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  • बुरहानपुर के गरबा मंडल ने जीते 21 लाख रुपये, इसी संस्था के लकी ड्रॉ में बच्चे को मिली थी फॉर्च्यूनर

    बुरहानपुर के गरबा मंडल ने जीते 21 लाख रुपये, इसी संस्था के लकी ड्रॉ में बच्चे को मिली थी फॉर्च्यूनर


    मध्य प्रदेश: के बुरहानपुर के एक गरबा मंडल ने शरद पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित प्रतियोगिता में पहला स्थान हासिल कर 21 लाख रुपये का पुरस्कार अपने नाम किया है। इस उपलब्धि के बाद मंडल के सदस्यों में खुशी का माहौल है। इस आयोजन की खास बात यह भी रही कि प्रतियोगिता कराने वाली संस्था पहले भी अपने एक लकी ड्रॉ को लेकर चर्चा में आ चुकी है। इसी संस्था के लकी ड्रॉ में कुछ समय पहले बुरहानपुर के छह साल के बच्चे के नाम करीब 50 लाख रुपये की टोयोटा फॉर्च्यूनर कार निकली थी।

    गरबा प्रतियोगिता का आयोजन खरगोन जिले की झिरनिया तहसील के आभापुरी स्थित श्री सरकार धाम नर नारायण सेवा संस्थान की ओर से किया गया था। संस्था की ओर से हर साल शरद पूर्णिमा पर इस प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष इसमें बुरहानपुर के गरबा मंडल ने पहला स्थान हासिल किया। विजेता मंडल को 21 लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई। पुरस्कार मिलने के बाद मंडल के सदस्यों ने उत्साह जताया और इस सफलता को सामूहिक प्रयास का परिणाम बताया।

    आयोजकों के मुताबिक, प्रतियोगिता कराने का उद्देश्य नई पीढ़ी को भारतीय परंपराओं और सनातन संस्कृति के प्रति जागरूक करना है। इसमें खास तौर पर जेनरेशन जेड यानी युवा पीढ़ी को सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया जाता है। संस्था का मानना है कि गरबा जैसे पारंपरिक आयोजनों के माध्यम से युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने का अवसर मिलता है।

    इस वर्ष प्रतियोगिता में बुरहानपुर के मंडल ने अपनी प्रस्तुति के आधार पर पहला स्थान हासिल किया। इसके लिए उसे 21 लाख रुपये का पुरस्कार दिया गया। विजेता पक्ष की ओर से इस पुरस्कार राशि को देश में आयोजित गरबा प्रतियोगिताओं में सबसे बड़ी राशि बताया गया है। हालांकि, यह दावा आयोजकों और विजेताओं की ओर से किया गया है।

    इसी संस्था का नाम इससे पहले एक लकी ड्रॉ के कारण भी चर्चा में आया था। बुरहानपुर के सीलमपुरा क्षेत्र में रहने वाले छह वर्षीय मेदांश रायकवार के नाम पर उसकी दादी किरण रायकवार ने करीब एक साल पहले गरबा कार्यक्रम के दौरान 200 रुपये का कूपन खरीदा था। उन्होंने कूपन पर अपने पोते का नाम दर्ज कराया था। उस समय परिवार को अंदाजा नहीं था कि इस कूपन के जरिए उन्हें इतना बड़ा पुरस्कार मिल सकता है।

    बाद में लकी ड्रॉ का परिणाम घोषित हुआ तो पहला पुरस्कार मेदांश के नाम निकला। उसे करीब 50 लाख रुपये कीमत की टोयोटा फॉर्च्यूनर कार मिली। इस खबर के बाद बच्चे के परिवार में खुशी का माहौल बन गया था। कार मिलने पर ढोल-नगाड़ों के साथ उसका स्वागत किया गया और वाहन की पूजा-अर्चना भी की गई थी।

    अब उसी संस्था की शरद पूर्णिमा गरबा प्रतियोगिता में बुरहानपुर के मंडल को 21 लाख रुपये का पुरस्कार मिला है। इस तरह कुछ समय के अंतराल में संस्था से जुड़े दो अलग-अलग आयोजनों के कारण बुरहानपुर चर्चा में रहा है। पहले लकी ड्रॉ में छह साल के बच्चे के नाम फॉर्च्यूनर कार निकली थी और अब गरबा प्रतियोगिता में शहर के मंडल ने पहला स्थान हासिल कर 21 लाख रुपये जीते हैं।

