Tag: by-election

  • दतिया विधानसभा उपचुनावः मतदान की तैयारियां पूर्ण, प्रशासन ने किए व्यापक इंतजाम

    दतिया विधानसभा उपचुनावः मतदान की तैयारियां पूर्ण, प्रशासन ने किए व्यापक इंतजाम


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव की तैयारियां पूरी हो गई हैं। यहां 30 जुलाई को मतदान होना है। क्षेत्र में स्वतंत्र, निष्पक्ष, शांतिपूर्ण एवं पारदर्शी ढंग से मतदान संपन्न कराने के लिए जिला निर्वाचन कार्यालय द्वारा सभी आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित कर ली गई हैं।

    दतिया विधानसभा क्षेत्र में मंगलवार शाम 6 बजे चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद जिला प्रशासन और पुलिस ने शहर में फ्लैग मार्च निकाला। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी स्वप्निल वानखड़े तथा पुलिस अधीक्षक मयूर खंडेलवाल के नेतृत्व में निकाले गए फ्लैग मार्च में पुलिस बल के जवानों ने भाग लिया। फ्लैग मार्च का उद्देश्य मतदाताओं में सुरक्षा एवं विश्वास का वातावरण स्थापित करना तथा असामाजिक तत्वों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने का संदेश देना रहा।

    फ्लैग मार्च भैरव मंदिर से प्रारंभ होकर तिगैलिया, टाउन हॉल, बड़ा बाजार, पटवा तिराहा, किला चौक, दारूगर की पुलिया, बिहारी जी मंदिर तिगैलिया, भैरव मंदिर, राजगढ़ चौराहा, सीता सागर, पुरानी कलेक्ट्रेट, सिविल लाइन और झांसी चुंगी पुल होते हुए देर रात पुलिस लाइन दतिया पहुंचकर संपन्न हुआ। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि विधानसभा उप निर्वाचन को निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और भयमुक्त वातावरण में संपन्न कराने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। जिले में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया गया है तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क एवं मुस्तैद है।

    आज शासकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज से होगा सामग्री का वितरण

    जिला निर्वाचन कार्यालय द्वारा जानकारी दी गई दतिया विधानसभा उप निर्वाचन 2026 अंतर्गत 30 जुलाई को मतदान सम्पन्न कराने के लिए आज बुधवार को प्रातः 5 बजे से शासकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज दतिया से सामग्री का वितरण किया जाएगा। मतदान सामग्री के सुचारु वितरण एवं प्राप्ति के लिए पॉलीटेक्निक कॉलेज परिसर में अलग-अलग काउंटर बनाए गए हैं। प्रत्येक काउंटर से 10 से 12 मतदान केंद्रों की सामग्री का वितरण एवं वापसी होगी, जिससे प्रक्रिया तेज एवं सुव्यवस्थित रहे। वर्षा ऋतु को ध्यान में रखते हुए परिसर में पर्याप्त टेंट लगाने, बसों की क्रमबद्ध पार्किंग, वाहनों के बीच पर्याप्त दूरी बनाए रखने तथा आवश्यकता पड़ने पर क्रेन की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। मतदान दलों से निर्धारित समय का पालन करने एवं अपने साथ छाता रखने के लिए भी कहा गया है।

    स्ट्रांग रूम एवं निर्वाचन व्यवस्थाओं का सतत निरीक्षण

    शासकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज में बनाए गए स्ट्रांग रूम सहित निर्वाचन से संबंधित विभिन्न व्यवस्थाओं का सतत स्थल निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान स्ट्रांग रूम, मतगणना कक्ष, सामग्री वितरण एवं सामग्री जमा करने के कक्षों की तैयारियों का बारीकी से अवलोकन किया गया है। साथ ही सीसीटीवी कैमरे, सुरक्षा व्यवस्था एवं बैरीकेडिंग की समीक्षा कर कार्य निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुरूप समयबद्ध रूप से पूर्ण किया गया है।

    सभी मूलभूत सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराने के निर्देश

    निर्वाचन कार्य से जुड़े अधिकारियों को विद्युत आपूर्ति, पेयजल, चिकित्सा सुविधा, स्वच्छता, बैरीकेडिंग एवं निर्बाध बिजली सहित सभी मूलभूत व्यवस्थाएं समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। स्पष्ट किया गया कि निर्वाचन कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही या उदासीनता स्वीकार नहीं की जाएगी तथा सभी अधिकारी अपने दायित्वों का निष्ठा एवं समयबद्धता के साथ निर्वहन करेंगे।

