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  • मध्य प्रदेश में कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम घटे, अब भोपाल में ₹2743 और इंदौर में ₹2846 में मिलेगा सिलेंडर

    मध्य प्रदेश में कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम घटे, अब भोपाल में ₹2743 और इंदौर में ₹2846 में मिलेगा सिलेंडर


    मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश में होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग कारोबार से जुड़े लोगों के लिए राहत भरी खबर आई है। एक अगस्त से 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के नए दाम लागू हो गए हैं। प्रदेश में कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में 190 से 194 रुपए तक की कमी की गई है। कीमतों में आई इस गिरावट से व्यापारियों की संचालन लागत कम होने की उम्मीद है और आने वाले समय में ग्राहकों को भी खाने-पीने की सेवाओं में राहत मिल सकती है।

    नई दरों के अनुसार राजधानी भोपाल में अब 19 किलोग्राम वाला कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर 2743 रुपए में उपलब्ध होगा। वहीं इंदौर में इसकी कीमत घटकर 2846 रुपए रह गई है। प्रदेश के अलग-अलग शहरों में भी नई दरें लागू कर दी गई हैं। सबसे महंगा कमर्शियल सिलेंडर रीवा में 2991.50 रुपए का मिलेगा। इसके अलावा सिंगरौली और नरसिंहपुर में इसकी कीमत 2989.50 रुपए तथा सतना में 2989 रुपए निर्धारित की गई है। दूसरी ओर शाजापुर प्रदेश का सबसे सस्ता शहर बन गया है, जहां यह सिलेंडर 2749.50 रुपए में मिलेगा।

    होटल और रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम लगातार बढ़ने से उनकी लागत काफी बढ़ गई थी। गैस महंगी होने के कारण कई प्रतिष्ठानों को अपने मेन्यू की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करनी पड़ी थी। अब गैस सस्ती होने से कारोबारियों को राहत मिलेगी और यदि कीमतें स्थिर रहीं तो आने वाले समय में ग्राहकों को भी इसका फायदा मिल सकता है।

    कैटरिंग व्यवसाय पर भी गैस की बढ़ती कीमतों का सीधा असर पड़ा था। कारोबारियों के अनुसार लगभग 500 लोगों के भोजन वाले एक आयोजन की लागत में 45 से 50 हजार रुपए तक की अतिरिक्त बढ़ोतरी हो गई थी। इसके चलते कई कैटरर्स ने प्रति प्लेट चार्ज बढ़ा दिए थे। अब कमर्शियल एलपीजी सस्ती होने के बाद आयोजन की लागत में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

    व्यापारियों का कहना है कि कुछ महीने पहले ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों पर दबाव बढ़ा था। इसका असर घरेलू बाजार में भी दिखाई दिया और कई शहरों में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत 3300 रुपए से अधिक तक पहुंच गई थी। जबकि इससे पहले यही सिलेंडर लगभग 1800 से 2000 रुपए के बीच उपलब्ध था। अब अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में कुछ राहत मिलने के बाद कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है।

    इस बीच घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए गैस कंपनियों ने महत्वपूर्ण सूचना भी जारी की है। कंपनियां उपभोक्ताओं को एसएमएस भेजकर आधार आधारित बायोमेट्रिक ई-केवाईसी कराने की अपील कर रही हैं। निर्धारित समय सीमा तक ई-केवाईसी पूरी नहीं कराने वाले उपभोक्ताओं को घरेलू दर पर एलपीजी सिलेंडर मिलने में दिक्कत आ सकती है। इसलिए गैस एजेंसियां उपभोक्ताओं से समय रहते यह प्रक्रिया पूरी करने की अपील कर रही हैं।

    कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में आई यह कमी फिलहाल होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग उद्योग के लिए राहत का संकेत मानी जा रही है। यदि आने वाले महीनों में कीमतें इसी स्तर पर बनी रहती हैं तो इसका लाभ कारोबारियों के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं तक भी पहुंच सकता है।

  • दोस्ती निभाने के साथ करें कमाई, दो दोस्तों के लिए ये बिजनेस आइडिया बन सकते हैं शानदार शुरुआत

    दोस्ती निभाने के साथ करें कमाई, दो दोस्तों के लिए ये बिजनेस आइडिया बन सकते हैं शानदार शुरुआत

