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  • UPI पेमेंट पर चार्ज का विरोध तेज, भोपाल में आज व्यापारियों का ‘नो UPI डे’, 75 हजार के ट्रांजैक्शन पर 300 रुपए तक शुल्क

    UPI पेमेंट पर चार्ज का विरोध तेज, भोपाल में आज व्यापारियों का ‘नो UPI डे’, 75 हजार के ट्रांजैक्शन पर 300 रुपए तक शुल्क


    भोपाल । भोपाल में आज 8 अक्टूबर को थोक दाल और चावल व्यापारी नो UPI डे मनाकर प्रस्तावित MDR चार्ज का विरोध करेंगे। व्यापारियों ने इसे सांकेतिक आंदोलन बताते हुए कहा है कि 2 हजार रुपए से अधिक के ऑनलाइन भुगतान स्वीकार नहीं किए जाएंगे। व्यापारियों का यह विरोध 15 अक्टूबर से प्रस्तावित UPI चार्ज को लेकर है। उनका कहना है कि डिजिटल भुगतान आज कारोबार का अहम हिस्सा बन चुका है और इस पर अतिरिक्त शुल्क लगाया गया तो खासकर छोटे और मध्यम कारोबारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है।

    व्यापारियों के अनुसार प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 2 हजार रुपए से अधिक के व्यक्ति से व्यापारी को किए जाने वाले UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट लगाए जाने की बात कही जा रही है। वहीं 75 हजार रुपए या उससे अधिक के लेनदेन पर यह शुल्क अधिकतम 300 रुपए तक हो सकता है। व्यापारियों का तर्क है कि थोक कारोबार में बड़ी रकम के भुगतान नियमित रूप से होते हैं। ऐसे में प्रत्येक लेनदेन पर शुल्क लगने से कारोबार की लागत बढ़ने की आशंका है।

    भोपाल किराना व्यापारी महासंघ के महामंत्री विवेक साहू के मुताबिक UPI भुगतान व्यापारियों और आम लोगों के लिए तेज सरल और सुविधाजनक माध्यम बन चुका है। व्यापारियों ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने में लगातार सहयोग किया है। ऐसे में UPI पर MDR चार्ज लागू होने से छोटे और मध्यम व्यापारियों की लागत बढ़ सकती है। उनका कहना है कि सरकार को कारोबारियों की व्यावहारिक परेशानियों को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित शुल्क पर पुनर्विचार करना चाहिए।

    नो UPI डे के तहत व्यापारियों से अपील की गई है कि वे 8 अक्टूबर को 2 हजार रुपए से ज्यादा के UPI भुगतान स्वीकार न करें। इसे किसी तरह के टकराव के बजाय शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाने का माध्यम बताया गया है। दाल और चावल कारोबार से जुड़े व्यापारियों का कहना है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लेकर व्यापारियों ने हमेशा सकारात्मक सहयोग किया है और डिजिटल इंडिया अभियान में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

    चावल-दाल व्यापारी संघ के अध्यक्ष महेश रामरख्यानी और सचिव सचिन संगतानी ने भी MDR से जुड़ी व्यवस्था पर पुनर्विचार की मांग रखी है। उनका कहना है कि व्यापारियों ने डिजिटल लेनदेन को अपनाकर भुगतान व्यवस्था को आसान बनाने में सहयोग दिया है। अब सरकार से उम्मीद है कि नए शुल्क का फैसला लेते समय व्यापारियों की लागत और बाजार की वास्तविक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाएगा।

    व्यापारियों का कहना है कि बड़े मूल्य के डिजिटल लेनदेन में मामूली प्रतिशत शुल्क भी लगातार कारोबार करने वालों के लिए महत्वपूर्ण राशि बन सकता है। उदाहरण के तौर पर यदि एक कारोबारी दिन में 2 हजार रुपए से अधिक के कई UPI लेनदेन करता है तो प्रस्तावित शुल्क का कुल प्रभाव बढ़ सकता है। इसी वजह से व्यापारी संगठन सरकार का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित करना चाहते हैं।

    भोपाल में आज होने वाला नो UPI डे इसी विरोध का सांकेतिक रूप है। व्यापारियों की कोशिश है कि एक दिन के इस प्रदर्शन के जरिए सरकार तक अपनी मांग पहुंचाई जाए और प्रस्तावित MDR चार्ज पर दोबारा विचार किया जाए। अब देखना होगा कि इस सांकेतिक विरोध के बाद सरकार और संबंधित पक्ष इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं।

  • कारोबारियों के लिए आसान होगा जीएसटी सिस्टम? रिफंड का दायरा बढ़ाने और पंजीकरण प्रक्रिया सरल करने पर मंथन

