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  • यात्री सुरक्षा से खिलवाड़ पड़ा भारी, परिवहन विभाग ने चलाया जांच अभियान

    यात्री सुरक्षा से खिलवाड़ पड़ा भारी, परिवहन विभाग ने चलाया जांच अभियान


    मध्यप्रदेश । खंडवा में लगातार सामने आ रहे बस हादसों और सुरक्षा मानकों की अनदेखी को गंभीरता से लेते हुए ट्रैफिक पुलिस ने शनिवार को यात्री बसों के खिलाफ विशेष जांच अभियान चलाया। इंदौर रोड स्थित आरटीओ कार्यालय के सामने हुई इस कार्रवाई में कई बसों में गंभीर खामियां सामने आईं। जांच के दौरान कुछ बसों में इमरजेंसी एग्जिट के सामने अतिरिक्त सीटें लगी मिलीं, जबकि कई बसों के इमरजेंसी गेट खराब हालत में पाए गए। अधिकारियों ने इसे यात्रियों की सुरक्षा के साथ बड़ा खिलवाड़ बताया।

    अभियान के दौरान ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग की संयुक्त टीम ने आने-जाने वाली यात्री बसों को रोककर उनकी गहन जांच की। कार्रवाई में 30 बसों के चालान बनाए गए और करीब 40 हजार रुपए का जुर्माना वसूला गया। अधिकारियों ने बस संचालकों को स्पष्ट चेतावनी दी कि भविष्य में सुरक्षा नियमों की अनदेखी पाए जाने पर और सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    यह विशेष अभियान मध्यप्रदेश पुलिस और पुलिस परिवहन शोध संस्थान के निर्देश पर पूरे प्रदेश में चलाया जा रहा है। खंडवा में यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक अगम जैन के निर्देश पर ट्रैफिक डीएसपी अनिल कुमार राय, एआरटीओ दीपक मांझी और टीआई देवेंद्र सिंह परिहार की निगरानी में की गई। अधिकारियों के अनुसार 21 मई से 27 मई 2026 तक प्रदेशभर में यात्री बसों की विशेष चेकिंग की जा रही है, जिसका उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन में सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना है।

    चेकिंग के दौरान टीम ने बसों के फिटनेस प्रमाण पत्र, परमिट, बीमा दस्तावेज, फायर एक्सटिंग्विशर, फर्स्ट एड बॉक्स, ड्राइवर के लाइसेंस और बैज की भी जांच की। इसके अलावा बसों में क्षमता से अधिक सवारी बैठाने और तकनीकी सुरक्षा उपकरणों की स्थिति भी देखी गई। कई बसों की हेडलाइट, इंडिकेटर और रिफ्लेक्टर में भी खामियां मिलीं।

    अधिकारियों ने विशेष रूप से इमरजेंसी गेट के सामने सीटें लगाए जाने को बेहद खतरनाक बताया। उनका कहना है कि किसी भी दुर्घटना की स्थिति में यही इमरजेंसी गेट यात्रियों की जान बचाने का सबसे अहम रास्ता होता है। यदि वहां सीटें लगा दी जाएं या गेट खराब हो, तो हादसे के समय बड़ा नुकसान हो सकता है।

    ट्रैफिक डीएसपी अनिल कुमार राय ने कहा कि हाल के महीनों में प्रदेश में हुई बस दुर्घटनाओं को देखते हुए अब यात्री सुरक्षा के मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने बस चालकों को ओवरस्पीडिंग और नशे की हालत में वाहन न चलाने की सख्त हिदायत भी दी।

  • सुरक्षा पर जोर: एसी बसों का 3 महीने में मेंटेनेंस और स्टाफ को प्रशिक्षण जरूरी

    सुरक्षा पर जोर: एसी बसों का 3 महीने में मेंटेनेंस और स्टाफ को प्रशिक्षण जरूरी


    मध्य प्रदेश । सागर में मंगलवार देर शाम क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय में बस संचालकों की बैठक आयोजित की गई, जिसमें हाल ही में यात्री बसों में आग लगने की घटनाओं को देखते हुए सख्त सुरक्षा निर्देश जारी किए गए। अधिकारियों ने सभी बस ऑपरेटरों को तय समयसीमा में सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने को कहा है।

    बैठक में निर्देश दिया गया कि सभी एसी बसों के एसी सिस्टम की नियमित जांच की जाए और हर तीन महीने में उनका मेंटेनेंस व साफ-सफाई अनिवार्य रूप से कराई जाए। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि खराब रखरखाव के कारण एसी कम्प्रेसर ओवरहीट होकर शॉर्ट सर्किट और आग जैसी घटनाओं का कारण बन सकता है।

    सभी यात्री बसों में निर्धारित मानक के फायर एक्सटिंग्विशर रखना अनिवार्य किया गया है, साथ ही ड्राइवर और कंडक्टर को इसका उपयोग करने का प्रशिक्षण देने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि आपात स्थिति में आग पर तुरंत नियंत्रण पाया जा सके।

    क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी ने यह भी निर्देश दिए कि बसों में किसी भी प्रकार के ज्वलनशील पदार्थ जैसे पेट्रोल, डीजल, केरोसिन या विस्फोटक सामग्री का परिवहन सख्ती से प्रतिबंधित रहेगा। इसके अलावा सभी एसी बसों में फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम (FDSS) लगाने और स्लीपर कोच बसों को AIS-119 मानकों के अनुसार तैयार करने को कहा गया है।

    जिन बस संचालकों को पहले नोटिस जारी किए गए थे, उन्हें 25 मई तक क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय में वाहनों का भौतिक सत्यापन कराने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही ड्राइवर और कंडक्टरों का व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर सुरक्षा संबंधी सूचनाएं साझा करने की व्यवस्था करने पर भी जोर दिया गया है।