    निर्वाचन प्रबंधन की सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित

    जिला निर्वाचन प्रशासन द्वारा परिवहन व्यवस्था एवं रूट चार्ट, ईवीएम एवं वीवीपैट की उपलब्धता, मतदान दलों का प्रशिक्षण, सामग्री वितरण एवं प्राप्ति, आदर्श आचरण संहिता के पालन, रैंडमाइजेशन, कानून व्यवस्था, एमसीएमसी, कम्युनिकेशन प्लान, स्वीप गतिविधियां, शिकायत एवं कंट्रोल रूम, ईटीबीपीएस, वेबकास्टिंग, विद्युत एवं चिकित्सा व्यवस्था, वीडियोग्राफी, फूड पैकेट्स, टेलीफोन एवं इंटरनेट तथा निर्वाचन कार्मिकों के पहचान पत्र वितरण सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।

    वर्षा को लेकर विशेष सतर्कता

    मानसून को देखते हुए निर्वाचन प्रशासन ने विशेष तैयारियां की हैं। मतदान दलों के वाहनों के लिए सुरक्षित पार्किंग, वैकल्पिक मार्ग, टेंट की व्यवस्था तथा चिकित्सा दलों की तैनाती सुनिश्चित की गई है। यदि किसी पुल पर पानी बहने की स्थिति बनेगी तो वहां से किसी भी मतदान दल का वाहन नहीं निकाला जाएगा तथा पूर्व निर्धारित वैकल्पिक मार्ग का उपयोग किया जाएगा। प्रत्येक मतदान केंद्र पर पेयजल, व्हीलचेयर एवं प्राथमिक उपचार जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी।

    माइक्रो ऑब्जर्वरों को दिया गया प्रशिक्षण
    दतिया विधानसभा उपनिर्वाचन-2026 को निष्पक्ष एवं पारदर्शी ढंग से संपन्न कराने के उद्देश्य से शासकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज में माइक्रो ऑब्जर्वरों का प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में निर्वाचन प्रेक्षक श्री विजय भारती की उपस्थिति में मतदान केंद्रों पर निष्पक्षता बनाए रखने, निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन करने तथा प्रत्येक गतिविधि पर सतर्क निगरानी रखने के संबंध में आवश्यक जानकारी दी गई।

    अंतरराज्यीय सीमा पर कड़ी सुरक्षा

    विधानसभा उपनिर्वाचन को निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए उनाव थाना क्षेत्र स्थित मध्यप्रदेश-उत्तरप्रदेश अंतरराज्यीय सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ कर दी गई है। पुलिस एवं सुरक्षा बलों द्वारा चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है तथा सीमा से गुजरने वाले प्रत्येक वाहन की सघन जांच की जा रही है। नकदी, शराब एवं अन्य संदिग्ध सामग्री की विशेष जांच की जा रही है ताकि निर्वाचन प्रक्रिया प्रभावित न हो।

    एसएसटी की कार्रवाई में नकदी एवं आभूषण जप्त

    एसएसटी टीम द्वारा विभिन्न नाको पर वाहन जांच के दौरान कुल 98 लाख 80 हजार 800 रुपये नकद जब्त किए गए। संबंधित व्यक्तियों द्वारा कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाने पर राशि को जिला कोषालय में जमा कराया गया। वहीं बसई चेकिंग प्वाइंट पर एक अन्य वाहन से 1685 ग्राम चांदी एवं 8.5 ग्राम सोने के आभूषण जब्त किए गए, जिनके संबंध में भी कोई प्रमाणिक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए। आभूषणों को भी सुरक्षार्थ जिला कोषालय में जमा कराया गया।

    सामान्य प्रेक्षक ने मतदान केंद्रों का किया निरीक्षण
    सामान्य प्रेक्षक विजय भारती ने बसई क्षेत्र के विभिन्न मतदान केंद्रों का निरीक्षण कर मतदाता सूची, मूलभूत सुविधाओं एवं निर्वाचन तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मतदान केंद्रों पर पेयजल, बिजली, शौचालय सहित सभी आवश्यक सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं तथा निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाए।

    घर-घर पहुंचाई जा रही वोटर पर्चियां

    मतदान प्रतिशत बढ़ाने के उद्देश्य से बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) द्वारा घर-घर जाकर मतदाताओं को वोटर पर्चियों का वितरण किया जा रहा है। साथ ही मतदाताओं से अपील की जा रही है कि वे मतदान दिवस पर अपनी वोटर स्लिप तथा पहचान के लिए आयोग द्वारा निर्धारित कोई एक दस्तावेज़ साथ लेकर आएं तथा लोकतंत्र के इस महापर्व में अधिक से अधिक संख्या में भागीदारी करें।