  • बुरहानपुर में 3 महिलाओं ने उड़ाए 45 लाख के जेवर, ग्राहक बनकर पहुंचीं, साड़ी में छिपाया बॉक्स

    बुरहानपुर में 3 महिलाओं ने उड़ाए 45 लाख के जेवर, ग्राहक बनकर पहुंचीं, साड़ी में छिपाया बॉक्स


    बुरहानपुर। मध्यप्रदेश के बुरहानपुर में सराफा दुकान पर ग्राहक बनकर पहुंचीं तीन महिलाओं ने कथित तौर पर करीब 45 लाख रुपये के सोने के जेवर चोरी कर लिए। गहने देखने के दौरान महिलाओं ने दुकानदार का ध्यान भटकाया और मौका पाकर एक महिला ने जेवरों से भरा बॉक्स अपनी साड़ी में छिपा लिया। वारदात दुकान में लगे CCTV कैमरों में कैद हो गई है। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने फुटेज के आधार पर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।

    गहने देखने के बहाने दुकान में पहुंचीं महिलाएं
    मामला कोतवाली थाना क्षेत्र के फव्वारा चौक स्थित सराफा दुकान का है। सोमवार शाम करीब 6 बजे तीन महिलाएं ग्राहक बनकर दुकान में पहुंचीं। दुकानदार ने उन्हें सोने के गहने दिखाने शुरू किए। इसी दौरान महिलाओं ने कथित तौर पर बातचीत और गहने देखने के बहाने दुकानदार का ध्यान दूसरी ओर लगाया।

    आरोप है कि इसी मौके का फायदा उठाकर उनमें से एक महिला ने जेवरों से भरा बॉक्स अपनी साड़ी में छिपा लिया। इसके बाद तीनों कुछ देर तक दुकान में रहीं और फिर वहां से निकल गईं। शुरुआत में दुकानदार को बॉक्स गायब होने का पता नहीं चला।

    करीब 15 मिनट बाद जब सामान कम होने का संदेह हुआ, तो दुकानदार ने CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग देखी। फुटेज में तीनों महिलाओं की संदिग्ध गतिविधियां दिखाई देने की बात सामने आई। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।

    दुकान के बाहर बाइक पर इंतजार कर रहे थे साथी?
    वारदात के बाद महिलाओं के साथियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। बताया जा रहा है कि दुकान के बाहर सड़क किनारे हेलमेट पहने एक व्यक्ति बाइक लेकर खड़ा था। तीन महिलाओं में से एक उसके साथ बाइक पर बैठकर निकल गई, जबकि बाकी दो महिलाएं आगे बढ़ीं और फिर एक अन्य बाइक पर सवार होकर वहां से चली गईं।

    इस घटनाक्रम के आधार पर आशंका जताई जा रही है कि चोरी की वारदात में अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। हालांकि, महिलाओं के साथ कितने लोग थे और सभी की क्या भूमिका रही, इसकी पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।

    CCTV फुटेज के आधार पर तलाश में जुटी पुलिस
    बुरहानपुर के सिटी एसपी विनोद सिंह कुशवाह ने बताया कि चोरी की घटना कोतवाली थाना क्षेत्र के फव्वारा चौक स्थित अनिल अग्रवाल की लक्ष्मण किशोर जुगलकिशोर सराफा दुकान में हुई है। वारदात सोमवार शाम करीब 6 बजे की है।

    पुलिस को मामले से जुड़े कुछ CCTV फुटेज मिले हैं। आरोपियों की पहचान और उनकी गिरफ्तारी के लिए जांच की जा रही है। साथ ही मुखबिरों को सक्रिय किया गया है, ताकि संदिग्ध महिलाओं और उनके साथियों तक पहुंचा जा सके।

    फिलहाल पुलिस चोरी गए जेवरों की बरामदगी और घटना में अन्य लोगों की संभावित भूमिका की जांच कर रही है। आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के संबंध में आगे की जानकारी जांच पूरी होने के बाद सामने आएगी।

  • मध्य प्रदेश एफडीए ने पतंजलि के गाय घी के एक बैच को असुरक्षित बताया, बाजार से वापस मंगाने का आदेश

    मध्य प्रदेश एफडीए ने पतंजलि के गाय घी के एक बैच को असुरक्षित बताया, बाजार से वापस मंगाने का आदेश