    नई दिल्ली। इंटरनेशनल फ्रेंडशिप डे 30 जुलाई को मनाया जाएगा। यह दिन सिर्फ दोस्ती का जश्न मनाने का अवसर ही नहीं, बल्कि अपने सबसे भरोसेमंद साथी के साथ नए सपनों को साकार करने की शुरुआत भी हो सकता है। आज के समय में कई ऐसे बिजनेस मॉडल मौजूद हैं जिन्हें दो दोस्त मिलकर कम लागत में शुरू कर सकते हैं। सही योजना, स्पष्ट जिम्मेदारियां और आपसी भरोसे के साथ शुरू किया गया छोटा कारोबार भी समय के साथ अच्छी आय का स्रोत बन सकता है।

    यदि दोनों दोस्तों के पास अलग-अलग कौशल हैं तो फ्रीलांसिंग एजेंसी शुरू करना एक बेहतर विकल्प हो सकता है। उदाहरण के तौर पर, एक व्यक्ति कंटेंट राइटिंग, वीडियो एडिटिंग या ग्राफिक डिजाइनिंग का काम संभाल सकता है, जबकि दूसरा क्लाइंट्स से बातचीत, मार्केटिंग और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट की जिम्मेदारी निभा सकता है। डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग के कारण इस क्षेत्र में अच्छी कमाई की संभावना बनी रहती है।

    अगर किसी दोस्त के पास कैमरा, लैपटॉप, ड्रोन, बाइक या अन्य महंगे उपकरण हैं जिनका नियमित उपयोग नहीं हो रहा, तो उन्हें किराये पर देकर भी अतिरिक्त आय अर्जित की जा सकती है। इस तरह बिना अधिक निवेश किए उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होता है और दोनों साझेदार नियमित कमाई कर सकते हैं।

    खाने-पीने का व्यवसाय भी दो दोस्तों के लिए आकर्षक विकल्प बन सकता है। कम निवेश के साथ क्लाउड किचन शुरू कर ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म के माध्यम से ग्राहकों तक पहुंच बनाई जा सकती है। स्वादिष्ट भोजन, अच्छी गुणवत्ता और समय पर डिलीवरी के जरिए इस व्यवसाय को तेजी से बढ़ाया जा सकता है। हालांकि, इस कारोबार को शुरू करने से पहले आवश्यक खाद्य लाइसेंस और अन्य नियमों का पालन करना जरूरी होता है।

    डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कंटेंट क्रिएशन भी आज युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। दो दोस्त मिलकर यूट्यूब चैनल, इंस्टाग्राम पेज या पॉडकास्ट शुरू कर सकते हैं। एक व्यक्ति कैमरे के सामने प्रस्तुति दे सकता है, जबकि दूसरा शूटिंग, एडिटिंग और सोशल मीडिया मैनेजमेंट संभाल सकता है। लगातार गुणवत्तापूर्ण कंटेंट तैयार करने पर विज्ञापन, ब्रांड सहयोग और स्पॉन्सरशिप के जरिए अच्छी कमाई की जा सकती है।

    यदि कम पूंजी में ऑफलाइन कारोबार शुरू करना चाहते हैं, तो चाय या स्नैक्स स्टॉल भी अच्छा विकल्प हो सकता है। भीड़भाड़ वाले स्थान, कार्यालय, कॉलेज या बाजार के आसपास शुरू किया गया छोटा फूड बिजनेस पूरे साल ग्राहकों को आकर्षित कर सकता है। अच्छी गुणवत्ता, साफ-सफाई और बेहतर सेवा इस कारोबार की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

    किसी भी साझेदारी वाले व्यवसाय में सफलता के लिए केवल अच्छा आइडिया ही पर्याप्त नहीं होता। शुरुआत से ही जिम्मेदारियों का स्पष्ट बंटवारा, निवेश और मुनाफे का पारदर्शी हिसाब तथा आपसी विश्वास बनाए रखना भी जरूरी है। सही योजना और निरंतर मेहनत के साथ दो दोस्तों की साझेदारी न केवल मजबूत दोस्ती को नई पहचान दे सकती है, बल्कि आर्थिक रूप से भी बेहतर भविष्य की राह खोल सकती है।

  • बुधवार को भगवान श्री गणेश और बुध ग्रह के मंत्रों का जाप जीवन के कष्टों से दिलाएगा मुक्ति..

    बुधवार को भगवान श्री गणेश और बुध ग्रह के मंत्रों का जाप जीवन के कष्टों से दिलाएगा मुक्ति..