    वरिष्ठ नागरिकों एवं दिव्यांगों के लिए होम वोटिंग

    निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार 85 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों एवं पात्र दिव्यांग मतदाताओं को डाक मतपत्र के माध्यम से घर पर ही मतदान की सुविधा प्रदान की गई। निर्वाचन दल निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार मतदाताओं के घर पहुंचकर गोपनीय एवं निष्पक्ष वातावरण में मतदान संपन्न कराई गई। यह व्यवस्था ऐसे मतदाताओं के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही है जो शारीरिक कारणों से मतदान केंद्र तक नहीं पहुंच सकते है।

    विधानसभा स्तरीय कंट्रोल रूम स्थापित

    दतिया विधानसभा उपनिर्वाचन-2026 के सफल संचालन के लिए न्यू कलेक्ट्रेट कार्यालय के कक्ष क्रमांक-4 में विधानसभा स्तरीय कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। किसी भी निर्वाचन संबंधी जानकारी अथवा शिकायत के लिए मोबाइल नंबर 8305199022 जारी किया गया है। जिला निर्वाचन प्रशासन ने नागरिकों से आवश्यकता पड़ने पर इस नंबर पर संपर्क करने की अपील की है।

  • दतिया की राजनीति में हलचल, BJP-कांग्रेस दोनों के लिए मुश्किल बन सकता है उपचुनाव

    दतिया की राजनीति में हलचल, BJP-कांग्रेस दोनों के लिए मुश्किल बन सकता है उपचुनाव


    मध्य प्रदेश । दतिया विधानसभा सीट रिक्त होने के बाद संभावित उपचुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। एक ओर पूर्व गृहमंत्री Narottam Mishra अपनी खोई राजनीतिक जमीन वापस पाने के लिए सामाजिक समीकरण साध रहे हैं, तो दूसरी ओर कांग्रेस में टिकट को लेकर अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आने लगी है। दिलचस्प बात यह है कि स्थानीय स्तर पर जनता का एक बड़ा वर्ग भाजपा और कांग्रेस दोनों से नाराज नजर आ रहा है।

    उपचुनाव का इंतजार, 14 जुलाई पर टिकी निगाहें
    दतिया में इन दिनों चौराहों, बाजारों और राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा संभावित विधानसभा उपचुनाव की है। हालांकि अभी चुनाव कार्यक्रम घोषित नहीं हुआ है, लेकिन माना जा रहा है कि चुनाव आयोग की नजर 14 जुलाई को होने वाली सुनवाई पर है। इसके बाद ही चुनावी प्रक्रिया को लेकर तस्वीर साफ हो सकती है। इसी संभावना को देखते हुए सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। भाजपा, कांग्रेस और अन्य दलों के नेता लगातार जनसंपर्क और संगठनात्मक गतिविधियों में जुटे हुए हैं।

    2023 की हार का बोझ अब भी नरोत्तम मिश्रा के साथ
    दतिया की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या नरोत्तम मिश्रा अपनी पिछली हार की भरपाई कर पाएंगे? 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्हें अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा था। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बसई क्षेत्र में अपेक्षित समर्थन नहीं मिलना उनकी हार की बड़ी वजह बना। भाजपा को उम्मीद थी कि 2018 की तरह अंतिम चरणों में वोटों का बड़ा अंतर उनके पक्ष में जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

    स्थानीय लोगों के मुताबिक हार के पीछे केवल विपक्ष की ताकत नहीं, बल्कि संगठन के भीतर की निष्क्रियता, कार्यकर्ताओं का अति आत्मविश्वास और जनता की नाराजगी भी जिम्मेदार रही। कई लोगों का कहना है कि विकास कार्य होने के बावजूद कुछ स्थानीय समस्याओं का समाधान समय पर नहीं होने से असंतोष बढ़ा।

    अब मिश्रा लगातार सामाजिक सम्मेलन, समाज प्रमुखों से मुलाकात और कार्यकर्ताओं के संपर्क अभियान के जरिए अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।

    राजेंद्र भारती के कार्यकाल पर जनता की मिली-जुली राय

    वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में Rajendra Bharti का कार्यकाल भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

