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  • खरगोन, बुरहानपुर, खंडवा में रिकॉर्ड बारिश, गांवों में जलभराव, SDRF ने 10 घंटे चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन

    खरगोन, बुरहानपुर, खंडवा में रिकॉर्ड बारिश, गांवों में जलभराव, SDRF ने 10 घंटे चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर पूरी ताकत के साथ सक्रिय हो गया है। पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश दर्ज की गई, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। सबसे ज्यादा बारिश खरगोन जिले के गोगावां में 7.6 इंच रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा बुरहानपुर शहर में 7 इंच और बैतूल के भीमपुर में 6.6 इंच बारिश हुई। लगातार हो रही बारिश से कई नदियां और नाले उफान पर हैं, जबकि घरों, खेतों और सड़कों पर पानी भरने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

    मौसम विभाग के अनुसार बड़वानी के वरला, आलीराजपुर के उदयगढ़ और बुरहानपुर के खकनार में 5.3 इंच, खंडवा शहर में 5.1 इंच तथा खरगोन के बड़वाह में 4.4 इंच बारिश दर्ज की गई। वहीं झाबुआ के रानापुर में 4 इंच, खरगोन के सेगांव में 4.3 इंच और खरगोन शहर में 4.2 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। प्रदेश के 33 शहरों और कस्बों में भारी से अति भारी वर्षा दर्ज होने से कई इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई।

    बड़वानी जिले के सेंधवा ब्लॉक में 24 घंटे के दौरान साढ़े चार इंच से अधिक बारिश हुई। तेज बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर आ गए और धनोरा गांव में नाले का पानी 10 से 15 घरों में घुस गया। कई मकानों में करीब दो फीट तक पानी भर गया, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। लगातार बारिश के कारण खेतों में खड़ी मक्का की फसल भी गिर गई। सेंधवा ब्लॉक का सबसे बड़ा तालाब ओवरफ्लो हो गया, जबकि वरला और बलवाड़ी क्षेत्र में भी जलभराव की स्थिति बनी रही।

    खंडवा जिले में भी लगातार बारिश से हालात गंभीर बने रहे। यहां 24 घंटे के दौरान 128 मिलीमीटर यानी पांच इंच से अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में जलभराव के साथ कपास और मक्का की फसलों को नुकसान पहुंचा है। आबना और सुक्ता नदी में तेज बहाव के कारण हांड़ी-कुंडी गांव के पास बने टापू पर चार लोग फंस गए। सूचना मिलने पर खंडवा और इंदौर की एसडीआरएफ टीम ने करीब साढ़े दस घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर चारों लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। रेस्क्यू के दौरान ड्रोन के माध्यम से फंसे लोगों तक लाइफ जैकेट भी पहुंचाई गई।

    लगातार बारिश के चलते कई जिलों में निचले इलाकों में जलभराव, ग्रामीण सड़कों पर पानी भरने और खेतों में फसल नुकसान की खबरें सामने आई हैं। प्रशासन संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार नजर बनाए हुए है और लोगों से नदी-नालों के आसपास नहीं जाने तथा मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने की अपील की गई है।

    मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है। ऐसे में प्रशासन ने जिलों को सतर्क रहने और आपदा प्रबंधन दलों को तैयार रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

  • बोहरा धर्मगुरु सैयदना सैफुद्दीन बुरहानपुर पहुंचे, अनुयायियों ने किया स्वागत

    बोहरा धर्मगुरु सैयदना सैफुद्दीन बुरहानपुर पहुंचे, अनुयायियों ने किया स्वागत


    बुरहानपुर।
    दुनिया भर के दाऊदी बोहरा समुदाय के 53वें धर्मगुरु सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन रविवार की रात आठ बजे मध्य प्रदेश के बुरहानपुर पहुंचे। वे मुम्बई ट्रेन द्वारा बुरहानपुर आए। यहां रेलवे स्टेशन पर समुदाय के हजारों अनुयायियों ने उनका भव्य स्वागत किया।

    दाऊदी बोहरा जमात प्रो कमेटी के कोऑर्डिनेटर तफज्जुल हुसैन मुलायमवाला ने बताया कि सैयदना सैफुद्दीन अपने पूर्वज, सैयदी अब्दुल कादिर हकीमुद्दीन साहब की पुण्यतिथि (उर्स) मनाने के लिए बुरहानपुर आए हैं। वे मंगलवार को बुरहानपुर स्थित दरगाह-ए-हकीमी की हकीमी मस्जिद में प्रवचन देंगे। इस अवसर पर मध्य प्रदेश समेत देश के अन्य हिस्सों से हजारों बोहरा समुदाय के सदस्य शहर में मौजूद रहेंगे।

