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  • दिवाली से पहले राहुल गांधी की रैली पर व्यापारियों की चिंता, दिल्ली के 20 बड़े बाजारों में पोस्टर अभियान शुरू

    दिवाली से पहले राहुल गांधी की रैली पर व्यापारियों की चिंता, दिल्ली के 20 बड़े बाजारों में पोस्टर अभियान शुरू


    नई दिल्ली । दिवाली से पहले दिल्ली के व्यापारिक संगठनों ने रामलीला मैदान में प्रस्तावित राजनीतिक रैली को लेकर चिंता जताई है। व्यापारियों का कहना है कि त्योहार के सबसे महत्वपूर्ण कारोबारी समय में बड़ी संख्या में लोगों और वाहनों के पहुंचने से राजधानी के प्रमुख बाजारों में यातायात प्रभावित हो सकता है। इसका असर दुकानों तक ग्राहकों की पहुंच और खरीदारी पर पड़ने की आशंका है। इसी मुद्दे को लेकर व्यापारियों ने राहुल गांधी से अपील की है कि दिवाली के दौरान बाजारों का कारोबार प्रभावित होने की स्थिति पैदा न हो।

    चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने इस संबंध में रामलीला मैदान के आसपास स्थित प्रमुख बाजारों में पोस्टर अभियान शुरू करने की घोषणा की है। संगठन के चेयरमैन बृजेश गोयल के मुताबिक, पोस्टरों के माध्यम से राहुल गांधी तक व्यापारियों की चिंता पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। अभियान का संदेश है कि जिस तरह मोहब्बत और आपसी विश्वास की बात की जाती है, उसी तरह व्यापारियों की दुकानें भी ग्राहकों के साथ भरोसे और संबंधों के आधार पर चलती हैं। ऐसे में दिवाली जैसे बड़े त्योहार के दौरान उनके कारोबार को प्रभावित नहीं होना चाहिए।

    बृजेश गोयल ने कहा कि राहुल गांधी अपनी राजनीतिक गतिविधियों में मोहब्बत की दुकान का संदेश देते रहे हैं, लेकिन प्रस्तावित रैली के कारण दिल्ली के करीब 300 साल पुराने बाजारों का कारोबार प्रभावित होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि इन बाजारों में अलग-अलग तरह की दुकानें हैं, जिनसे हजारों परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है। चांदनी चौक की परांठे वाली दुकानें, खारी बावली के मसालों का कारोबार, सदर बाजार में चूड़ी-बिंदी की दुकानें और चांदनी चौक में लहंगों का व्यापार इसकी प्रमुख पहचान हैं।

    इसके अलावा दरियागंज में एसी का कारोबार, चावड़ी बाजार में सैनिटरी सामान की दुकानें और करोल बाग में कुल्फी की दुकानें भी स्थानीय व्यापारिक गतिविधियों का हिस्सा हैं। संगठन का कहना है कि इन दुकानों का कारोबार केवल बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि इनके माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार और परिवारों को नियमित आय मिलती है।

    CTI ने रामलीला मैदान से लगभग पांच किलोमीटर के दायरे में आने वाले 20 प्रमुख थोक और खुदरा बाजारों में पोस्टर अभियान चलाने की बात कही है। इनमें चांदनी चौक, सदर बाजार, खारी बावली, भागीरथ पैलेस, नया बाजार, चावड़ी बाजार, कश्मीरी गेट, दरियागंज, कनॉट प्लेस, करोल बाग, नबी करीम, पहाड़गंज, अजमेरी गेट, लाहौरी गेट, जनपथ, पालिका बाजार, बल्लीमारान और किनारी बाजार शामिल हैं।

    व्यापारियों की चिंता का एक प्रमुख कारण रैली में संभावित रूप से जुटने वाली बड़ी भीड़ और वाहनों की संख्या है। बृजेश गोयल के अनुसार, रैली में करीब 10 लाख लोगों और 20 हजार वाहनों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। यदि इतनी बड़ी संख्या में लोग और गाड़ियां आसपास के इलाकों में पहुंचती हैं, तो बाजारों में आवागमन प्रभावित हो सकता है। इससे ग्राहकों को दुकानों तक पहुंचने में परेशानी होने और व्यापारियों को दुकानें बंद करने की नौबत आने की आशंका है।

    उन्होंने यह भी कहा कि रामलीला मैदान में लगभग 100 बसों की पार्किंग तक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। ऐसे में इतनी बड़ी रैली के दौरान यातायात और पार्किंग प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। संगठन ने दावा किया है कि दिवाली से ठीक पहले होने वाले इस आयोजन के कारण दिल्ली का लगभग 10 हजार से 12 हजार करोड़ रुपये तक का त्योहारों का कारोबार प्रभावित हो सकता है।

    CTI के मुताबिक, इस संभावित व्यवधान का असर करीब 20 लाख व्यापारियों और उनसे जुड़े लगभग 75 लाख लोगों की आजीविका पर पड़ सकता है। संगठन ने धनतेरस और दिवाली से पहले बाजारों में सामान्य कारोबार बनाए रखने की मांग उठाई है। व्यापारियों का कहना है कि त्योहार के दौरान बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही और व्यापारिक गतिविधियां सुचारु रहना जरूरी है।

  • दिल्ली के 20 बड़े बाजारों पर महारैली का असर पड़ने की आशंका, 12 हजार करोड़ के कारोबार को लेकर व्यापारियों की चिंता

