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  • कीमती धातुओं में फिर बढ़ी खरीदारी, सोना और चांदी संभले; हालिया गिरावट के बाद निवेशकों को मिली राहत

    कीमती धातुओं में फिर बढ़ी खरीदारी, सोना और चांदी संभले; हालिया गिरावट के बाद निवेशकों को मिली राहत

    नई दिल्ली । घरेलू सर्राफा और वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर मजबूती लौटती दिखाई दी है। लगातार दो कारोबारी सत्रों तक दबाव में रहने के बाद दोनों कीमती धातुओं में खरीदारी बढ़ी, जिससे कीमतों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया। शुरुआती कारोबार में कमजोरी के संकेत मिलने के बावजूद निवेशकों की सक्रियता ने बाजार की दिशा बदल दी और सोना-चांदी दोनों ही हरे निशान में कारोबार करते नजर आए।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में सोने की शुरुआत दबाव के साथ हुई थी। कारोबार के शुरुआती चरण में कीमतें पिछले बंद स्तर की तुलना में नीचे खुलीं, जिससे यह संकेत मिला कि बाजार में अभी भी सतर्कता बनी हुई है। हालांकि कुछ ही समय बाद खरीदारी का माहौल बनने लगा और सोने ने तेजी से रिकवरी करते हुए अपने शुरुआती नुकसान की भरपाई कर ली। कारोबार के दौरान सोने में उतार-चढ़ाव भी देखने को मिला, लेकिन निवेशकों की रुचि बढ़ने से कीमतें मजबूती के साथ आगे बढ़ती रहीं।

    चांदी के बाजार में भी लगभग यही तस्वीर दिखाई दी। शुरुआत में कीमतों पर दबाव रहा और बाजार कमजोर स्तर पर खुला, लेकिन बाद में मांग बढ़ने से तेजी का रुख बन गया। कारोबार के शुरुआती घंटों में ही चांदी ने अपनी गिरावट को पीछे छोड़ते हुए मजबूती हासिल कर ली। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के दिनों में हुई तेज गिरावट के बाद निवेशकों ने निचले स्तरों पर खरीदारी को अवसर के रूप में देखा, जिससे कीमतों को समर्थन मिला।

    अंतरराष्ट्रीय बाजारों का प्रभाव भी घरेलू कारोबार पर स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। वैश्विक स्तर पर सोने में सीमित बढ़त दर्ज की गई, जबकि चांदी के दामों में दबाव बना रहा। इसके बावजूद भारतीय बाजार में दोनों धातुओं ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। विश्लेषकों के अनुसार घरेलू निवेशकों की मांग और तकनीकी स्तरों पर हुई खरीदारी ने स्थानीय बाजार को सहारा दिया।

    बीते कुछ महीनों का प्रदर्शन देखें तो सोना और चांदी दोनों ही भारी दबाव में रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियों, डॉलर की चाल, ब्याज दरों से जुड़ी उम्मीदों और वैश्विक निवेश प्रवाह में बदलाव के कारण कीमती धातुओं में व्यापक बिकवाली देखी गई। इसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा और निवेशकों को कई बार तेज गिरावट का सामना करना पड़ा।

    विशेष रूप से चांदी में गिरावट का दायरा अधिक रहा है। पिछले कुछ महीनों के दौरान इसके दामों में उल्लेखनीय कमजोरी दर्ज की गई, जबकि सोना भी लगातार दबाव में बना रहा। एक सप्ताह के भीतर चांदी में दो अंकों की गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी थी। ऐसे में मौजूदा तेजी को बाजार सहभागियों ने राहत के संकेत के रूप में देखा है।

    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान तेजी को अभी स्थायी रुझान नहीं माना जा सकता। आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक संकेतकों, केंद्रीय बैंकों की नीतियों और डॉलर की चाल पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं तो सोना और चांदी अपनी हालिया रिकवरी को आगे बढ़ा सकते हैं। वहीं किसी भी नकारात्मक संकेत की स्थिति में बाजार में फिर से अस्थिरता लौट सकती है।

    फिलहाल, दो दिनों की लगातार गिरावट के बाद कीमती धातुओं में आई यह मजबूती निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। बाजार की मौजूदा स्थिति यह दर्शाती है कि निचले स्तरों पर खरीदारी अभी भी मजबूत बनी हुई है और निवेशक सोने तथा चांदी को सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में देख रहे हैं। आने वाले कारोबारी सत्रों में यह स्पष्ट होगा कि यह तेजी अल्पकालिक राहत है या फिर बाजार में नए उछाल की शुरुआत।

