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  • दतिया विधायक घनश्याम सिंह को हाईकोर्ट का नोटिस, 1991 के आपराधिक मामले की जानकारी छिपाने के आरोप से बढ़ी हलचल

    दतिया विधायक घनश्याम सिंह को हाईकोर्ट का नोटिस, 1991 के आपराधिक मामले की जानकारी छिपाने के आरोप से बढ़ी हलचल

    मध्य प्रदेश: की दतिया विधानसभा सीट एक बार फिर कानूनी और राजनीतिक चर्चाओं में आ गई है। कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह को नामांकन पत्र में आपराधिक मामले की जानकारी नहीं देने के आरोप से जुड़े प्रकरण में ग्वालियर हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया है। अदालत ने यह कदम इस मामले में दायर याचिका पर उठाया है। नोटिस सामने आने के बाद दतिया में संभावित उपचुनाव को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं, हालांकि फिलहाल उपचुनाव की स्थिति बनने की कोई पुष्टि नहीं हुई है।

    यह मामला वर्ष 1991 में कांग्रेस के एक प्रदर्शन के दौरान दर्ज एफआईआर से जुड़ा बताया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उस प्रदर्शन के दौरान घनश्याम सिंह सहित कुछ अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। आरोप है कि दतिया विधानसभा उपचुनाव के दौरान नामांकन पत्र दाखिल करते समय घनश्याम सिंह ने इस आपराधिक मामले का उल्लेख नहीं किया था।

    इसी आरोप को आधार बनाकर दीपक बेलपत्री सहित कुछ लोगों की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिका में नामांकन पत्र में आपराधिक मामले की जानकारी नहीं दिए जाने का मुद्दा उठाया गया है। अब अदालत ने विधायक को नोटिस जारी कर इस मामले में जवाब मांगा है। फिलहाल नोटिस जारी होने का अर्थ आरोपों का साबित होना नहीं है। मामले में आगे की स्थिति संबंधित पक्षों के जवाब और अदालत की कार्यवाही पर निर्भर करेगी।

    इस घटनाक्रम के बीच कांग्रेस के प्रदेश महासचिव अवधेश नायक ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट से नोटिस मिलना कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है और इसे जरूरत से ज्यादा बड़ा मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए। नायक ने इस मामले को लेकर राजेंद्र भारती की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस घटनाक्रम के पीछे भारती की भूमिका हो सकती है।

    अवधेश नायक ने राजेंद्र भारती पर कानूनी प्रक्रियाओं और दस्तावेजों के माध्यम से राजनीतिक नुकसान पहुंचाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2023 में उनका टिकट कटने के पीछे भी भारती की भूमिका थी। ये आरोप नायक की ओर से लगाए गए हैं। उपलब्ध जानकारी में इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि या राजेंद्र भारती की इस मामले पर प्रतिक्रिया का विवरण नहीं है।

    दतिया विधानसभा क्षेत्र की राजनीतिक परिस्थितियों के कारण भी यह मामला चर्चा में है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव और उसके बाद हुए उपचुनाव में भाजपा को इस सीट पर हार का सामना करना पड़ा था, जबकि कांग्रेस ने दोनों चुनावों में जीत दर्ज की थी। ऐसे में विधायक को जारी हुए नोटिस के बाद स्थानीय राजनीति में इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    अब सबसे अहम सवाल यह है कि पुराने आपराधिक मामले और नामांकन पत्र में जानकारी नहीं देने के आरोप पर अदालत आगे क्या रुख अपनाती है। यदि कानूनी कार्यवाही में कोई ऐसा आदेश आता है जिसका विधानसभा सदस्यता पर प्रभाव पड़ता हो, तो उसके राजनीतिक परिणाम भी हो सकते हैं। हालांकि, केवल नोटिस जारी होने से विधायक की सदस्यता समाप्त नहीं होती और न ही अपने आप उपचुनाव की स्थिति बनती है।

    फिलहाल ग्वालियर हाईकोर्ट के नोटिस के बाद मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ने का इंतजार है। विधायक का जवाब, याचिका में उठाए गए सवालों पर अदालत का विचार और आगे आने वाले आदेश ही तय करेंगे कि इस प्रकरण का दतिया की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।

  • पश्चिम बंगाल उपचुनाव में भाजपा की मजबूत बढ़त, नंदीग्राम में हंसी रानी रथ 50 हजार और रेजीनगर में शंकरावह सरकार 23 हजार वोटों से आगे