    दिल्ली के 20 बड़े बाजारों पर महारैली का असर पड़ने की आशंका, 12 हजार करोड़ के कारोबार को लेकर व्यापारियों की चिंता

    नई दिल्ली ।दिल्ली में 1 नवंबर को रामलीला मैदान में प्रस्तावित कांग्रेस की महारैली को लेकर व्यापारिक संगठनों ने चिंता जताई है। व्यापारियों का कहना है कि रैली के कारण मध्य दिल्ली और पुरानी दिल्ली के प्रमुख बाजारों में यातायात प्रभावित हो सकता है। इसका असर धनतेरस और दिवाली से पहले होने वाले कारोबार पर पड़ने की आशंका है। इस संबंध में चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर रैली की तारीख आगे बढ़ाने की मांग की है।

    कांग्रेस की इस महारैली में करीब 10 लाख लोगों के शामिल होने का अनुमान है। व्यापारिक संगठन का दावा है कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने के लिए 15 से 20 हजार वाहनों की जरूरत पड़ सकती है। संगठन के अनुसार, रामलीला मैदान में पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था नहीं है। यहां 200 बड़ी बसों को खड़ा करने की भी पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं है। ऐसे में बड़ी संख्या में बसों, कारों और अन्य वाहनों के मध्य दिल्ली में पहुंचने से यातायात व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

    CTI ने अपने पत्र में बताया है कि रामलीला मैदान के पांच किलोमीटर के दायरे में दिल्ली के करीब 20 प्रमुख थोक और खुदरा बाजार स्थित हैं। इनमें चांदनी चौक, सदर बाजार, कनॉट प्लेस, पालिका बाजार, जनपथ, भागीरथ पैलेस, खारी बावली, कश्मीरी गेट, नया बाजार, लाजपत राय मार्केट, चावड़ी बाजार, किनारी बाजार, दरीबा कलां, बल्लीमारान, फतेहपुरी, तिलक बाजार, करोल बाग, जामा मस्जिद, नबी करीम, गफ्फार मार्केट, अजमेरी गेट, पहाड़गंज और दरियागंज शामिल हैं।

    संगठन के मुताबिक, इन बाजारों में प्रतिदिन 10 से 12 हजार करोड़ रुपये का कारोबार होता है। यहां दिल्ली के नरेला, बवाना, ओखला, मायापुरी, मुंडका, उद्योग नगर और मंगोलपुरी समेत 56 औद्योगिक क्षेत्रों से करीब पांच हजार ट्रक और टेंपो माल लेकर पहुंचते हैं। इसके अलावा रोजाना लगभग तीन हजार ट्रक इन बाजारों से सामान लेकर गुरुग्राम, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, सोनीपत और पानीपत सहित एनसीआर के 25 शहरों तथा देश के विभिन्न राज्यों में जाते हैं।

    CTI का कहना है कि रैली का असर केवल 1 नवंबर तक सीमित नहीं रह सकता। संगठन के अनुसार, 31 अक्टूबर की दोपहर से ही सिंघु, टिकरी, गाजीपुर और बदरपुर बॉर्डर पर वाहनों की आवाजाही बढ़ सकती है। शाम से बहादुर शाह जफर मार्ग और जेएलएन मार्ग पर बैरिकेडिंग होने की आशंका भी जताई गई है। ट्रांसपोर्टरों की ओर से 31 अक्टूबर से ही मालवाहक गाड़ियां भेजने में असमर्थता जताए जाने की बात कही गई है।

    व्यापारियों ने अपनी आशंका के समर्थन में 10 अक्टूबर का उदाहरण भी दिया है। CTI के अनुसार, उस दिन जंतर-मंतर पर पांच से सात हजार लोगों की मौजूदगी के बावजूद मध्य दिल्ली में करीब आठ घंटे तक यातायात प्रभावित रहा था। ऐसे में 10 लाख लोगों की प्रस्तावित भीड़ के कारण स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

    संगठन ने सोनिया गांधी के सामने दो विकल्प रखे हैं। पहली मांग है कि महारैली को दिवाली के बाद 10 या 11 नवंबर के बाद आयोजित किया जाए। दूसरा विकल्प यह दिया गया है कि यदि रैली निर्धारित समय पर ही करनी है तो इसे रामलीला मैदान के बजाय बुराड़ी मैदान में कराया जाए, जहां संगठन के अनुसार 15 हजार वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था हो सकती है।

    CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि व्यापारी रैली का विरोध नहीं कर रहे, बल्कि त्योहारों के सबसे व्यस्त कारोबारी समय में अपने व्यापार को सुरक्षित रखना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि 6 नवंबर को धनतेरस और 8 नवंबर को दिवाली है। संगठन ने राहुल गांधी से भी रैली आगे बढ़ाने की अपील की थी, लेकिन उनकी ओर से इनकार किए जाने के बाद अब सोनिया गांधी को पत्र लिखकर अंतिम गुहार लगाई गई है।

  • छोटे कारोबारियों के लिए AI कैसे बन सकता है तरक्की का साधन, किराना दुकान से रेस्टोरेंट तक जानें इसके उपयोग

    छोटे कारोबारियों के लिए AI कैसे बन सकता है तरक्की का साधन, किराना दुकान से रेस्टोरेंट तक जानें इसके उपयोग