    कारोबारियों के लिए आसान होगा जीएसटी सिस्टम? रिफंड का दायरा बढ़ाने और पंजीकरण प्रक्रिया सरल करने पर मंथन


    नई दिल्ली। जीएसटी व्यवस्था को कारोबारियों के लिए आसान और अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में सरकार कई बड़े बदलावों पर विचार कर रही है। जीएसटी काउंसिल की गुरुवार को होने वाली अहम बैठक में रिफंड पंजीकरण और रिटर्न दाखिल करने से जुड़े कई प्रस्तावों पर फैसला हो सकता है। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण करेंगी। प्रस्तावों को मंजूरी मिलने की स्थिति में कारोबारियों को जीएसटी से जुड़ी कई प्रक्रियाओं में राहत मिल सकती है और टैक्स व्यवस्था को पहले की तुलना में सरल बनाने की कोशिश की जा सकती है।

    बैठक में इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी आईटीसी से जुड़े नियमों में भी बदलाव पर विचार होने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक आईटीसी पर लगी कुछ मौजूदा पाबंदियों में ढील दी जा सकती है। सामान्य कारोबारी खर्चों को भी इनपुट टैक्स क्रेडिट के दायरे में शामिल करने का प्रावधान किया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो कारोबारियों के लिए टैक्स क्रेडिट का इस्तेमाल करने की गुंजाइश बढ़ सकती है और कारोबारी खर्चों पर कर का बोझ कम करने में मदद मिल सकती है।

    पंजीकरण को लेकर भी कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित हैं। एक राज्य में जीएसटी पंजीकरण कराकर पूरे देश में कारोबार करने की अनुमति देने के प्रस्ताव पर विचार किया जा सकता है। मौजूदा व्यवस्था में अलग अलग राज्यों में कारोबार करने वाले व्यवसायों के लिए पंजीकरण से जुड़ी प्रक्रियाएं अधिक जटिल हो सकती हैं। ऐसे में एकीकृत पंजीकरण की व्यवस्था लागू होने पर कारोबारियों के लिए अनुपालन प्रक्रिया आसान हो सकती है।

    सरकार की ओर से जीएसटी पंजीकरण प्रक्रिया को लेकर भी आंकड़े सामने रखे गए हैं। सरकार का कहना है कि 61 प्रतिशत करदाताओं का पंजीकरण बिना अधिकारी के हस्तक्षेप के तीन कार्यदिवस के भीतर किया जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि पंजीकरण प्रक्रिया को डिजिटल और कम हस्तक्षेप वाली बनाने पर जोर दिया जा रहा है। प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य भी कारोबारियों के लिए प्रक्रिया को सरल और तेज बनाना बताया जा रहा है।

    रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया में भी बदलाव की तैयारी है। प्रस्ताव के मुताबिक ऐसी व्यवस्था बनाई जा सकती है जिसमें खरीदार के लेजर में संबंधित बदलाव स्वतः दर्ज हो जाएं। इससे रिटर्न से जुड़ी प्रक्रियाओं में मानवीय हस्तक्षेप कम करने और लेनदेन से संबंधित जानकारी को अधिक व्यवस्थित तरीके से दर्ज करने में मदद मिल सकती है।

    जीएसटी से जुड़े नोटिस को लेकर भी कारोबारियों को राहत मिल सकती है। प्रस्ताव के तहत एक तय सीमा से कम मामलों में नोटिस जारी नहीं करने की व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है। इससे छोटे मामलों में कारोबारियों को बार बार नोटिस और अनुपालन संबंधी प्रक्रिया से गुजरने की परेशानी कम हो सकती है। हालांकि किस सीमा तक के मामलों को इस प्रावधान में शामिल किया जाएगा यह काउंसिल के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगा।

    रिफंड व्यवस्था में बदलाव भी बैठक के प्रमुख प्रस्तावों में शामिल है। रिफंड का दायरा सेवाओं के साथ साथ संयंत्र और मशीनरी पर चुकाए गए कर तक बढ़ाने का प्रस्ताव सामने आया है। अगर इसे मंजूरी मिलती है तो पात्र कारोबारियों के लिए रिफंड प्राप्त करने का दायरा बढ़ सकता है। इससे खास तौर पर ऐसे व्यवसायों को फायदा मिलने की उम्मीद है जिनमें मशीनरी और संयंत्र पर बड़ा निवेश किया जाता है।

    जीएसटी काउंसिल की बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसमें टैक्स व्यवस्था को सरल बनाने के साथ कारोबारियों की अनुपालन संबंधी परेशानियों को कम करने पर चर्चा होगी। हालांकि ये सभी प्रस्ताव फिलहाल बैठक में विचार के स्तर पर हैं। अंतिम तस्वीर काउंसिल के फैसले के बाद ही साफ होगी। यदि प्रस्तावों को मंजूरी मिलती है तो रिफंड आईटीसी पंजीकरण और रिटर्न दाखिल करने जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में जीएसटी व्यवस्था में बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