    पश्चिम बंगाल उपचुनाव में भाजपा की मजबूत बढ़त, नंदीग्राम में हंसी रानी रथ 50 हजार और रेजीनगर में शंकरावह सरकार 23 हजार वोटों से आगे

    नई दिल्ली ।पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की मतगणना के दौरान भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार बड़ी बढ़त बनाए हुए हैं। 9 अक्टूबर 2026 को दोपहर तक सामने आए रुझानों के मुताबिक, नंदीग्राम में भाजपा प्रत्याशी हंसी रानी रथ 50 हजार से अधिक वोटों से आगे चल रही हैं। वहीं, रेजीनगर सीट पर भाजपा उम्मीदवार शंकरावह सरकार ने करीब 23 हजार वोटों की बढ़त बना रखी है। इन दोनों सीटों पर मुकाबले के दौरान कांग्रेस और आम जनता उन्नयन पार्टी के उम्मीदवार पीछे चल रहे हैं। मतगणना जारी रहने के कारण अंतिम परिणाम की स्थिति आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।

    नंदीग्राम विधानसभा सीट पर भाजपा की हंसी रानी रथ को अब तक 50 हजार से अधिक वोटों की बढ़त मिली है। कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान दूसरे स्थान पर हैं, जिन्हें करीब 13 हजार वोट मिले हैं। यह सीट शुभेंदु अधिकारी के विधायक पद से इस्तीफा देने के बाद खाली हुई थी। भाजपा ने यहां से हंसी रानी रथ को अपना उम्मीदवार बनाया है। शुरुआती मतगणना में भाजपा प्रत्याशी की बढ़त काफी बड़ी दिखाई दे रही है, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार उनसे पीछे हैं।

    नंदीग्राम सीट पर चुनावी मुकाबला उस समय चर्चा में आया, जब तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार ने अपना नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन दिया था। कांग्रेस उम्मीदवार को एक मामले में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन चुनाव लड़ने के लिए उन्हें जमानत मिल गई। इसके बाद इस सीट पर मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच केंद्रित हो गया। मतगणना के दौरान भाजपा प्रत्याशी की बढ़त ने इस मुकाबले को महत्वपूर्ण बना दिया है।

    रेजीनगर विधानसभा सीट पर भी भाजपा उम्मीदवार शंकरावह सरकार आगे चल रहे हैं। इस सीट पर उन्होंने करीब 23 हजार वोटों की बढ़त बनाई है। दूसरे स्थान पर आम जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख हुमायूं कबीर के बेटे गुलाम नबी आजाद हैं, जिन्हें अब तक करीब 12 हजार वोट मिले हैं। कांग्रेस उम्मीदवार अब्दुल्लाहिल काफी तीसरे स्थान पर चल रहे हैं। रेजीनगर सीट हुमायूं कबीर के विधायक पद छोड़ने के बाद खाली हुई थी। वह मुर्शिदाबाद जिले की नवादा विधानसभा सीट से विधायक हैं। इस सीट के परिणाम पर भी राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई है।

    नंदीग्राम और रेजीनगर, दोनों विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान हुआ था। मतगणना के दौरान सामने आए रुझानों में भाजपा उम्मीदवारों की बढ़त दर्ज की गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रेजीनगर में पांच दौर की गिनती पूरी हुई थी और दस दौर की गिनती बाकी थी। ऐसे में मतगणना पूरी होने से पहले बढ़त के आंकड़ों में बदलाव की संभावना बनी हुई थी। इसलिए इन रुझानों को अंतिम चुनाव परिणाम नहीं माना जा सकता।

    पश्चिम बंगाल की इन दोनों सीटों के अलावा पुडुचेरी और असम के चुनाव परिणाम भी चर्चा में रहे। पुडुचेरी की थट्टनचावडी विधानसभा सीट पर एनडीए समर्थित ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस के उम्मीदवार अशोक आनंद ने 13,358 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। कांग्रेस उम्मीदवार ई. विनायगम को 4,876 वोट मिले और वह दूसरे स्थान पर रहे। यह सीट मुख्यमंत्री एन. रंगासामी के विधायक पद से इस्तीफा देने के बाद खाली हुई थी। रंगासामी 9 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनाव में थट्टनचावडी और मंगलम, दोनों सीटों से जीते थे। बाद में उन्होंने थट्टनचावडी सीट छोड़ दी थी, जिसके बाद पार्टी ने अशोक आनंद को उम्मीदवार बनाया।

