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  • अमेरिका में अदाणी ग्रुप की बड़ी निवेश योजना, भारतीय कॉर्पोरेट सेक्टर को मिला नया पहचान

    अमेरिका में अदाणी ग्रुप की बड़ी निवेश योजना, भारतीय कॉर्पोरेट सेक्टर को मिला नया पहचान


    नई दिल्ली भारत के बड़े कारोबारी समूहों में शामिल Adani Group का अमेरिका में प्रस्तावित मल्टी-बिलियन डॉलर निवेश अब सिर्फ एक व्यावसायिक सौदा नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे भारतीय कंपनियों की वैश्विक साख और प्रभाव को मजबूत करने वाले बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है। ग्लोबल इंडस्ट्री लीडर्स और भारतीय-अमेरिकी समुदाय की कई प्रमुख हस्तियों ने इस निवेश योजना को भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों में नया अध्याय बताया है।

    अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump के पहले कार्यकाल के दौरान चुनावी सलाहकार रहे रिपब्लिकन नेता Puneet Ahluwalia ने कहा कि अदाणी समूह का यह निवेश अमेरिकी अर्थव्यवस्था में भारतीय कंपनियों की बढ़ती ताकत और भरोसे को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि भारतीय मूल के पेशेवर और कारोबारी आज अमेरिका में रोजगार और अवसर पैदा कर रहे हैं, ऐसे में अदाणी ग्रुप जैसी बड़ी कंपनी का निवेश दोनों देशों के लिए फायदेमंद साबित होगा।

    अहलूवालिया ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप वैश्विक आर्थिक व्यवस्था को नए सिरे से संतुलित करने की दिशा में काम कर रहे हैं और ऐसे समय में भारत की बड़ी कंपनियों का अमेरिका में निवेश रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अदाणी ग्रुप के खिलाफ पहले हुई कुछ कार्रवाइयों में राजनीतिक कारण हो सकते हैं और अगर ऐसा साबित होता है तो उन्हें इसमें कोई हैरानी नहीं होगी।

    वहीं, BJP USA के अध्यक्ष Adapa Prasad ने कहा कि अमेरिकी अभियोजकों द्वारा मामला वापस लेना यह दिखाता है कि आरोपों के समर्थन में पर्याप्त सबूत नहीं थे। उन्होंने इसे भारत की आर्थिक प्रगति को कमजोर करने की कोशिश बताते हुए कहा कि आखिरकार सच्चाई की जीत हुई।

    उधर, Foundation for India and Indian Diaspora Studies के संस्थापक निदेशक Khanderao Kand ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच सहयोग अब सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने संयुक्त रिसर्च, टेक्नोलॉजी, स्किल डेवलपमेंट और नीति निर्माण में गहरे सहयोग की जरूरत पर जोर दिया।

    उन्होंने कहा कि औद्योगीकरण, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और बाजार तक आसान पहुंच जैसे क्षेत्रों में साझेदारी दोनों देशों को दीर्घकालिक रणनीतिक लाभ दे सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अदाणी ग्रुप का यह प्रस्तावित निवेश न केवल अमेरिका में रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा, बल्कि इससे भारतीय कंपनियों की वैश्विक विश्वसनीयता और निवेश क्षमता की छवि भी मजबूत होगी।

    भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज से भी यह निवेश अहम माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में दोनों देशों के बीच सहयोग तेजी से बढ़ा है। ऐसे में अदाणी समूह का अमेरिकी निवेश आने वाले समय में आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने वाला कदम माना जा रहा है।

  • सेल ने वित्त वर्ष 26 में अप्रैल-फरवरी तक की अब तक की सबसे अधिक बिक्री दर्ज की

    सेल ने वित्त वर्ष 26 में अप्रैल-फरवरी तक की अब तक की सबसे अधिक बिक्री दर्ज की


    नई दिल्ली सरकारी स्टील कंपनी Steel Authority of India Limited (सेल) ने वित्त वर्ष 26 के अप्रैल-फरवरी अवधि में 18.24 मिलियन टन स्टील बेचकर अब तक की सबसे अधिक बिक्री का रिकॉर्ड बनाया। यह सालाना आधार पर 14 प्रतिशत अधिक है। स्टील मंत्रालय ने बुधवार को यह जानकारी साझा की और बताया कि इस अवधि में कैश कलेक्शन 1.11 लाख करोड़ रुपए रहा, जो पिछले साल की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक है।

    फरवरी में विशेष प्रदर्शन
    मंत्रालय ने बताया कि अकेले फरवरी 2026 में सेल ने 1.58 मिलियन टन की कुल बिक्री की। इसके साथ ही कंपनी ने जनवरी की तुलना में स्टॉक में 1.05 लाख टन की कमी की और अपने ऋण को 1,000 करोड़ रुपए घटाया। ये आंकड़े वित्तीय अनुशासन और कुशल संचालन का संकेत देते हैं।

    रिटेल बिक्री और ग्राहक-केंद्रित दृष्टिकोण
    सेल ने रिटेल बिक्री के क्षेत्र में भी सुधार दिखाया। स्टॉकयार्ड बिक्री और घर-घर डिलीवरी दोनों में मजबूत सुधार हुआ, जो कंपनी के ग्राहक-केंद्रित दृष्टिकोण को उजागर करता है।