    स्थानीय लोगों का एक वर्ग मानता है कि वे जनता की अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरे नहीं उतर पाए। कई लोगों का आरोप है कि वे आम जनता से दूर रहे और क्षेत्रीय विकास को अपेक्षित गति नहीं मिल सकी।

    हालांकि कांग्रेस नेताओं का दावा है कि प्रशासनिक असहयोग और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने कई विकास कार्य कराए। पार्टी नेताओं का कहना है कि विपक्ष में रहते हुए भी उन्होंने जनता की समस्याओं को मजबूती से उठाया।

    कांग्रेस में टिकट को लेकर बढ़ी खींचतान
    उपचुनाव से पहले कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती आंतरिक एकजुटता बनी हुई है। सूत्रों के अनुसार राजेंद्र भारती अपने बेटे अनुज भारती के लिए टिकट की पैरवी कर रहे हैं। वहीं, पिछले चुनाव में दावेदारी छोड़ चुके अवधेश नायक भी खुद को मजबूत उम्मीदवार मान रहे हैं। इसके अलावा पूर्व विधायक घनश्याम सिंह के समर्थक भी सक्रिय हैं। हाल ही में Rahul Gandhi से हुई मुलाकातों और संभावित दावेदारों की सक्रियता ने कांग्रेस के भीतर प्रतिस्पर्धा को और तेज कर दिया है। हालांकि पार्टी नेतृत्व सार्वजनिक रूप से गुटबाजी से इनकार कर रहा है और दावा कर रहा है कि उम्मीदवार का चयन सर्वे और जीत की संभावना के आधार पर होगा।

    आजाद समाज पार्टी भी बना रही मजबूत जमीन
    दतिया के संभावित चुनावी मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश में आजाद समाज पार्टी भी सक्रिय है। दामोदर यादव लगातार किसान सम्मेलनों और जनसंपर्क अभियानों के माध्यम से अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यादव मतदाताओं का बड़ा हिस्सा उनके साथ जाता है तो इसका सीधा असर कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक पर पड़ सकता है। यही वजह है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों उनके प्रभाव को गंभीरता से देख रही हैं।

    जातीय समीकरण बन सकते हैं चुनाव का निर्णायक फैक्टर
    राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि दतिया उपचुनाव केवल विकास या स्थानीय मुद्दों पर नहीं लड़ा जाएगा, बल्कि जातीय और सामाजिक समीकरण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यादव, कुशवाहा और ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या यहां निर्णायक मानी जाती है। अलग-अलग दल इन वर्गों को साधने के लिए विशेष रणनीति बना रहे हैं। भाजपा जहां सामाजिक सम्मेलनों के जरिए विभिन्न समुदायों तक पहुंच रही है, वहीं कांग्रेस संगठन को मजबूत करने और बूथ स्तर तक सक्रियता बढ़ाने में जुटी है।

    जनता का संदेश साफ: केवल वादे नहीं, काम चाहिए
    दतिया के राजनीतिक माहौल की सबसे दिलचस्प बात यह है कि स्थानीय स्तर पर दोनों प्रमुख दलों के प्रति असंतोष दिखाई देता है। कई नागरिकों का कहना है कि वे अब केवल राजनीतिक दावों से प्रभावित नहीं होंगे, बल्कि उम्मीदवार की पहुंच, जवाबदेही और क्षेत्रीय विकास के आधार पर निर्णय लेंगे। यही कारण है कि संभावित उपचुनाव में मुकाबला केवल भाजपा और कांग्रेस के बीच नहीं, बल्कि जनता के विश्वास को हासिल करने की चुनौती भी होगा।

  • बंगाल चुनाव परिणामों के बाद बदलीं सियासी करवटें; ममता बनर्जी के धुर विरोधी हुमायूं कबीर ने दी अपनी जीती हुई सुरक्षित सीट से जिताने की गारंटी

    बंगाल चुनाव परिणामों के बाद बदलीं सियासी करवटें; ममता बनर्जी के धुर विरोधी हुमायूं कबीर ने दी अपनी जीती हुई सुरक्षित सीट से जिताने की गारंटी

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव 2026 के परिणामों के बाद राज्य की राजनीति में एक अप्रत्याशित और नाटकीय मोड़ सामने आया है। कभी तृणमूल कांग्रेस की मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सबसे मुखर आलोचक रहे आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) के संस्थापक हुमायूं कबीर ने अब संकट के समय उनके प्रति सहानुभूति दिखाई है। कबीर ने घोषणा की है कि यदि ममता बनर्जी चाहें तो वह अपनी नवनिर्वाचित रेजीनगर विधानसभा सीट से इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं, ताकि बनर्जी वहां से उपचुनाव लड़कर राज्य विधानसभा में गरिमामय वापसी कर सकें।