    असम की नगांव लोकसभा सीट पर उपचुनाव की मतगणना में भाजपा उम्मीदवार देवाशीष शर्मा 77 हजार से अधिक वोटों से आगे चल रहे थे। उन्हें दो लाख 26 हजार से अधिक वोट मिले थे। ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल करीब 1.49 लाख वोटों के साथ दूसरे स्थान पर थे, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार शिवमणि बोरा को लगभग 38 हजार वोट मिले थे। इन आंकड़ों के आधार पर नगांव में भी भाजपा की बढ़त दिखाई दे रही थी। हालांकि, उपलब्ध रुझानों के आधार पर ही स्थिति का आकलन किया जा सकता है और अंतिम नतीजों की पुष्टि आधिकारिक घोषणा के बाद होगी।

  • तृषा कृष्णन पर टिप्पणी को लेकर सीएम विजय का DMK पर हमला, मदुरंतकम उपचुनाव में भ्रष्टाचार पर भी साधा निशाना

    तृषा कृष्णन पर टिप्पणी को लेकर सीएम विजय का DMK पर हमला, मदुरंतकम उपचुनाव में भ्रष्टाचार पर भी साधा निशाना


    नई दिल्ली ।
    तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने मदुरंतकम विधानसभा उपचुनाव के प्रचार के दौरान डीएमके पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। तृषा कृष्णन से जुड़ी विवादित टिप्पणी के संदर्भ में उन्होंने डीएमके नेताओं पर निशाना साधते हुए पार्टी को चुनावी मुकाबले में अपनी मुख्य राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी बताया। इस दौरान उन्होंने एमके स्टालिन के लिए ‘स्वीट अंकल’ शब्द का इस्तेमाल किया और कहा कि राजनीतिक लड़ाई उनकी पार्टी टीवीके और डीएमके के बीच है।

    मदुरंतकम में होने वाला विधानसभा उपचुनाव 6 अक्टूबर को प्रस्तावित है। इस सीट से मारगाथम कुमारवेल को टीवीके ने उम्मीदवार बनाया है। वह इससे पहले एआईएडीएमके के टिकट पर विधायक चुनी गई थीं, लेकिन बाद में विधायक पद से इस्तीफा देकर टीवीके में शामिल हो गईं। इसी घटनाक्रम के बाद मदुरंतकम सीट पर उपचुनाव की स्थिति बनी है।

    प्रचार के दौरान विजय ने आरोप लगाया कि डीएमके के नेताओं ने पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां की थीं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का काम जनता की सेवा करना है और सरकार को चुनावी वादों तथा कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने के लिए काम करना चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार से जुड़े लोगों को नहीं छोड़ेगी।

    विजय ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर डीएमके को घेरते हुए कहा कि जब वह विधानसभा में भ्रष्टाचार के बारे में बात करते हैं तो विपक्ष उनसे सबूत मांगता है। उनके मुताबिक, भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाए जाने पर उन्हें विधानसभा में बोलने से रोकने और बदनाम करने की कोशिश की जाती है। उन्होंने पुराने मामलों का उल्लेख किए जाने पर डीएमके की आपत्ति का भी जिक्र किया।

    मुख्यमंत्री ने चुनावी मुकाबले को दो राजनीतिक ताकतों के बीच बताया। उन्होंने अपनी पार्टी टीवीके को ‘अच्छी ताकत’ और डीएमके को ‘बुरी ताकत’ के रूप में पेश किया। यह उनके चुनावी भाषण का राजनीतिक दावा था, जबकि उपचुनाव में कई दल अपने-अपने उम्मीदवारों के साथ मैदान में हैं।

    विजय ने एआईएडीएमके पर भी टिप्पणी करते हुए दावा किया कि वह अब डीएमके की एक शाखा जैसी हो गई है। उन्होंने कहा कि डीएमके के लिए उनका विरोध नया नहीं है और इसकी तुलना उन्होंने एमजीआर तथा जयललिता के दौर की राजनीतिक लड़ाई से की।

    तृषा कृष्णन से जुड़े विवाद का उल्लेख करते हुए उन्होंने डीएमके के नेताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया। इससे पहले इस मामले को लेकर टीवीके कार्यकर्ताओं और महिला विंग की ओर से शिकायत किए जाने की बात सामने आई थी। हालांकि इस पूरे विवाद में लगाए गए आरोपों को संबंधित पक्षों के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