    मध्य प्रदेश: खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने पतंजलि फूड्स लिमिटेड के गाय के घी के एक विशेष बैच को असुरक्षित बताते हुए बाजार से वापस मंगाने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप नमूना नहीं पाए जाने के बाद की गई। कंपनी ने इस संबंध में जानकारी देते हुए कहा है कि वह नियामक के आदेश के खिलाफ अपील दायर करेगी। मामले में कार्रवाई बुरहानपुर जिले में संबंधित बैच को लेकर की गई है।

    कंपनी के अनुसार, मध्य प्रदेश एफडीए ने गाय के घी के संबंधित बैच का नमूना लेकर जांच कराई थी। जांच में नमूना खाद्य सुरक्षा एवं मानक नियमों के तहत निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरा। इसके बाद नियामक ने संबंधित उत्पाद को वापस मंगाने का निर्देश जारी किया। यह मामला खाद्य सुरक्षा एवं मानक विनियम, 2011 के तहत निर्धारित प्रावधानों से जुड़ा है। इन नियमों में खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा से संबंधित मानक तय किए गए हैं।

    पतंजलि फूड्स ने स्पष्ट किया है कि वह मध्य प्रदेश एफडीए के नामित अधिकारी द्वारा जारी आदेश को चुनौती देने के लिए अपील दायर कर रही है। कंपनी का कहना है कि इस कार्रवाई से उसके वित्तीय और परिचालन कारोबार पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की आशंका नहीं है। उसके मुताबिक, संभावित प्रभाव संबंधित गाय के घी के बैच के मूल्य तक सीमित रहेगा। हालांकि, नियामक की कार्रवाई के बाद संबंधित बैच को बाजार से वापस मंगाने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो गई है।

    इस घटनाक्रम के बीच कंपनी के शेयर में भी गिरावट दर्ज की गई। उपलब्ध शेयर बाजार आंकड़ों के मुताबिक, शुक्रवार को पतंजलि फूड्स का शेयर बीएसई पर एक प्रतिशत से अधिक गिरावट के साथ 351 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 52 सप्ताह के दौरान शेयर ने 613.95 रुपये का उच्चतम और 328.05 रुपये का न्यूनतम स्तर दर्ज किया। एक साल की अवधि में कंपनी के शेयर में करीब 41 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि तीन वर्षों में इसमें लगभग 16 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। हालांकि, पांच साल की अवधि में शेयर ने करीब पांच प्रतिशत का सकारात्मक रिटर्न दिया है।

    पतंजलि फूड्स इससे पहले भी खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर नियामकीय कार्रवाई का सामना कर चुकी है। जून में कंपनी के ज्वार के आटे के एक विशेष बैच को लेकर विवाद सामने आया था। उस समय केरल के कन्नूर जिले के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने जांच में कीटनाशक अवशेष निर्धारित सीमा से अधिक पाए जाने के बाद संबंधित बैच की बिक्री पर रोक लगा दी थी।

    उस मामले में भी कंपनी ने नियामकीय जानकारी साझा करते हुए बताया था कि उसे कन्नूर जिला खाद्य सुरक्षा कार्यालय से ज्वार के आटे के एक विशेष बैच की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने संबंधी आदेश मिला है। मौजूदा मामले में भी कार्रवाई किसी खास बैच तक सीमित बताई गई है। इसलिए उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे कंपनी के सभी गाय के घी उत्पादों पर लागू कार्रवाई नहीं माना जा सकता।

    मध्य प्रदेश में हुई इस कार्रवाई के बाद संबंधित बैच की वापसी और कंपनी की प्रस्तावित अपील पर आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल कंपनी ने वित्तीय और परिचालन प्रभाव को सीमित बताया है, जबकि नियामक की जांच में संबंधित घी के नमूने का निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरना कार्रवाई का आधार बना है।

  • खरगोन, बुरहानपुर, खंडवा में रिकॉर्ड बारिश, गांवों में जलभराव, SDRF ने 10 घंटे चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन

    खरगोन, बुरहानपुर, खंडवा में रिकॉर्ड बारिश, गांवों में जलभराव, SDRF ने 10 घंटे चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर पूरी ताकत के साथ सक्रिय हो गया है। पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश दर्ज की गई, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। सबसे ज्यादा बारिश खरगोन जिले के गोगावां में 7.6 इंच रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा बुरहानपुर शहर में 7 इंच और बैतूल के भीमपुर में 6.6 इंच बारिश हुई। लगातार हो रही बारिश से कई नदियां और नाले उफान पर हैं, जबकि घरों, खेतों और सड़कों पर पानी भरने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

