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  • 'गोल्ड किंग' से विवादों के केंद्र तक, राजेश मेहता पर लगे 15 लाख करोड़ के आरोप क्या हैं?

    'गोल्ड किंग' से विवादों के केंद्र तक, राजेश मेहता पर लगे 15 लाख करोड़ के आरोप क्या हैं?


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में सबसे बड़े कथित अकाउंटिंग विवादों में से एक माने जा रहे मामले में बाजार नियामक सेबी ने Rajesh Mehta और उनकी कंपनी Rajesh Exports Limited के खिलाफ अंतरिम कार्रवाई की है। आरोप है कि वित्त वर्ष 2021 से 2025 के बीच कंपनी ने अपनी आय और कारोबार के आंकड़ों को भारी स्तर पर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया।

    फर्श से अर्श तक का सफर
    राजेश मेहता को लंबे समय तक भारतीय स्वर्ण उद्योग की सबसे बड़ी सफलता की कहानियों में गिना जाता रहा है। बेंगलुरु के एक जैन कारोबारी परिवार से आने वाले मेहता ने अपने भाई के साथ मिलकर पारिवारिक ज्वेलरी कारोबार को एक वैश्विक कंपनी में बदल दिया।

    1995 में शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुई राजेश एक्सपोर्ट्स ने तेजी से विस्तार किया और देश की प्रमुख सोना निर्यातक कंपनियों में शामिल हो गई। वर्ष 2015 में स्विट्जरलैंड की मशहूर रिफाइनरी Valcambi के अधिग्रहण के बाद कंपनी का वैश्विक प्रभाव और बढ़ गया। इसी उपलब्धि के बाद राजेश मेहता को ‘गोल्ड किंग’ के नाम से भी पहचान मिली।

    सेबी के आरोप क्या हैं?
    सेबी के अनुसार, कंपनी ने पिछले पांच वर्षों के दौरान करीब 15.15 लाख करोड़ रुपये के राजस्व को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया हो सकता है। जांच में यह भी कहा गया कि विदेशी सहायक कंपनियों द्वारा दिखाए गए राजस्व का बड़ा हिस्सा स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया जा सका।

    नियामक का दावा है कि कंपनी की रिपोर्ट की गई विदेशी आय का लगभग 99 प्रतिशत से अधिक हिस्सा संदिग्ध पाया गया। इसी आधार पर सेबी ने जांच पूरी होने तक राजेश मेहता को कंपनी के शेयरों में खरीद-बिक्री या अन्य प्रकार के लेनदेन से रोक दिया है। साथ ही कंपनी के खातों का फोरेंसिक ऑडिट कराने का आदेश भी दिया गया है।

    फर्जी एंट्री और निजी ट्रेडिंग का आरोप
    जांच के दौरान Affluence Shares and Stocks Private Limited नामक एक ब्रोकिंग फर्म का नाम भी सामने आया। सेबी का आरोप है कि कंपनी ने हजारों करोड़ रुपये के खरीद-बिक्री लेनदेन का रिकॉर्ड दिखाया, जबकि संबंधित जीएसटी रिकॉर्ड में ऐसे लेनदेन का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला।

    इसके अलावा यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ वित्तीय एंट्रीज का उपयोग कंपनी के कारोबार को बड़ा दिखाने और निजी डेरिवेटिव ट्रेडिंग से जुड़े नुकसान को छिपाने के लिए किया गया। जांच में कंपनी के फंड के कथित दुरुपयोग और संबंधित खातों में धन हस्तांतरण की बात भी कही गई है।

    कंपनी ने आरोपों को बताया गलतफहमी
    सेबी की कार्रवाई के बाद कंपनी ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। राजेश एक्सपोर्ट्स का कहना है कि उसके द्वारा घोषित राजस्व आंकड़े सही हैं और नियामक को कंपनी की रिपोर्टिंग प्रणाली को लेकर गलतफहमी हुई है। कंपनी का दावा है कि उसकी सहायक इकाई वालकाम्बी के वित्तीय आंकड़ों की व्याख्या में अंतर के कारण यह विवाद पैदा हुआ है। कंपनी ने भरोसा दिलाया है कि वह जांच एजेंसियों को सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराएगी और पूरा सहयोग करेगी।

