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  • किशोरों में चिड़चिड़ापन और नींद की समस्या को न करें नजरअंदाज, जानें स्ट्रेस और एंग्जाइटी के प्रमुख संकेत

    किशोरों में चिड़चिड़ापन और नींद की समस्या को न करें नजरअंदाज, जानें स्ट्रेस और एंग्जाइटी के प्रमुख संकेत


    नई दिल्ली । किशोरावस्था में बच्चों के व्यवहार में बदलाव को कई बार सामान्य मूड स्विंग मान लिया जाता है, लेकिन लगातार चिड़चिड़ापन, गुस्सा, बेचैनी, नींद में बदलाव और पढ़ाई से दूरी तनाव या एंग्जाइटी के संकेत हो सकते हैं। बच्चों और किशोरों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां हमेशा सीधे शब्दों में सामने नहीं आतीं। कई बच्चे अपनी भावनाओं और परेशानियों को ठीक से व्यक्त नहीं कर पाते, इसलिए माता-पिता के लिए उनके व्यवहार और रोजमर्रा की गतिविधियों में होने वाले बदलावों पर ध्यान देना जरूरी है।

    किशोरावस्था में पढ़ाई और परीक्षा का दबाव, भविष्य को लेकर चिंता, दोस्तों के बीच स्वीकार्यता की चिंता, पारिवारिक तनाव और बुलिंग जैसी परिस्थितियां मानसिक दबाव बढ़ा सकती हैं। इस उम्र में मूड में बदलाव या कभी-कभी चिड़चिड़ापन होना सामान्य हो सकता है, लेकिन जब ये समस्याएं लगातार बनी रहें और बच्चे की पढ़ाई, नींद, सामाजिक जीवन या दैनिक गतिविधियों को प्रभावित करने लगें, तब इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों और किशोरों में तनाव और चिंता होना अपने आप में असामान्य नहीं है। चिंता तब चिंता का विषय बनती है, जब वह लंबे समय तक बनी रहे या बच्चे की सामान्य जिंदगी में बाधा डालने लगे। किशोर में लगातार बेचैनी, किसी बात को लेकर अत्यधिक चिंता, बार-बार आश्वासन मांगना या ऐसी परिस्थितियों से बचना जिनमें वह पहले सामान्य रूप से शामिल होता था, एंग्जाइटी से जुड़े संकेत हो सकते हैं।

    माता-पिता को बच्चे के व्यवहार में अचानक आए बदलावों पर विशेष नजर रखनी चाहिए। अगर बच्चा पहले की तुलना में छोटी-छोटी बातों पर अधिक गुस्सा करने या झल्लाने लगा है, तो इसके पीछे केवल अनुशासन या जिद को कारण मानना उचित नहीं है। लगातार चिड़चिड़ापन कई बार बच्चे के भीतर चल रहे तनाव या भावनात्मक परेशानी का संकेत हो सकता है।

    दोस्तों और परिवार से दूरी बनाना भी एक महत्वपूर्ण बदलाव हो सकता है। यदि बच्चा सामाजिक गतिविधियों से बचने लगे, पहले पसंद आने वाली चीजों में रुचि कम हो जाए या वह ज्यादातर समय अकेले रहना पसंद करने लगे, तो माता-पिता को उससे शांत तरीके से बातचीत करने की कोशिश करनी चाहिए।

    नींद में बदलाव भी मानसिक तनाव से जुड़ा हो सकता है। सोने में परेशानी, रात में बार-बार जागना या जरूरत से ज्यादा सोना ऐसे बदलाव हैं जिन पर ध्यान दिया जाना चाहिए। इसी तरह बार-बार सिरदर्द, पेट दर्द, मितली या शरीर से जुड़ी अन्य शिकायतें भी कभी-कभी तनाव और चिंता के साथ दिखाई दे सकती हैं। हालांकि इन शारीरिक लक्षणों के दूसरे कारण भी हो सकते हैं, इसलिए इन्हें केवल मानसिक स्वास्थ्य समस्या मानकर नहीं चलना चाहिए।

    पढ़ाई या स्कूल से अचानक दूरी बनाना भी माता-पिता के लिए संकेत हो सकता है। परीक्षा का डर, पढ़ाई का दबाव, सामाजिक परेशानी या बुलिंग जैसी स्थितियां बच्चे के स्कूल जाने और पढ़ाई करने के तरीके को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे समय में बच्चे को डांटने के बजाय उसकी परेशानी समझने की कोशिश करना अधिक जरूरी है।

    सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बच्चे को यह भरोसा दिलाया जाए कि उसकी बात ध्यान से सुनी जाएगी और उसकी परेशानी के लिए उसे तुरंत दोषी नहीं ठहराया जाएगा। माता-पिता को बिना दबाव बनाए बातचीत करनी चाहिए और बच्चे की भावनाओं को गंभीरता से लेना चाहिए। यदि तनाव या चिंता लंबे समय तक बनी रहती है या बच्चे की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगती है, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या चिकित्सक से सलाह लेना उचित है। समय पर सहायता मिलने से समस्या को समझने और बच्चे को बेहतर तरीके से संभालने में मदद मिल सकती है।

  • एमपी के हरदा में दबंगई: आदिवासी किसान को बेरहमी से पीटा, थूककर किया अपमानित; खुद को बताया करणी सेना का सदस्य

    एमपी के हरदा में दबंगई: आदिवासी किसान को बेरहमी से पीटा, थूककर किया अपमानित; खुद को बताया करणी सेना का सदस्य


    हरदा । मध्य प्रदेश के हरदा जिले से सामाजिक सौहार्द और मानवता को शर्मसार करने वाली एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। रहटगाँव थाना क्षेत्र के ग्राम कपासी में दबंगों ने एक आदिवासी किसान और उसके साथियों के साथ न केवल बर्बरतापूर्वक मारपीट की, बल्कि उन्हें थूककर अपमानित भी किया। हमलावरों ने खुद को करणी सेना का सदस्य बताते हुए इलाके में दहशत फैलाने की कोशिश की और पीड़ितों को जान से मारने की धमकी दी। इस घटना के बाद से स्थानीय आदिवासी समुदाय में भारी आक्रोश व्याप्त है।

    विवाद की जड़ और हमला घटना 18 जनवरी 2026 की शाम करीब 5:30 बजे की है। पीड़ित किसान अपने खेत पर सिंचाई कार्य की देखरेख कर रहा था। इसी दौरान टेमागांव–कपासी मार्ग पर एक स्पोर्ट्स मोटरसाइकिल पर सवार दो युवक बार-बार चक्कर लगा रहे थे। जब किसान ने उनकी संदिग्ध गतिविधियों को देखते हुए वहां रुकने का कारण पूछा, तो युवकों ने शालीनता दिखाने के बजाय गाली-गलौज शुरू कर दी। विवाद इतना बढ़ा कि बाइक पर पीछे बैठे युवक ने खेत की बाड़ से लकड़ी उखाड़कर किसान पर हमला कर दिया, जिससे उसके बाएं हाथ में गंभीर चोट आई।

    योजनाबद्ध तरीके से बुलाई गई भीड़ पीड़ित के अनुसार, प्राथमिक हमले के बाद मोटरसाइकिल सवार युवक ने फोन करके अपने अन्य साथियों को मौके पर बुलाया। कुछ ही देर में एक फोर व्हीलर वाहन से करीब आठ लोग वहां पहुंचे, जिनमें से एक की पहचान टिमरनी निवासी योगेन्द्र सिंह मौर्य के रूप में हुई है। इन सभी लोगों ने निहत्थे किसान को घेर लिया और सामूहिक रूप से मारपीट शुरू कर दी। जब किसान के दोस्त मनोज उइके और सुदामा धुर्वे उसे बचाने आए, तो हमलावरों ने उन्हें भी नहीं बख्शा और उनके साथ भी जमकर मारपीट की। अमानवीय कृत्य और धमकी हमलावरों की दरिंदगी यहीं नहीं रुकी। खुद को करणी सेना का रसूखदार सदस्य बताते हुए उन्होंने आदिवासी किसान को डराया-धमकाया और जबरन माफी मंगवाई।

    अमानवीयता की हद तो तब पार हो गई जब एक आरोपी ने बीच-बचाव करने आए मनोज उइके पर थूककर उसे सार्वजनिक रूप से अपमानित किया। जाते-जाते आरोपियों ने पीड़ितों को चेतावनी दी कि यदि उन्होंने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई, तो उन्हें जान से मार दिया जाएगा। इस हमले में किसान के सीने, पीठ और हाथ में गंभीर चोटें आई हैं, वहीं मनोज के कान और पैर में चोट लगी है। पुलिसिया कार्रवाई घटना के बाद घायलों ने साहस दिखाते हुए रहटगाँव थाने में अपनी शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने पीड़ित की शिकायत के आधार पर योगेन्द्र सिंह मौर्य और अन्य अज्ञात साथियों के विरुद्ध संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि आरोपियों की तलाश के लिए टीमें रवाना कर दी गई हैं और कानून हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।