Tag: BullionMarket

  • Gold Price Prediction: रिकॉर्ड गिरावट के बाद क्या खत्म हो गया सोने का डाउनफॉल, दिवाली तक कैसी रहेगी चाल और निवेशकों के लिए क्या है सही रणनीति?

    Gold Price Prediction: रिकॉर्ड गिरावट के बाद क्या खत्म हो गया सोने का डाउनफॉल, दिवाली तक कैसी रहेगी चाल और निवेशकों के लिए क्या है सही रणनीति?

    नई दिल्ली । वर्ष 2026 में सोने और चांदी के दामों में आई तेज गिरावट ने निवेशकों और आम खरीदारों के बीच नई चर्चा शुरू कर दी है। जहां सोना अपने रिकॉर्ड स्तर से करीब 33 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो चुका है, वहीं चांदी में लगभग 1.66 लाख रुपये प्रति किलोग्राम की गिरावट दर्ज की गई है। लगातार कमजोर होती कीमतों के बीच बाजार में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह खरीदारी का सही समय है या फिर कीमतों में अभी और गिरावट देखने को मिल सकती है।

    इस वर्ष की शुरुआत में सोने और चांदी दोनों ने नए उच्च स्तर बनाए थे, लेकिन उसके बाद बाजार का रुख पूरी तरह बदल गया। सोना अपने सर्वोच्च स्तर से फिसलकर करीब 1.43 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया, जबकि चांदी भी रिकॉर्ड ऊंचाई से काफी नीचे आ चुकी है। घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ है, जिससे निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई है।

    विशेषज्ञों के अनुसार इस गिरावट के पीछे कई वैश्विक आर्थिक कारण जिम्मेदार हैं। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, महंगाई से जुड़े आंकड़े, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और बॉन्ड यील्ड में बदलाव ने सोने की मांग को प्रभावित किया है। जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं और बॉन्ड पर बेहतर रिटर्न मिलता है, तब निवेशकों का रुझान सोने जैसे ब्याज रहित निवेश से हटकर अन्य विकल्पों की ओर बढ़ जाता है। इसका सीधा असर सोने और चांदी की कीमतों पर दिखाई देता है।

    अमेरिकी डॉलर की मजबूती भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण कारक बनी हुई है। मजबूत डॉलर के कारण अन्य देशों के लिए सोना खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय मांग कमजोर पड़ती है। इसके अलावा रिकॉर्ड तेजी के बाद निवेशकों द्वारा की गई मुनाफावसूली ने भी कीमतों में तेज गिरावट को बढ़ावा दिया है। बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि हाल के महीनों में यही सबसे बड़ा कारण रहा है, जिसने दोनों धातुओं को नीचे खींचा।

    हालांकि लंबी अवधि के दृष्टिकोण से तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक नहीं मानी जा रही है। कई अंतरराष्ट्रीय संस्थानों और कमोडिटी विश्लेषकों का मानना है कि सोना अब अपने निचले स्तर के करीब पहुंच चुका है और इसमें बहुत बड़ी अतिरिक्त गिरावट की संभावना सीमित है। कुछ विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि और कमजोरी आती भी है तो वह लगभग पांच प्रतिशत तक सीमित रह सकती है। इसके बाद वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग के चलते सोने में दोबारा मजबूती देखने को मिल सकती है।

    बाजार की दिशा पर भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यदि अंतरराष्ट्रीय तनाव बढ़ता है तो सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग फिर बढ़ सकती है। वहीं वैश्विक परिस्थितियों में सुधार और आर्थिक स्थिरता आने पर कीमतों में सीमित दबाव बना रह सकता है। इसलिए आने वाले महीनों में निवेशकों की नजरें वैश्विक घटनाओं और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर बनी रहेंगी।

    दिवाली और धनतेरस जैसे पारंपरिक खरीदारी के मौसम को देखते हुए भी बाजार में उत्सुकता बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां सामान्य रहती हैं तो सोने की कीमतें सीमित दायरे में रह सकती हैं, जबकि तनाव बढ़ने की स्थिति में उतार-चढ़ाव तेज हो सकता है। ऐसे में निवेशकों को अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बजाय अपनी वित्तीय जरूरतों और दीर्घकालिक निवेश रणनीति के आधार पर निर्णय लेने की सलाह दी जा रही है। लगातार बदलते आर्थिक संकेतकों के बीच आने वाले महीनों में सोने और चांदी की चाल वैश्विक बाजारों की दिशा पर काफी हद तक निर्भर करेगी।

