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  • क्या माचा टी सच में घटाती है वजन? जानिए फैट बर्न और मेटाबॉलिज्म पर इसका असली असर

    क्या माचा टी सच में घटाती है वजन? जानिए फैट बर्न और मेटाबॉलिज्म पर इसका असली असर

    नई दिल्ली । माचा टी पिछले कुछ वर्षों में हेल्थ और फिटनेस से जुड़ी चर्चाओं में तेजी से लोकप्रिय हुई है। खासतौर पर वजन घटाने की कोशिश कर रहे लोगों के बीच इसे ऐसी ड्रिंक के तौर पर देखा जाता है, जो मेटाबॉलिज्म बढ़ाकर फैट बर्न करने में मदद कर सकती है। सोशल मीडिया पर इसके कई तरह के दावे भी सामने आते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार माचा को वजन घटाने का चमत्कारी उपाय मानना सही नहीं है।

    माचा और सामान्य ग्रीन टी एक ही पौधे कैमेलिया साइनेंसिस से तैयार होती हैं, लेकिन दोनों के इस्तेमाल का तरीका अलग है। ग्रीन टी में पत्तियों को गर्म पानी में भिगोकर उनका अर्क लिया जाता है और बाद में पत्तियां अलग कर दी जाती हैं। वहीं माचा में विशेष तरीके से तैयार की गई चाय की पत्तियों को बारीक पाउडर में बदलकर पानी में मिलाया जाता है। इस वजह से माचा पीने वाले व्यक्ति पूरी पत्ती का सेवन करते हैं।

    पूरी पत्ती के सेवन के कारण माचा में कैटेचिन, खासकर ईजीसीजी, कैफीन और अन्य एंटीऑक्सीडेंट कंपाउंड मिल सकते हैं। इन तत्वों को शरीर में ऊर्जा खर्च और फैट ऑक्सीडेशन से जोड़कर देखा गया है। कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों में कैटेचिन और कैफीन के संयोजन से ऊर्जा खर्च में मामूली बढ़ोतरी के संकेत मिले हैं। हालांकि इसका प्रभाव इतना बड़ा नहीं माना जाता कि केवल माचा पीने से तेजी से वजन कम हो जाए।

    माचा में मौजूद कैफीन और ईजीसीजी शारीरिक गतिविधि के दौरान शरीर द्वारा ऊर्जा के इस्तेमाल और फैट के ऑक्सीडेशन को कुछ हद तक प्रभावित कर सकते हैं। कैफीन सतर्कता बढ़ाने में भी मदद कर सकता है, जिससे कुछ लोगों को व्यायाम के दौरान सक्रिय रहने में सहायता मिल सकती है। इसके अलावा माचा में एल-थियानाइन नामक अमीनो एसिड भी होता है, जो कैफीन के प्रभाव को कुछ हद तक संतुलित करने से जुड़ा माना जाता है।

    हालांकि वजन और मेटाबॉलिज्म पर सिर्फ एक पेय का प्रभाव सीमित होता है। शरीर की कैलोरी जरूरत और ऊर्जा खर्च उम्र, आनुवंशिकता, मांसपेशियों की मात्रा, हार्मोन, खान-पान और शारीरिक गतिविधि जैसे कई कारकों पर निर्भर करते हैं। इसलिए माचा को संतुलित डाइट और नियमित व्यायाम का विकल्प नहीं माना जा सकता।

    वजन कम करने के लिए लंबे समय तक कैलोरी की जरूरत से कम ऊर्जा लेना, पर्याप्त प्रोटीन और पौष्टिक भोजन करना, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और लगातार स्वस्थ आदतें बनाए रखना ज्यादा महत्वपूर्ण है। यदि कोई व्यक्ति मीठे या अधिक कैलोरी वाले पेय की जगह बिना चीनी वाली माचा टी लेता है, तो इससे कुल कैलोरी सेवन कम करने में मदद मिल सकती है।

    माचा की मात्रा को लेकर भी सावधानी जरूरी है। सामान्य स्वस्थ वयस्कों के लिए रोजाना एक से दो सर्विंग सीमित मात्रा में लेना आमतौर पर व्यावहारिक माना जाता है, लेकिन इसमें मौजूद कैफीन को ध्यान में रखना चाहिए। अधिक सेवन से कुछ लोगों में बेचैनी, नींद में परेशानी, सिरदर्द, दिल की धड़कन तेज होने या पाचन संबंधी दिक्कत जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

    गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं, हाई ब्लड प्रेशर या हृदय संबंधी समस्या वाले लोगों और नियमित रूप से कुछ दवाएं लेने वालों को माचा को रोजाना की डाइट में शामिल करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है। कुल मिलाकर, माचा एक पौष्टिक पेय का हिस्सा हो सकती है, लेकिन स्वस्थ वजन हासिल करने और बनाए रखने की सफलता किसी एक ड्रिंक पर नहीं, बल्कि संतुलित खान-पान और नियमित जीवनशैली पर निर्भर करती है।