    विजय सरकार द्वारा 24 अगस्त को परंदूर एयरपोर्ट परियोजना को रद्द किए जाने का मुद्दा भी उनके भाषण में सामने आया। सरकार ने इस फैसले के पीछे कृषि भूमि, किसानों की आजीविका और पर्यावरण से जुड़ी चिंताओं को आधार बताया था। परियोजना रद्द किए जाने के बाद डीएमके और सरकार के बीच राजनीतिक टकराव भी सामने आया।

    मदुरंतकम उपचुनाव के बीच विजय का यह अभियान टीवीके और डीएमके के बीच बढ़ती राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा है। आने वाले दिनों में दोनों पक्षों की ओर से चुनावी मुद्दों और सरकार के कामकाज को लेकर आरोप-प्रत्यारोप तेज होने की संभावना है।

  • रेजीनगर उपचुनाव से पहले हुमायूं कबीर का बड़ा ऐलान, बेटे के लिए प्रचार से बनाई दूरी, प्रशासन पर लगाए पक्षपात के आरोप

    रेजीनगर उपचुनाव से पहले हुमायूं कबीर का बड़ा ऐलान, बेटे के लिए प्रचार से बनाई दूरी, प्रशासन पर लगाए पक्षपात के आरोप

    नई दिल्ली ।पश्चिम बंगाल में रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव से पहले राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है। एजेयूपी प्रमुख हुमायूं कबीर ने अपने बेटे और पार्टी उम्मीदवार गुलाम नबी आजाद के लिए चुनाव प्रचार नहीं करने का ऐलान किया है। उन्होंने प्रशासन पर पक्षपात और दुश्मनी का आरोप लगाते हुए कहा कि वह अब जनता के फैसले को स्वीकार करेंगे।

    हुमायूं कबीर का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब रेजीनगर उपचुनाव को लेकर पहले ही कई राजनीतिक घटनाक्रम सामने आ चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों से वह मिलते हैं या बातचीत करते हैं, उनके खिलाफ गिरफ्तारी या धमकी जैसी कार्रवाई की जा रही है। कबीर के मुताबिक उनकी पार्टी के करीब 25 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है।

    उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में पार्टी को पारंपरिक तरीके से प्रचार करने की जरूरत नहीं है। वह सोशल मीडिया के माध्यम से मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचाएंगे और मतदान के दिन जमीन पर मौजूद रहेंगे। उनका कहना है कि पार्टी का चुनाव चिह्न टेबल है और मतदाता इसे पहचानते हैं।

    हुमायूं कबीर ने पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन का रवैया उनकी पार्टी के प्रति पक्षपातपूर्ण है। उनका कहना था कि सरकारी अधिकारियों को संविधान और कानून के मुताबिक काम करना चाहिए, न कि किसी राजनीतिक दल के पक्ष में। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी ऐसे किसी दबाव के सामने पीछे नहीं हटेगी।

    इस बीच हुमायूं कबीर के प्रचार से दूरी बनाने के बाद उनके बेटे गुलाम नबी आजाद ने भी प्रचार से दूर रहने का फैसला किया है। इससे रेजीनगर उपचुनाव में एजेयूपी की चुनावी रणनीति को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। पार्टी की ओर से अब मतदाताओं तक पहुंचने के लिए सोशल मीडिया और मतदान के दिन की सक्रियता पर जोर दिया जा रहा है।

    रेजीनगर उपचुनाव में तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी को लेकर भी हाल में बड़ा घटनाक्रम सामने आया था। उन्होंने पहले चुनाव से अपना नाम वापस लेने की घोषणा की थी। कुछ समय बाद उन्होंने अपना फैसला बदल दिया और चुनाव मैदान में बने रहने का ऐलान किया। इसके बाद उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो गईं।

    रेजीनगर सीट हुमायूं कबीर के लिए भी महत्वपूर्ण रही है। हालिया विधानसभा चुनाव में उन्होंने इस सीट से जीत दर्ज की थी। उन्हें करीब 51 प्रतिशत वोट मिले थे और उन्होंने 58,876 मतों के अंतर से जीत हासिल की थी। उन्होंने नौदा विधानसभा सीट से भी चुनाव जीता था। बाद में उन्होंने रेजीनगर सीट छोड़ने का फैसला किया, जिसके कारण यहां उपचुनाव की स्थिति बनी।

    अब 6 अक्टूबर को होने वाले रेजीनगर उपचुनाव से पहले हुमायूं कबीर का प्रचार से हटना चुनावी समीकरणों में एक नया घटनाक्रम है। उनके आरोपों पर प्रशासन और अन्य राजनीतिक पक्षों की प्रतिक्रियाएं भी आगे महत्वपूर्ण होंगी। फिलहाल एजेयूपी ने जनता के फैसले को स्वीकार करने की बात कही है और चुनावी प्रक्रिया के अगले चरण पर नजर बनी हुई है।