  • वाइब्रेंट गुजरात 2027 के लिए CM पटेल का बड़ा प्लान दिग्गज कंपनियों को गुजरात में निवेश का दिया न्योता

    वाइब्रेंट गुजरात 2027 के लिए CM पटेल का बड़ा प्लान दिग्गज कंपनियों को गुजरात में निवेश का दिया न्योता


    नई दिल्ली। वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट 2027 की तैयारियों के तहत मुंबई में आयोजित रोड शो के दौरान गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने देश के कई दिग्गज उद्योगपतियों से मुलाकात की। इन बैठकों में गुजरात में नए निवेश की संभावनाओं से लेकर मौजूदा परियोजनाओं के विस्तार तक कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने उद्योग जगत को गुजरात में निवेश के लिए उपलब्ध सुविधाओं और संभावनाओं से अवगत कराया।

    मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा से मुलाकात की। बैठक में गुजरात में महिंद्रा ग्रुप की मौजूदगी को और मजबूत करने पर चर्चा हुई। खास तौर पर इलेक्ट्रिक व्हीकल इकोसिस्टम और भविष्य की मोबिलिटी से जुड़े समाधानों में निवेश की संभावनाओं पर बातचीत हुई। इसके साथ ही गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी यानी गिफ्ट सिटी में महिंद्रा ग्रुप की मौजूदगी बढ़ाने के विकल्पों पर भी विचार किया गया।

    सीएम पटेल ने बताया कि गुजरात का मजबूत पोर्ट नेटवर्क बेहतर लॉजिस्टिक्स सुविधाएं विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश के अनुकूल औद्योगिक नीतियां राज्य को नई पीढ़ी के मैन्युफैक्चरिंग और वित्तीय सेवाओं के लिए बेहतर जगह बनाती हैं। बैठक में इन्हीं सुविधाओं के आधार पर गुजरात में कारोबार के विस्तार की संभावनाओं पर विचार किया गया।

    इसके बाद मुख्यमंत्री ने एएम/एनएस इंडिया के सीईओ अमित हरलालका से मुलाकात की। इस दौरान कंपनी की गुजरात में बड़ी स्टील परियोजना को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। मुख्यमंत्री के अनुसार कंपनी ने गुजरात में दुनिया के सबसे बड़े स्टील मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स में से एक विकसित करने का विजन साझा किया है। इसकी कुल उत्पादन क्षमता 25 मिलियन टन बताई गई है।

    बैठक में 80 हजार करोड़ रुपए के बड़े कैपिटल इन्वेस्टमेंट से जुड़ी प्रगति की भी समीक्षा की गई। इसके अलावा हजीरा में रिन्यूएबल एनर्जी और बैटरी स्टोरेज सिस्टम के लिए करीब 10 हजार करोड़ रुपए के अतिरिक्त निवेश की प्रतिबद्धता पर भी चर्चा हुई। इससे गुजरात के औद्योगिक और ऊर्जा क्षेत्र में निवेश को नई गति मिलने की उम्मीद है।

    मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने हिंडाल्को इंडस्ट्रीज के एमडी सतीश पाई से भी मुलाकात की। बैठक में गुजरात के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में कंपनी की मौजूदगी को और मजबूत करने के मुद्दे पर बातचीत हुई। इसमें कॉपर रीसाइक्लिंग ई-वेस्ट मैनेजमेंट और सर्कुलर इकॉनमी से जुड़ी योजनाओं पर विशेष जोर रहा।

    बैठक के दौरान दिसंबर में शुरू होने वाले कॉपर रीसाइक्लिंग प्लांट के उद्घाटन की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। साथ ही गुजरात को कॉपर उद्योग के लिए प्रमुख वैश्विक केंद्र के तौर पर विकसित करने के लिए नए निवेश अवसरों और टिकाऊ औद्योगिक प्रक्रियाओं पर विचार किया गया।

    वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट 2027 से पहले मुंबई रोड शो में हुई ये बैठकें गुजरात के निवेश आकर्षित करने के प्रयासों को दिखाती हैं। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी स्टील रिन्यूएबल एनर्जी बैटरी स्टोरेज कॉपर रीसाइक्लिंग और सर्कुलर इकॉनमी जैसे क्षेत्रों पर बढ़ता फोकस राज्य की औद्योगिक रणनीति में नए सेक्टरों की अहमियत को भी दर्शाता है।

  • महीने की पहली तारीख पर बदलेंगे गैस सिलेंडर के रेट जानिए कम होंगे दाम या फिर बढ़ेगा महंगाई का बोझ