    यह राजनीतिक प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब ममता बनर्जी अपने राजनीतिक जीवन के सबसे गंभीर दौर से गुजर रही हैं। हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है और भारतीय जनता पार्टी ने पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई है। इस हार के बाद टीएमसी के भीतर बड़े पैमाने पर आंतरिक विद्रोह हुआ है, जिससे पार्टी में बिखराव की स्थिति पैदा हो गई है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अपनी नंदीग्राम सीट खाली करते हुए भवानीपुर सीट अपने पास रखी है, जहां उन्होंने ममता बनर्जी को पराजित किया था। इस पराजय के बाद बनर्जी फिलहाल विधानसभा से बाहर हैं।

    हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद जिले की दो विधानसभा सीटों, नौदा और रेजीनगर, दोनों से ऐतिहासिक जीत हासिल की है। चुनाव नियमों के अनुसार, उन्हें निर्धारित समय के भीतर इन दोनों में से किसी एक सीट से इस्तीफा देना होगा। कबीर ने संवाददाताओं से अनौपचारिक बातचीत में स्पष्ट कहा कि यदि ममता बनर्जी उनके पास आती हैं, तो वह रेजीनगर निर्वाचन क्षेत्र को उनके लिए खाली कर देंगे। उन्होंने राजनीतिक विश्लेषण साझा करते हुए दावा किया कि ममता बनर्जी अगर दोबारा नंदीग्राम से चुनाव लड़ती हैं, तो उनके जीतने की संभावना न के बराबर है, लेकिन रेजीनगर में उनके नेतृत्व में बनर्जी की जीत पूरी तरह सुनिश्चित की जा सकती है।

    गौरतलब है कि हुमायूं कबीर को पिछले साल पार्टी नेतृत्व के साथ लंबे समय तक चले वैचारिक मतभेदों के कारण तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने आम जनता उन्नयन पार्टी का गठन किया और ममता बनर्जी सरकार की नीतियों पर जमकर प्रहार किया। कबीर ने वर्तमान स्थिति पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि आज दीदी जिस दौर से गुजर रही हैं, उसे देखकर उन्हें व्यक्तिगत तौर पर पीड़ा होती है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वह आज सार्वजनिक जीवन में जिस मुकाम पर हैं, उसके पीछे कहीं न कहीं ममता बनर्जी का शुरुआती सहयोग रहा है।

    राजनीतिक विश्लेषक इस घटनाक्रम को मुर्शिदाबाद और उसके आसपास के क्षेत्रों में मुस्लिम मतदाताओं के बीच कबीर के बढ़ते प्रभाव के रूप में भी देख रहे हैं। कबीर ने अपने प्रभाव को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया कि भले ही आज पूरे राज्य में ममता बनर्जी की बात का प्रभाव कम हो गया हो, परंतु रेजीनगर क्षेत्र में हुमायूं कबीर का निर्णय ही अंतिम और सर्वोपरि माना जाता है। टीएमसी में मची इस ऐतिहासिक बगावत के बीच पूर्व सहयोगियों द्वारा दी जा रही इस प्रकार की राजनीतिक जीवनदान की पेशकश बंगाल की भविष्य की राजनीति को एक नया आयाम दे सकती है।

  • बंगाल की सियासत में बड़ा उलटफेर, फाल्टा सीट पर TMC उम्मीदवार जहांगीर खान ने चुनाव लड़ने से किया इनकार

    बंगाल की सियासत में बड़ा उलटफेर, फाल्टा सीट पर TMC उम्मीदवार जहांगीर खान ने चुनाव लड़ने से किया इनकार


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में फाल्टा विधानसभा सीट को लेकर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है, जिसने सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मतदान से ठीक पहले पार्टी के उम्मीदवार जहांगीर खान ने चुनावी मैदान से हटने का फैसला कर सभी को चौंका दिया है। इस अचानक हुए घटनाक्रम ने न केवल पार्टी के भीतर हलचल पैदा कर दी है, बल्कि पूरे राजनीतिक माहौल में भी चर्चाओं का दौर तेज कर दिया है।