  • पश्चिम बंगाल उपचुनाव से पहले शुभेंदु अधिकारी की अल्पसंख्यक मतदाताओं से अपील, नंदीग्राम में बड़ी जीत का दावा

    पश्चिम बंगाल उपचुनाव से पहले शुभेंदु अधिकारी की अल्पसंख्यक मतदाताओं से अपील, नंदीग्राम में बड़ी जीत का दावा

    नई दिल्ली ।पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अल्पसंख्यक मतदाताओं से विकास के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी के साथ आने की अपील की है। उन्होंने दोनों सीटों के अल्पसंख्यक मतदाताओं से कहा कि 6 अक्टूबर को होने वाला चुनाव उनके लिए एक तरह की परीक्षा है और उन्हें तय करना है कि वे सरकार के साथ रहना चाहते हैं या नहीं।

    शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि मतदाताओं को धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि विकास के मुद्दे पर फैसला करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी सरकार राज्य में विकास के काम को आगे बढ़ाएगी। नंदीग्राम और रेजीनगर दोनों सीटों पर अल्पसंख्यक मतदाताओं की अच्छी संख्या है, इसलिए अधिकारी की अपील चुनावी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है।

    अधिकारी ने कहा कि दोनों विधानसभा क्षेत्रों के अल्पसंख्यक मतदाताओं के पास इस उपचुनाव में अपनी राजनीतिक स्थिति स्पष्ट करने का अवसर है। उनके अनुसार, यदि मतदाता सरकार के साथ विकास के लिए आगे बढ़ना चाहते हैं तो उन्हें इस चुनाव में अपना फैसला बताना होगा। उन्होंने 6 अक्टूबर के मतदान को सरकार के साथ समर्थन और सहयोग की परीक्षा के रूप में पेश किया।

    नंदीग्राम सीट से बीजेपी ने हसीरानी रथ को उम्मीदवार बनाया है। वह पार्टी नेता चंद्रनाथ रथ की मां हैं, जो शुभेंदु अधिकारी के पूर्व सहयोगी और निजी सहायक रह चुके थे। चंद्रनाथ रथ की मई में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हसीरानी रथ ने मंगलवार को हल्दिया में अपना नामांकन दाखिल किया। इस दौरान शुभेंदु अधिकारी भी मौजूद रहे।

    उपचुनाव के लिए नंदीग्राम और रेजीनगर में अलग-अलग राजनीतिक दलों ने उम्मीदवार उतारे हैं। नंदीग्राम में बीजेपी ने हसीरानी रथ को मैदान में उतारा है, जबकि रेजीनगर से पार्टी ने साखराव सरकार को उम्मीदवार बनाया है। दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान होना है और मतगणना 9 अक्टूबर को होगी।

    शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम में बीजेपी की जीत को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि पिछली बार वह करीब 10 हजार वोटों के अंतर से जीते थे, जबकि इस बार पार्टी को 50 हजार से अधिक वोटों की बढ़त मिल सकती है। उन्होंने अपने इस दावे के समर्थन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काम को लेकर जनता के समर्थन का हवाला दिया।

    नंदीग्राम में बीजेपी उम्मीदवार हसीरानी रथ ने भी चुनाव को लेकर जीत का भरोसा जताया है। वहीं, उनके बेटे चंद्रनाथ रथ की हत्या का मामला भी चुनावी चर्चा का हिस्सा बना हुआ है। इस मामले की जांच पहले राज्य पुलिस और विशेष जांच दल ने की थी, जिसके बाद जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंप दी गई।

    नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव ऐसे समय हो रहे हैं, जब दोनों सीटें खाली हुई हैं। नंदीग्राम सीट शुभेंदु अधिकारी और रेजीनगर सीट हुमायूं कबीर के दूसरी सीट बरकरार रखने के कारण खाली हुई। अब दोनों क्षेत्रों में उपचुनाव के जरिए नए विधायक का चुनाव किया जाएगा।

    अधिकारी की अल्पसंख्यक मतदाताओं से अपील के बीच चुनावी मुकाबले में विकास, सरकार के कामकाज और अलग-अलग दलों के उम्मीदवार प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं। वहीं, नंदीग्राम में बीजेपी की संभावित जीत के अंतर को लेकर अधिकारी द्वारा किया गया दावा चुनावी नतीजे आने के बाद ही स्पष्ट होगा।