    नई दिल्ली ।आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। बड़ी कंपनियों और स्टार्टअप के साथ अब छोटे कारोबारियों के लिए भी यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। किराना दुकान, कपड़ों का कारोबार, रेस्टोरेंट, कोचिंग सेंटर और छोटी विनिर्माण इकाइयों में AI की मदद से रोजमर्रा के कई काम आसान बनाए जा सकते हैं। इससे कारोबारियों को समय बचाने, ग्राहकों की जरूरतों को समझने और अपने व्यवसाय के विस्तार पर ध्यान देने का अवसर मिल सकता है।

    छोटे कारोबारों में अक्सर सीमित कर्मचारी ही बिक्री, स्टॉक, हिसाब-किताब, प्रचार और ग्राहक सेवा जैसी जिम्मेदारियां संभालते हैं। इसके मुकाबले बड़ी कंपनियों के पास अलग-अलग कामों के लिए विशेष टीमें होती हैं। ऐसे में डिजिटल उपकरण और AI आधारित सुविधाएं छोटे कारोबारियों के लिए सहायक बन सकती हैं। हालांकि, तकनीक का चुनाव कारोबार की जरूरत और बजट को ध्यान में रखकर करना जरूरी है।

    किराना दुकानदार बिक्री और स्टॉक से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण करने के लिए डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे ज्यादा बिकने वाली वस्तुओं की पहचान करने और दोबारा सामान मंगाने की योजना बनाने में मदद मिल सकती है। कपड़ों के कारोबार में पिछले बिक्री रिकॉर्ड और मौसमी मांग को समझकर खरीदारी की योजना बेहतर बनाई जा सकती है। इस तरह उपलब्ध आंकड़ों का इस्तेमाल कारोबार से जुड़े फैसलों को व्यवस्थित करने में सहायक हो सकता है।

    रेस्टोरेंट संचालक AI की मदद से मेन्यू के विवरण, प्रचार सामग्री और सोशल मीडिया पोस्ट तैयार कर सकते हैं। ग्राहकों के सामान्य सवालों के जवाब देने में भी ऐसे उपकरण उपयोगी हो सकते हैं। कोचिंग सेंटरों में प्रवेश, फीस, कक्षाओं के समय और पाठ्यक्रम से संबंधित नियमित पूछताछ को व्यवस्थित किया जा सकता है। वहीं, छोटी विनिर्माण इकाइयां ऑर्डर, स्टॉक और डिलीवरी से जुड़ी जानकारी को संभालने के लिए डिजिटल समाधानों का उपयोग कर सकती हैं।

    छोटे कारोबारियों के लिए यह समझना जरूरी है कि हर काम के लिए महंगे AI सॉफ्टवेयर की आवश्यकता नहीं होती। यदि किसी दुकानदार को बिलिंग और स्टॉक का हिसाब रखने में परेशानी है, तो सामान्य बिलिंग या इन्वेंटरी सॉफ्टवेयर ही उसकी जरूरत पूरी कर सकता है। दूसरी ओर, जहां बड़ी संख्या में ग्राहकों की पूछताछ आती है, वहां AI आधारित चैटबॉट सामान्य सवालों के जवाब देने और जानकारी को संबंधित कर्मचारी तक पहुंचाने में मदद कर सकता है।

    सभी ऑटोमेशन उपकरण AI आधारित नहीं होते। कुछ सॉफ्टवेयर पहले से तय नियमों के अनुसार काम करते हैं, जबकि AI आधारित प्रणालियां भाषा समझने, सामग्री तैयार करने और आंकड़ों का विश्लेषण करने जैसे कार्य कर सकती हैं। इसलिए किसी समाधान को अपनाने से पहले उसकी उपयोगिता, लागत और मौजूदा कार्यप्रणाली के साथ अनुकूलता की जांच करनी चाहिए।

    AI का इस्तेमाल करते समय कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं। इससे तैयार की गई जानकारी या बिक्री संबंधी अनुमान हमेशा सही हों, यह जरूरी नहीं है। महत्वपूर्ण व्यावसायिक फैसले लेने से पहले परिणामों की जांच करनी चाहिए। ग्राहकों की निजी जानकारी, भुगतान विवरण और कारोबार के गोपनीय आंकड़ों की सुरक्षा पर भी ध्यान देना जरूरी है। किसी सेवा का इस्तेमाल करने से पहले उसकी गोपनीयता नीति और डेटा उपयोग की शर्तों को समझना चाहिए।

    छोटे कारोबारी शुरुआत किसी एक काम से कर सकते हैं। मसलन, प्रचार सामग्री तैयार करना, ग्राहकों के सामान्य सवालों के जवाब देना या बिक्री के आंकड़ों को समझना। इसके बाद यह देखा जा सकता है कि संबंधित उपकरण से कितना समय बचा, खर्च कितना हुआ और काम में कितना सुधार आया। यदि परिणाम उपयोगी हों, तो धीरे-धीरे इसका दायरा बढ़ाया जा सकता है।

    छोटे कारोबारों की असली ताकत अनुभव, स्थानीय बाजार की समझ और ग्राहकों के साथ भरोसेमंद संबंध हैं। AI इन खूबियों का विकल्प नहीं, बल्कि उन्हें मजबूत करने का साधन बन सकता है। कारोबारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वे तकनीक को केवल नया चलन समझकर नहीं, बल्कि अपनी वास्तविक जरूरतों के हिसाब से अपनाएं।

  • दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन से 2000 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित, बाजारों से होटल और पर्यटन उद्योग तक पड़ा असर

    दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन से 2000 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित, बाजारों से होटल और पर्यटन उद्योग तक पड़ा असर


    नई दिल्ली ।
    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 10 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन और सुरक्षा पाबंदियों का व्यापक असर व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ा। व्यापारिक संगठन चेंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) के अनुसार, एक दिन के दौरान दिल्ली में करीब 2000 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ। प्रदर्शन के दौरान प्रमुख बाजारों, मेट्रो स्टेशनों और सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था सख्त किए जाने से आम लोगों की आवाजाही भी प्रभावित हुई। इसका असर त्योहारी सीजन की शुरुआत में व्यापारियों के कारोबार पर पड़ा।

    सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल के मुताबिक, प्रदर्शन के कारण हुए आर्थिक नुकसान का असर केवल खुदरा कारोबार तक सीमित नहीं रहा। सेवा क्षेत्र, होटल और आतिथ्य उद्योग, परिवहन तथा पर्यटन सहित कई क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां प्रभावित हुईं। संगठन ने 10 अक्टूबर को हुए नुकसान का अनुमान करीब 2000 करोड़ रुपये लगाया है। इस दौरान पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों की आवाजाही कम रही। होटल, रेस्तरां, सिनेमा हॉल, ब्यूटी पार्लर और सैलून में भी पहले से की गई बुकिंग बड़े स्तर पर रद्द होने की जानकारी सामने आई।

    दिल्ली के कई प्रमुख बाजारों में कारोबार सामान्य रूप से नहीं चल सका। सुरक्षा प्रतिबंधों और यातायात जाम की आशंका के कारण सदर बाजार, चांदनी चौक, चावड़ी बाजार, कनॉट प्लेस, करोल बाग और लाजपत राय मार्केट जैसे व्यावसायिक केंद्रों में गतिविधियां प्रभावित रहीं। इन बाजारों में दिल्ली के साथ-साथ आसपास के शहरों से भी बड़ी संख्या में ग्राहक खरीदारी के लिए आते हैं। प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था के चलते इस बार उनकी आवाजाही पर असर पड़ा।

    सीटीआई के अनुसार, दिल्ली के बाहर से प्रतिदिन आने वाले करीब तीन से चार लाख खरीदार 10 अक्टूबर को राजधानी नहीं पहुंच सके। वहीं, सुरक्षा संबंधी आशंकाओं के कारण स्थानीय लोग भी घरों से निकलने से बचते रहे। मेट्रो स्टेशनों के बंद रहने से लोगों की आवाजाही और बाजारों तक पहुंचने में भी परेशानी हुई। ग्राहकों की संख्या घटने से खुदरा व्यापार के अलावा परिवहन और अन्य सेवाओं से जुड़े कारोबार पर भी दबाव पड़ा।

    व्यापारियों को होने वाले नुकसान को देखते हुए सीटीआई ने सीजेपी सहित सभी राजनीतिक दलों से दिवाली तक दिल्ली में धरना-प्रदर्शन नहीं करने की अपील की है। संगठन ने इस संबंध में राजनीतिक दलों को पत्र लिखकर मांग की है कि त्योहारों के दौरान राजधानी में विरोध कार्यक्रम आयोजित करने से बचा जाए। सीटीआई का कहना है कि नवरात्र और रामलीलाओं का आयोजन शुरू हो चुका है। यह अवधि दिल्ली के करीब 20 लाख व्यापारियों के लिए साल के सबसे महत्वपूर्ण कारोबारी समय में शामिल है।

    संगठन ने दिल्ली में आयोजित होने वाली करीब 650 रामलीलाओं का भी उल्लेख किया। इन आयोजनों से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता है और त्योहारों के दौरान विभिन्न कारोबारों को ग्राहकों की बढ़ी हुई आवाजाही से लाभ होता है। सीटीआई के अनुसार, यदि सड़कों और मेट्रो सेवाओं पर प्रतिबंधों का असर जारी रहता है, तो त्योहारों से जुड़े व्यापार पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसी वजह से संगठन ने राजनीतिक दलों को सुझाव दिया है कि यदि उन्हें प्रदर्शन करना है, तो दिवाली तक दिल्ली के बजाय किसी दूसरे शहर को आयोजन स्थल के रूप में चुना जाए। संगठन की अपील का उद्देश्य त्योहारों के दौरान व्यापारिक गतिविधियों और राजधानी की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करना है।

  • ईरान से कारोबार करने वाले विदेशी वित्तीय संस्थानों पर अमेरिका की सख्ती, बिना चेतावनी कार्रवाई की चेतावनी

    ईरान से कारोबार करने वाले विदेशी वित्तीय संस्थानों पर अमेरिका की सख्ती, बिना चेतावनी कार्रवाई की चेतावनी


    वाशिंगटन।
    ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाते हुए अमेरिका ने उन विदेशी वित्तीय संस्थानों को चेतावनी दी है, जो अब भी ईरान या उसके वित्तीय क्षेत्र के साथ कारोबार कर रहे हैं। अमेरिकी वित्त विभाग ने कहा है कि प्रतिबंधित ईरानी वित्तीय संस्थानों के साथ लेन-देन जारी रखने वाले विदेशी संस्थानों पर बिना किसी पूर्व सूचना के कार्रवाई की जा सकती है।