  • सोना-चांदी बाजार में बड़ी गिरावट, एक सप्ताह में सोना करीब 3 हजार और चांदी 13 हजार रुपये से अधिक टूटी, निवेशकों की बढ़ी चिंता

    सोना-चांदी बाजार में बड़ी गिरावट, एक सप्ताह में सोना करीब 3 हजार और चांदी 13 हजार रुपये से अधिक टूटी, निवेशकों की बढ़ी चिंता

    नई दिल्ली । वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच इस सप्ताह घरेलू बुलियन बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। सप्ताहभर के कारोबार में सोना लगभग तीन हजार रुपये प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हुआ, जबकि चांदी के दाम में 13 हजार रुपये से अधिक प्रति किलोग्राम की कमी दर्ज की गई। कीमतों में आई इस नरमी ने निवेशकों और सर्राफा कारोबार से जुड़े लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।

    ताजा बाजार आंकड़ों के अनुसार 24 कैरेट सोने की कीमत सप्ताह के अंत तक 2,976 रुपये घटकर 1,43,368 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई। सप्ताह की शुरुआत में इसका भाव 1,46,344 रुपये प्रति 10 ग्राम था। इसी प्रकार 22 कैरेट सोने की कीमत घटकर 1,31,325 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गई, जबकि सप्ताह की शुरुआत में यह 1,34,051 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। 18 कैरेट सोने में भी गिरावट देखने को मिली और इसका भाव 1,09,758 रुपये से घटकर 1,07,526 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया।

    साप्ताहिक कारोबार के दौरान सोने में उतार-चढ़ाव भी देखने को मिला। सप्ताह का उच्चतम स्तर 6 जुलाई के सुबह के सत्र में 1,45,583 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया, जबकि सबसे निचला स्तर 8 जुलाई के शाम के सत्र में 1,42,350 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। इससे स्पष्ट है कि बाजार में पूरे सप्ताह अस्थिरता बनी रही और निवेशकों को लगातार बदलते भावों का सामना करना पड़ा।

    सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी तेज गिरावट दर्ज की गई। सप्ताह के दौरान चांदी 13,468 रुपये प्रति किलोग्राम सस्ती होकर 2,20,390 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। सप्ताह की शुरुआत में इसका भाव 2,33,858 रुपये प्रति किलोग्राम था। कारोबार के दौरान चांदी का उच्चतम स्तर 6 जुलाई के शाम के सत्र में 2,33,158 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया, जबकि सबसे निचला स्तर 10 जुलाई के शाम के सत्र में 2,20,390 रुपये प्रति किलोग्राम रहा।

    सर्राफा बाजार में कीमतों का निर्धारण दिन में दो बार सुबह और शाम के कारोबारी सत्र के आधार पर किया जाता है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बुलियन बाजार में आए बदलावों का सीधा असर घरेलू कीमतों पर भी देखने को मिलता है। इसी कारण वैश्विक स्तर पर होने वाली आर्थिक और राजनीतिक घटनाओं पर निवेशकों की लगातार नजर बनी रहती है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इस सप्ताह सोने का भाव लगभग 4,100 डॉलर प्रति औंस और चांदी का भाव करीब 60 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा पश्चिम एशिया में विकसित हो रहे हालात ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ाई है। इन परिस्थितियों का प्रभाव कीमती धातुओं के कारोबार पर भी पड़ा, जिसके चलते घरेलू बाजार में सोने और चांदी दोनों की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और निवेशकों की धारणा के आधार पर बुलियन बाजार की दिशा तय होने की संभावना जताई जा रही है।

  • मध्यपूर्व में बढ़ते तनाव के बीच कीमती धातुओं में नरमी, सोना-चांदी शुरुआती कारोबार में फिसले, निवेशकों की नजर वैश्विक घटनाक्रम पर

    मध्यपूर्व में बढ़ते तनाव के बीच कीमती धातुओं में नरमी, सोना-चांदी शुरुआती कारोबार में फिसले, निवेशकों की नजर वैश्विक घटनाक्रम पर

    नई दिल्ली । मध्यपूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक बाजारों में जारी अनिश्चितता के बीच शुक्रवार को घरेलू सर्राफा बाजार की शुरुआत नरमी के साथ हुई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने और चांदी दोनों की कीमतों में शुरुआती कारोबार के दौरान गिरावट दर्ज की गई। हालांकि दोनों धातुओं में गिरावट की तीव्रता अलग-अलग रही, लेकिन शुरुआती रुझान निवेशकों के सतर्क रुख को दर्शाते रहे।