    निवेशकों की बढ़ी चिंता
    मामले के सार्वजनिक होने के बाद कंपनी के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई। इस घटनाक्रम ने कॉर्पोरेट गवर्नेंस, ऑडिट प्रक्रिया और बड़े संस्थागत निवेशकों की निगरानी क्षमता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा, लेकिन फिलहाल यह मामला भारतीय कॉर्पोरेट जगत में पारदर्शिता और वित्तीय जवाबदेही पर बड़ी बहस का कारण बन गया है।

  • 13 मई को शेयर बाजार में रह सकती है बड़ी हलचल, निफ्टी-सेंसेक्स पर रहेगा दबाव

    13 मई को शेयर बाजार में रह सकती है बड़ी हलचल, निफ्टी-सेंसेक्स पर रहेगा दबाव

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार में आज 13 मई को उतार-चढ़ाव भरा कारोबार देखने को मिल सकता है। मंगलवार को बाजार में आई तेज गिरावट के बाद निवेशकों की नजर आज के कारोबार पर टिकी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्लोबल मार्केट के कमजोर संकेत, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर आज भी निफ्टी और सेंसेक्स पर दिखाई दे सकता है।

    मंगलवार को बाजार में बिकवाली का दबाव साफ नजर आया था। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही कमजोर होकर बंद हुए थे। आज बाजार की शुरुआत भी दबाव के साथ हो सकती है। अमेरिका-ईरान तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है।

    निफ्टी के लिए 23,600 अहम स्तर

    मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार निफ्टी के लिए 23,600 का स्तर काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अगर निफ्टी इस स्तर से नीचे जाता है तो बाजार में और कमजोरी देखने को मिल सकती है। वहीं 24,000 का स्तर फिलहाल मजबूत रेजिस्टेंस बना हुआ है। बैंक निफ्टी अपेक्षाकृत मजबूत नजर आ सकता है और बैंकिंग शेयर बाजार को सहारा दे सकते हैं।

    इन सेक्टरों में दिख सकती है हलचल

    आज आईटी सेक्टर दबाव में रह सकता है। ग्लोबल मांग में कमजोरी का असर टेक कंपनियों पर दिखाई दे सकता है। दूसरी तरफ ऑयल एंड गैस सेक्टर में तेजी देखने को मिल सकती है, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का फायदा इस सेक्टर को मिल सकता है। फार्मा सेक्टर में भी कंपनियों के तिमाही नतीजों के चलते हलचल बनी रह सकती है।

    इन शेयरों पर निवेशकों की नजर

    आज के कारोबार में रिलायंस इंडस्ट्रीज, ओएनजीसी, भारती एयरटेल, डॉ. रेड्डीज और टाटा कंज्यूमर जैसे शेयरों पर निवेशकों की खास नजर रहने वाली है। इन शेयरों में खबरों और रिजल्ट के आधार पर अच्छी मूवमेंट देखने को मिल सकती है।

    निवेशकों को क्या करना चाहिए?

    विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल बाजार में सतर्कता के साथ निवेश करना जरूरी है। जल्दबाजी में खरीदारी से बचना चाहिए और ट्रेडिंग करते समय स्टॉप लॉस जरूर लगाना चाहिए। बाजार में किसी भी ग्लोबल खबर का असर तेजी से देखने को मिल सकता है, इसलिए सोच-समझकर निवेश करना ही बेहतर रणनीति होगी।