  • Update: तीन राज्यों के उपचुनाव परिणाम : दतिया में Congress, गुजरात में BJP, बांकीपुर में प्रशांत किशोर जीते

    Update: तीन राज्यों के उपचुनाव परिणाम : दतिया में Congress, गुजरात में BJP, बांकीपुर में प्रशांत किशोर जीते

    नई दिल्ली। बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात की तीन विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों के परिणाम आ गए हैं। मध्य प्रदेश की दतिया सीट पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की, जबकि गुजरात की मंजलपुर सीट भाजपा के खाते में गई। वहीं बिहार की बांकीपुर सीट से जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने जीत दर्ज की है।

    बांकीपुर से प्रशांत किशोर जीते
    बिहार के बांकीपुर में नितिन नवीन की सीट पर प्रशांत किशोर जीत गए हैं। जन सुराज पार्टी के फाउंडर प्रशांत किशोर 19,324 वोटों से जीते हैं। प्रशांत को 64,151 वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी नीरज कुमार को 44,827 वोट मिले हैं। बांकीपुर सीट भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन का गढ़ मानी जाती है। उनके राज्यसभा जाने के बाद यह सीट खाली हुई थी, जिसके चलते उपचुनाव कराया गया।

    जीत के बाद प्रशांत किशोर ने कहा कि उनके विधायक बनने से बांकीपुर रातोंरात नहीं बदलेगा, लेकिन अगले दो-तीन महीनों में लोग सकारात्मक बदलाव जरूर महसूस करेंगे। उन्होंने भाजपा नेतृत्व से बिहार के लिए बेहतर मुख्यमंत्री चुनने की भी अपील की।

    दतिया में कांग्रेस की लगातार दूसरी जीत
    मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने भाजपा के आशुतोष तिवारी को 6,056 वोटों से हराकर जीत दर्ज की। भाजपा ने इस सीट पर पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया था। दिलचस्प बात यह रही कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा के मतदान केंद्र बूथ नंबर-121 पर भी कांग्रेस को बढ़त मिली। यहां कांग्रेस को 291 और भाजपा को 264 वोट मिले। जीत के बाद घनश्याम सिंह ने कहा कि यह जनादेश देशभर में संदेश देगा और जनता बदलाव चाहती है।

    गुजरात के मंजलपुर में भाजपा की जीत
    गुजरात की मंजलपुर विधानसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार सतेन्द्रभाई (सतीश) पटेल ने कांग्रेस के भिखाभाई रबारी को 30,630 वोटों के अंतर से हराया। जीत के बाद सतीश पटेल ने मतदाताओं का आभार जताते हुए कहा कि जनता ने उन पर भी वैसा ही भरोसा जताया है जैसा पहले उनके नेतृत्व पर जताया था। वहीं कांग्रेस उम्मीदवार भिखाभाई रबारी ने हार स्वीकार करते हुए मतदान के अंतिम चरण में भय का माहौल बनाए जाने का आरोप लगाया।

    30 जुलाई को हुआ था मतदान
    तीनों विधानसभा सीटों पर 30 जुलाई को मतदान हुआ था। गुजरात की मंजलपुर सीट पर 37.05 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। तीनों राज्यों के उपचुनावों के नतीजों को आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

  • तीन राज्यों के उपचुनाव: दतिया में कांग्रेस, गुजरात में भाजपा की जीत, बांकीपुर में प्रशांत किशोर की बड़ी बढ़त

    तीन राज्यों के उपचुनाव: दतिया में कांग्रेस, गुजरात में भाजपा की जीत, बांकीपुर में प्रशांत किशोर की बड़ी बढ़त

    नई दिल्ली। बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात की तीन विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों के नतीजे सामने आ गए हैं। मध्य प्रदेश की दतिया सीट पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की, जबकि गुजरात की मंजलपुर सीट भाजपा के खाते में गई। वहीं बिहार की बांकीपुर सीट पर मतगणना के दौरान जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर निर्णायक बढ़त बनाए हुए हैं।

    बांकीपुर में प्रशांत किशोर आगे
    बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर 27वें राउंड की मतगणना तक जनसुराज पार्टी के उम्मीदवार प्रशांत किशोर को 59,213 वोट मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार को 39,794 वोट प्राप्त हुए। इस तरह प्रशांत किशोर 19,419 वोटों से आगे चल रहे हैं। बांकीपुर सीट भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन का गढ़ मानी जाती है। उनके राज्यसभा जाने के बाद यह सीट खाली हुई थी, जिसके चलते उपचुनाव कराया गया।