    एमसीएक्स पर सोने का अगस्त 2026 वायदा अनुबंध पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले कमजोर स्तर पर खुला। शुरुआती कारोबार में इसकी कीमत लगातार दबाव में रही और कुछ ही समय में गिरावट बढ़कर लगभग आधा प्रतिशत के करीब पहुंच गई। कारोबार के दौरान सोने का भाव प्रति 10 ग्राम लगभग 1.44 लाख रुपये के स्तर के आसपास पहुंच गया। इससे स्पष्ट हुआ कि वैश्विक तनाव के बावजूद निवेशकों की खरीदारी सीमित रही और बाजार में मुनाफावसूली का असर दिखाई दिया।

    चांदी के वायदा कारोबार में भी नरमी देखने को मिली। हालांकि इसकी गिरावट सोने की तुलना में अपेक्षाकृत कम रही। सितंबर डिलीवरी वाले अनुबंध में शुरुआती कारोबार के दौरान मामूली कमजोरी दर्ज की गई और कीमतें पिछले बंद स्तर से नीचे कारोबार करती रहीं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि चांदी की कीमतों पर औद्योगिक मांग और अंतरराष्ट्रीय रुझानों का भी महत्वपूर्ण प्रभाव रहता है, जिसके कारण इसमें उतार-चढ़ाव की प्रकृति सोने से कुछ अलग दिखाई देती है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी दोनों कीमती धातुओं का प्रदर्शन मिश्रित रहा। वैश्विक कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतों में हल्की कमजोरी दर्ज की गई, जबकि चांदी सीमित बढ़त के साथ कारोबार करती दिखाई दी। इससे यह संकेत मिला कि निवेशक फिलहाल वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, अमेरिकी मौद्रिक नीति और भू-राजनीतिक घटनाक्रम का आकलन करते हुए सतर्क रणनीति अपना रहे हैं।

    मध्यपूर्व में हाल के दिनों में बढ़े सैन्य तनाव ने वैश्विक वित्तीय बाजारों की चिंता बढ़ाई है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों के तेज होने और जवाबी कार्रवाइयों के बाद निवेशकों की नजर लगातार घटनाक्रम पर बनी हुई है। ऐसे समय में सामान्यतः सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने की मांग बढ़ने की संभावना रहती है, लेकिन बाजार में मुनाफावसूली, डॉलर की चाल और निवेशकों की रणनीति जैसे अन्य कारक भी कीमतों को प्रभावित करते हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि कीमती धातुओं की कीमतें केवल भू-राजनीतिक घटनाओं से ही तय नहीं होतीं, बल्कि वैश्विक ब्याज दरों, डॉलर इंडेक्स, केंद्रीय बैंकों की नीतियों और निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता जैसे कई आर्थिक कारकों का भी उन पर सीधा प्रभाव पड़ता है। इसलिए किसी एक घटना के आधार पर कीमतों की दिशा तय करना उचित नहीं माना जाता।

    आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर मध्यपूर्व की स्थिति, वैश्विक आर्थिक संकेतकों और अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार के रुख पर बनी रहेगी। यदि क्षेत्रीय तनाव और बढ़ता है या वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में कोई बड़ा बदलाव आता है, तो इसका असर सोने और चांदी की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है। फिलहाल बाजार में सतर्कता का माहौल बना हुआ है और निवेशक प्रत्येक नए घटनाक्रम का इंतजार कर रहे हैं, जिससे आगे की कीमतों की दिशा स्पष्ट हो सके।

  • निवेशकों और ग्राहकों के लिए जरूरी खबर सोने चांदी के ताजा भाव ने बढ़ाई हलचल जानें आज का पूरा बाजार हाल

    निवेशकों और ग्राहकों के लिए जरूरी खबर सोने चांदी के ताजा भाव ने बढ़ाई हलचल जानें आज का पूरा बाजार हाल