    अमेरिकी वित्त विभाग के मुताबिक, विदेशी वित्तीय संस्थानों को ईरान से जुड़े ऐसे कारोबारी संबंधों और गतिविधियों को तत्काल समाप्त करने की दिशा में कदम उठाने चाहिए। खास तौर पर प्रतिबंधित ईरानी संस्थाओं से जुड़े लेन-देन अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आने पर संबंधित विदेशी संस्थानों के लिए जोखिम बढ़ सकता है।

    अमेरिकी वित्तीय व्यवस्था से कटने का खतरा

    अमेरिकी ट्रेजरी ने हालिया कार्रवाई में ईरान से जुड़े वित्तीय नेटवर्क और प्रतिबंधों से बचने के लिए इस्तेमाल होने वाले चैनलों को निशाना बनाया है। विभाग ने कहा है कि ईरान की ओर से प्रतिबंधों से बचने या अवैध वित्तीय गतिविधियों को सुविधा देने वाले संस्थानों पर कार्रवाई की जा सकती है।

    अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया है कि कुछ परिस्थितियों में विदेशी वित्तीय संस्थानों पर द्वितीयक प्रतिबंध (Secondary Sanctions) लगाए जा सकते हैं। इसके तहत अमेरिकी अधिकारियों के पास ऐसे विदेशी संस्थानों के अमेरिका में कॉरेस्पॉन्डेंट या पेयेबल-थ्रू खातों पर रोक लगाने या कड़ी शर्तें लगाने का अधिकार है, यदि वे प्रतिबंधित व्यक्तियों या संस्थाओं की ओर से महत्वपूर्ण लेन-देन जानबूझकर करते या करवाते हैं।

    ईरान की आर्थिक गतिविधियों पर बढ़ रहा दबाव

    अमेरिकी वित्त विभाग ने हाल के दिनों में ईरान के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज की है। 1 अक्टूबर को अमेरिका ने ईरान से जुड़े एक शैडो बैंकिंग नेटवर्क को निशाना बनाते हुए उसके खिलाफ प्रतिबंध लगाए और वित्तीय संस्थानों को उससे संबंधित संदिग्ध गतिविधियों की पहचान तथा रिपोर्टिंग के लिए अलर्ट जारी किया। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इस नेटवर्क के जरिए ईरान और अन्य प्रतिबंधित पक्षों के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था तक पहुंच बनाने की कोशिश की जा रही थी।

    अमेरिकी ट्रेजरी की हालिया कार्रवाई से संकेत मिलता है कि वाशिंगटन सिर्फ ईरानी संस्थाओं को ही नहीं, बल्कि ईरान के साथ कारोबार को वित्तीय रूप से संभव बनाने वाले विदेशी नेटवर्क और संस्थानों पर भी दबाव बढ़ा रहा है।

  • मध्य प्रदेश में कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम घटे, अब भोपाल में ₹2743 और इंदौर में ₹2846 में मिलेगा सिलेंडर

    मध्य प्रदेश में कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम घटे, अब भोपाल में ₹2743 और इंदौर में ₹2846 में मिलेगा सिलेंडर


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग कारोबार से जुड़े लोगों के लिए राहत भरी खबर आई है। एक अगस्त से 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के नए दाम लागू हो गए हैं। प्रदेश में कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में 190 से 194 रुपए तक की कमी की गई है। कीमतों में आई इस गिरावट से व्यापारियों की संचालन लागत कम होने की उम्मीद है और आने वाले समय में ग्राहकों को भी खाने-पीने की सेवाओं में राहत मिल सकती है।

    नई दरों के अनुसार राजधानी भोपाल में अब 19 किलोग्राम वाला कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर 2743 रुपए में उपलब्ध होगा। वहीं इंदौर में इसकी कीमत घटकर 2846 रुपए रह गई है। प्रदेश के अलग-अलग शहरों में भी नई दरें लागू कर दी गई हैं। सबसे महंगा कमर्शियल सिलेंडर रीवा में 2991.50 रुपए का मिलेगा। इसके अलावा सिंगरौली और नरसिंहपुर में इसकी कीमत 2989.50 रुपए तथा सतना में 2989 रुपए निर्धारित की गई है। दूसरी ओर शाजापुर प्रदेश का सबसे सस्ता शहर बन गया है, जहां यह सिलेंडर 2749.50 रुपए में मिलेगा।

    होटल और रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम लगातार बढ़ने से उनकी लागत काफी बढ़ गई थी। गैस महंगी होने के कारण कई प्रतिष्ठानों को अपने मेन्यू की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करनी पड़ी थी। अब गैस सस्ती होने से कारोबारियों को राहत मिलेगी और यदि कीमतें स्थिर रहीं तो आने वाले समय में ग्राहकों को भी इसका फायदा मिल सकता है।

    कैटरिंग व्यवसाय पर भी गैस की बढ़ती कीमतों का सीधा असर पड़ा था। कारोबारियों के अनुसार लगभग 500 लोगों के भोजन वाले एक आयोजन की लागत में 45 से 50 हजार रुपए तक की अतिरिक्त बढ़ोतरी हो गई थी। इसके चलते कई कैटरर्स ने प्रति प्लेट चार्ज बढ़ा दिए थे। अब कमर्शियल एलपीजी सस्ती होने के बाद आयोजन की लागत में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