    बढ़त के बाद प्रशांत किशोर ने कहा कि उनके विधायक बनने से बांकीपुर रातोंरात नहीं बदलेगा, लेकिन अगले दो-तीन महीनों में लोग सकारात्मक बदलाव जरूर महसूस करेंगे। उन्होंने भाजपा नेतृत्व से बिहार के लिए बेहतर मुख्यमंत्री चुनने की भी अपील की।

    दतिया में कांग्रेस की लगातार दूसरी जीत

    मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने भाजपा के आशुतोष तिवारी को 6,056 वोटों से हराकर जीत दर्ज की। भाजपा ने इस सीट पर पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया था। दिलचस्प बात यह रही कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा के मतदान केंद्र बूथ नंबर-121 पर भी कांग्रेस को बढ़त मिली। यहां कांग्रेस को 291 और भाजपा को 264 वोट मिले। जीत के बाद घनश्याम सिंह ने कहा कि यह जनादेश देशभर में संदेश देगा और जनता बदलाव चाहती है।

    गुजरात के मंजलपुर में भाजपा की बड़ी जीत
    गुजरात की मंजलपुर विधानसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार सतेन्द्रभाई (सतीश) पटेल ने कांग्रेस के भिखाभाई रबारी को 30,630 वोटों के अंतर से हराया। जीत के बाद सतीश पटेल ने मतदाताओं का आभार जताते हुए कहा कि जनता ने उन पर भी वैसा ही भरोसा जताया है जैसा पहले उनके नेतृत्व पर जताया था। वहीं कांग्रेस उम्मीदवार भिखाभाई रबारी ने हार स्वीकार करते हुए मतदान के अंतिम चरण में भय का माहौल बनाए जाने का आरोप लगाया।

    30 जुलाई को हुआ था मतदा
    न
    तीनों विधानसभा सीटों पर 30 जुलाई को मतदान हुआ था। गुजरात की मंजलपुर सीट पर 37.05 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। तीनों राज्यों के उपचुनावों के नतीजों को आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

  • Datia by-election: दतिया विधानसभा उपचुनाव में शाम 5 बजे तक 69.36% मतदान

    Datia by-election: दतिया विधानसभा उपचुनाव में शाम 5 बजे तक 69.36% मतदान

    भोपाल/दतिया। मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए गुरुवार को सुबह 7 बजे से मतदान जारी है। जिला निर्वाचन कार्यालय के अनुसार, शाम 5 बजे तक 69.36 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। मतदान केंद्रों पर सुबह से ही मतदाताओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं और पूरे क्षेत्र में मतदान को लेकर उत्साह बना रहा। मतदान शाम 6 बजे तक जारी रहेगा।

    दतिया विधानसभा क्षेत्र के 291 मतदान केंद्रों पर वोट डाले जा रहे हैं। निर्वाचन आयोग ने स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती के साथ संवेदनशील और अति संवेदनशील मतदान केंद्रों पर विशेष निगरानी रखी गई।

    मतदान के दौरान कांग्रेस ने सिरोल और जिगना क्षेत्रों में फर्जी मतदान की आशंका जताते हुए शिकायत दर्ज कराई। कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह स्वयं मौके पर पहुंचे और अधिकारियों से चर्चा की। वहीं, पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि चुनाव में हार की आशंका होने पर कांग्रेस इस तरह के आरोप लगाती है और यह उसकी हताशा को दर्शाता है।

    उधर, बसई क्षेत्र के लखनपुर गांव में मुख्य सड़क निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों ने पहले मतदान का बहिष्कार किया और “सड़क नहीं तो वोट नहीं” के नारे लगाए। बाद में एसडीएम अशोक अवस्थी की समझाइश के बाद करीब 50 ग्रामीणों ने मतदान किया।

    इसी बीच रामसागर गांव के एक मतदान केंद्र से पुलिस कांग्रेस के एक पोलिंग एजेंट को अपने साथ ले गई। उस पर मतदाताओं से बातचीत करने का आरोप लगाया गया था। कांग्रेस नेताओं के थाने पहुंचने और विरोध दर्ज कराने के बाद पुलिस ने एजेंट को छोड़ दिया।

    इस उपचुनाव में 23 उम्मीदवार मैदान में हैं, हालांकि सीधा मुकाबला कांग्रेस के घनश्याम सिंह और भाजपा के आशुतोष तिवारी के बीच माना जा रहा है। निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार 3 अगस्त को मतगणना होगी और उसी दिन परिणाम घोषित किए जाएंगे।