    नई दिल्ली । सोना और चांदी भारतीय परिवारों की परंपरा के साथ साथ निवेश का भी सबसे भरोसेमंद माध्यम माने जाते हैं। शादी विवाह का मौसम हो या त्योहारों की खरीदारी बाजार में इन दोनों की मांग हमेशा बनी रहती है। ऐसे में हर दिन बदलने वाले सोने और चांदी के भाव आम लोगों से लेकर निवेशकों तक सभी के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले उतार चढ़ाव डॉलर की मजबूती कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का सीधा असर घरेलू सर्राफा बाजार पर भी दिखाई देता है। यही वजह है कि खरीदारी से पहले ताजा रेट की जानकारी लेना बेहद जरूरी माना जाता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि बीते कुछ समय से वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता और भू राजनीतिक तनाव के कारण सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग लगातार बनी हुई है। जब भी शेयर बाजार में अस्थिरता बढ़ती है या वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव आता है तब निवेशक बड़ी संख्या में सोने की ओर रुख करते हैं। इससे इसकी कीमतों में तेजी देखने को मिलती है। वहीं चांदी की कीमतों पर निवेश के साथ साथ औद्योगिक मांग का भी बड़ा असर पड़ता है क्योंकि इसका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स सोलर एनर्जी और कई उद्योगों में किया जाता है।

    यदि आप आभूषण खरीदने की योजना बना रहे हैं तो केवल कीमत देखकर फैसला करना सही नहीं होगा। हमेशा प्रमाणित हॉलमार्क वाले सोने की खरीदारी करें ताकि उसकी शुद्धता सुनिश्चित हो सके। इसके अलावा ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और जीएसटी की जानकारी पहले ही प्राप्त कर लें क्योंकि कई बार यही अतिरिक्त खर्च कुल कीमत को काफी बढ़ा देता है। अलग अलग शहरों और ज्वेलर्स के अनुसार मेकिंग चार्ज में अंतर हो सकता है।

    निवेश के नजरिए से भी सोना लंबे समय में बेहतर विकल्प माना जाता है। हालांकि बाजार में लगातार उतार चढ़ाव बना रहता है इसलिए एकमुश्त बड़ी खरीदारी करने के बजाय चरणबद्ध निवेश की रणनीति अधिक सुरक्षित मानी जाती है। डिजिटल गोल्ड सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड और गोल्ड ईटीएफ जैसे विकल्प भी निवेशकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। वहीं जिन लोगों को भौतिक धातु पसंद है उनके लिए सोने और चांदी के सिक्के तथा बार भी अच्छे विकल्प हो सकते हैं।

    चांदी की बात करें तो इसकी मांग भी लगातार बढ़ रही है। आभूषणों के अलावा धार्मिक कार्यों औद्योगिक उपयोग और निवेश के कारण इसकी कीमतों में भी समय समय पर तेजी और गिरावट देखने को मिलती है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में सोलर सेक्टर और इलेक्ट्रिक उपकरणों की बढ़ती मांग चांदी की कीमतों को प्रभावित कर सकती है।

    बाजार विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि खरीदारी या निवेश का निर्णय केवल भाव देखकर नहीं बल्कि अपनी जरूरत और बजट को ध्यान में रखकर लेना चाहिए। यदि उद्देश्य लंबे समय का निवेश है तो छोटी छोटी मात्रा में नियमित खरीदारी बेहतर रणनीति साबित हो सकती है। वहीं शादी या अन्य पारिवारिक जरूरतों के लिए खरीदारी करने वाले ग्राहकों को बाजार के रुझान पर नजर रखते हुए सही समय का इंतजार करना चाहिए।

    सोने और चांदी के दाम प्रतिदिन बदलते रहते हैं इसलिए खरीदारी से पहले अपने शहर के सर्राफा बाजार या अधिकृत ज्वेलर्स से ताजा कीमत की पुष्टि जरूर कर लें। सही जानकारी और सोच समझकर लिया गया फैसला न केवल बेहतर निवेश साबित हो सकता है बल्कि आपकी बचत को भी सुरक्षित रखने में मदद करेगा।

  • कीमती धातुओं में फिर बढ़ी खरीदारी, सोना और चांदी संभले; हालिया गिरावट के बाद निवेशकों को मिली राहत

    कीमती धातुओं में फिर बढ़ी खरीदारी, सोना और चांदी संभले; हालिया गिरावट के बाद निवेशकों को मिली राहत