    महीने की पहली तारीख पर बदलेंगे गैस सिलेंडर के रेट जानिए कम होंगे दाम या फिर बढ़ेगा महंगाई का बोझ


    नई दिल्ली। हर महीने की पहली तारीख देशभर के एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है क्योंकि इसी दिन ऑयल मार्केटिंग कंपनियां गैस सिलेंडर की नई कीमतें जारी करती हैं। एक अगस्त से भी घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम में बदलाव होने की संभावना है। ऐसे में करोड़ों परिवारों की नजर इस बात पर टिकी है कि इस बार रसोई गैस सस्ती होगी या फिर महंगाई का बोझ और बढ़ेगा। हालांकि अंतिम फैसला तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति और अन्य आर्थिक कारकों को ध्यान में रखते हुए लेंगी।

    एलपीजी सिलेंडर की कीमतें हर महीने अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों विदेशी मुद्रा विनिमय दर और आयात लागत के आधार पर तय की जाती हैं। यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और एलपीजी की कीमतों में गिरावट आती है तो घरेलू बाजार में राहत मिलने की संभावना बढ़ जाती है। वहीं यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ती हैं या डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी आती है तो गैस सिलेंडर महंगा भी हो सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के दिनों में वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार चढ़ाव बना हुआ है। इसी कारण तेल कंपनियां बाजार की स्थिति का लगातार आकलन कर रही हैं। ऐसे में यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि घरेलू गैस सिलेंडर के दाम घटेंगे या बढ़ेंगे। हालांकि कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बदलाव की संभावना अधिक मानी जा रही है क्योंकि इस श्रेणी में कीमतों में अक्सर तेजी से संशोधन किया जाता है।

    देश में घरेलू उपयोग के लिए 14 दशमलव 2 किलोग्राम का एलपीजी सिलेंडर और व्यावसायिक उपयोग के लिए 19 किलोग्राम का कमर्शियल सिलेंडर इस्तेमाल किया जाता है। होटल रेस्टोरेंट ढाबे और छोटे कारोबारी कमर्शियल सिलेंडर पर अधिक निर्भर रहते हैं। इसलिए इस श्रेणी में कीमतों में बदलाव का सीधा असर खाद्य पदार्थों और अन्य सेवाओं की लागत पर भी पड़ सकता है।

    यदि घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में कमी होती है तो इसका सबसे बड़ा फायदा आम परिवारों को मिलेगा। वहीं यदि कीमतें बढ़ती हैं तो मासिक घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। खासतौर पर मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए रसोई गैस की कीमतें घरेलू खर्च का महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं।

    उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे नई कीमतों की आधिकारिक घोषणा के बाद ही किसी भी जानकारी पर भरोसा करें। सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले दावों या अफवाहों से बचना चाहिए क्योंकि वास्तविक कीमतें केवल तेल विपणन कंपनियों की ओर से जारी सूची के अनुसार ही लागू होती हैं। नई दरें देश के अलग अलग शहरों में टैक्स और परिवहन लागत के कारण थोड़ी अलग हो सकती हैं।

    हर महीने की तरह इस बार भी एक अगस्त को इंडियन ऑयल भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम नई एलपीजी दरें जारी करेंगी। यदि वैश्विक बाजार से सकारात्मक संकेत मिलते हैं तो उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है। वहीं विपरीत परिस्थितियों में कीमतों में बढ़ोतरी से इनकार भी नहीं किया जा सकता। इसलिए सभी की नजर अब पहली अगस्त को जारी होने वाली नई एलपीजी मूल्य सूची पर टिकी हुई है।

  • 'गोल्ड किंग' से विवादों के केंद्र तक, राजेश मेहता पर लगे 15 लाख करोड़ के आरोप क्या हैं?

    'गोल्ड किंग' से विवादों के केंद्र तक, राजेश मेहता पर लगे 15 लाख करोड़ के आरोप क्या हैं?


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में सबसे बड़े कथित अकाउंटिंग विवादों में से एक माने जा रहे मामले में बाजार नियामक सेबी ने Rajesh Mehta और उनकी कंपनी Rajesh Exports Limited के खिलाफ अंतरिम कार्रवाई की है। आरोप है कि वित्त वर्ष 2021 से 2025 के बीच कंपनी ने अपनी आय और कारोबार के आंकड़ों को भारी स्तर पर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया।

    फर्श से अर्श तक का सफर
    राजेश मेहता को लंबे समय तक भारतीय स्वर्ण उद्योग की सबसे बड़ी सफलता की कहानियों में गिना जाता रहा है। बेंगलुरु के एक जैन कारोबारी परिवार से आने वाले मेहता ने अपने भाई के साथ मिलकर पारिवारिक ज्वेलरी कारोबार को एक वैश्विक कंपनी में बदल दिया।