    गौरतलब है कि दतिया विधानसभा सीट कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को सहकारी ग्रामीण विकास बैंक फर्जीवाड़ा मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट से दो वर्ष की सजा मिलने के बाद रिक्त हुई थी। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर 80.2 प्रतिशत मतदान हुआ था। तब राजेंद्र भारती ने भाजपा के नरोत्तम मिश्रा को 7,742 मतों से पराजित किया था। उन्हें 88,977 और नरोत्तम मिश्रा को 81,235 वोट मिले थे, जबकि NOTA को 1,452 मत प्राप्त हुए थे।

  • बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की सीधी एंट्री, भाजपा के मजबूत गढ़ में मुकाबले ने बढ़ाया बिहार की राजनीति का तापमान

    बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की सीधी एंट्री, भाजपा के मजबूत गढ़ में मुकाबले ने बढ़ाया बिहार की राजनीति का तापमान

    नई दिल्ली । बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट से होने वाले उपचुनाव में चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। पार्टी की कोर कमेटी की बैठक के बाद उनके नाम पर अंतिम मुहर लगाई गई। इस घोषणा के साथ ही राज्य की राजनीति में उपचुनाव को लेकर नई हलचल शुरू हो गई है और सभी प्रमुख दलों की रणनीतियों पर नजरें टिक गई हैं।

    बांकीपुर विधानसभा सीट भाजपा के लिए लंबे समय से महत्वपूर्ण मानी जाती रही है। यह सीट पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई है। राजधानी पटना के प्रमुख शहरी क्षेत्र में स्थित इस सीट पर वर्षों से भाजपा का मजबूत प्रभाव रहा है। ऐसे में प्रशांत किशोर के चुनाव मैदान में उतरने से मुकाबला पहले की तुलना में अधिक दिलचस्प माना जा रहा है।

    जन सुराज की ओर से आयोजित प्रेस वार्ता में पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि स्थानीय लोगों की राय और संगठन की सहमति के आधार पर प्रशांत किशोर को उम्मीदवार बनाया गया है। पार्टी का कहना है कि वह इस चुनाव को केवल एक सीट का मुकाबला नहीं बल्कि बेहतर राजनीतिक विकल्प प्रस्तुत करने के अवसर के रूप में देख रही है।

    उम्मीदवारी की घोषणा के बाद प्रशांत किशोर ने कहा कि यदि जनता उन्हें अपना प्रतिनिधि चुनती है तो वह विधानसभा में लोगों की आवाज को मजबूती से उठाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने दावा किया कि जन सुराज का उद्देश्य केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि जनता से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से सदन तक पहुंचाना है। उन्होंने यह भी कहा कि जनता की अपेक्षाओं को पूरा करना उनकी प्राथमिकता होगी।

    प्रशांत किशोर लंबे समय तक चुनावी रणनीतिकार के रूप में राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहे, लेकिन अब यह पहला अवसर है जब उन्होंने स्वयं चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया है। इससे पहले भी उनके चुनाव लड़ने को लेकर कई बार चर्चाएं हुई थीं, लेकिन उन्होंने प्रत्यक्ष राजनीति में कदम नहीं रखा था। इस बार उन्होंने औपचारिक रूप से चुनावी मुकाबले में उतरकर अपनी राजनीतिक भूमिका को नया आयाम दिया है।

    राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं कि उपचुनाव में विपक्षी दल किस रणनीति के साथ आगे बढ़ेंगे। कुछ राजनीतिक संकेत ऐसे भी मिल रहे हैं कि कुछ विपक्षी दल अपने उम्मीदवार उतारने के बजाय साझा रणनीति पर विचार कर सकते हैं। हालांकि, इस संबंध में अभी तक किसी दल की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

    बांकीपुर विधानसभा सीट पर मतदान 30 जुलाई को प्रस्तावित है। भाजपा ने अभी अपने उम्मीदवार के नाम की घोषणा नहीं की है, जिसके कारण राजनीतिक उत्सुकता और बढ़ गई है। आने वाले दिनों में उम्मीदवारों की घोषणा, चुनाव प्रचार और स्थानीय मुद्दों के साथ यह उपचुनाव बिहार की राजनीति का प्रमुख केंद्र बनने की संभावना रखता है। सभी दलों की नजरें अब इस प्रतिष्ठित सीट पर होने वाले मुकाबले और उसके संभावित राजनीतिक संदेश पर टिकी हुई हैं।