  • माइग्रेन का दर्द बढ़ा सकती हैं रोजमर्रा की ये पांच गलतियां, समय रहते आदतों में बदलाव से मिल सकती है राहत

    माइग्रेन का दर्द बढ़ा सकती हैं रोजमर्रा की ये पांच गलतियां, समय रहते आदतों में बदलाव से मिल सकती है राहत


    नई दिल्ली ।
    भागदौड़ भरी जीवनशैली में सिरदर्द की समस्या आम हो गई है, लेकिन बार बार होने वाला तेज सिरदर्द हमेशा सामान्य नहीं माना जा सकता। कुछ लोगों में सिरदर्द के साथ रोशनी और तेज आवाज से परेशानी, जी मिचलाना, कमजोरी या असहजता जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। ऐसी स्थिति को माइग्रेन से जोड़ा जाता है। यह केवल सिर में दर्द की समस्या नहीं है, बल्कि तंत्रिका तंत्र से जुड़ी एक जटिल स्थिति है।

    माइग्रेन से परेशान लोगों में दर्द की तीव्रता और इसके कारण अलग अलग हो सकते हैं। हालांकि, रोजमर्रा की कुछ आदतें कई लोगों में इसके लक्षणों को बढ़ाने का काम कर सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित रखने और व्यक्तिगत ट्रिगर को पहचानने से माइग्रेन की परेशानी को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

    शरीर में पानी की कमी माइग्रेन के दौरान परेशानी बढ़ाने वाले कारणों में शामिल हो सकती है। पर्याप्त तरल पदार्थ नहीं मिलने पर थकान, चक्कर और सिर में भारीपन जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं। इसलिए पूरे दिन नियमित अंतराल पर पानी पीना जरूरी है। पानी के अलावा नारियल पानी, सूप और पानी से भरपूर फल भी शरीर में तरल पदार्थ की जरूरत पूरी करने में मदद कर सकते हैं।

    नींद की अनदेखी करना भी माइग्रेन से परेशान लोगों के लिए समस्या बढ़ा सकता है। कम सोना या रोज अलग अलग समय पर सोने की आदत शरीर की प्राकृतिक दिनचर्या को प्रभावित कर सकती है। इसलिए सोने और जागने का समय नियमित रखना बेहतर माना जाता है। वयस्कों के लिए सामान्य तौर पर सात से नौ घंटे की नींद पर्याप्त मानी जाती है, हालांकि जरूरत व्यक्ति के अनुसार अलग हो सकती है।

    चाय और कॉफी में मौजूद कैफीन का असर भी हर व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होता। सीमित मात्रा में कैफीन कुछ लोगों को अलग तरह से प्रभावित कर सकता है, लेकिन इसका अधिक सेवन कुछ लोगों में माइग्रेन को बढ़ा सकता है। इसी तरह शराब भी कई लोगों के लिए सिरदर्द का ट्रिगर बन सकती है। यदि किसी विशेष पेय के सेवन के बाद बार बार माइग्रेन शुरू होता है, तो उस व्यक्तिगत ट्रिगर से बचना उपयोगी हो सकता है।

    लंबे समय तक मोबाइल, कंप्यूटर या टीवी की स्क्रीन देखते रहना भी कुछ लोगों में सिरदर्द की परेशानी बढ़ा सकता है। खासकर माइग्रेन के दौरान तेज रोशनी और स्क्रीन की चमक असहजता बढ़ा सकती है। ऐसे में स्क्रीन की चमक कम रखना, बीच बीच में आंखों को आराम देना और जरूरत पड़ने पर शांत तथा कम रोशनी वाले वातावरण में रहना मददगार हो सकता है।

    खाने के समय में लगातार बदलाव और लंबे समय तक खाली पेट रहना भी कुछ लोगों में माइग्रेन को ट्रिगर कर सकता है। इसलिए भोजन को बहुत देर तक टालने के बजाय नियमित अंतराल पर संतुलित भोजन करना बेहतर है। आहार में फल, हरी सब्जियां, पर्याप्त प्रोटीन और जरूरी पोषक तत्व शामिल किए जा सकते हैं।

    बहुत अधिक तला हुआ भोजन, अत्यधिक मसालेदार चीजें या कोई ऐसा खाद्य पदार्थ जिससे व्यक्ति को बार बार परेशानी होती है, उससे दूरी रखना उपयोगी हो सकता है। हालांकि, सभी लोगों के लिए माइग्रेन के ट्रिगर समान नहीं होते। इसलिए किस भोजन या आदत के बाद समस्या बढ़ती है, इसका ध्यान रखना महत्वपूर्ण है।

    माइग्रेन को नियंत्रित करने के लिए केवल किसी एक आदत में बदलाव पर्याप्त नहीं हो सकता। नियमित नींद, पर्याप्त पानी, समय पर भोजन, संतुलित जीवनशैली और व्यक्तिगत ट्रिगर की पहचान मिलकर बेहतर प्रबंधन में मदद कर सकते हैं। यदि सिरदर्द बार बार हो रहा हो, बहुत तेज हो या उसके साथ असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।