    व्यापारियों का कहना है कि कुछ महीने पहले ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों पर दबाव बढ़ा था। इसका असर घरेलू बाजार में भी दिखाई दिया और कई शहरों में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत 3300 रुपए से अधिक तक पहुंच गई थी। जबकि इससे पहले यही सिलेंडर लगभग 1800 से 2000 रुपए के बीच उपलब्ध था। अब अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में कुछ राहत मिलने के बाद कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है।

    इस बीच घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए गैस कंपनियों ने महत्वपूर्ण सूचना भी जारी की है। कंपनियां उपभोक्ताओं को एसएमएस भेजकर आधार आधारित बायोमेट्रिक ई-केवाईसी कराने की अपील कर रही हैं। निर्धारित समय सीमा तक ई-केवाईसी पूरी नहीं कराने वाले उपभोक्ताओं को घरेलू दर पर एलपीजी सिलेंडर मिलने में दिक्कत आ सकती है। इसलिए गैस एजेंसियां उपभोक्ताओं से समय रहते यह प्रक्रिया पूरी करने की अपील कर रही हैं।

    कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में आई यह कमी फिलहाल होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग उद्योग के लिए राहत का संकेत मानी जा रही है। यदि आने वाले महीनों में कीमतें इसी स्तर पर बनी रहती हैं तो इसका लाभ कारोबारियों के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं तक भी पहुंच सकता है।

  • दोस्ती निभाने के साथ करें कमाई, दो दोस्तों के लिए ये बिजनेस आइडिया बन सकते हैं शानदार शुरुआत

    दोस्ती निभाने के साथ करें कमाई, दो दोस्तों के लिए ये बिजनेस आइडिया बन सकते हैं शानदार शुरुआत

    नई दिल्ली। इंटरनेशनल फ्रेंडशिप डे 30 जुलाई को मनाया जाएगा। यह दिन सिर्फ दोस्ती का जश्न मनाने का अवसर ही नहीं, बल्कि अपने सबसे भरोसेमंद साथी के साथ नए सपनों को साकार करने की शुरुआत भी हो सकता है। आज के समय में कई ऐसे बिजनेस मॉडल मौजूद हैं जिन्हें दो दोस्त मिलकर कम लागत में शुरू कर सकते हैं। सही योजना, स्पष्ट जिम्मेदारियां और आपसी भरोसे के साथ शुरू किया गया छोटा कारोबार भी समय के साथ अच्छी आय का स्रोत बन सकता है।

    यदि दोनों दोस्तों के पास अलग-अलग कौशल हैं तो फ्रीलांसिंग एजेंसी शुरू करना एक बेहतर विकल्प हो सकता है। उदाहरण के तौर पर, एक व्यक्ति कंटेंट राइटिंग, वीडियो एडिटिंग या ग्राफिक डिजाइनिंग का काम संभाल सकता है, जबकि दूसरा क्लाइंट्स से बातचीत, मार्केटिंग और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट की जिम्मेदारी निभा सकता है। डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग के कारण इस क्षेत्र में अच्छी कमाई की संभावना बनी रहती है।

    अगर किसी दोस्त के पास कैमरा, लैपटॉप, ड्रोन, बाइक या अन्य महंगे उपकरण हैं जिनका नियमित उपयोग नहीं हो रहा, तो उन्हें किराये पर देकर भी अतिरिक्त आय अर्जित की जा सकती है। इस तरह बिना अधिक निवेश किए उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होता है और दोनों साझेदार नियमित कमाई कर सकते हैं।

    खाने-पीने का व्यवसाय भी दो दोस्तों के लिए आकर्षक विकल्प बन सकता है। कम निवेश के साथ क्लाउड किचन शुरू कर ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म के माध्यम से ग्राहकों तक पहुंच बनाई जा सकती है। स्वादिष्ट भोजन, अच्छी गुणवत्ता और समय पर डिलीवरी के जरिए इस व्यवसाय को तेजी से बढ़ाया जा सकता है। हालांकि, इस कारोबार को शुरू करने से पहले आवश्यक खाद्य लाइसेंस और अन्य नियमों का पालन करना जरूरी होता है।

    डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कंटेंट क्रिएशन भी आज युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। दो दोस्त मिलकर यूट्यूब चैनल, इंस्टाग्राम पेज या पॉडकास्ट शुरू कर सकते हैं। एक व्यक्ति कैमरे के सामने प्रस्तुति दे सकता है, जबकि दूसरा शूटिंग, एडिटिंग और सोशल मीडिया मैनेजमेंट संभाल सकता है। लगातार गुणवत्तापूर्ण कंटेंट तैयार करने पर विज्ञापन, ब्रांड सहयोग और स्पॉन्सरशिप के जरिए अच्छी कमाई की जा सकती है।

    यदि कम पूंजी में ऑफलाइन कारोबार शुरू करना चाहते हैं, तो चाय या स्नैक्स स्टॉल भी अच्छा विकल्प हो सकता है। भीड़भाड़ वाले स्थान, कार्यालय, कॉलेज या बाजार के आसपास शुरू किया गया छोटा फूड बिजनेस पूरे साल ग्राहकों को आकर्षित कर सकता है। अच्छी गुणवत्ता, साफ-सफाई और बेहतर सेवा इस कारोबार की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

    किसी भी साझेदारी वाले व्यवसाय में सफलता के लिए केवल अच्छा आइडिया ही पर्याप्त नहीं होता। शुरुआत से ही जिम्मेदारियों का स्पष्ट बंटवारा, निवेश और मुनाफे का पारदर्शी हिसाब तथा आपसी विश्वास बनाए रखना भी जरूरी है। सही योजना और निरंतर मेहनत के साथ दो दोस्तों की साझेदारी न केवल मजबूत दोस्ती को नई पहचान दे सकती है, बल्कि आर्थिक रूप से भी बेहतर भविष्य की राह खोल सकती है।

  • बुधवार को भगवान श्री गणेश और बुध ग्रह के मंत्रों का जाप जीवन के कष्टों से दिलाएगा मुक्ति..