    मौसम विभाग के अनुसार बड़वानी के वरला, आलीराजपुर के उदयगढ़ और बुरहानपुर के खकनार में 5.3 इंच, खंडवा शहर में 5.1 इंच तथा खरगोन के बड़वाह में 4.4 इंच बारिश दर्ज की गई। वहीं झाबुआ के रानापुर में 4 इंच, खरगोन के सेगांव में 4.3 इंच और खरगोन शहर में 4.2 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। प्रदेश के 33 शहरों और कस्बों में भारी से अति भारी वर्षा दर्ज होने से कई इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई।

    बड़वानी जिले के सेंधवा ब्लॉक में 24 घंटे के दौरान साढ़े चार इंच से अधिक बारिश हुई। तेज बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर आ गए और धनोरा गांव में नाले का पानी 10 से 15 घरों में घुस गया। कई मकानों में करीब दो फीट तक पानी भर गया, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। लगातार बारिश के कारण खेतों में खड़ी मक्का की फसल भी गिर गई। सेंधवा ब्लॉक का सबसे बड़ा तालाब ओवरफ्लो हो गया, जबकि वरला और बलवाड़ी क्षेत्र में भी जलभराव की स्थिति बनी रही।

    खंडवा जिले में भी लगातार बारिश से हालात गंभीर बने रहे। यहां 24 घंटे के दौरान 128 मिलीमीटर यानी पांच इंच से अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में जलभराव के साथ कपास और मक्का की फसलों को नुकसान पहुंचा है। आबना और सुक्ता नदी में तेज बहाव के कारण हांड़ी-कुंडी गांव के पास बने टापू पर चार लोग फंस गए। सूचना मिलने पर खंडवा और इंदौर की एसडीआरएफ टीम ने करीब साढ़े दस घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर चारों लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। रेस्क्यू के दौरान ड्रोन के माध्यम से फंसे लोगों तक लाइफ जैकेट भी पहुंचाई गई।

    लगातार बारिश के चलते कई जिलों में निचले इलाकों में जलभराव, ग्रामीण सड़कों पर पानी भरने और खेतों में फसल नुकसान की खबरें सामने आई हैं। प्रशासन संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार नजर बनाए हुए है और लोगों से नदी-नालों के आसपास नहीं जाने तथा मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने की अपील की गई है।

    मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है। ऐसे में प्रशासन ने जिलों को सतर्क रहने और आपदा प्रबंधन दलों को तैयार रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

  • बोहरा धर्मगुरु सैयदना सैफुद्दीन बुरहानपुर पहुंचे, अनुयायियों ने किया स्वागत

    बोहरा धर्मगुरु सैयदना सैफुद्दीन बुरहानपुर पहुंचे, अनुयायियों ने किया स्वागत


    बुरहानपुर।
    दुनिया भर के दाऊदी बोहरा समुदाय के 53वें धर्मगुरु सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन रविवार की रात आठ बजे मध्य प्रदेश के बुरहानपुर पहुंचे। वे मुम्बई ट्रेन द्वारा बुरहानपुर आए। यहां रेलवे स्टेशन पर समुदाय के हजारों अनुयायियों ने उनका भव्य स्वागत किया।

    दाऊदी बोहरा जमात प्रो कमेटी के कोऑर्डिनेटर तफज्जुल हुसैन मुलायमवाला ने बताया कि सैयदना सैफुद्दीन अपने पूर्वज, सैयदी अब्दुल कादिर हकीमुद्दीन साहब की पुण्यतिथि (उर्स) मनाने के लिए बुरहानपुर आए हैं। वे मंगलवार को बुरहानपुर स्थित दरगाह-ए-हकीमी की हकीमी मस्जिद में प्रवचन देंगे। इस अवसर पर मध्य प्रदेश समेत देश के अन्य हिस्सों से हजारों बोहरा समुदाय के सदस्य शहर में मौजूद रहेंगे।