  • स्विगी का वित्त वर्ष 2025-26 में घाटा 33% बढ़ा, पहुंचा 4,154 करोड़ पर

    स्विगी का वित्त वर्ष 2025-26 में घाटा 33% बढ़ा, पहुंचा 4,154 करोड़ पर


    नई दिल्ली। मुंबई में ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म ने वित्त वर्ष 2025-26 के अपने ताजा नतीजे जारी किए हैं, जिनमें कंपनी के शुद्ध घाटे में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, इस वित्त वर्ष में स्विगी का कुल शुद्ध घाटा बढ़कर 4,154 करोड़ रुपये पहुंच गया है, जो पिछले वित्त वर्ष के 3,117 करोड़ रुपये की तुलना में लगभग 33 प्रतिशत अधिक है।
    हालांकि, चौथी तिमाही के आंकड़ों में कंपनी की स्थिति कुछ बेहतर नजर आई है। 31 मार्च 2026 को समाप्त तिमाही में स्विगी का घाटा घटकर 800 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 1,081 करोड़ रुपये था। इससे संकेत मिलता है कि कंपनी के खर्च नियंत्रण और ऑपरेशनल सुधारों का असर धीरे-धीरे दिखने लगा है।
    रेवेन्यू के मोर्चे पर कंपनी ने मजबूत वृद्धि दर्ज की है। वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में परिचालन से आय 45 प्रतिशत बढ़कर 6,383 करोड़ रुपये पहुंच गई। वहीं, कुल आय 46.74 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 6,649 करोड़ रुपये दर्ज की गई, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में 4,531 करोड़ रुपये थी।
    कंपनी के खर्चों में भी बढ़ोतरी देखी गई है। विज्ञापन और बिक्री प्रमोशन पर खर्च बढ़कर 1,577 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 36 प्रतिशत अधिक है। यह संकेत देता है कि कंपनी बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए आक्रामक रणनीति अपना रही है।
    स्विगी के प्रबंधन ने बताया कि उसका क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म इंस्टामार्ट लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है और यूनिट इकॉनॉमिक्स को सुधारने पर ध्यान दिया जा रहा है। कंपनी के अनुसार, इंस्टामार्ट का ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू (GOV) 68.8 प्रतिशत बढ़कर 7,881 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। वहीं, फूड डिलीवरी सेगमेंट में भी स्थिर ग्रोथ देखी गई है, जहां कुल ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू 9,005 करोड़ रुपये रही और ऑर्डर संख्या 18.3 मिलियन तक पहुंच गई।
    स्विगी के एमडी और सीईओ ने कहा है कि कंपनी का फोकस अब लाभप्रदता और ऑपरेशनल दक्षता बढ़ाने पर है। उनका लक्ष्य आने वाली तिमाहियों में बेहतर मार्जिन और ब्रेकईवन की दिशा में आगे बढ़ना है।
    कुल मिलाकर, हालांकि स्विगी का वार्षिक घाटा बढ़ा है, लेकिन रेवेन्यू ग्रोथ और क्विक कॉमर्स सेगमेंट में मजबूत प्रदर्शन यह संकेत देता है कि कंपनी विस्तार और स्थिरता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।
  • शेयर बाजार में जोरदार तेजी: सेंसेक्स 358 अंक उछला, निफ्टी ने पकड़ी रफ्तार

    शेयर बाजार में जोरदार तेजी: सेंसेक्स 358 अंक उछला, निफ्टी ने पकड़ी रफ्तार


    नई दिल्ली | हफ्ते के तीसरे कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में मजबूत तेजी दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में ही खरीदारी का दबाव देखने को मिला, जिससे पूरा बाजार सकारात्मक रुख में आ गया।

    BSE Sensex में आज करीब 358 अंकों की तेजी देखने को मिली और यह मजबूती के साथ कारोबार करता नजर आया। वहीं Nifty 50 भी 101 अंकों की बढ़त के साथ हरे निशान में रहा। इस तेजी ने निवेशकों के बीच भरोसा बढ़ाया और बाजार में उत्साह का माहौल बना रहा।

    बाजार में खरीदारी का दबदबा

    सुबह से ही बाजार में बैंकिंग, आईटी और एनर्जी सेक्टर में खरीदारी देखने को मिली, जिससे इंडेक्स को सपोर्ट मिला। कई लार्जकैप शेयरों में भी अच्छी तेजी दर्ज की गई, जिससे पूरे बाजार का मूड सकारात्मक रहा।

     वैश्विक संकेतों का मिला-जुला असर

    वैश्विक बाजारों में जारी उतार-चढ़ाव का असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला। मिडिल ईस्ट में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बढ़ती अनिश्चितता और तेल बाजार में हलचल ने निवेशकों को सतर्क रखा। इसके बावजूद घरेलू बाजार ने मजबूती दिखाई।

    अमेरिकी बाजारों में हाल की गिरावट जहां Nasdaq Composite और Dow Jones Industrial Average में कमजोरी देखने को मिली उसका भी हल्का असर एशियाई बाजारों पर पड़ा, लेकिन भारत में इसका प्रभाव सीमित रहा।