    1995 में शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुई राजेश एक्सपोर्ट्स ने तेजी से विस्तार किया और देश की प्रमुख सोना निर्यातक कंपनियों में शामिल हो गई। वर्ष 2015 में स्विट्जरलैंड की मशहूर रिफाइनरी Valcambi के अधिग्रहण के बाद कंपनी का वैश्विक प्रभाव और बढ़ गया। इसी उपलब्धि के बाद राजेश मेहता को ‘गोल्ड किंग’ के नाम से भी पहचान मिली।

    सेबी के आरोप क्या हैं?
    सेबी के अनुसार, कंपनी ने पिछले पांच वर्षों के दौरान करीब 15.15 लाख करोड़ रुपये के राजस्व को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया हो सकता है। जांच में यह भी कहा गया कि विदेशी सहायक कंपनियों द्वारा दिखाए गए राजस्व का बड़ा हिस्सा स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया जा सका।

    नियामक का दावा है कि कंपनी की रिपोर्ट की गई विदेशी आय का लगभग 99 प्रतिशत से अधिक हिस्सा संदिग्ध पाया गया। इसी आधार पर सेबी ने जांच पूरी होने तक राजेश मेहता को कंपनी के शेयरों में खरीद-बिक्री या अन्य प्रकार के लेनदेन से रोक दिया है। साथ ही कंपनी के खातों का फोरेंसिक ऑडिट कराने का आदेश भी दिया गया है।

    फर्जी एंट्री और निजी ट्रेडिंग का आरोप
    जांच के दौरान Affluence Shares and Stocks Private Limited नामक एक ब्रोकिंग फर्म का नाम भी सामने आया। सेबी का आरोप है कि कंपनी ने हजारों करोड़ रुपये के खरीद-बिक्री लेनदेन का रिकॉर्ड दिखाया, जबकि संबंधित जीएसटी रिकॉर्ड में ऐसे लेनदेन का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला।

    इसके अलावा यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ वित्तीय एंट्रीज का उपयोग कंपनी के कारोबार को बड़ा दिखाने और निजी डेरिवेटिव ट्रेडिंग से जुड़े नुकसान को छिपाने के लिए किया गया। जांच में कंपनी के फंड के कथित दुरुपयोग और संबंधित खातों में धन हस्तांतरण की बात भी कही गई है।

    कंपनी ने आरोपों को बताया गलतफहमी
    सेबी की कार्रवाई के बाद कंपनी ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। राजेश एक्सपोर्ट्स का कहना है कि उसके द्वारा घोषित राजस्व आंकड़े सही हैं और नियामक को कंपनी की रिपोर्टिंग प्रणाली को लेकर गलतफहमी हुई है। कंपनी का दावा है कि उसकी सहायक इकाई वालकाम्बी के वित्तीय आंकड़ों की व्याख्या में अंतर के कारण यह विवाद पैदा हुआ है। कंपनी ने भरोसा दिलाया है कि वह जांच एजेंसियों को सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराएगी और पूरा सहयोग करेगी।

    निवेशकों की बढ़ी चिंता
    मामले के सार्वजनिक होने के बाद कंपनी के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई। इस घटनाक्रम ने कॉर्पोरेट गवर्नेंस, ऑडिट प्रक्रिया और बड़े संस्थागत निवेशकों की निगरानी क्षमता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा, लेकिन फिलहाल यह मामला भारतीय कॉर्पोरेट जगत में पारदर्शिता और वित्तीय जवाबदेही पर बड़ी बहस का कारण बन गया है।

  • 13 मई को शेयर बाजार में रह सकती है बड़ी हलचल, निफ्टी-सेंसेक्स पर रहेगा दबाव

    13 मई को शेयर बाजार में रह सकती है बड़ी हलचल, निफ्टी-सेंसेक्स पर रहेगा दबाव

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार में आज 13 मई को उतार-चढ़ाव भरा कारोबार देखने को मिल सकता है। मंगलवार को बाजार में आई तेज गिरावट के बाद निवेशकों की नजर आज के कारोबार पर टिकी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्लोबल मार्केट के कमजोर संकेत, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर आज भी निफ्टी और सेंसेक्स पर दिखाई दे सकता है।

    मंगलवार को बाजार में बिकवाली का दबाव साफ नजर आया था। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही कमजोर होकर बंद हुए थे। आज बाजार की शुरुआत भी दबाव के साथ हो सकती है। अमेरिका-ईरान तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है।

    निफ्टी के लिए 23,600 अहम स्तर

    मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार निफ्टी के लिए 23,600 का स्तर काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अगर निफ्टी इस स्तर से नीचे जाता है तो बाजार में और कमजोरी देखने को मिल सकती है। वहीं 24,000 का स्तर फिलहाल मजबूत रेजिस्टेंस बना हुआ है। बैंक निफ्टी अपेक्षाकृत मजबूत नजर आ सकता है और बैंकिंग शेयर बाजार को सहारा दे सकते हैं।

