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  • California Child Marriage Ban: नाबालिगों की शादी पर पूरी तरह लगा ब्रेक 1 जनवरी 2027 से बदल जाएगा कैलिफोर्निया का कानून

    California Child Marriage Ban: नाबालिगों की शादी पर पूरी तरह लगा ब्रेक 1 जनवरी 2027 से बदल जाएगा कैलिफोर्निया का कानून


    नई दिल्ली। कैलिफोर्निया में बाल विवाह को लेकर बड़ा कानूनी बदलाव किया गया है। राज्य में अब 18 साल से कम उम्र के किसी भी व्यक्ति की शादी पर पूरी तरह रोक लग जाएगी। गवर्नर गेविन न्यूसम ने 30 सितंबर 2026 को असेंबली बिल 1267 पर हस्ताक्षर कर इसे कानून का रूप दे दिया। यह नया कानून 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होगा। इसके बाद शादी या डोमेस्टिक पार्टनरशिप के लिए दोनों पक्षों की उम्र कम से कम 18 साल होना जरूरी होगा और इस नियम में किसी तरह की छूट नहीं दी जाएगी।

    इस कानून के लागू होने के बाद कैलिफोर्निया उन राज्यों की सूची में शामिल हो जाएगा जहां नाबालिगों की शादी पर बिना किसी अपवाद के रोक है। बिल को सांता क्रूज की असेंबली सदस्य गेल पेलरिन ने पेश किया था। बाल विवाह के खिलाफ काम करने वाली संस्था अनचेन्ड एट लास्ट और कैलिफोर्निया कमीशन ऑन द स्टेटस ऑफ वुमन एंड गर्ल्स ने भी इसका समर्थन किया। कानून पर हस्ताक्षर के दौरान मॉडल और बाल विवाह से बची कोर्टनी स्टोडेन भी मौजूद थीं।

    स्टोडेन का अनुभव भी इस कानून की चर्चा का अहम हिस्सा रहा है। उनकी शादी 16 साल की उम्र में अभिनेता डग हचिंसन से हुई थी जो उस समय उनसे काफी बड़े थे। उनके माता-पिता ने इस शादी की अनुमति दी थी। बाद में स्टोडेन ने इस रिश्ते को गलत और शोषणकारी बताया। कानून बनने के बाद उन्होंने बाल विवाह के खिलाफ अभियान चलाने वाले लोगों का आभार जताया और कहा कि देश के अन्य राज्यों में भी बच्चों की सुरक्षा के लिए ऐसे प्रयास जारी रहने चाहिए।

    नए कानून से पहले कैलिफोर्निया में नाबालिगों की शादी कुछ परिस्थितियों में संभव थी। माता-पिता की मंजूरी और सुपीरियर कोर्ट के जज के आदेश के बाद कम उम्र में शादी की अनुमति मिल सकती थी। कैलिफोर्निया उन तीन राज्यों में शामिल था जहां विवाह के लिए स्पष्ट न्यूनतम उम्र निर्धारित नहीं थी। अन्य दो राज्य न्यू मैक्सिको और मिसिसिपी बताए गए हैं। बाल विवाह के विरोध में काम करने वाले संगठनों का तर्क रहा है कि नाबालिगों के लिए विवाह की स्वतंत्र और पूरी सहमति का सवाल जटिल होता है।

    कैलिफोर्निया में इस बदलाव की कोशिश पहले भी हो चुकी है। करीब एक दशक पहले भी बाल विवाह पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का प्रयास किया गया था लेकिन उस समय प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका। 2018 के बाद अमेरिका में बाल विवाह के खिलाफ अभियान तेज हुआ। गवर्नर कार्यालय के अनुसार कैलिफोर्निया से पहले 17 राज्यों में बिना किसी अपवाद के बाल विवाह पर रोक लागू थी। अब कैलिफोर्निया 18वां राज्य बन जाएगा जबकि अमेरिका के 32 राज्यों में अभी भी कुछ शर्तों के तहत नाबालिगों की शादी कानूनी हो सकती है।

    आंकड़ों के मुताबिक 2000 से 2021 के बीच कैलिफोर्निया में करीब 35 हजार ऐसी शादियां दर्ज हुईं जिनमें कम से कम एक पक्ष नाबालिग था। बाल विवाह विरोधी संगठनों के अनुसार इसी अवधि में पूरे अमेरिका में करीब 3 लाख 14 हजार नाबालिगों की कानूनी शादी हुई। इन आंकड़ों को लेकर अलग-अलग संस्थाओं के अध्ययन और कानूनी परिभाषाओं में अंतर हो सकता है। नए कानून के बाद कैलिफोर्निया में 18 साल से कम उम्र के लोगों के विवाह को लेकर कानूनी स्थिति पहले की तुलना में पूरी तरह बदल जाएगी।

  • कैलिफोर्निया मस्जिद हमला: कट्टरपंथी युवकों ने बरसाईं गोलियां, 3 की मौत; 140 बच्चों की जान बची