    एशियाई बाजारों का रुख

    एशिया के अन्य बाजारों में भी मिला-जुला रुख देखने को मिला। कुछ इंडेक्स में हल्की बढ़त रही, जबकि कुछ में गिरावट दर्ज की गई। जापान के बाजार अवकाश के कारण बंद रहे।

    निवेशकों के लिए संकेत

    विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा तेजी सकारात्मक संकेत है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। इसलिए निवेशकों को सतर्क रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।

  • राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की नितिन गडकरी से मुलाकात बस ट्रक बॉडी उद्योग की समस्याओं पर मंथन तेज

    राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की नितिन गडकरी से मुलाकात बस ट्रक बॉडी उद्योग की समस्याओं पर मंथन तेज

    नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपनी बहन और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से महत्वपूर्ण मुलाकात की। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब बस और ट्रक बॉडी निर्माण से जुड़ा उद्योग कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रहा है और उद्योग जगत अपनी समस्याओं को लेकर सरकार से समाधान की उम्मीद लगाए बैठा है।

    इस बैठक में राजस्थान के बस और ट्रक बॉडी बिल्डर एसोसिएशन के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। सूत्रों के अनुसार इस मुलाकात में प्रतिनिधियों ने अपने क्षेत्र से जुड़ी प्रमुख समस्याओं को विस्तार से सामने रखा। उद्योग से जुड़े लोगों ने खासतौर पर नए तकनीकी मानकों, बढ़ती उत्पादन लागत और मंत्रालय के अनुपालन नियमों को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर कीं। उनका कहना था कि लगातार बदलते नियम और मानकों के चलते छोटे और मध्यम स्तर के निर्माताओं के लिए व्यवसाय चलाना कठिन होता जा रहा है।

    राहुल गांधी ने इस दौरान उद्योग प्रतिनिधियों की बातों को गंभीरता से सुना और इन मुद्दों को केंद्रीय मंत्री के सामने रखा। उन्होंने नितिन गडकरी से आग्रह किया कि इन समस्याओं का समाधान जल्द से जल्द निकाला जाए ताकि इस उद्योग से जुड़े लाखों लोगों की आजीविका सुरक्षित रह सके। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि यदि नियमों और शुल्कों का बोझ इसी तरह बढ़ता रहा तो कई छोटे निर्माता बाजार से बाहर हो सकते हैं जिससे रोजगार पर भी असर पड़ेगा।

    सूत्रों के अनुसार गडकरी ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को ध्यान से सुना और उन्हें आश्वस्त किया कि सरकार इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार करेगी और समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने उद्योग की चुनौतियों को समझने और उनके व्यावहारिक समाधान खोजने की बात कही।

    बैठक से पहले भी इन प्रतिनिधियों ने राहुल गांधी से मुलाकात की थी और उन्हें अपनी समस्याओं से अवगत कराया था। उस दौरान भी उन्होंने यह चिंता जताई थी कि लाइसेंस प्रक्रिया में अधिक खर्च और समय लगने के कारण छोटे निर्माताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। इसके साथ ही नए मानकों को पूरा करने में आ रही कठिनाइयों ने भी उनकी चिंता बढ़ा दी है।

    प्रियंका गांधी ने बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में बताया कि प्रतिनिधियों ने लाइसेंस और अनुपालन से जुड़ी दिक्कतों को प्रमुख रूप से उठाया है। उन्होंने कहा कि नितिन गडकरी ने इन समस्याओं को समझते हुए जल्द समाधान निकालने का आश्वासन दिया है। इस बयान से उद्योग जगत में थोड़ी राहत की उम्मीद जगी है।

    यह बैठक ऐसे समय में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है जब देश में बुनियादी ढांचे और परिवहन क्षेत्र में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। सरकार जहां नियमों को सख्त और आधुनिक बनाने की दिशा में काम कर रही है वहीं उद्योग जगत चाहता है कि इन नियमों को व्यावहारिक बनाया जाए ताकि छोटे और मध्यम उद्यम भी टिक सकें।

    कुल मिलाकर यह मुलाकात सिर्फ एक राजनीतिक बैठक नहीं बल्कि उद्योग और सरकार के बीच संवाद को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इन मुद्दों पर क्या ठोस कदम उठाती है और बस ट्रक बॉडी निर्माण उद्योग को किस तरह राहत मिलती है