  • इस साल चांदी 2 लाख के पार? रिटर्न में सोने को भी पीछे छोड़ रही है सिल्वर

    इस साल चांदी 2 लाख के पार? रिटर्न में सोने को भी पीछे छोड़ रही है सिल्वर


    नई दिल्ली। इस साल चांदी(Silver) ने निवेशकों को चौंकाते हुए सोने(gold) से भी ज्यादा रिटर्न दिया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो इस साल चांदी की कीमतों में 114% से अधिक की भारी बढ़ोतरी हुई है, जबकि सोने में 68% का उछाल देखने को मिला है। एक तरफ सोना 1 लाख 30 हजार प्रति 10 ग्राम के पार निकल गया है। वहीं, चांदी ने बुधवार को 1,92,000 प्रति किलोग्राम के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। उम्मीद जताई जा रही है कि साल 2025 के खत्म होने से पहले चांदी दो लाख रुपये प्रति किलो के आंकड़े को पार कर सकती है।
    जानकारों ने कहा, बुधवार को सोने में मामूली बढ़त हुई, जिसे अमेरिकी डॉलर के नरम होने और फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों में कटौती की पक्की उम्मीदों से सहारा मिला। बाजार के सतर्क रुख के साथ ही वैश्विक अनिश्चितताओं ने भी कीमती धातुओं को और बढ़ावा दिया।

    वायदा बाजार में चांदी 1.53 प्रतिशत बढ़कर 61.60 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड पर पहुंच गई। मंगलवार को, यह धातु 2.66 डॉलर बढ़कर 60.82 डॉलर प्रति औंस के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई थी। पिछले दो कारोबारी सत्रों में इसमें 5.91 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

    मांग अधिक उत्पादन कम
    एक साल में चांदी के दाम दोगुने हो गए हैं। चांदी की मांग अधिक है, लेकिन उत्पादन कम। इसके साथ ही उद्योग क्षेत्रों में चांदी की मांग पिछले कुछ सालो में बढ़ी है। बदलती तकनीकी ने चांदी की खपत को बढ़ाया है। सोलर, इलेक्ट्रिक गाड़ियों में अब चांदी का उपयोग बढ़ने लगा है जैसे-जैसे इलेक्ट्रिक कारों की मांग बढ़ेगी, वैसे-वैसे उपयोग और चांदी की मांग बढ़ेगी।

    किस वजह से लगातार कीमतें बढ़ रहीं
    दरअसल, दुनिया भर में बढ़ते तनाव, संघर्ष और अनिश्चितता ने सोने और चांदी को सुरक्षित निवेश के तौर पर और आकर्षक बना दिया है। निवेशक शेयर मार्केट की बजाय इनमें निवेश कर रहे हैं। इसके साथ ही अमेरिकी टैरिफ के आर्थिक प्रभावों को लेकर पैदा हुई चिंताओं ने भी कीमतों को सहारा दिया है। इसके अलावा, दुनिया भर के सेंट्रल बैंक की तरफ से सोने-चांदी की लगातार खरीदारी से बाजार में इन धातुओं की मांग बनी हुई है। वहीं, ईटीएफ में भी भारी मात्रा में पैसा आ रहा है, जिससे कीमतों में तेजी आ रही है।
    क्या दो लाख के आंकड़े को पार कर पाएगी चांदी?

    बाजार के जानकारों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस साल चांदी दो लाख रुपये के आंकड़े को पार कर पाएगी? विशेषज्ञों का कहना है कि इस साल के आखिर तक पर चांदी दो लाख रुपये के भाव को पार कर सकती है। इतना ही नहीं यह 20026 में 2.10 से 2.25 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर तक भी पहुंच सकती है।

    एक झटके में चांदी के दाम 11,500 रुपये उछले
    अंतरराष्ट्रीय बाजार के संकेतों से बढ़ी मजबूत घरेलू मांग के बीच बुधवार को दिल्ली में चांदी की कीमतों में लगभग दो महीनों में एक दिन की सबसे बड़ी तेजी आई। चांदी के दाम 11,500 रुपये बढ़कर 1,92,000 रुपये प्रति किलोग्राम के नए शिखर पर पहुंच गई। वहीं, सोने की कीमत 800 रुपये बढ़कर 1,32,400 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई।

    इससे पहले, चांदी की कीमत में इतनी बड़ी एक दिन की बढ़ोतरी इस वर्ष 10 अक्टूबर को दर्ज की गई थी, जब चांदी के दाम 8,500 रुपये बढ़े थे। इसके बाद दाम 1,71,500 रुपये प्रति किलोग्राम हो गए थे।

    ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के अनुसार, इस साल अब तक चांदी की कीमतों में 31 दिसंबर, 2024 को 89,700 रुपये प्रति किलोग्राम से 1,02,300 रुपये या 114.04 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। मंगलवार को पहली बार 60 डॉलर प्रति औंस से ऊपर जाने के बाद चांदी एक नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई और बढ़त को और बढ़ाया।

    कारोबारी अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती, मांग में तेजी, आपूर्ति में लगातार कमी और एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड में बढ़ते निवेश पर दांव लगा रहे हैं ताकि चांदी की रैली को बढ़ावा मिल सके।