    नई दिल्ली । सनातन धर्म में सप्ताह का प्रत्येक दिन किसी न किसी देवी-देवता और नवग्रहों की साधना के लिए विशेष रूप से निर्धारित किया गया है। इसी क्रम में बुधवार का दिन प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश की आराधना और सौरमंडल के महत्वपूर्ण ग्रह बुध देव की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन गणेश जी के साथ बुध ग्रह के मंत्रों का जाप करने से जीवन की अनेक कठिनाइयों का निवारण होता है।

    ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह को बुद्धि, वाणी, तर्क शक्ति और व्यापार का कारक माना गया है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में बुध ग्रह की स्थिति कमजोर होती है, तो उसे व्यापार में हानि, संवाद क्षमता में कमी और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में बुधवार के दिन विशेष मंत्र साधना के माध्यम से बुध ग्रह को मजबूत किया जा सकता है, जिससे व्यापारिक सफलता और निर्णय क्षमता में सुधार होता है।

    शास्त्रों में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा गया है, जिनकी कृपा से किसी भी कार्य में आने वाली रुकावटें स्वतः समाप्त हो जाती हैं। बुधवार की सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर गणेश जी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करनी चाहिए। पूजा के दौरान गणेश जी को दूर्वा और मोदक अर्पित करने के साथ उनके प्रभावशाली मंत्रों का जाप करने से साधक को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है और कार्यक्षेत्र में निरंतर प्रगति के मार्ग प्रशस्त होते हैं।

    भगवान गणेश की आराधना के पश्चात बुध ग्रह के वैदिक, पौराणिक और तांत्रिक मंत्रों का जाप करना विशेष फलदायी माना गया है। नियमित और श्रद्धापूर्वक किए जाने वाले इस जाप से व्यक्ति की वाणी में मधुरता और आकर्षण का समावेश होता है। इसके साथ ही बौद्धिक क्षमताओं का विकास होता है, जिससे प्रतियोगी परीक्षाओं और व्यावसायिक जीवन में सकारात्मक परिणाम दिखाई देने लगते हैं।

    धार्मिक विद्वानों का मानना है कि इस दिन गणेश गायत्री मंत्र और बुध ग्रह के नाम मंत्रों का मानसिक या स्पष्ट उच्चारण करते हुए स्मरण करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है। यह साधना न केवल आर्थिक स्थिरता लाती है, बल्कि साधक को हर प्रकार के मानसिक और व्यावहारिक संकटों से बचाकर जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग सुलभ करती है।

  • ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर केंद्र का बड़ा फोकस, सभी मंत्रालयों को सुधार लागू करने के निर्देश

    ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर केंद्र का बड़ा फोकस, सभी मंत्रालयों को सुधार लागू करने के निर्देश

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने आम नागरिकों के लिए ‘ईज ऑफ लिविंग’ और उद्योगों के लिए ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को और बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों को सुधारों की पहचान कर उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाना, सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करना और उद्योगों के लिए अधिक अनुकूल कारोबारी वातावरण तैयार करना है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए सरकार ने सुधारों की निगरानी और प्रगति के मूल्यांकन के लिए पीएमरेफ पोर्टल पर नया ‘रिफॉर्म’ मॉड्यूल भी शुरू किया है।

    सरकार के अनुसार नया मॉड्यूल मंगलवार से कार्य करना शुरू कर चुका है और यह सभी मंत्रालयों एवं विभागों के लिए एक केंद्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करेगा। इस पोर्टल पर विभिन्न मंत्रालय अपने-अपने क्षेत्रों में किए जा रहे नीतिगत सुधारों, प्रशासनिक उपायों और सुशासन से जुड़ी पहलों का विस्तृत विवरण अपलोड करेंगे। इससे सभी सुधारात्मक प्रयासों का एकीकृत रिकॉर्ड तैयार होगा और उनकी प्रगति की नियमित समीक्षा करना आसान होगा।

    केंद्र सरकार ने निर्देश दिया है कि प्रत्येक मंत्रालय ऐसे सुधारों की पहचान करे जो आम नागरिकों के लिए सरकारी सेवाओं तक पहुंच को सरल बनाएं, प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाएं तथा उद्योगों के लिए कारोबार करना अधिक सुगम बनाएं। ये सुधार उच्च स्तरीय समिति (एचएलसी) की सिफारिशों, अनौपचारिक मंत्रिसमूह (आईजीओएम) के सुझावों अथवा संबंधित मंत्रालयों द्वारा स्वयं तैयार किए गए प्रस्तावों पर आधारित हो सकते हैं। सरकार का मानना है कि विभागीय स्तर पर नवाचार और सुधारों को बढ़ावा देने से प्रशासनिक दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