  • सावधान! इंश्योरेंस लेने की सोच रहे हैं तो अभी जान लें ये नियम, अगर नहीं जाना तो नॉमिनी को भी नहीं मिलेगा पैसा

    सावधान! इंश्योरेंस लेने की सोच रहे हैं तो अभी जान लें ये नियम, अगर नहीं जाना तो नॉमिनी को भी नहीं मिलेगा पैसा


    नई दिल्ली। आजकल शायद ही कोई ऐसा परिवार हो जिसमें सदस्यों के लिए लाइफ इंश्योरेंस ना किया जाता हो। बिताते समय के साथ यह संख्या और भी तेजी से बढ़ती जा रही है। लोग अपनी गाड़ियों के साथ-साथ खुद का भी लाइफ इंश्योरेंस करा रहे हैं। हालांकि इसे लेकर भी कुछ भ्रांतियां फैली हुई हैं जिसे आज हम आपके सामने रखेंगे और इससे जुड़ी तमाम जानकारियां बताएंगे। जानिए किन-किन कारण से क्लेम नहीं किया जा सकता।

    हत्या की वजह से हुई मौत
    अगर पॉलिसी धारक की मौत हो गई है और उसे घटना में नॉमिनी की संलिप्त पाई जाती है तो ऐसी स्थिति में नॉमिनी को क्लेम नहीं दिया जाएगा। केवल एक ही स्थिति में नॉमिनी को क्लेम मिल सकता है या तो वह कानूनन अपराध मुक्त हो जाए या कोर्ट द्वारा बरी हो जाए। हत्या के कारण हुई मौत के बाद पॉलिसी प्रोवाइडर कंपनी के द्वारा यह जांच की जाती है कि पॉलिसी धारा किसी आपराधिक गतिविधि में तो सन लिप्त नहीं था। अगर किसी अपराध में संलिप्त पाई जाती है तो भी क्लेम को मंजूरी नहीं दी जाएगी।

    धूम्रपान और नशे के कारण मृत्यु
    अगर पॉलिसी धारक किसी भी प्रकार का नशा करता है और उसके प्रभाव के कारण उसकी जान चली जाती है तो ऐसी स्थिति में भी पॉलिसी धारक को इंश्योरेंस का लाभ नहीं मिल सकेगा। जबकि प्राकृतिक कर्म से अगर मौत होती है तो पॉलिसी धारक को डेथ क्लेम के रूप में राशि का भुगतान किया जाता है।

    साहसिक गतिविधियों में संलिप्त होने के कारण हुई मौत
    इंश्योरेंस प्रोवाइडर कंपनी पॉलिसी धारक से उसकी शारीरिक बीमारियों एवं कार्यशाली के बारे में जानकारी लेती है जिसके आधार पर वह पॉलिसी धारक का प्रीमियम तय करती है। अगर कोई पॉलिसी धारक पर्वतारोहण करता है या स्काई डाइविंग जैसे साहसिक गतिविधियों में लगा हुआ होता है तो उनके साथ दुर्घटना घटने के सबसे अधिक चांस होते हैं। ऐसी स्थिति में उन पॉलिसी धारकों को क्लेम रीइंबर्समेंट से बाहर रखा जाता है।

  • FD Scheme: एफडी कराने की सोच रहे हैं तो पत्नी के नाम से कराएं, हो जाएंगे मालामाल

    FD Scheme: एफडी कराने की सोच रहे हैं तो पत्नी के नाम से कराएं, हो जाएंगे मालामाल


    नई दिल्ली। जैसे जैसे निवेश के नए नए तरीके सामने आ रहे हैं वैसे वैसे लोग उन्हें अपनाते जा रहे है। हालांकि एक वर्ग ऐसा भी है जो आज भी एफड़ी और आरडी जैसे पारंपरिक निवेशों में यकीन रखता है। आमतौर पर देखा जाता है कि नौकरीपेशा लोग अपने नाम से एफडी कराते हैं। लेकिन अगर आप अपने बजाय अपनी पत्नी के नाम से एफडी कराएं तो आप न सिर्फ मोटा रिटर्न कमा सकते हैं बल्कि काफी पैसे भी बचा सकते हैं। आइए जानते हैं कैसे?