    मुलायमवाला ने बताया कि सैयदी अब्दुल कादिर हकीमुद्दीन का जन्म 1665 में 34वें धर्मगुरु सैयदना बदरुद्दीन बिन मुल्ला राज के कार्यकाल में हुआ था। वे साहित्य प्रेमी और एक महान लेखक थे, जिन्होंने उर्दू, संस्कृत, फारसी और अरबी में कई पुस्तकें लिखी थीं। अपनी धर्मपरायणता, विनम्रता और विद्वत्ता के लिए प्रसिद्ध, सैयदी अब्दुल कादिर हकीमुद्दीन का जीवन और विरासत आज भी दुनिया भर के हजारों दाऊदी बोहरा सदस्यों को प्रेरित करती है। उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर मंगलवार को बुरहानपुर स्थित दरगाह-ए-हकीमी की हकीमी मस्जिद में उर्स का आयोजन हो रहा है, जिसमें सैयदना सैफुद्दीन समाजजनों को संबोधित करेंगे।

  • झोपड़ी में स्कूल, फाइलों में कवर्ड गांव: बुरहानपुर के बोमल्यापाट में शिक्षा व्यवस्था पर सवाल

    झोपड़ी में स्कूल, फाइलों में कवर्ड गांव: बुरहानपुर के बोमल्यापाट में शिक्षा व्यवस्था पर सवाल


    बुरहानपुर । बुरहानपुर जिले के आदिवासी अंचल में स्थित मांडवा ग्राम पंचायत का बोमल्यापाट फाल्या आज भी बुनियादी शिक्षा सुविधाओं के लिए तरस रहा है। आजादी के 78 साल बाद भी यहां के करीब 60 बच्चे एक मजदूर की झोपड़ी में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। सरकारी फाइलों में गांव को कवर्ड दिखाया गया है लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि न पक्का स्कूल भवन है न नियमित शिक्षक और न ही आने-जाने के लिए सड़क।

    ग्रामीणों के अनुसार बच्चे कपड़े बिछाकर झोपड़ी में बैठते हैं। बरसात में कीचड़ और गर्मी में तपती जमीन ही उनका क्लासरूम बनती है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यहां कक्षा 9वीं की छात्रा सीमा बडोले खुद छोटे बच्चों को पढ़ा रही हैं। उन्हें वन विभाग के एक नाकेदार कैलाश द्वारा 3000 रुपये प्रतिमाह देने का वादा किया गया है ताकि किसी तरह पढ़ाई जारी रह सके। सवाल उठता है कि क्या आदिवासी बस्ती की शिक्षा अब दान और व्यक्तिगत सहयोग पर चलेगी?

    ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र की जनप्रतिनिधि भी आदिवासी समाज से आती हैं इसके बावजूद बच्चों को बुनियादी स्कूल तक नसीब नहीं है। चुनाव के समय वादे होते हैं लेकिन उसके बाद हालात जस के तस बने रहते हैं। छात्र राजेश और राहुल सहित अन्य बच्चों का कहना है कि वे पढ़ना चाहते हैं लेकिन संसाधनों की कमी उनके सपनों के आड़े आ रही है। ग्राम के युवा मास्टर रावत ने शासन से तत्काल स्कूल भवन नियमित शिक्षक और सड़क की मांग की है।

    सरकारी योजनाओं के दावों के बीच बोमल्यापाट की स्थिति कई सवाल खड़े करती है। जब इस संबंध में नेपानगर के एसडीएम भागीरथ वाखला से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि यदि गांव धरती आभा योजना में छूट गया है तो प्रस्ताव बनाकर भेजा जाएगा और शिक्षा विभाग से सर्वे कराया जाएगा। वहीं आदिवासी विभाग के उपसंचालक भारत जांचपुरे ने भरोसा दिलाया कि प्रस्ताव तैयार कर डीपीसी के माध्यम से भोपाल भेजा जाएगा और बच्चों का भविष्य बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा।

    हालांकि ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर कब तक सिर्फ सर्वे और प्रस्ताव की प्रक्रिया चलती रहेगी? 78 वर्षों बाद भी यदि एक गांव में स्कूल भवन और शिक्षक की व्यवस्था नहीं हो पाती तो यह व्यवस्था की गंभीर विफलता को दर्शाता है। बोमल्यापाट के बच्चे आज भी झोपड़ी में बैठकर भविष्य संवारने का सपना देख रहे हैं। अब देखना है कि शासन-प्रशासन इन बच्चों के लिए ठोस कदम उठाता है या यह बस्ती यूं ही कागजों में कवर्ड और जमीन पर उपेक्षित बनी रहेगी।