    बुधवार को भगवान श्री गणेश और बुध ग्रह के मंत्रों का जाप जीवन के कष्टों से दिलाएगा मुक्ति..

    नई दिल्ली । सनातन धर्म में सप्ताह का प्रत्येक दिन किसी न किसी देवी-देवता और नवग्रहों की साधना के लिए विशेष रूप से निर्धारित किया गया है। इसी क्रम में बुधवार का दिन प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश की आराधना और सौरमंडल के महत्वपूर्ण ग्रह बुध देव की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन गणेश जी के साथ बुध ग्रह के मंत्रों का जाप करने से जीवन की अनेक कठिनाइयों का निवारण होता है।

    ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह को बुद्धि, वाणी, तर्क शक्ति और व्यापार का कारक माना गया है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में बुध ग्रह की स्थिति कमजोर होती है, तो उसे व्यापार में हानि, संवाद क्षमता में कमी और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में बुधवार के दिन विशेष मंत्र साधना के माध्यम से बुध ग्रह को मजबूत किया जा सकता है, जिससे व्यापारिक सफलता और निर्णय क्षमता में सुधार होता है।

    शास्त्रों में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा गया है, जिनकी कृपा से किसी भी कार्य में आने वाली रुकावटें स्वतः समाप्त हो जाती हैं। बुधवार की सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर गणेश जी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करनी चाहिए। पूजा के दौरान गणेश जी को दूर्वा और मोदक अर्पित करने के साथ उनके प्रभावशाली मंत्रों का जाप करने से साधक को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है और कार्यक्षेत्र में निरंतर प्रगति के मार्ग प्रशस्त होते हैं।

    भगवान गणेश की आराधना के पश्चात बुध ग्रह के वैदिक, पौराणिक और तांत्रिक मंत्रों का जाप करना विशेष फलदायी माना गया है। नियमित और श्रद्धापूर्वक किए जाने वाले इस जाप से व्यक्ति की वाणी में मधुरता और आकर्षण का समावेश होता है। इसके साथ ही बौद्धिक क्षमताओं का विकास होता है, जिससे प्रतियोगी परीक्षाओं और व्यावसायिक जीवन में सकारात्मक परिणाम दिखाई देने लगते हैं।

    धार्मिक विद्वानों का मानना है कि इस दिन गणेश गायत्री मंत्र और बुध ग्रह के नाम मंत्रों का मानसिक या स्पष्ट उच्चारण करते हुए स्मरण करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है। यह साधना न केवल आर्थिक स्थिरता लाती है, बल्कि साधक को हर प्रकार के मानसिक और व्यावहारिक संकटों से बचाकर जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग सुलभ करती है।

  • ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर केंद्र का बड़ा फोकस, सभी मंत्रालयों को सुधार लागू करने के निर्देश

    ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर केंद्र का बड़ा फोकस, सभी मंत्रालयों को सुधार लागू करने के निर्देश

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने आम नागरिकों के लिए ‘ईज ऑफ लिविंग’ और उद्योगों के लिए ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को और बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों को सुधारों की पहचान कर उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाना, सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करना और उद्योगों के लिए अधिक अनुकूल कारोबारी वातावरण तैयार करना है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए सरकार ने सुधारों की निगरानी और प्रगति के मूल्यांकन के लिए पीएमरेफ पोर्टल पर नया ‘रिफॉर्म’ मॉड्यूल भी शुरू किया है।

    सरकार के अनुसार नया मॉड्यूल मंगलवार से कार्य करना शुरू कर चुका है और यह सभी मंत्रालयों एवं विभागों के लिए एक केंद्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करेगा। इस पोर्टल पर विभिन्न मंत्रालय अपने-अपने क्षेत्रों में किए जा रहे नीतिगत सुधारों, प्रशासनिक उपायों और सुशासन से जुड़ी पहलों का विस्तृत विवरण अपलोड करेंगे। इससे सभी सुधारात्मक प्रयासों का एकीकृत रिकॉर्ड तैयार होगा और उनकी प्रगति की नियमित समीक्षा करना आसान होगा।

    केंद्र सरकार ने निर्देश दिया है कि प्रत्येक मंत्रालय ऐसे सुधारों की पहचान करे जो आम नागरिकों के लिए सरकारी सेवाओं तक पहुंच को सरल बनाएं, प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाएं तथा उद्योगों के लिए कारोबार करना अधिक सुगम बनाएं। ये सुधार उच्च स्तरीय समिति (एचएलसी) की सिफारिशों, अनौपचारिक मंत्रिसमूह (आईजीओएम) के सुझावों अथवा संबंधित मंत्रालयों द्वारा स्वयं तैयार किए गए प्रस्तावों पर आधारित हो सकते हैं। सरकार का मानना है कि विभागीय स्तर पर नवाचार और सुधारों को बढ़ावा देने से प्रशासनिक दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