    मुलायमवाला ने बताया कि सैयदी अब्दुल कादिर हकीमुद्दीन का जन्म 1665 में 34वें धर्मगुरु सैयदना बदरुद्दीन बिन मुल्ला राज के कार्यकाल में हुआ था। वे साहित्य प्रेमी और एक महान लेखक थे, जिन्होंने उर्दू, संस्कृत, फारसी और अरबी में कई पुस्तकें लिखी थीं। अपनी धर्मपरायणता, विनम्रता और विद्वत्ता के लिए प्रसिद्ध, सैयदी अब्दुल कादिर हकीमुद्दीन का जीवन और विरासत आज भी दुनिया भर के हजारों दाऊदी बोहरा सदस्यों को प्रेरित करती है। उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर मंगलवार को बुरहानपुर स्थित दरगाह-ए-हकीमी की हकीमी मस्जिद में उर्स का आयोजन हो रहा है, जिसमें सैयदना सैफुद्दीन समाजजनों को संबोधित करेंगे।

  • झोपड़ी में स्कूल, फाइलों में कवर्ड गांव: बुरहानपुर के बोमल्यापाट में शिक्षा व्यवस्था पर सवाल

    झोपड़ी में स्कूल, फाइलों में कवर्ड गांव: बुरहानपुर के बोमल्यापाट में शिक्षा व्यवस्था पर सवाल


    बुरहानपुर । बुरहानपुर जिले के आदिवासी अंचल में स्थित मांडवा ग्राम पंचायत का बोमल्यापाट फाल्या आज भी बुनियादी शिक्षा सुविधाओं के लिए तरस रहा है। आजादी के 78 साल बाद भी यहां के करीब 60 बच्चे एक मजदूर की झोपड़ी में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। सरकारी फाइलों में गांव को कवर्ड दिखाया गया है लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि न पक्का स्कूल भवन है न नियमित शिक्षक और न ही आने-जाने के लिए सड़क।

    ग्रामीणों के अनुसार बच्चे कपड़े बिछाकर झोपड़ी में बैठते हैं। बरसात में कीचड़ और गर्मी में तपती जमीन ही उनका क्लासरूम बनती है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यहां कक्षा 9वीं की छात्रा सीमा बडोले खुद छोटे बच्चों को पढ़ा रही हैं। उन्हें वन विभाग के एक नाकेदार कैलाश द्वारा 3000 रुपये प्रतिमाह देने का वादा किया गया है ताकि किसी तरह पढ़ाई जारी रह सके। सवाल उठता है कि क्या आदिवासी बस्ती की शिक्षा अब दान और व्यक्तिगत सहयोग पर चलेगी?

    ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र की जनप्रतिनिधि भी आदिवासी समाज से आती हैं इसके बावजूद बच्चों को बुनियादी स्कूल तक नसीब नहीं है। चुनाव के समय वादे होते हैं लेकिन उसके बाद हालात जस के तस बने रहते हैं। छात्र राजेश और राहुल सहित अन्य बच्चों का कहना है कि वे पढ़ना चाहते हैं लेकिन संसाधनों की कमी उनके सपनों के आड़े आ रही है। ग्राम के युवा मास्टर रावत ने शासन से तत्काल स्कूल भवन नियमित शिक्षक और सड़क की मांग की है।

    सरकारी योजनाओं के दावों के बीच बोमल्यापाट की स्थिति कई सवाल खड़े करती है। जब इस संबंध में नेपानगर के एसडीएम भागीरथ वाखला से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि यदि गांव धरती आभा योजना में छूट गया है तो प्रस्ताव बनाकर भेजा जाएगा और शिक्षा विभाग से सर्वे कराया जाएगा। वहीं आदिवासी विभाग के उपसंचालक भारत जांचपुरे ने भरोसा दिलाया कि प्रस्ताव तैयार कर डीपीसी के माध्यम से भोपाल भेजा जाएगा और बच्चों का भविष्य बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा।

    हालांकि ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर कब तक सिर्फ सर्वे और प्रस्ताव की प्रक्रिया चलती रहेगी? 78 वर्षों बाद भी यदि एक गांव में स्कूल भवन और शिक्षक की व्यवस्था नहीं हो पाती तो यह व्यवस्था की गंभीर विफलता को दर्शाता है। बोमल्यापाट के बच्चे आज भी झोपड़ी में बैठकर भविष्य संवारने का सपना देख रहे हैं। अब देखना है कि शासन-प्रशासन इन बच्चों के लिए ठोस कदम उठाता है या यह बस्ती यूं ही कागजों में कवर्ड और जमीन पर उपेक्षित बनी रहेगी।