    इन सेक्टरों में दिख सकती है हलचल

    आज आईटी सेक्टर दबाव में रह सकता है। ग्लोबल मांग में कमजोरी का असर टेक कंपनियों पर दिखाई दे सकता है। दूसरी तरफ ऑयल एंड गैस सेक्टर में तेजी देखने को मिल सकती है, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का फायदा इस सेक्टर को मिल सकता है। फार्मा सेक्टर में भी कंपनियों के तिमाही नतीजों के चलते हलचल बनी रह सकती है।

    इन शेयरों पर निवेशकों की नजर

    आज के कारोबार में रिलायंस इंडस्ट्रीज, ओएनजीसी, भारती एयरटेल, डॉ. रेड्डीज और टाटा कंज्यूमर जैसे शेयरों पर निवेशकों की खास नजर रहने वाली है। इन शेयरों में खबरों और रिजल्ट के आधार पर अच्छी मूवमेंट देखने को मिल सकती है।

    निवेशकों को क्या करना चाहिए?

    विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल बाजार में सतर्कता के साथ निवेश करना जरूरी है। जल्दबाजी में खरीदारी से बचना चाहिए और ट्रेडिंग करते समय स्टॉप लॉस जरूर लगाना चाहिए। बाजार में किसी भी ग्लोबल खबर का असर तेजी से देखने को मिल सकता है, इसलिए सोच-समझकर निवेश करना ही बेहतर रणनीति होगी।

  • स्विगी का वित्त वर्ष 2025-26 में घाटा 33% बढ़ा, पहुंचा 4,154 करोड़ पर

    स्विगी का वित्त वर्ष 2025-26 में घाटा 33% बढ़ा, पहुंचा 4,154 करोड़ पर


    नई दिल्ली। मुंबई में ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म ने वित्त वर्ष 2025-26 के अपने ताजा नतीजे जारी किए हैं, जिनमें कंपनी के शुद्ध घाटे में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, इस वित्त वर्ष में स्विगी का कुल शुद्ध घाटा बढ़कर 4,154 करोड़ रुपये पहुंच गया है, जो पिछले वित्त वर्ष के 3,117 करोड़ रुपये की तुलना में लगभग 33 प्रतिशत अधिक है।
    हालांकि, चौथी तिमाही के आंकड़ों में कंपनी की स्थिति कुछ बेहतर नजर आई है। 31 मार्च 2026 को समाप्त तिमाही में स्विगी का घाटा घटकर 800 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 1,081 करोड़ रुपये था। इससे संकेत मिलता है कि कंपनी के खर्च नियंत्रण और ऑपरेशनल सुधारों का असर धीरे-धीरे दिखने लगा है।
    रेवेन्यू के मोर्चे पर कंपनी ने मजबूत वृद्धि दर्ज की है। वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में परिचालन से आय 45 प्रतिशत बढ़कर 6,383 करोड़ रुपये पहुंच गई। वहीं, कुल आय 46.74 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 6,649 करोड़ रुपये दर्ज की गई, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में 4,531 करोड़ रुपये थी।
    कंपनी के खर्चों में भी बढ़ोतरी देखी गई है। विज्ञापन और बिक्री प्रमोशन पर खर्च बढ़कर 1,577 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 36 प्रतिशत अधिक है। यह संकेत देता है कि कंपनी बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए आक्रामक रणनीति अपना रही है।
    स्विगी के प्रबंधन ने बताया कि उसका क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म इंस्टामार्ट लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है और यूनिट इकॉनॉमिक्स को सुधारने पर ध्यान दिया जा रहा है। कंपनी के अनुसार, इंस्टामार्ट का ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू (GOV) 68.8 प्रतिशत बढ़कर 7,881 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। वहीं, फूड डिलीवरी सेगमेंट में भी स्थिर ग्रोथ देखी गई है, जहां कुल ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू 9,005 करोड़ रुपये रही और ऑर्डर संख्या 18.3 मिलियन तक पहुंच गई।
    स्विगी के एमडी और सीईओ ने कहा है कि कंपनी का फोकस अब लाभप्रदता और ऑपरेशनल दक्षता बढ़ाने पर है। उनका लक्ष्य आने वाली तिमाहियों में बेहतर मार्जिन और ब्रेकईवन की दिशा में आगे बढ़ना है।
    कुल मिलाकर, हालांकि स्विगी का वार्षिक घाटा बढ़ा है, लेकिन रेवेन्यू ग्रोथ और क्विक कॉमर्स सेगमेंट में मजबूत प्रदर्शन यह संकेत देता है कि कंपनी विस्तार और स्थिरता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।
  • शेयर बाजार में जोरदार तेजी: सेंसेक्स 358 अंक उछला, निफ्टी ने पकड़ी रफ्तार