    नई दिल्ली । घरेलू सर्राफा और वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर मजबूती लौटती दिखाई दी है। लगातार दो कारोबारी सत्रों तक दबाव में रहने के बाद दोनों कीमती धातुओं में खरीदारी बढ़ी, जिससे कीमतों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया। शुरुआती कारोबार में कमजोरी के संकेत मिलने के बावजूद निवेशकों की सक्रियता ने बाजार की दिशा बदल दी और सोना-चांदी दोनों ही हरे निशान में कारोबार करते नजर आए।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में सोने की शुरुआत दबाव के साथ हुई थी। कारोबार के शुरुआती चरण में कीमतें पिछले बंद स्तर की तुलना में नीचे खुलीं, जिससे यह संकेत मिला कि बाजार में अभी भी सतर्कता बनी हुई है। हालांकि कुछ ही समय बाद खरीदारी का माहौल बनने लगा और सोने ने तेजी से रिकवरी करते हुए अपने शुरुआती नुकसान की भरपाई कर ली। कारोबार के दौरान सोने में उतार-चढ़ाव भी देखने को मिला, लेकिन निवेशकों की रुचि बढ़ने से कीमतें मजबूती के साथ आगे बढ़ती रहीं।

    चांदी के बाजार में भी लगभग यही तस्वीर दिखाई दी। शुरुआत में कीमतों पर दबाव रहा और बाजार कमजोर स्तर पर खुला, लेकिन बाद में मांग बढ़ने से तेजी का रुख बन गया। कारोबार के शुरुआती घंटों में ही चांदी ने अपनी गिरावट को पीछे छोड़ते हुए मजबूती हासिल कर ली। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के दिनों में हुई तेज गिरावट के बाद निवेशकों ने निचले स्तरों पर खरीदारी को अवसर के रूप में देखा, जिससे कीमतों को समर्थन मिला।

    अंतरराष्ट्रीय बाजारों का प्रभाव भी घरेलू कारोबार पर स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। वैश्विक स्तर पर सोने में सीमित बढ़त दर्ज की गई, जबकि चांदी के दामों में दबाव बना रहा। इसके बावजूद भारतीय बाजार में दोनों धातुओं ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। विश्लेषकों के अनुसार घरेलू निवेशकों की मांग और तकनीकी स्तरों पर हुई खरीदारी ने स्थानीय बाजार को सहारा दिया।

    बीते कुछ महीनों का प्रदर्शन देखें तो सोना और चांदी दोनों ही भारी दबाव में रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियों, डॉलर की चाल, ब्याज दरों से जुड़ी उम्मीदों और वैश्विक निवेश प्रवाह में बदलाव के कारण कीमती धातुओं में व्यापक बिकवाली देखी गई। इसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा और निवेशकों को कई बार तेज गिरावट का सामना करना पड़ा।

    विशेष रूप से चांदी में गिरावट का दायरा अधिक रहा है। पिछले कुछ महीनों के दौरान इसके दामों में उल्लेखनीय कमजोरी दर्ज की गई, जबकि सोना भी लगातार दबाव में बना रहा। एक सप्ताह के भीतर चांदी में दो अंकों की गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी थी। ऐसे में मौजूदा तेजी को बाजार सहभागियों ने राहत के संकेत के रूप में देखा है।

    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान तेजी को अभी स्थायी रुझान नहीं माना जा सकता। आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक संकेतकों, केंद्रीय बैंकों की नीतियों और डॉलर की चाल पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं तो सोना और चांदी अपनी हालिया रिकवरी को आगे बढ़ा सकते हैं। वहीं किसी भी नकारात्मक संकेत की स्थिति में बाजार में फिर से अस्थिरता लौट सकती है।

    फिलहाल, दो दिनों की लगातार गिरावट के बाद कीमती धातुओं में आई यह मजबूती निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। बाजार की मौजूदा स्थिति यह दर्शाती है कि निचले स्तरों पर खरीदारी अभी भी मजबूत बनी हुई है और निवेशक सोने तथा चांदी को सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में देख रहे हैं। आने वाले कारोबारी सत्रों में यह स्पष्ट होगा कि यह तेजी अल्पकालिक राहत है या फिर बाजार में नए उछाल की शुरुआत।

  • इस साल चांदी 2 लाख के पार? रिटर्न में सोने को भी पीछे छोड़ रही है सिल्वर

    इस साल चांदी 2 लाख के पार? रिटर्न में सोने को भी पीछे छोड़ रही है सिल्वर


    नई दिल्ली। इस साल चांदी(Silver) ने निवेशकों को चौंकाते हुए सोने(gold) से भी ज्यादा रिटर्न दिया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो इस साल चांदी की कीमतों में 114% से अधिक की भारी बढ़ोतरी हुई है, जबकि सोने में 68% का उछाल देखने को मिला है। एक तरफ सोना 1 लाख 30 हजार प्रति 10 ग्राम के पार निकल गया है। वहीं, चांदी ने बुधवार को 1,92,000 प्रति किलोग्राम के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। उम्मीद जताई जा रही है कि साल 2025 के खत्म होने से पहले चांदी दो लाख रुपये प्रति किलो के आंकड़े को पार कर सकती है।
    जानकारों ने कहा, बुधवार को सोने में मामूली बढ़त हुई, जिसे अमेरिकी डॉलर के नरम होने और फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों में कटौती की पक्की उम्मीदों से सहारा मिला। बाजार के सतर्क रुख के साथ ही वैश्विक अनिश्चितताओं ने भी कीमती धातुओं को और बढ़ावा दिया।