    FD से मिले ब्याज पर 10% कटौती
    अगर कोई व्यक्ति एक लेखा वर्ष में एफडी पर 50 हजार रुपये से ज्यादा का ब्याज प्राप्त करता है तो उसे उस राशि पर 10 प्रतिशत TDS देय होता है। जबकि किसी व्यक्ति के पास पैन नंबर नहीं है तो इस राशि का प्रतिशत दोगुना हो जाता है यानी 20 प्रतिशत। ऐसी स्थिति में अगर आपकी पत्नी टैक्स ब्रैकेट से बाहर हैं या हाउसवाइफ हैं तो आपकी यह राशि एकमुश्त बच सकती है।

    पत्नी के नाम पर FD कराने से होगी बंपर बचत
    नए टैक्स सिस्टम में जिन लोगो की कुल टैक्सेबल इनकम 4 लाख रुपये से कम है और पुराने टैक्स सिस्टम में जिन लोगों की इनकम 2.5 लाख रुपये से कम है उन्हें एफड़ी पर TDS देय नहीं होता है। उन्हें TDS से छूट दी जाती है। लिहाजा अगर आपकी पत्नी हाउस वाइफ हैं तो स्वभाविक है कि वह टैक्स के दायरे से बाहर होंगी इसलिए उनके नाम से एफडी करवाने से आप TDS की पूरी पूरी बचत कर सकते हैं।

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    इसके अलावा, अगर आप जॉइंट एफडी कराते हैं और अपनी पत्नी को फर्स्ट होल्डर बनाते हैं तो ऐसी स्थिति में भी आप काफी बचत कर सकते हैं। बताते चलें कि ये फायदा सिर्फ उन लोगों को मिल सकता है, जिनकी पत्नी जॉब नहीं करती हैं।

  • शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल, सेंसेक्स 943 अंकों की तेजी के साथ बंद

    शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल, सेंसेक्स 943 अंकों की तेजी के साथ बंद


    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार ने सोमवार के कारोबारी सत्र में जबरदस्त तेजी दिखाई और दिन के अंत में मजबूत बढ़त के साथ बंद हुआ। कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 943.52 अंक या 1.17 प्रतिशत की तेजी के साथ 81,666.46 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 262.95 अंक या 1.06 प्रतिशत की बढ़त के साथ 25,088.40 पर पहुंच गया।

    बाजार में इस तेजी का नेतृत्व इन्फ्रास्ट्रक्चर और ऑटो सेक्टर के शेयरों ने किया। सेक्टोरल फ्रंट पर निफ्टी इन्फ्रा 2.26 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो 2.13 प्रतिशत, निफ्टी पीएसई 2.04 प्रतिशत, निफ्टी ऑयल एंड गैस 2.04 प्रतिशत, निफ्टी मेटल 1.88 प्रतिशत और निफ्टी कमोडिटीज 1.87 प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुए।हालांकि आईटी और हेल्थकेयर सेक्टर में हल्की कमजोरी देखने को मिली। निफ्टी आईटी 0.47 प्रतिशत और निफ्टी हेल्थकेयर 0.08 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ।

    लार्जकैप के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी तेजी दर्ज की गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 546.80 अंक या 0.96 प्रतिशत की बढ़त के साथ 57,667.60 पर बंद हुआ जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 105.20 अंक या 0.64 प्रतिशत की तेजी के साथ 16,523.35 के स्तर पर पहुंच गया।सेंसेक्स के 30 शेयरों में पावर ग्रिड, अदाणी पोर्ट्स, बीईएल, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एलएंडटी, इंडिगो, अल्ट्राटेक सीमेंट, एशियन पेंट्स, आईटीसी, बजाज फिनसर्व, टाटा स्टील, एनटीपीसी, आईसीआईसीआई बैंक और मारुति सुजुकी प्रमुख गेनर्स रहे। वहीं एक्सिस बैंक, इन्फोसिस, टीसीएस, ट्रेंट, टाइटन और कोटक महिंद्रा बैंक नुकसान में बंद हुए।