    शेयर बाजार में जोरदार तेजी: सेंसेक्स 358 अंक उछला, निफ्टी ने पकड़ी रफ्तार


    नई दिल्ली | हफ्ते के तीसरे कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में मजबूत तेजी दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में ही खरीदारी का दबाव देखने को मिला, जिससे पूरा बाजार सकारात्मक रुख में आ गया।

    BSE Sensex में आज करीब 358 अंकों की तेजी देखने को मिली और यह मजबूती के साथ कारोबार करता नजर आया। वहीं Nifty 50 भी 101 अंकों की बढ़त के साथ हरे निशान में रहा। इस तेजी ने निवेशकों के बीच भरोसा बढ़ाया और बाजार में उत्साह का माहौल बना रहा।

    बाजार में खरीदारी का दबदबा

    सुबह से ही बाजार में बैंकिंग, आईटी और एनर्जी सेक्टर में खरीदारी देखने को मिली, जिससे इंडेक्स को सपोर्ट मिला। कई लार्जकैप शेयरों में भी अच्छी तेजी दर्ज की गई, जिससे पूरे बाजार का मूड सकारात्मक रहा।

     वैश्विक संकेतों का मिला-जुला असर

    वैश्विक बाजारों में जारी उतार-चढ़ाव का असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला। मिडिल ईस्ट में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बढ़ती अनिश्चितता और तेल बाजार में हलचल ने निवेशकों को सतर्क रखा। इसके बावजूद घरेलू बाजार ने मजबूती दिखाई।

    अमेरिकी बाजारों में हाल की गिरावट जहां Nasdaq Composite और Dow Jones Industrial Average में कमजोरी देखने को मिली उसका भी हल्का असर एशियाई बाजारों पर पड़ा, लेकिन भारत में इसका प्रभाव सीमित रहा।

    एशियाई बाजारों का रुख

    एशिया के अन्य बाजारों में भी मिला-जुला रुख देखने को मिला। कुछ इंडेक्स में हल्की बढ़त रही, जबकि कुछ में गिरावट दर्ज की गई। जापान के बाजार अवकाश के कारण बंद रहे।

    निवेशकों के लिए संकेत

    विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा तेजी सकारात्मक संकेत है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। इसलिए निवेशकों को सतर्क रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।

  • राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की नितिन गडकरी से मुलाकात बस ट्रक बॉडी उद्योग की समस्याओं पर मंथन तेज

    राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की नितिन गडकरी से मुलाकात बस ट्रक बॉडी उद्योग की समस्याओं पर मंथन तेज

    नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपनी बहन और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से महत्वपूर्ण मुलाकात की। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब बस और ट्रक बॉडी निर्माण से जुड़ा उद्योग कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रहा है और उद्योग जगत अपनी समस्याओं को लेकर सरकार से समाधान की उम्मीद लगाए बैठा है।

    इस बैठक में राजस्थान के बस और ट्रक बॉडी बिल्डर एसोसिएशन के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। सूत्रों के अनुसार इस मुलाकात में प्रतिनिधियों ने अपने क्षेत्र से जुड़ी प्रमुख समस्याओं को विस्तार से सामने रखा। उद्योग से जुड़े लोगों ने खासतौर पर नए तकनीकी मानकों, बढ़ती उत्पादन लागत और मंत्रालय के अनुपालन नियमों को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर कीं। उनका कहना था कि लगातार बदलते नियम और मानकों के चलते छोटे और मध्यम स्तर के निर्माताओं के लिए व्यवसाय चलाना कठिन होता जा रहा है।

    राहुल गांधी ने इस दौरान उद्योग प्रतिनिधियों की बातों को गंभीरता से सुना और इन मुद्दों को केंद्रीय मंत्री के सामने रखा। उन्होंने नितिन गडकरी से आग्रह किया कि इन समस्याओं का समाधान जल्द से जल्द निकाला जाए ताकि इस उद्योग से जुड़े लाखों लोगों की आजीविका सुरक्षित रह सके। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि यदि नियमों और शुल्कों का बोझ इसी तरह बढ़ता रहा तो कई छोटे निर्माता बाजार से बाहर हो सकते हैं जिससे रोजगार पर भी असर पड़ेगा।

    सूत्रों के अनुसार गडकरी ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को ध्यान से सुना और उन्हें आश्वस्त किया कि सरकार इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार करेगी और समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने उद्योग की चुनौतियों को समझने और उनके व्यावहारिक समाधान खोजने की बात कही।