    वायदा बाजार में चांदी 1.53 प्रतिशत बढ़कर 61.60 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड पर पहुंच गई। मंगलवार को, यह धातु 2.66 डॉलर बढ़कर 60.82 डॉलर प्रति औंस के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई थी। पिछले दो कारोबारी सत्रों में इसमें 5.91 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

    मांग अधिक उत्पादन कम
    एक साल में चांदी के दाम दोगुने हो गए हैं। चांदी की मांग अधिक है, लेकिन उत्पादन कम। इसके साथ ही उद्योग क्षेत्रों में चांदी की मांग पिछले कुछ सालो में बढ़ी है। बदलती तकनीकी ने चांदी की खपत को बढ़ाया है। सोलर, इलेक्ट्रिक गाड़ियों में अब चांदी का उपयोग बढ़ने लगा है जैसे-जैसे इलेक्ट्रिक कारों की मांग बढ़ेगी, वैसे-वैसे उपयोग और चांदी की मांग बढ़ेगी।

    किस वजह से लगातार कीमतें बढ़ रहीं
    दरअसल, दुनिया भर में बढ़ते तनाव, संघर्ष और अनिश्चितता ने सोने और चांदी को सुरक्षित निवेश के तौर पर और आकर्षक बना दिया है। निवेशक शेयर मार्केट की बजाय इनमें निवेश कर रहे हैं। इसके साथ ही अमेरिकी टैरिफ के आर्थिक प्रभावों को लेकर पैदा हुई चिंताओं ने भी कीमतों को सहारा दिया है। इसके अलावा, दुनिया भर के सेंट्रल बैंक की तरफ से सोने-चांदी की लगातार खरीदारी से बाजार में इन धातुओं की मांग बनी हुई है। वहीं, ईटीएफ में भी भारी मात्रा में पैसा आ रहा है, जिससे कीमतों में तेजी आ रही है।
    क्या दो लाख के आंकड़े को पार कर पाएगी चांदी?

    बाजार के जानकारों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस साल चांदी दो लाख रुपये के आंकड़े को पार कर पाएगी? विशेषज्ञों का कहना है कि इस साल के आखिर तक पर चांदी दो लाख रुपये के भाव को पार कर सकती है। इतना ही नहीं यह 20026 में 2.10 से 2.25 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर तक भी पहुंच सकती है।

    एक झटके में चांदी के दाम 11,500 रुपये उछले
    अंतरराष्ट्रीय बाजार के संकेतों से बढ़ी मजबूत घरेलू मांग के बीच बुधवार को दिल्ली में चांदी की कीमतों में लगभग दो महीनों में एक दिन की सबसे बड़ी तेजी आई। चांदी के दाम 11,500 रुपये बढ़कर 1,92,000 रुपये प्रति किलोग्राम के नए शिखर पर पहुंच गई। वहीं, सोने की कीमत 800 रुपये बढ़कर 1,32,400 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई।

    इससे पहले, चांदी की कीमत में इतनी बड़ी एक दिन की बढ़ोतरी इस वर्ष 10 अक्टूबर को दर्ज की गई थी, जब चांदी के दाम 8,500 रुपये बढ़े थे। इसके बाद दाम 1,71,500 रुपये प्रति किलोग्राम हो गए थे।

    ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के अनुसार, इस साल अब तक चांदी की कीमतों में 31 दिसंबर, 2024 को 89,700 रुपये प्रति किलोग्राम से 1,02,300 रुपये या 114.04 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। मंगलवार को पहली बार 60 डॉलर प्रति औंस से ऊपर जाने के बाद चांदी एक नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई और बढ़त को और बढ़ाया।

    कारोबारी अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती, मांग में तेजी, आपूर्ति में लगातार कमी और एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड में बढ़ते निवेश पर दांव लगा रहे हैं ताकि चांदी की रैली को बढ़ावा मिल सके।