मुद्रास्फीति के आंकड़े बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे। इन आंकड़ों से वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिति और भविष्य की नीतिगत दिशा को लेकर अधिक स्पष्टता मिलेगी। ऐसे में निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं और नए आर्थिक संकेतों का इंतजार कर रहे हैं। यही कारण है कि फिलहाल सोने और चांदी की कीमतों में सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।

    निवेशकों के लिए क्या संकेत
    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक संकेत, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और अमेरिकी आर्थिक आंकड़े आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों की दिशा तय करेंगे। यदि वैश्विक तनाव बढ़ता है तो सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बढ़ सकती है, जबकि मजबूत आर्थिक आंकड़े आने पर कीमती धातुओं पर दबाव भी बढ़ सकता है। इसलिए निवेशकों को फिलहाल अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और आर्थिक आंकड़ों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

  • सोना-चांदी में फिर आई चमक! गोल्ड 1.62 लाख पार, चांदी 2.76 लाख के ऊपर

    सोना-चांदी में फिर आई चमक! गोल्ड 1.62 लाख पार, चांदी 2.76 लाख के ऊपर


    नई दिल्ली। मंगलवार को घरेलू कमोडिटी बाजार में सोना और चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिली। निवेशकों की बढ़ती खरीदारी के चलते दोनों कीमती धातुएं मजबूत स्तर पर पहुंच गईं। सुबह करीब 10:22 बजे Multi Commodity Exchange (MCX) पर सोने का 2 अप्रैल वाला वायदा कॉन्ट्रैक्ट 1.07 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,62,010 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं चांदी का 5 मई का कॉन्ट्रैक्ट 3.46 प्रतिशत उछलकर 2,76,411 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करता दिखाई दिया।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षित निवेश के रूप में सोने और चांदी की मांग बढ़ने से कीमतों में यह उछाल देखने को मिल रहा है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी बढ़ी चमक
    केवल घरेलू ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोना और चांदी मजबूत दिखाई दिए। अमेरिकी कमोडिटी एक्सचेंज COMEX पर सोने की कीमत 1.40 प्रतिशत बढ़कर लगभग 5,175 डॉलर प्रति औंस हो गई।

    वहीं चांदी की कीमत में और ज्यादा तेजी देखने को मिली और यह 5.42 प्रतिशत बढ़कर 89.105 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई। वैश्विक स्तर पर निवेशकों की सुरक्षित संपत्तियों की ओर बढ़ती दिलचस्पी ने इन धातुओं को मजबूती दी है।

    डॉलर इंडेक्स में कमजोरी से मिला सहारा
    सोने और चांदी की कीमतों में तेजी की एक बड़ी वजह अमेरिकी मुद्रा में आई कमजोरी को माना जा रहा है। दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति दर्शाने वाला US Dollar Index गिरकर 98.85 पर आ गया है, जबकि सोमवार को यह 99 के ऊपर था। डॉलर कमजोर होने पर आमतौर पर सोने और चांदी की कीमतों को समर्थन मिलता है, क्योंकि इससे अन्य मुद्राओं में इन धातुओं को खरीदना सस्ता हो जाता है और मांग बढ़ जाती है।

    वैश्विक तनाव ने बढ़ाई सुरक्षित निवेश की मांग
    इसके अलावा वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता ने भी सोने और चांदी की कीमतों को सहारा दिया है। हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने एक इंटरव्यू में कहा कि Iran के खिलाफ अमेरिकी अभियान “बहुत जल्द” समाप्त हो सकता है।

    उन्होंने यह भी कहा कि जीत का मतलब तब माना जाएगा जब तेहरान के पास ऐसे हथियार विकसित करने की क्षमता नहीं रहेगी जो अमेरिका, Israel या उसके सहयोगी देशों के लिए खतरा बन सकें।

    ईरान की प्रतिक्रिया से बढ़ी वैश्विक अनिश्चितता
    ट्रंप के इस बयान पर ईरान की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरान की सैन्य संस्था Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने सरकारी मीडिया के जरिए कहा कि संघर्ष कब खत्म होगा, यह वाशिंगटन नहीं बल्कि तेहरान तय करेगा।

    इस बयान के बाद वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है। ऐसे माहौल में निवेशक जोखिम वाले निवेश से दूर होकर सोना और चांदी जैसी सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख करते हैं। यही वजह है कि इन धातुओं की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है।

    आगे भी बनी रह सकती है तेजी
    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव बना रहता है और डॉलर में कमजोरी जारी रहती है तो सोने और चांदी की कीमतों में आगे भी मजबूती देखने को मिल सकती है।
    हालांकि बाजार में उतार-चढ़ाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन मौजूदा हालात में सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से कीमती धातुओं का रुख फिलहाल मजबूत बना हुआ है।