    बैठक से पहले भी इन प्रतिनिधियों ने राहुल गांधी से मुलाकात की थी और उन्हें अपनी समस्याओं से अवगत कराया था। उस दौरान भी उन्होंने यह चिंता जताई थी कि लाइसेंस प्रक्रिया में अधिक खर्च और समय लगने के कारण छोटे निर्माताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। इसके साथ ही नए मानकों को पूरा करने में आ रही कठिनाइयों ने भी उनकी चिंता बढ़ा दी है।

    प्रियंका गांधी ने बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में बताया कि प्रतिनिधियों ने लाइसेंस और अनुपालन से जुड़ी दिक्कतों को प्रमुख रूप से उठाया है। उन्होंने कहा कि नितिन गडकरी ने इन समस्याओं को समझते हुए जल्द समाधान निकालने का आश्वासन दिया है। इस बयान से उद्योग जगत में थोड़ी राहत की उम्मीद जगी है।

    यह बैठक ऐसे समय में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है जब देश में बुनियादी ढांचे और परिवहन क्षेत्र में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। सरकार जहां नियमों को सख्त और आधुनिक बनाने की दिशा में काम कर रही है वहीं उद्योग जगत चाहता है कि इन नियमों को व्यावहारिक बनाया जाए ताकि छोटे और मध्यम उद्यम भी टिक सकें।

    कुल मिलाकर यह मुलाकात सिर्फ एक राजनीतिक बैठक नहीं बल्कि उद्योग और सरकार के बीच संवाद को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इन मुद्दों पर क्या ठोस कदम उठाती है और बस ट्रक बॉडी निर्माण उद्योग को किस तरह राहत मिलती है

  • सावधान! इंश्योरेंस लेने की सोच रहे हैं तो अभी जान लें ये नियम, अगर नहीं जाना तो नॉमिनी को भी नहीं मिलेगा पैसा

    सावधान! इंश्योरेंस लेने की सोच रहे हैं तो अभी जान लें ये नियम, अगर नहीं जाना तो नॉमिनी को भी नहीं मिलेगा पैसा


    नई दिल्ली। आजकल शायद ही कोई ऐसा परिवार हो जिसमें सदस्यों के लिए लाइफ इंश्योरेंस ना किया जाता हो। बिताते समय के साथ यह संख्या और भी तेजी से बढ़ती जा रही है। लोग अपनी गाड़ियों के साथ-साथ खुद का भी लाइफ इंश्योरेंस करा रहे हैं। हालांकि इसे लेकर भी कुछ भ्रांतियां फैली हुई हैं जिसे आज हम आपके सामने रखेंगे और इससे जुड़ी तमाम जानकारियां बताएंगे। जानिए किन-किन कारण से क्लेम नहीं किया जा सकता।

    हत्या की वजह से हुई मौत
    अगर पॉलिसी धारक की मौत हो गई है और उसे घटना में नॉमिनी की संलिप्त पाई जाती है तो ऐसी स्थिति में नॉमिनी को क्लेम नहीं दिया जाएगा। केवल एक ही स्थिति में नॉमिनी को क्लेम मिल सकता है या तो वह कानूनन अपराध मुक्त हो जाए या कोर्ट द्वारा बरी हो जाए। हत्या के कारण हुई मौत के बाद पॉलिसी प्रोवाइडर कंपनी के द्वारा यह जांच की जाती है कि पॉलिसी धारा किसी आपराधिक गतिविधि में तो सन लिप्त नहीं था। अगर किसी अपराध में संलिप्त पाई जाती है तो भी क्लेम को मंजूरी नहीं दी जाएगी।

    धूम्रपान और नशे के कारण मृत्यु
    अगर पॉलिसी धारक किसी भी प्रकार का नशा करता है और उसके प्रभाव के कारण उसकी जान चली जाती है तो ऐसी स्थिति में भी पॉलिसी धारक को इंश्योरेंस का लाभ नहीं मिल सकेगा। जबकि प्राकृतिक कर्म से अगर मौत होती है तो पॉलिसी धारक को डेथ क्लेम के रूप में राशि का भुगतान किया जाता है।

    साहसिक गतिविधियों में संलिप्त होने के कारण हुई मौत
    इंश्योरेंस प्रोवाइडर कंपनी पॉलिसी धारक से उसकी शारीरिक बीमारियों एवं कार्यशाली के बारे में जानकारी लेती है जिसके आधार पर वह पॉलिसी धारक का प्रीमियम तय करती है। अगर कोई पॉलिसी धारक पर्वतारोहण करता है या स्काई डाइविंग जैसे साहसिक गतिविधियों में लगा हुआ होता है तो उनके साथ दुर्घटना घटने के सबसे अधिक चांस होते हैं। ऐसी स्थिति में उन पॉलिसी धारकों को क्लेम रीइंबर्समेंट से बाहर रखा जाता है।