    एलकेपी सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक दे के अनुसार, हालिया गिरावट के बाद निफ्टी में मजबूत उछाल देखने को मिला है, हालांकि व्यापक ट्रेंड अभी भी कमजोर बना हुआ है। उनका कहना है कि इंडेक्स अभी भी 200 डीएमए से नीचे है और किसी भी तेजी का इस्तेमाल लीवरेज पोजीशन घटाने और शॉर्ट पोजीशन बनाने में करना चाहिए। निफ्टी के लिए 25,200 का स्तर रुकावट और 24,900 का स्तर सपोर्ट माना जा रहा है।

    गौरतलब है कि मिले-जुले वैश्विक संकेतों के बीच बाजार की शुरुआत कमजोर रही थी। सेंसेक्स 167 अंक की गिरावट के साथ खुला था और निफ्टी भी लाल निशान में था, लेकिन कुछ ही मिनटों में बाजार ने वापसी करते हुए हरे निशान में कारोबार शुरू कर दिया।

  • ग्वालियर व्यापार मेले में इस बार इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर में भी दिखेगी 'चमक', जीएसटी कटौती से बढ़ेगी बिक्री की उम्मीद

    ग्वालियर व्यापार मेले में इस बार इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर में भी दिखेगी 'चमक', जीएसटी कटौती से बढ़ेगी बिक्री की उम्मीद


    ग्वालियर । देश के सबसे बड़े और 120 साल से अधिक पुराने ग्वालियर व्यापार मेले में इस साल कारोबार के रिकॉर्ड टूटने की उम्मीद है। इस बार मेला केवल ऑटोमोबाइल सेक्टर तक ही सीमित नहीं रहेगा बल्कि इलेक्ट्रॉनिक सामानों सहित अन्य सेक्टरों में भी जबरदस्त बिक्री होने की संभावना है। यह मेला अपनी अनूठी परंपरा के लिए जाना जाता है जहाँ घर में उपयोग होने वाली छोटी सुई से लेकर मोटर कार तक हर चीज़ छूट के साथ उपलब्ध होती है। यही कारण है कि देश भर से खरीदार इस मेले का इंतज़ार करते हैं।

    जीएसटी लागू होने के बाद बदला परिदृश्य

    1 जुलाई 2017 को जब वस्तु एवं सेवा कर GST लागू हुआ उत्पादों पर 50% वाणिज्यकर में छूट मिलती थी। जीएसटी लागू होने के बाद सरकार ने केवल ऑटोमोबाइल सेक्टर को रोड टैक्स में 50% की छूट देकर राहत दी। इस छूट के कारण ऑटोमोबाइल सेक्टर में तो शानदार कारोबार होता रहा 2024-25 मेले में ₹900 करोड़ से अधिक का कारोबार लेकिन इलेक्ट्रॉनिक और अन्य सेक्टरों को वह फायदा नहीं मिला।

    इस बार इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर क्यों चमकेगा

    इस वर्ष, स्थिति बदलने की उम्मीद है। सरकार ने 22 सितंबर से जीएसटी की दरों में कमी की है, जिसका असर कारोबार के सभी सेक्टरों पर दिख रहा है और चीजें सस्ती हुई हैं।दोहरी छूट का फायदा: ऑटोमोबाइल सेक्टर को तो पहले से ही रोड टैक्स में 50% की छूट मिल रही है।इलेक्ट्रॉनिक और अन्य सेक्टर: जीएसटी दरों में कमी आने से इस बार इलेक्ट्रॉनिक कंपनियों पर भी अपने प्रोडक्ट्स पर तगड़ी छूट देने का दबाव और अवसर दोनों हैं। उपभोक्ताओं को लाभजीएसटी कम होने के कारण चीज़ें पहले ही सस्ती हुई हैं और अब कंपनियों की अतिरिक्त छूट से खरीदारी करने वालों को बड़ा फायदा होगा।

    पिछले 2024-25 के मेले में कुल ₹3327 करोड़ से अधिक का कारोबार हुआ था। जानकारों का मानना है कि इस बार इलेक्ट्रॉनिक और अन्य सेक्टरों के चमकने से यह कारोबार का आंकड़ा और भी बड़ा हो सकता है। यह उम्मीद है कि इस साल का मेला ग्राहकों और व्यापारियों दोनों के लिए बेहद लाभदायक साबित होगा।