    फाल्टा सीट पर पहले हुए मतदान के दौरान कथित अनियमितताओं और धांधली के आरोप सामने आए थे, जिसके बाद चुनाव प्रक्रिया को रद्द कर दोबारा मतदान कराने का निर्णय लिया गया था। दोबारा मतदान की तारीख तय होने के बाद सभी दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी थीं, लेकिन अंतिम समय में TMC उम्मीदवार का पीछे हटना एक अप्रत्याशित राजनीतिक मोड़ माना जा रहा है।

    जहांगीर खान अपने प्रचार अभियान के दौरान अपने अलग अंदाज और बयानों को लेकर काफी चर्चा में रहे थे। उनके वायरल प्रचार स्टाइल और आत्मविश्वास भरे बयानों ने उन्हें सुर्खियों में ला दिया था। लेकिन चुनाव से महज कुछ दिन पहले उनके मैदान छोड़ने के फैसले ने सभी राजनीतिक समीकरणों को बदल दिया है और विपक्ष को भी इस पर सवाल उठाने का मौका मिल गया है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। कुछ इसे व्यक्तिगत कारणों से लिया गया फैसला बता रहे हैं, तो कुछ का मानना है कि राजनीतिक और कानूनी दबाव ने इस स्थिति को जन्म दिया है। हालांकि आधिकारिक तौर पर उम्मीदवार की ओर से अपना नाम वापस लेने की पुष्टि की गई है, लेकिन इसके पीछे की पूरी वजह अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है।

    इस बीच यह भी चर्चा में है कि फाल्टा सीट पर पहले चरण के मतदान के दौरान कई बूथों पर अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं, जिसके बाद चुनाव आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराई और फिर दोबारा मतदान का आदेश दिया। इसी पृष्ठभूमि में यह नया घटनाक्रम राजनीतिक महत्व और बढ़ा देता है।

    कुल मिलाकर फाल्टा विधानसभा सीट पर यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया मोड़ लेकर आया है। मतदान से ठीक पहले उम्मीदवार का हटना न केवल सत्ताधारी दल के लिए चुनौती बन गया है, बल्कि आने वाले दिनों में इस सीट के राजनीतिक समीकरणों को भी पूरी तरह बदल सकता है।

  • विजयपुर से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा का चुनाव रद्द, रामनिवास रावत बने नए MLA

    विजयपुर से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा का चुनाव रद्द, रामनिवास रावत बने नए MLA


    ग्वालियर  ग्वालियर हाईकोर्ट ने विजयपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा का चुनाव रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट के जस्टिस जी.एस. अहलूवालिया ने यह फैसला बीजेपी नेता और पूर्व मंत्री रामनिवास रावत की याचिका पर सुनाया। अब विजयपुर का नया MLA रामनिवास रावत होंगे।

    रामनिवास रावत की याचिका में आरोप था कि मुकेश मल्होत्रा ने 2024 के उपचुनाव के नामांकन में अपने खिलाफ दर्ज 6 में से 4 क्रिमिनल केस छिपाए थे। केवल दो केस की जानकारी दी गई थी। हाईकोर्ट ने पाया कि उम्मीदवार ने हलफनामे में आवश्यक जानकारी छिपाई थी, इसलिए उनका चुनाव रद्द कर दिया गया और दूसरे नंबर पर रहे रावत को विजयपुर का MLA घोषित किया गया।

    इस फैसले के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट जाएंगे और विश्वास जताया कि जनता फिर कांग्रेस को भारी वोटों से विजयी बनाएगी। वहीं सुप्रीम कोर्ट के वकील विवेक तन्खा ने कहा कि केवल कुछ जानकारी गलत दी गई थी, इसका मतलब चुनाव में धांधली नहीं हुई। वे अपील करेंगे और विश्वास है कि मुकेश मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलेगी।

    मुकेश मल्होत्रा ने 2 मई 2024 को कांग्रेस जॉइन की थी। इसके पहले वे बीजेपी में सक्रिय रहे और सहारिया प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री भी रहे। 2023 के विधानसभा चुनाव में वे निर्दलीय उम्मीदवार थे और आदिवासी वोट बैंक के बल पर विजयपुर सीट से 45 हजार वोटों से जीते थे।

    ग्वालियर हाईकोर्ट ने उपचुनाव में सभी उम्मीदवारों को नोटिस जारी किया और हलफनामे में जानकारी छिपाने का मामला सामने आने पर जांच की। यह मामला उम्मीदवारों द्वारा हलफनामे में क्रिमिनल रिकॉर्ड छिपाने से जुड़ी गंभीर कानूनी चेतावनी साबित हुआ।