    नई व्यवस्था के तहत सभी मंत्रालयों और विभागों के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वे अपनी सभी सुधार संबंधी पहलों का विवरण पीएमरेफ पोर्टल पर अपलोड करें और समय-समय पर उनकी प्रगति को अपडेट करते रहें। जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक मंत्रालय को हर सप्ताह शुक्रवार दोपहर 12 बजे तक अपनी साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट पोर्टल पर दर्ज करनी होगी। इससे विभिन्न योजनाओं और सुधारों की वास्तविक स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सकेगी तथा आवश्यक होने पर समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए जा सकेंगे।

    सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य सुधार प्रक्रिया को एक व्यवस्थित और संस्थागत ढांचे के तहत संचालित करना है, ताकि विभिन्न मंत्रालयों में लागू किए जा रहे नीतिगत और प्रशासनिक सुधारों की प्रभावी निगरानी और मूल्यांकन किया जा सके। इससे मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा, निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी और सुधार संबंधी पहलों के क्रियान्वयन में भी गति आएगी। साथ ही विभिन्न विभागों के सफल अनुभवों को साझा कर अन्य क्षेत्रों में भी लागू करने का अवसर मिलेगा।

    पीएमरेफ (प्रधानमंत्री रिफरेंस/रिफॉर्म्स) पोर्टल प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय मंत्रालयों और सरकारी विभागों द्वारा उपयोग किया जाने वाला एक सुरक्षित डिजिटल गवर्नेंस प्लेटफॉर्म है। यह नीतिगत सुधारों, प्रशासनिक पहलों और प्रमुख आधारभूत संरचना परियोजनाओं की निगरानी के साथ-साथ अन्य सरकारी निगरानी प्रणालियों से भी जुड़ा हुआ है। इसके माध्यम से प्रधानमंत्री कार्यालय और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा जारी निर्देशों, निर्णयों और विभिन्न संदर्भों की प्रगति पर भी नजर रखी जाती है। सरकार को उम्मीद है कि नया ‘रिफॉर्म’ मॉड्यूल प्रशासनिक सुधारों को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

  • भीषण गर्मी ने छीनी चित्रकूट की रौनक, श्रद्धालुओं की कमी से ठप पड़ा स्थानीय कारोबार..

    भीषण गर्मी ने छीनी चित्रकूट की रौनक, श्रद्धालुओं की कमी से ठप पड़ा स्थानीय कारोबार..

    नई दिल्ली।धर्म नगरी चित्रकूट इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है, जहां तापमान 44 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचने के कारण जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। गर्म हवाओं और तेज धूप के चलते दिन चढ़ते ही सड़कों, घाटों और मंदिर परिसरों में सन्नाटा फैल जाता है। आमतौर पर श्रद्धालुओं की भीड़ से गुलजार रहने वाला यह धार्मिक क्षेत्र अब सुनसान नजर आने लगा है, जिससे स्थानीय माहौल और अर्थव्यवस्था दोनों पर गहरा असर पड़ा है।

    रामघाट पर स्थिति सबसे अधिक प्रभावित दिखाई दे रही है, जहां सामान्य दिनों में सुबह से देर शाम तक श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भारी भीड़ रहती है। लेकिन मौजूदा समय में सुबह 8 से 9 बजे के बाद ही यहां गतिविधियां लगभग समाप्त हो जाती हैं। भीषण गर्मी के कारण लोग लंबे समय तक बाहर रुकने से बच रहे हैं, जिससे घाटों और आसपास के मंदिरों में पहले जैसी रौनक नहीं रही।

    इस बदलाव का सीधा असर स्थानीय व्यापार पर पड़ रहा है। घाट किनारे छोटी-बड़ी दुकानों पर निर्भर दुकानदारों का कहना है कि ग्राहकों की कमी के कारण उनकी बिक्री लगभग ठप हो गई है। कई दुकानदार सुबह दुकान खोलने के बाद दिन भर में बहुत कम बिक्री होने पर मजबूरन जल्दी दुकान बंद कर देते हैं। हालात ऐसे हैं कि कई बार दिन में बोहनी तक नहीं हो पा रही, जिससे रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है।