    कैलिफोर्निया मस्जिद हमला: कट्टरपंथी युवकों ने बरसाईं गोलियां, 3 की मौत; 140 बच्चों की जान बची



    नई दिल्ली। अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य में स्थित एक मस्जिद पर हुए भीषण हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस हमले में तीन लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई, जबकि दो किशोर हमलावरों ने बाद में खुद को भी गोली मार ली। जांच एजेंसियों के अनुसार दोनों हमलावर ऑनलाइन कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित थे और श्वेत वर्चस्ववादी सोच का समर्थन करते थे। अधिकारियों का कहना है कि यह हमला अमेरिका में बढ़ती धार्मिक घृणा और चरमपंथी हिंसा का गंभीर उदाहरण है।

    पुलिस ने हमलावरों की पहचान 17 वर्षीय केन क्लार्क और 18 वर्षीय कैलेब वाजक्वेज के रूप में की है। जांच में सामने आया कि दोनों पहली बार इंटरनेट के जरिए मिले थे और बाद में एक-दूसरे के संपर्क में आए। एफबीआई के सैन डिएगो प्रमुख एजेंट मार्क रेमिली ने बताया कि दोनों युवकों ने ऑनलाइन मंचों पर कट्टरपंथी विचार अपनाए थे। उनके दस्तावेजों और लेखों में मुसलमानों, यहूदियों, अश्वेत समुदाय, महिलाओं और एलजीबीटीक्यू+ समुदाय के खिलाफ घृणित टिप्पणियां मिली हैं। दोनों ने श्वेत वर्चस्ववादी विचारधारा का समर्थन करते हुए यह दावा किया था कि श्वेत लोगों का अस्तित्व खतरे में है।

    जांच एजेंसियों के मुताबिक हमलावरों ने खुद को न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च मस्जिद हमले के आरोपी ब्रेंटन टैरेंट का “बेटा” बताया था। 2019 में क्राइस्टचर्च की मस्जिदों पर हुए हमले में 51 लोगों की मौत हुई थी। अधिकारियों को हमलावरों के पास से नाजी प्रतीक, चरमपंथी साहित्य और कई ऑनलाइन घोषणापत्र भी मिले हैं। एक हमलावर ने अपने लेखों में मानसिक तनाव और महिलाओं द्वारा अस्वीकार किए जाने की बातें भी लिखी थीं।

    हमले के दौरान मस्जिद के सुरक्षा गार्ड अमीन अब्दुल्ला ने बहादुरी दिखाते हुए हमलावरों का सामना किया। अधिकारियों के अनुसार अब्दुल्ला ने हमलावरों को मस्जिद के अंदर मौजूद बच्चों तक पहुंचने से रोकने के लिए अपनी जान दांव पर लगा दी। मस्जिद परिसर में मौजूद करीब 140 स्कूली बच्चों को सुरक्षित बचा लिया गया। इमाम ताहा हस्सान ने बताया कि अमीन अब्दुल्ला ने गोलीबारी के बीच रेडियो पर लॉकडाउन की घोषणा की और हमलावरों को रोकने की कोशिश करते रहे। घायल होने के बावजूद उन्होंने जवाबी फायरिंग जारी रखी, जिससे हमलावरों को पीछे हटना पड़ा। बाद में हमलावरों ने उन्हें गोली मार दी।

    पुलिस प्रमुख स्कॉट वाहल ने बताया कि हमलावर मस्जिद के अंदर घुसने में सफल हो गए थे और उन्होंने खाली कमरों की तलाशी भी ली। इसके बाद पार्किंग क्षेत्र में उन्होंने मंसूर काजिहा और नादिर अवाद को गोली मार दी। अधिकारियों का कहना है कि इन लोगों ने भी हमलावरों का ध्यान अपनी ओर खींचकर अन्य लोगों की जान बचाने में मदद की।

    घटना के बाद जांच एजेंसियों ने दोनों हमलावरों के घरों की तलाशी ली, जहां से कम से कम 30 बंदूकें, भारी मात्रा में गोला-बारूद और एक क्रॉसबो बरामद किया गया। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या हमलावर किसी बड़े हमले की योजना बना रहे थे।

    यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका में मुस्लिम और यहूदी समुदायों के खिलाफ घृणा अपराधों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बाद धार्मिक तनाव और अधिक बढ़ गया है। सैन डिएगो के इस्लामिक सेंटर के इमाम ताहा हस्सान ने कहा कि मस्जिद को पहले भी धमकियां और नफरत भरे संदेश मिलते रहे हैं, लेकिन इस तरह के हिंसक हमले की कभी कल्पना नहीं की गई थी।

    अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां अब इस मामले को घरेलू आतंकवाद और ऑनलाइन कट्टरपंथ से जोड़कर जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया और इंटरनेट प्लेटफॉर्म पर फैल रही नफरत और चरमपंथी प्रचार सामग्री युवाओं को तेजी से प्रभावित कर रही है, जो समाज और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है।