    नई व्यवस्था के तहत सभी मंत्रालयों और विभागों के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वे अपनी सभी सुधार संबंधी पहलों का विवरण पीएमरेफ पोर्टल पर अपलोड करें और समय-समय पर उनकी प्रगति को अपडेट करते रहें। जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक मंत्रालय को हर सप्ताह शुक्रवार दोपहर 12 बजे तक अपनी साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट पोर्टल पर दर्ज करनी होगी। इससे विभिन्न योजनाओं और सुधारों की वास्तविक स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सकेगी तथा आवश्यक होने पर समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए जा सकेंगे।

    सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य सुधार प्रक्रिया को एक व्यवस्थित और संस्थागत ढांचे के तहत संचालित करना है, ताकि विभिन्न मंत्रालयों में लागू किए जा रहे नीतिगत और प्रशासनिक सुधारों की प्रभावी निगरानी और मूल्यांकन किया जा सके। इससे मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा, निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी और सुधार संबंधी पहलों के क्रियान्वयन में भी गति आएगी। साथ ही विभिन्न विभागों के सफल अनुभवों को साझा कर अन्य क्षेत्रों में भी लागू करने का अवसर मिलेगा।

    पीएमरेफ (प्रधानमंत्री रिफरेंस/रिफॉर्म्स) पोर्टल प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय मंत्रालयों और सरकारी विभागों द्वारा उपयोग किया जाने वाला एक सुरक्षित डिजिटल गवर्नेंस प्लेटफॉर्म है। यह नीतिगत सुधारों, प्रशासनिक पहलों और प्रमुख आधारभूत संरचना परियोजनाओं की निगरानी के साथ-साथ अन्य सरकारी निगरानी प्रणालियों से भी जुड़ा हुआ है। इसके माध्यम से प्रधानमंत्री कार्यालय और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा जारी निर्देशों, निर्णयों और विभिन्न संदर्भों की प्रगति पर भी नजर रखी जाती है। सरकार को उम्मीद है कि नया ‘रिफॉर्म’ मॉड्यूल प्रशासनिक सुधारों को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

  • भीषण गर्मी ने छीनी चित्रकूट की रौनक, श्रद्धालुओं की कमी से ठप पड़ा स्थानीय कारोबार..

    भीषण गर्मी ने छीनी चित्रकूट की रौनक, श्रद्धालुओं की कमी से ठप पड़ा स्थानीय कारोबार..

    नई दिल्ली।धर्म नगरी चित्रकूट इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है, जहां तापमान 44 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचने के कारण जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। गर्म हवाओं और तेज धूप के चलते दिन चढ़ते ही सड़कों, घाटों और मंदिर परिसरों में सन्नाटा फैल जाता है। आमतौर पर श्रद्धालुओं की भीड़ से गुलजार रहने वाला यह धार्मिक क्षेत्र अब सुनसान नजर आने लगा है, जिससे स्थानीय माहौल और अर्थव्यवस्था दोनों पर गहरा असर पड़ा है।

    रामघाट पर स्थिति सबसे अधिक प्रभावित दिखाई दे रही है, जहां सामान्य दिनों में सुबह से देर शाम तक श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भारी भीड़ रहती है। लेकिन मौजूदा समय में सुबह 8 से 9 बजे के बाद ही यहां गतिविधियां लगभग समाप्त हो जाती हैं। भीषण गर्मी के कारण लोग लंबे समय तक बाहर रुकने से बच रहे हैं, जिससे घाटों और आसपास के मंदिरों में पहले जैसी रौनक नहीं रही।

    इस बदलाव का सीधा असर स्थानीय व्यापार पर पड़ रहा है। घाट किनारे छोटी-बड़ी दुकानों पर निर्भर दुकानदारों का कहना है कि ग्राहकों की कमी के कारण उनकी बिक्री लगभग ठप हो गई है। कई दुकानदार सुबह दुकान खोलने के बाद दिन भर में बहुत कम बिक्री होने पर मजबूरन जल्दी दुकान बंद कर देते हैं। हालात ऐसे हैं कि कई बार दिन में बोहनी तक नहीं हो पा रही, जिससे रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है।

    धार्मिक गतिविधियों पर भी गर्मी का असर साफ दिख रहा है। जहां पहले मंदिरों में सुबह से शाम तक श्रद्धालुओं की भीड़ रहती थी, अब वहां शांति और खालीपन नजर आता है। भजन-पूजन और धार्मिक वातावरण की रौनक कम हो गई है, जिससे स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ रही है। पर्यटन पर आधारित अर्थव्यवस्था होने के कारण इस कमी का असर सीधे आजीविका पर पड़ रहा है।

    स्थानीय व्यापारियों और लोगों का मानना है कि अगर घाटों पर छाया, ठंडे पेयजल और विश्राम की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, तो कुछ हद तक श्रद्धालुओं को गर्मी से राहत मिल सकती है और उनकी आवाजाही बनी रह सकती है। फिलहाल स्थिति यह है कि तेज गर्मी के कारण चित्रकूट की धार्मिक और सांस्कृतिक रौनक अस्थायी रूप से थमती नजर आ रही है, और सभी को मौसम में बदलाव का इंतजार है।