    धार्मिक गतिविधियों पर भी गर्मी का असर साफ दिख रहा है। जहां पहले मंदिरों में सुबह से शाम तक श्रद्धालुओं की भीड़ रहती थी, अब वहां शांति और खालीपन नजर आता है। भजन-पूजन और धार्मिक वातावरण की रौनक कम हो गई है, जिससे स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ रही है। पर्यटन पर आधारित अर्थव्यवस्था होने के कारण इस कमी का असर सीधे आजीविका पर पड़ रहा है।

    स्थानीय व्यापारियों और लोगों का मानना है कि अगर घाटों पर छाया, ठंडे पेयजल और विश्राम की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, तो कुछ हद तक श्रद्धालुओं को गर्मी से राहत मिल सकती है और उनकी आवाजाही बनी रह सकती है। फिलहाल स्थिति यह है कि तेज गर्मी के कारण चित्रकूट की धार्मिक और सांस्कृतिक रौनक अस्थायी रूप से थमती नजर आ रही है, और सभी को मौसम में बदलाव का इंतजार है।

  • इंदौर दूषित पानी से न केवल जानें गईं. छोटे कारोबारियों की रोजी-रोटी भी प्रभावित

    इंदौर दूषित पानी से न केवल जानें गईं. छोटे कारोबारियों की रोजी-रोटी भी प्रभावित


    इंदौर । इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी के कारण अब तक 18 लोगों की जान जा चुकी है. और सैकड़ों लोग अस्पतालों में भर्ती हैं। वहीं. इस भयावह स्थिति का असर केवल स्वास्थ्य पर ही नहीं. बल्कि यहां के छोटे कारोबारों पर भी गहरा पड़ा है। दूषित पानी के कारण लोग बाहर का खाना खाने से बचने लगे हैं. जिसके कारण फास्ट फूड. चाय-नाश्ता और ठेले-खोमचों पर ग्राहकी पूरी तरह से ठप हो गई है।

    राजवीर सिंह कुशवाह. जो भागीरथपुरा में बर्गर. पिज्जा और चायनीज आइटम बेचते थे. बताते हैं कि नए साल की छुट्टियों में उनके कारोबार की सबसे ज्यादा कमाई होती थी। 31 दिसंबर और 1 जनवरी के बीच उनका बिजनेस बहुत अच्छा चलता था. लेकिन इस बार 28 दिसंबर से 5 जनवरी तक दुकान पूरी तरह बंद रही। “हमारे फास्ट फूड आइटम्स में पानी का इस्तेमाल होता है. और खराब पानी के कारण हमें दुकान बंद रखनी पड़ी। अब दुकान तो खोली है. लेकिन ग्राहक बिल्कुल नहीं आ रहेउन्होंने कहा।

    इसी तरह. महेश हार्डिया. जो पानीपुरी और चाट बेचते हैं. बताते हैं कि 8-10 दिनों से उनका ठेला बंद है। पानी की गंदगी के कारण प्रशासन ने ठेला बंद करने का आदेश दिया था। “हम रोज 700-800 रुपये कमाते थे. लेकिन अब काम नहीं हो रहा। अब तक जितनी सेविंग्स हैं. उससे काम चल रहा है। जब तक पानी की समस्या ठीक नहीं होती. काम में सुधार की उम्मीद कम हैमहेश ने कहा।नाश्ते की दुकान चलाने वाली सीमा सिकरवार भी परेशान हैं। दूषित पानी के कारण ग्राहक बहुत कम हो गए हैं। पहले की तरह ज्यादा ग्राहक नहीं आ रहे हैं। अब बोरिंग का पानी इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन इससे भी ज्यादा समस्या हो रही है सीमा ने बताया।

    दूसरी ओर. इस संकट का असर अब परिवारों पर भी पड़ने लगा है। रोशनी कोरी. जो कपड़े की दुकान पर काम करती थीं. ने बताया कि उनके परिवार ने भागीरथपुरा छोड़ने का फैसला किया है।मेरे बेटे की तबीयत खराब हो गई थी. अब ठीक हो गया है. लेकिन इस गंदे पानी के कारण हम सागर लौटने का सोच रहे हैं। हम यहां 8-9 महीने से किराए पर रह रहे थे. लेकिन अब हमें यहां से पलायन करना पड़ रहा हैउन्होंने कहा।इस क्षेत्र में दूषित पानी का असर गहरा है और इससे छोटे व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उनका कहना है कि जब तक पानी की गुणवत्ता ठीक नहीं होती. उनका कारोबार ठीक से नहीं चल पाएगा।