    चेकर प्लेट उत्पादन की शुरुआत
    बाजार की बदलती मांग के अनुसार, सेल ने झारखंड के Bokaro Steel Plant में चेकर प्लेट का उत्पादन फिर से शुरू किया है। यह उत्पाद पहली बार बोकारो में बनाया जा रहा है और प्रमुख क्षेत्रों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उत्पादक क्षमता बढ़ाने का कदम है।

    वित्तीय अनुशासन और बाजार तालमेल
    कंपनी के निदेशक (वाणिज्यिक) का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे A.K. Panda ने कहा कि कंपनी बाजार की जरूरतों को पूरा करते हुए वित्तीय अनुशासन बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। उन्होंने बताया, “हम इन्वेंट्री और कार्यशील पूंजी का कुशलतापूर्वक प्रबंधन करके वित्तीय अनुशासन प्रदर्शित कर रहे हैं, जो कंपनी की नींव को मजबूत करता है।”

    रिकॉर्ड बिक्री और ग्राहक भरोसा
    पांडा ने आगे कहा कि रिकॉर्ड बिक्री और नकद संग्रह हमारे ग्राहकों के हम पर भरोसे का प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि कंपनी बाजार के साथ तालमेल बिठाने और आगे बढ़ने के लिए पूरी तरह तैयार है।

    सेल का यह प्रदर्शन न केवल वित्तीय मजबूती को दर्शाता है बल्कि यह संकेत भी देता है कि कंपनी अपने ग्राहक-केंद्रित दृष्टिकोण और कुशल प्रबंधन के साथ भविष्य में भी स्थिर और सतत विकास की राह पर आगे बढ़ रही है।

  • केंद्रीय बजट 2026 से उद्योगों की बड़ी उम्मीदें; मैन्युफैक्चरिंग, पीएलआई, निर्यात और निवेश पर हो फोकस

    केंद्रीय बजट 2026 से उद्योगों की बड़ी उम्मीदें; मैन्युफैक्चरिंग, पीएलआई, निर्यात और निवेश पर हो फोकस

    नई दिल्ली। केंद्रीय बजट 2026 के पेश होने में अब कुछ ही दिन शेष हैं और इससे पहले उद्योग जगत की निगाहें सरकार की नीतियों और प्राथमिकताओं पर टिकी हुई हैं। मैन्युफैक्चरिंग से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्यात तक, हर सेक्टर को इस बजट से बड़ी उम्मीदें हैं। इसी क्रम में जेटवर्क के को-फाउंडर और सीईओ अमृत आचार्य ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में बजट 2026 को लेकर अपनी अपेक्षाएं साझा की हैं।

    सार्वजनिक पूंजीगत खर्च बढ़ाने की जरूरत

    अमृत आचार्य का कहना है कि केंद्र सरकार को यूनियन बजट 2026 में सार्वजनिक पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) को लगातार बढ़ाते रहना चाहिए। रेलवे, सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर और सोलर एनर्जी जैसी परियोजनाओं पर सरकार का बढ़ता खर्च मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में मांग को मजबूत करता है। सरकार खुद एक बड़े खरीदार के रूप में काम करती है, जिससे घरेलू उद्योगों को सीधे ऑर्डर मिलते हैं और उत्पादन को गति मिलती है।

    इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश से रोजगार और ग्रोथ

    उन्होंने कहा कि बीते कुछ वर्षों में बजट के जरिए सार्वजनिक निवेश में लगातार बढ़ोतरी हुई है और यही रफ्तार आगे भी जारी रहनी चाहिए। इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च न सिर्फ उद्योगों को काम देता है, बल्कि रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती प्रदान करता है।

    पीएलआई ने बदली मैन्युफैक्चरिंग की तस्वीर

    अमृत आचार्य ने बताया कि सरकार का फोकस प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) जैसी नीतियों पर रहा है, जिसका मकसद भारत में घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर और ऑटो कंपोनेंट्स जैसे सेक्टरों में पीएलआई के सकारात्मक नतीजे अब साफ दिखने लगे हैं।

    अब ग्लोबल मार्केट पर हो फोकस

    उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि भारत ‘मेक इन इंडिया फॉर इंडिया’ से आगे बढ़कर ‘मेक इन इंडिया फॉर ग्लोबल मार्केट’ की दिशा में काम करे। इसके लिए निर्यातकों के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाएं जरूरी हैं, ताकि भारतीय कंपनियां वैश्विक बाजार में मजबूती से प्रतिस्पर्धा कर सकें।

    निर्यातकों को मिले जोखिम से सुरक्षा

    चीन का उदाहरण देते हुए आचार्य ने कहा कि वहां सरकार समर्थित बीमा और क्रेडिट स्कीम्स निर्यातकों को जोखिम से सुरक्षा देती हैं। भारत में भी ऐसी व्यवस्था की जरूरत है, जिससे अमेरिकी और अन्य वैश्विक बाजारों में निर्यात करना आसान हो।

    पूंजी की लागत घटाने पर जोर

    उन्होंने यह भी कहा कि भारत में पूंजी की लागत अभी कई देशों के मुकाबले अधिक है। यदि सरकार इसे कम करने के लिए योजनाबद्ध कदम उठाती है, तो निवेश और उद्यमिता को नई रफ्तार मिलेगी।

    डेढ़ लाइन का सार:

    बजट 2026 से उद्योग जगत को उम्मीद है कि सरकार कैपेक्स बढ़ाएगी और निर्यातकों के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाएं लाकर भारत की मैन्युफैक्चरिंग को वैश्विक स्तर पर मजबूत करेगी।