    वहीं. कलेक्टर और नगर निगम कमिश्नर लगातार हालात का जायजा ले रहे हैं और पानी की सप्लाई को सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन जब तक लोग भरोसा नहीं करते. व्यापारियों की स्थिति में सुधार की कोई संभावना नहीं दिख रही है।इंदौर में हुई इस जलसंकट की घटना ने ना सिर्फ स्वास्थ्य को प्रभावित किया है. बल्कि रोजी-रोटी के संकट को भी जन्म दिया है। इस गंभीर स्थिति में छोटे कारोबारी अपनी दिक्कतें साझा कर रहे हैं. और प्रशासन से जल्द सुधार की उम्मीद लगाए बैठे हैं।इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी के कारण अब तक 18 लोगों की जान जा चुकी है. और सैकड़ों लोग अस्पतालों में भर्ती हैं। वहीं. इस भयावह स्थिति का असर केवल स्वास्थ्य पर ही नहीं. बल्कि यहां के छोटे कारोबारों पर भी गहरा पड़ा है।
    दूषित पानी के कारण लोग बाहर का खाना खाने से बचने लगे हैं. जिसके कारण फास्ट फूड. चाय-नाश्ता और ठेले-खोमचों पर ग्राहकी पूरी तरह से ठप हो गई है।राजवीर सिंह कुशवाह. जो भागीरथपुरा में बर्गर. पिज्जा और चायनीज आइटम बेचते थे. बताते हैं कि नए साल की छुट्टियों में उनके कारोबार की सबसे ज्यादा कमाई होती थी। 31 दिसंबर और 1 जनवरी के बीच उनका बिजनेस बहुत अच्छा चलता था. लेकिन इस बार 28 दिसंबर से 5 जनवरी तक दुकान पूरी तरह बंद रही। “हमारे फास्ट फूड आइटम्स में पानी का इस्तेमाल होता है. और खराब पानी के कारण हमें दुकान बंद रखनी पड़ी। अब दुकान तो खोली है. लेकिन ग्राहक बिल्कुल नहीं आ रहेउन्होंने कहा।
    इसी तरह. महेश हार्डिया. जो पानीपुरी और चाट बेचते हैं. बताते हैं कि 8-10 दिनों से उनका ठेला बंद है। पानी की गंदगी के कारण प्रशासन ने ठेला बंद करने का आदेश दिया था। हम रोज 700-800 रुपये कमाते थे. लेकिन अब काम नहीं हो रहा। अब तक जितनी सेविंग्स हैं. उससे काम चल रहा है। जब तक पानी की समस्या ठीक नहीं होती. काम में सुधार की उम्मीद कम हैमहेश ने कहा।नाश्ते की दुकान चलाने वाली सीमा सिकरवार भी परेशान हैं।दूषित पानी के कारण ग्राहक बहुत कम हो गए हैं। पहले की तरह ज्यादा ग्राहक नहीं आ रहे हैं। अब बोरिंग का पानी इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन इससे भी ज्यादा समस्या हो रही है सीमा ने बताया।दूसरी ओर. इस संकट का असर अब परिवारों पर भी पड़ने लगा है।
    रोशनी कोरी. जो कपड़े की दुकान पर काम करती थीं. ने बताया कि उनके परिवार ने भागीरथपुरा छोड़ने का फैसला किया है। मेरे बेटे की तबीयत खराब हो गई थी. अब ठीक हो गया है. लेकिन इस गंदे पानी के कारण हम सागर लौटने का सोच रहे हैं। हम यहां 8-9 महीने से किराए पर रह रहे थे. लेकिन अब हमें यहां से पलायन करना पड़ रहा हैउन्होंने कहा।इस क्षेत्र में दूषित पानी का असर गहरा है और इससे छोटे व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उनका कहना है कि जब तक पानी की गुणवत्ता ठीक नहीं होती. उनका कारोबार ठीक से नहीं चल पाएगा।
    वहीं. कलेक्टर और नगर निगम कमिश्नर लगातार हालात का जायजा ले रहे हैं और पानी की सप्लाई को सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन जब तक लोग भरोसा नहीं करते. व्यापारियों की स्थिति में सुधार की कोई संभावना नहीं दिख रही है। इंदौर में हुई इस जलसंकट की घटना ने ना सिर्फ स्वास्थ्य को प्रभावित किया है. बल्कि रोजी-रोटी के संकट को भी जन्म दिया है। इस गंभीर स्थिति में छोटे कारोबारी अपनी दिक्कतें साझा कर रहे हैं. और प्रशासन से जल्द सुधार की उम्मीद लगाए बैठे हैं।